इस विषय में क्या आता है
परीक्षा पूछती है — प्रहार में उपसर्ग कौन, लेखक में प्रत्यय कौन, सुजन–कुजन–दुर्जन में अर्थ कैसे पलटा, बचपन कृत् है या तद्धित, बेईमान किस भाषा का उपसर्ग, निर्धन संधि है या उपसर्ग। एक काम: शब्द के आगे और पीछे का टुकड़ा अलग करो, मूल पहचानो, नाम लिखो।
यहाँ पढ़ना है
उपसर्ग की परिभाषा। संस्कृत के 22। हिंदी–तद्भव। उर्दू–फारसी–अरबी। एक धातु/मूल पर कई उपसर्ग। कृत् और तद्धित प्रत्यय। स्त्री प्रत्यय की सूची (लिंग-सिद्धांत नहीं)। दोनों एक शब्द में।
यहाँ नहीं घुसाना
अ+उ=ओ, निः+धन का विसर्ग-नियम — संधि। राजपुत्र, नीलकंठ — समास। पुल्लिंग–स्त्रीलिंग के पूरे नियम, वचन, पुरुष — अगला विषय। कारक, काल अपने पृष्ठों पर।
एक पंक्ति: उपसर्ग = शब्द के आगे लगकर अर्थ मोड़ने वाला शब्दांश। प्रत्यय = शब्द के पीछे लगकर नया शब्द बनाने वाला शब्दांश। दोनों अकेले वाक्य में शब्द नहीं बनते।
चार डिब्बे जो प्रश्न मिला देता है
| नाम | कहाँ लगता है | क्या मिलता है | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| उपसर्ग | आगे | शब्दांश + शब्द/धातु | प्र+हार = प्रहार |
| प्रत्यय | पीछे | शब्द/धातु + शब्दांश | लिख्+अक = लेखक |
| समास | दोनों ओर शब्द | शब्द + शब्द (विभक्ति गिरी) | राज+पुत्र = राजपुत्र |
| संधि | सीमा पर वर्ण | वर्ण विकार | निः+धन = निर्धन |
निर्धन — संधि-प्रश्न हो तो निः+धन, विसर्ग। उपसर्ग-प्रश्न हो तो निर्+धन, संस्कृत उपसर्ग निर्। प्रतिदिन — समास-प्रश्न हो तो अव्ययीभाव; उपसर्ग-प्रश्न हो तो प्रति+दिन। अज्ञान — समास नञ्; उपसर्ग अ। जो टैग लिखा हो वही उत्तर। उपसर्ग क्या करता है
मूल का अर्थ नया मोड़ लेता है — कभी उलटा, कभी जोर, कभी दिशा। उपसर्ग वाक्य में अकेला नहीं बैठता: «वह प्र गया» गलत; «प्रहार किया» सही।
- अर्थ पलट: जय × पराजय, मान × अपमान, गुण × अवगुण।
- अर्थ बढ़: प्रबल, अत्यंत, सुप्रसिद्ध।
- दिशा/स्थिति: आगमन (इधर), निर्गम (बाहर), उत्थान (ऊपर), निपात (नीचे)।
- नया शब्द: हार से प्रहार, आहार, संहार, विहार, उपहार — पाँच अलग चीजें।
स्रोत तीन: संस्कृत (परीक्षा का बड़ा हिस्सा), हिंदी/तद्भव, उर्दू–फारसी–अरबी। अंग्रेज़ी उपसर्ग कक्षा-10 हिंदी में कम।
संस्कृत के 22 उपसर्ग
सूची रटो, अर्थ उदाहरण से बाँधो। निस्/निर् और दुस्/दुर् जोड़े हैं — लिखने का रूप आगे के वर्ण पर निर्भर (संधि-पृष्ठ का काम); यहाँ दोनों उपसर्ग गिने जाते हैं। उत् का रूप उद् भी (उद्गम)। अपि हिंदी में कम, सूची पूरी रखने के लिए है।
| उपसर्ग | मुख्य अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्र | आगे, अधिक, खूब | प्रहार, प्रस्थान, प्रसिद्ध, प्रबल, प्रकाश, प्रगति |
| परा | पीछे, उलटा, अत्यंत | पराजय, पराभव, पराक्रम, पराधीन, परावर्त |
| अप | दूर, हीन, उलटा अच्छाई का | अपमान, अपयश, अपकार, अपहरण, अपव्यय |
