Noteclass 9 10

धातु

Lesson 33 of 71

अंग 2 · शब्द विचार

पाठ 2.22

विषय शुरू · धातु

पुरुष वाले विषय में मेल खुला — हूँ, हो, है, हैं। क्रिया मुड़ी; जड़ नहीं बदली। जड़ = पेड़ की जड़ जैसी मूल। आज वह जड़: क्रिया का मूल रूप। कार्ड के 3: लिख्, जा, कर। नया विकार नहीं। क्रिया की कुर्सी क्रिया वाले विषय में; सूची का नाम अक्सर -ना — जाना, करना। आज हलंत या छोटा रूप — लिख्, जा, कर। लिखा-लिखना-लिखकर कृदंत आगे। पुरुष-वचन-काल से घूमना धातु रूप आगे। आज सिर्फ़ जड़।

1. जड़ क्या है

परिभाषा सीधी रखो: क्रिया का वह मूल रूप जिससे वाक्य के सारे क्रिया-रूप बनते हैं, धातु कहलाता है। धातु = जड़। पेड़ की डालियाँ रूप हैं; जड़ एक।

लिखता है, लिखी, लिखना, लिखकर — चार बातें, एक जड़ लिख्।

जाता हूँ, गया, जाना, जाकर — जड़ जा। गया टेढ़ा रूप; पूरी तालिका धातु रूप आगे।

करता है, किया, करना, करके — जड़ कर।

प्रश्न: इन रूपों के नीचे एक छोटा टुकड़ा एक जैसा है? वह टुकड़ा धातु। अकेला वाक्य में कम बैठता है — जा! आज्ञा छू सकती है; जाता है रूप है।

जाँच: काम की कुर्सी? क्रिया वाले विषय में। जड़? आज। पूँछ (शब्द के बाद का टुकड़ा) लिखा/ना/कर? कृदंत आगे। हूँ/जाता? पुरुष और रूप विचार में।

2. 3 कार्ड एक नज़र में

एक लिख् रटकर जा-कर गायब मत करो। 3 ढंग की जड़ें।

कार्ड जड़ का रंग सूची का -ना नाम
लिख् हलंत — व्यंजन पर विराम लिखना
जा स्वर पर खत्म जाना
कर छोटा रूप, काम की जड़ करना

हलंत वर्ण विचार में। स्कूल लिख् में हलंत इसलिए दिखाता है कि यह अधूरी ध्वनि है, वाक्य का पूरा शब्द नहीं। जा और कर कार्ड पर हलंत नहीं — सूची और स्कूल दोनों चलते हैं; अर्थ जड़ का है, वर्तनी का झगड़ा नहीं।

हो, आ, पी, दे, ले — परिवार; कार्ड 3 हैं। पढ़्, चल्, देख् — लिख् जैसे हलंत साथी।

जाँच: लिखना? सूची नाम। लिख्? जड़ आज। जाता? रूप। लिखा? कृदंत आगे।

3. कुर्सी से नाता — -ना वहाँ, जड़ आज

क्रिया वाले विषय में 4 मूल थे: होना, जाना, करना, खाना — कुर्सी और सूची-नाम। आज उन्हीं के नीचे की जड़।

विषय प्रश्न
क्रिया — परिचय काम/घटना/स्थिति कौन?
क्रिया के भेद कर्म है? सहायक कौन?
पुरुष हूँ हो है हैं किस पंक्ति?
धातु आज जड़ कौन-सी?

चार विषय एक नहीं। जाना क्रिया का सूची-नाम; जा धातु। खाना संज्ञा भी छू सकता है, क्रिया वाले विषय में; धातु खा। आज कार्ड पर खा नहीं; काट वही: नाम या जड़?

जाँच: वाक्य में काम? क्रिया। सूची लिखना? -ना नाम। लिख्? आज। कर्म? क्रिया के भेद वाले विषय में।

4. लिख् — हलंत जड़

कार्ड का पहला। ख पर हलंत — ध्वनि रुकती है, स्वर नहीं खुलता। पढ़्, चल्, बोल्, देख् इसी कतार।

गाँधी लिखते हैं। — वाक्य का रूप लिखते; जड़ लिख्। चंद्रबिंदु गाँधी में।

लिख! — आज्ञा; जड़ के पास। लिखता है — वर्तमान रूप, पुरुष वाले विषय में झलक।

लेख संज्ञा है, लिख् नहीं। लेखक में अक पूँछ — कृदंत आगे। लिखना में ना पूँछ — कृदंत आगे। आज सिर्फ़ लिख्।

लिख और लिख् कान पर पास। बिना हलंत लिख आज्ञा/रूप छू सकता है; स्कूल की जड़ हलंत से चिह्नित। वर्ण की तह हलंत वाले विषय में; आज चिह्न जड़ का है।

