अंग 4 · वाक्य विचार
पाठ 4.6
विषय शुरू · समास — अव्ययीभाव, तत्पुरुष
विसर्ग संधि वाले विषय में ः खुला; राजपुत्र नाम भर था, तपोवन ध्वनि ओ। अव्यय वाले विषय में यथाशक्ति, प्रतिदिन दीवार। रूढ़-यौगिक वाले विषय में पाठशाला बनावट, विद्यालय विद्या का आलय नाम भर। संकर वाले विषय में राजपुत्र एक घर। आज घर की जोड़: अव्ययीभाव और तत्पुरुष। कार्ड के 4: यथाशक्ति, प्रतिदिन, राजपुत्र, वनवास। अव्ययीभाव = पहला खंड अव्यय जैसा, पूरा पद अव्यय-सा। तत्पुरुष = पीछे वाला पद प्रधान (उत्तर पद = पीछे वाला); राजपुत्र = राजा का पुत्र। नया विकार नहीं। कर्मधारय आगे। विग्रह आगे। आज अव्ययीभाव और तत्पुरुष।
1. जोड़ क्या है
परिभाषा सीधी रखो: जब दो या अधिक पद एक पद बन जाएँ और बीच की विभक्ति छिपे, वह समास है। जुड़े रूप को मिला हुआ पद कहते हैं — दो शब्द मिलकर एक। ध्वनि-जोड़ संधि पहले; आज अर्थ का मेल।
यथा + शक्ति = यथाशक्ति। — पूरा अव्यय जैसा; अव्ययीभाव = पहला खंड अव्यय जैसा।
राजा का पुत्र → राजपुत्र। — का छिपा; तत्पुरुष = पीछे प्रधान। संकर वाले विषय की दीवार आज कार्ड।
प्रश्न: पूरा शब्द अव्यय जैसा, या पीछे वाला प्रधान? फिर कार्ड चुनो। बनावट यौगिक रूढ़-यौगिक वाले विषय में; आज घर का नाम।
जाँच: विभक्ति छिपी, एक पद? आज। स्वर टकराए? संधि पहले। दो भाषा? संकर पहले। नीलकमल? आगे।
2. 4 कार्ड एक नज़र में
एक राजपुत्र रटकर यथाशक्ति गायब मत करो। दो पहचान, चार झलक, एक कुर्सी।
| कार्ड | पहचान | छिपा अर्थ |
|---|---|---|
| यथाशक्ति | अव्ययीभाव | शक्ति के अनुसार |
| प्रतिदिन | अव्ययीभाव | हर दिन |
| राजपुत्र | तत्पुरुष | राजा का पुत्र |
| वनवास | तत्पुरुष | वन में वास |
विद्यालय — विद्या का आलय — जेब, छोटे नहीं। संधि भी; दो काट। 6 भेद की सूची रटना नहीं — दो आज, चार आगे।
जाँच: अव्यय जैसा? अव्ययीभाव। पीछे प्रधान, का/में छिपा? तत्पुरुष।
3. बनावट से नाता — यौगिक बनाम घर
रूढ़-यौगिक वाले विषय में पाठशाला जोड़ = अर्थ। आज वही जोड़ घर का नाम माँगे: विभक्ति कहाँ छिपी, कौन पद प्रधान।
पाठशाला — यौगिक पहले; पाठ की शाला, तत्पुरुष झलक आज।
पानी — रूढ़; टुकड़े नहीं, समास नहीं।
पंकज योगरूढ़ पहले — खास नाम, आज की दो पहचान मत ठोको। रेलगाड़ी संकर पहले — दो भाषा, घर की पट्टी अलग।
जाँच: जोड़ = अर्थ? यौगिक पहले। विभक्ति छिपी? आज। पंकज? योगरूढ़ पहले। रेलगाड़ी? संकर पहले।
4. यथाशक्ति — अव्ययीभाव
कार्ड का पहला। पूरा मिला हुआ पद अव्यय जैसा चलता है — लिंग-वचन कम माँगे। अव्यय वाले विषय में धीरे एक शब्द था; आज दो खंड, एक अव्यय-सा पद।
यथा + शक्ति = यथाशक्ति। — शक्ति के अनुसार।
यथासंभव — परिवार; कार्ड यथाशक्ति। सूची मत बढ़ा।
आगे वाला खंड यथा जैसा अव्यय। पीछे शक्ति संज्ञा। प्रधान भाव पूरे का — पीछे वाला अकेला राजा नहीं।
जाँच: यथाशक्ति? अव्ययीभाव। धीरे? अव्यय पहले, समास नहीं। राजपुत्र? तत्पुरुष, यह कार्ड नहीं।
5. प्रतिदिन — अव्ययीभाव
कार्ड का दूसरा। प्रति + दिन = हर दिन। पूरा पद ढंग बताए, संज्ञा की तरह न मुड़े।
