अंग 4 · वाक्य विचार
पाठ 4.14
विषय शुरू · संधि विच्छेद
स्वर संधि वाले विषय में विद्यालय जुड़ा, अत्याचार दीवार काट। व्यंजन संधि वाले विषय में सज्जन जुड़ा; सत् + जन तोड़ना दीवार। विसर्ग संधि वाले विषय में मनोहर जुड़ा; मनः + हर तोड़ना दीवार। तत्पुरुष वाले विषय में विद्यालय अर्थ जेब, राजपुत्र संधि नहीं। मानक वर्तनी वाले विषय में इसलिए चिपक; तोड़ विद्यालय दीवार। आज उलटी चाल: विच्छेद = जोड़ तोड़ना — विद्यालय = विद्या + आलय। कार्ड के 4: विद्यालय, सज्जन, मनोहर, अत्याचार। नया विकार नहीं। विग्रह आगे। आज ध्वनि काट, अर्थ वाक्य नहीं।
1. जोड़ क्या है
परिभाषा सीधी रखो: विच्छेद = जोड़ तोड़ना — संधि की उलटी चाल; जुड़े रूप को दो पदों पर + से खोलो। विद्यालय = विद्या + आलय। मेल पहले (स्वर, व्यंजन, विसर्ग वाले विषय)। आज सिर पूछो, फिर काट। घर-नाम फिर से नहीं। विग्रह पूरा वाक्य आगे।
विद्यालय = विद्या + आलय। — आ दीर्घ; स्वर संधि वाले विषय की दीवार आज कार्ड।
राजपुत्र। — स्वर-स्वर नहीं टकराए; तत्पुरुष वाले विषय में संधि नहीं। विग्रह आगे।
प्रश्न: स्वर टकराए, व्यंजन टकराए, ः टकराया, या समास बिना मेल? फिर कार्ड चुनो। राजपुत्र जेब।
जाँच: आ एक? विद्यालय। ज्ज? सज्जन। ओ ः से? मनोहर। य् अति से? अत्याचार। का छिपा बिना स्वर-मेल? जेब।
2. 4 कार्ड एक नज़र में
एक विद्यालय रटकर अत्याचार गायब मत करो। तीन घर मेल, चार काट, एक कुर्सी।
| कार्ड | तोड़ | घर |
|---|---|---|
| विद्यालय | विद्या + आलय | स्वर — दीर्घ (आ + आ) |
| सज्जन | सत् + जन | व्यंजन — जश्त्व (त् → ज्) |
| मनोहर | मनः + हर | विसर्ग — उत्व (ः → ओ) |
| अत्याचार | अति + आचार | स्वर — यण (इ → य्) |
राजपुत्र — समास, ध्वनि-संधि नहीं — जेब, छोटे नहीं। नाम तोड़ दो कुर्सियाँ; आज + ध्वनि की।
जाँच: विद्या + आलय? स्वर। सत् + जन? व्यंजन। मनः + हर? विसर्ग। अति + आचार? यण। राजा + पुत्र? जेब, संधि नहीं।
3. मेल से नाता — जोड़ बनाम काट
स्वर-व्यंजन-विसर्ग वाले विषय में जोड़ लिखा। आज वही शब्द उलटा। नया सूत्र नहीं — सिर याद, + लगा।
विद्या + आलय = विद्यालय। — मेल पहले।
विद्यालय = विद्या + आलय। — काट आज।
निश्चय = निस् + चय व्यंजन पहले। निश्चल = निः + चल विसर्ग पहले। दोनों श्च; सिर पूछो। परिवार, पाँचवाँ कार्ड नहीं।
जाँच: जोड़ पहले? हाँ। आज + ? हाँ। निश्चय निः? नहीं — निस्। निश्चल निस्? नहीं — निः।
4. विद्यालय — विद्या + आलय
कार्ड का पहला। आ + आ दीर्घ। स्वर संधि वाले विषय में देवालय परिवार। आज काट: विद्या, आलय।
विद्यालय = विद्या + आलय। — दीर्घ।
देवालय = देव + आलय। — परिवार; कार्ड विद्यालय।
विद्या का आलय अर्थ तत्पुरुष वाले विषय की जेब; पूरा वाक्य विग्रह आगे। आज सिर्फ़ ध्वनि +। देवेंद्र = देव + इंद्र गुण परिवार; सूची मत बढ़ा।
