अंग 2 · शब्द विचार
पाठ 2.6
विषय शुरू · सर्वनाम के भेद
सर्वनाम वाले विषय में नाम की जगह था — मैं, तुम, आप, यह, वह। अब वही परिवार 6 भेदों में बैठता है: पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, संबंधवाचक, प्रश्नवाचक, निजवाचक। पहचान पहले आ चुकी; यहाँ बाँट और जाँच पूरी करनी है। एक शब्द दो भेदों में भी बैठ सकता है — सूची रटो नहीं, वाक्य पूछो। आदर आप-तुम वाले विषय में। क्रिया का मेल पुरुष वाले विषय में। विशेषण जब यह/कौन संज्ञा से चिपकें — विशेषण वाले विषयों में। जो वाला वाक्य-भेद वाक्य विचार में।
1. 6 भेद एक नज़र में
प्रश्न एक: नाम की जगह कौन-सा काम हो रहा है?
| भेद | काम | उदाहरण |
|---|---|---|
| पुरुषवाचक | बोलने वाला, सुनने वाला, या तीसरा | मैं, तुम, आप, वह, हम, वे |
| निश्चयवाचक | निश्चित संकेत — यह, वह, निकट-दूर | यह, वह, ये, वे |
| अनिश्चयवाचक | पता नहीं ठीक-ठीक कौन या क्या | कोई, कुछ, सब, कई |
| संबंधवाचक | एक खंड को दूसरे नाम/संकेत से बाँधे | जो, जिसे, जिसका, जिन |
| प्रश्नवाचक | नाम की जगह पूछे | कौन, क्या, किस, किसका |
| निजवाचक | कर्ता की ओर लौटे — अपना, स्वयं | अपना, स्वयं, खुद, आप (निज) |
जाँच: सर्वनाम पहचाना? (सर्वनाम वाला विषय) फिर पूछो — तीन कुर्सियों में से एक? निश्चित इशारा? अनिश्चित? प्रश्न? जो-बाँध? कर्ता की ओर वापस? 6 में से उत्तर वाक्य से आना चाहिए, शब्दकोश से नहीं।
2. भेद शब्द पर नहीं, काम पर
संज्ञा के भेद में गाँधी कभी खास, कभी प्रकार — संज्ञा के भेद वाले विषय में। सर्वनाम में भी लेबल शब्द के साथ चिपक कर नहीं सोता।
| शब्द | एक वाक्य | दूसरा वाक्य |
|---|---|---|
| वह | राम आया। वह बैठा। — पुरुषवाचक (अन्य) | वह पहाड़ दूर है। — निश्चयवाचक (दूर का संकेत) |
| आप | आप बैठिए। — पुरुषवाचक (मध्यम, आदर) | राम आप ही आ गए। — निजवाचक (स्वयं) |
| यह | यह मेरी है। — निश्चयवाचक | यह लड़का मेरा भाई है। — संकेत संज्ञा के साथ; भेद निश्चय, विशेषण-काम विशेषण वाले विषय में |
वह दोनों सूचियों में लिखा मिलता है। गलती यह है कि एक सूची चुनकर दूसरी हमेशा काट दो। वाक्य बताएगा प्रधान काम कौन-सा है। दोनों काम एक साथ भी दिख सकते हैं — तब दोनों नाम लिखने में हर्ज नहीं, झूठा एक न ठोक दो।
3. पुरुषवाचक — तीन कुर्सियाँ
जो सर्वनाम बोलने वाले, सुनने वाले, या बात के तीसरे की जगह आए, वह पुरुषवाचक है। तीन पुरुष की कुर्सी सर्वनाम वाले विषय में खुल चुकी; आज वह कुर्सी इस भेद का नाम है। क्रिया का ताल-मेल पुरुष वाले विषय में। आदर का चुन आप-तुम वाले विषय में।
| पुरुष | कुर्सी | शब्द |
|---|---|---|
| उत्तम | बोलने वाला | मैं, हम |
| मध्यम | सुनने वाला | तू, तुम, आप |
| अन्य | जिसकी बात हो | वह, वे; व्यक्ति पर यह, ये भी |
मैं चलता हूँ। — उत्तम पुरुषवाचक।