प्रति + दिन = प्रतिदिन। — हर दिन।
आजीवन, भरपेट — परिवार; कार्ड प्रतिदिन / यथाशक्ति।
प्रति सिर उपसर्ग वाले विषय में अलग शब्द पर (प्रतिकार)। प्रतिदिन आज अव्ययीभाव। बिना पूछे उपसर्ग मत ठोको — अव्यय वाले विषय की दीवार आज कार्ड।
जाँच: प्रतिदिन? अव्ययीभाव। प्रतिकार? उपसर्ग पहले। विद्यालय अव्यय? नहीं।
6. राजपुत्र — तत्पुरुष
कार्ड का तीसरा। पीछे वाला पद प्रधान। बीच की विभक्ति छिपती है — यहाँ का। कारक वाले विषय में संबंध का चिह्न; आज छिपा काट।
राजा का पुत्र → राजपुत्र। — पुत्र प्रधान।
गृह का कार्य → गृहकार्य। — परिवार; कार्ड राजपुत्र।
पूरा विग्रह वाक्य आगे। आज पहचान: का छिपा, पीछे प्रधान। राजपुत्र को राजा + पुत्र ध्वनि-संधि मत कहो — स्वर-स्वर नहीं टकराए।
जाँच: का छिपा? तत्पुरुष। पुत्र प्रधान? हाँ। संधि? नहीं। विग्रह पूरा? आगे।
7. वनवास — तत्पुरुष
कार्ड का चौथा। सिर्फ़ का नहीं। वन में वास — अधिकरण छिपा। कारक वाले विषय में में; आज वही छिपकर एक पद।
वन में वास → वनवास। — वास प्रधान।
तपोवन — तप का वन, तत्पुरुष झलक; ध्वनि विसर्ग संधि वाले विषय में। दो काट।
का/में/से छिपें तो नाम तत्पुरुष। पट्टी की सारी कुर्सियाँ कारक वाले विषय में; आज पीछे वाला पद प्रधान (उत्तर पद = पीछे वाला)। अधर्म नञ् आगे — अ आज मत खोलो।
जाँच: में छिपा? वनवास तत्पुरुष। तपोवन ध्वनि? विसर्ग पहले। अधर्म? आगे।
8. जेब — विद्यालय
विद्या + आलय। अर्थ: विद्या का आलय — तत्पुरुष। ध्वनि: आ दीर्घ — स्वर संधि वाले विषय में। कार्ड नहीं — नाम जेब।
विद्यालय — दो काट: संधि पहले, समास आज।
रूढ़-यौगिक वाले विषय में विद्या का आलय नाम भर था। आज घर तत्पुरुष। पूरा तोड़-वाक्य विग्रह आगे; संधि की उलटी सूची विच्छेद आगे।
जाँच: विद्यालय अर्थ? तत्पुरुष जेब। ध्वनि आ? संधि पहले। पाँचवाँ कार्ड? नहीं।
9. जो आज की पहचान नहीं
| रूप | कुर्सी |
|---|---|
| नीलकमल | कर्मधारय आगे — गुण और नाम एक चीज़ |
| पंचवटी | द्विगु आगे — संख्या |
| माता-पिता | द्वंद्व आगे |
| पीतांबर | बहुव्रीहि आगे |
| अधर्म | नञ् आगे |
| घनश्याम | मध्यपदलोपी आगे |
| देवालय ध्वनि | स्वर संधि — पहले |
| रेलगाड़ी | संकर — पहले |
धीरे अव्यय पहले, समास नहीं। पानी रूढ़ पहले। 6 में से दो आज।
जाँच: नीलकमल? आगे। राजपुत्र अर्थ? आज। देवालय आ? संधि पहले। रेलगाड़ी? संकर पहले।
10. दीवारें — कर्मधारय, विग्रह, विच्छेद
| बात | आज नहीं |
|---|---|
| गुण और नाम एक चीज़, संख्या | कर्मधारय, द्विगु आगे |
| दोनों प्रधान / तीसरा अर्थ | द्वंद्व, बहुव्रीहि आगे |
| मिला हुआ पद का पूरा वाक्य | समास विग्रह आगे |
| जुड़े शब्द ध्वनि से तोड़ना | संधि विच्छेद आगे |
आठ विकार शब्द पर पहले से। आज घर की जोड़। उपसर्ग सिर दोहराओ मत — प्रति पहले; आज प्रतिदिन अव्ययीभाव।
जाँच: दो पहचान आज। तोड़-वाक्य? आगे। सौ सूची? नहीं।
11. वाक्य में 4 कार्ड + जेब
अरे! राजपुत्र प्रतिदिन यथाशक्ति वनवास छोड़ विद्यालय जाए।
- अरे — विस्मयादिबोधक, अटल
