अंग 4 · वाक्य विचार
पाठ 4.5
विषय शुरू · विसर्ग संधि
व्यंजन संधि वाले विषय में दो व्यंजन टकराए — जश्त्व, श्चुत्व, परसवर्ण, द्वित्व; मनोहर नाम भर था, निश्चय खुला, निश्चल दीवार। अनुस्वार वाले विषय में ः चिह्न था — अतः, दुःख, मनः + हर झलक। अयोगवाह वाले विषय में अं अः वर्ग। उपसर्ग वाले विषय में निः, दुः सिर। आज वह जोड़: विसर्ग का स्वर या व्यंजन से मेल। कार्ड के 4: उत्व, सत्व, रुत्व, लोप। उत्व = अः + घोष → ओ। सत्व = ः + अघोष च/त/क → श्/स्/ष्। रुत्व = इः/उः + स्वर या घोष → र्। लोप = ः गिरे, स्वर चिपकें। नया विकार नहीं। समास आगे। तोड़ना आगे। आज ः की सीमा।
1. जोड़ क्या है
परिभाषा सीधी रखो: जब पद के अंत का विसर्ग आगे स्वर या व्यंजन से टकराकर रूप बदले, वह विसर्ग संधि है। चिह्न पहचानना पहले; आज मेल।
मनः + हर = मनोहर। — अः के बाद घोष ह; उत्व, ओ।
निः + चल = निश्चल। — ः के बाद च; सत्व। अनुस्वार वाले विषय की झलक आज कार्ड।
प्रश्न: ः के बाद स्वर, घोष, अघोष, या ः टिका? फिर कार्ड चुनो। फूंक बोलना अनुस्वार वाले विषय में; आज मेल।
जाँच: ः टकराया? आज। दो स्वर बिना ः? स्वर संधि पहले। दो व्यंजन बिना ः? व्यंजन पहले। चिह्न सिर्फ़? अनुस्वार पहले।
2. 4 कार्ड एक नज़र में
एक उत्व रटकर रुत्व गायब मत करो। चार मेल, एक कुर्सी।
| कार्ड | मेल | झलक |
|---|---|---|
| उत्व | अः + घोष → ओ (मनोहर) | मनोहर, तपोवन |
| सत्व | ः + अघोष च त क → श् स् ष् | निश्चल, निस्तेज |
| रुत्व | इः/उः + स्वर / घोष → र् | निराशा, निर्धन |
| लोप | ः गिरे, स्वर पास | अतएव |
दुःख — ः टिका, मेल नहीं हुआ — जेब, छोटे नहीं। पूरी सूची रटना नहीं।
जाँच: अः + ह? उत्व। च सामने? सत्व। र् दिखे? रुत्व। अतः + एव? लोप।
3. चिह्न से नाता — फूंक बनाम जोड़
अनुस्वार वाले विषय में ः = हल्की फूंक, दो बिंदु। अयोगवाह वाले विषय में अः वर्ण। आज वही चिह्न दो पदों की सीमा पर: मनः के ः के बाद हर का ह → मनोहर।
अतः — अंत में ः; आगे पद नहीं, संधि नहीं; चिह्न पहले।
मनोहर — मनः और हर टकराए; आज।
अं अः गिनती दोहराओ मत। ह व्यंजन पहले; ः ह की जगह नहीं लेता। छः संख्या — जोड़ नहीं।
जाँच: एक पद का अतः? चिह्न पहले। दो पद? आज। ह = ः? नहीं। छः? संख्या पहले।
4. उत्व — अः से ओ
कार्ड का पहला। उत्व = अः + घोष → ओ। अः के बाद घोष व्यंजन आए तो विसर्ग ओ बनता है। घोष-अघोष वाले विषय में ह घोष।
मनः + हर = मनोहर। — ः → ओ।
मनः + रथ = मनोरथ। तपः + वन = तपोवन।
तपोवन अर्थ समास आगे; आज ध्वनि ओ। मनोहर को मन + ओहर मत काटो — सिर मनः, ः था।
जाँच: अः + ह? ओ। अः + र? ओ। समास? आगे। मन ओहर? ग़लत काट।
5. सत्व — अघोष सामने श् स् ष्
