अंग 4 · वाक्य विचार
पाठ 4.4
विषय शुरू · व्यंजन संधि
स्वर संधि वाले विषय में दो स्वर टकराए — दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण; संयोग नाम भर था। व्यंजन वाले विषय में वर्ग बैठे। घोष-अघोष वाले विषय में गला। अनुस्वार वाले विषय में बिंदु। हलंत वाले विषय में क्ष चिपका, जोड़ दो पदों का नहीं। उपसर्ग वाले विषय में सम्, निस्, उत् सिर थे। आज वह जोड़: व्यंजन से व्यंजन का मेल। कार्ड के 4: जश्त्व, श्चुत्व, परसवर्ण, द्वित्व। जश्त्व = अघोष के बाद घोष आए तो अघोष घोष बने (त्+ज=ज्ज)। श्चुत्व = स्/त् के सामने च वर्ग → श्/च्। परसवर्ण = म् आगे के वर्ग जैसा नाक वाला (ङ ञ ण न म) या बिंदु ं। द्वित्व = व्यंजन दोहरा। नया विकार नहीं। विसर्ग आगे। तोड़ना आगे। आज व्यंजन से व्यंजन।
1. जोड़ क्या है
परिभाषा सीधी रखो: जब दो पदों के व्यंजन पास आकर रूप बदलें, वह व्यंजन संधि है। वर्ण की चिपकन क्ष नहीं — दो टुकड़ों का मेल।
सत् + जन = सज्जन। — त् के बाद घोष ज; जश्त्व।
सम् + योग = संयोग। — म् के बाद य; परसवर्ण। स्वर संधि वाले विषय की दीवार आज कार्ड।
प्रश्न: दो व्यंजन कौन, गला एक-सा या जुदा, वर्ग एक या अलग? फिर कार्ड चुनो। बिंदु लिखना अनुस्वार वाले विषय में; आज मेल।
जाँच: दो व्यंजन टकराए? आज। दो स्वर? पहले। विसर्ग? आगे। क्ष? हलंत पहले, जोड़ आज नहीं।
2. 4 कार्ड एक नज़र में
एक जश्त्व रटकर परसवर्ण गायब मत करो। चार मेल, एक कुर्सी।
| कार्ड | मेल | झलक |
|---|---|---|
| जश्त्व | अघोष + घोष → घोष (त्+ज=ज्ज) | सज्जन, दिग्गज |
| श्चुत्व | स् / त् + च वर्ग → श् / च् (निश्चय) | निश्चय, उच्चारण |
| परसवर्ण | म् + आगे का वर्ग → नाक वाला / बिंदु ं | संयोग, संकल्प |
| द्वित्व | एक जैसे, या त् + न → दोहरा (त्त, न्न) | उत्तम, जगन्नाथ |
चर्त्व — घोष के बाद अघोष आए तो घोष अघोष बने (सत्कार) — जेब, छोटे नहीं। पूरी सूची रटना नहीं।
जाँच: गला खुलें? जश्त्व। च सामने? श्चुत्व। म् + वर्ग? परसवर्ण। दोहरा? द्वित्व।
3. वर्ण से नाता — चिपकन बनाम जोड़
हलंत वाले विषय में क्ष = क् + ष एक शब्द के अंदर चिपकन थी। आज वही हल ध्वनि दो पदों की सीमा पर: सत् के त् के बाद जन का ज → सज्जन।
पक्ष — क्ष अंदर; संधि नहीं, हलंत पहले।
सज्जन — सत् और जन टकराए; आज।
वर्ग दोहराओ मत। आज सीमा पर टक्कर। देवालय स्वर संधि वाले विषय में — स्वर-स्वर, आज नहीं।
जाँच: एक शब्द का क्ष? हलंत पहले। दो पद? आज। देवालय? स्वर पहले।
4. जश्त्व — अघोष घोष बने
कार्ड का पहला। जश्त्व = अघोष घोष बने। घोष-अघोष वाले विषय में गला शांत = अघोष, काँपे = घोष। वर्ग का पहला (क् च् ट् त् प्) जब घोष के सामने आए, गला खुलकर तीसरा बनता है (ग् ज् ड् द् ब्)।
सत् + जन = सज्जन। — त् → ज्; ज के साथ ज्ज।
दिक् + गज = दिग्गज। — क् → ग्; ग्ग।
गला का नियम पहले; आज मेल सीमा पर। सज्जन को सज् + जन मत काटो — सिर सत्।
जाँच: त् + ज? ज्ज। क् + ग? ग्ग। गला पहले, जोड़ आज।
