Noteclerical

वाक्य-परिवर्तन और वाच्य

Lesson 108 of 113

इस विषय में क्या आता है

परीक्षा पूछती है — राम पत्र लिखता है का कर्मवाच्य क्या, राम ने पत्र लिखा कर्तृ है या कर्म, मुझसे चला नहीं जाता कौन-सा वाच्य, दो सरल से मिश्र कैसे बने, «मैं जाऊँगा» को अप्रत्यक्ष में क्या होगा, विधान को निषेध कैसे बनाएँ। पूछ अर्थ रखकर ढाँचा बदलना है।

यहाँ पढ़ना है

कर्तृ, कर्म, भाव — तीन वाच्य। सकर्मक/अकर्मक की कसौटी लगाकर पलटना। काल के साथ लिखा जाता / गया / जाएगा। सरल↔संयुक्त↔मिश्र बनाना (पहचान नहीं)। विधान↔निषेध↔प्रश्न। प्रत्यक्ष↔अप्रत्यक्ष कथन। पाँच जाल।

यहाँ नहीं घुसाना

आर्शीवाद, कि/की, मेरा पुस्तक — अशुद्धि-शोधन। ता/रहा/चुका/था और आठ अर्थ-भेद पहचान — काल/वाक्य। आठ कारक-नाम — कारक (यहाँ से/के द्वारा सिर्फ़ वाच्य का कर्ता)। सकर्मक की पूरी सूची — क्रिया। उपमा-रूपक — अलंकार। आँख का तारा — मुहावरे।

एक पंक्ति: शुद्धि = वही ढाँचा, सही रूप। परिवर्तन = वही अर्थ, दूसरा ढाँचा। पहचान = नाम बताओ, वाक्य मत तोड़ो।

तीन काम एक जैसे नहीं लगते

कामपृष्ठउदाहरण
पहचानकाल/वाक्य«राम गया और श्याम आया» = संयुक्त। नाम लिखो, वाक्य ज्यों का त्यों।
शुद्धिअशुद्धि«राम पत्र लिखता हैं» → लिखता है। वाच्य वही कर्तृ।
परिवर्तनयह पृष्ठ«राम पत्र लिखता है» → पत्र राम से लिखा जाता है। अर्थ एक, प्रधान कर्म।

प्रश्न के शब्द देखो: «वाच्य बदलो / कर्मवाच्य बनाओ / मिश्र बनाओ / अप्रत्यक्ष लिखो» = यहाँ। «शुद्ध कीजिए / अशुद्ध छाँटो» = अशुद्धि। «यह वाक्य सरल है या मिश्र» = काल-पृष्ठ की पहचान।

वाच्य — क्रिया किस पर टिकी

वाच्य = कहने का ढंग: वाक्य में प्रधान कौन — कर्ता, कर्म, या क्रिया का भाव। तीन नाम रटो।

वाच्यप्रधानक्रिया किससे मेलपक्का रूप
कर्तृवाच्यकर्ताकर्ता से (ने वाले भूत में कर्म से — नीचे जाल)राम पत्र लिखता है। सीता गीत गाती है। राम ने पत्र लिखा।
कर्मवाच्यकर्मकर्म के लिंग-वचन सेपत्र राम से लिखा जाता है। रोटी खाई गई। गीत गाए जाएँगे।
भाववाच्यक्रिया का भावहमेशा पुल्लिंग एकवचनमुझसे चला नहीं जाता। उससे सोया नहीं जाता।
ने कर्मवाच्य नहीं है। राम ने पत्र लिखा कर्तृवाच्य है — कर्ता राम पर बल, चिह्न ने। कर्मवाच्य में कर्ता से / के द्वारा हो जाता है और कर्म आगे आ जाता है: पत्र राम से लिखा गया। ने-रचना का मेल काल पर; यहाँ केवल ठप्पा: ने = अभी भी कर्तृ।

सकर्मक बिना कर्मवाच्य नहीं बनता। अकर्मक बिना भाववाच्य (या कर्तृ) — कर्मवाच्य नहीं। सकर्मक/अकर्मक की प्रयोगशाला क्रिया पर; कसौटी यहाँ: कर्म है? → कर्मवाच्य संभव। कर्म नहीं? → भाववाच्य सोचो।

