अंग 2 · शब्द विचार
पाठ 2.19
विषय शुरू · अव्यय
विकारी-अविकारी वाले विषय में काट खुली — शब्द मुड़ा या नहीं। आज उस न मुड़ने वाले परिवार का घर-नाम। कार्ड के 4: धीरे, के सामने, और, वाह। ये 4 शब्द 4 कुर्सियों के हैं — क्रिया विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक। कुर्सियाँ वहाँ खुल चुकीं; आज हिसाब: ये सब अव्यय कहलाते हैं। निपात ही-भी पड़ोसी आगे। अव्ययीभाव समास आगे। आज घर।
1. कुर्सी — न बदलने वाले का नाम
परिभाषा सीधी रखो: जो शब्द लिंग, वचन और कारक के कारण अपना रूप न बदले, वह अव्यय है — रूप न बदलने वाला। अ = नहीं; व्यय = बदलना। अव्यय = जो मुड़े नहीं। लड़का धीरे, लड़की धीरे, बच्चों से धीरे — धीरे एक। यह नया विकार नहीं। 8 में जो 4 अविकारी हैं, उनका साझा नाम आज।
राम धीरे बोला। सीता धीरे बोली। बच्चे धीरे बोले। — धीरे एक।
घर के सामने। नदियों के सामने। — के सामने एक।
राम और श्याम। गीता और सीता। — और एक।
वाह! फूल। वाह! बात। — वाह एक।
प्रश्न: लिंग-वचन-कारक घुमाओ। शब्द वैसा का वैसा? वैसा — अव्यय सोचो। मुड़ा — विकारी, घर यह नहीं।
जाँच: अटल? अव्यय। मुड़ा? संज्ञा-सर्वनाम-विशेषण-क्रिया वाले विषयों में। काट विकारी-अविकारी वाले विषय में; नाम आज।
2. 4 कार्ड — 4 परिवार
एक धीरे रटकर बाकी तीन गायब मत करो। 4 शब्द, 4 कुर्सियाँ, एक घर।
| कार्ड | कुर्सी | काम |
|---|---|---|
| धीरे | क्रिया विशेषण | काम का ढंग |
| के सामने | संबंधबोधक | संज्ञा के बाद रिश्ता |
| और | समुच्चयबोधक | जोड़, पुल |
| वाह | विस्मयादिबोधक | अचानक भाव |
कुर्सी पूछो, फिर घर लिखो। धीरे अव्यय भी है, क्रिया विशेषण भी — दो तहें, एक शब्द। घर आज; कुर्सी अपने विषय में।
जाँच: ढंग? धीरे। रिश्ता? के सामने। पुल? और। झटका? वाह। चारों अव्यय।
3. अविकारी से नाता
दो विषय एक नहीं। विकारी-अविकारी वाले विषय में प्रश्न था: मुड़ा? हाँ — विकारी। नहीं — अविकारी। आज प्रश्न: उस अटल परिवार का नाम? अव्यय।
| विषय | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| विकारी और अविकारी | रूप मुड़ा? | हाँ / नहीं — दो खेमे |
| अव्यय आज | अटल का घर-नाम? | अव्यय; 4 कुर्सियाँ अंदर |
अविकारी = खेमा। अव्यय = उसी खेमे का व्याकरण-नाम — रूप न बदलने वाला। स्कूल दोनों शब्द चलाती है; एक काट, एक नाम। 4 विकारी अव्यय नहीं — लड़का, मैं, अच्छा, जाना घर के बाहर।
जाँच: मुड़ा या नहीं? विकारी-अविकारी वाले विषय में। अटल का नाम? आज। संज्ञा अव्यय? नहीं।
4. क्रिया विशेषण — ढंग का अव्यय
कार्ड का पहला। काम कैसे, कब, कहाँ, कितना — कुर्सी क्रिया विशेषण वाले विषय में। आज: ये शब्द अव्यय हैं, रूप नहीं माँगते।
धीरे, जल्दी, आज, कल, यहाँ, वहाँ, बहुत, नहीं।
