Noteclass 9 10

विसर्ग संधि

Lesson 54 of 71

अंग 4 · वाक्य विचार

पाठ 4.5

विषय शुरू · विसर्ग संधि

व्यंजन संधि वाले विषय में दो व्यंजन टकराए — जश्त्व, श्चुत्व, परसवर्ण, द्वित्व; मनोहर नाम भर था, निश्चय खुला, निश्चल दीवार। अनुस्वार वाले विषय में ः चिह्न था — अतः, दुःख, मनः + हर झलक। अयोगवाह वाले विषय में अं अः वर्ग। उपसर्ग वाले विषय में निः, दुः सिर। आज वह जोड़: विसर्ग का स्वर या व्यंजन से मेल। कार्ड के 4: उत्व, सत्व, रुत्व, लोप। उत्व = अः + घोष → ओ। सत्व = ः + अघोष च/त/क → श्/स्/ष्। रुत्व = इः/उः + स्वर या घोष → र्। लोप = ः गिरे, स्वर चिपकें। नया विकार नहीं। समास आगे। तोड़ना आगे। आज ः की सीमा।

1. जोड़ क्या है

परिभाषा सीधी रखो: जब पद के अंत का विसर्ग आगे स्वर या व्यंजन से टकराकर रूप बदले, वह विसर्ग संधि है। चिह्न पहचानना पहले; आज मेल।

मनः + हर = मनोहर। — अः के बाद घोष ह; उत्व, ओ।

निः + चल = निश्चल। — ः के बाद च; सत्व। अनुस्वार वाले विषय की झलक आज कार्ड।

प्रश्न: ः के बाद स्वर, घोष, अघोष, या ः टिका? फिर कार्ड चुनो। फूंक बोलना अनुस्वार वाले विषय में; आज मेल।

जाँच: ः टकराया? आज। दो स्वर बिना ः? स्वर संधि पहले। दो व्यंजन बिना ः? व्यंजन पहले। चिह्न सिर्फ़? अनुस्वार पहले।

2. 4 कार्ड एक नज़र में

एक उत्व रटकर रुत्व गायब मत करो। चार मेल, एक कुर्सी।

कार्ड मेल झलक
उत्व अः + घोष → ओ (मनोहर) मनोहर, तपोवन
सत्व ः + अघोष च त क → श् स् ष् निश्चल, निस्तेज
रुत्व इः/उः + स्वर / घोष → र् निराशा, निर्धन
लोप ः गिरे, स्वर पास अतएव

दुःख — ः टिका, मेल नहीं हुआ — जेब, छोटे नहीं। पूरी सूची रटना नहीं।

जाँच: अः + ह? उत्व। च सामने? सत्व। र् दिखे? रुत्व। अतः + एव? लोप।

3. चिह्न से नाता — फूंक बनाम जोड़

अनुस्वार वाले विषय में ः = हल्की फूंक, दो बिंदु। अयोगवाह वाले विषय में अः वर्ण। आज वही चिह्न दो पदों की सीमा पर: मनः के ः के बाद हर का ह → मनोहर।

अतः — अंत में ः; आगे पद नहीं, संधि नहीं; चिह्न पहले।

मनोहर — मनः और हर टकराए; आज।

अं अः गिनती दोहराओ मत। ह व्यंजन पहले; ः ह की जगह नहीं लेता। छः संख्या — जोड़ नहीं।

जाँच: एक पद का अतः? चिह्न पहले। दो पद? आज। ह = ः? नहीं। छः? संख्या पहले।

4. उत्व — अः से ओ

कार्ड का पहला। उत्व = अः + घोष → ओ। अः के बाद घोष व्यंजन आए तो विसर्ग ओ बनता है। घोष-अघोष वाले विषय में ह घोष।

मनः + हर = मनोहर। — ः → ओ।

मनः + रथ = मनोरथ। तपः + वन = तपोवन।

तपोवन अर्थ समास आगे; आज ध्वनि ओ। मनोहर को मन + ओहर मत काटो — सिर मनः, ः था।

जाँच: अः + ह? ओ। अः + र? ओ। समास? आगे। मन ओहर? ग़लत काट।

5. सत्व — अघोष सामने श् स् ष्

कार्ड का दूसरा। सत्व = ः + अघोष च/त/क → श्/स्/ष्। आगे च छ / त थ / क ख हों तो ः → श् / स् / ष्। उपसर्ग वाले विषय में निः सिर था।

