Noteclerical

उपसर्ग और प्रत्यय

Lesson 107 of 113

इस विषय में क्या आता है

परीक्षा पूछती है — प्रहार में उपसर्ग कौन, लेखक में प्रत्यय कौन, सुजन–कुजन–दुर्जन में अर्थ कैसे पलटा, बचपन कृत् है या तद्धित, बेईमान किस भाषा का उपसर्ग, निर्धन संधि है या उपसर्ग। एक काम: शब्द के आगे और पीछे का टुकड़ा अलग करो, मूल पहचानो, नाम लिखो।

यहाँ पढ़ना है

उपसर्ग की परिभाषा। संस्कृत के 22। हिंदी–तद्भव। उर्दू–फारसी–अरबी। एक धातु/मूल पर कई उपसर्ग। कृत् और तद्धित प्रत्यय। स्त्री प्रत्यय की सूची (लिंग-सिद्धांत नहीं)। दोनों एक शब्द में।

यहाँ नहीं घुसाना

अ+उ=ओ, निः+धन का विसर्ग-नियम — संधि। राजपुत्र, नीलकंठ — समास। पुल्लिंग–स्त्रीलिंग के पूरे नियम, वचन, पुरुष — अगला विषय। कारक, काल अपने पृष्ठों पर।

एक पंक्ति: उपसर्ग = शब्द के आगे लगकर अर्थ मोड़ने वाला शब्दांश। प्रत्यय = शब्द के पीछे लगकर नया शब्द बनाने वाला शब्दांश। दोनों अकेले वाक्य में शब्द नहीं बनते।

चार डिब्बे जो प्रश्न मिला देता है

नामकहाँ लगता हैक्या मिलता हैउदाहरण
उपसर्गआगेशब्दांश + शब्द/धातुप्र+हार = प्रहार
प्रत्ययपीछेशब्द/धातु + शब्दांशलिख्+अक = लेखक
समासदोनों ओर शब्दशब्द + शब्द (विभक्ति गिरी)राज+पुत्र = राजपुत्र
संधिसीमा पर वर्णवर्ण विकारनिः+धन = निर्धन
एक रूप दो पाठ। निर्धन — संधि-प्रश्न हो तो निः+धन, विसर्ग। उपसर्ग-प्रश्न हो तो निर्+धन, संस्कृत उपसर्ग निर्। प्रतिदिन — समास-प्रश्न हो तो अव्ययीभाव; उपसर्ग-प्रश्न हो तो प्रति+दिन। अज्ञान — समास नञ्; उपसर्ग अ। जो टैग लिखा हो वही उत्तर।
पहचान की उँगली: टुकड़ा हटाओ। बचेगा सार्थक मूल? आगे वाला टुकड़ा छोटा और सूची में है तो उपसर्ग। पीछे वाला सूची में है तो प्रत्यय। दो पूरे शब्द बचें तो समास। केवल वर्ण बदले तो संधि।

उपसर्ग क्या करता है

मूल का अर्थ नया मोड़ लेता है — कभी उलटा, कभी जोर, कभी दिशा। उपसर्ग वाक्य में अकेला नहीं बैठता: «वह प्र गया» गलत; «प्रहार किया» सही।

  • अर्थ पलट: जय × पराजय, मान × अपमान, गुण × अवगुण।
  • अर्थ बढ़: प्रबल, अत्यंत, सुप्रसिद्ध।
  • दिशा/स्थिति: आगमन (इधर), निर्गम (बाहर), उत्थान (ऊपर), निपात (नीचे)।
  • नया शब्द: हार से प्रहार, आहार, संहार, विहार, उपहार — पाँच अलग चीजें।

स्रोत तीन: संस्कृत (परीक्षा का बड़ा हिस्सा), हिंदी/तद्भव, उर्दू–फारसी–अरबी। अंग्रेज़ी उपसर्ग कक्षा-10 हिंदी में कम।