5. श्चुत्व — च वर्ग सामने
कार्ड का दूसरा। श्चुत्व = स्/त् के सामने च वर्ग → श्/च्। आगे च छ ज झ ञ हों तो स् → श्, त् → च्। उपसर्ग वाले विषय में निस् सिर था।
निस् + चय = निश्चय। — स् + च → श्च।
उत् + चारण = उच्चारण। — त् + च → च्च। उच्चारण वाले विषय में जगह-फूंक; शब्द आज जोड़।
निश्चय में ः नहीं — निस्, विसर्ग नहीं। निश्चल दीवार, विसर्ग आगे।
जाँच: स् + च? श्च। त् + च? च्च। निश्चल? आगे। ः दिखे? विसर्ग आगे।
6. परसवर्ण — म् वर्ग पकड़े
कार्ड का तीसरा। परसवर्ण = म् आगे के वर्ग जैसा नाक वाला (ङ ञ ण न म) या बिंदु ं। सम् का म् आगे के वर्ग का पंचमाक्षर बनता है; लिखने में अक्सर बिंदु ं। पंचमाक्षर वाले विषय में ङ ञ ण न म; अनुस्वार वाले विषय में बिंदु कपड़ा। आज मेल।
सम् + कल्प = संकल्प। — म् + क → ङ् / ं।
सम् + योग = संयोग। — य का अपना पंचमाक्षर नहीं; बिंदु, अनुस्वार वाले विषय की झलक।
गंगा का लिखा रूप पहले; संयोग जोड़ आज। हैं / हँसी दोहराओ मत। सिर सम्, उपसर्ग वाले विषय में; आज म् मुड़ा।
जाँच: म् + क? संक। म् + य? संय। चंद्रबिंदु हँसी? अनुस्वार पहले, जोड़ नहीं।
7. द्वित्व — दोहरा व्यंजन
कार्ड का चौथा। द्वित्व = व्यंजन दोहरा। एक जैसे व्यंजन पास आएँ, या त् के बाद न, तो रूप दोहरा दिखे।
उत् + तम = उत्तम। — त् + त → त्त।
जगत् + नाथ = जगन्नाथ। — त् + न → न्न। स्वर संधि वाले विषय की दीवार आज कार्ड।
उत्तम शब्द जोड़ आज। पुरुष वाले विषय में उत्तम मैं — कुर्सी जुदा, एक शब्द दो काट सकता है। जगन्नाथ अर्थ समास आगे; आज ध्वनि न्न।
जाँच: त् + त? त्त। त् + न? न्न। मैं उत्तम? पुरुष पहले। समास? आगे।
8. जेब — चर्त्व
घोष के बाद अघोष आए तो घोष अघोष बनता है — जश्त्व उलटा। यही चर्त्व। कार्ड नहीं — नाम जेब।
सद् + कार = सत्कार। — द् → त्; क अघोष सामने।
सज्जन जश्त्व, सत्कार चर्त्व — गला खुलता है या बंद, पूछो। सूची मत बढ़ा। चार कार्ड पकड़ो; यह उलटी तह जेब।
जाँच: सत्कार? चर्त्व जेब। सज्जन? जश्त्व कार्ड। पूरी सूची? नहीं।
9. जो व्यंजन संधि नहीं
| रूप | कुर्सी |
|---|---|
| देव + आलय = देवालय | स्वर संधि — पहले |
| मनः + हर = मनोहर | विसर्ग आगे |
| निः + चल = निश्चल | विसर्ग आगे — ः था |
| राजपुत्र | समास आगे — अर्थ का मेल |
| सज्जन = सत् + जन | विच्छेद आगे — तोड़ना |
| क्ष, त्र, ज्ञ | हलंत वाले विषय में |
| हैं, हँसी | अनुस्वार वाले विषय में — चिह्न, जोड़ नहीं |
दुःख, अतः विसर्ग परिवार। निश्चय आज; निश्चल आगे।
जाँच: देवालय? पहले। मनोहर? आगे। संयोग ध्वनि? आज। राजपुत्र अर्थ? आगे।
10. दीवारें — विसर्ग, विच्छेद, समास
| बात | आज नहीं |
|---|---|
| ः का मेल | विसर्ग संधि आगे |
| जुड़े शब्द तोड़ना सूची | संधि विच्छेद आगे |
| मिला हुआ पद खोलना | समास आगे |
| हैं बनाम हँसी | अनुस्वार वाले विषय में — पहले |
आठ विकार शब्द पर पहले से। आज जोड़ की ध्वनि। उपसर्ग सिर दोहराओ मत — सम् पहले; आज म् मुड़ा।
