अनुमानित प्रश्नपत्र 1 - हिन्दी, पूर्णांक 50, समय 3 घंटे
यह अनुमानित प्रश्नपत्र है, गारंटी नहीं - prediction hai, guarantee nahi
यह प्रश्नपत्र पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों (2025, 2026) के विश्लेषण पर आधारित है — संधि-समास, मुहावरे-लोकोक्तियाँ और पत्र लेखन पर विशेष बल दिया गया है। पैटर्न आधिकारिक परीक्षा जैसा ही है: प्रश्न 1 से 30 (प्रत्येक 1 अंक, 50 शब्द), प्रश्न 31 (10 अंक, 100 शब्द, अथवा सहित), प्रश्न 32 (10 अंक, 200 शब्द, अथवा सहित)। प्रत्येक प्रश्न के नीचे उत्तर दिया गया है।
इकाई 1 (प्रश्न 1 से 10) — प्रत्येक प्रश्न 1 अंक
प्रश्न 1. ध्वनि और वर्ण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ध्वनि कानों से सुनी जाने वाली सार्थक या निरर्थक आवाज है, जबकि वर्ण ध्वनि का लिखित रूप है। जैसे — "अ" बोलने पर ध्वनि सुनाई देती है और लिखने पर वही वर्ण बन जाता है। ध्वनि भाषा का मौखिक आधार है और वर्ण लिखित आधार। देवनागरी में प्रत्येक ध्वनि के लिए निश्चित वर्ण है, इसलिए इसे वैज्ञानिक लिपि कहा जाता है।
प्रश्न 2. हिन्दी की वर्ण व्यवस्था पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: हिन्दी की वर्ण व्यवस्था अत्यंत वैज्ञानिक है। इसमें स्वर पहले और व्यंजन बाद में रखे गए हैं। व्यंजनों को उच्चारण स्थान के आधार पर 5 वर्गों (क, च, ट, त, प) में बाँटा गया है। प्रत्येक वर्ग में 5 वर्ण हैं — पहले 4 स्पर्श और 5वाँ नासिक्य। अंत में अंतस्थ (य, र, ल, व) और ऊष्म (श, ष, स, ह) व्यंजन हैं। यह क्रमबद्धता स्मरण में सहायक है।
प्रश्न 3. सकर्मक और अकर्मक क्रिया में अंतर उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: जिस क्रिया के साथ कर्म होता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं — जैसे "राम रोटी खाता है" में "खाता है" सकर्मक है, क्योंकि "रोटी" कर्म है। जिस क्रिया के साथ कर्म नहीं होता, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं — जैसे "राम हँसता है" में "हँसता है" अकर्मक है। सकर्मक क्रिया "किसे" या "क्या" प्रश्न का उत्तर देती है।
प्रश्न 4. कारक किसे कहते हैं? कर्ता कारक का उदाहरण दीजिए।
उत्तर: संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य शब्दों से जो संबंध होता है, उसे कारक कहते हैं। हिन्दी में 8 कारक हैं। कर्ता कारक का उदाहरण — "मोहन ने पाठ पढ़ा" में "मोहन ने" कर्ता कारक है, क्योंकि मोहन कार्य करने वाला है। कर्ता कारक की विभक्ति "ने" है, जो भूतकाल की सकर्मक क्रिया के साथ लगती है।
प्रश्न 5. पुरुषवाचक सर्वनाम के भेद उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: पुरुषवाचक सर्वनाम 3 प्रकार के होते हैं — 1. उत्तम पुरुष: बोलने वाले के लिए, जैसे — मैं, हम। 2. मध्यम पुरुष: सुनने वाले के लिए, जैसे — तू, तुम, आप। 3. अन्य पुरुष: किसी तीसरे व्यक्ति के लिए, जैसे — वह, वे। वाक्य — "मैं पढ़ता हूँ, तुम खेलते हो और वह सोता है।" इसमें तीनों पुरुषों के सर्वनाम आए हैं।
प्रश्न 6. संख्यावाचक विशेषण का उदाहरण सहित परिचय दीजिए।