संस्कृत के 22 उपसर्ग

सूची रटो, अर्थ उदाहरण से बाँधो। निस्/निर् और दुस्/दुर् जोड़े हैं — लिखने का रूप आगे के वर्ण पर निर्भर (संधि-पृष्ठ का काम); यहाँ दोनों उपसर्ग गिने जाते हैं। उत् का रूप उद् भी (उद्गम)। अपि हिंदी में कम, सूची पूरी रखने के लिए है।

उपसर्गमुख्य अर्थउदाहरण
प्रआगे, अधिक, खूबप्रहार, प्रस्थान, प्रसिद्ध, प्रबल, प्रकाश, प्रगति
परापीछे, उलटा, अत्यंतपराजय, पराभव, पराक्रम, पराधीन, परावर्त
अपदूर, हीन, उलटा अच्छाई काअपमान, अपयश, अपकार, अपहरण, अपव्यय
सम्साथ, पूर्ण, ठीकसंयोग, संतोष, संहार, संस्कृति, संभव, सम्मान
अनुपीछे, समान, अनुकूलअनुवाद, अनुकरण, अनुज, अनुकूल, अनुभव, अनुशासन
अवनीचे, हीनअवगुण, अवतार, अवकाश, अवमान, अवगत, अवनति
निस्बिना, बाहरनिस्संदेह, निस्तार, निश्चय (निः/निस् + चय)
निर्बिना, बाहरनिर्जन, निर्दोष, निर्माण, निर्वाह, निरक्षर, निर्बल
दुस्कठिन, बुरादुस्साहस, दुस्तर, दुश्चक्र
दुर्बुरा, कठिनदुर्जन, दुर्गुण, दुर्लभ, दुर्गंध, दुर्दिन, दुर्भाग्य
विविशेष, अलग, अभावविजय, विदेश, विनाश, विज्ञान, विरोध, विहार
आतक, से, चारों ओर, इस ओरआगमन, आहार, आजीवन, आबद्ध, आरंभ, आगत
निनीचे, भीतर, निषेधनिवास, निषिद्ध, निपात, निगम, निरोध, निवारण
अधिऊपर, श्रेष्ठ, अधिकारअधिक, अध्यक्ष, अधिपति, अध्यात्म, अधिकार, अध्ययन
अपिभी, निकट (हिंदी में कम)अपितु; अधि/अति से मत मिलाओ
अतिअधिक, सीमा से ऊपरअत्यंत, अतिक्रमण, अतिवृष्टि, अतिरिक्त, अतिशय
सुअच्छा, सरलसुजन, सुगम, सुयश, सुपुत्र, सुदूर, सुशोभित
उत् / उद्ऊपर, उत्कर्षउत्तम, उत्थान, उत्पत्ति, उत्साह, उद्गम, उद्धार
अभिओर, सामने, अधिकअभिमान, अभिषेक, अभिमुख, अभिभावक, अभिलाषा, अभिनय
प्रतिउलटा, हर एक, सामनेप्रतिध्वनि, प्रतिकार, प्रतिमा, प्रतिदिन, प्रतिक्रिया, प्रतिज्ञा
परिचारों ओर, पूर्णपरिचय, परिश्रम, परिवार, परिणाम, परिवर्तन, पर्यटन
उपनिकट, सहायक, गौणउपकार, उपवास, उपनाम, उपग्रह, उपवन, उपकरण
सु ≠ कु का उलटा याद से चूक: सुजन (अच्छा व्यक्ति), कुजन (बुरा — हिंदी उपसर्ग कु), दुर्जन (बुरा — संस्कृत दुर्)। तीनों अलग सूची के हैं। सुंदर को हमेशा सु+ंदर मत तोड़ो — परीक्षा स्पष्ट «सुजन» जैसे जोड़ माँगती है।

एक मूल, कई उपसर्ग — अर्थ की प्रयोगशाला

रटने का सबसे मजबूत तरीका: एक जड़ पकड़ो, उपसर्ग बदलो।

हार

शब्दजोड़अर्थ की दिशा
प्रहारप्र+हारआगे बढ़कर चोट
आहारआ+हारअपनी ओर लेना — भोजन
संहारसम्+हारपूर्ण नाश
विहारवि+हारविशेष घूमना, विहार-स्थल
उपहारउप+हारनिकट लाकर देना — भेंट
परिहारपरि+हारचारों ओर से हटाना — त्याग

