अनुमानित प्रश्नपत्र 2 - हिन्दी, पूर्णांक 50, समय 3 घंटे
यह अनुमानित प्रश्नपत्र है, गारंटी नहीं - prediction hai, guarantee nahi
यह प्रश्नपत्र अनुमानित प्रश्नपत्र 1 से पूर्णतः भिन्न है — इसमें वे विषय रखे गए हैं जो पहले प्रश्नपत्र में नहीं आए (घूर्णन तर्क)। संधि के अन्य भेद, समास के शेष प्रकार, भिन्न उपसर्ग-प्रत्यय, नए मुहावरे-लोकोक्तियाँ और अधिसूचना जैसे प्रारूप पर बल दिया गया है। पैटर्न आधिकारिक परीक्षा जैसा ही है: प्रश्न 1 से 30 (प्रत्येक 1 अंक, 50 शब्द), प्रश्न 31 (10 अंक, 100 शब्द, अथवा सहित), प्रश्न 32 (10 अंक, 200 शब्द, अथवा सहित)।
इकाई 1 (प्रश्न 1 से 10) — प्रत्येक प्रश्न 1 अंक
प्रश्न 1. "भाषा अर्जित संपत्ति है" — इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: "भाषा अर्जित संपत्ति है" — इस कथन का अर्थ है कि भाषा जन्म से नहीं मिलती, बल्कि समाज में रहकर सीखी जाती है। बच्चा जन्म के समय कोई भाषा नहीं जानता; वह माता-पिता और समाज के संपर्क में आकर भाषा सीखता है। यदि बच्चे को समाज से दूर रखा जाए, तो वह कोई भाषा नहीं सीख पाएगा। इसीलिए भाषा को अर्जित (सीखी हुई) संपत्ति कहा गया है, न कि जन्मजात।
प्रश्न 2. हिन्दी भाषा के विविध रूपों में "मानक हिन्दी" का परिचय दीजिए।
उत्तर: मानक हिन्दी हिन्दी का वह परिनिष्ठित रूप है जो शिक्षा, प्रशासन और साहित्य में प्रयुक्त होता है। इसका व्याकरण निश्चित है और यह देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। खड़ी बोली के आधार पर विकसित मानक हिन्दी भारत की राजभाषा है। समाचार, पाठ्यपुस्तकें और सरकारी कार्य इसी में होते हैं। मानक हिन्दी से देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग परस्पर जुड़ते हैं।
प्रश्न 3. प्रेरणार्थक क्रिया का उदाहरण सहित परिचय दीजिए।
उत्तर: जिस क्रिया से यह बोध हो कि कर्ता स्वयं कार्य न करके दूसरे से करवाता है, उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं। जैसे — "माँ बच्चे को दूध पिलाती है" में "पिलाती है" प्रेरणार्थक क्रिया है, क्योंकि माँ स्वयं नहीं पीती बल्कि बच्चे को पिलाती है। प्रेरणार्थक क्रिया प्रेरणा देने के भाव को व्यक्त करती है और हिन्दी व्याकरण का महत्वपूर्ण अंग है।
प्रश्न 4. संबंधबोधक अव्यय के दो उदाहरण वाक्य सहित लिखिए।
उत्तर: संबंधबोधक अव्यय संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य शब्दों से संबंध बताते हैं। दो उदाहरण वाक्य सहित: 1. "राम के बिना श्याम नहीं जाएगा" — "के बिना" संबंधबोधक है। 2. "मेज पर किताब है" — "पर" संबंधबोधक है। संबंधबोधक के बाद प्रायः "के" विभक्ति लगती है और ये वाक्य में संबंध स्पष्ट करते हैं।
प्रश्न 5. निश्चयवाचक सर्वनाम के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर: निश्चयवाचक सर्वनाम के दो उदाहरण हैं — 1. "यह" — "यह मेरी किताब है।" 2. "वह" — "वह अच्छा लड़का है।" निश्चयवाचक सर्वनाम किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करते हैं। "यह" निकट की वस्तु के लिए और "वह" दूर की वस्तु के लिए प्रयुक्त होता है।