उत्तर: जो विशेषण संज्ञा की संख्या बताते हैं, उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे — "कक्षा में 40 छात्र हैं" में "40" संख्यावाचक विशेषण है। इसके दो भेद हैं — निश्चित संख्यावाचक (जैसे — दो, पाँच) और अनिश्चित संख्यावाचक (जैसे — कुछ, कई)। वाक्य — "मेरे पास कुछ पुस्तकें हैं" में "कुछ" अनिश्चित संख्यावाचक है।
प्रश्न 7. क्रिया-विशेषण अव्यय के दो उदाहरण वाक्य सहित लिखिए।
उत्तर: क्रिया की विशेषता बताने वाले अव्यय क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। दो उदाहरण वाक्य सहित: 1. "राम तेज दौड़ता है" — "तेज" क्रिया-विशेषण है, जो "दौड़ता है" क्रिया की विशेषता बता रहा है। 2. "सीता मधुर गाती है" — "मधुर" क्रिया-विशेषण है। क्रिया-विशेषण से क्रिया के ढंग, स्थान और समय का बोध होता है।
प्रश्न 8. तत्सम और तद्भव शब्दों में अंतर दो-दो उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: तत्सम शब्द संस्कृत से बिना परिवर्तन के आए हैं, जबकि तद्भव शब्द संस्कृत से बिगड़कर आए हैं। दो-दो उदाहरण: तत्सम — "अग्नि", "सूर्य"। तद्भव — "आग" (अग्नि से), "सूरज" (सूर्य से)। तत्सम शब्द प्रायः कठिन और तद्भव शब्द बोलचाल में सरल होते हैं। हिन्दी में दोनों का सुंदर समन्वय है।
प्रश्न 9. बोली और भाषा में अंतर लिखिए।
उत्तर: बोली किसी सीमित क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा का रूप है, जबकि भाषा विस्तृत क्षेत्र में प्रयुक्त मानक रूप है। बोली का व्याकरण निश्चित नहीं होता, परंतु भाषा का व्याकरण निश्चित होता है। बोली में साहित्य कम रचा जाता है, जबकि भाषा में समृद्ध साहित्य होता है। जैसे — मारवाड़ी बोली है और हिन्दी भाषा है। बोली ही विकसित होकर भाषा बनती है।
प्रश्न 10. देवनागरी लिपि की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: देवनागरी लिपि की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं — 1. यह वैज्ञानिक लिपि है: जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा जाता है, एक ध्वनि के लिए एक ही वर्ण है। 2. इसमें प्रत्येक वर्ण का उच्चारण स्थान निश्चित है और वर्णमाला स्वर-व्यंजन के क्रमबद्ध वर्गों में बँटी है, जिससे सीखना सरल होता है। इन्हीं गुणों के कारण यह विश्व की श्रेष्ठ लिपियों में गिनी जाती है।
इकाई 2 (प्रश्न 11 से 20) — प्रत्येक प्रश्न 1 अंक
प्रश्न 11. "गिरीश" का संधि-विच्छेद कीजिए और संधि का नाम लिखिए।
उत्तर: "गिरीश" का संधि-विच्छेद है — गिरि + ईश। यहाँ "इ" और "ई" के मेल से "ई" बना है, अतः इसमें दीर्घ संधि है। "गिरीश" का अर्थ है गिरि (पर्वत) के ईश (स्वामी) अर्थात् हिमालय। दीर्घ संधि में इ/ई के साथ इ/ई मिलने पर "ई" बनता है। यह स्वर संधि का भेद है।
प्रश्न 12. दीर्घ संधि के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर: दीर्घ संधि के दो उदाहरण: 1. "देवालय" (देव + आलय) — "अ" और "आ" मिलकर "आ" बना। 2. "गिरीश" (गिरि + ईश) — "इ" और "ई" मिलकर "ई" बना। दीर्घ संधि में एक ही स्वर के ह्रस्व या दीर्घ रूप परस्पर मिलकर उसी स्वर का दीर्घ रूप बनाते हैं। यह स्वर संधि का सबसे सरल भेद है।