तुम रुको। आप आइए। तू आ। — मध्यम; तीन ढंग, एक भेद।
सुधा आई। वह मुस्कराई। — वह अन्य पुरुषवाचक।
मैं और तुम निश्चयवाचक नहीं कहलाते। वे हमेशा पुरुषवाचक हैं। वह / यह अन्य पुरुष भी हो सकते हैं, निश्चय भी — निश्चयवाचक वाले खंड में।
जाँच: मैं/हम? उत्तम पुरुषवाचक। तू/तुम/आप (संबोधन)? मध्यम पुरुषवाचक। पहले आए व्यक्ति की जगह वह? अन्य पुरुषवाचक।
4. पुरुषवाचक के साथी रूप
भेद मूल पर लगता है, रूप पर नया भेद नहीं बनता। मुझे पुरुषवाचक ही है, संज्ञा नहीं, निश्चय भी नहीं।
| मूल | कुछ रूप | वचन साथी |
|---|---|---|
| मैं | मुझे, मुझसे, मेरा, मेरी, मेरे | हम, हमें, हमारा |
| तू / तुम | तुझे, तुम्हें, तेरा, तुम्हारा | तुम एक और अधिक दोनों |
| आप | आपको, आपसे, आपका | रूप अक्सर वही |
| वह | उसे, उससे, उसका, उन | वे, उन्हें, उनका |
मेरा घर — मेरा पुरुषवाचक का रूप (उत्तम, संबंध की जगह), घर संज्ञा। सुंदर घर — सुंदर विशेषण। कारक के 8 नाम रूप विचार में। आप संबोधन में पुरुषवाचक; आप = स्वयं हो तो निज, निजवाचक वाले खंड में।
5. निश्चयवाचक — निश्चित संकेत
जो सर्वनाम किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु की ओर इशारा करे — पास हो, दूर हो, या बात में साफ़ हो — वह निश्चयवाचक है। सर्वनाम वाले विषय का यह/वह यहीं परिवार खोलता है।
| निकट | दूर / पीछे |
|---|---|
| यह, ये | वह, वे |
| यह मेरी किताब है। | वह पेड़ पुराना है। |
| ये बच्चे खेल रहे हैं। | वे पहाड़ बर्फीले हैं। |
वह पुरुषवाचक और निश्चयवाचक दोनों क्यों?
- राम आया। वह बैठा। — नाम की जगह, अन्य पुरुष प्रधान। निश्चय भी है क्योंकि राम निश्चित है; स्कूल अक्सर पुरुषवाचक लिखती है।
- वह लाल किताब दो। — इशारा वस्तु पर, नाम पहले न हो। प्रधान निश्चयवाचक।
- यह आया। — व्यक्ति पर निकट इशारा: निश्चयवाचक; अन्य पुरुष भी बैठता है।
मैं / तुम इस सूची में नहीं। यहाँ / वहाँ निश्चयवाचक सर्वनाम नहीं — स्थान का क्रिया विशेषण, क्रिया विशेषण वाले विषय में।
यह सुंदर है। — निश्चयवाचक, अकेला।
यहाँ सुंदर है। — अधूरा; यहाँ जगह है, कर्ता गायब।
6. निश्चय अकेला, या संज्ञा के कंधे पर
सर्वनाम वाले विषय की काट यहीं भेद के साथ पक्की करो। अकेला यह/वह नाम की जगह भरे — सर्वनाम, निश्चयवाचक। संज्ञा से ठीक पहले चिपके — संकेत बताने जैसा; स्कूल सार्वनामिक विशेषण भी कहती है, पूरा विशेषण वाले विषयों में।
| अकेला — सर्वनाम | संज्ञा साथ — संकेत |
|---|---|
| यह पुरानी है। | यह दीवार पुरानी है। |
| वह सो रहा है। | वह लड़का सो रहा है। |
| ये मेरे हैं। | ये जूते मेरे हैं। |
आज की बाँट: अकेले पर निश्चयवाचक सर्वनाम लिखो। साथ हो तो संज्ञा अलग पहचानो; यह/वह का भेद फिर भी निश्चय का संकेत है, संज्ञा नहीं बन जाता।
7. अनिश्चयवाचक — ठीक-ठीक नहीं
