Noteclass 9 10

तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी

Lesson 36 of 71

अंग 2 · शब्द विचार

पाठ 2.25

विषय शुरू · तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी

तद्धित वाले विषय में जड़+पूँछ खुली — बचपन, सुनार। वह बनावट थी। आज दूसरा प्रश्न: शब्द कहाँ से आया? कार्ड के 4: अग्नि, आग, पगड़ी, कलम। चार खेमे — तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी। नया विकार नहीं। रूढ़-यौगिक टुकड़े देखता है; आज स्रोत। दो भाषाओं के टुकड़े एक शब्द में — संकर आगे। नुक्ता ध्वनि वाले विषय में। आज सिर्फ़ कहाँ से आया।

1. स्रोत क्या है

परिभाषा सीधी रखो: शब्द किस भाषा-घर से हिंदी में बैठा, वही स्रोत है। तत्सम = संस्कृत जैसा। तद्भव = उससे बिगड़कर हिंदी बना। देशज = घर का — देश में जन्मा, संस्कृत से न जोड़ा। विदेशी = बाहर से।

अग्नि तत्सम। आग तद्भव। एक अर्थ-परिवार, दो रूप, दो खेमे।

पगड़ी देशज। कलम विदेशी।

प्रश्न: यह शब्द किस घर से आया? टुकड़े जुड़कर बने? वह रूढ़-यौगिक वाले विषय में। पूँछ नाम पर? तद्धित वाले विषय में।

जाँच: कहाँ से? आज। कैसे जुड़ा? रूढ़-यौगिक वाले विषय में। कौन-सी पूँछ? तद्धित / कृदंत।

2. 4 कार्ड एक नज़र में

एक अग्नि रटकर आग-पगड़ी-कलम गायब मत करो। 4 खेमे, 4 शब्द।

कार्ड खेमा घर
अग्नि तत्सम संस्कृत जैसा
आग तद्भव उससे बिगड़कर हिंदी बना
पगड़ी देशज घर का; देश में जन्मा
कलम विदेशी बाहर से

जल-पानी, हस्त-हाथ, ग्राम-गाँव — अग्नि-आग की कतार। लोटा, पटाखा — पगड़ी की। किताब, स्कूल — कलम की। कार्ड 4 हैं; सूची रटना नहीं।

जाँच: संस्कृत जैसा? तत्सम। बिगड़कर हिंदी? तद्भव। घर का, संस्कृत नहीं? देशज। बाहर से? विदेशी।

3. बनावट से नाता — दो प्रश्न

एक शब्द दो उत्तर दे सकता है। गलती एक प्रश्न से दोनों काट देना।

विषय प्रश्न
रूढ़, यौगिक, योगरूढ़ टुकड़े जुड़कर बने?
कृदंत / तद्धित धातु या नाम की पूँछ?
तत्सम आज किस घर से आया?

सुनार तद्धित — सोना+आर, तद्धित वाले विषय में। सोना तद्भव, स्वर्ण तत्सम — आज। स्वर्णकार तत्सम रूप। तीन काट, एक पेशा।

जाँच: पूँछ? तद्धित। घर? आज। टुकड़े? रूढ़-यौगिक वाले विषय में।

4. तत्सम — अग्नि

कार्ड का पहला। तत् = उस से; सम = समान। संस्कृत का रूप हिंदी में लगभग वैसा ही बैठा।

अग्नि जली। — अग्नि तत्सम।

राजा, कर्म, सत्य, पुष्प, जल, ग्राम, हस्त, क्षेत्र, स्वर्ण, चंद्र।

गाँधी तत्सम नाम नहीं; व्यक्तिवाचक संज्ञा, संज्ञा वाले विषय में। चंद्रबिंदु गाँधी में।

तत्सम अक्सर लिखने/सभा वाली पंक्ति में बैठता है — अग्नि, जल। घर में आग, पानी। दोनों हिंदी के शब्द हैं; खेमा अलग।

धर्म तत्सम; धार्मिक तद्धित पूँछ, तद्धित वाले विषय में। स्रोत धर्म का आज तत्सम।

जाँच: संस्कृत-सा रूप? तत्सम सोचो। पूँछ इक? तद्धित। आग? तद्भव, अगला कार्ड।

5. तद्भव — आग

कार्ड का दूसरा। तद्भव = उससे बिगड़कर बना। संस्कृत का पुराना रूप बिगड़कर हिंदी का नया कपड़ा पहन बैठा। अर्थ पास, लिखा अलग।

तत्सम तद्भव
अग्नि आग
हस्त हाथ
ग्राम गाँव
चंद्र चाँद
दुग्ध दूध
स्वर्ण सोना
रात्रि रात
सर्प साँप