प्रश्न 13. तत्पुरुष समास की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: जिस समास में उत्तरपद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच कारक की विभक्ति लुप्त होती है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। उदाहरण — "राजपुत्र" (राजा का पुत्र): यहाँ "पुत्र" उत्तरपद प्रधान है और "का" विभक्ति लुप्त है। तत्पुरुष समास के भेद कारकों के आधार पर होते हैं — कर्म, करण, संप्रदान, अपादान और संबंध तत्पुरुष।
प्रश्न 14. "चौराहा" में कौन-सा समास है? समास-विग्रह कीजिए।
उत्तर: "चौराहा" में द्विगु समास है। इसका समास-विग्रह है — चार हैं राहें जहाँ। यहाँ पूर्वपद "चार" संख्यावाचक है, अतः यह द्विगु समास है। "चौराहा" का अर्थ है चार रास्तों का मिलन स्थान। द्विगु समास में समस्त पद प्रायः समूह का बोध कराता है और इसे तत्पुरुष समास का ही एक विशेष भेद माना जाता है।
प्रश्न 15. "सु" उपसर्ग से दो शब्द बनाइए।
उत्तर: "सु" उपसर्ग से बने दो शब्द: 1. "सुंदर" (सु + न्दर) — अच्छा। 2. "सुपुत्र" (सु + पुत्र) — अच्छा पुत्र। "सु" उपसर्ग अच्छाई, श्रेष्ठता या सरलता का भाव प्रकट करता है। इसके विपरीत "कु" उपसर्ग बुराई का भाव देता है, जैसे — "कुपुत्र"। उपसर्ग शब्द के आरंभ में लगते हैं।
प्रश्न 16. "इक" प्रत्यय से दो शब्द बनाइए।
उत्तर: "इक" प्रत्यय से बने दो शब्द: 1. "धार्मिक" (धर्म + इक) — धर्म से संबंधित। 2. "मासिक" (मास + इक) — मास से संबंधित। "इक" प्रत्यय लगने पर प्रायः पहले स्वर में वृद्धि होती है — जैसे "धर्म" का "अ" बढ़कर "आ" (धार्मिक) हो गया। "इक" तद्धित प्रत्यय है।
प्रश्न 17. "देवालय" का संधि-विच्छेद कीजिए और संधि का नाम लिखिए।
उत्तर: "देवालय" का संधि-विच्छेद है — देव + आलय। यहाँ "अ" और "आ" के मेल से "आ" बना है, अतः इसमें दीर्घ संधि है। "देवालय" का अर्थ है देवों का आलय अर्थात् मंदिर। दीर्घ संधि स्वर संधि का भेद है, जिसमें समान स्वरों के मेल से दीर्घ स्वर बनता है।
प्रश्न 18. कर्मधारय समास के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर: कर्मधारय समास के दो उदाहरण: 1. "नीलकमल" — नीला है जो कमल। यहाँ पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य है। 2. "महात्मा" — महान है जो आत्मा। कर्मधारय समास में पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है, अथवा दोनों पदों में उपमेय-उपमान का संबंध होता है। जैसे "चंद्रमुख" (चंद्रमा के समान मुख) में उपमेय-उपमान का संबंध है।
प्रश्न 19. "नि" उपसर्ग से दो शब्द बनाइए।
उत्तर: "नि" उपसर्ग से बने दो शब्द: 1. "नियम" (नि + यम) — निश्चित व्यवस्था। 2. "निवास" (नि + वास) — रहने का स्थान। "नि" उपसर्ग निषेध, निश्चय या भीतर के भाव को प्रकट करता है। उपसर्ग शब्द के अर्थ में विशेषता लाते हैं और हिन्दी में इनकी संख्या पर्याप्त है।
प्रश्न 20. "दशरथ" का समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम बताइए।
