इकाई 2 — प्रश्नोत्तर (HIN 4.5 AECCT-21)
इस संग्रह में इकाई 2 के कुल 25 प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। विषय विस्तार — संधि की परिभाषा और भेद, स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि, संधि विच्छेद, समास की परिभाषा और भेद, समास विग्रह, द्विगु, तत्पुरुष, कर्मधारय और बहुव्रीहि समास, उपसर्ग की पहचान और नए शब्द, प्रत्यय के भेद, कृत् और तद्धित प्रत्यय। प्रत्येक उत्तर चरणबद्ध विधि और उदाहरण सहित परीक्षा में लिखने योग्य रूप में तैयार किया गया है।
प्रश्न 1. संधि किसे कहते हैं? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार या परिवर्तन को संधि कहते हैं। संधि में दो ध्वनियाँ मिलकर एक नई ध्वनि बनाती हैं। जैसे विद्या + आलय = विद्यालय, यहाँ आ + आ मिलकर आ हो गया है। संधि के तीन मुख्य भेद हैं — स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। संधि का ज्ञान शब्दों के शुद्ध उच्चारण और वर्तनी के लिए आवश्यक है। संधि विच्छेद में मिले हुए शब्दों को अलग-अलग किया जाता है।
प्रश्न 2. स्वर संधि किसे कहते हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जब दो स्वरों के मेल से कोई विकार उत्पन्न होता है, तो उसे स्वर संधि कहते हैं। स्वर संधि के पाँच भेद हैं — दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि संधि। उदाहरण के लिए विद्या + आलय = विद्यालय (आ + आ = आ, दीर्घ संधि) और नर + इंद्र = नरेंद्र (अ + इ = ए, गुण संधि)। स्वर संधि में पहला स्वर और दूसरा स्वर मिलकर तीसरा स्वर बनाते हैं। यह संधि हिन्दी में सबसे अधिक प्रयुक्त होती है।
प्रश्न 3. व्यंजन संधि की परिभाषा लिखिए और दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जब किसी व्यंजन का मेल स्वर या व्यंजन से होता है और उसमें विकार उत्पन्न होता है, तो उसे व्यंजन संधि कहते हैं। उदाहरण के लिए उत् + ज्वल = उज्ज्वल, यहाँ त् का ज् हो गया है। दूसरा उदाहरण है सम् + कार = संस्कार, यहाँ म् का अनुस्वार हो गया है। व्यंजन संधि में पहला वर्ण व्यंजन होता है और दूसरा स्वर या व्यंजन हो सकता है। इस संधि के नियमों को समझकर संधि विच्छेद सरलता से किया जा सकता है।
प्रश्न 4. विसर्ग संधि किसे कहते हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जब विसर्ग (:) का मेल स्वर या व्यंजन से होता है और उसमें परिवर्तन होता है, तो उसे विसर्ग संधि कहते हैं। उदाहरण के लिए निः + रोग = नीरोग, यहाँ विसर्ग का र् हो गया है। दूसरा उदाहरण है दुः + ख = दुःख, यहाँ विसर्ग ज्यों का त्यों रहता है। विसर्ग संधि में विसर्ग के बाद आने वाले वर्ण के अनुसार विसर्ग का रूप बदलता है। कभी विसर्ग का लोप भी हो जाता है, जैसे निः + चल = निश्चल।
प्रश्न 5. संधि और समास में क्या अंतर है?
