इस विषय में क्या आता है
परीक्षा पूछती है — राम पत्र लिखता है का कर्मवाच्य क्या, राम ने पत्र लिखा कर्तृ है या कर्म, मुझसे चला नहीं जाता कौन-सा वाच्य, दो सरल से मिश्र कैसे बने, «मैं जाऊँगा» को अप्रत्यक्ष में क्या होगा, विधान को निषेध कैसे बनाएँ। पूछ अर्थ रखकर ढाँचा बदलना है।
यहाँ पढ़ना है
कर्तृ, कर्म, भाव — तीन वाच्य। सकर्मक/अकर्मक की कसौटी लगाकर पलटना। काल के साथ लिखा जाता / गया / जाएगा। सरल↔संयुक्त↔मिश्र बनाना (पहचान नहीं)। विधान↔निषेध↔प्रश्न। प्रत्यक्ष↔अप्रत्यक्ष कथन। पाँच जाल।
यहाँ नहीं घुसाना
आर्शीवाद, कि/की, मेरा पुस्तक — अशुद्धि-शोधन। ता/रहा/चुका/था और आठ अर्थ-भेद पहचान — काल/वाक्य। आठ कारक-नाम — कारक (यहाँ से/के द्वारा सिर्फ़ वाच्य का कर्ता)। सकर्मक की पूरी सूची — क्रिया। उपमा-रूपक — अलंकार। आँख का तारा — मुहावरे।
एक पंक्ति: शुद्धि = वही ढाँचा, सही रूप। परिवर्तन = वही अर्थ, दूसरा ढाँचा। पहचान = नाम बताओ, वाक्य मत तोड़ो।
तीन काम एक जैसे नहीं लगते
| काम | पृष्ठ | उदाहरण |
|---|---|---|
| पहचान | काल/वाक्य | «राम गया और श्याम आया» = संयुक्त। नाम लिखो, वाक्य ज्यों का त्यों। |
| शुद्धि | अशुद्धि | «राम पत्र लिखता हैं» → लिखता है। वाच्य वही कर्तृ। |
| परिवर्तन | यह पृष्ठ | «राम पत्र लिखता है» → पत्र राम से लिखा जाता है। अर्थ एक, प्रधान कर्म। |
प्रश्न के शब्द देखो: «वाच्य बदलो / कर्मवाच्य बनाओ / मिश्र बनाओ / अप्रत्यक्ष लिखो» = यहाँ। «शुद्ध कीजिए / अशुद्ध छाँटो» = अशुद्धि। «यह वाक्य सरल है या मिश्र» = काल-पृष्ठ की पहचान।
वाच्य — क्रिया किस पर टिकी
वाच्य = कहने का ढंग: वाक्य में प्रधान कौन — कर्ता, कर्म, या क्रिया का भाव। तीन नाम रटो।
| वाच्य | प्रधान | क्रिया किससे मेल | पक्का रूप |
|---|---|---|---|
| कर्तृवाच्य | कर्ता | कर्ता से (ने वाले भूत में कर्म से — नीचे जाल) | राम पत्र लिखता है। सीता गीत गाती है। राम ने पत्र लिखा। |
| कर्मवाच्य | कर्म | कर्म के लिंग-वचन से | पत्र राम से लिखा जाता है। रोटी खाई गई। गीत गाए जाएँगे। |
| भाववाच्य | क्रिया का भाव | हमेशा पुल्लिंग एकवचन | मुझसे चला नहीं जाता। उससे सोया नहीं जाता। |
राम ने पत्र लिखा कर्तृवाच्य है — कर्ता राम पर बल, चिह्न ने। कर्मवाच्य में कर्ता से / के द्वारा हो जाता है और कर्म आगे आ जाता है: पत्र राम से लिखा गया। ने-रचना का मेल काल पर; यहाँ केवल ठप्पा: ने = अभी भी कर्तृ। सकर्मक बिना कर्मवाच्य नहीं बनता। अकर्मक बिना भाववाच्य (या कर्तृ) — कर्मवाच्य नहीं। सकर्मक/अकर्मक की प्रयोगशाला क्रिया पर; कसौटी यहाँ: कर्म है? → कर्मवाच्य संभव। कर्म नहीं? → भाववाच्य सोचो।
कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य — पाँच कदम
- कर्म ढूँढ़ो। नहीं मिला तो रुक जाओ — भाववाच्य या असंभव।
- कर्म को आगे करो (नया उद्देश्य)।
- कर्ता पर से / के द्वारा। से अधिक बोलचाल; के द्वारा अधिक औपचारिक। करण का «कलम से» मत समझना — यहाँ करने वाला है। चिह्न-झगड़ा कारक पर रेखा बन चुका।
- क्रिया: कृदंत + जाना। वर्तमान
लिखा जाता है, भूतलिखा गया, भविष्यलिखा जाएगा। जाना यहाँ गमन नहीं, वाच्य की सहायक क्रिया है। - मेल कर्म से। पत्र (पुल्लिंग एक) → लिखा जाता है। रोटी (स्त्रीलिंग) → खाई जाती है। पत्र (बहु) → लिखे जाते हैं।
| काल (कर्तृ) | कर्मवाच्य |
|---|---|
| राम पत्र लिखता है। | पत्र राम से लिखा जाता है। |
| राम पत्र लिख रहा है। | पत्र राम से लिखा जा रहा है। |
| राम ने पत्र लिखा। / राम पत्र लिखता था। | पत्र राम से लिखा गया। / लिखा जाता था। |
| राम पत्र लिखेगा। | पत्र राम से लिखा जाएगा। |
| सीता रोटी खाती है। | रोटी सीता से खाई जाती है। |
| बच्चों ने आम खाए। | आम बच्चों से खाए गए। |
| अध्यापक कहानी सुनाएँगे। | कहानी अध्यापक से सुनाई जाएगी। |
जाना तीन घर: गमन — वह जाता है (कर्तृ, अकर्मक)। पूर्ण — खा चुका / खा लिया (पहलू-सहायक, वाच्य नहीं)। वाच्य — लिखा जाता है (कर्मवाच्य की पहचान)। तीनों «जा» लिखकर एक मत कर देना।
सीता ने रोटी खाई — कर्मवाच्य?
हल
- कर्म
रोटी स्त्रीलिंग एकवचन।
- कर्ता
सीता से / सीता के द्वारा। ने हटेगा।
- भूत
खाई गई। (खाया गया मत लिखना — मेल रोटी से।)
भाववाच्य — अकर्मक का घर
जब कर्म ही न हो, प्रधान क्रिया का होना/न होना रह जाए — भाववाच्य। परीक्षा प्रायः नकारात्मक रूप पूछती है: किसी से वह काम हो नहीं पाता।
- क्रिया अकर्मक हो: चलना, सोना, हँसना, रोना, जाना (गमन)।
- कर्ता पर
से: मुझसे, उससे, बच्चों से। (कुछ वाक्यों में «में» दिखे तो पत्र कम; कक्षा-10 पक्का से।) - क्रिया पुल्लिंग एकवचन — स्त्री कर्ता हो तब भी: उससे चला नहीं जाता, सीता से सोया नहीं जाता। जाती/गई मत लगाओ।
- वर्तमान: जाता है / नहीं जाता। भूत: गया / नहीं गया। भविष्य: जाएगा / नहीं जाएगा।
| कर्तृ (अकर्मक) | भाववाच्य |
|---|---|
| मैं नहीं चल पाता। | मुझसे चला नहीं जाता। |
| वह सो नहीं सकती। | उससे सोया नहीं जाता। |
| बच्चे नहीं हँसते। | बच्चों से हँसा नहीं जाता। |
| अब मैं चल सकता हूँ। | अब मुझसे चला जाता है। |
उल्टी दिशा — कर्म से कर्तृ, भाव से कर्तृ
प्रश्न «कर्तृवाच्य बनाओ» हो तो कदम उलटो।
| दिया | कर्तृवाच्य |
|---|---|
| पत्र मोहन से लिखा जाता है। | मोहन पत्र लिखता है। |
| कहानी बच्चों से सुनी गई। | बच्चों ने कहानी सुनी। |
