इकाई 1 — प्रश्नोत्तर (HIN 4.5 AECCT-21)
इस संग्रह में इकाई 1 के कुल 25 प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। विषय विस्तार — भाषा की परिभाषा, प्रकृति एवं विविध रूप, भाषा और बोली में अंतर, राजभाषा और राष्ट्रभाषा, स्वर और व्यंजन, हिन्दी वर्ण व्यवस्था, शब्द भंडार (तत्सम, तद्भव, यौगिक), क्रिया और उसके भेद, कारक और विभक्ति, सर्वनाम, विशेषण तथा अव्यय। प्रत्येक उत्तर 50 से 80 शब्दों में उदाहरण सहित परीक्षा में लिखने योग्य रूप में तैयार किया गया है।
प्रश्न 1. भाषा की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: भाषा वह साधन है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों, भावों और अनुभवों को दूसरों तक पहुँचाता है। आचार्य कामताप्रसाद गुरु के अनुसार भाषा ध्वनि संकेतों की वह व्यवस्था है जिसके द्वारा मनुष्य परस्पर विचारों का आदान-प्रदान करता है। भाषा की मुख्य विशेषताएँ हैं — यह अर्जित होती है, सामाजिक होती है, परिवर्तनशील होती है और इसका अपना व्याकरण होता है। भाषा मानव सभ्यता के विकास का आधार है।
प्रश्न 2. भाषा के विविध रूप कौन-कौनसे हैं? नाम लिखिए।
उत्तर: भाषा के मुख्यतः तीन रूप माने गए हैं — मौखिक भाषा, लिखित भाषा और सांकेतिक भाषा। मौखिक भाषा में वाणी द्वारा विचार प्रकट किए जाते हैं, जैसे बातचीत। लिखित भाषा में लिपि के माध्यम से भाव लिखे जाते हैं, जैसे पुस्तकें और पत्र। सांकेतिक भाषा में संकेतों द्वारा अर्थ समझाया जाता है, जैसे यातायात के संकेत और मूक-बधिरों की संकेत भाषा। प्रयोग के आधार पर भाषा के दो अन्य रूप हैं — मानक भाषा और बोली।
प्रश्न 3. भाषा और बोली में दो अंतर लिखिए।
उत्तर: भाषा और बोली में पहला अंतर यह है कि भाषा का क्षेत्र व्यापक होता है और बोली सीमित क्षेत्र में बोली जाती है। दूसरा अंतर यह है कि भाषा का मानक व्याकरण और लिपि होती है, जबकि बोली का कोई निश्चित व्याकरण नहीं होता। तीसरा अंतर यह है कि भाषा में साहित्य रचा जाता है, पर बोली में साहित्य सीमित होता है। उदाहरण के लिए हिन्दी भाषा है और अवधी, ब्रजभाषा उसकी बोलियाँ हैं।
प्रश्न 4. राजभाषा और राष्ट्रभाषा में अंतर लिखिए।
उत्तर: राजभाषा वह भाषा होती है जिसमें सरकार का कामकाज चलता है, जैसे भारत की राजभाषा हिन्दी है। राष्ट्रभाषा वह भाषा होती है जिसे देश के अधिकांश लोग बोलते और समझते हैं तथा जो राष्ट्रीय एकता का प्रतीक होती है। राजभाषा का दर्जा संविधान द्वारा मिलता है, जबकि राष्ट्रभाषा का दर्जा जनता की स्वीकृति से मिलता है। हिन्दी भारत की राजभाषा है और व्यवहार में राष्ट्रभाषा भी मानी जाती है।
प्रश्न 5. स्वर और व्यंजन में अंतर लिखिए।
उत्तर: स्वर वे वर्ण हैं जिनके उच्चारण में वायु मुख से बिना किसी रुकावट के निकलती है, जैसे अ, आ, इ, ई। व्यंजन वे वर्ण हैं जिनके उच्चारण में वायु को मुख के किसी भाग से रुकावट मिलती है, जैसे क, ख, ग। स्वर स्वतंत्र रूप से बोले जा सकते हैं, जबकि व्यंजन स्वर की सहायता से बोले जाते हैं। हिन्दी में 11 स्वर और 33 व्यंजन माने गए हैं। अनुस्वार और विसर्ग अयोगवाह कहलाते हैं।
प्रश्न 6. भाषा की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: भाषा की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं — पहला, भाषा अर्जित की जाती है, यह जन्मजात नहीं होती। दूसरा, भाषा सामाजिक वस्तु है, समाज के बिना इसका विकास संभव नहीं। तीसरा, भाषा परिवर्तनशील है, समय के साथ इसमें नए शब्द जुड़ते हैं। चौथा, भाषा की अपनी ध्वनि व्यवस्था और व्याकरण होता है। पाँचवाँ, भाषा विचारों के आदान-प्रदान का सबसे सशक्त माध्यम है। इन्हीं विशेषताओं के कारण भाषा मानव सभ्यता की आधारशिला है।