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य — पाँच कदम

  1. कर्म ढूँढ़ो। नहीं मिला तो रुक जाओ — भाववाच्य या असंभव।
  2. कर्म को आगे करो (नया उद्देश्य)।
  3. कर्ता पर से / के द्वारा। से अधिक बोलचाल; के द्वारा अधिक औपचारिक। करण का «कलम से» मत समझना — यहाँ करने वाला है। चिह्न-झगड़ा कारक पर रेखा बन चुका।
  4. क्रिया: कृदंत + जाना। वर्तमान लिखा जाता है, भूत लिखा गया, भविष्य लिखा जाएगा। जाना यहाँ गमन नहीं, वाच्य की सहायक क्रिया है।
  5. मेल कर्म से। पत्र (पुल्लिंग एक) → लिखा जाता है। रोटी (स्त्रीलिंग) → खाई जाती है। पत्र (बहु) → लिखे जाते हैं।
काल (कर्तृ)कर्मवाच्य
राम पत्र लिखता है।पत्र राम से लिखा जाता है।
राम पत्र लिख रहा है।पत्र राम से लिखा जा रहा है।
राम ने पत्र लिखा। / राम पत्र लिखता था।पत्र राम से लिखा गया। / लिखा जाता था।
राम पत्र लिखेगा।पत्र राम से लिखा जाएगा।
सीता रोटी खाती है।रोटी सीता से खाई जाती है।
बच्चों ने आम खाए।आम बच्चों से खाए गए।
अध्यापक कहानी सुनाएँगे।कहानी अध्यापक से सुनाई जाएगी।

जाना तीन घर: गमन — वह जाता है (कर्तृ, अकर्मक)। पूर्ण — खा चुका / खा लिया (पहलू-सहायक, वाच्य नहीं)। वाच्य — लिखा जाता है (कर्मवाच्य की पहचान)। तीनों «जा» लिखकर एक मत कर देना।

उदाहरण

सीता ने रोटी खाई — कर्मवाच्य?

हल

  1. कर्म

    रोटी स्त्रीलिंग एकवचन।

  2. कर्ता

    सीता से / सीता के द्वारा। ने हटेगा।

  3. भूत

    खाई गई। (खाया गया मत लिखना — मेल रोटी से।)

उत्तररोटी सीता से खाई गई।

भाववाच्य — अकर्मक का घर

जब कर्म ही न हो, प्रधान क्रिया का होना/न होना रह जाए — भाववाच्य। परीक्षा प्रायः नकारात्मक रूप पूछती है: किसी से वह काम हो नहीं पाता।

  1. क्रिया अकर्मक हो: चलना, सोना, हँसना, रोना, जाना (गमन)।
  2. कर्ता पर से: मुझसे, उससे, बच्चों से। (कुछ वाक्यों में «में» दिखे तो पत्र कम; कक्षा-10 पक्का से।)
  3. क्रिया पुल्लिंग एकवचन — स्त्री कर्ता हो तब भी: उससे चला नहीं जाता, सीता से सोया नहीं जाता। जाती/गई मत लगाओ।
  4. वर्तमान: जाता है / नहीं जाता। भूत: गया / नहीं गया। भविष्य: जाएगा / नहीं जाएगा।
कर्तृ (अकर्मक)भाववाच्य
मैं नहीं चल पाता।मुझसे चला नहीं जाता।
वह सो नहीं सकती।उससे सोया नहीं जाता।
बच्चे नहीं हँसते।बच्चों से हँसा नहीं जाता।
अब मैं चल सकता हूँ।अब मुझसे चला जाता है।
सोना कर्मवाच्य नहीं। «नींद सोई जाती है» मत गढ़ना। सोना अकर्मक → भाववाच्य। पत्र लिखना सकर्मक → कर्मवाच्य। परीक्षा जान-बूझकर अकर्मक पर कर्मवाच्य का विकल्प रखती है — काटो।

उल्टी दिशा — कर्म से कर्तृ, भाव से कर्तृ

प्रश्न «कर्तृवाच्य बनाओ» हो तो कदम उलटो।

दियाकर्तृवाच्य
पत्र मोहन से लिखा जाता है।मोहन पत्र लिखता है।
कहानी बच्चों से सुनी गई।बच्चों ने कहानी सुनी।
मुझसे चला नहीं जाता।मैं नहीं चल पाता / मैं नहीं चलता।

से हटाकर कर्ता बिना चिह्न (वर्तमान) या ने (पूर्ण भूत सकर्मक) पर लाओ। कर्म वापस विधेय में। क्रिया कर्ता-मेल पर लौटे — ने वाले भूत में फिर कर्म-मेल ने-रचना वाली।