उत्तर: "दशरथ" का समास-विग्रह है — दश हैं रथ जिसके, अर्थात् राजा दशरथ। यहाँ "दश" और "रथ" दोनों पदों से भिन्न "राजा दशरथ" अर्थ प्रधान है, अतः यह बहुव्रीहि समास है। बहुव्रीहि समास में दोनों पदों से भिन्न कोई तीसरा अर्थ प्रधान होता है और समस्त पद विशेषण की भाँति प्रयुक्त होता है।
इकाई 3 (प्रश्न 21 से 30) — प्रत्येक प्रश्न 1 अंक
प्रश्न 21. "अंगूठा दिखाना" मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर: "अंगूठा दिखाना" मुहावरे का अर्थ है — साफ इनकार कर देना। वाक्य प्रयोग: "माँगने पर उसने मुझे अंगूठा दिखा दिया।" यह मुहावरा तब प्रयुक्त होता है जब कोई व्यक्ति किसी माँग या प्रार्थना को स्पष्ट रूप से ठुकरा देता है। मुहावरों के प्रयोग से भाषा प्रभावशाली बनती है और उत्तर में अंक बढ़ते हैं।
प्रश्न 22. "ऊँट के मुँह में जीरा" लोकोक्ति का अर्थ लिखिए।
उत्तर: "ऊँट के मुँह में जीरा" लोकोक्ति का अर्थ है — आवश्यकता से बहुत कम मिलना। यह तब कही जाती है जब किसी को उसकी जरूरत के मुकाबले नगण्य वस्तु दी जाए। जैसे — भूखे व्यक्ति को एक रोटी देना "ऊँट के मुँह में जीरा" के समान है। लोकोक्तियाँ जीवन के अनुभवों का सार होती हैं।
प्रश्न 23. "कमल" के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर: "कमल" के दो पर्यायवाची शब्द हैं — 1. "पंकज", 2. "जलज"। "कमल" के अन्य पर्यायवाची हैं — नलिन, अरविंद, सरोज। पर्यायवाची शब्दों के प्रयोग से भाषा में पुनरुक्ति नहीं होती और भाव अधिक सुंदर ढंग से व्यक्त होते हैं। परीक्षा में पर्यायवाची शुद्ध वर्तनी में लिखने चाहिए, क्योंकि अशुद्ध वर्तनी पर अंक कटते हैं।
प्रश्न 24. "आदि" का विलोम शब्द लिखिए।
उत्तर: "आदि" का विलोम शब्द "अंत" है। "आदि" का अर्थ है आरंभ, जबकि "अंत" का अर्थ है समाप्ति। विलोम शब्दों को विपरीतार्थक शब्द भी कहते हैं। अन्य विलोम युग्म हैं — आरंभ-समापन, जन्म-मृत्यु, प्रारंभ-समाप्ति। विलोम शब्द बनाते समय दोनों शब्द एक ही शब्द-भेद के होने चाहिए, तभी विलोम शुद्ध माना जाता है।
प्रश्न 25. निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध कीजिए: "वह स्कूल को गया।"
उत्तर: शुद्ध वाक्य है — "वह स्कूल गया।" यहाँ "स्कूल" के साथ "को" विभक्ति का प्रयोग अशुद्ध है, क्योंकि "जाना" क्रिया के साथ स्थानवाचक शब्द में "को" नहीं लगता। वाक्य शुद्धि में कारक विभक्तियों का सही प्रयोग आवश्यक है। जैसे — "वह घर गया" शुद्ध है, "वह घर को गया" अशुद्ध है।
प्रश्न 26. "अन्न" और "अन्य" में अर्थ भेद स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: "अन्न" और "अन्य" समश्रुत भिन्नार्थक शब्द हैं। "अन्न" का अर्थ है अनाज, जैसे — "किसान अन्न उपजाता है।" "अन्य" का अर्थ है दूसरा, जैसे — "अन्य लोग भी आएँगे।" सुनने में समान लगने वाले ऐसे शब्दों का अर्थ वाक्य में प्रयोग करके ही स्पष्ट होता है, अतः इन्हें सावधानी से लिखना चाहिए।
प्रश्न 27. "जैसी करनी वैसी भरनी" लोकोक्ति का अर्थ लिखिए।