| मुझसे चला नहीं जाता। | मैं नहीं चल पाता / मैं नहीं चलता। |
से हटाकर कर्ता बिना चिह्न (वर्तमान) या ने (पूर्ण भूत सकर्मक) पर लाओ। कर्म वापस विधेय में। क्रिया कर्ता-मेल पर लौटे — ने वाले भूत में फिर कर्म-मेल ने-रचना वाली।
सरल, संयुक्त, मिश्र — पहचान नहीं, बनाना
तीन नाम और जो/और की गिनती काल-पृष्ठ पर पहचानी जा चुकी। यहाँ परीक्षा वाक्य बदलवाती है। अर्थ मत छोड़ना, जोड़ने वाला शब्द बदलना।
सरल → मिश्र
| दो सरल / एक सरल | मिश्र | जोड़ |
|---|---|---|
| राम परिश्रमी है। वह सफल होगा। | जो परिश्रमी है वह सफल होगा। | जो…वह |
| मैं जानता हूँ। वह आएगा। | मैं जानता हूँ कि वह आएगा। | कि |
| वर्षा हुई। फसल अच्छी हुई। | वर्षा हुई इसलिए फसल अच्छी हुई। / क्योंकि | कारण |
| तुम पढ़ोगे। सफल होगे। | यदि तुम पढ़ोगे तो सफल होगे। | यदि…तो |
मिश्र → सरल
आश्रित उपवाक्य हटाकर विशेषण, कृदंत या संज्ञा-पद बनाओ। एक क्रिया रहनी चाहिए।
| मिश्र | सरल |
|---|---|
| जो लड़का भाग रहा था वह गिर गया। | भागता हुआ लड़का गिर गया। |
| मैं जानता हूँ कि वह ईमानदार है। | मैं उसे ईमानदार जानता हूँ। |
| यदि वर्षा होगी तो फसल अच्छी होगी। | वर्षा होने पर फसल अच्छी होगी। |
सरल ↔ संयुक्त
| सरल / दो सरल | संयुक्त |
|---|---|
| सूरज निकला। पक्षी चहचहाए। | सूरज निकला और पक्षी चहचहाए। |
| मेहनत करो। पछताओगे। (विरोध / चेतावनी) | मेहनत करो वरना पछताओगे। / मेहनत करो नहीं तो पछताओगे। |
| सूरज निकलते ही पक्षी चहचहाए। (सरल) | वापस संयुक्त: सूरज निकला और पक्षी चहचहाए। |
जोड़ मत उधार लो। और/पर/या = संयुक्त। जो/कि/क्योंकि/यदि = मिश्र। सरल में दूसरी समापिका क्रिया मत छोड़ना। «राम गया और» अधूरा — परिवर्तन अधूरा।
विधान, निषेध, प्रश्न — अर्थ का पलट
आठ भेद के नाम काल-पृष्ठ पर हैं। यहाँ रूप बदलो, नाम मत रटो दोबारा।
| से | को | कैसे |
|---|---|---|
| राम जाता है। | निषेध | राम नहीं जाता। |
| यहाँ आओ। | निषेध-आज्ञा | यहाँ मत आओ। (मत + आज्ञा; नहीं+आओ स्कूल में कम) |
| राम जाता है। | प्रश्न | क्या राम जाता है? / राम जाता है क्या? |
| क्या राम घर गया? | विधान | राम घर गया। |
| राम सफल होगा। | विस्मय (कभी-कभी) | काश राम सफल होता! / राम सफल हो! |
दो नकारात्मक मत लगा देना: «क्या राम नहीं नहीं जाता?» शुद्धि का घर है। परिवर्तन में एक ही परत पलटो — प्रश्न बना रहे हो तो विधान की हाँ-ना कुंजी अलग प्रश्न है।
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कथन
किसी के शब्द ज्यों के त्यों उद्धरण में = प्रत्यक्ष। अपने शब्दों में बताना = अप्रत्यक्ष। उद्धरण हटता है, कि आता है।
पक्की अदला-बदली
| प्रत्यक्ष | अप्रत्यक्ष |