गाँव, चाँद, साँप — चंद्रबिंदु। यह जोड़ी याद की झलक है, सौ पंक्तियाँ नहीं। कान पर अग्नि-आग एक परिवार; खेमा दो।

कुछ शब्द बीच के लगें — न पूरे तत्सम, न पूरे तद्भव। आज 4 खेमे; बीच की सूची मत गढ़ो।

जाँच: बिगड़ा रूप, संस्कृत से नाता? तद्भव। अग्नि जैसा का जैसा? तत्सम। पगड़ी संस्कृत से? नहीं — देशज।

6. देशज — पगड़ी

कार्ड का तीसरा। देश में जन्मा। संस्कृत की जोड़ी नहीं माँगता। न बाहर से उधार।

पगड़ी बाँधी। लोटा भरा। पटाखा फूटा।

गाँधी की पगड़ी — पगड़ी देशज; गाँधी नाम। चंद्रबिंदु।

देशज को तद्भव मत लिखो सिर्फ़ इसलिए कि शब्द “देसी” लगता है। तद्भव की जड़ संस्कृत में दिखती है — अग्नि→आग। पगड़ी ऐसी जोड़ी नहीं रखती।

खिड़की कुछ सूचियों में देशज, कुछ में विदेशी। आज कार्ड पगड़ी, लोटा, पटाखा — विवाद की सूची नहीं।

जाँच: देश का, संस्कृत जोड़ी नहीं? देशज। आग? तद्भव। कलम? विदेशी।

7. विदेशी — कलम

कार्ड का चौथा। बाहर से आया — अरबी, फ़ारसी, तुर्की, पुर्तगाली, या और बाहर की भाषा। घर कई; खेमा एक: विदेशी।

कलम / क़लम से लिखो। किताब पढ़ो। स्कूल जाओ।

आदमी, दुनिया, अखबार — अरबी-फ़ारसी परिवार। टेबल, स्टेशन — बाहर की भाषा का परिवार।

क़ ख़ ग़ ज़ फ़ — नुक्ता वाले विषय में ध्वनि। क़लम विदेशी स्रोत आज; बिंदु ध्वनि की तह वहाँ। बिना नुक्ता कलम भी चलता है; खेमा विदेशी वही।

बे, बद, दार — सिर और पूँछ उपसर्ग-प्रत्यय वाले विषयों में। स्रोत विदेशी आज जब पूरा शब्द बाहर का हो: दुकानदार में दार विदेशी पूँछ, दुकान भी बाहर के पास — नक्शा संकर आगे जब दो घर एक शब्द में साफ़ टूटें।

जाँच: बाहर की भाषा? विदेशी। नुक्ता? ध्वनि वाले विषय में। रेल+गाड़ी? संकर आगे।

8. स्वर्ण, सोना, सुनार — तीन काट

तद्धित वाले विषय का वादा। आज स्रोत खोलो, पूँछ मत दोहराओ।

शब्द स्रोत बनावट
स्वर्ण तत्सम —
सोना तद्भव —
स्वर्णकार तत्सम नाम+पूँछ की झलक, तद्धित वाले विषय में
सुनार तद्भव धारा / सोना से तद्धित, तद्धित वाले विषय में

एक पेशा, दो स्रोत-कपड़े। आज खेमा; पूँछ वहाँ। दोनों लिखना झूठ नहीं — प्रश्न अलग हों।

जाँच: स्वर्ण? तत्सम। सोना? तद्भव। सुनार पूँछ? तद्धित वाले विषय में।

9. संकर दरवाज़ा — आज न खोलो

रेलगाड़ी, टिकटघर — दो भाषाओं के टुकड़े एक शब्द में। संकर आगे।

शब्द आज आगे
रेल विदेशी —
गाड़ी देशज / तद्भव झलक —
रेलगाड़ी दो घर जुड़े संकर आगे

रेल अकेली विदेशी। रेलगाड़ी संकर। बनावट यौगिक लग सकती है — रूढ़-यौगिक वाले विषय में। तीन प्रश्न, तीन उत्तर।

जाँच: एक घर बाहर? विदेशी। दो घर एक शब्द? संकर आगे। टुकड़े अर्थ? यौगिक।

10. कुर्सी वाक्य में

स्रोत 9वाँ विकार नहीं। अग्नि संज्ञा ही रहती है। खेमा जन्म बताता है, कुर्सी नहीं बदलता।