जाँच: विद्यालय? विद्या + आलय। विद्या का आलय? अर्थ आगे। सज्जन? व्यंजन कार्ड।
5. सज्जन — सत् + जन
कार्ड का दूसरा। त् घोष के पास ज् बना। व्यंजन संधि वाले विषय में जश्त्व; आज सिर सत्, सज् + जन मत काटो।
सज्जन = सत् + जन। — जश्त्व।
संयोग = सम् + योग। — परिवार परसवर्ण; कार्ड सज्जन।
सत्कार चर्त्व जेब पहले — सत् + कार, गला बंद। क्ष हलंत चिपकन, दो पद नहीं। उत्तम द्वित्व परिवार; सूची मत बढ़ा।
जाँच: सज्जन? सत् + जन। सज् + जन? ग़लत सिर। मनोहर? विसर्ग कार्ड।
6. मनोहर — मनः + हर
कार्ड का तीसरा। ः के बाद घोष, ओ। विसर्ग संधि वाले विषय में उत्व; आज सिर मनः, मन + ओहर मत काटो।
मनोहर = मनः + हर। — उत्व।
निश्चल = निः + चल। — परिवार सत्व; कार्ड मनोहर। निश्चय व्यंजन, निस्।
दुःख ः टिका — विसर्ग वाले विषय की जेब, जोड़ नहीं, आज काट नहीं। तपोवन ध्वनि ओ पहले; अर्थ समास आगे।
जाँच: मनोहर? मनः + हर। मन + ओहर? ग़लत सिर। दुःख तोड़ो? नहीं, जेब पहले ः टिका।
7. अत्याचार — अति + आचार
कार्ड का चौथा। इ + आ → य्। स्वर संधि वाले विषय में यण; उपसर्ग वाले विषय में अति सिर। अ + त्याचार मत काटो।
अत्याचार = अति + आचार। — यण।
स्वागत = सु + आगत। — परिवार; कार्ड अत्याचार।
सिर अति। त्याचार अलग पद नहीं। तोड़ की यह दीवार आज कार्ड। यण का पूरा नियम नहीं — एक काट।
जाँच: अति + आचार? यण आज। अ + त्याचार? ग़लत। राजपुत्र? जेब।
8. जेब — राजपुत्र
राजपुत्र। तत्पुरुष वाले विषय में का छिपा। स्वर-स्वर नहीं टकराए — संधि नहीं। कार्ड नहीं — नाम जेब।
राजपुत्र। — समास; राजा + पुत्र ध्वनि-संधि नहीं।
राजा का पुत्र पूरा वाक्य विग्रह आगे। आज + मत लगाओ जैसे विद्यालय। माता-पिता योजक मानक पहले; द्वंद्व पद, संधि काट नहीं।
जाँच: राजपुत्र? जेब, विग्रह आगे। विद्यालय + ? आज स्वर कार्ड।
9. जो आज का घर नहीं
| रूप | कुर्सी |
|---|---|
| दीर्घ गुण वृद्धि यण नाम | स्वर संधि — मेल पहले; आज काट |
| जश्त्व श्चुत्व नाम | व्यंजन — मेल पहले |
| उत्व सत्व रुत्व लोप | विसर्ग — मेल पहले |
| राजपुत्र, वनवास | समास; विग्रह आगे |
| विद्या का आलय वाक्य | विग्रह आगे; आज ध्वनि |
| अधर्म | नञ् आगे |
| क्ष = क् + ष | हलंत चिपकन — पहले; दो पद नहीं |
| इसलिए एक शब्द | मानक — पहले; संधि काट नहीं |
चार काट आज। सौ सूत्र फिर से नहीं। अर्थ वाक्य आगे।
जाँच: विद्यालय + ? आज। राजा का पुत्र? आगे। अधर्म? आगे।
10. दीवारें — विग्रह, नञ्, अर्थ
| बात | आज नहीं |
|---|---|
| मिला हुआ पद (समस्त पद) का वाक्य | समास विग्रह आगे |
| अधर्म, घनश्याम | नञ् आगे |
| विधि निषेध प्रश्न | अर्थ वाले विषय में आगे |
| पदबंध, पद परिचय | आगे |
आठ विकार शब्द पर पहले से। आज ध्वनि +। मेल के 12 नाम पहले; काट चार झलक।
जाँच: चार कार्ड आज। का छिपा वाक्य? आगे। नञ्? आगे।
11. वाक्य में 4 कार्ड + जेब
अरे! विद्यालय में सज्जन मनोहर रहे; अत्याचार न हो।