गम् / गमन

  • आगमन — इस ओर आना · निर्गम / निर्गमन — बाहर जाना
  • संगम — साथ मिलना · उद्गम — ऊपर/स्रोत से निकलना
  • निगम — नियम-संगठन / जाना-रहना वाला रूप · सुगम — आसानी से गम्य

भू / भव

  • संभव — हो सकना · अनुभव — पीछे से जानना
  • परिभव — चारों ओर से नीचा · अभिभव — दबाना
  • प्रभाव — आगे पड़ने वाला असर · विभूति — विशेष वैभव

कार / कृ

  • उपकार — भलाई · अपकार — बुराई
  • अधिकार — ऊपर का हक · प्रतिकार — उलटा जवाब
  • सत्कार — अच्छा आदर (सत् यहाँ मूल के साथ; उपसर्ग-प्रश्न पर ध्यान)
उदाहरण

आहार और प्रहार में मूल एक है। उपसर्ग क्या बदलता है?

हल

  1. मूल हार

    लेना / हरना वाला धातु-अंश।

  2. आ vs प्र

    आ = अपनी ओर (भोजन लेना)। प्र = आगे (चोट चलाना)। प्रत्यय नहीं, दोनों के आगे टुकड़ा है।

उत्तरआ = इस ओर लेना; प्र = आगे की चोट

हिंदी / तद्भव उपसर्ग

बोलचाल से आए छोटे टुकड़े। संस्कृत 22 की सूची में सब नहीं हैं — अलग घर।

उपसर्गअर्थउदाहरण
अ / अननिषेधअछूता, अनमोल, अनजान, अनकहा (स्वर से पहले अन)
अधआधा / अधूराअधपका, अधमरा, अधजला, अधकचरा
उनएक कम (संख्या)उनतीस, उनतालीस, उनचास, उनहत्तर
औउलटा / हीनऔगुन, औघट, औतार
कुबुराकुपुत्र, कुमार्ग, कुसंग, कुचाल
निनिषेध / हीननिडर, निकम्मा, निगोड़ा
भरपूराभरपेट, भरसक, भरपूर, भरदिन
सुअच्छा (हिंदी प्रयोग)सुघड़, सुजान, सुडौल, सुघरे
बिन / बिनाबिनाबिनमाँगे, बिनबादल, बिनकाम
परदूसरा / पारपरदेसी, परलोक, परस्त्री, पराये
चिरलंबा समयचिरकाल, चिरंजीव, चिरपरिचित
दुबुरा / दयनीयदुबला, दुधारू (कुछ सूची में)

अ / अन vs नञ् समास: अनजान हिंदी उपसर्ग। अज्ञान तत्सम, समास-पृष्ठ पर नञ्। प्रश्न «उपसर्ग छाँटो» में अनजान का अन; «समास» में अज्ञान का नञ्।

उर्दू–फारसी–अरबी उपसर्ग

हिंदी अखबार और सरकारी गद्य में बहुत। सूची अलग रखो, संस्कृत से मत मिलाओ।

उपसर्गअर्थउदाहरण
बेबिनाबेईमान, बेशर्म, बेचैन, बेवकूफ, बेकाम
बासाथ / वालाबाकायदा, बाअदब, बामुहावरा
बदबुराबदनाम, बदमाश, बदबू, बददिमाग
लाबिनालाजवाब, लापता, लावारिस, लापरवाह
कमथोड़ा / हीनकमज़ोर, कमबख्त, कमसिन
गैरअन्य / नहींगैरहाज़िर, गैरकानूनी, गैरजिम्मेदार
नानहींनापसंद, नाराज़, नाकाम, नालायक
हमसाथहमउम्र, हमराह, हमदर्द, हमवतन
दरमें / परदरअसल, दरकिनार, दरख्वास्त
सरसिर / मुख्यसरपंच, सरकार, सरताज
बिलाबिनाबिलावजह, बिलाशक
खुशअच्छाखुशबू, खुशहाल, खुशकिस्मत
हरप्रत्येकहररोज़, हरदम, हरकोई
बे ≠ अ। बेईमान उर्दू उपसर्ग बे। अधर्म संस्कृत/हिंदी अ। «बिना» अर्थ एक, घर अलग। विकल्प में भाषा पूछे तो बे = उर्दू–फारसी।