वह धीरे चलता है। वह धीरे चलती है। वे धीरे चलते हैं। — धीरे एक।
धीरे ≠ धीमी। धीरे अव्यय, क्रिया पर। धीमी विशेषण, चाल संज्ञा पर — विकारी। धीरे को धीमी करके क्रिया मत चढ़ाओ। अच्छा गाता है कभी सरक सकता है; मूल अव्यय आज, कल, यहाँ, धीरे हैं। कुर्सी वहाँ; घर आज।
क्यों काम का प्रश्न छू सकता है — क्यों रोए? क्योंकि पुल है, समुच्चयबोधक वाले विषय में। क्यों और क्योंकि एक मत लिखो।
जाँच: काम का ढंग अटल? क्रिया विशेषण अव्यय। धीमी चाल? विशेषण, घर यह नहीं।
5. संबंधबोधक — रिश्ते का अव्यय
कार्ड का दूसरा। के सामने, के बाद, के बिना — कुर्सी संबंधबोधक वाले विषय में। आज: जोड़ अव्यय है; साथ वाला नाम मुड़ सकता है।
लड़के के सामने। मेरे सामने। गाँधी के बिना। — चंद्रबिंदु गाँधी में।
के सामने / के बिना — जोड़ एक। लड़के, मेरे — सर्वनाम/संज्ञा विकारी।
मैं के सामने नहीं — मेरे सामने। बदलता संकेत, जोड़ नहीं। के बिना संबंधबोधक; निर्जल में निर् उपसर्ग — उपसर्ग वाले विषय में। दो तहें, एक “बिना” का रंग।
जाँच: जोड़ अटल, नाम मुड़ा? संबंधबोधक अव्यय। मेरे विकारी, के सामने आज।
6. समुच्चयबोधक — पुल का अव्यय
कार्ड का तीसरा। और, लेकिन, क्योंकि, इसलिए — कुर्सी समुच्चयबोधक वाले विषय में। आज: पुल अव्यय है, लिंग नहीं माँगता।
राम और श्याम आए। सीता और गीता आईं। — और एक।
आया, लेकिन रुका। आई, लेकिन रुकी। — लेकिन एक।
और जोड़ अव्यय। और दूध दो — यहाँ और ज्यादा छू सकता है, क्रिया विशेषण/विशेषण की आदत; वाक्य पूछो। पर जगह कारक रूप विचार में; पर विरोध पुल, आज के घर में। एक पर, दो कुर्सियाँ — विकारी-अविकारी वाले विषय में दीवार थी; घर आज पुल वाले पर को रखता है।
जाँच: दो बातें जुड़ी, शब्द अटल? समुच्चय अव्यय। और दूध? वाक्य पूछो, पुल मत ठोको बिना जोड़ के।
7. विस्मयादिबोधक — झटके का अव्यय
कार्ड का चौथा। अरे, वाह, हे, आह — कुर्सी विस्मयादिबोधक वाले विषय में। आज: झटका अव्यय है। वाह → वाही नहीं।
वाह! लड़का आया। वाह! लड़की आई। — वाह एक।
हे राम। हे माता। — हे एक; राम/माता संज्ञा।
आ! शब्द अव्यय; आ स्वर वर्ण विचार में। वाह झटका; अयोगवाह अं-अः अलग। जाओ क्रिया है, अव्यय मात्र नहीं — आज्ञा क्रिया वाले विषय में। हाँ स्वीकृति यहाँ अव्यय-सी बैठ सकती है; ही-भी निपात आगे, आज झटका-घर।
जाँच: अचानक भाव, शब्द अटल? विस्मयादिबोधक अव्यय। वाही? नहीं। आ चार्ट? वर्ण।
8. निपात — पड़ोसी, 5वाँ विकार नहीं
ही, भी, तो, तक बल देते हैं। रूप नहीं घुमाते; अव्यय के पास बैठते हैं। 8 कुर्सियों में 9वीं नहीं। कुछ किताबें इन्हें अव्यय की सूची में घोल देती हैं। इस घर की सख्त दीवार: 4 कुर्सियाँ आज; निपात पड़ोसी, सेना आगे।
| शब्द | आज? | घर |
|---|---|---|
| धीरे, और, वाह, के सामने | हाँ — 4 कुर्सियाँ | अव्यय |