जाँच: हलंत जड़? लिख् सोचो। लेख नाम? संज्ञा। लिखा? कृदंत आगे।

5. जा — स्वर पर खत्म

कार्ड का दूसरा। आ स्वर पर जड़ रुकती है। आ, पी, हो, दे, ले साथी। हलंत नहीं दिखता।

तुम जाते हो। — जा + ते + हो; जड़ जा। मेल पुरुष वाले विषय में।

जा! — आज्ञा, जड़ के पास।

गया। — भूत इस जड़ पर टेढ़ा; याद का रूप, धातु रूप आगे। आज जड़ जा कहो, गया को नई धातु मत गढ़ो।

जाना सूची-नाम। जाती लिंग, रूप विचार में। जाकर कृदंत आगे। यात्रा संज्ञा; जा धातु से नाता गहरा, तद्धित/तत्सम आगे पतला — आज जड़ जा।

जाँच: जाता/गया/जाना? एक जड़ जा। गया अलग धातु? नहीं — रूप टेढ़ा, जड़ वही।

6. कर — काम की जड़

कार्ड का तीसरा। हिंदी की सबसे घिसी जड़। करना सूची-नाम। किया भूत टेढ़ा — जा/गया जैसी याद; नई धातु नहीं।

मैं काम करता हूँ। — कर + ता + हूँ।

कर! करो! कीजिए! — आज्ञा तीन सीढ़ी, आप-तुम वाले विषय में; जड़ कर एक।

किया, करके, करना — पूँछें कृदंत आगे।

काम संज्ञा। कर धातु। कारक ने/को रूप विचार में — कर से नाता नाम का नहीं, विभक्ति (ने, को, से) का। करण (साधन वाला कारक) अलग कुर्सी, कारक वाले विषय में; आज जड़ कर।

कराना, करवाना — दूसरे से करवाना; इस तह को प्रेरणार्थक कहते हैं — आगे। आज जड़; वह तह नहीं खोलनी।

जाँच: करता/किया/करना? जड़ कर। करण (साधन)? कारक आगे। करवाना? प्रेरणार्थक आगे।

7. अकेली जड़ वाक्य में

धातु अक्सर पूँछ माँगती है। आज्ञा में जड़ नंगी दिख सकती है: लिख। जा। कर। साधारण बात में रूप बैठता है: लिखता है। जाता हूँ।

नंगी / पास रूप / पूँछ
लिख। लिखता है। लिखना।
जा। जाते हो। जाना।
कर। करती है। करके।

आओ, आइए — मध्यम आज्ञा, पुरुष वाले विषय में; जड़ आ। आज 3 कार्ड; आ परिवार। विस्मयादिबोधक अरे अलग कुर्सी — अरे जड़ नहीं।

जाँच: एक अक्षर आज्ञा? जड़ के पास सोचो। है/ता/ना चिपका? रूप या कृदंत, जड़ नीचे।

8. तीन दरवाज़े — आज न खोलो

जड़ से तीन सेनाएँ निकलती हैं। नाम इतना कि दरवाज़ा दिखे; सूची रटना नहीं।

दरवाज़ा झलक कहाँ
कृदंत लिखा, लिखना, लिखकर कृदंत आगे
धातु रूप लिखता हूँ, लिखोगे, लिखा था धातु रूप आगे; काल रूप विचार में
प्रेरणार्थक (दूसरे से करवाना) लिखवाना, करवाना प्रेरणार्थक आगे

तद्धित नाम-गुण की पूँछ — बचपन, सुनार — तद्धित आगे; धातु की सेना नहीं। उपसर्ग सिर — निर्दोष; धातु पर सिर अलग तह, उपसर्ग वाले विषय में झलक, आज जड़ नंगी।

संयुक्त क्रिया खा लिया — दो क्रिया, रूप विचार में। आज एक जड़।

जाँच: लिखा/ना/कर? कृदंत आगे। लिखता हूँ? रूप आगे। लिखवाना? प्रेरणार्थक आगे। जड़? आज लिख्।

9. दीवारें — नाम, गुण, पूँछ

शब्द क्या नहीं क्या है
लेख धातु संज्ञा
लिखना धातु सूची-नाम / कृदंत आगे
लिखी चिट्ठी धातु कृदंत विशेषण-सा, कृदंत आगे
अच्छाई धातु से गुण + आई, तद्धित आगे

पढ़ाई जड़ पढ़् के पास — कृदंत आगे, प्रत्यय वाले विषय में दरवाज़ा खुला था। अच्छाई जड़ अच्छा — तद्धित। पूँछ एक, जड़ पूछो।

जाँच: काम की जड़? धातु। नाम/गुण की पूँछ? तद्धित आगे। -ना सूची? क्रिया वाले विषय में + कृदंत आगे।

10. जड़ अटल, रूप घूमे

पुरुष मेल जड़ नहीं बदलता: मैं लिखता हूँ, तुम लिखते हो, वह लिखता है — लिख् एक। निपात ही भी नहीं: मैं ही लिखता हूँ — लिख् वही। लिंग लिखती — पट्टी रूप विचार में; जड़ लिख्।

