अंग 2 · शब्द विचार
पाठ 2.5
विषय शुरू · सर्वनाम — परिचय
संज्ञा और संज्ञा के भेद वाले विषयों में नाम खुला — संज्ञा, और उसके 5 भेद। नाम बार-बार दोहराने से वाक्य भारी पड़ता है। जो शब्द नाम की जगह बैठता है, वह सर्वनाम है। मैं, तुम, आप, यह, वह — आज इन्हीं से पहचान पूरी करनी है। सर्वनाम संज्ञा नहीं। भेदों की पूरी बाँट सर्वनाम के भेद वाले विषय में। आप-तुम-तू का आदर और निकटता आप-तुम वाले विषय में। क्रिया से मेल पुरुष वाले विषय में। लिंग-वचन-कारक रूप विचार में।
1. सर्वनाम क्या है
सर्व का अर्थ सब, नाम का अर्थ नाम। जो शब्द सब तरह के नामों की जगह आ सके, वह सर्वनाम है।
परिभाषा सीधी रखो: संज्ञा के स्थान पर आने वाला शब्द सर्वनाम कहलाता है। स्थान पर — मतलब वह खुद वह नाम नहीं बन जाता। राम नाम है। वह राम का दूसरा नाम नहीं; वह संकेत है।
राम आता है। — राम संज्ञा।
वह आता है। — वह सर्वनाम।
मैं आता हूँ। — मैं सर्वनाम; बोलने वाले का नाम यहाँ लिखा ही नहीं।
संज्ञा पूछती है — किसका नाम? सर्वनाम पूछता है — नाम की जगह कौन-सा संकेत?
जाँच: शब्द हटाओ। यदि किसका नाम छूटा? पूछ सको — संज्ञा। यदि किसकी जगह का संकेत छूटा? — सर्वनाम। राम हटे तो नाम छूटा। वह हटे तो संकेत छूटा।
2. नाम बार-बार क्यों नहीं
एक ही संज्ञा तीन वाक्य में तीन बार आ जाए तो कान थकते हैं। सर्वनाम दोहराव काटता है, अर्थ रखता है।
| संज्ञा दोहराई | सर्वनाम बैठा |
|---|---|
| सीता बाजार गई। सीता साग लाई। सीता घर लौटी। | सीता बाजार गई। वह साग लाई। वह घर लौटी। |
| किताब मेज़ पर है। किताब मोटी है। | किताब मेज़ पर है। यह मोटी है। |
| मोहन बोला, “मोहन थक गया।” | मोहन बोला, “मैं थक गया।” |
पहली पंक्ति में नाम पहले आना ज़रूरी है, नहीं तो वह/यह किसे पकड़े — सुनने वाला अटके। तीसरी पंक्ति में मैं को पहले मोहन लिखने की ज़रूरत नहीं; बोलने वाला खुद खड़ा है। दो तरह के काम एक ही विषय में: पीछे के नाम की जगह, और बोलने-सुनने वाले का सीधा संकेत।
3. 5 मूल शब्द
कार्ड पर 5 हैं। इन्हीं से विषय टिका है। वचन और पास-दूर के साथी अगली पंक्तियों में खुलेंगे; भेदों की सूची नहीं।
| सर्वनाम | किसकी जगह | उदाहरण |
|---|---|---|
| मैं | बोलने वाला | मैं पढ़ता हूँ। |
| तुम | सुनने वाला | तुम बैठो। |
| आप | सुनने वाला — आदर या सभा वाली भाषा | आप आइए। |
| यह | निकट का व्यक्ति / वस्तु / बात | यह किताब है। यह मेरा भाई है। |
| वह | दूर का, या पहले आए नाम का संकेत | वह पहाड़ है। राम आया। वह बैठा। |
तू सुनने वाले का तीसरा रूप है — कार्ड के 5 में नहीं, परिवार में है। हम, ये, वे वचन के साथी हैं। आदर की तह आप-तुम वाले विषय में; आज तीन शब्द एक ही कुर्सी पर: सुनने वाला। कुर्सी मतलब वाक्य में शब्द का काम — कौन बैठा, क्या काम।