प्रश्न 6. परिमाणवाचक विशेषण का एक उदाहरण वाक्य सहित लिखिए।
उत्तर: जो विशेषण संज्ञा की मात्रा या परिमाण बताते हैं, उन्हें परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। उदाहरण वाक्य सहित — "मुझे थोड़ा पानी चाहिए" में "थोड़ा" परिमाणवाचक विशेषण है, क्योंकि यह "पानी" की मात्रा बता रहा है। परिमाणवाचक विशेषण के अन्य उदाहरण हैं — बहुत, कम, सारा, इतना। इससे संज्ञा की निश्चित या अनिश्चित मात्रा का बोध होता है।
प्रश्न 7. समुच्चयबोधक अव्यय की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: जो अव्यय दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे — "राम और श्याम बाजार गए" में "और" समुच्चयबोधक है, जो "राम" और "श्याम" को जोड़ रहा है। समुच्चयबोधक के अन्य उदाहरण हैं — परंतु, क्योंकि, इसलिए। इन्हें योजक शब्द भी कहते हैं।
प्रश्न 8. देशज शब्द के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर: देशज शब्द स्थानीय बोलियों से हिन्दी में आए हैं। दो उदाहरण: 1. "लोटा" — पानी रखने का बर्तन। 2. "खटिया" — सोने की चारपाई। देशज शब्दों का मूल संस्कृत में नहीं मिलता; ये जन-बोली की देन हैं। हिन्दी के शब्द भंडार में देशज शब्दों की संख्या पर्याप्त है और ये बोलचाल को सजीव बनाते हैं।
प्रश्न 9. लिपि किसे कहते हैं? हिन्दी किस लिपि में लिखी जाती है?
उत्तर: ध्वनियों को लिखने के लिए निश्चित किए गए चिह्नों की व्यवस्था को लिपि कहते हैं। हिन्दी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। देवनागरी बाईं से दाईं ओर लिखी जाती है और यह वैज्ञानिक लिपि मानी जाती है। संस्कृत, मराठी और नेपाली भाषाएँ भी इसी लिपि में लिखी जाती हैं।
प्रश्न 10. हिन्दी की किन्हीं दो बोलियों के नाम लिखिए।
उत्तर: हिन्दी की दो प्रमुख बोलियों के नाम हैं — 1. "अवधी" — उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में बोली जाती है; तुलसीदास का "रामचरितमानस" इसी बोली में रचा गया। 2. "ब्रजभाषा" — मथुरा-आगरा क्षेत्र की बोली है; सूरदास ने इसी में काव्य रचा। हिन्दी की 5 उपभाषाएँ और अनेक बोलियाँ हैं।
इकाई 2 (प्रश्न 11 से 20) — प्रत्येक प्रश्न 1 अंक
प्रश्न 11. "महौषधि" का संधि-विच्छेद कीजिए और संधि का नाम लिखिए।
उत्तर: "महौषधि" का संधि-विच्छेद है — महा + औषधि। यहाँ "आ" और "औ" के मेल से "औ" बना है, अतः इसमें वृद्धि संधि है। "महौषधि" का अर्थ है महान औषधि। वृद्धि संधि में अ/आ के साथ ए/ऐ मिलने पर "ऐ" और ओ/औ मिलने पर "औ" बनता है। वृद्धि संधि स्वर संधि का ही एक भेद है और परीक्षा में इससे प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं।
प्रश्न 12. गुण संधि के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर: गुण संधि के दो उदाहरण: 1. "सूर्योदय" (सूर्य + उदय) — "अ" और "उ" मिलकर "ओ" बना। 2. "नरेंद्र" (नर + इंद्र) — "अ" और "इ" मिलकर "ए" बना। गुण संधि में अ/आ के साथ इ/ई मिलने पर "ए", उ/ऊ मिलने पर "ओ" और ऋ मिलने पर "अर्" बनता है।