प्रश्न 7. बोली किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: किसी भाषा का वह क्षेत्रीय रूप जो सीमित क्षेत्र के लोगों द्वारा दैनिक बोलचाल में प्रयुक्त होता है, बोली कहलाता है। बोली का अपना स्वतंत्र व्याकरण और लिपि नहीं होती। जैसे हिन्दी भाषा की अनेक बोलियाँ हैं — अवधी, ब्रजभाषा, भोजपुरी, मारवाड़ी और बुंदेली। बोली प्रायः अशिक्षित और ग्रामीण समाज में अधिक प्रचलित होती है। जब कोई बोली व्यापक रूप से स्वीकृत होकर मानक रूप ले लेती है, तो वह भाषा कहलाने लगती है।
प्रश्न 8. लिपि किसे कहते हैं? देवनागरी लिपि की विशेषता बताइए।
उत्तर: भाषा की ध्वनियों को लिखकर प्रकट करने के लिए जिन चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें लिपि कहते हैं। हिन्दी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। देवनागरी लिपि की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह वैज्ञानिक लिपि है — इसमें जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा जाता है। इसके वर्णों का क्रम ध्वनि विज्ञान के आधार पर निश्चित है। स्वर पहले और व्यंजन बाद में रखे गए हैं। यही कारण है कि देवनागरी श्रेष्ठ लिपि मानी जाती है।
प्रश्न 9. स्वर किसे कहते हैं? हिन्दी वर्णमाला में कितने स्वर हैं?
उत्तर: जिन वर्णों के उच्चारण में वायु मुख से बिना किसी रुकावट के बाहर निकलती है, उन्हें स्वर कहते हैं। स्वर स्वतंत्र रूप से बोले जा सकते हैं, इन्हें किसी अन्य वर्ण की सहायता नहीं चाहिए। हिन्दी वर्णमाला में कुल 11 स्वर हैं — अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ। इनमें अ, इ, उ ह्रस्व स्वर और आ, ई, ऊ दीर्घ स्वर कहलाते हैं। ए, ऐ, ओ, औ संयुक्त स्वर माने गए हैं।
प्रश्न 10. हिन्दी वर्णमाला में कुल कितने स्वर और व्यंजन हैं? व्यंजनों के वर्ग बताइए।
उत्तर: हिन्दी वर्णमाला में कुल 11 स्वर और 33 व्यंजन हैं। व्यंजनों को उच्चारण स्थान के आधार पर पाँच वर्गों में बाँटा गया है — क वर्ग (क, ख, ग, घ, ङ), च वर्ग (च, छ, ज, झ, ञ), ट वर्ग (ट, ठ, ड, ढ, ण), त वर्ग (त, थ, द, ध, न) और प वर्ग (प, फ, ब, भ, म)। इनके अतिरिक्त य, र, ल, व अंतस्थ और श, ष, स, ह ऊष्म व्यंजन कहलाते हैं। अनुस्वार और विसर्ग अयोगवाह हैं।
प्रश्न 11. अनुस्वार किसे कहते हैं? अनुस्वार युक्त दो शब्द लिखिए।
उत्तर: जिस वर्ण के ऊपर बिंदु (ं) लगाया जाता है, उसे अनुस्वार कहते हैं। अनुस्वार का उच्चारण नाक से होता है और यह स्वर के बाद आता है। अनुस्वार युक्त शब्दों के उदाहरण हैं — अंक, अंग, पंख, चंदन, संगीत। जैसे 'चंदन' शब्द में च के बाद अनुस्वार का प्रयोग हुआ है। अनुस्वार के स्थान पर कभी-कभी पंचम वर्ण भी लिखा जाता है, जैसे गंगा को गङ्गा भी लिखा जा सकता है। अनुस्वार हिन्दी वर्तनी का महत्वपूर्ण अंग है।
प्रश्न 12. तत्सम शब्द किसे कहते हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जो शब्द संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के ज्यों के त्यों हिन्दी में आ गए हैं, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। तत्सम का अर्थ है — तत् (उसके) सम (समान), अर्थात् संस्कृत के समान। उदाहरण के लिए अग्नि, जल, पुष्प, माता, विद्या, सूर्य तत्सम शब्द हैं। इन शब्दों का रूप संस्कृत और हिन्दी दोनों में एक जैसा रहता है। तत्सम शब्द प्रायः साहित्यिक और औपचारिक