कार्ड का दूसरा। सत्व = ः + अघोष च/त/क → श्/स्/ष्। आगे च छ / त थ / क ख हों तो ः → श् / स् / ष्। उपसर्ग वाले विषय में निः सिर था।
निः + चल = निश्चल। — ः + च → श्च।
निः + तेज = निस्तेज। दुः + कर्म = दुष्कर्म।
निश्चल में पहले ः था। निश्चय व्यंजन संधि वाले विषय में — निस् + चय, ः नहीं। दोनों श्च एक मत घोलो; काट पूछो।
जाँच: निः + च? निश्चल आज। निस् + च? निश्चय पहले। दुष्कर्म? सत्व, ष् + क।
6. रुत्व — ः से र्
कार्ड का तीसरा। रुत्व = इः/उः + स्वर या घोष → र्। अः + घोष उत्व है (ओ); इः उः यहाँ र् बनते हैं।
निः + आशा = निराशा। — ः + आ → रा।
निः + धन = निर्धन। दुः + आत्मा = दुरात्मा।
निर्धन लिखा निर्। सिर निर् उपसर्ग वाले विषय में पहले से; आज ः → र् मेल। दो काट एक शब्द — कुर्सी जुदा।
जाँच: निः + आ? निराशा। निः + ध? निर्धन। निर् सिर? उपसर्ग पहले, मेल आज।
7. लोप — ः गिरे
कार्ड का चौथा। लोप = ः गिर जाए। कभी विसर्ग हट जाता है, आगे स्वर चिपकता है।
अतः + एव = अतएव। — ः गिरा; अ और ए पास।
अतः अकेला चिह्न पहले; अतएव जोड़ आज। इसलिए में ः नहीं — अलग शब्द, वर्तनी वाले विषय में। सूची मत बढ़ा; यह चौथा कार्ड।
जाँच: अतः + एव? अतएव लोप। अतः अकेला? चिह्न पहले। इसलिए? ः नहीं।
8. जेब — दुःख, ः टिका
हर ः मुड़ता नहीं। ख जैसे बड़ी फूंक अघोष सामने विसर्ग रह सकता है। कार्ड नहीं — नाम जेब।
दुः + ख = दुःख। — ः टिका; अनुस्वार वाले विषय का शुद्ध रूप आज भी।
दुख बिना ः बोलचाल पहले से दीवार। आज मेल नहीं हुआ, इसीलिए ः दिखता है। निःशब्द साथी — ः रह सकता है। पूरी सूची नहीं।
जाँच: दुःख? जेब, ः टिका। मनोहर? उत्व कार्ड। हर ः ओ? नहीं।
9. जो विसर्ग संधि नहीं
| रूप | कुर्सी |
|---|---|
| देव + आलय = देवालय | स्वर संधि — पहले |
| निस् + चय = निश्चय | व्यंजन संधि — पहले; ः नहीं |
| सम् + योग = संयोग | व्यंजन / अनुस्वार — पहले |
| राजपुत्र | समास आगे — अर्थ का मेल |
| मनोहर = मनः + हर | विच्छेद आगे — तोड़ना |
| अं, अः | अयोगवाह वाले विषय में — वर्ग |
| छः | संख्या — अनुस्वार वाले विषय में |
क्ष हलंत पहले। हैं / हँसी बिंदु पहले। आज ः का मेल।
जाँच: देवालय? पहले। निश्चय? पहले। मनोहर ध्वनि? आज। राजपुत्र अर्थ? आगे।
10. दीवारें — समास, विच्छेद
| बात | आज नहीं |
|---|---|
| मिला हुआ पद खोलना | समास आगे |
| जुड़े शब्द तोड़ना सूची | संधि विच्छेद आगे |
| अं अः गिनती | अयोगवाह वाले विषय में — पहले |
| हैं बनाम हँसी | अनुस्वार वाले विषय में — पहले |
आठ विकार शब्द पर पहले से। आज जोड़ की ध्वनि। उपसर्ग सिर दोहराओ मत — निः पहले; आज ः मुड़ा या टिका।
जाँच: ः का मेल आज। तोड़? आगे। सौ सूची? नहीं।