| ही, भी, तो, तक | नाम, सेना नहीं | निपात आगे |
राम ही आया — ही बल, अव्यय-कुर्सी नहीं खोलनी आज। राम और श्याम — और पुल, आज। दोनों अटल दिखें तो भी काम पूछो।
जाँच: बल? निपात आगे। ढंग/रिश्ता/पुल/झटका? आज। 9वाँ विकार? नहीं।
9. जो मुड़ता दिखे — दीवार
3 धोखे। अव्यय की सूची पर हर अटल शब्द मत चिपकाओ।
| दिखा | कुर्सी | घर |
|---|---|---|
| धीरे → धीमी | धीमी विशेषण | विकारी; धीरे अव्यय अलग |
| लाल गेंद / लाल गेंदें | विशेषण, कभी अटल | वर्ग विकारी — अव्यय नहीं |
| अच्छा गाता है | कभी ढंग, कभी गुण | वाक्य पूछो; मूल अव्यय धीरे/यहाँ |
चार किताबें — चार अक्सर अटल, फिर भी संख्या विशेषण, विशेषण वाले विषय में। अव्यय तब जब कुर्सी 4 अविकारी में से हो, या घर का साफ़ ढंग/रिश्ता/पुल/झटका हो। सूची रटकर लाल को अव्यय मत लिखो।
जाँच: अटल दिखे तो कुर्सी पूछो। गुण नाम पर? विशेषण। ढंग क्रिया पर? अव्यय।
10. स्वयं, खुद, आप — सर्वनाम
स्वयं, खुद अक्सर नहीं मुड़ते। आप निज में भी अक्सर स्थिर। फिर भी वर्ग सर्वनाम है, अव्यय नहीं — सर्वनाम के भेद वाले विषय में। विकारी परिवार का सदस्य कभी अटल हो; घर नहीं बदलता।
गाँधी स्वयं चले। — स्वयं निज; गाँधी संज्ञा; चंद्रबिंदु।
आप बैठिए। — आप आदर, आप-तुम वाले विषय में; अव्यय नहीं।
मुझे, मेरा — मैं विकारी। अव्यय मुझे नहीं बनता। तेरा/तुम्हारा सीढ़ी आप-तुम वाले विषय में, घर यह नहीं।
जाँच: नाम की जगह? सर्वनाम, चाहे रूप कम घूमे। ढंग/पुल/झटका/रिश्ता? अव्यय।
11. अव्ययीभाव — समास आगे
यथाशक्ति, प्रतिदिन, यथासंभव — जोड़ ऐसे बैठते हैं कि पूरा शब्द अव्यय जैसा व्यवहार करे: लिंग-वचन कम माँगे। व्याकरण इस जोड़ को अव्ययीभाव समास कहती है। आज सिर्फ़ नाम, ताकि अव्यय और समास एक न हो जाएँ।
| अव्यय आज | अव्ययीभाव | |
|---|---|---|
| क्या | एक शब्द / जोड़-कुर्सी | दो खंडों का समास |
| उदाहरण | धीरे, और, वाह | यथाशक्ति, प्रतिदिन |
| विषय | आज | समास आगे |
प्रतिदिन में प्रति जैसा सिर दिखे तो उपसर्ग मत ठोको बिना पूछे; समास का भेद आगे। आज घर के 4 कार्ड। विद्यालय समास है, अव्यय नहीं — रूढ़-यौगिक वाले विषय में काट।
जाँच: धीरे एक शब्द अव्यय? आज। यथाशक्ति जोड़-समास? आगे। दोनों को एक मत लिखो।
12. पद रहता है
अव्यय वाक्य में पद है — शब्द और वाक्य वाले विषय में। रूप न बदले तो भी बैठा हुआ शब्द पद है। पद परिचय वाक्य विचार में लेखा माँगेगा: धीरे — क्रिया विशेषण अव्यय; और — समुच्चय अव्यय। आज: घर का नाम पद से नहीं हटता।
गाँधी धीरे बोले और सब चुप, वाह!
गाँधी — संज्ञा पद, विकारी। धीरे — अव्यय पद। बोले — क्रिया। और — अव्यय पद। वाह — अव्यय पद। चंद्रबिंदु।
13. वाक्य में सब कुर्सियाँ
अरे! छोटे गाँधी धीरे बोले और सत्य के बिना नहीं चले, वाह!