उत्तर: "जैसी करनी वैसी भरनी" लोकोक्ति का अर्थ है — जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल पाओगे। यह कर्म के सिद्धांत को व्यक्त करती है। अच्छे कर्म करने वाले को सुख और बुरे कर्म करने वाले को दुःख मिलता है। यह लोकोक्ति नैतिक शिक्षा देती है कि मनुष्य को सदा सत्कर्म करने चाहिए।
प्रश्न 28. अशुद्ध शब्द को शुद्ध कीजिए: "परिक्षा"
उत्तर: शुद्ध शब्द है — "परीक्षा"। "परिक्षा" में "रि" के स्थान पर "री" होना चाहिए, क्योंकि मूल शब्द "परीक्षा" है जिसमें दीर्घ "ई" है। हिन्दी में ह्रस्व-दीर्घ की त्रुटि प्रायः होती है। शुद्ध वर्तनी के लिए शब्दों का शुद्ध उच्चारण और निरंतर अभ्यास आवश्यक है। "परीक्षा" जैसे शब्दों को बार-बार लिखकर अभ्यास करना चाहिए।
प्रश्न 29. "वृक्ष" के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर: "वृक्ष" के दो पर्यायवाची शब्द हैं — 1. "तरु", 2. "पादप"। "वृक्ष" के अन्य पर्यायवाची हैं — विटप, द्रुम। पर्यायवाची शब्द निबंध और पत्र लेखन में भाषा को समृद्ध बनाते हैं और पुनरुक्ति से बचाते हैं। इन्हें शुद्ध वर्तनी में लिखना आवश्यक है, अन्यथा अंक कट सकते हैं। निबंध में पर्यायवाची के प्रयोग से भाषा प्रभावशाली बनती है।
प्रश्न 30. "सज्जन" का विलोम शब्द लिखिए।
उत्तर: "सज्जन" का विलोम शब्द "दुर्जन" है। "सज्जन" का अर्थ है अच्छा व्यक्ति, जबकि "दुर्जन" का अर्थ है बुरा व्यक्ति। "सज्जन" में "सत्" (अच्छा) और "दुर्जन" में "दुर्" (बुरा) उपसर्ग है। अन्य विलोम युग्म हैं — सज्जनता-दुर्जनता, सुकर्म-कुकर्म, सुमति-कुमति। विलोम शब्दों से भाषा में विरोधी भाव स्पष्ट होते हैं और वाक्यों में इनका प्रयोग अर्थ को तीव्र करता है।
इकाई 4 (प्रश्न 31) — 10 अंक (अथवा सहित)
प्रश्न 31. (अ) राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बीकानेर में हिन्दी अध्यापक के पद हेतु आवेदन पत्र लिखिए। अथवा (ब) अपने क्षेत्र में अनियमित विद्युत आपूर्ति की शिकायत करते हुए विद्युत वितरण निगम के अधिशासी अभियंता को शिकायती पत्र लिखिए। (शब्द सीमा 100 शब्द)
उत्तर (अ):
सेवा में: श्रीमान प्रधानाचार्य महोदय, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बीकानेर
विषय: हिन्दी अध्यापक के पद हेतु आवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि आपके विद्यालय में हिन्दी अध्यापक के पद हेतु विज्ञापन प्रकाशित हुआ है। मैं इस पद हेतु आवेदन करना चाहती हूँ। मेरा विवरण इस प्रकार है: नाम — मीना कुमारी, शैक्षणिक योग्यता — एम.ए. (हिन्दी), बी.एड., अनुभव — 3 वर्ष अध्यापन कार्य। मुझे हिन्दी व्याकरण और साहित्य का अच्छा ज्ञान है। अतः प्रार्थना है कि मुझे साक्षात्कार हेतु अवसर प्रदान करने की कृपा करें। मैं विश्वास दिलाती हूँ कि चयन होने पर पूर्ण निष्ठा से कार्य करूँगी।
दिनांक: 10 अक्टूबर, 2026
भवदीया,
मीना कुमारी
पता: मकान संख्या 78, नोखा, बीकानेर
संलग्न: प्रमाणपत्रों की प्रतियाँ
उत्तर (ब):
सेवा में: श्रीमान अधिशासी अभियंता महोदय, विद्युत वितरण निगम, बीकानेर
विषय: अनियमित विद्युत आपूर्ति की शिकायत बाबत।
महोदय,