सरल, संयुक्त, मिश्र — पहचान नहीं, बनाना

तीन नाम और जो/और की गिनती काल-पृष्ठ पर पहचानी जा चुकी। यहाँ परीक्षा वाक्य बदलवाती है। अर्थ मत छोड़ना, जोड़ने वाला शब्द बदलना।

सरल → मिश्र

दो सरल / एक सरलमिश्रजोड़
राम परिश्रमी है। वह सफल होगा।जो परिश्रमी है वह सफल होगा।जो…वह
मैं जानता हूँ। वह आएगा।मैं जानता हूँ कि वह आएगा।कि
वर्षा हुई। फसल अच्छी हुई।वर्षा हुई इसलिए फसल अच्छी हुई। / क्योंकिकारण
तुम पढ़ोगे। सफल होगे।यदि तुम पढ़ोगे तो सफल होगे।यदि…तो

मिश्र → सरल

आश्रित उपवाक्य हटाकर विशेषण, कृदंत या संज्ञा-पद बनाओ। एक क्रिया रहनी चाहिए।

मिश्रसरल
जो लड़का भाग रहा था वह गिर गया।भागता हुआ लड़का गिर गया।
मैं जानता हूँ कि वह ईमानदार है।मैं उसे ईमानदार जानता हूँ।
यदि वर्षा होगी तो फसल अच्छी होगी।वर्षा होने पर फसल अच्छी होगी।

सरल ↔ संयुक्त

सरल / दो सरलसंयुक्त
सूरज निकला। पक्षी चहचहाए।सूरज निकला और पक्षी चहचहाए।
मेहनत करो। पछताओगे। (विरोध / चेतावनी)मेहनत करो वरना पछताओगे। / मेहनत करो नहीं तो पछताओगे।
सूरज निकलते ही पक्षी चहचहाए। (सरल)वापस संयुक्त: सूरज निकला और पक्षी चहचहाए।

जोड़ मत उधार लो। और/पर/या = संयुक्त। जो/कि/क्योंकि/यदि = मिश्र। सरल में दूसरी समापिका क्रिया मत छोड़ना। «राम गया और» अधूरा — परिवर्तन अधूरा।

विधान, निषेध, प्रश्न — अर्थ का पलट

आठ भेद के नाम काल-पृष्ठ पर हैं। यहाँ रूप बदलो, नाम मत रटो दोबारा।

सेकोकैसे
राम जाता है।निषेधराम नहीं जाता।
यहाँ आओ।निषेध-आज्ञायहाँ मत आओ। (मत + आज्ञा; नहीं+आओ स्कूल में कम)
राम जाता है।प्रश्नक्या राम जाता है? / राम जाता है क्या?
क्या राम घर गया?विधानराम घर गया।
राम सफल होगा।विस्मय (कभी-कभी)काश राम सफल होता! / राम सफल हो!

दो नकारात्मक मत लगा देना: «क्या राम नहीं नहीं जाता?» शुद्धि का घर है। परिवर्तन में एक ही परत पलटो — प्रश्न बना रहे हो तो विधान की हाँ-ना कुंजी अलग प्रश्न है।

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कथन

किसी के शब्द ज्यों के त्यों उद्धरण में = प्रत्यक्ष। अपने शब्दों में बताना = अप्रत्यक्ष। उद्धरण हटता है, कि आता है।

पक्की अदला-बदली

प्रत्यक्षअप्रत्यक्ष
मैं, हमवह, वे (कथन के कर्ता के अनुसार)
तुम, आपवह / वे / उन्हें — सुनने वाले को देखो
यह, ये, यहाँ, अबवह, वे, वहाँ, तब
आजउस दिन
कल (आने वाला)अगले दिन
कल (बीता)पिछले दिन / एक दिन पहले
आऊँगा / जाऊँगाआएगा / जाएगा — पुरुष बदलो
प्रत्यक्षअप्रत्यक्ष
राम ने कहा, «मैं कल जाऊँगा।»राम ने कहा कि वह अगले दिन जाएगा।
सीता ने कहा, «मैं यहाँ रहूँगी।»सीता ने कहा कि वह वहाँ रहेगी।
उसने पूछा, «तुम कब आओगे?»उसने पूछा कि तुम कब आओगे / वह कब आएगा। (सुनने वाला कौन)
गुरु ने कहा, «सच बोलो।»गुरु ने कहा कि सच बोलना चाहिए / आज्ञा दी कि सच बोलें।
उसने कहा, «क्या वर्षा हो रही है?»उसने पूछा कि क्या वर्षा हो रही है। (प्रश्न → पूछा)

तीन ताले: (1) उद्धरण हटाओ, कि लगाओ। (2) पुरुष और संकेत शब्द बदलो। (3) कहा/पूछा/आज्ञा दी — वाक्य के काम से क्रिया चुनो। वर्तनी की मत लगा देना — वह कि/की का जाल है।

उदाहरण

मोहन ने कहा, «मैं आज नहीं आऊँगा।» अप्रत्यक्ष?