| सम् | साथ, पूर्ण, ठीक | संयोग, संतोष, संहार, संस्कृति, संभव, सम्मान |
| अनु | पीछे, समान, अनुकूल | अनुवाद, अनुकरण, अनुज, अनुकूल, अनुभव, अनुशासन |
| अव | नीचे, हीन | अवगुण, अवतार, अवकाश, अवमान, अवगत, अवनति |
| निस् | बिना, बाहर | निस्संदेह, निस्तार, निश्चय (निः/निस् + चय) |
| निर् | बिना, बाहर | निर्जन, निर्दोष, निर्माण, निर्वाह, निरक्षर, निर्बल |
| दुस् | कठिन, बुरा | दुस्साहस, दुस्तर, दुश्चक्र |
| दुर् | बुरा, कठिन | दुर्जन, दुर्गुण, दुर्लभ, दुर्गंध, दुर्दिन, दुर्भाग्य |
| वि | विशेष, अलग, अभाव | विजय, विदेश, विनाश, विज्ञान, विरोध, विहार |
| आ | तक, से, चारों ओर, इस ओर | आगमन, आहार, आजीवन, आबद्ध, आरंभ, आगत |
| नि | नीचे, भीतर, निषेध | निवास, निषिद्ध, निपात, निगम, निरोध, निवारण |
| अधि | ऊपर, श्रेष्ठ, अधिकार | अधिक, अध्यक्ष, अधिपति, अध्यात्म, अधिकार, अध्ययन |
| अपि | भी, निकट (हिंदी में कम) | अपितु; अधि/अति से मत मिलाओ |
| अति | अधिक, सीमा से ऊपर | अत्यंत, अतिक्रमण, अतिवृष्टि, अतिरिक्त, अतिशय |
| सु | अच्छा, सरल | सुजन, सुगम, सुयश, सुपुत्र, सुदूर, सुशोभित |
| उत् / उद् | ऊपर, उत्कर्ष | उत्तम, उत्थान, उत्पत्ति, उत्साह, उद्गम, उद्धार |
| अभि | ओर, सामने, अधिक | अभिमान, अभिषेक, अभिमुख, अभिभावक, अभिलाषा, अभिनय |
| प्रति | उलटा, हर एक, सामने | प्रतिध्वनि, प्रतिकार, प्रतिमा, प्रतिदिन, प्रतिक्रिया, प्रतिज्ञा |
| परि | चारों ओर, पूर्ण | परिचय, परिश्रम, परिवार, परिणाम, परिवर्तन, पर्यटन |
| उप | निकट, सहायक, गौण | उपकार, उपवास, उपनाम, उपग्रह, उपवन, उपकरण |
सुंदर को हमेशा सु+ंदर मत तोड़ो — परीक्षा स्पष्ट «सुजन» जैसे जोड़ माँगती है। एक मूल, कई उपसर्ग — अर्थ की प्रयोगशाला
रटने का सबसे मजबूत तरीका: एक जड़ पकड़ो, उपसर्ग बदलो।
हार
| शब्द | जोड़ | अर्थ की दिशा |
|---|---|---|
| प्रहार | प्र+हार | आगे बढ़कर चोट |
| आहार | आ+हार | अपनी ओर लेना — भोजन |
| संहार | सम्+हार | पूर्ण नाश |
| विहार | वि+हार | विशेष घूमना, विहार-स्थल |
| उपहार | उप+हार | निकट लाकर देना — भेंट |
| परिहार | परि+हार | चारों ओर से हटाना — त्याग |
गम् / गमन
- आगमन — इस ओर आना · निर्गम / निर्गमन — बाहर जाना
- संगम — साथ मिलना · उद्गम — ऊपर/स्रोत से निकलना
- निगम — नियम-संगठन / जाना-रहना वाला रूप · सुगम — आसानी से गम्य
भू / भव
- संभव — हो सकना · अनुभव — पीछे से जानना
- परिभव — चारों ओर से नीचा · अभिभव — दबाना
- प्रभाव — आगे पड़ने वाला असर · विभूति — विशेष वैभव
कार / कृ
- उपकार — भलाई · अपकार — बुराई
- अधिकार — ऊपर का हक · प्रतिकार — उलटा जवाब
- सत्कार — अच्छा आदर (सत् यहाँ मूल के साथ; उपसर्ग-प्रश्न पर ध्यान)
आहार और प्रहार में मूल एक है। उपसर्ग क्या बदलता है?
