अंग 2 · शब्द विचार
पाठ 2.21
विषय शुरू · पुरुष — उत्तम, मध्यम, अन्य
निपात वाले विषय में बल खुला — ही, भी, तो, तक। ही क्रिया नहीं घुमाता। आज वह काट जो क्रिया को घुमाए: बात किस ओर से है? कार्ड के 3: मैं, तुम, वह। उत्तम बोलने वाला, मध्यम सुनने वाला, अन्य बाकी। नया विकार नहीं। पुरुषवाचक भेद सर्वनाम के भेद वाले विषय में नाम पा चुका; आप-तुम सीढ़ी आप-तुम वाले विषय में। आज मेल — हूँ, हो, है, हैं। काल और धातु रूप आगे। आज 3 कुर्सियाँ और वर्तमान की झलक।
1. कुर्सी — तीन ओर
परिभाषा सीधी रखो: बोलने वाला उत्तम पुरुष है, सुनने वाला मध्यम, जिसकी बात हो और जो बोलने-सुनने वाला न हो वह अन्य पुरुष है। पुरुष यहाँ “आदमी” नहीं — वाक्य की दिशा। क्रिया इन्हीं तीन से मेल खाती है।
मैं चलता हूँ। — बोलने वाला, उत्तम।
तुम चलते हो। — सुनने वाला, मध्यम।
वह चलता है। — तीसरा, अन्य।
प्रश्न: कर्ता कौन-सी ओर खड़ा है? मैं/हम? उत्तम। तू/तुम/आप? मध्यम। वह/वे या राम/गाँधी? अन्य। चंद्रबिंदु गाँधी में।
जाँच: बोल रहा है? उत्तम। सुन रहा है? मध्यम। नाम/संकेत तीसरा? अन्य।
2. 3 कार्ड एक नज़र में
एक मैं रटकर तुम-वह गायब मत करो। 3 शब्द, 3 दिशा।
| कार्ड | पुरुष | क्रिया झलक |
|---|---|---|
| मैं | उत्तम | मैं जाता हूँ / जाती हूँ |
| तुम | मध्यम | तुम जाते हो / जाती हो |
| वह | अन्य | वह जाता है / जाती है |
हम उत्तम का वचन साथी। आप मध्यम का आदर। वे अन्य का वचन/आदर। कार्ड 3 हैं; परिवार बड़ा है। सीढ़ी तू-तुम-आप आप-तुम वाले विषय में; आज मेल।
जाँच: हूँ? मैं/उत्तम। हो? तुम/मध्यम। है? तू या वह। हैं? हम, आप, वे।
3. भेद से नाता — नाम वहाँ, मेल आज
सर्वनाम वाले विषय में कुर्सी पहचानी। सर्वनाम के भेद वाले विषय में वह कुर्सी पुरुषवाचक कहलाई। आज प्रश्न दूसरा: क्रिया किस पंक्ति पर बैठे?
| विषय | प्रश्न |
|---|---|
| सर्वनाम — परिचय | नाम की जगह कौन? |
| सर्वनाम के भेद | पुरुषवाचक कौन-सा भेद? |
| आप, तुम, तू | मध्यम के 3 ढंग? |
| पुरुष आज | क्रिया का मेल कौन-सी पंक्ति? |
चार विषय एक नहीं। मैं हमेशा पुरुषवाचक उत्तम; आज हूँ उससे चिपकता है।
जाँच: जगह? सर्वनाम। भेद-नाम? पुरुषवाचक। आदर? आप-तुम वाले विषय में। हूँ/हो/है? आज।
4. उत्तम — मैं, हम
कार्ड का पहला। बोलने वाला। नाम लिखे बिना चलता है — बोलने वाला खुद खड़ा है।
मैं गाँधी नहीं हूँ, पाठक हूँ। — मैं उत्तम; गाँधी संज्ञा, अन्य की कुर्सी पर नाम। चंद्रबिंदु।
हम चलते हैं। — अनेक बोलने वाले, या एक का आदर-हम।
मैं लिंग नहीं बदलता। लड़का: मैं जाता हूँ। लड़की: मैं जाती हूँ। मैं वही; लिंग क्रिया पर — रूप विचार में। वचन मैं → हम। हम आदर में बोलने वाले को भी छू सकता है, सर्वनाम वाले विषय में झलक थी; आज: हम की क्रिया अक्सर हैं/जाते हैं, मैं वाली हूँ नहीं।
