Noteclerical

वर्ण, वर्णमाला और उच्चारण

Lesson 109 of 113

इस विषय में क्या आता है

परीक्षा पूछती है — हिंदी में स्वर कितने हैं, व्यंजन कितने हैं, अं–अः क्या हैं, ज कहाँ से बोलते हैं, ह कण्ठ्य है या तालव्य, क्ष / ज्ञ टूटकर क्या बनते हैं, इ की मात्रा कहाँ लगती है, हंस और हँस में क्या अंतर है। यह आवाज़ और लिपि की नींव है।

यहाँ पढ़ना है

11 स्वर, 33 व्यंजन, 2 अयोगवाह। ह्रस्व–दीर्घ। पाँच वर्ग। स्थान (कण्ठ से ओष्ठ)। अल्पप्राण–महाप्राण, घोष–अघोष। अनुनासिक, अनुस्वार, चंद्रबिंदु। मात्रा, हलंत, क में छिपा अ। क्ष त्र ज्ञ श्र। रेफ और पदेन। ड़ ढ़।

यहाँ नहीं घुसाना

सत् + जन = सज्जन — यह संधि है (अगला विषय)। समास, उपसर्ग, कारक, काल, अलंकार, छंद — अपने पृष्ठों पर। राजस्थानी मेला–किला सामान्य ज्ञान में। अंग्रेज़ी ध्वनि-चिह्न यहाँ नहीं।

एक पंक्ति: वर्ण = सबसे छोटी ध्वनि। अक्षर = जो एक साथ बोला जाए। दोनों को एक मत गिनो।

पाँच इकाइयाँ — ध्वनि से वाक्य तक

बोलने में एक सीढ़ी है। हर सीढ़ी बड़ी होती है। प्रश्न इन्हें मिला देता है, इसलिए पहले डिब्बे अलग करो।

इकाईक्या हैउदाहरण
ध्वनिकान में आने वाली आवाज़। अभी व्याकरण का नाम नहीं मिला।मुँह से निकलता «क्» का धक्का।
वर्णउस आवाज़ का व्याकरण वाला नाम और स्थान। भाषा की सबसे छोटी इकाई।क्, अ, म्
अक्षरजो एक साँस / एक धक्के में बोला जाए। स्वर अक्षर की जान है — बिना स्वर के अक्षर नहीं।क (= क्+अ), का, त्रि
शब्दअर्थ वाला अक्षरों का जोड़।कमल, राम
वाक्यपूरी बात। यहाँ नहीं — वाक्य-भेद अलग विषय है।राम जाता है।

लिपि अलग चीज़ है — आवाज़ को कागज़ पर लिखने का ढंग। हिंदी की लिपि देवनागरी है — सिरोरेखा, बाएँ से दाएँ, हर व्यंजन के अंदर अ छिपा रहता है। लिपि भाषा नहीं है: संस्कृत, हिंदी, मराठी एक लिपि बाँट सकती हैं।

भूल: कमल में अक्षर 3 हैं (क + म + ल)। अगर पूछे «टूटकर कितने वर्ण?» तो हर व्यंजन से अ अलग: क्+अ + म्+अ + ल्+अ = 6 वर्ण। स्कूल के प्रश्न अक्सर «अक्षर» माँगते हैं। प्रश्न का शब्द ध्यान से पढ़ो।
उदाहरण

विद्यालय में कितने अक्षर हैं?

हल

  1. स्वर ढूँढो

    हर अक्षर में एक स्वर (या उसकी मात्रा) होता है। वि = व्+इ, द्या = द्+य्+आ (संयुक्त + आ), ल = ल्+अ, य = य्+अ।

  2. जोड़ो

    वि · द्या · ल · य = 4 अक्षर। «विद् + यालय» समास सोचना गलत — वह अगला अध्याय है।

उत्तर4 अक्षर (वि-द्या-ल-य)

वर्णमाला — गिनती का झगड़ा

कक्षा-10 की हिंदी वर्णमाला देवनागरी के उन चिह्नों की सूची है जो व्याकरण रटवाता है। संस्कृत की पूरी सूची (ॠ ऌ ॡ) यहाँ तभी, जब विकल्प में «संस्कृत» लिखा हो।

11 स्वर अ से औ 2 अयोगवाह अं अः 33 व्यंजन क से ह

याद: 11 + 2 + 33 = 46। इसके ऊपर क्ष त्र ज्ञ और ड़ ढ़ जोड़ सकते हो — मूल गिनती नहीं।