प्रत्यय क्या — दो बड़े घर

प्रत्यय शब्द के अंत में लगता है, नया शब्द देता है, अकेला नहीं चलता। दो घर याद रखो — परीक्षा यही पूछती है।

घरकिससे बनता हैक्या बनता हैपहचान
कृत्धातु (क्रिया-मूल)संज्ञा / विशेषण / कभी क्रिया-रूपमूल में करना-वाले काम की गंध: लिख्, पठ्, कृ, गम्, नच्
तद्धितसंज्ञा, सर्वनाम, विशेषण — धातु नहींनया संज्ञा / विशेषण / भावमूल पहले से नाम/गुण: धर्म, राष्ट्र, बच्चा, दुकान, लाल

कसौटी: प्रत्यय काटो। बचा टुकड़ा क्रिया है? कृत्। नाम या गुण है? तद्धित। लेखक ← लिखना (धातु) = कृत्। धार्मिक ← धर्म (संज्ञा) = तद्धित। लिखाई ← लिख् = कृत्। मिठाई ← मीठा (विशेषण) = तद्धित। एक ही «आई» दो घर — मूल देखो।

कृत् प्रत्यय — धातु के पीछे

प्रत्ययकामउदाहरण
अककरने वालालेखक, पाठक, गायक, नायक, सहायक, सेवक
अन / आभाव / कामपठन, गमन, मरण, चलन; पूजा, शिक्षा (आ)
अनाभाव / साधनगणना, कामना, याचना, रचना
अनीयचाहिए / योग्यपठनीय, शोभनीय, रमणीय, दर्शनीय
य / त्ययोग्य / कार्यदेय, पेय, गेय, कृत्य
तव्यकर्तव्य भावकर्तव्य, वक्तव्य, गंतव्य, ज्ञातव्य
त (क्त)हो चुका / विशेषणकृत, पठित, लिखित, गत, दृष्ट, जात
तृ / ताकर्ताकर्ता, नेता, दाता, वक्ता, श्रोता
तिभाव संज्ञागति, मति, रति, शक्ति, भक्ति, युक्ति
आईकाम / भाव (हिंदी)लिखाई, सिलाई, कमाई, पढ़ाई, लड़ाई
आवटढंग / परिणामसजावट, मिलावट, बनावट, लिखावट
आहटअवस्थाघबराहट, चिकनाहट, कड़वाहट, भिनभिनाहट
आनभावउड़ान, मिलान, पहचान, थकान
आक / आकूकरने वाला (जोर)तैराक, लड़ाकू, उड़ाकू
ऐया / वैयाकरने वालागवैया, नचैया, खिवैया
हार / हाराकरने वालालकड़हारा, पानीहार, खेवनहार
वालाकरने वालापढ़नेवाला, रखवाला, गानेवाला
ऊआदत वालाखाऊ, पीऊ, उड़ाऊ, चालू
अक्कड़आदत (निंदा)घुमक्कड़, पियक्कड़, भुलक्कड़
उदाहरण

गायक और मिठाई दोनों के अंत में «क/आई» जैसा टुकड़ा। कृत् कौन?

हल

  1. गायक

    गा + अक। गा धातु है → कृत्।

  2. मिठाई

    मीठा + आई। मीठा विशेषण है, धातु नहीं → तद्धित।

उत्तरगायक कृत्; मिठाई तद्धित

तद्धित प्रत्यय — नाम/गुण के पीछे

प्रत्ययकामउदाहरण
इकसंबंध / विषयधार्मिक, मासिक, वार्षिक, ऐतिहासिक, दैनिक
ईयसंबंधराष्ट्रीय, भारतीय, स्थानीय, जातीय
ताभावमानवता, सुंदरता, मधुरता, व्यापकता
त्वभाव (तत्सम)बंधुत्व, नेतृत्व, अस्तित्व, महत्व
पनभाव (हिंदी)बचपन, अपनापन, पागलपन, लड़कपन
आईभाव / वस्तुमिठाई, चतुराई, भलाई, ऊँचाई, चौड़ाई
इमागुण-भावलालिमा, नीलिमा, गरिमा, लघिमा, महिमा
इतयुक्त / हुआपुष्पित, फलित, लज्जित, पीड़ित, हर्षित
वालापेशा / संबंधदूधवाला, दिल्लीवाला, टोपीवाला
दाररखने वालादुकानदार, ईमानदार, किराएदार, हिस्सेदार
चीपेशा (फारसी)तोपची, खजांची, बाजीगर नहीं — ची वाले: कलमची
गार / गारकरने वालामददगार, पापगार, बाज़ीगर
आनासंबंध / ढंगमर्दाना, सालाना, दोस्ताना, शाहाना
ईला / एलागुण वालाज़हरीला, रसीला, भड़कीला, सपेरा अलग
आलूयुक्तदयालु, श्रद्धालु, कृपालु, शंकालु
ईपेशा / संबंधतेली, माली, पंजाबी, बनारसी, गुजराती
इयापेशा / छोटारसिया, डिबिया, चिटिया
तर / तम / इष्ठतुलना / अतिशयताउच्चतर, उच्चतम, श्रेष्ठ, वरिष्ठ, कनिष्ठ
वाला दो घर: पढ़नेवाला क्रिया से = कृत्। दूधवाला संज्ञा से = तद्धित। फिर वही कसौटी: मूल क्रिया है या नाम।

स्त्री प्रत्यय — केवल सूची

लिंग बदलने वाले प्रत्यय यहीं गिने जाते हैं। क्यों स्त्रीलिंग, वचन, विशेषण-मेल — अगला विषय। यहाँ सिर्फ़ «कौन-सा टुकड़ा लगा»।

प्रत्ययउदाहरण
आ / इकाबालक → बालिका · नायक → नायिका · अध्यापक → अध्यापिका
ईदेव → देवी · पुत्र → पुत्री · दास → दासी
इनीहाथी → हथिनी · स्वामी → स्वामिनी · एकाकी → एकाकिनी
आनीसेठ → सेठानी · जेठ → जेठानी · देवर → देवरानी · महाराज → महारानी
आइन / इनपंडित → पंडिताइन · ठाकुर → ठकुराइन · मालिक → मालकिन
आवृद्ध → वृद्धा · सुत → सुता

उपसर्ग + प्रत्यय एक शब्द में

  • सु + लेख + अक = सुलेखक (उपसर्ग+कृत्)
  • दुर् + गुण = दुर्गुण (केवल उपसर्ग)
  • अभि + मान + ई = अभिमानी (उपसर्ग+तद्धित ई)
  • प्र + सिद्ध = प्रसिद्ध (उपसर्ग; सिद्ध मूल)
  • अन + जान = अनजान (हिंदी उपसर्ग)

प्रश्न पूछे «उपसर्ग और प्रत्यय दोनों छाँटो» तो दोनों टुकड़े अलग लिखो। अकेला «उपसर्ग» हो तो पीछे का मत घुसेड़ो।

प्रश्न 1–10

प्र. 1

प्रहार में उपसर्ग?

  1. हार
  2. प्र
  3. प्रहा
  4. आर — प्रत्यय है

हल

  1. आगे

    प्र+हार। प्र संस्कृत उपसर्ग (आगे)। हार मूल। आर कोई प्रत्यय-सूची का टुकड़ा यहाँ नहीं।

उत्तरB
प्र. 2

आहार, संहार, विहार, उपहार — मूल एक। फर्क किससे?