उत्तर: संधि में दो वर्णों का मेल होता है और ध्वनि में परिवर्तन होता है, जैसे विद्या + आलय = विद्यालय। समास में दो या अधिक शब्दों का मेल होता है और बीच की विभक्ति का लोप होता है, जैसे राजा का पुत्र = राजपुत्र। संधि वर्णों के स्तर पर होती है, जबकि समास शब्दों के स्तर पर होता है। संधि में अर्थ नहीं बदलता, केवल उच्चारण सुगम होता है। समास में नया अर्थ वाला एक समस्त पद बनता है। दोनों का क्षेत्र अलग-अलग है।
प्रश्न 6. दिग्गज और नीरोग शब्दों का संधि विच्छेद कीजिए।
उत्तर: दिग्गज शब्द का संधि विच्छेद है — दिक् + गज = दिग्गज। यहाँ क् का ग् हो गया है, अतः यह व्यंजन संधि है। चरण इस प्रकार हैं — पहला, शब्द को दो भागों में बाँटें। दूसरा, बीच के वर्णों में हुए परिवर्तन को पहचानें। तीसरा, मूल रूप लिखें। नीरोग शब्द का संधि विच्छेद है — निः + रोग = नीरोग। यहाँ विसर्ग का र् हो गया है, अतः यह विसर्ग संधि है। दोनों शब्द परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
प्रश्न 7. संस्कृति शब्द का संधि विच्छेद कीजिए और संधि का नाम बताइए।
उत्तर: संस्कृति शब्द का संधि विच्छेद है — सम् + कृति = संस्कृति। यहाँ म् का अनुस्वार (ं) हो गया है। चरण इस प्रकार हैं — पहला, शब्द को तोड़कर दो भाग करें — सम् और कृति। दूसरा, बीच में हुए परिवर्तन को देखें — म् बदलकर अनुस्वार बना है। तीसरा, संधि का नाम लिखें — यह व्यंजन संधि है क्योंकि व्यंजन म् का मेल व्यंजन क् से हुआ है। इसी नियम से संस्कार (सम् + कार) शब्द भी बनता है।
प्रश्न 8. निम्न शब्दों का संधि विच्छेद कीजिए — आर्यावर्त, रजनीश, मन्वन्तर, पावक।
उत्तर: आर्यावर्त = आर्य + आवर्त (अ + आ = आ, दीर्घ स्वर संधि)। रजनीश = रजनी + ईश (ई + ई = ई, दीर्घ स्वर संधि)। मन्वन्तर = मनु + अन्तर (उ + अ = व, यण स्वर संधि)। पावक = पौ + अक (औ + अ = आव्, अयादि स्वर संधि)। चरण — पहला, शब्द के बीच से तोड़ें। दूसरा, मिले हुए स्वरों को पहचानें। तीसरा, संधि का नियम लिखें। चारों शब्दों में स्वर संधि है। स्वर संधि के पाँचों भेदों का अभ्यास परीक्षा के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 9. समास किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से जो नया संक्षिप्त शब्द बनता है, उसे समास कहते हैं। समास में बीच की विभक्ति का लोप हो जाता है। जैसे राजा का पुत्र = राजपुत्र, यहाँ 'का' विभक्ति का लोप हुआ है। समास के छह भेद हैं — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि समास। समास से बना शब्द समस्त पद कहलाता है। समास विग्रह में समस्त पद को फिर से विभक्ति सहित लिखा जाता है।
प्रश्न 10. द्विगु समास के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर: जिस समास में पहला पद संख्यावाची होता है और पूरा समस्त पद समूह का बोध कराता है, उसे द्विगु समास कहते हैं। इसके दो उदाहरण हैं — तिराहा (तीन राहों का समूह) और नवरत्न (नौ रत्नों का समूह)। अन्य उदाहरण हैं — चौराहा, पंचवटी, सप्तर्षि। द्विगु समास में पहला पद संख्या बताता है और दूसरा पद संज्ञा होता है। यह समास तत्पुरुष का ही एक भेद माना जाता है। परीक्षा में द्विगु के उदाहरण बार-बार पूछे जाते हैं।
प्रश्न 11. द्विगु समास को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: द्विगु समास वह समास है जिसमें पहला पद संख्यावाची विशेषण होता है और समस्त पद किसी समूह का बोध कराता है। जैसे त्रिभुवन (तीन भुवनों का समूह), चौराहा (चार राहों का समूह), नवरात्र (नौ रात्रियों का समूह)। चरण — पहला, समस्त पद में संख्या वाला पद पहचानें। दूसरा, विग्रह करके समूह का अर्थ निकालें। तीसरा, समास का नाम लिखें। द्विगु समास में दोनों पदों में से दूसरा पद प्रधान होता है।
प्रश्न 12. रसोईघर और माता-पिता शब्दों का समास विग्रह कीजिए।