मैं गंगाशहर क्षेत्र का निवासी हूँ। बड़े खेद के साथ लिखना पड़ रहा है कि हमारे क्षेत्र में पिछले एक माह से विद्युत आपूर्ति अत्यंत अनियमित है। प्रतिदिन 6 से 8 घंटे बिजली गुल रहती है। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है और व्यापारियों को भारी हानि हो रही है। कई बार कनिष्ठ अभियंता से शिकायत की गई, परंतु स्थिति ज्यों की त्यों है। अतः आपसे अनुरोध है कि इस समस्या का स्थायी समाधान करवाकर नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करें।
दिनांक: 10 अक्टूबर, 2026
भवदीय,
राकेश कुमार जैन
पता: मकान संख्या 33, गंगाशहर, बीकानेर
इकाई 5 (प्रश्न 32) — 10 अंक (अथवा सहित)
प्रश्न 32. (अ) "स्वच्छ भारत अभियान" विषय पर निबंध लिखिए। अथवा (ब) निम्नलिखित सूक्ति का पल्लवन कीजिए: "जैसी करनी वैसी भरनी।" (शब्द सीमा 200 शब्द)
उत्तर (अ):
प्रस्तावना: स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार का एक ऐतिहासिक स्वच्छता कार्यक्रम है, जिसका शुभारंभ 2 अक्टूबर, 2014 को महात्मा गाँधी की जयंती पर हुआ था। इसका उद्देश्य देश को स्वच्छ और खुले में शौच से मुक्त बनाना है।
महत्व: स्वच्छता से स्वास्थ्य सुधरता है और बीमारियाँ कम होती हैं। स्वच्छ वातावरण में मन प्रसन्न रहता है और कार्यक्षमता बढ़ती है। गाँधी जी कहते थे कि स्वच्छता स्वतंत्रता से भी अधिक महत्वपूर्ण है। स्वच्छ परिवेश राष्ट्र की प्रगति का प्रतीक है।
जनभागीदारी: इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता जनभागीदारी है। विद्यालयों, कार्यालयों और मोहल्लों में स्वच्छता अभियान चलाए गए। गाँव-गाँव में लाखों शौचालयों का निर्माण हुआ, जिससे ग्रामीण जीवन में बड़ा परिवर्तन आया।
चुनौतियाँ: फिर भी मानसिकता बदलना सबसे बड़ी चुनौती है। कूड़ा सड़क पर फेंकने की आदत अभी पूरी तरह नहीं गई है। इसके लिए निरंतर जागरूकता आवश्यक है।
उपसंहार: स्वच्छता केवल सरकार का नहीं, प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। स्वच्छ भारत ही स्वस्थ भारत का आधार है और यही गाँधी जी के सपनों का भारत होगा।
उत्तर (ब): "जैसी करनी वैसी भरनी" — इस लोकोक्ति का अर्थ है कि मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है। यह कर्म के अटल सिद्धांत को व्यक्त करती है। जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है — परोपकार, सत्य, परिश्रम — उसे सुख, सम्मान और सफलता मिलती है; जबकि जो बुरे कर्म करता है — छल, कपट, आलस्य — उसे दुःख और अपमान भोगना पड़ता है। प्रकृति भी यही नियम सिखाती है — किसान जैसा बीज बोता है, वैसी ही फसल पाता है। विद्यार्थी जो परिश्रम करता है, वह उत्तीर्ण होता है; जो आलस्य करता है, वह अनुत्तीर्ण होता है। महाभारत में दुर्योधन के बुरे कर्मों का फल महाविनाश के रूप में मिला, जबकि युधिष्ठिर के सत्कर्मों से उन्हें सम्मान मिला। बुद्धिमान व्यक्ति इस सत्य को समझकर सदा सत्कर्म करता है और बुरे कर्मों से दूर रहता है। अतः यह लोकोक्ति हमें नैतिक शिक्षा देती है कि जीवन में सदा सत्कर्म करने चाहिए, क्योंकि कर्म का फल अवश्य मिलता है — आज नहीं तो कल, और जैसा करोगे वैसा भरोगे।