अग्नि जल गई। आग जल गई। — दोनों क्रिया वाला वाक्य; खेमा अलग।

लाल पगड़ी। नई कलम। — विशेषण चिपका; पगड़ी देशज, कलम विदेशी।

तत्सम शब्द विकारी हो सकते हैं — राजा, राजाओं। रूप विचार में। स्रोत आज; रूप वहाँ।

जाँच: कुर्सी? संज्ञा/विशेषण पहले के विषय। खेमा? आज। 9वीं कुर्सी? नहीं।

11. वाक्य में 4 खेमे

अरे! अग्नि नहीं, आग दो; पगड़ी बाँधो, कलम उठाओ — गाँव में चाँद निकला।

  • अरे — विस्मयादिबोधक
  • अग्नि — तत्सम
  • आग — तद्भव
  • पगड़ी — देशज
  • कलम — विदेशी
  • गाँव, चाँद — तद्भव; चंद्रबिंदु

चार कार्ड एक बात में। रेलगाड़ी यहाँ नहीं — संकर आगे।

12. शब्द तोड़कर पूरा

अग्नि / जल / स्वर्ण / ग्राम

तत्सम। जैसा का जैसा।

आग / पानी / सोना / गाँव

तद्भव। बिगड़ा रूप। चंद्रबिंदु गाँव में।

पगड़ी / लोटा / पटाखा

देशज। संस्कृत जोड़ी नहीं।

कलम / किताब / स्कूल

विदेशी। नुक्ता ध्वनि अलग तह।

सुनार / धार्मिक

बनावट तद्धित; स्रोत जड़ पर पूछो।

रेलगाड़ी

संकर आगे। रेल अकेली विदेशी।

अग्नि, आग, पगड़ी, कलम — चार घर।

13. आम गलतियाँ

  • आग को तत्सम। बिगड़ा रूप तद्भव; अग्नि तत्सम।
  • पगड़ी को तद्भव सिर्फ़ “देसी” होने से। तद्भव संस्कृत से बिगड़कर बनता है।
  • कलम को देशज। बाहर की भाषा, विदेशी।
  • स्रोत और तद्धित एक प्रश्न। सुनार पूँछ तद्धित; सोना खेमा तद्भव।
  • रेलगाड़ी को आज का चौथा कार्ड। संकर आगे।
  • नुक्ता को स्रोत। ध्वनि वाले विषय में; क़लम विदेशी भी है।
  • सौ जोड़ी यहीं रट लेना। 4 खेमे और 8 झलक काफी।
  • तत्सम को 9वाँ विकार। तह है, कुर्सी नहीं।
  • गाँव को गांव। चंद्रबिंदु।
  • रूढ़ और तत्सम एक। टुकड़े बनावट; घर स्रोत।
  • धार्मिक को नया तत्सम शब्द बिना जड़ धर्म के। पूँछ तद्धित।

जाँच: (1) 4 खेमे: तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी। (2) कार्ड: अग्नि, आग, पगड़ी, कलम। (3) बनावट अलग प्रश्न। (4) संकर आगे। (5) नुक्ता ध्वनि।

14. इस विषय का सार

  • स्रोत बताता है शब्द किस घर से आया। नया विकार नहीं।
  • तत्सम संस्कृत जैसा। तद्भव उससे बिगड़कर। देशज घर का। विदेशी बाहर से।
  • कार्ड: अग्नि, आग, पगड़ी, कलम।
  • स्वर्ण-सोना जोड़ी आज; सुनार तद्धित वाले विषय में।
  • रेलगाड़ी संकर आगे। नुक्ता ध्वनि वाले विषय में।

आगे संकर शब्द है।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. चार खेमे क्या हैं? कार्ड के 4 लिखो। 9वाँ विकार है?

उत्तर

तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी। अग्नि, आग, पगड़ी, कलम। नहीं — स्रोत की तह; कुर्सी संज्ञा वही रह सकती है।

2. आग तत्सम है? पगड़ी तद्भव है?

उत्तर

नहीं — आग तद्भव; अग्नि तत्सम। नहीं — पगड़ी देशज; तद्भव संस्कृत से बिगड़कर बनता है।

3. कलम देशज है? नुक्ता और विदेशी एक विषय हैं?

उत्तर

नहीं — कलम विदेशी। नहीं — नुक्ता ध्वनि वाले विषय में; स्रोत आज। क़लम दोनों तहें छू सकता है।

4. सुनार और स्वर्ण एक काट हैं? रेलगाड़ी आज का कार्ड है?

उत्तर

नहीं — स्वर्ण तत्सम, सोना तद्भव; सुनार तद्धित वाले विषय में। नहीं — रेलगाड़ी संकर आगे; रेल अकेली विदेशी।

5. तत्सम और रूढ़ एक हैं? गाँव में चंद्रबिंदु नहीं चलता?

उत्तर

नहीं — रूढ़ बनावट, तत्सम स्रोत; रूढ़-यौगिक वाले विषय में टुकड़े। नहीं — गाँव तद्भव, चंद्रबिंदु; गांव मत लिखो।

विषय समाप्त · तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी