इकाई 1 · कहानी का शास्त्र और हिन्दी कहानी का इतिहास
विषय कहानी का शास्त्र और इतिहास है। तीन सूत्र हैं। पहला — अर्थ, परिभाषा, स्वरूप, तत्त्व और शिल्प। दूसरा — हिन्दी कहानी का उद्भव, विकास और सोपान। तीसरा — प्रमुख कहानीकारों का सामान्य परिचय। आचार्य रामचंद्र शुक्ल गद्य के आविर्भाव को आधुनिक काल का चिह्न कहते हैं। कहानी उसी गद्य का संक्षिप्त कथा-रूप है। नामवर सिंह नई कहानी पर लिखते हैं। मधुरेश विकास के सोपान बाँधते हैं। लक्ष्मीनारायण लाल शिल्प देखते हैं। राजेंद्र यादव समानांतर संसार बाँधते हैं। प्रमुख धारा — सप्रे-गुलेरी का आरंभ, प्रेमचंद का यथार्थ, जैनेन्द्र-अज्ञेय का मन, नई कहानी का व्यक्ति, फिर स्त्री-दलित स्वर। निर्धारित कहानियाँ आगे की इकाइयों में खुलती हैं; यहाँ प्रवृत्ति, तत्त्व और नाम स्थिर रहें।
1 कहानी — अर्थ और परिभाषा
कहानी गद्य की संक्षिप्त कथा है। उसमें एक घटना या एक प्रभाव केंद्र रहता है। उपन्यास समय और समाज फैलाता है। कहानी एक बैठक में पूरी होती है। पश्चिम में एडगर एलन पो एक प्रभाव की माँग करते हैं — कहानी एक चोट छोड़े, कई स्वाद नहीं। हिन्दी में नगेन्द्र उसे जीवन के एक खंड का कलात्मक चित्र कहते हैं। नामवर कसाव और नया अनुभव देखते हैं। शुक्ल गद्य को आधुनिक चिह्न कहते हैं; कहानी उसी चिह्न का छोटा कथा-सिरा है। अंग्रेज़ी short story और बंगला छोटी गल्प से रूप आया। हिन्दी ने उसे अपनी भाषा और अपने प्रश्न दिए।
परिभाषा तीन बिंदुओं पर बैठती है। रूप गद्य है, पद्यात्मक आख्यान नहीं। विस्तार संक्षिप्त है; दीर्घ उपन्यास नहीं। केंद्र एक स्थिति, एक द्वंद्व, एक प्रभाव है। उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं; चित्रण, मूल्यांकन और प्रश्न भी हैं। तिलिस्मी कथा कौतुक प्रधान रही। प्रेमचंद ने उसे समाज का प्रश्न बनाया। जैनेन्द्र ने मन का प्रश्न बनाया। नई कहानी ने व्यक्ति का अनुभव बनाया। बिना परिभाषा के इतिहास नामों की सूची रह जाता है। बिना इतिहास के परिभाषा सूखी रहती है।
| आलोचक | सूत्र |
|---|---|
| पो | एक प्रभाव; एक बैठक |
| शुक्ल | गद्य = आधुनिक चिह्न |
| नगेन्द्र | जीवन-खंड का कलात्मक चित्र |
| नामवर | कसाव; नया अनुभव; कहानी नई कहानी |
| मधुरेश | हिन्दी कहानी का विकास — सोपान |
| लक्ष्मीनारायण लाल | हिन्दी कहानियों का शिल्प |