मुझे, मेरा — मैं का रूप, विकारी-अविकारी वाले विषय में। पुरुष वही उत्तम; नई कुर्सी नहीं।
जाँच: बोलने वाला? उत्तम। हूँ? मैं। हैं/जाते हैं? हम सोचो, आप/वे भी हैं माँगते हैं — कर्ता पूछो।
5. मध्यम — तुम; सीढ़ी नाम
कार्ड का दूसरा। सुनने वाला। तू, तुम, आप एक पुरुष — मध्यम। 3 ढंग आप-तुम वाले विषय में; आज 3 मेल, ताकि सीढ़ी टूटे नहीं।
| शब्द | वर्तमान झलक | आज्ञा |
|---|---|---|
| तू | तू आता है / आती है | आ। जा। |
| तुम | तुम आते हो / आती हो | आओ। जाओ। |
| आप | आप आते हैं / आती हैं | आइए। जाइए। |
तुम एक मित्र = हो। आप एक गुरु = हैं — आदर-मेल, गिनती एक हो तब भी। तू अनेक नहीं। पूरा सामाजिक रंग आप-तुम वाले विषय में; आज पंक्तियाँ। आप आता है ग़लत। तू आते हो ग़लत।
तुम्हारा, आपको — रूप; पुरुष मध्यम वही।
जाँच: है/आ? तू। हो/आओ? तुम। हैं/इए? आप। तीनों मध्यम।
6. अन्य — वह; संज्ञा कर्ता
कार्ड का तीसरा। न बोलने वाला, न सुनने वाला — बात का तीसरा। वह, वे। राम, सीता, गाँधी जब कर्ता हों — क्रिया अन्य की पंक्ति पर: जाता है, जाती है, जाते हैं। संज्ञा अन्य पुरुष नहीं कहलाती; क्रिया का मेल अन्य जैसा चलता है।
राम आता है। वह आता है। — एक पंक्ति, दो कर्ता-शब्द।
गाँधी बोलते हैं। वे बोलते हैं। — आदर/वचन; चंद्रबिंदु।
यह किताब मोटी है। — यह निश्चयवाचक छू सकता है, सर्वनाम के भेद वाले विषय में; क्रिया है अन्य-सी पंक्ति।
यह/वह सामने खड़े पर भी अन्य रह सकते हैं — सर्वनाम वाले विषय में। तुम को अन्य मत लिखो। वे आ रहे हैं — सुनने वाला नहीं, तीसरा आदर/वचन। आप आ रहे हैं — सुनने वाला, मध्यम। बिना संबोधन के तीसरे पर आप मत ठोको।
जाँच: राम/वह? अन्य मेल, है/हैं। तुम? मध्यम, हो। आप सामने? मध्यम, हैं। वे तीसरे? अन्य, हैं।
7. क्रिया का मेल — वर्तमान झलक
सहायक हूँ, हो, है, हैं पुरुष दिखाते हैं। मुख्य जाता/जाती/जाते लिंग-वचन भी छूते हैं — रूप विचार में। आज पंक्ति पुरुष की। सब काल, सब धातु — काल वाले विषयों में और धातु रूप आगे। धातु जड़ आगे।
| कर्ता | पुरुष | झलक |
|---|---|---|
| मैं | उत्तम, एक | जाता हूँ / जाती हूँ |
| हम | उत्तम, अनेक/आदर | जाते हैं |
| तू | मध्यम, एक | जाता है / जाती है |
| तुम | मध्यम | जाते हो / जाती हो |
| आप | मध्यम, आदर | जाते हैं / जाती हैं |
| वह / राम | अन्य, एक | जाता है / जाती है |
| वे / गाँधी जी | अन्य, अनेक/आदर | जाते हैं |
है तीन जगह बैठ सकता है: तू, वह, संज्ञा-एक। कर्ता पूछो, है से अकेला पुरुष मत बाँधो। हैं तीन जगह: हम, आप, वे। वही गाँठ।