प्रश्न का शब्दउत्तर
हिंदी में स्वर कितने?11 — अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ
स्वर + अयोगवाह?13 — ऊपर वाले 11 + अं + अः
मूल व्यंजन?33 — पाँच वर्ग (25) + अन्तस्थ 4 + ऊष्म 4
पूरी वर्णमाला 46?11 + 2 + 33। बहुत पुस्तकें यही लिखती हैं।
52 / 44 / 35 दिखे?किसी ने क्ष त्र ज्ञ + ड़ ढ़ जोड़ दिए, किसी ने अयोगवाह हटा दिए। विकल्प पढ़कर चुनो, अंधे 11 मत।

अयोगवाह नाम क्यों? अं और अः अकेले पूरा अक्षर नहीं बनते — उन्हें एक स्वर (अ) का सहारा चाहिए। इसलिए «अ-योग-वाह»: स्वर के योग से वाहित। स्वर की तरह मुँह खोलकर नहीं; व्यंजन की तरह स्पर्श भी नहीं। अलग डिब्बा।

भूल: संस्कृत वर्णमाला में ॠ ऌ ॡ भी स्वर हैं। हिंदी कक्षा-10 का उत्तर 11 है। ॠ को दीर्घ-ऋ जान लो, गिनती में मत घुसाओ जब तक प्रश्न «संस्कृत» न कहे। क्ष त्र ज्ञ संयुक्त हैं — 34वें–36वें व्यंजन नहीं।

स्वर — मुँह खुला, गले से होंठ तक

स्वर वह ध्वनि है जिसे बोलते समय साँस का रास्ता रुकता नहीं — जीभ का धक्का नहीं लगता। इसलिए स्वर विवृत (खुले) कहलाते हैं। हर अक्षर की जान स्वर है: क् अकेला अधूरा; क = क् + अ।

अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ

ह्रस्व और दीर्घ — समय

बोलने का काल (यहाँ अवधि; छंद वाला मात्रा-गणन अलग विषय है):

प्रकारकालकौनकितने
ह्रस्व1 मात्राअ इ उ ऋ4
दीर्घ2 मात्राआ ई ऊ ए ऐ ओ औ7
प्लुत3 मात्रासंस्कृत अ३ — हिंदी के 11 में नहींयहाँ 0

जोड़ी याद रखो: अ–आ, इ–ई, उ–ऊ। ऋ का दीर्घ ॠ संस्कृत में है; हिंदी के 11 में ऋ ह्रस्व अकेला बैठा है। ए ऐ ओ औ की ह्रस्व जोड़ी नहीं — ये पहले से दीर्घ / संध्यक्षर हैं।

मूल स्वर और संध्यक्षर

पहले तीन मूल (असली छोटे): अ इ उ। इन्हीं से बाकी खुलते हैं।

  • ए = अ + इ (कण्ठ + तालु मिलकर)
  • ऐ = अ + ई
  • ओ = अ + उ
  • औ = अ + ऊ

इन्हें संध्यक्षर / संयुक्त स्वर कहते हैं। प्रश्न: «ए किसके योग से?» उत्तर अ+इ। पूरा संधि-नियम (गुण/वृद्धि) अगले विषय पर — यहाँ केवल ये चार जोड़।

स्वर का उच्चारण स्थान

स्थानस्वरक्यों
कण्ठ्य (गला)अ आजीभ नीचे, आवाज़ गले से
तालव्य (तालु)इ ईजीभ तालु के पास
मूर्धन्य (मूर्धा, उलटी जीभ)ऋ (ॠ)जीभ तालु के पीछे मूर्धा पर
ओष्ठ्य (होंठ)उ ऊहोंठ गोल
कण्ठतालव्यए ऐगला + तालु — इसलिए संध्यक्षर
कण्ठोष्ठ्यओ औगला + होंठ
भूल: ऋ स्वर है, व्यंजन र नहीं। दोनों मूर्धन्य हैं, इसलिए मिल जाते हैं। र = अन्तस्थ व्यंजन; ऋ = ह्रस्व स्वर। कृष्ण में ृ = ऋ की मात्रा, र नहीं।

अयोगवाह, अनुस्वार, चंद्रबिंदु, विसर्ग — चार अलग काम

यहीं सबसे अधिक गलती होती है, क्योंकि तीन चिह्न पास-पास दिखते हैं: ं ँ ः, और पाँच व्यंजन ङ ञ ण न म भी नाक से बोलते हैं।