हल

  1. कि

    कहा कि…

  2. मैं → वह, आऊँगा → आएगा

    कर्ता मोहन पुल्लिंग एक।

  3. आज → उस दिन

    नहीं ज्यों का त्यों रह सकता।

उत्तरमोहन ने कहा कि वह उस दिन नहीं आएगा।

जाल — यहीं कटते हैं

1. ने = कर्मवाच्य

राम ने पत्र लिखा = कर्तृवाच्य। कर्मवाच्य = पत्र राम से लिखा गया। ने हटे बिना कर्मवाच्य पूरा नहीं।

2. अकर्मक पर कर्मवाच्य

जाना, सोना, हँसना → भाववाच्य। «सड़क जाई गई» नहीं।

3. शुद्धि की जगह परिवर्तन

«राम पत्र लिखता हैं» में हैं काटो, वाच्य मत पलटो — जब तक प्रश्न शुद्धि का है।

4. संयुक्त और मिश्र का जोड़ उधार

जो लगाकर संयुक्त मत कहना। और लगाकर मिश्र मत कहना। बनाना हो तो सही जोड़ चुनो — पहचान काल पर, बनाना यहाँ।

5. कथन में कल/आज और कि/की

कल दो अर्थ। कि अव्यय। मैं→वह भूलना सबसे आम। आज्ञा पर भी «कहा कि मैं…» मत छोड़ना — पुरुष पलटो।

उदाहरण

राम ने आम खाया — वाच्य?

हल

  1. प्रधान

    कर्ता राम, चिह्न ने। कर्मवाच्य तभी जब आम आगे आए और से लगे।

  2. नाम

    कर्तृवाच्य। (ने-मेल आम से खाया — रूप कर्म का, वाच्य कर्तृ का।)

उत्तरकर्तृवाच्य

परीक्षा में पाँच कदम

  1. पूछा क्या? वाच्य का नाम, वाच्य बदलो, रचना बदलो, अर्थ बदलो, कथन बदलो, या शुद्ध करो (तो इस पृष्ठ से बाहर)।
  2. वाच्य हो तो कर्म ढूँढ़ो। कर्म है → कर्मवाच्य संभव। नहीं → भाव या कर्तृ। ने दिखे → पहले कर्तृ मानो।
  3. मेल। कर्मवाच्य में कर्म से; भाववाच्य में पुल्लिंग एक; कर्तृ में कर्ता (ने-भूत में कर्म)।
  4. रचना हो तो जोड़ देखो — और/जो/कि — फिर वाक्य जोड़कर या तोड़कर एक क्रिया/दो क्रिया करो।
  5. कथन हो तो कि + पुरुष + आज/कल/यहाँ।
भूल-सूची। ने = कर्मवाच्य। सोना का कर्मवाच्य। लिखा जाता है को गमन समझना। शुद्धि में वाच्य पलटना। जो = संयुक्त। मैं जाऊँगा ज्यों का त्यों अप्रत्यक्ष में। कहा की। भाववाच्य में जाती। अलंकार को परिवर्तन समझना।

प्रश्न 1–10

प्र. 1

वाच्य किसे कहते हैं?

  1. वाक्य का शुद्ध रूप — शुद्धि
  2. क्रिया का वह रूप जिससे पता चले प्रधान कर्ता है, कर्म है या भाव
  3. सरल-संयुक्त-मिश्र का नाम — रचना-पहचान
  4. उपमा — अलंकार

हल

  1. प्रधान कौन

    कर्ता / कर्म / भाव। शुद्धि और रचना अलग घर।

उत्तरB
प्र. 2

«राम पत्र लिखता है» का कर्मवाच्य?