मैं जल पीता हूँ। — बोलने वाला।
तुम कल आना। / आप कल आइए। / तू इधर आ। — सुनने वाला, तीन ढंग।
यह गेंद है। वह गेंद पेड़ के पास है। — निकट और दूर।
4. संज्ञा और सर्वनाम — एक कुर्सी, दो शब्द
वाक्य में कर्ता की कुर्सी एक है। उस पर कभी संज्ञा बैठती है, कभी सर्वनाम। दोनों एक साथ उसी कुर्सी के दो नाम नहीं बन जाते।
| संज्ञा वाली बात | सर्वनाम वाली बात | क्या नहीं कहना |
|---|---|---|
| राम आता है। | वह आता है। | वह संज्ञा है। |
| लड़की गाती है। | वह गाती है। | वह जातिवाचक संज्ञा है। |
| दिल्ली दूर है। | वह दूर है। | वह स्थानवाचक संज्ञा है। |
| किताब मेज़ पर है। | यह मेज़ पर है। | यह वस्तु की संज्ञा है। |
राम व्यक्तिवाचक संज्ञा, संज्ञा के भेद वाले विषय में। वह उसी व्यक्ति की जगह — सर्वनाम। लड़की जातिवाचक संज्ञा; वह वहाँ भी सर्वनाम ही रहता है। भेद संज्ञा के थे; सर्वनाम पर वे भेद मत चिपकाओ।
मैं, तुम, आप किसी का लिखा नाम नहीं हैं। गाँधी नाम है; मैं बोलने वाले का संकेत है, चाहे बोलने वाला गाँधी हो या बच्चा।
जाँच: संज्ञा = नाम। सर्वनाम = नाम की जगह। विकारी दोनों हो सकते हैं, विकारी वाले विषय में; एक शब्द दोनों नहीं।
5. मैं और हम — बोलने वाला
मैं एक बोलने वाला। हम बोलने वाला और उसके साथ वाले, या बोलने वाला खुद को समूह में गिनता है।
मैं स्कूल जाता हूँ।
हम स्कूल जाते हैं।
राम बोला, “मैं थक गया।” — राम संज्ञा पहले; उद्धरण में मैं उसी राम की जगह।
मैं शब्द लिंग नहीं बदलता। लड़का कहे मैं जाता हूँ, लड़की कहे मैं जाती हूँ — मैं वही, क्रिया का रूप अलग। वचन मैं से हम पर जाता है। क्रिया का मेल पुरुष वाले विषय में; लिंग-वचन के पूरे नियम रूप विचार में।
हम कभी एक व्यक्ति भी कह देता है — लेखक, नेता, सभा वाली भाषा। पहचान आज की कुर्सी पर नहीं टिकती; साधारण वाक्य में हम = एक से अधिक। शैली आगे जब वाक्य देखोगे, तब पूछना।
6. तू, तुम, आप — सुनने वाला
तीन शब्द, एक काम: सामने वाले का संकेत। फर्क आदर और निकटता का है — पूरा विषय आप-तुम वाले विषय में। आज इतना कि तीनों सर्वनाम हैं, संज्ञा नहीं, और एक को चुनकर बाकी दो गायब नहीं हो जाते।
| शब्द | आज की पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| तू | एक सुनने वाला; बहुत निकट, काव्य, या डाँट | तू इधर आ। तू कहाँ था? |
| तुम | साधारण संबोधन; एक या अधिक | तुम बैठो। तुम दोनों आओ। |
| आप | आदर, सभा वाली भाषा; एक को भी | आप बैठिए। आप कहाँ रहते हैं? |