गया, गई, गए — भूत की झलक, काल आगे। आज इतना: पुरुष बदले तो सहायक/आज्ञा की पंक्ति बदले। निपात ही पंक्ति नहीं बदलता — मैं ही जाता हूँ, तुम ही जाते हो।
जाँच: हूँ सिर्फ़ उत्तम एक। हो मध्यम तुम। है तू या अन्य-एक। हैं हम/आप/वे — कर्ता खोलो।
8. वचन और आदर — तीन उलझनें
गिनती और सम्मान एक सूची में मत घोलो। वचन रूप विचार में पूरा; आज पुरुष से टकराव।
| उलझन | याद |
|---|---|
| आप एक गुरु | मध्यम; क्रिया हैं — आदर, गिनती एक नहीं |
| वे एक आदर वाला | अन्य; क्रिया हैं — आदर, मध्यम नहीं |
| हम — एक बोलने वाला, आदर की शैली | उत्तम; क्रिया हैं — शैली, तुम नहीं |
तीनों हैं माँग सकते हैं। पुरुष अलग। कर्ता का शब्द पढ़ो, हैं देखकर एक कुर्सी मत ठोको। लड़का/लड़के वचन रूप विचार में; मैं/हम पुरुष+वचन आज की जोड़।
जाँच: हैं? तीन उम्मीदवार — हम, आप, वे। कौन बोल/सुन/तीसरा? पुरुष खुलता है।
9. लिंग क्रिया पर
मैं, तुम, आप, वह लिखा अक्सर एक। लिंग विशेष्य/कर्ता के साथ क्रिया पर आता है: तुम आते हो / तुम आती हो। पुरुष वही मध्यम। पूरा लिंग रूप विचार में। आज: पुरुष कर्ता की दिशा है, लिंग क्रिया की पट्टी — दो काट, एक वाक्य।
मैं आता हूँ। मैं आती हूँ। — उत्तम एक; लिंग क्रिया।
वह आता है। वह आती है। — अन्य एक; लिंग क्रिया।
विशेषण अच्छी लड़की — विशेषण विकारी। मैं अच्छी नहीं बनता; मैं सर्वनाम अटल लिंग पर। दीवार विकारी-अविकारी वाले विषय में।
जाँच: जाता/जाती? लिंग, रूप विचार में। हूँ/हो/है? पुरुष आज।
10. दीवारें — निश्चयवाचक, निज, आज्ञा
| वाक्य | पुरुष मेल | और क्या |
|---|---|---|
| वह पहाड़ दूर है। | अन्य-सी पंक्ति, है | वह निश्चयवाचक छू सकता है |
| राम आप ही आ गए। | अन्य — राम कर्ता, गए | आप निज; ही निपात |
| आप आइए। | मध्यम आदर | आज्ञा; सीढ़ी आप-तुम वाले विषय में |
आओ क्रिया है, विस्मयादिबोधक नहीं। छिपा कर्ता: आइए = आप आइए — मध्यम। आ = तू आ। पुरुष छिपे तो भी पंक्ति बता देगी।
जाँच: कर्ता राम? अन्य मेल। कर्ता आप संबोधन? मध्यम। आप ही + राम? निज, मेल राम पर।
11. वाक्य में सब कुर्सियाँ
अरे! मैं हूँ, तुम हो; गाँधी हैं, और वह चुप है।
- अरे — विस्मयादिबोधक
- मैं हूँ — उत्तम, हूँ
- तुम हो — मध्यम, हो
- गाँधी हैं — संज्ञा कर्ता, अन्य आदर-मेल; चंद्रबिंदु
- और — समुच्चय अव्यय
- वह है — अन्य, एक
आप आइए, तू आ मत। — दोनों मध्यम, दो सीढ़ी, दो मेल; एक व्यक्ति पर एक साथ मत घोलो — आप-तुम वाले विषय में।
12. शब्द तोड़कर पूरा
मैं / हम
उत्तम। हूँ / हैं। लिंग क्रिया पर।
तू / तुम / आप
मध्यम। है / हो / हैं। सीढ़ी आप-तुम वाले विषय में।
वह / वे
अन्य। है / हैं। वे आदर तीसरे का।
राम / गाँधी
संज्ञा; क्रिया अन्य पंक्ति। पुरुषवाचक शब्द नहीं।
