अंग 2 · शब्द विचार
पाठ 2.23
विषय शुरू · कृदंत
धातु वाले विषय में जड़ खुली — लिख्, जा, कर। जड़ अकेली कम बैठती है; पूँछ माँगती है। पूँछ = शब्द के बाद का टुकड़ा। आज वह पूँछ जो धातु से नया शब्द बनाए। कार्ड के 3: लिखा, लिखना, लिखकर। नया विकार नहीं। प्रत्यय वाली तह, धातु की सेना। बचपन-सुनार नाम-गुण की सेना — तद्धित आगे। लिखता हूँ पुरुष-काल की पंक्ति — धातु रूप आगे। आज तीन कपड़े, एक जड़ लिख्।
1. पूँछ क्या है
परिभाषा सीधी रखो: धातु में प्रत्यय लगकर जो शब्द बने, वह कृदंत है। कृत् = धातु पर लगने वाली पूँछ; अंत = लगा शब्द। अकेला प्रत्यय वाक्य में नहीं बैठता; लिखा बैठता है।
लिख् + आ → लिखा। लिख् + ना → लिखना। लिख् + कर → लिखकर।
जा → गया / जाना / जाकर। गया टेढ़ा रूप, धातु वाले विषय में झलक; आज कपड़ा कृदंत जब नाम-गुण या क्रम बने।
प्रश्न: जड़ धातु है? पीछे खंड जुड़कर नया शब्द बना? कृदंत सोचो। जड़ अच्छा/बचपन? तद्धित आगे।
जाँच: लिख् नीचे? आज की सेना। अच्छा नीचे? तद्धित आगे। लिख् नंगी? धातु वाले विषय में।
2. 3 कार्ड एक नज़र में
एक लिखा रटकर लिखना-लिखकर गायब मत करो। 3 काम, एक जड़।
| कार्ड | काम | झलक |
|---|---|---|
| लिखा | काम पूरा / चिपका गुण या नाम | लिखी चिट्ठी। लिखा हुआ पत्र। |
| लिखना | काम का नाम | लिखना आसान है। |
| लिखकर | पहले यह काम, फिर अगला | पाठ लिखकर सो गया। |
पढ़ना, जाना, करके, पका, गया हुआ — परिवार। कार्ड 3 हैं। लेखक, पढ़ाई — पूँछ और, दरवाज़ा वही; सूची आज नहीं।
जाँच: चिट्ठी कैसी? लिखा। काम का नाम? लिखना। पहले लिख, फिर सो? लिखकर।
3. जड़ से नाता — धातु वहाँ, कपड़ा आज
चार तहें एक में मत मिलाओ।
| विषय | प्रश्न |
|---|---|
| क्रिया — परिचय | काम की कुर्सी कौन? |
| धातु | जड़ कौन? |
| प्रत्यय | पूँछ का खंड कौन? |
| कृदंत आज | धातु + पूँछ का पूरा शब्द कौन? |
लिखना धातु वाले विषय में सूची-कपड़ा था; आज वही कपड़ा कृदंत का नाम पाता है। जड़ लिख् अलग रहती है।
जाँच: लिख्? धातु। ना? प्रत्यय। लिखना? आज। जाता हूँ? धातु रूप आगे।
4. लिखा — पूरा काम, चिपका शब्द
कार्ड का पहला। काम हो चुका — शब्द अक्सर विशेषण की कुर्सी छूता है, कभी नाम की। लिंग-वचन घूमते हैं: लिखा, लिखी, लिखे, लिखीं। रूप विचार में पूरा; आज इतना कि चिट्ठी के साथ लिखी।
लिखी चिट्ठी मेज़ पर है। — चिट्ठी कैसी? लिखी। विशेषण-काम, विशेषण वाले विषय की कुर्सी; जन्म धातु से — आज कृदंत।
गाँधी का लिखा आज भी पढ़ा जाता है। — लिखा नाम-सा। चंद्रबिंदु गाँधी में।
पका आम। टूटी डाली। गया हुआ समय।
हुआ साथी हो सकता है: लिखा हुआ पत्र। नया कार्ड नहीं — लिखा की तह साफ़ करने वाला कपड़ा।
जाँच: नाम से चिपका लिखा/लिखी? आज। लिंग घूमा? रूप विचार में। जड़? लिख्।
5. दीवार — उसने लिखा
एक लिखा दो वाक्य में दो काम। गलती यह है कि एक सूची चुनकर दूसरी हमेशा काट दो।
| वाक्य | प्रधान काम |
|---|---|
| लिखी चिट्ठी पड़ी है। | कृदंत — चिट्ठी की विशेषता |
| राम ने चिट्ठी लिखी। | क्रिया-रूप — काम हुआ; काल और धातु रूप आगे |
ने वाक्य में कर्ता-विभक्ति, कारक वाले विषय में। आज काट: शब्द नाम से चिपका है या वाक्य का काम है? चिपका तो कृदंत सोचो। काम का अंत क्रिया तो रूप आगे। दोनों दिखें तो दोनों नाम, झूठा एक न ठोको।
लिखता है, लिखोगे — वर्तमान-भविष्य की पंक्ति, आज के 3 कार्ड नहीं। ता देखकर कृदंत मत ठोक दो बिना वाक्य के।
जाँच: कैसी चिट्ठी? कृदंत। किसने लिखा? क्रिया-रूप आगे। लिखता हूँ? पुरुष/काल, आज नहीं।
6. लिखना — काम का नाम
कार्ड का दूसरा। धातु + ना। सूची में क्रिया का नाम यहीं से आता है — लिखना, जाना, करना — क्रिया वाले विषय में। आज: यह शब्द संज्ञा की कुर्सी पर बैठ सकता है।
लिखना कठिन है। — क्या कठिन? लिखना। भाव का नाम।
मुझे लिखना है। — अभी का काम, ना रूप; जड़ लिख्।
लिखने में समय लगता है। — लिखने झुका रूप, कारक रूप विचार में।
खाना संज्ञा भी छू सकता है, क्रिया वाले विषय में। ना कपड़ा वही; कुर्सी वाक्य बताए। पढ़ना / पढ़ने वाला — वाला प्रत्यय वाले विषय में; ना आज की पूँछ, वाला बाद।
लिखना काम का नाम है, इसलिए लिंग कम माँगता है — दो लिखना अटपटा लगता है, लिखना एक रहता है। लिखने वाले — वाला घूमे, ना जड़ के पास।
जाँच: काम का नाम? लिखना। लिख्? जड़। लिखने को? रूप विचार में। दूधवाला? तद्धित आगे, ना नहीं।
7. लिखकर — पहले यह, फिर वह
कार्ड का तीसरा। क्रम बाँधता है: एक काम खत्म, दूसरा शुरू। लिंग-वचन नहीं घूमते — लिखकर लड़का, लिखकर लड़की। अविकारी-सा व्यवहार; अव्यय की 4 कुर्सियों में नहीं घुलता। तह कृदंत की है।
पाठ लिखकर सो गया। — पहले लिखना, फिर सोना।
गाँधी अहिंसा अपनाकर चले। — करके/अपनाकर क्रम। चंद्रबिंदु।
जाकर बोलो। होकर रहना।
लिख कर दो शब्द मत तोड़ो जब क्रम एक पूँछ हो। कर धातु अलग वाक्य में बैठ सकती है — तुम लिखो, फिर करो। लिखकर एक शब्द, एक काम-क्रम।
लिखके बोलचाल; स्कूल अक्सर लिखकर। आज कार्ड लिखकर।
जाँच: पहले-फिर? लिखकर। लिखा/लिखी घूमे? पहला कार्ड। लिखकर घूमे? नहीं।
8. तद्धित दरवाज़ा — आज न खोलो
प्रत्यय वाले विषय में दो सेनाएँ थीं। आज सिर्फ़ धातु वाली।
| शब्द | जड़ | दरवाज़ा |
|---|---|---|
| लिखा, लिखना, लिखकर | लिख् | कृदंत आज |
| पढ़ाई | पढ़् | कृदंत; पूँछ आई |
| अच्छाई, बचपन, सुनार | अच्छा, बच्चा, सोना | तद्धित आगे |
आई एक, जड़ दो। पढ़ाई आज की सेना; अच्छाई नहीं। लेखक अक धातु पर — कृदंत परिवार, कार्ड नहीं। तेली नाम पर — तद्धित आगे।
जाँच: जड़ धातु? कृदंत। जड़ नाम/गुण? तद्धित आगे। लिखा तीन कार्ड में पहला।
9. कुर्सी वाक्य में
कृदंत 9वाँ विकार नहीं। वाक्य में किसी पुरानी कुर्सी पर बैठता है।
| शब्द | कुर्सी झलक |
|---|---|
| लिखी चिट्ठी | विशेषण-काम |
| लिखना कठिन है | संज्ञा-काम |
| लिखकर आओ | क्रम, क्रिया के साथ; रूप अटल |
बनावट धातु+प्रत्यय; कुर्सी वाक्य बताए। उपसर्ग सिर जुड़ सकता है — निकलकर, लिखकर सादा आज। संयुक्त क्रिया खा लिया रूप विचार में; लिखकर सो गया दो काम, संयुक्त की पूरी तह आगे।
जाँच: कैसा/क्या/पहले-फिर? तीन कार्ड। 9वीं कुर्सी? नहीं।
10. जा, कर — टेढ़े कपड़े
जड़ जा, कर धातु वाले विषय में। कपड़े टेढ़े हो सकते हैं; नई जड़ मत गढ़ो।
गया हुआ आदमी। जाना ज़रूरी है। जाकर देखो। — जा।
किया काम। करना आसान नहीं। करके सीखो। — कर।