प्रश्न 13. द्वंद्व समास की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और उनके बीच "और" का भाव होता है, उसे द्वंद्व समास कहते हैं। उदाहरण — "माता-पिता" (माता और पिता): यहाँ दोनों पद प्रधान हैं। द्वंद्व समास में विग्रह करते समय दोनों पदों के बीच "और" लगाया जाता है। अन्य उदाहरण हैं — भाई-बहन, रात-दिन।
प्रश्न 14. "सप्ताह" में कौन-सा समास है? समास-विग्रह कीजिए।
उत्तर: "सप्ताह" में द्विगु समास है। इसका समास-विग्रह है — सप्त अह्नां समाहारः, अर्थात् सात दिनों का समूह। यहाँ पूर्वपद "सप्त" (सात) संख्यावाचक है, अतः यह द्विगु समास है। द्विगु समास में समस्त पद समूह का बोध कराता है और पूर्वपद की संख्या ही उसकी पहचान है। "सप्ताह" सात दिनों के समूह को दर्शाता है।
प्रश्न 15. "वि" उपसर्ग से दो शब्द बनाइए।
उत्तर: "वि" उपसर्ग से बने दो शब्द: 1. "विज्ञान" (वि + ज्ञान) — विशेष ज्ञान। 2. "विनाश" (वि + नाश) — विशेष नाश। "वि" उपसर्ग विशेषता, भिन्नता या अभाव का भाव प्रकट करता है। उपसर्ग शब्द के आरंभ में लगकर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाते हैं और हिन्दी में इनका प्रयोग बहुत होता है।
प्रश्न 16. "आई" प्रत्यय से दो शब्द बनाइए।
उत्तर: "आई" प्रत्यय से बने दो शब्द: 1. "पढ़ाई" (पढ़ + आई) — पढ़ने की क्रिया का भाव। 2. "लिखाई" (लिख + आई) — लिखने का ढंग। "आई" कृत् प्रत्यय है, क्योंकि यह क्रिया धातु के अंत में लगकर भाववाचक संज्ञा बनाता है। इससे बने शब्द प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं।
प्रश्न 17. "नरेंद्र" का संधि-विच्छेद कीजिए और संधि का नाम लिखिए।
उत्तर: "नरेंद्र" का संधि-विच्छेद है — नर + इंद्र। यहाँ "अ" और "इ" के मेल से "ए" बना है, अतः इसमें गुण संधि है। "नरेंद्र" का अर्थ है नरों का इंद्र अर्थात् राजा। गुण संधि स्वर संधि का एक प्रमुख भेद है और इसमें अ/आ के साथ इ, उ, ऋ के मेल से क्रमशः ए, ओ, अर् बनता है।
प्रश्न 18. अव्ययीभाव समास का एक उदाहरण समास-विग्रह सहित लिखिए।
उत्तर: अव्ययीभाव समास का एक उदाहरण — "यथाशक्ति"। इसका समास-विग्रह है — शक्ति के अनुसार। इसमें पूर्वपद "यथा" अव्यय है और वही प्रधान है, अतः यह अव्ययीभाव समास है। अव्ययीभाव समास में पूर्वपद अव्यय होता है और समस्त पद अव्यय की भाँति प्रयुक्त होता है। अन्य उदाहरण हैं — "प्रतिदिन" (दिन-दिन), "आजीवन" (जीवन भर)।
प्रश्न 19. "प्र" उपसर्ग से दो शब्द बनाइए।
उत्तर: "प्र" उपसर्ग से बने दो शब्द: 1. "प्रकाश" (प्र + काश) — विशेष चमक। 2. "प्रगति" (प्र + गति) — आगे बढ़ना। "प्र" उपसर्ग अधिकता, आगे बढ़ने या विशेषता का भाव प्रकट करता है। उपसर्गों के ज्ञान से शब्दों का अर्थ समझना सरल होता है और शब्द भंडार भी बढ़ता है।
प्रश्न 20. "चक्रधर" का समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम बताइए।