मैं जाता हूँ। तुम जाते हो। गाँधी जाते हैं। — जड़ जा तीन वाक्य। चंद्रबिंदु।

विकारी क्रिया है, विकारी-अविकारी वाले विषय में। धातु वह जड़ जिससे विकार निकलता है। धातु खुद 9वाँ विकार नहीं — 8 कुर्सियों में क्रिया के नीचे की तह।

जाँच: हूँ/हो बदले? पुरुष। लिख् बदला? नहीं। ही चिपका? निपात; जड़ अटल।

11. वाक्य में 3 जड़ें

अरे! लिख् से लिखो; जाओ, करो; गाँधी करते हैं काम।

  • अरे — विस्मयादिबोधक
  • लिख् — आज की जड़, नंगी नाम
  • लिखो — आज्ञा, जड़ लिख्, मध्यम तुम
  • जाओ — आज्ञा, जड़ जा
  • करो — आज्ञा, जड़ कर
  • गाँधी करते हैं — कर + ते + हैं, अन्य आदर; चंद्रबिंदु
  • काम — संज्ञा, कर्म की झलक क्रिया के भेद वाले विषय में

वाक्य गढ़ने में नंगी लिख् कम; पाठ में जड़ दिखाने को बैठी। बोलचाल: लिखो, जाओ, करो।

12. शब्द तोड़कर पूरा

लिख्

हलंत जड़। लिखना सूची। लिखा कृदंत आगे।

जा

स्वर जड़। गया रूप टेढ़ा, जड़ वही।

कर

काम की जड़। किया टेढ़ा। करवाना प्रेरणार्थक आगे।

हो / आ / खा

परिवार; क्रिया वाले विषय के 4 मूल के नीचे। कार्ड नहीं, काट वही।

-ना

सूची का कपड़ा, जड़ नहीं। कृदंत आगे पतला खुल सकता है।

ता / ती / ते / हूँ

रूप और पुरुष; जड़ अलग।

लिख्, जा, कर — तीन जड़ें; लिखना, जाना, करना — तीन कपड़े।

13. आम गलतियाँ

  • लिखना को धातु लिखना। लिखना कपड़ा; लिख् जड़।
  • लिखा को धातु। कृदंत आगे।
  • गया को नई धातु। जा की टेढ़ी पंक्ति, धातु रूप आगे।
  • लेख / काम को धातु। संज्ञा।
  • धातु को 9वाँ विकार ठोकना। तह है, कुर्सी नहीं।
  • करण (साधन वाला कारक) और कर जड़ एक करना।
  • अरे को धातु। विस्मयादिबोधक।
  • सब काल की तालिका यहीं रट लेना। धातु रूप और काल आगे।
  • कृदंत-तद्धित की पूरी सेना आज खोल देना।
  • लिख् बिना हलंत हमेशा ग़लत कहना — आज्ञा लिख भी चलती है; जड़ का स्कूल-चिह्न हलंत।
  • हूँ से जड़ बदलना। पुरुष मेल; जड़ अटल।

जाँच: (1) जड़? धातु। (2) 3 कार्ड: लिख्, जा, कर। (3) -ना कपड़ा। (4) लिखा/गया/किया पूँछ या टेढ़ा रूप — आगे। (5) 9वाँ विकार नहीं।

14. इस विषय का सार

  • धातु क्रिया की जड़ है। वाक्य के रूप उसी से निकलते हैं।
  • कार्ड: लिख्, जा, कर। हलंत या छोटा रूप — अधूरा चिह्न, पूरा वाक्य-शब्द नहीं।
  • -ना सूची का नाम; क्रिया की कुर्सी पहले खुल चुकी।
  • लिखा, लिखना, लिखकर कृदंत आगे। हूँ-जाता धातु रूप और पुरुष/काल आगे।
  • नया विकार नहीं। तद्धित नाम-गुण की पूँछ, अलग दरवाज़ा।

आगे कृदंत है।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. धातु क्या है? कार्ड के 3 लिखो। 9वाँ विकार है?

उत्तर

क्रिया का मूल रूप — जड़। लिख्, जा, कर। नहीं — तह है; कुर्सी क्रिया की, विकारी-अविकारी वाले विषय में।

2. लिखना धातु है? लिखा धातु है?

उत्तर

नहीं — लिखना सूची-नाम / कृदंत आगे; जड़ लिख्। नहीं — लिखा कृदंत आगे।

3. गया नई धातु है? करण और कर एक हैं?

उत्तर

नहीं — गया जा का टेढ़ा रूप, धातु रूप आगे; जड़ जा। नहीं — करण (साधन वाला कारक) आगे; कर आज की जड़।

4. “मैं लिखता हूँ” में जड़ हूँ है? अरे धातु है?

उत्तर

नहीं — जड़ लिख्; हूँ पुरुष-मेल। नहीं — अरे विस्मयादिबोधक वाले विषय में।

5. अच्छाई धातु से बनी है? सब काल आज रटने हैं?

उत्तर

नहीं — अच्छा गुण, आई तद्धित आगे; पढ़ाई धातु-पूँछ कृदंत आगे। नहीं — वर्तमान/आज्ञा झलक; काल और धातु रूप आगे।

विषय समाप्त · धातु