  1. राम ने पत्र लिखा — अभी कर्तृ, भूत
  2. पत्र राम से लिखा जाता है
  3. राम पत्र लिखता हैं — शुद्धि, वाच्य नहीं
  4. मुझसे लिखा नहीं जाता — भाववाच्य-सा, कर्ता गलत

हल

  1. कर्म आगे

    पत्र। राम से। वर्तमान → जाता है। मेल पत्र पुल्लिंग।

उत्तरB
प्र. 3

«मुझसे चला नहीं जाता» कौन-सा वाच्य?

  1. कर्मवाच्य — चलना सकर्मक नहीं
  2. भाववाच्य
  3. कर्तृवाच्य — ने नहीं तो भाव नहीं, गलत कसौटी
  4. मिश्र वाक्य

हल

  1. अकर्मक + से + जाता है एकवचन

    भाववाच्य। कर्म नहीं है इसलिए कर्मवाच्य नहीं।

उत्तरB
प्र. 4

«राम ने पत्र लिखा» वाच्य?

  1. कर्मवाच्य — ने दिख रहा
  2. कर्तृवाच्य
  3. भाववाच्य
  4. अशुद्ध वाक्य

हल

  1. ने

    कर्ता का चिह्न, कर्मवाच्य का नहीं। पत्र अभी कर्म पद पर है, उद्देश्य नहीं बना।

उत्तरB
प्र. 5

सीता ने रोटी खाई — कर्मवाच्य?

  1. रोटी सीता से खाया गया — मेल टूटा
  2. रोटी सीता से खाई गई
  3. सीता रोटी खाती है — काल पलट गया, वाच्य पूरा नहीं पूछा
  4. सीता से सोया नहीं जाता — दूसरी क्रिया

हल

  1. रोटी स्त्रीलिंग

    खाई गई। खाया गया आम/पत्र पर।

उत्तरB
प्र. 6

दो सरल: «राम परिश्रमी है। राम सफल होगा।» मिश्र?

  1. राम परिश्रमी है और सफल होगा — यह संयुक्त
  2. जो परिश्रमी है वह सफल होगा
  3. राम परिश्रमी सफल — अधूरा
  4. राम से परिश्रम किया जाता है — वाच्य, रचना नहीं

हल

  1. जो…वह

    आश्रित+प्रधान = मिश्र। और = संयुक्त, प्रश्न मिश्र माँगता है।

उत्तरB
प्र. 7

राम ने कहा, «मैं कल जाऊँगा।» (आने वाला कल) अप्रत्यक्ष?

  1. राम ने कहा कि मैं कल जाऊँगा — पुरुष नहीं पलटा
  2. राम ने कहा कि वह अगले दिन जाएगा
  3. राम ने कहा की वह जाएगा — की अशुद्ध
  4. राम से कहा जाता है — वाच्य

हल

  1. मैं→वह, आऊँगा→जाएगा, कल→अगले दिन

    कि अव्यय।

उत्तरB
प्र. 8

«यहाँ आओ» का निषेध?

  1. यहाँ नहीं आओ — कुछ कुंजी इसे भी मानें, पक्का रूप मत+आज्ञा
  2. यहाँ मत आओ
  3. क्या यहाँ आओ?
  4. यहाँ आया जाता है

हल

  1. आज्ञा का नकार

    मत। नहीं साधारण निषेध (वह नहीं आता)। प्रश्न अलग घर।

उत्तरB
प्र. 9

«वह सो नहीं सकती» का सही परिवर्तन?

  1. नींद उससे सोई जाती है — गढ़ंत कर्मवाच्य
  2. उससे सोया नहीं जाता
  3. वह सोई गई
  4. उसने नहीं सोया — ने+अकर्मक अशुद्ध-सा

हल

  1. अकर्मक

    भाववाच्य, पुल्लिंग एकवचन सोया नहीं जाता — कर्ता स्त्री हो तब भी।

उत्तरB
प्र. 10

«राम पत्र लिखता हैं» — शुद्ध रूप (परिवर्तन नहीं)?

  1. पत्र राम से लिखा जाता है
  2. राम पत्र लिखता है
  3. राम ने पत्र लिखा
  4. जो राम है वह पत्र लिखता है

हल

  1. शुद्धि

    केवल हैं→है। वाच्य, काल, मिश्र मत छेड़ो। शुद्धि-घर अशुद्धि; विकल्प में जाल यहीं रखा ताकि दो पृष्ठ मिलकर कटें।

उत्तरB

अभ्यास

ये दस अलग कोण हैं — ऊपर वाले दस की नकल नहीं।

अ. 1

«अध्यापक कहानी सुनाएँगे» कर्मवाच्य?