भाषा में प्रयुक्त होते हैं। परीक्षा में तत्सम शब्दों की पहचान महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 13. तद्भव शब्द किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जो शब्द संस्कृत से निकलकर प्राकृत और अपभ्रंश से होते हुए बदलते-बदलते हिन्दी में आए हैं, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं। तद्भव का अर्थ है — उससे उत्पन्न। उदाहरण के लिए अग्नि का आग, हस्त का हाथ, दुग्ध का दूध, मुख का मुँह, रात्रि का रात। तद्भव शब्द दैनिक बोलचाल की भाषा में सबसे अधिक प्रयुक्त होते हैं और हिन्दी के शब्द भंडार का बड़ा भाग इन्हीं से बना है।
प्रश्न 14. यौगिक शब्द किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर: जो शब्द दो या दो से अधिक शब्दों अथवा शब्दांशों के मेल से बनते हैं, उन्हें यौगिक शब्द कहते हैं। जैसे विद्या + आलय = विद्यालय, राज + पुत्र = राजपुत्र, हिम + आलय = हिमालय। यौगिक शब्दों के खंड करने पर प्रत्येक खंड का अपना स्वतंत्र अर्थ निकलता है। यौगिक शब्दों के दो भेद हैं — योगरूढ़, जैसे पंकज (पंक में जन्म लेने वाला अर्थात् कमल) और सामान्य यौगिक। समास से बने अधिकांश शब्द यौगिक होते हैं।
प्रश्न 15. रूढ़ और योगरूढ़ शब्दों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जिन शब्दों के खंड करने पर कोई अर्थ नहीं निकलता और जो किसी एक ही अर्थ में रूढ़ हो गए हैं, उन्हें रूढ़ शब्द कहते हैं, जैसे नाक, कान, घर, पेड़। जिन शब्दों के खंडों का अर्थ अलग-अलग होता है, पर पूरा शब्द किसी विशेष अर्थ में रूढ़ हो गया हो, उन्हें योगरूढ़ शब्द कहते हैं, जैसे पंकज (पंक + ज = कीचड़ में जन्मा, पर अर्थ कमल) और दशानन (दस आनन वाला अर्थात् रावण)। यही दोनों का मुख्य अंतर है।
प्रश्न 16. क्रिया किसे कहते हैं? इसके भेद लिखिए।
उत्तर: जिस शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं, जैसे पढ़ना, लिखना, खेलना, दौड़ना। क्रिया वाक्य का प्राण होती है, बिना क्रिया के वाक्य पूरा नहीं होता। क्रिया के मुख्य भेद दो हैं — सकर्मक क्रिया और अकर्मक क्रिया। कर्म के आधार पर यह भेद किया जाता है। रचना के आधार पर क्रिया के भेद हैं — सामान्य, संयुक्त, प्रेरणार्थक और नामधातु क्रिया। काल के आधार पर क्रिया भूत, वर्तमान और भविष्यत् होती है।
प्रश्न 17. कर्म के आधार पर क्रिया के कितने भेद हैं? नाम लिखिए।
उत्तर: कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं — सकर्मक क्रिया और अकर्मक क्रिया। जिस क्रिया का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं, जैसे मोहन पुस्तक पढ़ता है। जिस क्रिया का फल कर्ता पर ही पड़ता है और जिसे कर्म की आवश्यकता नहीं होती, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं, जैसे बच्चा रोता है। सकर्मक क्रिया के साथ 'क्या' या 'किसको' प्रश्न करने पर उत्तर मिलता है।
प्रश्न 18. सकर्मक और अकर्मक क्रिया में अंतर बताइए।
उत्तर: सकर्मक क्रिया में कर्म अवश्य होता है और क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है, जैसे सीता गीत गाती है। अकर्मक क्रिया में कर्म नहीं होता और क्रिया का फल कर्ता पर ही पड़ता है, जैसे घोड़ा दौड़ता है। सकर्मक क्रिया वाले वाक्य में 'क्या' या 'किसको' लगाने से उत्तर मिलता है, अकर्मक में नहीं मिलता। कुछ क्रियाएँ दोनों रूपों में प्रयुक्त हो सकती हैं, जैसे वह खाना खाता है (सकर्मक) और वह खाता है (अकर्मक)। यही मुख्य अंतर है।
प्रश्न 19. कारक किसे कहते हैं? कारक के भेद कितने हैं?