|---|---|
| मैं, हम | वह, वे (कथन के कर्ता के अनुसार) |
| तुम, आप | वह / वे / उन्हें — सुनने वाले को देखो |
| यह, ये, यहाँ, अब | वह, वे, वहाँ, तब |
| आज | उस दिन |
| कल (आने वाला) | अगले दिन |
| कल (बीता) | पिछले दिन / एक दिन पहले |
| आऊँगा / जाऊँगा | आएगा / जाएगा — पुरुष बदलो |
| प्रत्यक्ष | अप्रत्यक्ष |
|---|---|
| राम ने कहा, «मैं कल जाऊँगा।» | राम ने कहा कि वह अगले दिन जाएगा। |
| सीता ने कहा, «मैं यहाँ रहूँगी।» | सीता ने कहा कि वह वहाँ रहेगी। |
| उसने पूछा, «तुम कब आओगे?» | उसने पूछा कि तुम कब आओगे / वह कब आएगा। (सुनने वाला कौन) |
| गुरु ने कहा, «सच बोलो।» | गुरु ने कहा कि सच बोलना चाहिए / आज्ञा दी कि सच बोलें। |
| उसने कहा, «क्या वर्षा हो रही है?» | उसने पूछा कि क्या वर्षा हो रही है। (प्रश्न → पूछा) |
तीन ताले: (1) उद्धरण हटाओ, कि लगाओ। (2) पुरुष और संकेत शब्द बदलो। (3) कहा/पूछा/आज्ञा दी — वाक्य के काम से क्रिया चुनो। वर्तनी की मत लगा देना — वह कि/की का जाल है।
मोहन ने कहा, «मैं आज नहीं आऊँगा।» अप्रत्यक्ष?
हल
- कि
कहा कि…
- मैं → वह, आऊँगा → आएगा
कर्ता मोहन पुल्लिंग एक।
- आज → उस दिन
नहीं ज्यों का त्यों रह सकता।
जाल — यहीं कटते हैं
1. ने = कर्मवाच्य
राम ने पत्र लिखा = कर्तृवाच्य। कर्मवाच्य = पत्र राम से लिखा गया। ने हटे बिना कर्मवाच्य पूरा नहीं।
2. अकर्मक पर कर्मवाच्य
जाना, सोना, हँसना → भाववाच्य। «सड़क जाई गई» नहीं।
3. शुद्धि की जगह परिवर्तन
«राम पत्र लिखता हैं» में हैं काटो, वाच्य मत पलटो — जब तक प्रश्न शुद्धि का है।
4. संयुक्त और मिश्र का जोड़ उधार
जो लगाकर संयुक्त मत कहना। और लगाकर मिश्र मत कहना। बनाना हो तो सही जोड़ चुनो — पहचान काल पर, बनाना यहाँ।
5. कथन में कल/आज और कि/की
कल दो अर्थ। कि अव्यय। मैं→वह भूलना सबसे आम। आज्ञा पर भी «कहा कि मैं…» मत छोड़ना — पुरुष पलटो।
राम ने आम खाया — वाच्य?
हल
- प्रधान
कर्ता राम, चिह्न ने। कर्मवाच्य तभी जब आम आगे आए और से लगे।
- नाम
कर्तृवाच्य। (ने-मेल आम से खाया — रूप कर्म का, वाच्य कर्तृ का।)
परीक्षा में पाँच कदम
- पूछा क्या? वाच्य का नाम, वाच्य बदलो, रचना बदलो, अर्थ बदलो, कथन बदलो, या शुद्ध करो (तो इस पृष्ठ से बाहर)।
- वाच्य हो तो कर्म ढूँढ़ो। कर्म है → कर्मवाच्य संभव। नहीं → भाव या कर्तृ। ने दिखे → पहले कर्तृ मानो।
- मेल। कर्मवाच्य में कर्म से; भाववाच्य में पुल्लिंग एक; कर्तृ में कर्ता (ने-भूत में कर्म)।
- रचना हो तो जोड़ देखो — और/जो/कि — फिर वाक्य जोड़कर या तोड़कर एक क्रिया/दो क्रिया करो।
- कथन हो तो कि + पुरुष + आज/कल/यहाँ।
प्रश्न 1–10
वाच्य किसे कहते हैं?
- वाक्य का शुद्ध रूप — शुद्धि
- क्रिया का वह रूप जिससे पता चले प्रधान कर्ता है, कर्म है या भाव
- सरल-संयुक्त-मिश्र का नाम — रचना-पहचान
- उपमा — अलंकार
हल
- प्रधान कौन
कर्ता / कर्म / भाव। शुद्धि और रचना अलग घर।
«राम पत्र लिखता है» का कर्मवाच्य?
- राम ने पत्र लिखा — अभी कर्तृ, भूत
- पत्र राम से लिखा जाता है
- राम पत्र लिखता हैं — शुद्धि, वाच्य नहीं
- मुझसे लिखा नहीं जाता — भाववाच्य-सा, कर्ता गलत
हल
- कर्म आगे
पत्र। राम से। वर्तमान → जाता है। मेल पत्र पुल्लिंग।
«मुझसे चला नहीं जाता» कौन-सा वाच्य?
- कर्मवाच्य — चलना सकर्मक नहीं
- भाववाच्य
- कर्तृवाच्य — ने नहीं तो भाव नहीं, गलत कसौटी
- मिश्र वाक्य
हल
- अकर्मक + से + जाता है एकवचन
भाववाच्य। कर्म नहीं है इसलिए कर्मवाच्य नहीं।
«राम ने पत्र लिखा» वाच्य?
- कर्मवाच्य — ने दिख रहा
- कर्तृवाच्य
- भाववाच्य
- अशुद्ध वाक्य
हल
- ने
कर्ता का चिह्न, कर्मवाच्य का नहीं। पत्र अभी कर्म पद पर है, उद्देश्य नहीं बना।
सीता ने रोटी खाई — कर्मवाच्य?
- रोटी सीता से खाया गया — मेल टूटा
- रोटी सीता से खाई गई
- सीता रोटी खाती है — काल पलट गया, वाच्य पूरा नहीं पूछा
- सीता से सोया नहीं जाता — दूसरी क्रिया
हल
- रोटी स्त्रीलिंग
खाई गई। खाया गया आम/पत्र पर।
दो सरल: «राम परिश्रमी है। राम सफल होगा।» मिश्र?
- राम परिश्रमी है और सफल होगा — यह संयुक्त
- जो परिश्रमी है वह सफल होगा
- राम परिश्रमी सफल — अधूरा
- राम से परिश्रम किया जाता है — वाच्य, रचना नहीं
हल
- जो…वह
आश्रित+प्रधान = मिश्र। और = संयुक्त, प्रश्न मिश्र माँगता है।
राम ने कहा, «मैं कल जाऊँगा।» (आने वाला कल) अप्रत्यक्ष?
- राम ने कहा कि मैं कल जाऊँगा — पुरुष नहीं पलटा
- राम ने कहा कि वह अगले दिन जाएगा
- राम ने कहा की वह जाएगा — की अशुद्ध
- राम से कहा जाता है — वाच्य
हल
- मैं→वह, आऊँगा→जाएगा, कल→अगले दिन
कि अव्यय।
«यहाँ आओ» का निषेध?
- यहाँ नहीं आओ — कुछ कुंजी इसे भी मानें, पक्का रूप मत+आज्ञा
- यहाँ मत आओ
- क्या यहाँ आओ?
- यहाँ आया जाता है
हल
- आज्ञा का नकार
मत। नहीं साधारण निषेध (वह नहीं आता)। प्रश्न अलग घर।
«वह सो नहीं सकती» का सही परिवर्तन?
- नींद उससे सोई जाती है — गढ़ंत कर्मवाच्य
- उससे सोया नहीं जाता
- वह सोई गई
- उसने नहीं सोया — ने+अकर्मक अशुद्ध-सा
हल
- अकर्मक
भाववाच्य, पुल्लिंग एकवचन सोया नहीं जाता — कर्ता स्त्री हो तब भी।
«राम पत्र लिखता हैं» — शुद्ध रूप (परिवर्तन नहीं)?