जाँच: व्यंजन-व्यंजन आज। तोड़? आगे। सौ सूची? नहीं।
11. वाक्य में 4 कार्ड + जेब
अरे! सज्जन संयोग से निश्चय जगन्नाथ के द्वार पर सत्कार पाए।
- अरे — विस्मयादिबोधक, अटल
- सज्जन — जश्त्व; सत् + जन
- संयोग — परसवर्ण; सम् + योग
- निश्चय — श्चुत्व; निस् + चय
- जगन्नाथ — द्वित्व; जगत् + नाथ
- सत्कार — चर्त्व जेब; सद् + कार
चार कार्ड बैठे; जेब साथ। मनोहर इस वाक्य में नहीं — विसर्ग मत ठोको जहाँ ः नहीं।
12. शब्द तोड़कर पूरा
जश्त्व
अघोष घोष बने। सज्जन।
श्चुत्व
च वर्ग सामने श् च्। निश्चय।
परसवर्ण
म् वर्ग पकड़े, लिखने में ं। संयोग।
द्वित्व
दोहरा। उत्तम, जगन्नाथ।
जेब
चर्त्व सत्कार।
दीवार
विसर्ग, विच्छेद, समास, क्ष।
जश्त्व, श्चुत्व, परसवर्ण, द्वित्व — चार कार्ड; दो व्यंजन, एक रूप।
13. आम गलतियाँ
- क्ष को व्यंजन संधि। हलंत पहले; दो पद नहीं।
- संयोग को स्वर जोड़। म् + य आज; देवालय पहले।
- निश्चय = निः + चय। सिर निस्; ः नहीं। निश्चल आगे।
- सज्जन = सज् + जन। सिर सत्; जश्त्व आज।
- मनोहर को आज। विसर्ग आगे।
- जगन्नाथ यहीं समास पूरा। ध्वनि आज; अर्थ आगे।
- उत्तम को पुरुष उत्तम। मैं पहले; उत् + तम आज।
- उच्चारण को सिर्फ़ जगह-फूंक। शब्द उत् + चारण आज।
- सत्कार पाँचवाँ कार्ड। चर्त्व जेब।
- हैं / हँसी यहीं फिर रटना। अनुस्वार वाले विषय में।
- सब जोड़ यहीं तोड़ डालना। विच्छेद आगे।
- नया विकार गिनना। आज ध्वनि-जोड़।
जाँच: (1) दो व्यंजन टकराएँ। (2) कार्ड: जश्त्व, श्चुत्व, परसवर्ण, द्वित्व। (3) चर्त्व जेब। (4) विसर्ग आगे। (5) विच्छेद आगे।
14. इस विषय का सार
- व्यंजन संधि — दो पदों के व्यंजन पास आकर रूप बदलें। नया विकार नहीं।
- कार्ड: जश्त्व गला खुले, श्चुत्व च सामने, परसवर्ण म् बिंदु, द्वित्व दोहरा।
- संयोग सम् + योग आज। निश्चय निस् + चय, ः नहीं।
- चर्त्व जेब। विसर्ग आगे। तोड़ना आगे। समास आगे। क्ष पहले।
- घोष कपड़ा पहले। आज मेल कौन।
आगे विसर्ग संधि है।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. व्यंजन संधि क्या है? कार्ड के 4 लिखो। नया विकार है?
उत्तर
दो पदों के व्यंजन पास आकर रूप बदलें। जश्त्व, श्चुत्व, परसवर्ण, द्वित्व। नहीं — आज जोड़; विकार शब्द पर पहले से।
2. सत् + जन और सद् + कार एक कार्ड हैं? पक्ष व्यंजन संधि है?
उत्तर
नहीं — सज्जन जश्त्व; सत्कार चर्त्व जेब। नहीं — पक्ष का क्ष हलंत वाले विषय में चिपकन; जोड़ दो पदों पर।
3. निश्चय = निः + चय ठीक है? सम् + योग कौन-सा कार्ड है?
उत्तर
नहीं — निस् + चय, श्चुत्व; ः नहीं, निश्चल विसर्ग आगे। संयोग परसवर्ण — म् + य → ं।
4. मनोहर आज का कार्ड है? क्ष आज है?
उत्तर
नहीं — मनः + हर विसर्ग आगे। नहीं — क्ष हलंत वाले विषय में; दो पद नहीं।
5. जगन्नाथ का समास आज खोलना है? उत्तम पाँचवाँ कार्ड है?
उत्तर
नहीं — ध्वनि द्वित्व आज; समास आगे। नहीं — उत् + तम द्वित्व कार्ड 4 में; चर्त्व जेब; पुरुष उत्तम पहले।
विषय समाप्त · व्यंजन संधि