हल
- मूल हार
लेना / हरना वाला धातु-अंश।
- आ vs प्र
आ = अपनी ओर (भोजन लेना)। प्र = आगे (चोट चलाना)। प्रत्यय नहीं, दोनों के आगे टुकड़ा है।
हिंदी / तद्भव उपसर्ग
बोलचाल से आए छोटे टुकड़े। संस्कृत 22 की सूची में सब नहीं हैं — अलग घर।
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अ / अन | निषेध | अछूता, अनमोल, अनजान, अनकहा (स्वर से पहले अन) |
| अध | आधा / अधूरा | अधपका, अधमरा, अधजला, अधकचरा |
| उन | एक कम (संख्या) | उनतीस, उनतालीस, उनचास, उनहत्तर |
| औ | उलटा / हीन | औगुन, औघट, औतार |
| कु | बुरा | कुपुत्र, कुमार्ग, कुसंग, कुचाल |
| नि | निषेध / हीन | निडर, निकम्मा, निगोड़ा |
| भर | पूरा | भरपेट, भरसक, भरपूर, भरदिन |
| सु | अच्छा (हिंदी प्रयोग) | सुघड़, सुजान, सुडौल, सुघरे |
| बिन / बिना | बिना | बिनमाँगे, बिनबादल, बिनकाम |
| पर | दूसरा / पार | परदेसी, परलोक, परस्त्री, पराये |
| चिर | लंबा समय | चिरकाल, चिरंजीव, चिरपरिचित |
| दु | बुरा / दयनीय | दुबला, दुधारू (कुछ सूची में) |
अ / अन vs नञ् समास: अनजान हिंदी उपसर्ग। अज्ञान तत्सम, समास-पृष्ठ पर नञ्। प्रश्न «उपसर्ग छाँटो» में अनजान का अन; «समास» में अज्ञान का नञ्।
उर्दू–फारसी–अरबी उपसर्ग
हिंदी अखबार और सरकारी गद्य में बहुत। सूची अलग रखो, संस्कृत से मत मिलाओ।
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| बे | बिना | बेईमान, बेशर्म, बेचैन, बेवकूफ, बेकाम |
| बा | साथ / वाला | बाकायदा, बाअदब, बामुहावरा |
| बद | बुरा | बदनाम, बदमाश, बदबू, बददिमाग |
| ला | बिना | लाजवाब, लापता, लावारिस, लापरवाह |
| कम | थोड़ा / हीन | कमज़ोर, कमबख्त, कमसिन |
| गैर | अन्य / नहीं | गैरहाज़िर, गैरकानूनी, गैरजिम्मेदार |
| ना | नहीं | नापसंद, नाराज़, नाकाम, नालायक |
| हम | साथ | हमउम्र, हमराह, हमदर्द, हमवतन |
| दर | में / पर | दरअसल, दरकिनार, दरख्वास्त |
| सर | सिर / मुख्य | सरपंच, सरकार, सरताज |
| बिला | बिना | बिलावजह, बिलाशक |
| खुश | अच्छा | खुशबू, खुशहाल, खुशकिस्मत |
| हर | प्रत्येक | हररोज़, हरदम, हरकोई |
प्रत्यय क्या — दो बड़े घर
प्रत्यय शब्द के अंत में लगता है, नया शब्द देता है, अकेला नहीं चलता। दो घर याद रखो — परीक्षा यही पूछती है।
| घर | किससे बनता है | क्या बनता है | पहचान |
|---|---|---|---|
| कृत् | धातु (क्रिया-मूल) | संज्ञा / विशेषण / कभी क्रिया-रूप | मूल में करना-वाले काम की गंध: लिख्, पठ्, कृ, गम्, नच् |
| तद्धित | संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण — धातु नहीं | नया संज्ञा / विशेषण / भाव | मूल पहले से नाम/गुण: धर्म, राष्ट्र, बच्चा, दुकान, लाल |
कसौटी: प्रत्यय काटो। बचा टुकड़ा क्रिया है? कृत्। नाम या गुण है? तद्धित। लेखक ← लिखना (धातु) = कृत्। धार्मिक ← धर्म (संज्ञा) = तद्धित। लिखाई ← लिख् = कृत्। मिठाई ← मीठा (विशेषण) = तद्धित। एक ही «आई» दो घर — मूल देखो।
कृत् प्रत्यय — धातु के पीछे
| प्रत्यय | काम | उदाहरण |
|---|---|---|
| अक | करने वाला | लेखक, पाठक, गायक, नायक, सहायक, सेवक |
| अन / आ | भाव / काम | पठन, गमन, मरण, चलन; पूजा, शिक्षा (आ) |
| अना | भाव / साधन | गणना, कामना, याचना, रचना |
| अनीय | चाहिए / योग्य | पठनीय, शोभनीय, रमणीय, दर्शनीय |
| य / त्य | योग्य / कार्य | देय, पेय, गेय, कृत्य |
| तव्य | कर्तव्य भाव | कर्तव्य, वक्तव्य, गंतव्य, ज्ञातव्य |
| त (क्त) | हो चुका / विशेषण | कृत, पठित, लिखित, गत, दृष्ट, जात |
| तृ / ता | कर्ता | कर्ता, नेता, दाता, वक्ता, श्रोता |
| ति | भाव संज्ञा | गति, मति, रति, शक्ति, भक्ति, युक्ति |
| आई | काम / भाव (हिंदी) | लिखाई, सिलाई, कमाई, पढ़ाई, लड़ाई |
| आवट | ढंग / परिणाम | सजावट, मिलावट, बनावट, लिखावट |
| आहट | अवस्था | घबराहट, चिकनाहट, कड़वाहट, भिनभिनाहट |
| आन | भाव | उड़ान, मिलान, पहचान, थकान |
| आक / आकू | करने वाला (जोर) | तैराक, लड़ाकू, उड़ाकू |
| ऐया / वैया | करने वाला | गवैया, नचैया, खिवैया |
| हार / हारा | करने वाला | लकड़हारा, पानीहार, खेवनहार |
| वाला | करने वाला | पढ़नेवाला, रखवाला, गानेवाला |
| ऊ | आदत वाला | खाऊ, पीऊ, उड़ाऊ, चालू |
| अक्कड़ | आदत (निंदा) | घुमक्कड़, पियक्कड़, भुलक्कड़ |
गायक और मिठाई दोनों के अंत में «क/आई» जैसा टुकड़ा। कृत् कौन?
हल
- गायक
गा + अक। गा धातु है → कृत्।
- मिठाई
मीठा + आई। मीठा विशेषण है, धातु नहीं → तद्धित।
तद्धित प्रत्यय — नाम/गुण के पीछे
| प्रत्यय | काम | उदाहरण |
|---|---|---|
| इक | संबंध / विषय | धार्मिक, मासिक, वार्षिक, ऐतिहासिक, दैनिक |
| ईय | संबंध | राष्ट्रीय, भारतीय, स्थानीय, जातीय |
| ता | भाव | मानवता, सुंदरता, मधुरता, व्यापकता |
| त्व | भाव (तत्सम) | बंधुत्व, नेतृत्व, अस्तित्व, महत्व |
| पन | भाव (हिंदी) | बचपन, अपनापन, पागलपन, लड़कपन |
| आई | भाव / वस्तु | मिठाई, चतुराई, भलाई, ऊँचाई, चौड़ाई |
| इमा | गुण-भाव | लालिमा, नीलिमा, गरिमा, लघिमा, महिमा |
| इत | युक्त / हुआ | पुष्पित, फलित, लज्जित, पीड़ित, हर्षित |
| वाला | पेशा / संबंध | दूधवाला, दिल्लीवाला, टोपीवाला |
| दार | रखने वाला | दुकानदार, ईमानदार, किराएदार, हिस्सेदार |
| ची | पेशा (फारसी) | तोपची, खजांची, बाजीगर नहीं — ची वाले: कलमची |
| गार / गार | करने वाला | मददगार, पापगार, बाज़ीगर |
| आना | संबंध / ढंग | मर्दाना, सालाना, दोस्ताना, शाहाना |
| ईला / एला | गुण वाला | ज़हरीला, रसीला, भड़कीला, सपेरा अलग |
| आलू | युक्त | दयालु, श्रद्धालु, कृपालु, शंकालु |
| ई | पेशा / संबंध | तेली, माली, पंजाबी, बनारसी, गुजराती |
| इया | पेशा / छोटा | रसिया, डिबिया, चिटिया |
| तर / तम / इष्ठ | तुलना / अतिशयता | उच्चतर, उच्चतम, श्रेष्ठ, वरिष्ठ, कनिष्ठ |
स्त्री प्रत्यय — केवल सूची
लिंग बदलने वाले प्रत्यय यहीं गिने जाते हैं। क्यों स्त्रीलिंग, वचन, विशेषण-मेल — अगला विषय। यहाँ सिर्फ़ «कौन-सा टुकड़ा लगा»।
| प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|
| आ / इका | बालक → बालिका · नायक → नायिका · अध्यापक → अध्यापिका |
| ई | देव → देवी · पुत्र → पुत्री · दास → दासी |
| इनी | हाथी → हथिनी · स्वामी → स्वामिनी · एकाकी → एकाकिनी |
| आनी | सेठ → सेठानी · जेठ → जेठानी · देवर → देवरानी · महाराज → महारानी |
| आइन / इन | पंडित → पंडिताइन · ठाकुर → ठकुराइन · मालिक → मालकिन |
| आ | वृद्ध → वृद्धा · सुत → सुता |
उपसर्ग + प्रत्यय एक शब्द में
- सु + लेख + अक = सुलेखक (उपसर्ग+कृत्)
- दुर् + गुण = दुर्गुण (केवल उपसर्ग)
- अभि + मान + ई = अभिमानी (उपसर्ग+तद्धित ई)
- प्र + सिद्ध = प्रसिद्ध (उपसर्ग; सिद्ध मूल)
- अन + जान = अनजान (हिंदी उपसर्ग)
प्रश्न पूछे «उपसर्ग और प्रत्यय दोनों छाँटो» तो दोनों टुकड़े अलग लिखो। अकेला «उपसर्ग» हो तो पीछे का मत घुसेड़ो।
प्रश्न 1–10
प्रहार में उपसर्ग?
- हार
- प्र
- प्रहा
- आर — प्रत्यय है
हल
- आगे
प्र+हार। प्र संस्कृत उपसर्ग (आगे)। हार मूल। आर कोई प्रत्यय-सूची का टुकड़ा यहाँ नहीं।
आहार, संहार, विहार, उपहार — मूल एक। फर्क किससे?
- प्रत्यय अक
- समास द्वंद्व
- अलग-अलग उपसर्ग आ, सम्, वि, उप
- संधि गुण
हल
- हार जड़
आगे का टुकड़ा अर्थ मोड़ता है। प्रत्यय पीछे लगता। द्वंद्व दो शब्द। गुण स्वर-संधि।
लेखक में प्रत्यय और घर?
- अक, कृत् (लिख् धातु से)
- अक, तद्धित (लेख संज्ञा से ही)
- क, स्त्री प्रत्यय
- उपसर्ग ले
हल
- धातु
लिखना → लिख्+अक = करने वाला। कृत्। तद्धित नाम से बनता (धार्मिक)। ले उपसर्ग नहीं।
मानवता और लिखाई?
- दोनों कृत्
- दोनों तद्धित
- मानवता कृत्, लिखाई तद्धित
- मानवता तद्धित (मानव+ता), लिखाई कृत् (लिख्+आई)
हल
- मूल
मानव संज्ञा → ता तद्धित। लिख् धातु → आई कृत्। एक से «आई/ता» मत धोखा खाना।
बेईमान का उपसर्ग?
- अ — संस्कृत निषेध
- बे — उर्दू–फारसी, बिना
- ईमान — उपसर्ग
- निर्
हल
- बे+ईमान
बिना ईमान। उर्दू बे। अ धर्म जैसे तत्सम पर लगता। निर् निर्धन पर।
प्रश्न: «निर्धन में उपसर्ग बताओ।» सही?
- निर् — संस्कृत उपसर्ग (बिना)
- केवल निः+धन विसर्ग संधि, उपसर्ग नहीं हो सकता
- धन प्रत्यय
- नि — हिंदी निडर वाला ही
हल
- टैग
उपसर्ग पूछा = निर्+धन। संधि पूछे तो निः+धन। दोनों व्याकरण सच; उत्तर प्रश्न के शब्द से। धन मूल है, प्रत्यय नहीं।
सुजन, कुजन, दुर्जन — तीन उपसर्ग?
- तीनों संस्कृत 22 में सु, कु, दुर्
- सु और दुर् संस्कृत; कु हिंदी/तद्भव
- तीनों उर्दू
- कोई उपसर्ग नहीं, तीन समास
हल
- सूची
सु, दुर् = संस्कृत 22। कु = हिंदी उपसर्ग (कुमार्ग, कुपुत्र)। उर्दू बे/बद होगा।
बचपन का प्रत्यय?