- राजपुत्र — तत्पुरुष; राजा का पुत्र
- प्रतिदिन — अव्ययीभाव; हर दिन
- यथाशक्ति — अव्ययीभाव; शक्ति के अनुसार
- वनवास — तत्पुरुष; वन में वास
- विद्यालय — जेब; विद्या का आलय, संधि भी
चार कार्ड बैठे; जेब साथ। नीलकमल इस वाक्य में नहीं — कर्मधारय मत ठोको जहाँ गुण और नाम एक चीज़ नहीं पूछी।
12. शब्द तोड़कर पूरा
अव्ययीभाव
पूरा अव्यय जैसा। यथाशक्ति, प्रतिदिन।
तत्पुरुष
पीछे प्रधान, विभक्ति छिपी। राजपुत्र, वनवास।
जेब
विद्यालय — अर्थ तत्पुरुष, ध्वनि संधि।
दीवार
कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, बहुव्रीहि, नञ्, विग्रह।
यथाशक्ति, प्रतिदिन, राजपुत्र, वनवास — चार कार्ड; दो पहचान।
13. आम गलतियाँ
- यथाशक्ति को अव्यय धीरे। धीरे एक शब्द पहले; आज दो खंड।
- प्रतिदिन को सिर्फ़ उपसर्ग। सिर प्रति अलग शब्द पर पहले; आज अव्ययीभाव।
- राजपुत्र को संधि। विभक्ति छिपी, स्वर नहीं टकराए।
- राजपुत्र को संकर। दोनों तत्सम घर, संकर वाले विषय में नहीं।
- वनवास और यथाशक्ति एक कार्ड। तत्पुरुष बनाम अव्ययीभाव — प्रधान पूछो।
- नीलकमल को आज तत्पुरुष। कर्मधारय आगे।
- अधर्म को आज। नञ् आगे।
- विद्यालय यहीं पूरा विग्रह वाक्य। जेब अर्थ; वाक्य आगे।
- 6 भेद यहीं रटना। दो आज; चार आगे।
- पाठशाला की बनावट यहीं फिर। यौगिक पहले; घर आज।
- रेलगाड़ी को आज। संकर पहले।
- नया विकार गिनना। आज घर-जोड़।
जाँच: (1) विभक्ति छिपी, एक पद। (2) कार्ड: यथाशक्ति, प्रतिदिन, राजपुत्र, वनवास। (3) विद्यालय जेब। (4) कर्मधारय आगे। (5) विग्रह आगे।
14. इस विषय का सार
- समास — दो पद एक पद, विभक्ति छिपी। नया विकार नहीं।
- कार्ड: यथाशक्ति-प्रतिदिन अव्ययीभाव, राजपुत्र-वनवास तत्पुरुष।
- अव्यय जैसा पूरा? अव्ययीभाव। पीछे प्रधान? तत्पुरुष।
- विद्यालय जेब — अर्थ आज, ध्वनि पहले। कर्मधारय आगे। विग्रह आगे।
- यौगिक कपड़ा पहले। आज घर कौन।
आगे समास — कर्मधारय, द्विगु है।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. समास क्या है? कार्ड के 4 लिखो। नया विकार है?
उत्तर
दो या अधिक पद एक पद बनें, विभक्ति छिपे। यथाशक्ति, प्रतिदिन, राजपुत्र, वनवास। नहीं — आज घर-जोड़; विकार शब्द पर पहले से।
2. यथाशक्ति और राजपुत्र एक पहचान हैं? धीरे अव्ययीभाव है?
उत्तर
नहीं — यथाशक्ति अव्ययीभाव; राजपुत्र तत्पुरुष। नहीं — धीरे एक शब्द अव्यय, अव्यय वाले विषय में; अव्ययीभाव दो खंड आज।
3. प्रतिदिन = उपसर्ग प्रति ठीक है? वन में वास कौन-सा कार्ड है?
उत्तर
नहीं — प्रतिदिन अव्ययीभाव; प्रति सिर अलग शब्द पर उपसर्ग वाले विषय में। वनवास तत्पुरुष — में छिपा, वास प्रधान।
4. नीलकमल आज का कार्ड है? रेलगाड़ी आज है?
उत्तर
नहीं — कर्मधारय आगे। नहीं — संकर, संकर वाले विषय में; राजपुत्र एक घर आज तत्पुरुष।
5. विद्यालय का पूरा विग्रह वाक्य आज लिखना है? अधर्म पाँचवाँ कार्ड है?
उत्तर
नहीं — अर्थ तत्पुरुष जेब आज; पूरा वाक्य विग्रह आगे। नहीं — नञ् आगे; कार्ड 4, विद्यालय जेब।
विषय समाप्त · समास — अव्ययीभाव, तत्पुरुष
