अंग 2 · शब्द विचार
पाठ 2.22
विषय शुरू · धातु
पुरुष वाले विषय में मेल खुला — हूँ, हो, है, हैं। क्रिया मुड़ी; जड़ नहीं बदली। जड़ = पेड़ की जड़ जैसी मूल। आज वह जड़: क्रिया का मूल रूप। कार्ड के 3: लिख्, जा, कर। नया विकार नहीं। क्रिया की कुर्सी क्रिया वाले विषय में; सूची का नाम अक्सर -ना — जाना, करना। आज हलंत या छोटा रूप — लिख्, जा, कर। लिखा-लिखना-लिखकर कृदंत आगे। पुरुष-वचन-काल से घूमना धातु रूप आगे। आज सिर्फ़ जड़।
1. जड़ क्या है
परिभाषा सीधी रखो: क्रिया का वह मूल रूप जिससे वाक्य के सारे क्रिया-रूप बनते हैं, धातु कहलाता है। धातु = जड़। पेड़ की डालियाँ रूप हैं; जड़ एक।
लिखता है, लिखी, लिखना, लिखकर — चार बातें, एक जड़ लिख्।
जाता हूँ, गया, जाना, जाकर — जड़ जा। गया टेढ़ा रूप; पूरी तालिका धातु रूप आगे।
करता है, किया, करना, करके — जड़ कर।
प्रश्न: इन रूपों के नीचे एक छोटा टुकड़ा एक जैसा है? वह टुकड़ा धातु। अकेला वाक्य में कम बैठता है — जा! आज्ञा छू सकती है; जाता है रूप है।
जाँच: काम की कुर्सी? क्रिया वाले विषय में। जड़? आज। पूँछ (शब्द के बाद का टुकड़ा) लिखा/ना/कर? कृदंत आगे। हूँ/जाता? पुरुष और रूप विचार में।
2. 3 कार्ड एक नज़र में
एक लिख् रटकर जा-कर गायब मत करो। 3 ढंग की जड़ें।
| कार्ड | जड़ का रंग | सूची का -ना नाम |
|---|---|---|
| लिख् | हलंत — व्यंजन पर विराम | लिखना |
| जा | स्वर पर खत्म | जाना |
| कर | छोटा रूप, काम की जड़ | करना |
हलंत वर्ण विचार में। स्कूल लिख् में हलंत इसलिए दिखाता है कि यह अधूरी ध्वनि है, वाक्य का पूरा शब्द नहीं। जा और कर कार्ड पर हलंत नहीं — सूची और स्कूल दोनों चलते हैं; अर्थ जड़ का है, वर्तनी का झगड़ा नहीं।
हो, आ, पी, दे, ले — परिवार; कार्ड 3 हैं। पढ़्, चल्, देख् — लिख् जैसे हलंत साथी।
जाँच: लिखना? सूची नाम। लिख्? जड़ आज। जाता? रूप। लिखा? कृदंत आगे।
3. कुर्सी से नाता — -ना वहाँ, जड़ आज
क्रिया वाले विषय में 4 मूल थे: होना, जाना, करना, खाना — कुर्सी और सूची-नाम। आज उन्हीं के नीचे की जड़।
| विषय | प्रश्न |
|---|---|
| क्रिया — परिचय | काम/घटना/स्थिति कौन? |
| क्रिया के भेद | कर्म है? सहायक कौन? |
| पुरुष | हूँ हो है हैं किस पंक्ति? |
| धातु आज | जड़ कौन-सी? |
चार विषय एक नहीं। जाना क्रिया का सूची-नाम; जा धातु। खाना संज्ञा भी छू सकता है, क्रिया वाले विषय में; धातु खा। आज कार्ड पर खा नहीं; काट वही: नाम या जड़?