उत्तर: "चक्रधर" का समास-विग्रह है — चक्र है धर जिसमें, अर्थात् भगवान विष्णु। यहाँ "चक्र" और "धर" दोनों पदों से भिन्न "विष्णु" अर्थ प्रधान है, अतः यह बहुव्रीहि समास है। बहुव्रीहि समास में दोनों पदों से भिन्न कोई तीसरा अर्थ प्रधान होता है और समस्त पद संज्ञा की भाँति प्रयुक्त होता है।
इकाई 3 (प्रश्न 21 से 30) — प्रत्येक प्रश्न 1 अंक
प्रश्न 21. "आग बबूला होना" मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर: "आग बबूला होना" मुहावरे का अर्थ है — अत्यंत क्रोधित होना। वाक्य प्रयोग: "नौकर की लापरवाही देखकर मालिक आग बबूला हो गया।" यह मुहावरा तीव्र क्रोध की अवस्था को व्यक्त करता है। मुहावरों के प्रयोग से भाषा में सजीवता और प्रभाव आता है, इसलिए उत्तर लिखते समय इनका प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
प्रश्न 22. "अधजल गगरी छलकत जाए" लोकोक्ति का अर्थ लिखिए।
उत्तर: "अधजल गगरी छलकत जाए" लोकोक्ति का अर्थ है — अल्पज्ञानी व्यक्ति ही अधिक दिखावा करता है। जैसे आधी भरी गगरी छलकती है, वैसे ही थोड़ा ज्ञान रखने वाला व्यक्ति अपनी विद्वता का प्रदर्शन करता है। यह लोकोक्ति घमंड और दिखावे पर कटाक्ष करती है और विनम्रता की शिक्षा देती है।
प्रश्न 23. "अमृत" के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर: "अमृत" के दो पर्यायवाची शब्द हैं — 1. "सुधा", 2. "पीयूष"। "अमृत" का अर्थ है वह पेय जो अमर बना दे। इसके अन्य पर्यायवाची हैं — अमिय, सोम। पर्यायवाची शब्दों के प्रयोग से भाषा समृद्ध होती है और पुनरुक्ति से बचा जा सकता है। इन्हें शुद्ध वर्तनी में लिखना चाहिए।
प्रश्न 24. "जय" का विलोम शब्द लिखिए।
उत्तर: "जय" का विलोम शब्द "पराजय" है। "जय" का अर्थ है जीत, जबकि "पराजय" का अर्थ है हार। यह विलोम युग्म युद्ध और प्रतियोगिता के संदर्भ में प्रयुक्त होता है। अन्य विलोम युग्म हैं — जीत-हार, सफलता-असफलता, उत्कर्ष-अपकर्ष। विलोम शब्द परीक्षा में प्रायः पूछे जाते हैं, अतः प्रमुख विलोम युग्मों को कंठस्थ करना चाहिए।
प्रश्न 25. निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध कीजिए: "राम और श्याम बाजार गया।"
उत्तर: शुद्ध वाक्य है — "राम और श्याम बाजार गए।" यहाँ कर्ता "राम और श्याम" बहुवचन है, अतः क्रिया "गया" के स्थान पर बहुवचन रूप "गए" का प्रयोग होगा। वाक्य शुद्धि में कर्ता और क्रिया के वचन की एकरूपता आवश्यक है। यदि कर्ता एकवचन होता तो क्रिया भी एकवचन होती।
प्रश्न 26. "दिन" और "दीन" में अर्थ भेद स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: "दिन" और "दीन" समश्रुत भिन्नार्थक शब्द हैं। "दिन" का अर्थ है दिवस, जैसे — "आज अच्छा दिन है।" "दीन" का अर्थ है गरीब या दयनीय, जैसे — "हमें दीन-दुखियों की सहायता करनी चाहिए।" ऐसे शब्दों का अंतर वाक्य में प्रयोग करके ही स्पष्ट किया जा सकता है, अतः परीक्षा में इन्हें वाक्य सहित लिखना चाहिए।
प्रश्न 27. "एक पंथ दो काज" लोकोक्ति का अर्थ लिखिए।
उत्तर: "एक पंथ दो काज" लोकोक्ति का अर्थ है — एक ही कार्य से दो लाभ होना। यह तब कही जाती है जब एक प्रयास से दो उद्देश्य सिद्ध हों। जैसे — बाजार जाते समय मित्र से मिल आना "एक पंथ दो काज" है। यह लोकोक्ति कार्य-कुशलता की प्रशंसा करती है।
प्रश्न 28. अशुद्ध शब्द को शुद्ध कीजिए: "आर्शीवाद"
उत्तर: शुद्ध शब्द है — "आशीर्वाद"। "आर्शीवाद" में वर्णों का क्रम अशुद्ध है; शुद्ध रूप "आशीर्वाद" है। संयुक्ताक्षरों में प्रायः त्रुटि होती है। शुद्ध वर्तनी हेतु शब्दों का ध्यानपूर्वक अध्ययन और निरंतर अभ्यास आवश्यक है। "आशीर्वाद" जैसे शब्दों को बार-बार लिखकर अभ्यास करने से परीक्षा में त्रुटि नहीं होती और पूर्ण अंक मिलते हैं।
प्रश्न 29. "चंद्रमा" के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर: "चंद्रमा" के दो पर्यायवाची शब्द हैं — 1. "शशि", 2. "राकेश"। "चंद्रमा" के अन्य पर्यायवाची हैं — चाँद, मयंक, सोम। पर्यायवाची शब्द कविता और निबंध में भाषा को सुंदर और समृद्ध बनाते हैं। परीक्षा में इन्हें शुद्ध वर्तनी में लिखना आवश्यक है, क्योंकि अशुद्ध वर्तनी पर अंक कट जाते हैं।
प्रश्न 30. "मित्र" का विलोम शब्द लिखिए।
उत्तर: "मित्र" का विलोम शब्द "शत्रु" है। "मित्र" का अर्थ है दोस्त, जबकि "शत्रु" का अर्थ है दुश्मन। अन्य विलोम युग्म हैं — मित्रता-शत्रुता, प्रेम-घृणा, सहयोग-असहयोग। विलोम शब्दों से विरोधी भावों की स्पष्ट अभिव्यक्ति होती है और ये परीक्षा में प्रायः पूछे जाते हैं, अतः इन्हें याद रखना लाभकारी है।
इकाई 4 (प्रश्न 31) — 10 अंक (अथवा सहित)
प्रश्न 31. (अ) विकास अधिकारी, पंचायत समिति नोखा की ओर से जिला कलेक्टर को मनरेगा योजना की प्रगति रिपोर्ट भेजते हुए शासकीय पत्र लिखिए। अथवा (ब) ग्राम खारा में नवीन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की स्थापना संबंधी अधिसूचना का प्रारूप तैयार कीजिए। (शब्द सीमा 100 शब्द)
उत्तर (अ):
पत्र संख्या: प. 4(2) ग्रामीण विकास/2026
प्रेषक: श्री गोपाल सिंह, विकास अधिकारी, पंचायत समिति नोखा (बीकानेर)
दिनांक: 10 अक्टूबर, 2026
सेवा में: श्रीमान जिला कलेक्टर महोदय, बीकानेर
विषय: मनरेगा योजना की प्रगति रिपोर्ट बाबत।
महोदय,
उपर्युक्त विषयांतर्गत निवेदन है कि पंचायत समिति नोखा में मनरेगा योजना के अंतर्गत इस वित्तीय वर्ष में 25 कार्य स्वीकृत हुए, जिनमें से 18 कार्य पूर्ण हो चुके हैं और 7 प्रगतिरत हैं। अब तक 12,000 मानव दिवस सृजित हुए हैं और श्रमिकों को 45 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। विस्तृत प्रगति रिपोर्ट इस पत्र के साथ संलग्न है। अतः सूचनार्थ सादर प्रेषित है।
भवदीय,
(हस्ताक्षर)
गोपाल सिंह
विकास अधिकारी, पंचायत समिति नोखा
संलग्न: उपर्युक्तानुसार
उत्तर (ब):
राजस्थान सरकार, शिक्षा विभाग
अधिसूचना
जयपुर, दिनांक: 10 अक्टूबर, 2026
संख्या: प. 6(8) शिक्षा/2026
राज्य सरकार एतद्द्वारा जिला बीकानेर की तहसील नोखा के ग्राम खारा में नवीन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की स्थापना की स्वीकृति प्रदान करती है। यह विद्यालय शैक्षणिक सत्र 2027-28 से कार्य करना आरंभ करेगा। विद्यालय में प्रधानाचार्य सहित 12 शिक्षकों के पद सृजित किए जाते हैं। संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें।
राज्यपाल के आदेश से,
(हस्ताक्षर)
शासन सचिव,
शिक्षा विभाग, राजस्थान
इकाई 5 (प्रश्न 32) — 10 अंक (अथवा सहित)
प्रश्न 32. (अ) "नारी शिक्षा" विषय पर निबंध लिखिए। अथवा (ब) निम्नलिखित सूक्ति का पल्लवन कीजिए: "बूँद बूँद से घट भरता है।" (शब्द सीमा 200 शब्द)
उत्तर (अ):
प्रस्तावना: नारी शिक्षा का अर्थ है महिलाओं को शिक्षा का अवसर प्रदान करना। कहा गया है कि एक पुरुष को शिक्षित करने से एक व्यक्ति शिक्षित होता है, परंतु एक नारी को शिक्षित करने से पूरा परिवार शिक्षित होता है। नारी शिक्षा समाज के विकास की आधारशिला है।
महत्व: शिक्षित नारी घर का प्रबंधन कुशलता से करती है, बच्चों को अच्छे संस्कार देती है और आवश्यकता पड़ने पर रोजगार भी कर सकती है। शिक्षित माता ही बच्चों की प्रथम और सर्वश्रेष्ठ गुरु होती है। शिक्षित नारी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहती है।
समाज पर प्रभाव: जिस समाज में नारी शिक्षित होती है, वहाँ अंधविश्वास और कुरीतियाँ कम होती हैं। नारी शिक्षा से बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगती है और समाज प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता है।
वर्तमान स्थिति: सरकार ने "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" जैसी योजनाएँ चलाई हैं, फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक बालिकाएँ विद्यालय से वंचित हैं। इस दिशा में और प्रयास आवश्यक हैं।
उपसंहार: नारी शिक्षा के बिना समाज का पूर्ण विकास असंभव है। अतः प्रत्येक बालिका को शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि शिक्षित नारी ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती है।
उत्तर (ब): "बूँद बूँद से घट भरता है" — इस सूक्ति का अर्थ है कि छोटी-छोटी बचतों और प्रयासों से बड़ा कार्य सिद्ध होता है, ठीक वैसे ही जैसे बूँद-बूँद पानी से घड़ा भर जाता है। जीवन में बड़ी सफलता एक दिन में नहीं मिलती; वह छोटे-छोटे निरंतर प्रयासों का परिणाम होती है। विद्यार्थी रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़कर परीक्षा में सफल होता है, और व्यापारी छोटी-छोटी बचत से बड़ा धन एकत्र करता है। किसान की फसल भी दिन-प्रतिदिन की देखभाल से पकती है। जो व्यक्ति छोटे कार्यों की उपेक्षा करता है और केवल बड़े अवसर की प्रतीक्षा करता है, वह लक्ष्य से वंचित रह जाता है। इतिहास के महापुरुषों ने भी छोटे-छोटे प्रयासों से ही महान कार्य किए। यह सूक्ति हमें धैर्य और निरंतरता की शिक्षा देती है। अतः हमें कभी छोटे प्रयासों को तुच्छ नहीं समझना चाहिए, बल्कि निरंतर छोटे-छोटे प्रयास करते रहना चाहिए, क्योंकि बूँद-बूँद से ही घट भरता है और छोटे प्रयासों से ही महान कार्य सिद्ध होते हैं।