- पत्र राम से लिखा जाता है
- राम पत्र लिखता है
- राम ने पत्र लिखा
- जो राम है वह पत्र लिखता है
हल
- शुद्धि
केवल हैं→है। वाच्य, काल, मिश्र मत छेड़ो। शुद्धि-घर अशुद्धि; विकल्प में जाल यहीं रखा ताकि दो पृष्ठ मिलकर कटें।
अभ्यास
ये दस अलग कोण हैं — ऊपर वाले दस की नकल नहीं।
«अध्यापक कहानी सुनाएँगे» कर्मवाच्य?
- कहानी अध्यापक से सुनाई जाती है — वर्तमान हो गया
- कहानी अध्यापक से सुनाई जाएगी
- अध्यापक ने कहानी सुनाई
- कहानी सुनो
हल
- गे = भविष्य
जाएगी। कहानी स्त्रीलिंग।
पत्र मोहन से लिखा गया — कर्तृवाच्य?
- मोहन पत्र लिखता है — काल वर्तमान हो गया
- मोहन ने पत्र लिखा
- पत्र लिखा जाता है
- मोहन से चला नहीं जाता
हल
- गया = भूत
ने+लिखा। वर्तमान मत बना देना।
मिश्र «जो लड़का भाग रहा था वह गिर गया» का सरल?
- लड़का भाग रहा था और गिर गया — संयुक्त
- भागता हुआ लड़का गिर गया
- लड़के से भागा गया
- जो लड़का गिर गया
हल
- एक क्रिया प्रधान
कृदंत «भागता हुआ» विशेषण बन गया। और = संयुक्त, सरल नहीं।
सीता ने कहा, «मैं यहाँ रहूँगी।»
- सीता ने कहा कि मैं यहाँ रहूँगी
- सीता ने कहा कि वह वहाँ रहेगी
- सीता से कहा जाता है
- सीता ने कहा की वह रहेगी
हल
- मैं→वह, यहाँ→वहाँ, रहूँगी→रहेगी
कि। की मत।
गुरु ने कहा, «सच बोलो।» अप्रत्यक्ष के निकट?
- गुरु ने कहा कि सच बोलो — उद्धरण-सा लहजा बचा
- गुरु ने आज्ञा दी कि सच बोलें / कहा कि सच बोलना चाहिए
- गुरु से सच बोला जाता है
- सच मत बोलो
हल
- आज्ञा
अप्रत्यक्ष में बोलो ज्यों का त्यों कम चलता; चाहिए/बोलें पक्का।
दो सरल से संयुक्त: सूरज निकला। पक्षी चहचहाए।
- जब सूरज निकला तब पक्षी चहचहाए — यह मिश्र (जब–तब)
- सूरज निकला और पक्षी चहचहाए
- सूरज निकलते ही पक्षी चहचहाए — यह सरल (एक समापिका)
- सूरज से निकला जाता है
हल
- और
दो स्वतंत्र = संयुक्त। जब = मिश्र। कृदंत = सरल। प्रश्न संयुक्त माँगता है।
«क्या राम घर गया?» का विधान?
- राम घर मत गया
- राम घर गया
- राम से घर गया जाता है
- राम ने कहा कि वह गया
हल
- प्रश्न हटाओ
क्या और चिह्न कटें। निषेध मत लगाओ।
बच्चों ने आम खाए — कर्मवाच्य?
- आम बच्चों से खाया गया — वचन टूटा
- आम बच्चों से खाए गए
- बच्चे आम खाते हैं
- आम खाइए
हल
- आम बहुवचन
खाए गए। खाया गया एक आम पर।
लिखा जाता है — «जाता» यहाँ क्या है?
- गमन — राम जाता है वाला जाना
- कर्मवाच्य की सहायक क्रिया
- पूर्ण वर्तमान चुका
- लोकोक्ति
हल
- तीन जा
गमन अलग। चुका अलग। वाच्य में जाता/गया/जाएगा सहायक।
«मुख कमल के समान है» यह परिवर्तन का कौन-सा घर?
- कर्मवाच्य
- यह अलंकार (उपमा) है, वाच्य-परिवर्तन नहीं
- मिश्र वाक्य
- अप्रत्यक्ष कथन
हल
- समान
उपमा अलंकार की। यहाँ कर्ता-कर्म-भाव या कथन नहीं पलटा।
