Noteclass 9 10

कारक के आठ भेद

Lesson 45 of 71

अंग 3 · रूप विचार

पाठ 3.8

विषय शुरू · कारक के आठ भेद

विभक्ति वाले विषय में चिह्न खुले — ने, को, से, में; पर, की जेब। आठ काम के नाम दीवार थे। पूर्ण वाले विषय में तहें थमीं। आज वह नाम: नाम वाक्य में क्या काम करे? आठ भेद — कर्ता करने वाला, कर्म जिस पर काम, करण औज़ार / साधन, अधिकरण जगह; संप्रदान जिसे दो / जिसका हित, अपादान जहाँ से छूटा / स्रोत, संबंध किसका, संबोधन पुकार। कार्ड के 4: कर्ता, कर्म, करण, अधिकरण — चिह्न ने, को, से, में से जुड़े। बाकी चार जेब में पूरे: संप्रदान, अपादान, संबंध, संबोधन। से दो नाम, को दो नाम। नया विकार नहीं। द्विकर्मक आगे। आज वाक्य से नाम, सूची से नहीं।

1. नाम क्या है

परिभाषा सीधी रखो: कारक के भेद संज्ञा या सर्वनाम के वाक्य-काम के आठ नाम हैं। चिह्न विभक्ति वाले विषय में; आज काम का नाम। चिह्न बिना नाम अधूरा, नाम बिना चिह्न अधूरा — दो काट एक पद पर।

राम ने रोटी खाई। — राम कर्ता, ने चिह्न; रोटी कर्म।

कलम से लिखो। — कलम करण, से चिह्न।

प्रश्न: यह नाम क्या कर रहा है — करने वाला, जिस पर काम, औज़ार, जगह…? फिर चिह्न मिलाओ। एक से दो नाम हो सकते हैं — वाक्य पूछो।

जाँच: काम का नाम आज। चिह्न पहले। आठ रट कर वाक्य मत छोड़ो। द्विकर्मक आगे।

2. 8 नाम, 4 कार्ड

आठ कुर्सियाँ। कार्ड चार — पहले वाले चिह्न से सीधे। बाकी चार जेब, छोटे नहीं।

भेद प्रश्न चिह्न
कर्ता — करने वाला कौन / किसने ने; कभी खाली
कर्म — जिस पर काम किसे / क्या को; कभी खाली
करण — औज़ार / साधन किससे — औज़ार से
अधिकरण — जगह कहाँ में, पर
संप्रदान — जिसे दो / जिसका हित किसे — हित को
अपादान — जहाँ से छूटा / स्रोत कहाँ से — अलग से
संबंध — किसका किसका का, के, की
संबोधन — पुकार किसे पुकार हे; कभी खाली

कार्ड 4: कर्ता, कर्म, करण, अधिकरण। संप्रदान–अपादान–संबंध–संबोधन नीचे।

जाँच: ने? कर्ता सोचो। को? कर्म या संप्रदान। से? करण या अपादान। में/पर? अधिकरण।

3. चिह्न से नाता — एक से, दो नाम

विभक्ति वाले विषय में से औज़ार और स्रोत एक चिह्न थे; को जिसे बुलाओ / जिसे दो। आज नाम जुदा।

चिह्न एक नाम दूसरा
से करण — कलम से अपादान — घर से
को कर्म — राम को बुलाओ संप्रदान — राम को दूध दो

चिह्न देखकर एक कुर्सी मत ठोको। वाक्य पूछो: औज़ार या अलग? जिस पर काम या हित?

जाँच: से? दो नाम सोचो। को? दो। ने? कर्ता। की? संबंध जेब।

4. कर्ता — करने वाला

कार्ड का पहला। काम जो करे। प्रश्न: कौन, किसने। चिह्न ने — विभक्ति वाले विषय में, सकर्मक भूत अक्सर। बिना ने भी: राम आया।

गाँधी ने कहा। — कर्ता; ने; चंद्रबिंदु।

लड़की जाती है। — कर्ता; ने नहीं, वर्तमान सरल वाले विषय में।

कर्ता क्रिया का मेल माँगे — लिंग-वचन-पुरुष; ने हो तो मेल कर्म से, विभक्ति वाले विषय में।

जाँच: किसने? कर्ता। ने हमेशा? नहीं। आया बिना ने? फिर भी कर्ता।

5. कर्म — जिस पर काम

कार्ड का दूसरा। काम जिस पर पड़े। प्रश्न: किसे, क्या। चिह्न को; रोटी खाई — को नहीं, फिर भी कर्म।