- अरे, वाह — विस्मयादिबोधक अव्यय
- छोटे — विशेषण, विकारी — घर यह नहीं
- गाँधी — संज्ञा; चंद्रबिंदु
- धीरे — क्रिया विशेषण अव्यय
- बोले / चले — क्रिया, विकारी
- और — समुच्चय अव्यय
- के बिना — संबंधबोधक अव्यय
- नहीं — निषेध, क्रिया विशेषण अव्यय
राम ही आया, लेकिन रुका। — ही निपात आगे; लेकिन अव्यय आज। दोनों अटल; काम अलग।
14. शब्द तोड़कर पूरा
धीरे / आज / यहाँ / नहीं
क्रिया विशेषण अव्यय। धीमी विशेषण।
के सामने / के बाद / के बिना
संबंधबोधक अव्यय। मेरे विकारी।
और / लेकिन / क्योंकि / इसलिए
समुच्चय अव्यय। और दूध वाक्य पूछो।
अरे / वाह / हे / आह
विस्मयादिबोधक अव्यय। वाही नहीं।
ही / भी / तो / तक
निपात आगे। आज 4 कुर्सियों में नहीं।
यथाशक्ति / प्रतिदिन
अव्ययीभाव समास आगे।
स्वयं / खुद
सर्वनाम; अव्यय नहीं।
लड़का / अच्छा / जाता
विकारी। अव्यय घर के बाहर।
गाँधी के बिना धीरे मत बोलो, और वाह मत करो। — के बिना, धीरे, और, वाह चार अव्यय; गाँधी संज्ञा। चंद्रबिंदु।
15. आम गलतियाँ
- अव्यय और विकारी-अविकारी एक विषय समझना। काट वहाँ, नाम आज।
- 4 विकारी को अव्यय लिखना। लड़का/मैं/अच्छा/जाना बाहर।
- धीरे को धीमी करके क्रिया पर चढ़ाना।
- लाल न मुड़ा तो अव्यय लिखना। विशेषण का वर्ग विकारी।
- स्वयं/खुद को अव्यय लिखना। सर्वनाम।
- ही-भी को 5वाँ विकार या आज की 5वीं कुर्सी बनाना। निपात आगे।
- यथाशक्ति को आज का कार्ड लिखना। समास आगे।
- वाह को वाही। विस्मयादिबोधक अव्यय अटल।
- मैं के सामने। मेरे सामने; जोड़ अव्यय, मैं विकारी।
- अव्यय को पद न मानना। रूप न बदले, पद रहता है।
- क्यों और क्योंकि एक। प्रश्न क्रिया विशेषण; पुल समुच्चय।
जाँच: (1) लिंग-वचन-कारक से न मुड़ा, 4 अविकारी कुर्सियों में? अव्यय। (2) धीरे ढंग, के सामने रिश्ता, और पुल, वाह झटका। (3) काट अलग विषय। (4) निपात/समास आगे। (5) स्वयं सर्वनाम।
16. इस विषय का सार
- अव्यय वह शब्द है जिसका रूप लिंग, वचन, कारक से नहीं बदलता।
- घर में 4 कुर्सियाँ — क्रिया विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक। कार्ड: धीरे, के सामने, और, वाह।
- अविकारी खेमा है, अव्यय उस खेमे का नाम। दो विषय एक नहीं।
- ही-भी निपात आगे। यथाशक्ति अव्ययीभाव समास आगे। स्वयं सर्वनाम।
- अव्यय भी वाक्य में पद है।
आगे निपात है।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. अव्यय क्या है? कार्ड के 4 लिखो। यह विकारी-अविकारी वाला विषय है?
उत्तर
जो शब्द लिंग-वचन-कारक से रूप न बदले। धीरे, के सामने, और, वाह। नहीं — वह काट (मुड़ा या नहीं); आज अटल परिवार का नाम।
2. धीरे को धीमी करके क्रिया पर चढ़ाएँ? लड़का वाह / लड़की वाह — वाह मुड़ा?
उत्तर
नहीं — धीरे अव्यय; धीमी विशेषण। नहीं — वाह अव्यय, एक; वाही नहीं।
3. “मेरे सामने” में अव्यय कौन है? स्वयं अव्यय है?
उत्तर
के सामने — संबंधबोधक अव्यय; मेरे सर्वनाम विकारी। नहीं — स्वयं निज सर्वनाम, सर्वनाम के भेद वाले विषय में; रूप कम घूमे तो भी घर सर्वनाम।
4. ही-भी आज की 5वीं कुर्सी हैं? यथाशक्ति आज का कार्ड है?
उत्तर
नहीं — निपात पड़ोसी, निपात आगे; 9वाँ विकार नहीं। नहीं — यथाशक्ति अव्ययीभाव समास आगे; आज धीरे, के सामने, और, वाह।
5. जोड़ वाला और अव्यय है? “और दूध दो” में और वही कुर्सी है? अव्यय पद नहीं?
उत्तर
हाँ — राम और श्याम वाला और समुच्चय अव्यय। नहीं — और दूध में ज्यादा छू सकती है; वाक्य पूछो। नहीं — अव्यय भी पद है, शब्द और वाक्य वाले विषय में।
विषय समाप्त · अव्यय