जो सर्वनाम किसी अनिश्चित व्यक्ति या वस्तु की जगह आए — पता नहीं कौन, क्या, कितने — वह अनिश्चयवाचक है।
| शब्द | काम | उदाहरण |
|---|---|---|
| कोई | अनिश्चित व्यक्ति / एक चीज़ | कोई आता है। कोई किताब गिरी। |
| कुछ | अनिश्चित वस्तु / अंश | कुछ गिर गया। कुछ लोग रुके। |
| सब / सभी | पूरा अनिश्चित समूह, बिना नाम | सब चले गए। सभी थक गए। |
| कई | अनिश्चित संख्या, एक से अधिक | कई आए। कई बातें रह गईं। |
कोई आया — नाम नहीं मालूम, पर व्यक्ति का संकेत है। राम आया — व्यक्तिवाचक संज्ञा। वह आया — निश्चित संकेत। तीन वाक्य, तीन कुर्सियाँ: संज्ञा, निश्चय/पुरुष, अनिश्चय।
सब बच्चे गए — सब संज्ञा बच्चे के साथ; अकेला सब गए तो सर्वनाम। वही अकेला/साथ का फर्क, विशेषण-लेबल आगे।
जाँच: इशारा साफ़ एक पर टिकता है? निश्चय। पता नहीं कौन/क्या बचा रहता है? अनिश्चय। पूछ रहा है? प्रश्न, प्रश्नवाचक वाले खंड में।
8. कोई और कुछ
दोनों अनिश्चयवाचक। फर्क अक्सर जीव/व्यक्ति बनाम वस्तु/मात्रा का है — दीवार नहीं, आदत है।
| कोई | कुछ |
|---|---|
| कोई द्वार पर है। — व्यक्ति | कुछ द्वार पर पड़ा है। — वस्तु |
| कोई गलती निकले। — एक चीज़ | कुछ गलतियाँ निकलीं। — अंश/मात्रा |
| कोई नहीं आया। | कुछ नहीं मिला। |
कुछ लोग — लोग संज्ञा, कुछ अनिश्चित संख्या। कोई लोग अटपटा; कोई व्यक्ति ठीक। नकारात्मक कोई नहीं / कुछ नहीं दोनों चलते हैं, वस्तु या व्यक्ति के हिसाब से।
कई निश्चित संख्या नहीं — तीन नहीं कहा। तीन विशेषण/संख्या, विशेषण वाले विषय में। कई अनिश्चयवाचक।
9. प्रश्नवाचक — नाम की जगह प्रश्न
जो सर्वनाम पूछने के लिए संज्ञा की जगह आए, वह प्रश्नवाचक है। उत्तर में अक्सर संज्ञा या दूसरा सर्वनाम आता है।
| शब्द | अक्सर क्या पूछे | उदाहरण |
|---|---|---|
| कौन | व्यक्ति | कौन आया? — राम आया। |
| क्या | वस्तु, बात, काम | क्या पड़ा है? — किताब पड़ी है। |
| किस / किसे / किसका | कौन के रूप | किसे बुलाया? किसका घर है? |
| कौन-सा / कौन-सी | कई में से कौन | कौन-सी किताब तेरी है? |
कौन आया? — कौन सर्वनाम, प्रश्नवाचक। राम संज्ञा उत्तर में। क्या तुम चलोगे? — यहाँ क्या प्रश्न का चिह्न-शब्द है, कर्ता तुम पुरुषवाचक; कुछ किताबें ऐसे क्या को निपात/प्रश्न-चिह्न भी कहती हैं। आज की सख्त कुर्सी: जो शब्द नाम की जगह पूछे — कौन, क्या (वस्तु), किसे — प्रश्नवाचक सर्वनाम। हाँ/नहीं वाला क्या वाक्य के आगे — प्रश्न का ढंग, नाम की जगह नहीं; उसे सर्वनाम की सूची से जबरदस्ती न ठोकें।
क्या लाए हो? — क्या वस्तु पूछता है, प्रश्नवाचक सर्वनाम।
क्या राम आया? — हाँ या नहीं; राम संज्ञा कर्ता है। क्या यहाँ नाम की जगह नहीं भर रहा।
कौन लड़का आया? — कौन संज्ञा के साथ; सार्वनामिक/प्रश्नवाचक विशेषण का काम, विशेषण वाले विषयों में। कौन आया? — अकेला, प्रश्नवाचक सर्वनाम।