राम को बुलाओ। पत्र लिखा। किताब पढ़ी।

रोटी खाई। — कर्म खाली चिह्न; ने कर्ता पर।

सकर्मक कर्म माँगे, क्रिया भेद वाले विषय में। दो कर्म — द्विकर्मक आगे; आज एक कर्म काफी। को हित हो तो संप्रदान, नीचे।

जाँच: किसे/क्या? कर्म सोचो। को बिना? हो सकता है। दो किसे? आगे।

6. करण — औज़ार

कार्ड का तीसरा। जिससे काम हो — कलम, चाकू, आँख। प्रश्न: किससे, जब मतलब औज़ार। चिह्न से।

कलम से लिखो। चाकू से काटो। गाँधी से सीखो — होकर / रास्ता; चंद्रबिंदु।

घर से आया औज़ार नहीं — अपादान, जेब। के द्वारा लंबा जोड़ — संबंधबोधक वाले विषय में। करण का पड़ोसी; आज कुर्सी से वाली (कलम से)।

जाँच: कलम से? करण। घर से? अपादान जेब। से देखकर एक नाम? नहीं।

7. अधिकरण — जगह

कार्ड का चौथा। काम कहाँ। में अंदर, पर ऊपर — विभक्ति वाले विषय में में कार्ड, पर जेब। आज दोनों अधिकरण नाम के नीचे।

कमरे में बैठा। मेज़ पर किताब है।

आया पर रुका। — पर जोड़, समुच्चयबोधक वाले विषय में; अधिकरण नहीं।

पानी में — जगह अधिकरण; चिह्न में बैठा, पानी का रूप कम मुड़ा। रूप परिवर्तन नियम वाले विषय में।

जाँच: कहाँ? अधिकरण। में/पर? चिह्न। आया पर रुका? जोड़।

8. संप्रदान और अपादान

जेब के पहले दो। संप्रदान — जिसे दो, जिसका हित। को। बच्चों को दूध दो। के लिए संबंधबोधक वाले विषय में — बच्चों के लिए लाओ; को कारक आज।

राम को चाय दो। — संप्रदान। राम को बुलाओ — कर्म; वाक्य पूछो।

पेड़ से पत्ता गिरा। दिल्ली से गाड़ी आई। — अपादान; अलग / स्रोत।

अपादान करण से जुदा: औज़ार काम में जुड़ा रहे; अपादान से चीज़ छूटे / स्रोत। कर धातु की जड़ है, धातु वाले विषय में; करण आज का नाम औज़ार का। दोनों एक शब्द नहीं।

जाँच: दो / हित? संप्रदान। जहाँ से छूटा? अपादान। बुलाओ+को? कर्म।

9. संबंध और संबोधन

जेब के बाद के दो। संबंध — किसका। का, के, की; मेल अगले नाम से, विभक्ति वाले विषय में। के सामने लंबा जोड़ अलग।

गाँधी की किताब। राम का घर। बच्चों के खिलौने।

हे राम। अरे बच्चे। — संबोधन; पुकार। हे विस्मयादिबोधक वाले विषय में भाव; राम नाम पर संबोधन आज।

संबोधन चिह्न हे हो या खाली: राम, इधर आओ। विस्मय चिह्न विराम वाले विषय में — पुकार के बाद लग सकता है।

जाँच: किसका? संबंध। किसे पुकार? संबोधन। का ≠ के सामने। हे ≠ सिर्फ़ भाव।

10. दीवारें — द्विकर्मक, संयुक्त, क्रम

बात आज नहीं
उसने मुझे किताब दी द्विकर्मक आगे
खा लिया, चला गया संयुक्त आगे
कर्ता-कर्म-क्रिया ढाँचा वाक्य क्रम आगे
हर पद का नाम लिखना पद परिचय आगे

आठ नाम आज। पूरा वाक्य तोड़ना आगे। संस्कृत की आठ विभक्ति-पूँछ हिंदी के छोटे चिह्न नहीं। परसर्ग = हिंदी के छोटे चिह्न ने-को-से; आज इन्हीं चिह्नों वाले नाम।

जाँच: 8 नाम? आज। दो कर्म? आगे। लिया? संयुक्त आगे।

11. वाक्य में 4 कार्ड + जेब

अरे! हे राम, तुमने कलम से पत्र को कमरे में रखा — गाँधी की मेज़ पर, दिल्ली से आया।