उत्तर: रसोईघर का समास विग्रह है — रसोई के लिए घर। यहाँ संप्रदान तत्पुरुष समास है क्योंकि 'के लिए' विभक्ति का लोप हुआ है और दूसरा पद प्रधान है। माता-पिता का समास विग्रह है — माता और पिता। यहाँ द्वंद्व समास है क्योंकि दोनों पद प्रधान हैं और बीच में 'और' का लोप हुआ है। चरण — पहला, समस्त पद को विभक्ति सहित खोलें। दूसरा, लुप्त विभक्ति या योजक पहचानें। तीसरा, प्रधान पद के आधार पर समास का नाम लिखें।
प्रश्न 13. समास का नाम बताइए — यथाशक्ति, नीलकमल, तिराहा, घनश्याम।
उत्तर: यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार — अव्ययीभाव समास, क्योंकि पहला पद अव्यय है। नीलकमल = नीला है जो कमल — कर्मधारय समास, क्योंकि विशेषण और विशेष्य का मेल है। तिराहा = तीन राहों का समूह — द्विगु समास, क्योंकि पहला पद संख्यावाची है। घनश्याम = घन के समान श्याम हैं जो (श्रीकृष्ण) — बहुव्रीहि समास, क्योंकि दोनों पद मिलकर तीसरे अर्थ का बोध कराते हैं। पहचान का नियम — विग्रह करके प्रधान पद देखें।
प्रश्न 14. तत्पुरुष समास को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जिस समास में दूसरा पद प्रधान होता है और पहले पद की विभक्ति का लोप होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे राजपुत्र (राजा का पुत्र), गंगातट (गंगा का तट), विद्यालय (विद्या के लिए आलय)। लुप्त विभक्ति के आधार पर इसके भेद होते हैं — कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध और अधिकरण तत्पुरुष। जैसे 'तुलसीदास' में संबंध तत्पुरुष है। तत्पुरुष समास हिन्दी में सबसे अधिक प्रयुक्त समास है।
प्रश्न 15. बहुव्रीहि समास को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जिस समास में दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद का बोध कराते हैं और कोई भी पद प्रधान नहीं होता, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। जैसे दशानन (दस हैं आनन जिसके अर्थात् रावण), चक्रधर (चक्र धारण करने वाला अर्थात् विष्णु), नीलकंठ (नीला है कंठ जिसका अर्थात् शिव)। चरण — पहला, विग्रह में 'जो', 'जिसका' जैसे शब्द आएँ। दूसरा, तीसरे अर्थ की पहचान करें। तीसरा, समास का नाम लिखें। यह समास विशेषण का कार्य करता है।
प्रश्न 16. कर्मधारय समास को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जिस समास में पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं। जैसे नीलकमल (नीला है जो कमल), महात्मा (महान है जो आत्मा), सज्जन (सत् है जो जन)। इसमें दोनों पदों में एक ही विभक्ति होती है और विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है। उपमान और उपमेय का मेल भी कर्मधारय होता है, जैसे चरणकमल (कमल के समान चरण)। यह तत्पुरुष का ही एक भेद माना जाता है।
प्रश्न 17. उपसर्ग किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जो शब्दांश मूल शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं। जैसे 'हार' में 'प्र' उपसर्ग जुड़ने से 'प्रहार' और 'आ' जुड़ने से 'आहार' बनता है। उपसर्ग स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त नहीं होते, ये सदा मूल शब्द के साथ आते हैं। हिन्दी में संस्कृत के 22 उपसर्ग प्रचलित हैं, जैसे प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आ, नि, अधि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि, उप।
प्रश्न 18. विज्ञान और संस्कार शब्दों में उपसर्ग बताइए।
उत्तर: विज्ञान शब्द में 'वि' उपसर्ग और 'ज्ञान' मूल शब्द है — वि + ज्ञान = विज्ञान। यहाँ 'वि' उपसर्ग ने ज्ञान के अर्थ को विशेष बनाया है। संस्कार शब्द में 'सम्' उपसर्ग और 'कार' मूल शब्द है — सम् + कार = संस्कार। चरण — पहला, शब्द को दो भागों में बाँटें। दूसरा, पहले भाग की पहचान करें कि वह 22 उपसर्गों में से कोई है या नहीं। तीसरा, उपसर्ग और मूल शब्द अलग-अलग लिखें। उपसर्ग की पहचान के लिए उपसर्गों की सूची याद रखना आवश्यक है।
प्रश्न 19. 'अ' उपसर्ग से दो शब्द बनाइए।