निः + चल = निश्चल। — ः + च → श्च।

निः + तेज = निस्तेज। दुः + कर्म = दुष्कर्म।

निश्चल में पहले ः था। निश्चय व्यंजन संधि वाले विषय में — निस् + चय, ः नहीं। दोनों श्च एक मत घोलो; काट पूछो।

जाँच: निः + च? निश्चल आज। निस् + च? निश्चय पहले। दुष्कर्म? सत्व, ष् + क।

6. रुत्व — ः से र्

कार्ड का तीसरा। रुत्व = इः/उः + स्वर या घोष → र्। अः + घोष उत्व है (ओ); इः उः यहाँ र् बनते हैं।

निः + आशा = निराशा। — ः + आ → रा।

निः + धन = निर्धन। दुः + आत्मा = दुरात्मा।

निर्धन लिखा निर्। सिर निर् उपसर्ग वाले विषय में पहले से; आज ः → र् मेल। दो काट एक शब्द — कुर्सी जुदा।

जाँच: निः + आ? निराशा। निः + ध? निर्धन। निर् सिर? उपसर्ग पहले, मेल आज।

7. लोप — ः गिरे

कार्ड का चौथा। लोप = ः गिर जाए। कभी विसर्ग हट जाता है, आगे स्वर चिपकता है।

अतः + एव = अतएव। — ः गिरा; अ और ए पास।

अतः अकेला चिह्न पहले; अतएव जोड़ आज। इसलिए में ः नहीं — अलग शब्द, वर्तनी वाले विषय में। सूची मत बढ़ा; यह चौथा कार्ड।

जाँच: अतः + एव? अतएव लोप। अतः अकेला? चिह्न पहले। इसलिए? ः नहीं।

8. जेब — दुःख, ः टिका

हर ः मुड़ता नहीं। ख जैसे बड़ी फूंक अघोष सामने विसर्ग रह सकता है। कार्ड नहीं — नाम जेब।

दुः + ख = दुःख। — ः टिका; अनुस्वार वाले विषय का शुद्ध रूप आज भी।

दुख बिना ः बोलचाल पहले से दीवार। आज मेल नहीं हुआ, इसीलिए ः दिखता है। निःशब्द साथी — ः रह सकता है। पूरी सूची नहीं।

जाँच: दुःख? जेब, ः टिका। मनोहर? उत्व कार्ड। हर ः ओ? नहीं।

9. जो विसर्ग संधि नहीं

रूप कुर्सी
देव + आलय = देवालय स्वर संधि — पहले
निस् + चय = निश्चय व्यंजन संधि — पहले; ः नहीं
सम् + योग = संयोग व्यंजन / अनुस्वार — पहले
राजपुत्र समास आगे — अर्थ का मेल
मनोहर = मनः + हर विच्छेद आगे — तोड़ना
अं, अः अयोगवाह वाले विषय में — वर्ग
छः संख्या — अनुस्वार वाले विषय में

क्ष हलंत पहले। हैं / हँसी बिंदु पहले। आज ः का मेल।

जाँच: देवालय? पहले। निश्चय? पहले। मनोहर ध्वनि? आज। राजपुत्र अर्थ? आगे।

10. दीवारें — समास, विच्छेद

बात आज नहीं
मिला हुआ पद खोलना समास आगे
जुड़े शब्द तोड़ना सूची संधि विच्छेद आगे
अं अः गिनती अयोगवाह वाले विषय में — पहले
हैं बनाम हँसी अनुस्वार वाले विषय में — पहले

आठ विकार शब्द पर पहले से। आज जोड़ की ध्वनि। उपसर्ग सिर दोहराओ मत — निः पहले; आज ः मुड़ा या टिका।