  1. कहानी अध्यापक से सुनाई जाती है — वर्तमान हो गया
  2. कहानी अध्यापक से सुनाई जाएगी
  3. अध्यापक ने कहानी सुनाई
  4. कहानी सुनो

हल

  1. गे = भविष्य

    जाएगी। कहानी स्त्रीलिंग।

उत्तरB
अ. 2

पत्र मोहन से लिखा गया — कर्तृवाच्य?

  1. मोहन पत्र लिखता है — काल वर्तमान हो गया
  2. मोहन ने पत्र लिखा
  3. पत्र लिखा जाता है
  4. मोहन से चला नहीं जाता

हल

  1. गया = भूत

    ने+लिखा। वर्तमान मत बना देना।

उत्तरB
अ. 3

मिश्र «जो लड़का भाग रहा था वह गिर गया» का सरल?

  1. लड़का भाग रहा था और गिर गया — संयुक्त
  2. भागता हुआ लड़का गिर गया
  3. लड़के से भागा गया
  4. जो लड़का गिर गया

हल

  1. एक क्रिया प्रधान

    कृदंत «भागता हुआ» विशेषण बन गया। और = संयुक्त, सरल नहीं।

उत्तरB
अ. 4

सीता ने कहा, «मैं यहाँ रहूँगी।»

  1. सीता ने कहा कि मैं यहाँ रहूँगी
  2. सीता ने कहा कि वह वहाँ रहेगी
  3. सीता से कहा जाता है
  4. सीता ने कहा की वह रहेगी

हल

  1. मैं→वह, यहाँ→वहाँ, रहूँगी→रहेगी

    कि। की मत।

उत्तरB
अ. 5

गुरु ने कहा, «सच बोलो।» अप्रत्यक्ष के निकट?

  1. गुरु ने कहा कि सच बोलो — उद्धरण-सा लहजा बचा
  2. गुरु ने आज्ञा दी कि सच बोलें / कहा कि सच बोलना चाहिए
  3. गुरु से सच बोला जाता है
  4. सच मत बोलो

हल

  1. आज्ञा

    अप्रत्यक्ष में बोलो ज्यों का त्यों कम चलता; चाहिए/बोलें पक्का।

उत्तरB
अ. 6

दो सरल से संयुक्त: सूरज निकला। पक्षी चहचहाए।

  1. जब सूरज निकला तब पक्षी चहचहाए — यह मिश्र (जब–तब)
  2. सूरज निकला और पक्षी चहचहाए
  3. सूरज निकलते ही पक्षी चहचहाए — यह सरल (एक समापिका)
  4. सूरज से निकला जाता है

हल

  1. और

    दो स्वतंत्र = संयुक्त। जब = मिश्र। कृदंत = सरल। प्रश्न संयुक्त माँगता है।

उत्तरB
अ. 7

«क्या राम घर गया?» का विधान?

  1. राम घर मत गया
  2. राम घर गया
  3. राम से घर गया जाता है
  4. राम ने कहा कि वह गया

हल

  1. प्रश्न हटाओ

    क्या और चिह्न कटें। निषेध मत लगाओ।

उत्तरB
अ. 8

बच्चों ने आम खाए — कर्मवाच्य?

  1. आम बच्चों से खाया गया — वचन टूटा
  2. आम बच्चों से खाए गए
  3. बच्चे आम खाते हैं
  4. आम खाइए

हल

  1. आम बहुवचन

    खाए गए। खाया गया एक आम पर।

उत्तरB
अ. 9

लिखा जाता है — «जाता» यहाँ क्या है?

  1. गमन — राम जाता है वाला जाना
  2. कर्मवाच्य की सहायक क्रिया
  3. पूर्ण वर्तमान चुका
  4. लोकोक्ति

हल

  1. तीन जा

    गमन अलग। चुका अलग। वाच्य में जाता/गया/जाएगा सहायक।

उत्तरB
अ. 10

«मुख कमल के समान है» यह परिवर्तन का कौन-सा घर?

  1. कर्मवाच्य
  2. यह अलंकार (उपमा) है, वाच्य-परिवर्तन नहीं
  3. मिश्र वाक्य
  4. अप्रत्यक्ष कथन

हल

  1. समान

    उपमा अलंकार की। यहाँ कर्ता-कर्म-भाव या कथन नहीं पलटा।

उत्तरB

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