वह गया — क्रिया-रूप, काल आगे। गया हुआ आदमी — कृदंत चिपका। वही दीवार जो लिखा पर थी।
जाँच: गया नई धातु? नहीं। गया हुआ चिपका? कृदंत सोचो। वह गया? रूप आगे।
11. वाक्य में 3 कपड़े
अरे! लिखी चिट्ठी पढ़ना लिखकर सीखो; गाँधी का लिखा बाकी है।
- अरे — विस्मयादिबोधक
- लिखी — पहला कार्ड, चिट्ठी से चिपका
- चिट्ठी — संज्ञा
- पढ़ना — दूसरा कार्ड, जड़ पढ़्
- लिखकर — तीसरा कार्ड, क्रम
- सीखो — आज्ञा, धातु रूप/पुरुष
- गाँधी का लिखा — लिखा नाम-सा; चंद्रबिंदु
एक वाक्य में तीनों कार्ड बैठ सकते हैं; तीन जड़ें भी — लिख्, पढ़्, सीख्।
12. शब्द तोड़कर पूरा
लिखा / लिखी / लिखे
पूरा काम, चिपका रूप। उसने लिखा — दीवार, काल आगे।
लिखना / लिखने
काम का नाम। लिखने झुका रूप, रूप विचार में।
लिखकर
क्रम। अटल। लिख के बोलचाल।
हुआ / हुई
साथी कपड़ा, चौथा कार्ड नहीं।
पढ़ाई / लेखक
धातु-पूँछ, परिवार; आई और अक प्रत्यय वाले विषय में झलक।
अच्छाई / बचपन
तद्धित आगे।
लिखा, लिखना, लिखकर — तीन कपड़े; लिख् एक जड़।
13. आम गलतियाँ
- लिखा को धातु लिखना। जड़ लिख्; लिखा कपड़ा।
- लिखता है को आज का कार्ड। ता पंक्ति धातु रूप/काल आगे।
- राम ने लिखा और लिखी चिट्ठी एक काट। वाक्य पूछो।
- अच्छाई को कृदंत। जड़ गुण, तद्धित आगे।
- बचपन-सुनार आज रट लेना। तद्धित आगे।
- लिखकर को क्रिया विशेषण की 5वीं कुर्सी। अव्यय वाले विषय की 4 कुर्सियाँ अलग।
- लिख कर हमेशा दो शब्द। क्रम एक पूँछ हो तो लिखकर।
- गया को नई धातु। जा का कपड़ा।
- कृदंत को 9वाँ विकार। बनावट है।
- कृदंत की पूरी लंबी सूची संस्कृत नामों सहित यहीं। आज 3 कार्ड।
- लिखकर लिखी की तरह घुमाना। लिखकर अटल।
जाँच: (1) धातु+पूँछ? कृदंत। (2) 3 कार्ड: लिखा, लिखना, लिखकर। (3) चिपका बनाम काम हुआ — दीवार। (4) तद्धित अलग। (5) लिखता हूँ आगे।
14. इस विषय का सार
- कृदंत धातु से बना शब्द है। नया विकार नहीं।
- कार्ड: लिखा — चिपका/पूरा; लिखना — काम का नाम; लिखकर — पहले-फिर, अटल।
- राम ने लिखा काल/रूप आगे; लिखी चिट्ठी आज।
- अच्छाई-बचपन तद्धित आगे। जड़ पूछो।
- प्रत्यय पूँछ का खंड; धातु जड़; कृदंत पूरा कपड़ा।
आगे तद्धित है।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. कृदंत क्या है? कार्ड के 3 लिखो। 9वाँ विकार है?
उत्तर
धातु + प्रत्यय से बना शब्द। लिखा, लिखना, लिखकर। नहीं — बनावट की तह; कुर्सी वाक्य बताए।
2. लिखा धातु है? “लिखता है” आज का कार्ड है?
उत्तर
नहीं — लिखा कृदंत, जड़ लिख्। नहीं — लिखता है पुरुष-काल / धातु रूप आगे।
3. “लिखी चिट्ठी” और “राम ने चिट्ठी लिखी” एक काट हैं? अच्छाई कृदंत है?
उत्तर
नहीं — पहली चिपकी विशेषता आज; दूसरी काम-रूप, काल आगे। नहीं — अच्छाई गुण से, तद्धित आगे; पढ़ाई धातु से आज की सेना।
4. लिखकर लिंग से घूमता है? बचपन आज का कार्ड है?
उत्तर
नहीं — लिखकर अटल; लिखा/लिखी घूमते हैं। नहीं — बचपन तद्धित आगे; आज लिखा, लिखना, लिखकर।
5. गया नई धातु है? लिखना सिर्फ़ धातु का दूसरा नाम है, कृदंत नहीं?
उत्तर
नहीं — गया जा का कपड़ा; गया हुआ चिपके तो कृदंत सोचो। नहीं — लिखना धातु+ना, काम का नाम, आज का दूसरा कार्ड।
विषय समाप्त · कृदंत