  1. प्रत्यय अक
  2. समास द्वंद्व
  3. अलग-अलग उपसर्ग आ, सम्, वि, उप
  4. संधि गुण

हल

  1. हार जड़

    आगे का टुकड़ा अर्थ मोड़ता है। प्रत्यय पीछे लगता। द्वंद्व दो शब्द। गुण स्वर-संधि।

उत्तरC
प्र. 3

लेखक में प्रत्यय और घर?

  1. अक, कृत् (लिख् धातु से)
  2. अक, तद्धित (लेख संज्ञा से ही)
  3. क, स्त्री प्रत्यय
  4. उपसर्ग ले

हल

  1. धातु

    लिखना → लिख्+अक = करने वाला। कृत्। तद्धित नाम से बनता (धार्मिक)। ले उपसर्ग नहीं।

उत्तरA
प्र. 4

मानवता और लिखाई?

  1. दोनों कृत्
  2. दोनों तद्धित
  3. मानवता कृत्, लिखाई तद्धित
  4. मानवता तद्धित (मानव+ता), लिखाई कृत् (लिख्+आई)

हल

  1. मूल

    मानव संज्ञा → ता तद्धित। लिख् धातु → आई कृत्। एक से «आई/ता» मत धोखा खाना।

उत्तरD
प्र. 5

बेईमान का उपसर्ग?

  1. अ — संस्कृत निषेध
  2. बे — उर्दू–फारसी, बिना
  3. ईमान — उपसर्ग
  4. निर्

हल

  1. बे+ईमान

    बिना ईमान। उर्दू बे। अ धर्म जैसे तत्सम पर लगता। निर् निर्धन पर।

उत्तरB
प्र. 6

प्रश्न: «निर्धन में उपसर्ग बताओ।» सही?

  1. निर् — संस्कृत उपसर्ग (बिना)
  2. केवल निः+धन विसर्ग संधि, उपसर्ग नहीं हो सकता
  3. धन प्रत्यय
  4. नि — हिंदी निडर वाला ही

हल

  1. टैग

    उपसर्ग पूछा = निर्+धन। संधि पूछे तो निः+धन। दोनों व्याकरण सच; उत्तर प्रश्न के शब्द से। धन मूल है, प्रत्यय नहीं।

उत्तरA
प्र. 7

सुजन, कुजन, दुर्जन — तीन उपसर्ग?

  1. तीनों संस्कृत 22 में सु, कु, दुर्
  2. सु और दुर् संस्कृत; कु हिंदी/तद्भव
  3. तीनों उर्दू
  4. कोई उपसर्ग नहीं, तीन समास

हल

  1. सूची

    सु, दुर् = संस्कृत 22। कु = हिंदी उपसर्ग (कुमार्ग, कुपुत्र)। उर्दू बे/बद होगा।

उत्तरB
प्र. 8

बचपन का प्रत्यय?

  1. कृत् अन — बच्च् धातु
  2. तद्धित पन — बच्चा संज्ञा से भाव
  3. उपसर्ग बच
  4. स्त्री प्रत्यय आनी

हल

  1. बच्चा नाम

    पन भाववाचक तद्धित (अपनापन, पागलपन)। धातु नहीं।

उत्तरB
प्र. 9

हाथी से स्त्रीलिंग बनाने वाला प्रत्यय?

  1. इनी — हथिनी
  2. आनी — हथानी
  3. ई — हाथीई
  4. आइन — हथियाइन

हल

  1. इनी

    हाथी→हथिनी, स्वामी→स्वामिनी। आनी सेठानी/जेठानी पर। पूरा लिंग-मेल अगले पृष्ठ का है; यहाँ टुकड़ा इनी।

उत्तरA
प्र. 10

सुलेखक में क्या-क्या है?

  1. केवल उपसर्ग सु
  2. केवल प्रत्यय अक
  3. समास सु+लेखक अव्ययीभाव
  4. उपसर्ग सु + मूल लेख/लिख् + कृत् अक

हल

  1. दोनों सिरे

    सु आगे, अक पीछे, बीच धातु। अव्ययीभाव समास यथाशक्ति पर। प्रश्न दोनों छाँटे तो चौथा विकल्प।

उत्तरD

अभ्यास

12345 678910

अ. 1

अपमान का उपसर्ग और अर्थ?

  1. अप — हीन / दूर; मान का उलटा आदर
  2. अ — निषेध मात्र
  3. मान — उपसर्ग
  4. अभि

हल

  1. अप+मान

    अप = हीन/दूर। अभिमान उलटा घर अभि (अधिक मान)।

उत्तरA
अ. 2

अध्यक्ष में उपसर्ग?

  1. अति — अधिक
  2. अधि — ऊपर / अधिकार
  3. आ
  4. अध — हिंदी आधा

हल

  1. अधि+अक्ष

    अधिकारी सिर। अति अत्यंत पर। अधपका हिंदी अध।

उत्तरB
अ. 3

पठनीय प्रत्यय?

  1. अनीय, कृत् — पढ़ने योग्य
  2. ईय, तद्धित राष्ट्रीय जैसा
  3. अन, भाव
  4. उपसर्ग पठ

हल

  1. पठ् धातु

    अनीय = योग्य। ईय धर्म+ईय तद्धित पर।

उत्तरA
अ. 4

धार्मिक?

  1. कृत् इक
  2. तद्धित इक — धर्म संज्ञा से
  3. उपसर्ग धर्
  4. स्त्री इका

हल

  1. धर्म नाम

    इक तद्धित (मासिक, वार्षिक)। इका नायिका स्त्री पर।

उत्तरB
अ. 5

उनतालीस का उपसर्ग?

  1. उन — हिंदी, एक कम
  2. उत् — संस्कृत ऊपर
  3. अनु
  4. कोई नहीं, समास द्विगु

हल

  1. उन+तालीस

    49−1 वाला उन। उत् उत्थान पर। द्विगु संख्या-समास पंचवटी पर।

उत्तरA
अ. 6

हमदर्द उपसर्ग?

  1. सम् — संस्कृत साथ
  2. हम — उर्दू–फारसी, साथ
  3. दर्द प्रत्यय
  4. अभि

हल

  1. हम+दर्द

    हमराह, हमउम्र वाला हम। सम् संयोग पर।

उत्तरB
अ. 7

कर्तव्य प्रत्यय?

  1. तव्य, कृत् — करना चाहिए
  2. त्व, तद्धित बंधुत्व जैसा
  3. व्य उपसर्ग
  4. अक

हल

  1. कृ+तव्य

    धातु से कर्तव्य। त्व संज्ञा भाव (नेतृत्व) अलग प्रत्यय, वर्तनी पास, घर अलग।

उत्तरA
अ. 8

पढ़नेवाला और दूधवाला — वाला?

  1. दोनों तद्धित
  2. दोनों कृत्
  3. पढ़नेवाला कृत् (क्रिया से), दूधवाला तद्धित (संज्ञा से)
  4. उपसर्ग वाला

हल

  1. मूल

    वाला एक, घर मूल से। पढ़ना धातु-काम, दूध नाम।

उत्तरC
अ. 9

सेठानी प्रत्यय?

  1. आनी — स्त्री
  2. ई — देवी जैसा
  3. इनी — हथिनी जैसा
  4. पन

हल

  1. सेठ+आनी

    जेठानी, देवरानी वाला आनी। इनी हाथी पर।

उत्तरA
अ. 10

«प्रतिदिन» — प्रश्न उपसर्ग माँगे तो?

  1. अव्ययीभाव समास ही लिखो, उपसर्ग मना
  2. प्रति — उपसर्ग; समास वाला उत्तर तभी जब समास पूछा हो
  3. दिन प्रत्यय
  4. द्विगु

हल

  1. टैग

    प्रति संस्कृत 22 में है। अव्ययीभाव समास-पृष्ठ। जो पूछा वही दो। दिन मूल।

उत्तरB

← सूची · ← समास

अगला विषय: लिंग / वचन / पुरुष।