उत्तर: 'अ' उपसर्ग अभाव या निषेध का बोध कराता है। इससे बनने वाले दो शब्द हैं — अ + ज्ञान = अज्ञान (ज्ञान का अभाव) और अ + सत्य = असत्य (सत्य का निषेध)। अन्य उदाहरण हैं — अ + धर्म = अधर्म, अ + न्याय = अन्याय, अ + हिंसा = अहिंसा। चरण — पहला, उपसर्ग चुनें। दूसरा, उसके साथ उपयुक्त मूल शब्द जोड़ें। तीसरा, नया शब्द लिखकर उसका अर्थ बताएँ। 'अ' उपसर्ग संस्कृत का निषेधवाचक उपसर्ग है।
प्रश्न 20. उपसर्ग और प्रत्यय में अंतर बताइए।
उत्तर: उपसर्ग मूल शब्द के पहले जुड़ता है, जैसे प्र + हार = प्रहार। प्रत्यय मूल शब्द के बाद जुड़ता है, जैसे सुंदर + ता = सुंदरता। उपसर्ग से प्रायः अर्थ में परिवर्तन होता है, जबकि प्रत्यय से शब्द की जाति या रूप बदलता है। उपसर्ग सदा शब्दांश होता है, प्रत्यय भी शब्दांश होता है। दोनों ही स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त नहीं होते। उपसर्गों की संख्या निश्चित (22) है, जबकि प्रत्यय अनेक प्रकार के होते हैं — कृत् और तद्धित। यही मुख्य अंतर है।
प्रश्न 21. मूल शब्द एवं उपसर्ग पृथक् कीजिए — अत्याचार, अवतार, सुपुत्र, अनन्त (कोई दो)।
उत्तर: अत्याचार = अति + आचार। यहाँ 'अति' उपसर्ग है और 'आचार' मूल शब्द है। चरण — पहला, शब्द के प्रारंभिक भाग को उपसर्गों की सूची से मिलाएँ। दूसरा, शेष भाग मूल शब्द होगा। अवतार = अव + तार। यहाँ 'अव' उपसर्ग है और 'तार' मूल शब्द है। सुपुत्र = सु + पुत्र, यहाँ 'सु' उपसर्ग है। अनन्त = अन् + अन्त, यहाँ 'अन्' उपसर्ग है। उपसर्ग की सही पहचान के लिए 22 उपसर्गों की सूची कंठस्थ रखनी चाहिए।
प्रश्न 22. प्रत्यय किसे कहते हैं? इसके भेद लिखिए।
उत्तर: जो शब्दांश मूल शब्द के बाद जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन लाते हैं या नया शब्द बनाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। जैसे सुंदर + ता = सुंदरता, पढ़ + आई = पढ़ाई। प्रत्यय के दो मुख्य भेद हैं — कृत् प्रत्यय और तद्धित प्रत्यय। कृत् प्रत्यय धातु के बाद जुड़ता है और तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के बाद जुड़ता है। प्रत्यय स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त नहीं होते। प्रत्यय से शब्द की जाति बदल जाती है।
प्रश्न 23. कृत् प्रत्यय किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जो प्रत्यय क्रिया की धातु के बाद जुड़कर नया शब्द बनाते हैं, उन्हें कृत् प्रत्यय कहते हैं। कृत् प्रत्यय से बने शब्द कृदंत कहलाते हैं। जैसे पढ़ + आई = पढ़ाई, लिख + आवट = लिखावट, बुझ + अक्कड़ = बुझक्कड़। चरण — पहला, शब्द में धातु पहचानें। दूसरा, धातु के बाद जुड़े शब्दांश को अलग करें। तीसरा, वही कृत् प्रत्यय होगा। कृत् प्रत्यय से संज्ञा और विशेषण दोनों प्रकार के शब्द बनते हैं।
प्रश्न 24. तद्धित प्रत्यय किसे कहते हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण शब्दों के बाद जुड़कर नया शब्द बनाते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहते हैं। तद्धित प्रत्यय से बने शब्द तद्धितांत कहलाते हैं। जैसे सुंदर + ता = सुंदरता, यहाँ 'ता' तद्धित प्रत्यय है। दूसरा उदाहरण है मानव + ता = मानवता और बंधु + त्व = बंधुत्व। चरण — पहला, मूल शब्द की जाति देखें — संज्ञा या विशेषण। दूसरा, बाद में जुड़े शब्दांश को अलग करें। यही तद्धित प्रत्यय होगा।
प्रश्न 25. मूल शब्द एवं प्रत्यय पृथक् कीजिए — बंधुत्व, मानवता, सौंदर्य, बुझक्कड़ (कोई दो)।
उत्तर: बंधुत्व = बंधु + त्व। यहाँ 'बंधु' मूल शब्द (संज्ञा) है और 'त्व' तद्धित प्रत्यय है। चरण — पहला, शब्द के अंतिम भाग को प्रत्ययों की सूची से मिलाएँ। दूसरा, शेष भाग मूल शब्द होगा। सौंदर्य = सुंदर + य। यहाँ 'सुंदर' मूल शब्द (विशेषण) है और 'य' तद्धित प्रत्यय है। बुझक्कड़ = बुझ + अक्कड़, यहाँ 'अक्कड़' कृत् प्रत्यय है। मानवता = मानव + ता, यहाँ 'ता' तद्धित प्रत्यय है।