11. वाक्य में 4 कार्ड + जेब
अरे! मनोहर निश्चल निराशा में अतएव दुःख न पाए।
- अरे — विस्मयादिबोधक, अटल
- मनोहर — उत्व; मनः + हर
- निश्चल — सत्व; निः + चल
- निराशा — रुत्व; निः + आशा
- अतएव — लोप; अतः + एव
- दुःख — जेब; ः टिका
चार कार्ड बैठे; जेब साथ। निश्चय इस वाक्य में नहीं — व्यंजन मत ठोको जहाँ ः था।
12. शब्द तोड़कर पूरा
उत्व
अः → ओ। मनोहर।
सत्व
ः → श् स् ष्। निश्चल।
रुत्व
ः → र्। निराशा।
लोप
ः गिरे। अतएव।
जेब
दुःख — ः टिका।
दीवार
समास, विच्छेद, निश्चय, अं अः।
उत्व, सत्व, रुत्व, लोप — चार कार्ड; ः टकराए, रूप बदले।
13. आम गलतियाँ
- निश्चल = निस् + चल। सिर निः; सत्व आज। निश्चय पहले।
- मनोहर = मन + ओहर। सिर मनः; उत्व आज।
- देवालय को आज। स्वर संधि पहले; ः नहीं।
- सज्जन को आज। व्यंजन पहले; ः नहीं।
- तपोवन यहीं समास पूरा। ध्वनि आज; अर्थ आगे।
- निर्धन को सिर्फ़ उपसर्ग। सिर पहले; रुत्व मेल आज।
- अतः और अतएव एक। अतः चिह्न; अतएव लोप।
- दुःख पाँचवाँ कार्ड। जेब — ः टिका।
- ः को ह लिखकर खत्म। ह व्यंजन; ः चिह्न पहले, मेल आज।
- छः को संधि। संख्या पहले।
- सब जोड़ यहीं तोड़ डालना। विच्छेद आगे।
- नया विकार गिनना। आज ध्वनि-जोड़।
जाँच: (1) ः टकराए। (2) कार्ड: उत्व, सत्व, रुत्व, लोप। (3) दुःख जेब। (4) निश्चय पहले। (5) समास-विच्छेद आगे।
14. इस विषय का सार
- विसर्ग संधि — पद के ः आगे स्वर या व्यंजन से रूप बदलें। नया विकार नहीं।
- कार्ड: उत्व ओ, सत्व श्-स्-ष्, रुत्व र्, लोप ः गिरे।
- मनोहर मनः + हर आज। निश्चल निः + चल; निश्चय निस्, पहले।
- दुःख जेब, ः टिका। समास आगे। तोड़ना आगे। अं अः पहले।
- चिह्न कपड़ा पहले। आज मेल कौन।
आगे समास — अव्ययीभाव, तत्पुरुष है।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. विसर्ग संधि क्या है? कार्ड के 4 लिखो। नया विकार है?
उत्तर
पद के ः आगे स्वर या व्यंजन से रूप बदलें। उत्व, सत्व, रुत्व, लोप। नहीं — आज जोड़; विकार शब्द पर पहले से।
2. मनः + हर और अतः + एव एक कार्ड हैं? अतः अकेला संधि है?
उत्तर
नहीं — मनोहर उत्व; अतएव लोप। नहीं — अतः एक पद का चिह्न, अनुस्वार वाले विषय में; जोड़ दो पदों पर।
3. निश्चल = निस् + चल ठीक है? निः + आशा कौन-सा कार्ड है?
उत्तर
नहीं — निः + चल, सत्व; निस् + चय निश्चय व्यंजन संधि वाले विषय में। निराशा रुत्व — ः + आ → र्।
4. सज्जन आज का कार्ड है? छः आज है?
उत्तर
नहीं — सत् + जन व्यंजन संधि वाले विषय में; ः नहीं। नहीं — छः संख्या, अनुस्वार वाले विषय में।
5. तपोवन का समास आज खोलना है? दुःख पाँचवाँ कार्ड है?
उत्तर
नहीं — ध्वनि उत्व आज; समास आगे। नहीं — ः टिका जेब; कार्ड 4।
विषय समाप्त · विसर्ग संधि