आप लिखने में एक वचन जैसा लगता है, क्रिया अक्सर बहुवचन जैसी चलती है — आप आते हैं, आप आइए। यह सामाजिक रूप और क्रिया-मेल दोनों छूता है: तह आप-तुम और पुरुष वाले विषयों में। आज गलती यह न हो कि आप को संज्ञा मान लो क्योंकि बड़े व्यक्ति का नाम लगता है। आप नाम नहीं, संकेत है।
ध्यान दें: तू / तुम / आप में से कौन शिष्ट — आप-तुम वाले विषय में। कौन पुरुष — झलक आगे तीन कुर्सियों वाले खंड में, पूरा पुरुष वाले विषय में। आज तीनों को सर्वनाम की सूची में रखो।
7. यह और वह — निकट, दूर, पहले आया नाम
यह पास की चीज़, पास का व्यक्ति, या बात में निकट का संकेत। वह दूर का, या पीछे छूटे नाम का संकेत। ये और वे इन्हीं के वचन।
| निकट | दूर / पीछे |
|---|---|
| यह मेज़ है। | वह पेड़ है। |
| यह लड़का मेरा भाई है। | वह लड़का कल आया था। |
| ये किताबें नई हैं। | वे पहाड़ दूर हैं। |
| किताब यहाँ रखी है। यह मेरी है। | राम आया। वह थक गया। |
यह / वह व्यक्ति और वस्तु दोनों पर लगते हैं। गंगा दूर दिखे तो वह गंगा है — गंगा संज्ञा रहती है यदि नाम लो; वह सर्वनाम यदि नाम की जगह लो।
यहाँ / वहाँ सर्वनाम नहीं। वे जगह बताते हैं — क्रिया विशेषण का परिवार, क्रिया विशेषण वाले विषय में। यह चीज़, यहाँ जगह। वह व्यक्ति, वहाँ जगह।
यह घर है। — संकेत वस्तु पर।
यहाँ घर है। — जगह।
वह सो रहा है। — व्यक्ति का संकेत।
वहाँ सो रहा है। — अधूरा; कर्ता गायब, वहाँ स्थान है।
8. अकेला, या संज्ञा के कंधे पर
यह और वह दो तरह से बैठते हैं। अकेले नाम की जगह भरें — सर्वनाम साफ़। संज्ञा से ठीक पहले चिपकें — संकेत बताने जैसा काम, लेबल आगे विशेषण वाले विषयों में।
| अकेला | संज्ञा के साथ |
|---|---|
| यह मेरी है। | यह किताब मेरी है। |
| वह आया। | वह लड़का आया। |
| ये पुरानी हैं। | ये दीवारें पुरानी हैं। |
बाईं तरफ़ कुर्सी सर्वनाम की। दाईं तरफ़ किताब, लड़का, दीवारें संज्ञा हैं; यह/वह उनके साथ संकेत देते हैं। स्कूल की किताबें दाईं तरफ़ को सार्वनामिक विशेषण भी कहती हैं — नाम और भेद विशेषण वाले विषयों में। आज की सख्त बात: अकेला यह/वह = सर्वनाम। राम की जगह वह — साथ हो या न हो, वह संज्ञा नहीं।
मैं, तुम, आप संज्ञा के कंधे पर इस तरह नहीं चढ़ते। मैं लड़का वाक्य नहीं; मैं लड़का हूँ में लड़का पूरक/संज्ञा, मैं सर्वनाम अलग कुर्सी पर।
9. संदर्भ — नाम पहले, या बिना नाम
सर्वनाम हवा में नहीं टिकता। सुनने वाले को पता होना चाहिए संकेत किस पर है।
- नाम पहले: सुधा आई। वह मुस्कराई। — वह = सुधा।
- इशारा: यह दो। — हाथ में किताब हो तो नाम की ज़रूरत नहीं।
- बोलने-सुनने वाला सामने: मैं जाता हूँ। तुम रुको। — संज्ञा पहले आए बिना चलता है।
वह आया। अकेला वाक्य तब पूरा जब दोनों जानते हों वह कौन। कहानी की पहली पंक्ति में वह अचानक आ जाए तो आकांक्षा टूटती है — शब्द और वाक्य वाले विषय वाला अधूरापन, नाम नहीं मिला।
जाँच: सर्वनाम पर उंगली रखो और पूछो — यह संकेत किसकी ओर है? उत्तर न बने तो वाक्य से नाम या इशारा गाँठो, सर्वनाम मत तोड़ो।
10. रूप बदलता है — जगह पूछो, 8 कारक अभी नहीं
सर्वनाम विकारी है — वाक्य की जगह के हिसाब से रूप बदलता है। पूरे 8 कारक रूप विचार में। यहाँ इतना कि मूल शब्द और उसके रूप एक ही परिवार हैं, नए संज्ञा-नाम नहीं।
| मूल | कुछ रूप | वाक्य |
|---|---|---|
| मैं | मुझे, मुझसे, मेरा, मेरी, मेरे | मुझे पानी दो। मेरा घर पास है। |
| तुम | तुम्हें, तुमसे, तुम्हारा | तुम्हें जाना है। तुम्हारा नाम क्या है? |
| आप | आपको, आपसे, आपका | आपको चाय पिलाऊँ? आपका घर कहाँ है? |
| यह | इसे, इससे, इसका, ये | इसे उठाओ। इसका रंग लाल है। |
| वह | उसे, उससे, उसका, वे | उसे बुलाओ। उसका भाई आया। |
मुझे संज्ञा नहीं। मुझे = मैं उस जगह पर जहाँ किसे? पूछो। मेरा घर — मेरा सर्वनाम का रूप (किसका?), घर संज्ञा। सुंदर घर — सुंदर विशेषण (कैसा?), घर संज्ञा। मेरा और सुंदर एक जैसे लगें, काम अलग: एक संबंध का संकेत, एक गुण। विशेषण वाले विषय में; कारक वाले विषय में।
राम को बुलाओ। — राम संज्ञा, रूप बदला।
उसे बुलाओ। — वह सर्वनाम, रूप बदला। दोनों कर्म की जगह; शब्द-भेद अलग।
11. लिंग और वचन — शब्द बनाम क्रिया
मैं, तुम, आप, यह, वह — ये 5 लिखने में लिंग नहीं घुमाते। लिंग क्रिया या साथ की संज्ञा पर दिखता है। वचन कुछ सर्वनाम खुद बदलते हैं।
| एक | अधिक |
|---|---|
| मैं | हम |
| तू | तुम (तुम एक के लिए भी) |
| यह | ये |
| वह | वे |
| आप | आप — रूप वही; क्रिया अक्सर बहुवचन जैसी |
वह आता है। वह आती है। — वह नहीं बदला।
मैं लड़का हूँ। मैं लड़की हूँ। — मैं नहीं बदला।
ये लड़के हैं। ये लड़कियाँ हैं। — ये वचन का रूप; लिंग फिर क्रिया/संज्ञा पर।
तुम एक मित्र को भी, कई मित्रों को भी। आप एक आदरणीय को भी — रूप आप, क्रिया आते हैं / आइए। यह उलझन सामाजिक और क्रिया-मेल की है, सर्वनाम की परिभाषा की नहीं। नियम आप-तुम, पुरुष, और रूप विचार में।
12. तीन कुर्सियाँ — पुरुष की झलक
बात तीन ओर से बँटती है: बोलने वाला, सुनने वाला, बाकी दुनिया। इन्हीं को व्याकरण उत्तम, मध्यम, अन्य पुरुष कहता है। पूरा मेल — मैं जाता हूँ, तुम जाते हो, वह जाता है — पुरुष वाले विषय में। आज कुर्सी पहचानो, क्रिया की तालिका मत रटो।
| कुर्सी | नाम | आज के शब्द |
|---|---|---|
| बोलने वाला | उत्तम पुरुष | मैं, हम |
| सुनने वाला | मध्यम पुरुष | तू, तुम, आप |
| जिसकी बात हो, सामने न बोल रहा हो | अन्य पुरुष | यह, वह, ये, वे |
यह/वह सामने खड़े व्यक्ति पर भी लगते हैं, तब भी अन्य पुरुष — क्योंकि वे बोलने-सुनने वाले नहीं, संकेत किए गए हैं। तुम हमेशा मध्यम। मैं हमेशा उत्तम। तीन शब्द याद रहें: मैं, तुम, वह — तीन कुर्सियाँ।
13. जो आज नहीं — भेद आगे
सर्वनाम के कई परिवार हैं। सर्वनाम के भेद वाले विषय उनको बाँटेगा: पुरुषवाचक से निजवाचक तक। आज की पहचान 5 मूल और उनके साथी रूपों पर टिकी है। नीचे के शब्द भी सर्वनाम हैं — घबराओ मत, परिवार वहाँ खोलो।
| शब्द | आज इतना | आगे का विषय |
|---|---|---|
| कोई, कुछ, सब | अनिश्चित संकेत; संज्ञा नहीं | सर्वनाम के भेद |
| कौन, क्या, किस | प्रश्न; नाम की जगह पूछते हैं | सर्वनाम के भेद |
| जो, जिसे, जिसका | दो वाक्यों को नाम से बाँधते हैं | सर्वनाम के भेद |
| अपना, स्वयं, खुद | अपनी ओर का संकेत | सर्वनाम के भेद |
एक शब्द दो सूचियों में भी बैठ सकता है — यह/वह कभी पुरुष की सूची में, कभी निश्चय की। आप सुनने वाला भी, कहीं निज का भी। बाँट सर्वनाम के भेद वाले विषय में साफ़ होगी। आज काम पूछो: नाम है या नाम की जगह?
कौन आया? — कौन सर्वनाम (प्रश्न)। राम आया — राम संज्ञा। क्या पड़ा है? क्या सर्वनाम; किताब पड़ी है — किताब संज्ञा। इन वाक्यों को पहचान में रखो, भेद के नाम रटने के लिए नहीं।
14. शब्द तोड़कर पूरा
मैं
बोलने वाला। सर्वनाम। संज्ञा नहीं। रूप: मुझे, मेरा। वचन साथी: हम।
तुम
सुनने वाला। सर्वनाम। तू और आप उसी कुर्सी के दूसरे ढंग — आदर आप-तुम वाले विषय में।
आप
सुनने वाला, आदर। सर्वनाम। बड़े व्यक्ति का नाम नहीं। क्रिया का रूप पुरुष वाले विषय में।
यह
निकट का संकेत। अकेला हो तो सर्वनाम। यह किताब — संज्ञा किताब, यह संकेत; विशेषण-लेबल आगे। यहाँ जगह है, यह वस्तु/व्यक्ति।
वह
दूर या पहले आए नाम की जगह। राम संज्ञा, वह सर्वनाम। रूप: उसे, उसका। वचन: वे।
हम
बोलने वाले का बहुवचन साथी। सर्वनाम।
तू
एक सुनने वाला। सर्वनाम। सामाजिक चुन आप-तुम वाले विषय में।
मेरा
मैं का रूप — किसका? सर्वनाम का विकार। सुंदर विशेषण है, मेरा नहीं। घर संज्ञा।
राम
नाम। व्यक्तिवाचक संज्ञा, संज्ञा के भेद वाले विषय में। सर्वनाम वह होगा।
कोई
अनिश्चित संकेत। सर्वनाम के परिवार में; भेद सर्वनाम के भेद वाले विषय में। आज की 5 सूची का मूल नहीं।
गाँधी आए। वे बैठे। — गाँधी संज्ञा, वे सर्वनाम। चंद्रबिंदु गाँधी में, अनुस्वार वाले विषय में।
मुझे भूख है। — मुझे सर्वनाम का रूप, भूख भाववाचक संज्ञा।
15. आम गलतियाँ
- वह / यह / मैं को संज्ञा लिखना — नाम नहीं, जगह।
- मैं को संज्ञा कहना क्योंकि व्यक्ति बोल रहा है। व्यक्ति बोल रहा है, शब्द फिर भी सर्वनाम है।
- आप को संज्ञा कहना क्योंकि आदर है। आदर संबोधन का है, नाम का नहीं।
- राम वह आता है — दो कर्ता एक कुर्सी पर। या राम, या वह।
- गंगा को वह लिखकर वह को जातिवाचक संज्ञा मानना। भेद संज्ञा के थे।
- यह और यहाँ एक करना। यह संकेत, यहाँ स्थान।
- मेरा को विशेषण रट लेना और सर्वनाम की सूची से काट देना। मेरा मैं का रूप है।
- तुम और आप को दो शब्द-भेद मानना — दोनों सर्वनाम; फर्क सामाजिक, आप-तुम वाले विषय में।
- 5 मूल रटकर कोई / कौन / जो को संज्ञा लिखना। वे भी सर्वनाम, परिवार सर्वनाम के भेद वाले विषय में।
- सर्वनाम के 6 भेद इसी विषय में पूरा कर लेना। बाँट अगले विषय की है।
जाँच: (1) किसी का अपना नाम है? संज्ञा। (2) नाम की जगह संकेत है? सर्वनाम। (3) मैं / तुम / आप / यह / वह — 5 मूल याद। (4) रूप बदले तो भी परिवार वही। (5) भेद, आदर, क्रिया-मेल — सर्वनाम के भेद, आप-तुम, पुरुष वाले विषयों में।
16. इस विषय का सार
- सर्वनाम = संज्ञा के स्थान पर आने वाला शब्द। नाम नहीं, नाम की जगह।
- 5 मूल: मैं, तुम, आप, यह, वह। साथी: तू, हम, ये, वे और रूप मुझे, मेरा, उसे…
- मैं बोलने वाला; तू/तुम/आप सुनने वाला; यह निकट, वह दूर या पहले आया नाम।
- अकेला यह/वह सर्वनाम। संज्ञा के साथ संकेत — विशेषण-लेबल आगे।
- यहाँ/वहाँ सर्वनाम नहीं। मेरा विशेषण नहीं, मैं का रूप है।
- तीन पुरुष की कुर्सी आज; क्रिया का मेल पुरुष वाले विषय में। आदर आप-तुम वाले विषय में। भेद सर्वनाम के भेद वाले विषय में।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. सर्वनाम क्या है? राम संज्ञा है? वह?
उत्तर
संज्ञा के स्थान पर आने वाला शब्द — नाम की जगह, नाम नहीं। राम संज्ञा (नाम)। वह सर्वनाम (संकेत)।
2. 5 मूल सर्वनाम लिखो। मैं संज्ञा है क्योंकि व्यक्ति बोल रहा है?
उत्तर
मैं, तुम, आप, यह, वह। नहीं — बोलने वाला व्यक्ति है, शब्द फिर भी सर्वनाम है।
3. तू, तुम, आप एक कुर्सी के हैं? आप संज्ञा है क्योंकि आदर है?
उत्तर
हाँ — तीनों सुनने वाला, सर्वनाम। आदर संबोधन का है, नाम का नहीं। आप संकेत है, नाम नहीं।
4. यह और यहाँ एक हैं? “यह मेरी है” और “यह किताब मेरी है” में यह कहाँ सर्वनाम है?
उत्तर
नहीं — यह संकेत, यहाँ स्थान। अकेला “यह मेरी है” में यह सर्वनाम। “यह किताब” में किताब संज्ञा, यह संकेत; सार्वनामिक विशेषण का नाम आगे।
5. मेरा विशेषण है? “वह आया।” अकेला कब अधूरा?
उत्तर
मेरा विशेषण नहीं — मैं का रूप (किसका?)। वह आया तब अधूरा जब संकेत किस पर है पता न हो — आकांक्षा टूटी, नाम नहीं मिला।
विषय समाप्त · सर्वनाम — परिचय