जाँच: वाक्य में काम? क्रिया। सूची लिखना? -ना नाम। लिख्? आज। कर्म? क्रिया के भेद वाले विषय में।
4. लिख् — हलंत जड़
कार्ड का पहला। ख पर हलंत — ध्वनि रुकती है, स्वर नहीं खुलता। पढ़्, चल्, बोल्, देख् इसी कतार।
गाँधी लिखते हैं। — वाक्य का रूप लिखते; जड़ लिख्। चंद्रबिंदु गाँधी में।
लिख! — आज्ञा; जड़ के पास। लिखता है — वर्तमान रूप, पुरुष वाले विषय में झलक।
लेख संज्ञा है, लिख् नहीं। लेखक में अक पूँछ — कृदंत आगे। लिखना में ना पूँछ — कृदंत आगे। आज सिर्फ़ लिख्।
लिख और लिख् कान पर पास। बिना हलंत लिख आज्ञा/रूप छू सकता है; स्कूल की जड़ हलंत से चिह्नित। वर्ण की तह हलंत वाले विषय में; आज चिह्न जड़ का है।
जाँच: हलंत जड़? लिख् सोचो। लेख नाम? संज्ञा। लिखा? कृदंत आगे।
5. जा — स्वर पर खत्म
कार्ड का दूसरा। आ स्वर पर जड़ रुकती है। आ, पी, हो, दे, ले साथी। हलंत नहीं दिखता।
तुम जाते हो। — जा + ते + हो; जड़ जा। मेल पुरुष वाले विषय में।
जा! — आज्ञा, जड़ के पास।
गया। — भूत इस जड़ पर टेढ़ा; याद का रूप, धातु रूप आगे। आज जड़ जा कहो, गया को नई धातु मत गढ़ो।
जाना सूची-नाम। जाती लिंग, रूप विचार में। जाकर कृदंत आगे। यात्रा संज्ञा; जा धातु से नाता गहरा, तद्धित/तत्सम आगे पतला — आज जड़ जा।
जाँच: जाता/गया/जाना? एक जड़ जा। गया अलग धातु? नहीं — रूप टेढ़ा, जड़ वही।
6. कर — काम की जड़
कार्ड का तीसरा। हिंदी की सबसे घिसी जड़। करना सूची-नाम। किया भूत टेढ़ा — जा/गया जैसी याद; नई धातु नहीं।
मैं काम करता हूँ। — कर + ता + हूँ।
कर! करो! कीजिए! — आज्ञा तीन सीढ़ी, आप-तुम वाले विषय में; जड़ कर एक।
किया, करके, करना — पूँछें कृदंत आगे।
काम संज्ञा। कर धातु। कारक ने/को रूप विचार में — कर से नाता नाम का नहीं, विभक्ति (ने, को, से) का। करण (साधन वाला कारक) अलग कुर्सी, कारक वाले विषय में; आज जड़ कर।
कराना, करवाना — दूसरे से करवाना; इस तह को प्रेरणार्थक कहते हैं — आगे। आज जड़; वह तह नहीं खोलनी।
जाँच: करता/किया/करना? जड़ कर। करण (साधन)? कारक आगे। करवाना? प्रेरणार्थक आगे।
7. अकेली जड़ वाक्य में
धातु अक्सर पूँछ माँगती है। आज्ञा में जड़ नंगी दिख सकती है: लिख। जा। कर। साधारण बात में रूप बैठता है: लिखता है। जाता हूँ।
| नंगी / पास | रूप / पूँछ |
|---|---|
| लिख। | लिखता है। लिखना। |
| जा। | जाते हो। जाना। |
| कर। | करती है। करके। |
आओ, आइए — मध्यम आज्ञा, पुरुष वाले विषय में; जड़ आ। आज 3 कार्ड; आ परिवार। विस्मयादिबोधक अरे अलग कुर्सी — अरे जड़ नहीं।
जाँच: एक अक्षर आज्ञा? जड़ के पास सोचो। है/ता/ना चिपका? रूप या कृदंत, जड़ नीचे।
8. तीन दरवाज़े — आज न खोलो
जड़ से तीन सेनाएँ निकलती हैं। नाम इतना कि दरवाज़ा दिखे; सूची रटना नहीं।
| दरवाज़ा | झलक | कहाँ |
|---|---|---|
| कृदंत | लिखा, लिखना, लिखकर | कृदंत आगे |
| धातु रूप | लिखता हूँ, लिखोगे, लिखा था | धातु रूप आगे; काल रूप विचार में |
| प्रेरणार्थक (दूसरे से करवाना) | लिखवाना, करवाना | प्रेरणार्थक आगे |
तद्धित नाम-गुण की पूँछ — बचपन, सुनार — तद्धित आगे; धातु की सेना नहीं। उपसर्ग सिर — निर्दोष; धातु पर सिर अलग तह, उपसर्ग वाले विषय में झलक, आज जड़ नंगी।
संयुक्त क्रिया खा लिया — दो क्रिया, रूप विचार में। आज एक जड़।
जाँच: लिखा/ना/कर? कृदंत आगे। लिखता हूँ? रूप आगे। लिखवाना? प्रेरणार्थक आगे। जड़? आज लिख्।
9. दीवारें — नाम, गुण, पूँछ
| शब्द | क्या नहीं | क्या है |
|---|---|---|
| लेख | धातु | संज्ञा |
| लिखना | धातु | सूची-नाम / कृदंत आगे |
| लिखी चिट्ठी | धातु | कृदंत विशेषण-सा, कृदंत आगे |
| अच्छाई | धातु से | गुण + आई, तद्धित आगे |
पढ़ाई जड़ पढ़् के पास — कृदंत आगे, प्रत्यय वाले विषय में दरवाज़ा खुला था। अच्छाई जड़ अच्छा — तद्धित। पूँछ एक, जड़ पूछो।