नामचिह्नक्या करता हैउदाहरण
अनुनासिक व्यंजनङ ञ ण न मवर्ग का पाँचवाँ — नाक + अपना स्थान। ये वर्ण हैं, चिह्न नहीं।नग, अङ्क (टूटकर)
अनुस्वारं ऊपर बिंदुअयोगवाह। अगला व्यंजन जिस वर्ग का, अनुस्वार उसी वर्ग के पाँचवें जैसा बोला जाता है।अंक = अङ्क; चंचल = चञ्चल
चंद्रबिंदुँस्वर को नाक से रंगना। अगला व्यंजन «वर्ग का पाँचवाँ» नहीं बनाना — केवल नासिक्य स्वर।हँस, चाँद, माँ
विसर्गः दो बिंदुअयोगवाह। स्वर के बाद हल्की «ह» जैसी ध्वनि। कण्ठ्य।दुःख, अतः, प्रायः

अनुस्वार कौन-सा पाँचवाँ बनेगा?

नियम: अनुस्वार के तुरंत बाद जो व्यंजन हो, उसी वर्ग का पंचम।

  • अं + क वर्ग → ङ   अंक = अङ्क, गंगा = गङ्गा
  • अं + च वर्ग → ञ   पंच = पञ्च, कंचन = कञ्चन
  • अं + ट वर्ग → ण   कंठ = कण्ठ
  • अं + त वर्ग → न   अंत = अन्त
  • अं + प वर्ग → म   कंप = कम्प

यदि बाद में श ष स ह य र ल व आएँ तो पुस्तकें अक्सर अनुस्वार को न/म या हल्का नासिक्य रखती हैं — परीक्षा के लिए वर्ग वाले पाँच नियम काफी हैं। विसर्ग संधि अगले विषय पर है।

हंस और हँसना। हंस (बिंदु, अनुस्वार) = पक्षी। हँस (चंद्रबिंदु) = हँसना। एक गोल बिंदु, दूसरा चाँद। «दोनों एक» गलत। चंद्रबिंदु अयोगवाह की 2-गिनती में नहीं — केवल अं और अः।

व्यंजन — 33, पाँच वर्ग के बाद 8

व्यंजन बोलते समय रास्ता रुकता या घिसता है। 33 = 25 स्पर्श (5×5 वर्ग) + 4 अन्तस्थ + 4 ऊष्म।

हर वर्ग की पंक्ति में पाँच: 1 अघोष अल्पप्राण, 2 अघोष महाप्राण, 3 घोष अल्पप्राण, 4 घोष महाप्राण, 5 घोष अल्पप्राण अनुनासिक। यही पाँच का ढाँचा हर प्रश्न की रीढ़ है — रटना नहीं, समझना।

वर्ग / स्थान1 अल्प · अघोष2 महा · अघोष3 अल्प · घोष4 महा · घोष5 अनुनासिक
कण्ठ्यकखगघङ
तालव्यचछजझञ
मूर्धन्यटठडढण
दन्त्यतथदधन
ओष्ठ्यपफबभम

अन्तस्थ — «बीच के»

स्पर्श जितना धक्का नहीं, ऊष्म जितना घिसाव नहीं। स्वर और व्यंजन के बीच। चारों अल्पप्राण + घोष।

वर्णस्थानयाद
यतालव्यइ/ई के घर, पर व्यंजन
रमूर्धन्यऋ के घर; ऋ स्वर, र व्यंजन
लदन्त्यजीभ दाँतों पर
वदन्तोष्ठ्यदाँत + होंठ। ओष्ठ्य मत लिखना — प वर्ग ओष्ठ्य है, व नहीं

ऊष्म — घिसाव, हवा

हवा रगड़ के साथ निकलती है। चारों महाप्राण। घोष केवल ह; श ष स अघोष।

वर्णस्थानघोष?
शतालव्यअघोष
षमूर्धन्यअघोष — उलटी जीभ वाला «ष»
सदन्त्यअघोष
हकण्ठ्यघोष — सबसे बड़ी भूल यहीं
तीन «श» जैसे: श तालु, ष मूर्धा, स दाँत। विशेष में श + ष दोनों। ह को तालव्य मत बनाओ क्योंकि श वहाँ है — ह गले से, ऊष्म, घोष, महाप्राण।

ड़ ढ़ और नुक्ता

  • ड़ ढ़ हिंदी की अपनी ध्वनि — ड ढ के नीचे बिंदी, जीभ टपककर। मूल 33 की संस्कृत-सूची में अलग नाम से नहीं; हिंदी पुस्तकें इन्हें विशेष व्यंजन लिखती हैं। पेड़, पढ़।
  • फ़ारसी-अरबी नुक्ता: क़ ख़ ग़ ज़ फ़ (क़लम, ख़त, ग़ज़ल, ज़रा, फ़र्क)। देवनागरी में लिखे जाते हैं; 33 की गिनती में मत जोड़ो।

उच्चारण स्थान — कहाँ से बोलते हैं

स्थान = आवाज़ मुँह के किस हिस्से से निकलती है। चित्र मत देखो। पाँच शब्द बोलो — कमल, चम्मच, टोपी, ताला, पंखा — और उँगली से महसूस करो कि धक्का कहाँ लगा। वही पाँच स्थान हैं।

आईने वाला प्रयोग

आईने के सामने धीरे-धीरे सिर्फ़ पहला अक्षर दोहराओ। जगह हाथ से पकड़नी है, चित्र से नहीं।

  1. कमल — कण्ठ (गला)। क क क बोलो। उँगली गले पर रखो — हल्का धक्का अंदर, होंठ लगभग नहीं हिलते। अ आ, क ख ग घ ङ, ह यहीं से। जैसे खांसी गले से निकलती है, वैसे ह भी गले से — तालु से नहीं।
  2. चम्मच — तालु (मुँह की छत)। च च च। जीभ की पीठ छत से चिपकती है, होंठ मुसकुराते से फैलते हैं। इ ई, च छ ज झ ञ, य, श यहीं। छत = तालु।
  3. टोपी — मूर्धा (जीभ उलटी)। ट ट ट। जीभ की नोक दाँतों पर नहीं, उलटकर छत के पिछले हिस्से से टकराती है। ऋ, ट ठ ड ढ ण, र, ष। परीक्षा का जाल: ट और त एक नहीं।
  4. ताला — दन्त (दाँत)। त त त। जीभ की नोक ऊपरी दाँतों के पीछे लगती है, उलटी नहीं। त थ द ध न, ल, स। ट मूर्धन्य है, त दन्त्य — दोनों एक नहीं।
  5. पंखा — ओष्ठ (होंठ)। प प प। दोनों होंठ बंद होकर खुलते हैं, जीभ आराम पर। उ ऊ, प फ ब भ म। मोमबत्ती के सामने बोलो — हवा होंठ से बाहर।
याद की डोर: गला → छत → उलटी जीभ → दाँत → होंठ। पीछे से आगे यही क्रम है। वर्ग भी इसी क्रम में लिखे जाते हैं: क-वर्ग, च-वर्ग, ट-वर्ग, त-वर्ग, प-वर्ग।

दो जगह से निकलने वाले

  • ए ऐ — गला + छत = कण्ठतालव्य। मुँह अ जितना खुला नहीं, जीभ तालु की तरफ़ उठी। शब्द: एक, ऐनक।
  • ओ औ — गला + होंठ = कण्ठोष्ठ्य। गले की आवाज़, होंठ गोल। शब्द: ओस, और।
  • व — दाँत + होंठ = दन्तोष्ठ्य। ऊपरी दाँत निचले होंठ से छूते हैं। प दोनों होंठ; व दाँत+होंठ। शब्द: वन, हवा।
तीन जाल जो शब्द से पकड़ो:
  • टमाटर vs तमाशा — पहला अक्षर उलटी जीभ (ट मूर्धा) और दाँत (त दन्त)। लिखने में पास लगते हैं, बोलने में जगह अलग।
  • शहर, षड्यंत्र, सड़क — तीन «स» जैसी आवाज़: श छत, ष उलटी जीभ, स दाँत।
  • हवा का ह गला; विशेष का श छत। दोनों घिसकर (ऊष्म) निकलते हैं, जगह एक नहीं।
स्थानस्वरव्यंजन
कण्ठ्यअ आक ख ग घ ङ, ह, विसर्ग
तालव्यइ ईच छ ज झ ञ, य, श
मूर्धन्यऋट ठ ड ढ ण, र, ष
दन्त्य—त थ द ध न, ल, स
ओष्ठ्यउ ऊप फ ब भ म
कण्ठतालव्यए ऐ—
कण्ठोष्ठ्यओ औ—
दन्तोष्ठ्य—व
उदाहरण

ह और श दोनों ऊष्म हैं। स्थान एक है?