उत्तर: संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य शब्दों, विशेषकर क्रिया से जो संबंध होता है, उसे कारक कहते हैं। इस संबंध को प्रकट करने वाले चिह्नों को विभक्ति कहते हैं। हिन्दी में कारक के आठ भेद माने गए हैं — कर्ता (ने), कर्म (को), करण (से), संप्रदान (को, के लिए), अपादान (से), संबंध (का, की, के), अधिकरण (में, पर) और संबोधन (हे, अरे)। कारक की सही पहचान वाक्य शुद्धि के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 20. विभक्ति किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के आगे या पीछे लगकर जो चिह्न उनके कारक संबंध को प्रकट करते हैं, उन्हें विभक्ति कहते हैं। जैसे राम ने पुस्तक पढ़ी — यहाँ 'ने' विभक्ति है जो कर्ता कारक प्रकट करती है। विभक्तियाँ दो प्रकार की होती हैं — विभक्ति प्रत्यय और परसर्ग। हिन्दी में परसर्गों का प्रयोग अधिक होता है, जैसे को, से, में, पर, का। विभक्ति का सही प्रयोग न होने पर वाक्य अशुद्ध हो जाता है।
प्रश्न 21. सर्वनाम के कितने भेद हैं? नाम लिखिए।
उत्तर: सर्वनाम के छह भेद माने गए हैं — पुरुषवाचक (मैं, तुम, वह), निश्चयवाचक (यह, वह), अनिश्चयवाचक (कोई, कुछ), प्रश्नवाचक (कौन, क्या), संबंधवाचक (जो, सो) और निजवाचक (आप, स्वयं)। सर्वनाम संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाला शब्द है, जैसे राम के स्थान पर 'वह'। सर्वनाम के प्रयोग से भाषा में पुनरुक्ति नहीं होती और वाक्य सुंदर बनता है। सर्वनाम के रूप लिंग और वचन के अनुसार बदलते हैं।
प्रश्न 22. अव्यय किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन और कारक के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते हैं। अव्यय का अर्थ है — जिसका व्यय (परिवर्तन) न हो। अव्यय के चार भेद हैं — क्रियाविशेषण (धीरे, तेज), संबंधबोधक (के बिना, के साथ), समुच्चयबोधक (और, परंतु) और विस्मयादिबोधक (अरे, वाह)। जैसे 'वह धीरे चलता है' में 'धीरे' क्रियाविशेषण अव्यय है। अव्यय वाक्य को पूर्णता देते हैं।
प्रश्न 23. गुणवाचक विशेषण किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर: जो विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, रंग, रूप, आकार, अवस्था आदि का बोध कराते हैं, उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे काला घोड़ा, मीठा आम, बहादुर सैनिक, लंबी लाठी, ठंडा पानी। इन उदाहरणों में काला, मीठा, बहादुर, लंबी और ठंडा क्रमशः रंग, स्वाद, गुण, आकार और अवस्था बताते हैं। गुणवाचक विशेषण विशेष्य के पहले या बाद में आ सकता है। विशेषण संज्ञा की विशेषता बताने वाला शब्द होता है।
प्रश्न 24. सार्वनामिक विशेषण किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर: जो सर्वनाम शब्द संज्ञा के पहले आकर उसकी विशेषता बताते हैं, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे 'यह पुस्तक मेरी है' में 'यह' सार्वनामिक विशेषण है क्योंकि यह 'पुस्तक' संज्ञा की विशेषता बता रहा है। अन्य उदाहरण हैं — वह लड़का, कोई आदमी, कौनसी कलम। जब सर्वनाम अकेला प्रयुक्त होता है तो वह सर्वनाम रहता है, पर संज्ञा के साथ आने पर विशेषण बन जाता है। यही इसकी पहचान है।
प्रश्न 25. क्रियाविशेषण किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जो अव्यय शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं, उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं। जैसे 'वह तेज दौड़ता है' में 'तेज' क्रिया 'दौड़ता' की विशेषता बता रहा है। क्रियाविशेषण के चार भेद हैं — कालवाचक (आज, कल), स्थानवाचक (यहाँ, वहाँ), रीतिवाचक (धीरे, तेज) और परिमाणवाचक (बहुत, थोड़ा)। क्रियाविशेषण प्रायः क्रिया के पहले आता है। इसके प्रयोग से वाक्य का अर्थ स्पष्ट और प्रभावशाली बनता है।