जाँच: काम की जड़? धातु। नाम/गुण की पूँछ? तद्धित आगे। -ना सूची? क्रिया वाले विषय में + कृदंत आगे।
10. जड़ अटल, रूप घूमे
पुरुष मेल जड़ नहीं बदलता: मैं लिखता हूँ, तुम लिखते हो, वह लिखता है — लिख् एक। निपात ही भी नहीं: मैं ही लिखता हूँ — लिख् वही। लिंग लिखती — पट्टी रूप विचार में; जड़ लिख्।
मैं जाता हूँ। तुम जाते हो। गाँधी जाते हैं। — जड़ जा तीन वाक्य। चंद्रबिंदु।
विकारी क्रिया है, विकारी-अविकारी वाले विषय में। धातु वह जड़ जिससे विकार निकलता है। धातु खुद 9वाँ विकार नहीं — 8 कुर्सियों में क्रिया के नीचे की तह।
जाँच: हूँ/हो बदले? पुरुष। लिख् बदला? नहीं। ही चिपका? निपात; जड़ अटल।
11. वाक्य में 3 जड़ें
अरे! लिख् से लिखो; जाओ, करो; गाँधी करते हैं काम।
- अरे — विस्मयादिबोधक
- लिख् — आज की जड़, नंगी नाम
- लिखो — आज्ञा, जड़ लिख्, मध्यम तुम
- जाओ — आज्ञा, जड़ जा
- करो — आज्ञा, जड़ कर
- गाँधी करते हैं — कर + ते + हैं, अन्य आदर; चंद्रबिंदु
- काम — संज्ञा, कर्म की झलक क्रिया के भेद वाले विषय में
वाक्य गढ़ने में नंगी लिख् कम; पाठ में जड़ दिखाने को बैठी। बोलचाल: लिखो, जाओ, करो।
12. शब्द तोड़कर पूरा
लिख्
हलंत जड़। लिखना सूची। लिखा कृदंत आगे।
जा
स्वर जड़। गया रूप टेढ़ा, जड़ वही।
कर
काम की जड़। किया टेढ़ा। करवाना प्रेरणार्थक आगे।
हो / आ / खा
परिवार; क्रिया वाले विषय के 4 मूल के नीचे। कार्ड नहीं, काट वही।
-ना
सूची का कपड़ा, जड़ नहीं। कृदंत आगे पतला खुल सकता है।
ता / ती / ते / हूँ
रूप और पुरुष; जड़ अलग।
लिख्, जा, कर — तीन जड़ें; लिखना, जाना, करना — तीन कपड़े।
13. आम गलतियाँ
- लिखना को धातु लिखना। लिखना कपड़ा; लिख् जड़।
- लिखा को धातु। कृदंत आगे।
- गया को नई धातु। जा की टेढ़ी पंक्ति, धातु रूप आगे।
- लेख / काम को धातु। संज्ञा।
- धातु को 9वाँ विकार ठोकना। तह है, कुर्सी नहीं।
- करण (साधन वाला कारक) और कर जड़ एक करना।
- अरे को धातु। विस्मयादिबोधक।
- सब काल की तालिका यहीं रट लेना। धातु रूप और काल आगे।
- कृदंत-तद्धित की पूरी सेना आज खोल देना।
- लिख् बिना हलंत हमेशा ग़लत कहना — आज्ञा लिख भी चलती है; जड़ का स्कूल-चिह्न हलंत।
- हूँ से जड़ बदलना। पुरुष मेल; जड़ अटल।
जाँच: (1) जड़? धातु। (2) 3 कार्ड: लिख्, जा, कर। (3) -ना कपड़ा। (4) लिखा/गया/किया पूँछ या टेढ़ा रूप — आगे। (5) 9वाँ विकार नहीं।
14. इस विषय का सार
- धातु क्रिया की जड़ है। वाक्य के रूप उसी से निकलते हैं।
- कार्ड: लिख्, जा, कर। हलंत या छोटा रूप — अधूरा चिह्न, पूरा वाक्य-शब्द नहीं।
- -ना सूची का नाम; क्रिया की कुर्सी पहले खुल चुकी।
- लिखा, लिखना, लिखकर कृदंत आगे। हूँ-जाता धातु रूप और पुरुष/काल आगे।
- नया विकार नहीं। तद्धित नाम-गुण की पूँछ, अलग दरवाज़ा।
आगे कृदंत है।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. धातु क्या है? कार्ड के 3 लिखो। 9वाँ विकार है?
उत्तर
क्रिया का मूल रूप — जड़। लिख्, जा, कर। नहीं — तह है; कुर्सी क्रिया की, विकारी-अविकारी वाले विषय में।
2. लिखना धातु है? लिखा धातु है?
उत्तर
नहीं — लिखना सूची-नाम / कृदंत आगे; जड़ लिख्। नहीं — लिखा कृदंत आगे।
3. गया नई धातु है? करण और कर एक हैं?
उत्तर
नहीं — गया जा का टेढ़ा रूप, धातु रूप आगे; जड़ जा। नहीं — करण (साधन वाला कारक) आगे; कर आज की जड़।
4. “मैं लिखता हूँ” में जड़ हूँ है? अरे धातु है?
उत्तर
नहीं — जड़ लिख्; हूँ पुरुष-मेल। नहीं — अरे विस्मयादिबोधक वाले विषय में।
5. अच्छाई धातु से बनी है? सब काल आज रटने हैं?
उत्तर
नहीं — अच्छा गुण, आई तद्धित आगे; पढ़ाई धातु-पूँछ कृदंत आगे। नहीं — वर्तमान/आज्ञा झलक; काल और धातु रूप आगे।
विषय समाप्त · धातु