हल

  1. ऊष्म ≠ स्थान

    प्रयत्न (कैसे बोलें) एक हो सकता है, स्थान (कहाँ) अलग है। ऊष्म = घिसाव। स्थान अलग तालिका।

  2. याद

    ह = कण्ठ्य। श = तालव्य। ष = मूर्धन्य। स = दन्त्य। «सब तालु से» गलत।

उत्तरनहीं — ह कण्ठ्य, श तालव्य

प्रयत्न — कैसे बोलें (स्थान के बाद)

स्थान = कहाँ। प्रयत्न = कितनी मेहनत / कैसा धक्का। दो परतें: भीतर (आभ्यंतर — मुँह खुला या बंद) और बाहर (बाह्य — स्पर्श / ऊष्म / अन्तस्थ)।

आभ्यंतर

  • विवृत — मुँह अधिक खुला: स्वर।
  • संवृत — रास्ता बंद / कसा: व्यंजन।
  • अन्तस्थ को पुस्तकें कभी-कभी अर्धविवृत कहती हैं — परीक्षा में अन्तस्थ नाम काफी है।

बाह्य — तीन कोश

प्रयत्नकौनकितने
स्पर्शपाँचों वर्ग पूरे (क से म)25
अन्तस्थय र ल व4
ऊष्मश ष स ह4

25 + 4 + 4 = 33। अनुनासिक ङ ञ ण न म स्पर्श के अंदर हैं (वर्ग का पाँचवाँ), अलग 34वाँ कोश नहीं।

अल्पप्राण / महाप्राण — साँस

अल्पप्राण = कम हवा। महाप्राण = अधिक हवा (साथ में «ह» की झलक)।

  • हर वर्ग: 1 और 3 अल्पप्राण; 2 और 4 महाप्राण; 5वाँ (अनुनासिक) अल्पप्राण।
  • इसलिए क वर्ग अल्पप्राण = क ग ङ। महाप्राण = ख घ।
  • अन्तस्थ चारों अल्पप्राण।
  • ऊष्म चारों महाप्राण (श ष स ह)।

घोष / अघोष — गले का कंपन

घोष = स्वर-यंत्र काँपते हैं। अघोष = नहीं काँपते।

  • वर्ग 1–2 अघोष; 3–4–5 घोष।
  • क ख अघोष; ग घ ङ घोष। यही क्रम हर वर्ग में।
  • य र ल व ह = घोष। श ष स = अघोष।
एक वर्ण पर पूरी मुहर। घ = कण्ठ्य + स्पर्श + महाप्राण + घोष। न = दन्त्य + स्पर्श + अल्पप्राण + घोष + अनुनासिक। व = दन्तोष्ठ्य + अन्तस्थ + अल्पप्राण + घोष। प्रश्न एक गुण पूछता है, तुम चार सोचकर विकल्प काटो।
उदाहरण

ख की सही छाप?

हल

  1. वर्ग का दूसरा

    क वर्ग, दूसरा। स्थान कण्ठ्य। दूसरा = महाप्राण + अघोष।

  2. नहीं

    घोष 3–4–5 होता (ग घ ङ)। अनुनासिक केवल ङ। ऊष्म नहीं — स्पर्श है।

उत्तरकण्ठ्य, स्पर्श, महाप्राण, अघोष

मात्रा, हलंत, छिपा हुआ अ

देवनागरी में पूरा व्यंजन-चिह्न क पहले से क्+अ है। अलग से अ की मात्रा नहीं लगती। दूसरे स्वर मात्रा बनकर चिपकते हैं।

मात्रा कहाँ बैठती है — क के चारों ओर क े ै ं ऊपर ु ू ृ नीचे ि बाएँ → कि ा ी दाएँ → का की ो ौ ऊपर+दाएँ

इ की मात्रा बाएँ लगती है, पर बोलते समय इ बाद में आता है: कि = क् + इ, «इक्» नहीं।

स्वरमात्राक + मात्राजगह
अ— (कोई नहीं)कअंदर छिपी
आाकादाएँ
इिकिबाएँ / पहले — सबसे प्रसिद्ध भूल
ईीकीदाएँ, पूरी खड़ी
उ ऊु ूकु कूनीचे
ऋृकृनीचे, आँख जैसी
ए ऐे ैके कैऊपर
ओ औो ौको कौऊपर + दाएँ ा
अं अःं ःकं कःऊपर बिंदु / बाद दो बिंदु

हलंत / विराम ् छिपे अ को निकाल देता है: क्। संयुक्त तब बनता है जब दो व्यंजन के बीच स्वर न हो: क्+त = क्त (रक्त)।

अक्षर गिनना: जितनी बार स्वर (मात्रा या छिपा अ) उच्चारण में आए, उतने अक्षर। हलंत वाला टुकड़ा अगले स्वर से चिपककर एक अक्षर।

