Noteclass 9 10

समास — कर्मधारय, द्विगु

Lesson 56 of 71

अंग 4 · वाक्य विचार

पाठ 4.7

विषय शुरू · समास — कर्मधारय, द्विगु

अव्ययीभाव वाले विषय में यथाशक्ति, राजपुत्र खुले; नीलकमल दीवार, पंचवटी दीवार। विशेषण वाले विषय में नीला गुण, अलग पद। विशेषण के भेद वाले विषय में गिनती संख्यावाचक। रूढ़-यौगिक वाले विषय में नीलकमल यौगिक, कमल रूढ़। आज घर की जोड़: गुण और जिस पर गुण; संख्या वाला समूह। कार्ड के 4: नीलकमल, महात्मा, पंचवटी, नवग्रह। कर्मधारय = विशेषण + विशेष्य (जिस पर गुण) एक चीज़ (नीलकमल)। द्विगु = पहला पद संख्या, समूह (त्रिभुवन, पंचवटी)। नया विकार नहीं। द्वंद्व आगे। विग्रह आगे। आज कर्मधारय और द्विगु।

1. जोड़ क्या है

परिभाषा सीधी रखो: जब विशेषण और विशेष्य (जिस पर गुण चढ़ा) एक ही चीज़ पर बैठकर एक पद बनें, वह कर्मधारय है; जब पहला पद संख्या हो और समूह बने, वह द्विगु है। समास पहले से; आज दो पहचान और।

नील + कमल = नीलकमल। — नीला कमल; एक फूल। कर्मधारय।

पंच + वटी = पंचवटी। — 5 वटों का समूह। द्विगु। अव्ययीभाव वाले विषय की दीवार आज कार्ड।

प्रश्न: एक चीज़ पर गुण, या आगे संख्या-समूह? फिर कार्ड चुनो। नीला वाक्य में अलग पद विशेषण वाले विषय में; आज नील चिपका।

जाँच: एक फूल, गुण+नाम? कर्मधारय। संख्या+समूह? द्विगु। राजा का पुत्र? तत्पुरुष पहले। माता-पिता? आगे।

2. 4 कार्ड एक नज़र में

एक नीलकमल रटकर पंचवटी गायब मत करो। दो पहचान, चार झलक, एक कुर्सी।

कार्ड पहचान छिपा अर्थ
नीलकमल कर्मधारय नीला कमल
महात्मा कर्मधारय महान आत्मा
पंचवटी द्विगु 5 वटों का समूह
नवग्रह द्विगु 9 ग्रहों का समूह

चंद्रमुख — चंद्र जैसा मुख — जेब, छोटे नहीं। उपमा = जैसा / तुलना; सूची नहीं। 6 में से दो पहले, दो आज, दो आगे।

जाँच: गुण+एक चीज़? कर्मधारय। संख्या+समूह? द्विगु। जैसा? जेब।

3. तत्पुरुष से नाता — दो चीज़ बनाम एक

अव्ययीभाव वाले विषय में राजपुत्र = राजा का पुत्र — दो अलग, का छिपा, पीछे प्रधान। आज नीलकमल = नीला कमल — एक ही फूल, नील गुण उसी कमल का।

राजपुत्र — राजा और पुत्र जुदा; तत्पुरुष पहले।

नीलकमल — नील और कमल एक ही चीज़; आज।

कुछ पुस्तकें कर्मधारय को तत्पुरुष की तह कहती हैं। नाम जुदा रखो: का/में छिपा और दो चीज़? पहले। गुण और एक चीज़? आज।

जाँच: का छिपा, दो चीज़? तत्पुरुष पहले। गुण, एक चीज़? आज। यथाशक्ति? अव्ययीभाव पहले।

4. नीलकमल — कर्मधारय

कार्ड का पहला। विशेषण नील, विशेष्य कमल (जिस पर गुण), दोनों एक वस्तु। विशेषण वाले विषय में नीला आकाश अलग पद; आज एक मिला हुआ पद।