हूँ हो है हैं
सहायक मेल। काल आगे पतला न खोलो — आज पंक्ति।
जाता जाती जाते
लिंग-वचन रूप विचार में; पुरुष आज की दिशा।
मैं जाता हूँ, तुम जाते हो, गाँधी जाते हैं। — उत्तम, मध्यम, अन्य आदर। चंद्रबिंदु।
13. आम गलतियाँ
- आप आता है। आदर-मेल हैं/इए।
- तुम आइए, तू आते हो — सीढ़ी×मेल मिलावट।
- मैं जाते हैं। मैं → हूँ; हम → हैं।
- हैं देखकर हमेशा आप लिखना। हम और वे भी हैं।
- है देखकर हमेशा वह। तू भी है; राम भी है।
- तुम को अन्य लिखना। तुम मध्यम।
- वे आ रहे हैं को मध्यम आप बनाना बिना संबोधन के।
- राम को पुरुषवाचक सर्वनाम लिखना। संज्ञा; मेल अन्य।
- पुरुषवाचक भेद और आज का मेल एक विषय समझना।
- सब काल की तालिका यहीं रट लेना। काल और धातु रूप आगे।
- लिंग को पुरुष लिखना। जाती लिंग; हूँ पुरुष।
- ही से पंक्ति बदलना। निपात अटल; मैं ही जाता हूँ।
जाँच: (1) बोल/सुन/तीसरा? 3 पुरुष। (2) हूँ उत्तम एक, हो तुम, है तू/वह/संज्ञा-एक, हैं हम/आप/वे। (3) सीढ़ी मध्यम के अंदर। (4) संज्ञा कर्ता → अन्य मेल। (5) काल आगे।
14. इस विषय का सार
- उत्तम बोलने वाला — मैं, हम। मध्यम सुनने वाला — तू, तुम, आप। अन्य तीसरा — वह, वे; संज्ञा कर्ता का मेल यहीं।
- कार्ड: मैं, तुम, वह। नया विकार नहीं।
- मेल झलक: हूँ, हो, है, हैं। आदर आप/वे/हम हैं छू सकते हैं — कर्ता पूछो।
- सीढ़ी आप-तुम वाले विषय में। पुरुषवाचक भेद सर्वनाम के भेद वाले विषय में। लिंग-काल रूप विचार में।
- धातु और धातु रूप आगे। निपात मेल नहीं घुमाता।
आगे धातु है।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. उत्तम, मध्यम, अन्य क्या हैं? कार्ड के 3 लिखो। नया विकार है?
उत्तर
बोलने वाला, सुनने वाला, तीसरा — वाक्य की 3 दिशाएँ। मैं, तुम, वह। नहीं — नया विकार नहीं; क्रिया का मेल इन्हीं से।
2. “आप आता है” ठीक है? “मैं जाते हैं” ठीक है?
उत्तर
नहीं — आप मध्यम आदर, आते हैं/आइए। नहीं — मैं उत्तम एक, जाता हूँ/जाती हूँ; हैं हम/आप/वे।
3. राम अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम है? तुम अन्य पुरुष है?
उत्तर
नहीं — राम संज्ञा; क्रिया अन्य पंक्ति पर (आता है) चलती है। नहीं — तुम मध्यम; अन्य वह/वे/संज्ञा-तीसरा।
4. हैं हमेशा आप है? तू और वह दोनों है माँगते हैं तो एक पुरुष हैं?
उत्तर
नहीं — हैं हम, आप, वे — कर्ता पूछो। नहीं — तू मध्यम एक, वह अन्य एक; सहायक है एक, दिशा दो।
5. जाती हूँ में जाती पुरुष है? सब काल आज रटने हैं? “राम आप ही आ गए” में मेल आप पर है?
उत्तर
नहीं — जाती लिंग, हूँ पुरुष (उत्तम)। नहीं — वर्तमान झलक आज; काल और धातु रूप आगे। नहीं — कर्ता राम, अन्य मेल; आप निज, ही निपात।
विषय समाप्त · पुरुष — उत्तम, मध्यम, अन्य