कहाँ, कब, कैसे — ये प्रश्न हैं, पर स्थान-काल-रीति बताते हैं। परिवार क्रिया विशेषण का, क्रिया विशेषण वाले विषय में। उन्हें प्रश्नवाचक सर्वनाम मत लिखो।
जाँच: उत्तर में अक्सर कोई का नाम या चीज़ का नाम आ सकता है? कौन/क्या/किसे — प्रश्नवाचक सर्वनाम। उत्तर में जगह, समय, ढंग? कहाँ/कब/कैसे — सर्वनाम नहीं।
10. यह, कोई, कौन — तीन इशारे
एक ही कुर्सी पर तीन भेद अदल-बदल कर बैठते हैं। फर्क निश्चित, अनिश्चित, प्रश्न का है।
| वाक्य | भेद |
|---|---|
| वह द्वार पर है। | निश्चयवाचक (और अन्य पुरुष, यदि व्यक्ति) |
| कोई द्वार पर है। | अनिश्चयवाचक |
| कौन द्वार पर है? | प्रश्नवाचक |
| राम द्वार पर है। | संज्ञा — सर्वनाम नहीं |
जो आया वह राम है — जो संबंध, वह निश्चय/पुरुष। चारों दिशाएँ एक कहानी में मिल सकती हैं; हर शब्द अपना भेद रखता है।
11. संबंधवाचक — जो बाँधे
जो सर्वनाम एक खंड को दूसरे खंड के नाम या संकेत से जोड़े, वह संबंधवाचक है। मुख्य शब्द जो। रूप: जिसे, जिससे, जिसका, जिन, जिन्होंने।
जो आया, वह मेरा भाई है।
जिस किताब की तुम तलाश में हो, वह मेज़ पर है।
जिन्हें बुलाया गया, वे आ गए।
जो और वह अक्सर जोड़े में चलते हैं: जो … वह …। जो संबंधवाचक, वह अक्सर निश्चयवाचक या पुरुषवाचक। दोनों को एक भेद मत बना दो।
| संबंधवाचक | अक्सर साथ | वाक्य |
|---|---|---|
| जो | वह / वे | जो सोए थे, वे उठे। |
| जिसे | उसे | जिसे तुम चाहते हो, उसे बुलाओ। |
| जिसका | उसका | जिसका घर जल गया, उसका नाम राम है। |
जो अकेला प्रश्न नहीं है। जो आया? कुछ बोलचाल में प्रश्न जैसा लगता है; मानक बाँट में प्रश्न कौन है, जो संबंध है। जो आएगा वह देख लेगा — संबंध, प्रश्न चिह्न नहीं।
12. संबंध वाक्य जोड़ता है — भेद आगे
जो वाला वाक्य अक्सर दो टुकड़ों का होता है। एक टुकड़ा मुख्य बात, दूसरा जो से जुड़ा। ऐसे वाक्य का नाम मिश्र वाक्य भेद वाले विषय में है। आज काम इतना: जो सर्वनाम है, संबंधवाचक है — उपवाक्य का पूरा नक्शा यहाँ नहीं।
राम आया। वह थक गया। — दो सरल वाक्य; वह पुरुषवाचक।
जो राम आया, वह थक गया। — जो संबंधवाचक; वह निश्चय/पुरुष। जोड़ का ढाँचा आगे।
जितना … उतना … भी इसी परिवार के पास बैठते हैं — मात्रा का संबंध। जितना तुम चाहो, उतना ले लो। पूरा खेल वाक्य विचार में; आज पहचान: जितना/जिसका/जो नाम की जगह बाँधते हैं, संज्ञा नहीं।
जाँच: जो हटाओ तो दो टुकड़े टूटते हैं और संबंध गायब? संबंधवाचक। जो हटाओ तो बस कर्ता गायब, प्रश्न नहीं बचा? फिर भी संबंध, प्रश्नवाचक नहीं।
13. निजवाचक — कर्ता की ओर लौटे
जो सर्वनाम उसी कर्ता की ओर इशारा करे जिसका काम वाक्य बता रहा है, वह निजवाचक है। मुख्य शब्द: अपना, स्वयं, खुद, आप (जब स्वयं के अर्थ में)।
| शब्द | उदाहरण | किसकी ओर |
|---|---|---|
| अपना | राम ने अपनी किताब पढ़ी। | राम की किताब, किसी और की नहीं |