नील + कमल = नीलकमल। — नीला कमल।

कमल रूढ़ खंड, पूरा शब्द यौगिक — रूढ़-यौगिक वाले विषय में। आज घर कर्मधारय।

पंकज योगरूढ़ पहले — जोड़ कमल नहीं देता। नीलकमल जोड़ ही अर्थ। दो काट मत घोलो।

जाँच: नीला कमल? कर्मधारय। पंकज? योगरूढ़ पहले। राजपुत्र? तत्पुरुष पहले।

5. महात्मा — कर्मधारय

कार्ड का दूसरा। महान जो आत्मा। फिर एक ही व्यक्ति, गुण+नाम।

महा + आत्मा = महात्मा। — महान आत्मा।

लालमणि — परिवार; कार्ड नीलकमल / महात्मा। सूची मत बढ़ा।

गाँधी शब्द नहीं चिपका — व्यक्ति संज्ञा पहले। आज घर का नाम। घनश्याम दीवार, मध्यपदलोपी आगे।

जाँच: महान आत्मा? कर्मधारय। घनश्याम? आगे। विग्रह पूरा वाक्य? आगे।

6. पंचवटी — द्विगु

कार्ड का तीसरा। पहला पद संख्या, पीछे समूह। विशेषण के भेद वाले विषय में पंच गिनती; आज गिनती मिला हुआ पद का सिर।

पंच + वटी = पंचवटी। — 5 वटों का समूह।

वचन वाले विषय में अनेक अलग शब्द मुड़ते हैं। पंचवटी एक पद, समूह का नाम। दो किताबें वाक्य में संख्यावाचक पहले; पंचवटी आज घर।

जाँच: 5 वट समूह? द्विगु। दो किताबें? विशेषण पहले, समास नहीं। नीलकमल संख्या? नहीं, गुण।

7. नवग्रह — द्विगु

कार्ड का चौथा। 9 ग्रह, एक समूह-नाम। संख्या सिर, समूह पीछे।

नव + ग्रह = नवग्रह। — 9 ग्रहों का समूह।

सप्तर्षि — परिवार; कार्ड नवग्रह / पंचवटी।

दशानन में दश संख्या दिखे तो द्विगु मत ठोको — अर्थ रावण, तीसरा नाम; योगरूढ़ पहले, बहुव्रीहि आगे। द्विगु समूह माँगे, व्यक्ति नहीं।

जाँच: नवग्रह? द्विगु। दशानन? आगे / योगरूढ़ पहले। कर्मधारय? संख्या सिर नहीं।

8. जेब — चंद्रमुख

चंद्र जैसा मुख। गुण सीधा नील नहीं, उपमा। कार्ड नहीं — नाम जेब।

चंद्र + मुख = चंद्रमुख। — मुख चंद्र जैसा; एक मुख।

नीलकमल गुण साफ़; चंद्रमुख जैसा छिपा। दोनों कर्मधारय परिवार, जेब अलग। पीतांबर जेब नहीं — तीसरा अर्थ आगे।

जाँच: चंद्रमुख? उपमा जेब। नीलकमल? गुण कार्ड। पीतांबर? आगे।

9. जो आज की पहचान नहीं

रूप कुर्सी
राजपुत्र तत्पुरुष — पहले; दो चीज़, का
यथाशक्ति अव्ययीभाव — पहले
माता-पिता द्वंद्व आगे — दोनों प्रधान
पीतांबर बहुव्रीहि आगे — तीसरा अर्थ
दशानन योगरूढ़ पहले; बहुव्रीहि आगे
अधर्म नञ् आगे
घनश्याम मध्यपदलोपी आगे
पंकज योगरूढ़ — पहले

नीला आकाश दो पद, समास नहीं। कमल अकेला रूढ़, समास नहीं।

जाँच: राजपुत्र? पहले। नीलकमल अर्थ? आज। माता-पिता? आगे। पंकज? पहले।

10. दीवारें — द्वंद्व, बहुव्रीहि, विग्रह

बात आज नहीं
दोनों प्रधान / और द्वंद्व आगे
जोड़ किसी और का नाम बहुव्रीहि आगे
मिला हुआ पद का पूरा वाक्य समास विग्रह आगे
अ / घन जैसा बीच गायब नञ्, मध्यपदलोपी आगे

आठ विकार शब्द पर पहले से। आज घर की जोड़। कुछ पुस्तकें द्विगु को कर्मधारय की तह कहें — दो पहचान आज जुदा।

जाँच: दो पहचान आज। तोड़-वाक्य? आगे। सौ सूची? नहीं।

11. वाक्य में 4 कार्ड + जेब

अरे! महात्मा पंचवटी में नीलकमल देख नवग्रह का चंद्रमुख गुनें।

  • अरे — विस्मयादिबोधक, अटल
  • महात्मा — कर्मधारय; महान आत्मा
  • पंचवटी — द्विगु; 5 वटों का समूह
  • नीलकमल — कर्मधारय; नीला कमल
  • नवग्रह — द्विगु; 9 ग्रहों का समूह
  • चंद्रमुख — जेब; चंद्र जैसा मुख