  • राम = रा + म = 2
  • आकाश = आ + का + श = 3
  • कृष्ण = कृ + ष्ण = 2
  • स्त्री = 1 (स्+त्+र्+ई — एक ही स्वर ई)
  • विद्यालय = 4 (ऊपर का उदाहरण)
भूल: इ की मात्रा ि लिखने में व्यंजन से पहले, बोलने में बाद में। कि = क्+इ। बच्चे उलटा पढ़ते हैं। ई की मात्रा ी दाएँ — दोनों मत मिलाओ।

संयुक्ताक्षर, क्ष त्र ज्ञ श्र, रेफ

जो पुस्तक वर्णमाला के अंत में क्ष त्र ज्ञ छापती है, वे नए वर्ण नहीं — दो-दो व्यंजन का चिपकना।

दिखताटूटकरगलत तोड़
क्षक् + षक्+श — श तालव्य, ष मूर्धन्य; क्ष में ष है
त्रत् + रट्+र — त दन्त्य, ट मूर्धन्य
ज्ञज् + ञ«ग्य» / ग्+य — बोलचाल; व्याकरण ज्+ञ
श्रश् + रष्+र मत — श तालव्य; श्रम, आश्रम, शृंगार में शृ अलग मात्रा

इन्हें 33 के ऊपर अतिरिक्त संयुक्त गिनो तो गिनती बढ़ जाएगी — प्रश्न यदि मूल व्यंजन पूछे तो 33, इन्हें बाहर रखो।

र के दो रूप

र समूह में पहले आए या बाद — लिखाई बदलती है।

रेफ — र् पहले धर्म कर्म सूर्य अगले अक्षर के ऊपर खड़ा दंड पदेन / रकार — र बाद में क्रम प्र त्र ग्रह पिछले व्यंजन से चिपका र

कर्म में र का रेफ म पर; क्रम में क्+र = क्र। अर्थ भी अलग (काम / क्रम)।

इस पृष्ठ के बाद क्या आता है

दो वर्ण मिलकर नया रूप (सत्+जन, देव+इंद्र) = संधि — अगला विषय। यहाँ केवल एक शब्द के अंदर के वर्ण। समास दो शब्दों का जोड़ — उससे भी अलग।

प्रश्न-बैंक

प्र. 1

हिंदी (कक्षा-10) में मूल स्वर कितने हैं?

  1. 13, क्योंकि अं अः भी स्वर हैं
  2. 11 — अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ
  3. 33
  4. 4, केवल अ इ उ ऋ

हल

  1. गिनती

    ह्रस्व 4 + दीर्घ 7 = 11। अं अः अयोगवाह हैं, स्वर की 11 में नहीं। 13 तब, जब प्रश्न «अयोगवाह मिलाकर» कहे।

  2. 33 / 4

    33 व्यंजन हैं। 4 केवल ह्रस्व — पूरी स्वर-सूची नहीं।

उत्तरB
प्र. 2

अं और अः को व्याकरण क्या कहता है?

  1. ऊष्म व्यंजन
  2. अयोगवाह
  3. संध्यक्षर
  4. अन्तस्थ

हल

  1. नाम

    स्वर के योग से चलते हैं, इसलिए अयोगवाह। अनुस्वार + विसर्ग।

  2. नहीं

    ऊष्म = श ष स ह। संध्यक्षर = ए ऐ ओ औ। अन्तस्थ = य र ल व।

उत्तरB
प्र. 3

ज का उच्चारण स्थान?

  1. कण्ठ्य, जैसे क
  2. तालव्य (च वर्ग)
  3. मूर्धन्य (ट वर्ग)
  4. दन्तोष्ठ्य, जैसे व

हल

  1. वर्ग

    च छ ज झ ञ = तालव्य स्पर्श। ज तीसरा है, इसलिए घोष अल्पप्राण भी — पर प्रश्न स्थान माँगता है।

  2. मिलान

    क वर्ग कण्ठ। ट मूर्धा। व अन्तस्थ दन्तोष्ठ्य, ज नहीं।

उत्तरB
प्र. 4

ट ठ ड ढ ण किस स्थान के हैं?

  1. दन्त्य — जीभ दाँत पर
  2. मूर्धन्य — जीभ तालु के मूर्धा पर
  3. तालव्य — च वर्ग
  4. ओष्ठ्य — प वर्ग

हल

  1. उलटी जीभ

    मूर्धा = कठोर तालु का पिछला भाग। ट वर्ग यहीं। त वर्ग दन्त्य (सीधी जीभ दाँत पर)।

  2. साथ

    इस स्थान पर र और ष भी। ट ≠ त — सबसे आम लिपि-भूल।

उत्तरB
प्र. 5

ह की सही छाप?