जाँच: ः का मेल आज। तोड़? आगे। सौ सूची? नहीं।

11. वाक्य में 4 कार्ड + जेब

अरे! मनोहर निश्चल निराशा में अतएव दुःख न पाए।

  • अरे — विस्मयादिबोधक, अटल
  • मनोहर — उत्व; मनः + हर
  • निश्चल — सत्व; निः + चल
  • निराशा — रुत्व; निः + आशा
  • अतएव — लोप; अतः + एव
  • दुःख — जेब; ः टिका

चार कार्ड बैठे; जेब साथ। निश्चय इस वाक्य में नहीं — व्यंजन मत ठोको जहाँ ः था।

12. शब्द तोड़कर पूरा

उत्व

अः → ओ। मनोहर।

सत्व

ः → श् स् ष्। निश्चल।

रुत्व

ः → र्। निराशा।

लोप

ः गिरे। अतएव।

जेब

दुःख — ः टिका।

दीवार

समास, विच्छेद, निश्चय, अं अः।

उत्व, सत्व, रुत्व, लोप — चार कार्ड; ः टकराए, रूप बदले।

13. आम गलतियाँ

  • निश्चल = निस् + चल। सिर निः; सत्व आज। निश्चय पहले।
  • मनोहर = मन + ओहर। सिर मनः; उत्व आज।
  • देवालय को आज। स्वर संधि पहले; ः नहीं।
  • सज्जन को आज। व्यंजन पहले; ः नहीं।
  • तपोवन यहीं समास पूरा। ध्वनि आज; अर्थ आगे।
  • निर्धन को सिर्फ़ उपसर्ग। सिर पहले; रुत्व मेल आज।
  • अतः और अतएव एक। अतः चिह्न; अतएव लोप।
  • दुःख पाँचवाँ कार्ड। जेब — ः टिका।
  • ः को ह लिखकर खत्म। ह व्यंजन; ः चिह्न पहले, मेल आज।
  • छः को संधि। संख्या पहले।
  • सब जोड़ यहीं तोड़ डालना। विच्छेद आगे।
  • नया विकार गिनना। आज ध्वनि-जोड़।

जाँच: (1) ः टकराए। (2) कार्ड: उत्व, सत्व, रुत्व, लोप। (3) दुःख जेब। (4) निश्चय पहले। (5) समास-विच्छेद आगे।

14. इस विषय का सार

  • विसर्ग संधि — पद के ः आगे स्वर या व्यंजन से रूप बदलें। नया विकार नहीं।
  • कार्ड: उत्व ओ, सत्व श्-स्-ष्, रुत्व र्, लोप ः गिरे।
  • मनोहर मनः + हर आज। निश्चल निः + चल; निश्चय निस्, पहले।
  • दुःख जेब, ः टिका। समास आगे। तोड़ना आगे। अं अः पहले।
  • चिह्न कपड़ा पहले। आज मेल कौन।

आगे समास — अव्ययीभाव, तत्पुरुष है।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. विसर्ग संधि क्या है? कार्ड के 4 लिखो। नया विकार है?

उत्तर

पद के ः आगे स्वर या व्यंजन से रूप बदलें। उत्व, सत्व, रुत्व, लोप। नहीं — आज जोड़; विकार शब्द पर पहले से।

2. मनः + हर और अतः + एव एक कार्ड हैं? अतः अकेला संधि है?

उत्तर

नहीं — मनोहर उत्व; अतएव लोप। नहीं — अतः एक पद का चिह्न, अनुस्वार वाले विषय में; जोड़ दो पदों पर।

3. निश्चल = निस् + चल ठीक है? निः + आशा कौन-सा कार्ड है?

उत्तर

नहीं — निः + चल, सत्व; निस् + चय निश्चय व्यंजन संधि वाले विषय में। निराशा रुत्व — ः + आ → र्।

4. सज्जन आज का कार्ड है? छः आज है?

उत्तर

नहीं — सत् + जन व्यंजन संधि वाले विषय में; ः नहीं। नहीं — छः संख्या, अनुस्वार वाले विषय में।

5. तपोवन का समास आज खोलना है? दुःख पाँचवाँ कार्ड है?

उत्तर

नहीं — ध्वनि उत्व आज; समास आगे। नहीं — ः टिका जेब; कार्ड 4।

विषय समाप्त · विसर्ग संधि