चार कार्ड बैठे; जेब साथ। पीतांबर इस वाक्य में नहीं — बहुव्रीहि मत ठोको जहाँ तीसरा व्यक्ति नहीं पूछा।

12. शब्द तोड़कर पूरा

कर्मधारय

गुण और जिस पर गुण, एक चीज़। नीलकमल, महात्मा।

द्विगु

संख्या सिर, समूह। पंचवटी, नवग्रह।

जेब

चंद्रमुख — उपमा।

दीवार

द्वंद्व, बहुव्रीहि, नञ्, विग्रह, दशानन।

नीलकमल, महात्मा, पंचवटी, नवग्रह — चार कार्ड; दो पहचान।

13. आम गलतियाँ

  • नीलकमल को तत्पुरुष। एक फूल, का नहीं; राजपुत्र पहले।
  • नीलकमल को योगरूढ़। पंकज पहले; जोड़ आज नीला कमल।
  • नीला आकाश को समास। दो पद, विशेषण वाले विषय में।
  • पंचवटी को वचन अनेक। एक पद समूह; वचन पहले अलग।
  • दशानन को द्विगु। संख्या दिखे, अर्थ रावण आगे।
  • पंचवटी और नीलकमल एक कार्ड। संख्या बनाम गुण।
  • माता-पिता को आज। द्वंद्व आगे।
  • पीतांबर को आज कर्मधारय पूरा। तीसरा अर्थ आगे।
  • घनश्याम को महात्मा जैसा। मध्यपदलोपी आगे।
  • चंद्रमुख पाँचवाँ कार्ड। उपमा जेब।
  • पूरा विग्रह वाक्य यहीं। पहचान आज; वाक्य आगे।
  • नया विकार गिनना। आज घर-जोड़।

जाँच: (1) गुण+एक चीज़ या संख्या+समूह। (2) कार्ड: नीलकमल, महात्मा, पंचवटी, नवग्रह। (3) चंद्रमुख जेब। (4) द्वंद्व आगे। (5) विग्रह आगे।

14. इस विषय का सार

  • कर्मधारय — विशेषण और जिस पर गुण, एक चीज़। द्विगु — संख्या सिर, समूह। नया विकार नहीं।
  • कार्ड: नीलकमल-महात्मा कर्मधारय, पंचवटी-नवग्रह द्विगु।
  • राजपुत्र दो चीज़ पहले; नीलकमल एक फूल आज।
  • चंद्रमुख जेब। द्वंद्व आगे। बहुव्रीहि आगे। विग्रह आगे।
  • यौगिक कपड़ा पहले। आज घर कौन।

आगे समास — द्वंद्व, बहुव्रीहि है।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. कर्मधारय और द्विगु क्या हैं? कार्ड के 4 लिखो। नया विकार है?

उत्तर

गुण और जिस पर गुण एक चीज़; संख्या सिर और समूह। नीलकमल, महात्मा, पंचवटी, नवग्रह। नहीं — आज घर-जोड़; विकार शब्द पर पहले से।

2. नीलकमल और राजपुत्र एक पहचान हैं? पंकज कर्मधारय है?

उत्तर

नहीं — नीलकमल कर्मधारय, एक फूल; राजपुत्र तत्पुरुष, दो चीज़, पहले। नहीं — पंकज योगरूढ़, रूढ़-यौगिक वाले विषय में।

3. दशानन द्विगु है? पंच + वटी कौन-सा कार्ड है?

उत्तर

नहीं — दश दिखे, अर्थ रावण; योगरूढ़ पहले, बहुव्रीहि आगे। पंचवटी द्विगु — 5 वटों का समूह।

4. माता-पिता आज का कार्ड है? नीला आकाश आज है?

उत्तर

नहीं — द्वंद्व आगे। नहीं — दो पद, विशेषण वाले विषय में; नीलकमल एक पद आज।

5. नीलकमल का पूरा विग्रह वाक्य आज लिखना है? चंद्रमुख पाँचवाँ कार्ड है?

उत्तर

नहीं — अर्थ नीला कमल आज; पूरा वाक्य विग्रह आगे। नहीं — उपमा जेब; कार्ड 4।

विषय समाप्त · समास — कर्मधारय, द्विगु