  1. तालव्य ऊष्म, जैसे श
  2. कण्ठ्य, ऊष्म, महाप्राण, घोष
  3. ओष्ठ्य स्पर्श, जैसे प
  4. अयोगवाह, जैसे अं

हल

  1. गला

    ह कण्ठ से। ऊष्म = घिसाव। महाप्राण। घोष (श ष स अघोष हैं, ह नहीं)।

  2. काटो

    श तालव्य। प स्पर्श ओष्ठ्य। अं अयोगवाह चिह्न है, व्यंजन-वर्ण नहीं।

उत्तरB
प्र. 6

व का स्थान?

  1. ओष्ठ्य, प वर्ग जैसा
  2. दन्तोष्ठ्य (दाँत + होंठ), अन्तस्थ
  3. तालव्य, य जैसा
  4. कण्ठ्य

हल

  1. दो स्थान

    होंठ + ऊपर के दाँत। इसलिए दन्तोष्ठ्य। अन्तस्थ चार में चौथा।

  2. प ≠ व

    प फ ब भ म शुद्ध ओष्ठ्य स्पर्श। य तालव्य अन्तस्थ। व को ओष्ठ्य लिखना आधी भूल।

उत्तरB
प्र. 7

क्ष टूटकर क्या है?

  1. क् + श
  2. क् + ष
  3. ख् + स
  4. मूल 34वाँ व्यंजन, टूटता नहीं

हल

  1. मूर्धा वाला ष

    क्ष = क्+ष। ष मूर्धन्य ऊष्म। श तालव्य — गलत जोड़ी।

  2. गिनती

    संयुक्त है, 33 के अंदर नया वर्ण नहीं। चौथा विकल्प «मूल» गलत।

उत्तरB
प्र. 8

ज्ञ व्याकरण में क्या है?

  1. ग् + य (ग्य)
  2. ज् + ञ
  3. ज् + न
  4. तालव्य मूल स्वर

हल

  1. नियम

    ज् (तालव्य स्पर्श) + ञ (उसी वर्ग का अनुनासिक)। दोनों तालव्य — इसलिए एक चिह्न ज्ञ।

  2. बोलचाल

    «ग्य» सुनाई देता है, इसलिए ग्+य लिख देते हैं। प्रश्न व्याकरण माँगता है: ज्+ञ। न दन्त्य, ञ तालव्य।

उत्तरB
प्र. 9

क वर्ग के महाप्राण कौन हैं?

  1. क ग ङ
  2. ख घ
  3. क ख
  4. ग घ ङ

हल

  1. दूसरा और चौथा

    महाप्राण = अधिक साँस = वर्ग का दूसरा और चौथा: ख घ।

  2. दूसरी धारी

    क ग ङ = अल्पप्राण। क ख = अघोष (1–2), दोनों महाप्राण नहीं। ग घ ङ = घोष।

उत्तरB
प्र. 10

हँसना में नाक वाला चिह्न क्या है? सत्+जन इस अध्याय में?

  1. अनुस्वार ं ; और हाँ, संयुक्त यहीं पढ़ना
  2. चंद्रबिंदु ँ ; सत्+जन संधि है, अगला विषय
  3. विसर्ग ः ; समास यहीं
  4. अनुनासिक व्यंजन ङ

हल

  1. हँसना

    हँस = चंद्रबिंदु, स्वर नासिक्य। हंस (बिंदु) = पक्षी। ङ अलग वर्ण, यहाँ नहीं लिखा।

  2. सीमा

    सत्+जन = सज्जन — व्यंजन/विसर्ग संधि, अगला विषय। समास दो शब्द। इस पृष्ठ पर केवल चिह्न-पहचान।

उत्तरB

अभ्यास

12345 678910

अ. 1

ए और ऐ का स्थान?

  1. कण्ठ्य, अ आ जैसा
  2. कण्ठतालव्य (संध्यक्षर)
  3. ओष्ठ्य
  4. मूर्धन्य, ऋ जैसा

हल

  1. जोड़

    ए = अ+इ (कण्ठ+तालु)। ऐ = अ+ई। इसलिए कण्ठतालव्य। ओ औ कण्ठोष्ठ्य।

उत्तरB
अ. 2

ङ की सही बात?

  1. कण्ठ्य, स्पर्श, अनुनासिक, अल्पप्राण, घोष
  2. तालव्य अनुनासिक — वह ञ है
  3. अयोगवाह अं
  4. ऊष्म महाप्राण

हल

  1. वर्ग का पाँचवाँ

    क वर्ग पंचम। स्थान कण्ठ। पाँचवाँ = अनुनासिक + अल्पप्राण + घोष + स्पर्श।

  2. अगला

    ञ च वर्ग। अं चिह्न है, ङ वर्ण। ऊष्म नहीं।

उत्तरA
अ. 3

ष कहाँ से?