- कृत् अन — बच्च् धातु
- तद्धित पन — बच्चा संज्ञा से भाव
- उपसर्ग बच
- स्त्री प्रत्यय आनी
हल
- बच्चा नाम
पन भाववाचक तद्धित (अपनापन, पागलपन)। धातु नहीं।
हाथी से स्त्रीलिंग बनाने वाला प्रत्यय?
- इनी — हथिनी
- आनी — हथानी
- ई — हाथीई
- आइन — हथियाइन
हल
- इनी
हाथी→हथिनी, स्वामी→स्वामिनी। आनी सेठानी/जेठानी पर। पूरा लिंग-मेल अगले पृष्ठ का है; यहाँ टुकड़ा इनी।
सुलेखक में क्या-क्या है?
- केवल उपसर्ग सु
- केवल प्रत्यय अक
- समास सु+लेखक अव्ययीभाव
- उपसर्ग सु + मूल लेख/लिख् + कृत् अक
हल
- दोनों सिरे
सु आगे, अक पीछे, बीच धातु। अव्ययीभाव समास यथाशक्ति पर। प्रश्न दोनों छाँटे तो चौथा विकल्प।
अभ्यास
अपमान का उपसर्ग और अर्थ?
- अप — हीन / दूर; मान का उलटा आदर
- अ — निषेध मात्र
- मान — उपसर्ग
- अभि
हल
- अप+मान
अप = हीन/दूर। अभिमान उलटा घर अभि (अधिक मान)।
अध्यक्ष में उपसर्ग?
- अति — अधिक
- अधि — ऊपर / अधिकार
- आ
- अध — हिंदी आधा
हल
- अधि+अक्ष
अधिकारी सिर। अति अत्यंत पर। अधपका हिंदी अध।
पठनीय प्रत्यय?
- अनीय, कृत् — पढ़ने योग्य
- ईय, तद्धित राष्ट्रीय जैसा
- अन, भाव
- उपसर्ग पठ
हल
- पठ् धातु
अनीय = योग्य। ईय धर्म+ईय तद्धित पर।
धार्मिक?
- कृत् इक
- तद्धित इक — धर्म संज्ञा से
- उपसर्ग धर्
- स्त्री इका
हल
- धर्म नाम
इक तद्धित (मासिक, वार्षिक)। इका नायिका स्त्री पर।
उनतालीस का उपसर्ग?
- उन — हिंदी, एक कम
- उत् — संस्कृत ऊपर
- अनु
- कोई नहीं, समास द्विगु
हल
- उन+तालीस
49−1 वाला उन। उत् उत्थान पर। द्विगु संख्या-समास पंचवटी पर।
हमदर्द उपसर्ग?
- सम् — संस्कृत साथ
- हम — उर्दू–फारसी, साथ
- दर्द प्रत्यय
- अभि
हल
- हम+दर्द
हमराह, हमउम्र वाला हम। सम् संयोग पर।
कर्तव्य प्रत्यय?
- तव्य, कृत् — करना चाहिए
- त्व, तद्धित बंधुत्व जैसा
- व्य उपसर्ग
- अक
हल
- कृ+तव्य
धातु से कर्तव्य। त्व संज्ञा भाव (नेतृत्व) अलग प्रत्यय, वर्तनी पास, घर अलग।
पढ़नेवाला और दूधवाला — वाला?
- दोनों तद्धित
- दोनों कृत्
- पढ़नेवाला कृत् (क्रिया से), दूधवाला तद्धित (संज्ञा से)
- उपसर्ग वाला
हल
- मूल
वाला एक, घर मूल से। पढ़ना धातु-काम, दूध नाम।
सेठानी प्रत्यय?
- आनी — स्त्री
- ई — देवी जैसा
- इनी — हथिनी जैसा
- पन
हल
- सेठ+आनी
जेठानी, देवरानी वाला आनी। इनी हाथी पर।
«प्रतिदिन» — प्रश्न उपसर्ग माँगे तो?
- अव्ययीभाव समास ही लिखो, उपसर्ग मना
- प्रति — उपसर्ग; समास वाला उत्तर तभी जब समास पूछा हो
- दिन प्रत्यय
- द्विगु
हल
- टैग
प्रति संस्कृत 22 में है। अव्ययीभाव समास-पृष्ठ। जो पूछा वही दो। दिन मूल।