| स्वयं / खुद | सीता स्वयं आई। उसने खुद द्वार खोला। | कर्ता खुद, दूसरा नहीं |
| आप (निज) | नेताजी आप ही चल दिए। | वे स्वयं |
आप बैठिए — सुनने वाला, पुरुषवाचक मध्यम, आदर आप-तुम वाले विषय में। आप ही आ गए — कर्ता स्वयं, निजवाचक। एक लिपि, दो भेद, वाक्य पूछो।
मैं अपना काम करूँ। — अपना निज; मैं पुरुषवाचक। दो सर्वनाम, दो भेद, एक वाक्य।
एक दूसरे को देखा। — आपस का संकेत। कुछ व्याकरण इसे निज के पास रखती हैं, कुछ पारस्परिक अलग कहती हैं। आज की 6 सूची में इसे निज जैसा काम मानो; 7वाँ भेद मत खोलो जब तक वाक्य न माँगे।
14. अपना किससे मेल खाता है
अपना कर्ता की ओर इशारा करता है, पर रूप उसके पास वाली संज्ञा से बदलता है — कर्ता के लिंग से नहीं। यह निजवाचक की खास गाँठ है; पूरा लिंग-वचन रूप विचार में, यहाँ इतनी कि भेद टूटे नहीं।
राम ने अपना घर बेचा। — घर पुल्लिंग, अपना।
राम ने अपनी किताब पढ़ी। — किताब स्त्रीलिंग, अपनी। कर्ता राम वही।
सीता ने अपना घर देखा। — घर पुल्लिंग, अपना। कर्ता सीता स्त्रीलिंग, अपना नहीं बनी।
बच्चों ने अपने खिलौने रखे। — वचन साथ की संज्ञा पर।
उसकी किताब — उसकी पुरुषवाचक/निश्चय का रूप, किसी और की ओर जा सकता है। अपनी किताब — निज, कर्ता वाली। राम ने उसकी किताब पढ़ी — किसी और की। राम ने अपनी किताब पढ़ी — राम की।
स्वयं / खुद रूप कम घुमाते हैं। आप निज में भी अक्सर स्थिर। अपना विकारी निज है।
जाँच: संकेत कर्ता पर लौटता है? निज। रूप किस शब्द के लिंग-वचन से? अक्सर उसके बाद की संज्ञा से, कर्ता के नाम से नहीं। उसकी ≠ अपनी।
15. वाक्य में कई भेद
जो अपना काम स्वयं करता है, वह किसी का मुँह नहीं ताकता।
- जो — संबंधवाचक
- अपना — निजवाचक
- काम — संज्ञा
- स्वयं — निजवाचक
- वह — पुरुषवाचक / निश्चयवाचक
- किसी — अनिश्चयवाचक (रूप: कोई)
कौन तुम्हें कुछ देगा?
- कौन — प्रश्नवाचक
- तुम्हें — पुरुषवाचक (मध्यम, रूप)
- कुछ — अनिश्चयवाचक
यह मेरी है; वह तेरी। — यह, वह निश्चयवाचक; मेरी, तेरी पुरुषवाचक के रूप।
16. शब्द तोड़कर पूरा
मैं
उत्तम पुरुषवाचक। निश्चयवाचक नहीं। रूप: मुझे, मेरा।
तुम / तू / आप
मध्यम पुरुषवाचक। आदर का फर्क आप-तुम वाले विषय में। आप जब स्वयं हो — निजवाचक, निजवाचक वाले खंड में।
वह / वे
अन्य पुरुषवाचक या निश्चयवाचक — वाक्य पूछो। रूप: उसे, उन।
यह / ये
निश्चयवाचक (निकट)। व्यक्ति पर अन्य पुरुष भी।
कोई / कुछ / सब / कई
अनिश्चयवाचक। कोई अक्सर एक व्यक्ति, कुछ अंश/वस्तु।
कौन / क्या / किसे
प्रश्नवाचक सर्वनाम। कहाँ/कब/कैसे नहीं। क्या राम आया? वाला क्या नाम की जगह नहीं।
जो / जिसे / जिसका
संबंधवाचक। जो…वह जोड़ा तोड़कर एक मत लिखो। मिश्र वाक्य वाक्य भेद वाले विषय में।
अपना / स्वयं / खुद
निजवाचक। अपनी किताब — रूप किताब से। उसकी अलग परिवार।
राम
संज्ञा। भेद व्यक्तिवाचक, संज्ञा के भेद वाले विषय में। सर्वनाम का भेद इस पर नहीं।
गाँधी आप ही चल दिए। — गाँधी संज्ञा; आप निजवाचक।
आप चलिए। — आप पुरुषवाचक मध्यम।
17. आम गलतियाँ
- मैं को निश्चयवाचक लिखना। मैं पुरुषवाचक है।
- वह को हमेशा एक ही भेद ठोकना। व्यक्ति की जगह पुरुष, इशारा निश्चय — वाक्य देखो।
- आप बैठिए और आप ही आए को एक भेद मानना। पहला मध्यम पुरुष, दूसरा निज।
- कोई को प्रश्नवाचक लिखना। कोई अनिश्चय; कौन प्रश्न।
- कहाँ को प्रश्नवाचक सर्वनाम लिखना। कहाँ क्रिया विशेषण, क्रिया विशेषण वाले विषय में।
- जो को प्रश्नवाचक लिखना। जो संबंध है।
- जो और वह दोनों को संबंधवाचक कहना। वह वहाँ निश्चय/पुरुष रहता है।
- अपना और उसका एक करना। अपना निज, उसका अन्य/निश्चय का रूप।
- अपना को कर्ता के लिंग से बदलना — सीता ने अपनी घर देखा गलत; घर पुल्लिंग, अपना घर।
- यह किताब में यह को संज्ञा लिखना। किताब संज्ञा, यह संकेत।
- 6 भेद रटकर वाक्य न तोड़ना। काम पूछो, सूची मत पूछो।
जाँच: (1) तीन कुर्सियाँ? पुरुषवाचक। (2) निश्चित इशारा? निश्चयवाचक। (3) पता नहीं कौन/क्या? अनिश्चयवाचक। (4) पूछ? प्रश्नवाचक। (5) जो बाँधे? संबंधवाचक। (6) कर्ता पर लौटे? निजवाचक। संज्ञा पहले सर्वनाम वाले विषय से अलग रखो।
18. इस विषय का सार
- पुरुषवाचक — मैं, तुम, आप, वह: उत्तम, मध्यम, अन्य।
- निश्चयवाचक — यह, वह, ये, वे: निश्चित संकेत। वह दोनों परिवार छू सकता है।
- अनिश्चयवाचक — कोई, कुछ, सब, कई।
- प्रश्नवाचक — कौन, क्या, किस; कहाँ/कब नहीं।
- संबंधवाचक — जो, जिसे, जिसका; जो…वह जोड़ा; वाक्य-भेद वाक्य विचार में।
- निजवाचक — अपना, स्वयं, खुद, आप (स्वयं)। आप संबोधन अलग। अपना रूप साथ की संज्ञा से।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. सर्वनाम के 6 भेद नाम सहित लिखो। मैं निश्चयवाचक है?
उत्तर
पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, संबंधवाचक, प्रश्नवाचक, निजवाचक। नहीं — मैं पुरुषवाचक (उत्तम) है।
2. “राम आया। वह बैठा।” और “वह पहाड़ दूर है।” — वह एक भेद? “आप बैठिए” और “आप ही आ गए”?
उत्तर
पहला वह अन्य पुरुषवाचक; दूसरा निश्चयवाचक। आप बैठिए — मध्यम पुरुषवाचक। आप ही आ गए — निजवाचक।
3. कोई और कौन एक भेद हैं? कहाँ प्रश्नवाचक सर्वनाम है?
उत्तर
नहीं — कोई अनिश्चयवाचक, कौन प्रश्नवाचक। कहाँ सर्वनाम नहीं; स्थान का क्रिया विशेषण है।
4. जो और वह दोनों संबंधवाचक हैं? जो वाला वाक्य का पूरा नाम यहीं खोलना है?
उत्तर
नहीं — जो संबंधवाचक, वह निश्चय/पुरुष रहता है। मिश्र वाक्य का ढाँचा वाक्य भेद वाले विषय में; यहाँ जो सर्वनाम है।
5. अपनी और उसकी एक हैं? “सीता ने अपना घर देखा” में अपना क्यों, अपनी क्यों नहीं?
उत्तर
नहीं — अपनी निज (कर्ता की), उसकी अन्य/निश्चय का रूप। अपना घर — रूप घर (पुल्लिंग) से; कर्ता सीता स्त्रीलिंग होने से अपनी नहीं बनती।
विषय समाप्त · सर्वनाम के भेद