  1. तालव्य, श जैसा
  2. मूर्धन्य ऊष्म, अघोष, महाप्राण
  3. दन्त्य, स जैसा
  4. कण्ठ्य, ह जैसा

हल

  1. तीन श-जैसी

    श तालु, ष मूर्धा, स दाँत। ष = मूर्धन्य + ऊष्म + अघोष + महाप्राण। ह घोष कण्ठ्य।

उत्तरB
अ. 4

इ की मात्रा ि कहाँ लगती है?

  1. व्यंजन से पहले (बाएँ); बोलने में इ बाद में (क्+इ = कि)
  2. हमेशा दाएँ, ई जैसी
  3. नीचे, उ जैसी
  4. हलंत की जगह

हल

  1. लिखाई ≠ बोलना

    कि = क् + इ। मात्रा-चिह्न बाएँ, ध्वनि बाद में। ी दाएँ = ई। ु नीचे = उ। हलंत अ हटाता है, इ नहीं लगाता।

उत्तरA
अ. 5

धर्म में र का रूप?

  1. पदेन — ध्+र = ध्र, जैसे क्रम
  2. रेफ — र् पहले, म के ऊपर
  3. हलंत-रहित पूरा र अक्षर अलग
  4. विसर्ग

हल

  1. ऊपर दंड

    धर्म = ध + र्म। र् म से पहले, रेफ म पर। क्रम में र बाद में (क्+र) = पदेन।

उत्तरB
अ. 6

मूल व्यंजन गिनती, क्ष को मिलाकर?

  1. 34, क्योंकि क्ष वर्णमाला में छपता है
  2. 33; क्ष संयुक्त (क्+ष), गिनती में नहीं
  3. 25, केवल वर्ग
  4. 11

हल

  1. 33

    25 स्पर्श + 4 अन्तस्थ + 4 ऊष्म। क्ष त्र ज्ञ छपावट अतिरिक्त। 25 अधूरा। 11 स्वर।

उत्तरB
अ. 7

अ की सही छाप?

  1. दीर्घ, कण्ठतालव्य
  2. ह्रस्व, कण्ठ्य, विवृत स्वर; क के अंदर यही छिपा
  3. व्यंजन स्पर्श
  4. अयोगवाह

हल

  1. छोटा गला

    अ ह्रस्व (1 मात्रा) + कण्ठ्य। दीर्घ जोड़ी आ। क में छिपा। अयोगवाह अं/अः। स्पर्श व्यंजन का काम।

उत्तरB
अ. 8

ऋ क्या है?

  1. ह्रस्व स्वर, मूर्धन्य (र व्यंजन नहीं)
  2. अन्तस्थ व्यंजन, र का ही दूसरा नाम
  3. दीर्घ स्वर ॠ, हिंदी 11 का हिस्सा
  4. दन्त्य ऊष्म

हल

  1. स्वर

    ऋ 11 में, ह्रस्व, मूर्धन्य। र अन्तस्थ व्यंजन — एक घर, अलग कोश। ॠ संस्कृत दीर्घ, हिंदी 11 में नहीं। ऊष्म नहीं।

उत्तरA
अ. 9

गंगा में अनुस्वार असल में कौन-सा वर्ण?

  1. ङ — क वर्ग के बाद, गङ्गा
  2. ञ — च वर्ग
  3. न — त वर्ग
  4. चंद्रबिंदु, हँस जैसा

हल

  1. अगला वर्ग

    ं के बाद ग = क वर्ग → पंचम ङ। गङ्गा। ञ तभी जब च छ ज झ। चंद्रबिंदु अलग चिह्न, यहाँ बिंदु है।

उत्तरA
अ. 10

«कमल + नयन = कमलनयन» और «इ+आ = ई» — इस पृष्ठ पर?

  1. हाँ, दोनों संयुक्त व्यंजन
  2. नहीं — पहला समास, दूसरा संधि; यहाँ वर्ण-स्थान-मात्रा
  3. हाँ, दोनों अयोगवाह
  4. हाँ, दोनों मूर्धन्य

हल

  1. सीमा

    दो शब्द जोड़ = समास। दो वर्ण मिलकर बदलें = संधि (अगला विषय)। संयुक्त = एक शब्द के अंदर हलंत-चिपक (क्ष, त्र)। मत मिलाओ।

उत्तरB

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अगला विषय: संधि।