  • अरे — विस्मयादिबोधक, अटल
  • हे राम — संबोधन जेब
  • तुमने — कर्ता
  • कलम से — करण
  • पत्र को — कर्म
  • कमरे में — अधिकरण
  • गाँधी की — संबंध; चंद्रबिंदु
  • मेज़ पर — अधिकरण, पर
  • दिल्ली से — अपादान जेब

चार कार्ड बैठे; जेब साथ। संप्रदान इस वाक्य में नहीं — दो नाम मत ठोको जहाँ काम नहीं।

12. शब्द तोड़कर पूरा

कर्ता

करने वाला। ने या खाली।

कर्म

जिस पर काम। को या खाली। दो कर्म आगे।

करण

औज़ार। से। घर से नहीं।

अधिकरण

जगह। में, पर। पर जोड़ अलग।

संप्रदान / अपादान

जिसे दो — को; जहाँ से छूटा — से। चिह्न साझा, नाम जुदा।

संबंध / संबोधन

का-के-की; हे/पुकार।

कर्ता, कर्म, करण, अधिकरण — चार कार्ड; आठ नाम पूरे।

13. आम गलतियाँ

  • से देखकर सिर्फ़ करण। घर से अपादान।
  • को देखकर सिर्फ़ कर्म। दो + को संप्रदान हो सकता है।
  • ने को कर्ता का पक्का चिह्न। राम आया बिना ने कर्ता।
  • रोटी को कर्म न लिखना क्योंकि को नहीं। चिह्न खाली हो सकता है।
  • पर हमेशा अधिकरण। आया पर रुका जोड़।
  • का और के सामने एक। संबंध बनाम संबंधबोधक।
  • हे सिर्फ़ विस्मयादिबोधक। नाम पर संबोधन भी।
  • करण और कर धातु एक। नाम आज; जड़ धातु वाले विषय में।
  • आठ नाम रट कर वाक्य न पूछना। वाक्य से नाम।
  • दो कर्म आज खोल देना। द्विकर्मक आगे।
  • चिह्न और भेद एक शब्द। काम नाम, चिह्न विभक्ति।

जाँच: (1) आठ नाम। (2) कार्ड: कर्ता, कर्म, करण, अधिकरण। (3) से/को दो-दो। (4) खाली चिह्न हो सकता है। (5) द्विकर्मक आगे।

14. इस विषय का सार

  • आठ भेद काम के नाम हैं। चिह्न विभक्ति वाले विषय में। कर्ता करने वाला, कर्म जिस पर काम, करण औज़ार / साधन, अधिकरण जगह।
  • कार्ड: कर्ता ने/खाली, कर्म को/खाली, करण से औज़ार, अधिकरण में/पर।
  • संप्रदान जिसे दो / हित; अपादान जहाँ से छूटा; संबंध का-के-की; संबोधन हे/पुकार।
  • एक चिह्न दो नाम — से, को। वाक्य पूछो। पर जोड़ ≠ अधिकरण।
  • द्विकर्मक आगे। संयुक्त आगे। नया विकार नहीं।

आगे संयुक्त क्रिया है।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. कारक के कितने भेद हैं? कार्ड के 4 लिखो। चिह्न और भेद एक हैं?

उत्तर

आठ। कर्ता, कर्म, करण, अधिकरण। नहीं — भेद काम का नाम; चिह्न विभक्ति वाले विषय में।

2. “कलम से” और “घर से” एक भेद हैं? “राम को बुलाओ” और “राम को दूध दो” एक हैं?

उत्तर

नहीं — कलम से करण, घर से अपादान। नहीं — बुलाओ कर्म; दूध दो संप्रदान — को दो नाम।

3. ने न हो तो कर्ता नहीं? रोटी कर्म नहीं क्योंकि को नहीं?

उत्तर

नहीं — राम आया कर्ता बिना ने। नहीं — रोटी खाई कर्म, चिह्न खाली हो सकता है।

4. पर हमेशा अधिकरण है? का और के सामने एक कुर्सी हैं?

उत्तर

नहीं — मेज़ पर अधिकरण; आया पर रुका जोड़, समुच्चयबोधक वाले विषय में। नहीं — का/के/की संबंध; के सामने संबंधबोधक वाले विषय में।

5. “उसने मुझे किताब दी” आज खोलना है? खा लिया आज का कारक भेद है?

उत्तर

नहीं — दो कर्म, द्विकर्मक आगे। नहीं — संयुक्त आगे; आज आठ नाम।

विषय समाप्त · कारक के आठ भेद