- अरे — विस्मयादिबोधक, अटल
- विद्यालय — विद्या + आलय; स्वर
- सज्जन — सत् + जन; व्यंजन
- मनोहर — मनः + हर; विसर्ग
- अत्याचार — अति + आचार; यण
चार कार्ड बैठे। राजपुत्र इस कतार में नहीं — जेब, समास।
12. शब्द तोड़कर पूरा
स्वर
विद्यालय = विद्या + आलय। अत्याचार = अति + आचार।
व्यंजन
सज्जन = सत् + जन। सिर सत्।
विसर्ग
मनोहर = मनः + हर। सिर मनः।
जेब
राजपुत्र — संधि नहीं। विग्रह आगे।
दीवार
विग्रह वाक्य, नञ्, क्ष चिपकन, इसलिए।
विद्यालय, सज्जन, मनोहर, अत्याचार — चार कार्ड; तीन घर मेल, उलटी चाल।
13. आम गलतियाँ
- विद्यालय = विद्या का आलय यहीं। अर्थ विग्रह आगे; आज विद्या + आलय।
- सज्जन = सज् + जन। सिर सत्; जश्त्व पहले।
- मनोहर = मन + ओहर। सिर मनः; उत्व पहले।
- अत्याचार = अ + त्याचार। सिर अति; यण पहले।
- निश्चय = निः + चय। निस्; निश्चल निः।
- राजपुत्र को विद्या + आलय जैसा काटो। जेब; संधि नहीं।
- क्ष दो पद। हलंत पहले, चिपकन।
- दुःख = दु + ख। ः टिका, जोड़ नहीं।
- इसलिए संधि काट। मानक पहले, एक शब्द।
- मेल के 12 नाम आज फिर रटना। काट चार।
- अधर्म आज। नञ् आगे।
- नया विकार गिनना। आज उलटी चाल।
जाँच: (1) मेल उलटा, + लगा। (2) कार्ड: विद्यालय, सज्जन, मनोहर, अत्याचार। (3) राजपुत्र जेब। (4) विग्रह आगे। (5) नञ् आगे।
14. इस विषय का सार
- विच्छेद = जोड़ तोड़ना। नया विकार नहीं। मेल पहले; घर-नाम फिर से नहीं।
- कार्ड: विद्यालय विद्या + आलय, सज्जन सत् + जन, मनोहर मनः + हर, अत्याचार अति + आचार।
- सिर पूछो। सज् / मन / अ त्याचार ग़लत काट।
- राजपुत्र जेब। विद्या का आलय विग्रह आगे। नञ् आगे।
- ध्वनि + आज। अर्थ वाक्य आगे।
आगे समास विग्रह है।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. संधि विच्छेद क्या है? कार्ड के 4 और उनके तोड़ लिखो। नया विकार है?
उत्तर
विच्छेद = जोड़ तोड़ना; जुड़े रूप को + से खोलना। विद्यालय = विद्या + आलय, सज्जन = सत् + जन, मनोहर = मनः + हर, अत्याचार = अति + आचार। नहीं — आज उलटी चाल; विकार शब्द पर पहले से। मेल के नाम पहले।
2. विद्यालय = विद्या का आलय आज का तोड़ है? सज्जन = सज् + जन ठीक है?
उत्तर
नहीं — वह अर्थ, विग्रह आगे; आज विद्या + आलय, स्वर। नहीं — सिर सत् + जन; व्यंजन संधि वाले विषय में जश्त्व।
3. मनोहर = मन + ओहर ठीक है? अत्याचार = अ + त्याचार ठीक है?
उत्तर
नहीं — मनः + हर, विसर्ग। नहीं — अति + आचार, यण; उपसर्ग वाले विषय में अति सिर।
4. राजपुत्र आज का चौथा कार्ड है? निश्चय = निः + चय ठीक है?
उत्तर
नहीं — जेब, समास; विग्रह आगे। नहीं — निस् + चय, व्यंजन; निः + चल निश्चल, विसर्ग।
5. अधर्म आज का तोड़ है? क्ष दो पदों का विच्छेद है?
उत्तर
नहीं — नञ् आगे। नहीं — हलंत वाले विषय में चिपकन; जोड़ दो पदों पर पहले, आज वही उलटा।
विषय समाप्त · संधि विच्छेद
