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आप, तुम, तू

Lesson 28 of 71

अंग 2 · शब्द विचार

पाठ 2.17

विषय शुरू · आप, तुम, तू

प्रत्यय वाले विषय में पूँछ खुली — आई, पन, वाला, इक। पूँछ = शब्द के बाद का टुकड़ा। आज वापस सर्वनाम: सुनने वाले के 3 सामाजिक रूप। कार्ड: आप, तुम, तू। तीनों मध्यम पुरुष हैं — सर्वनाम और सर्वनाम के भेद वाले विषयों में कुर्सी खुल चुकी। फर्क आदर और निकटता का है, नया विकार नहीं। क्रिया का पूरा मेल पुरुष वाले विषय में। आप जब स्वयं के अर्थ में हो — वह निज है, सर्वनाम के भेद वाले विषय में। विकारी-अविकारी आगे। आज आदर की सीढ़ी।

1. कुर्सी — सामाजिक रूप

परिभाषा सीधी रखो: तू, तुम, आप एक ही काम करते हैं — सुनने वाले की जगह बैठते हैं — पर आदर और निकटता अलग बाँधते हैं। यह नया सर्वनाम-भेद नहीं। पुरुषवाचक मध्यम वही रहता है; आज सामाजिक तह। ये संज्ञा नहीं; नाम की जगह हैं, सर्वनाम वाले विषय में।

आप आइए। — आदर।

तुम आओ। — साधारण / निकट।

तू आ। — एक, बहुत निकट या डाँट।

प्रश्न: सामने वाला एक, संकेत तीन। कौन सा ढंग चुना गया? हटाकर दूसरा बैठाओ — काम सुनने वाले का वही रहे, रंग बदल जाए — सामाजिक रूप।

जाँच: सुनने वाला? मध्यम, सर्वनाम वाले विषय में। कौन सा रंग — आदर, साधारण, एक-निकट/डाँट? आज। बोलने वाला? मैं, उत्तम। तीसरा? वह, अन्य।

2. 3 कार्ड एक नज़र में

एक आप रटकर तू-तुम गायब मत करो। तीनों चलते हैं।

शब्द सामाजिक रंग उदाहरण
आप आदर, सभा वाली भाषा आप बैठिए। आप कहाँ रहते हैं?
तुम साधारण निकटता; बराबरी तुम बैठो। तुम दोनों आओ।
तू एक व्यक्ति; बहुत अपना, काव्य, भक्ति, या अपमान तू इधर आ। तू कहाँ था?

रंग वाक्य और संबंध से बँधता है, सूची से पक्का नहीं। गुरु के सामने तू अक्सर गलती है; बच्चे से आप कभी भारी; मित्र से तुम साधारण। व्याकरण 3 रूप देता है; चुनना सामाजिक है, नया भेद नहीं।

जाँच: आदर? आप। साधारण? तुम। एक और नंगा संकेत (नंगा = बिना आदर का सादा रूप)? तू। तीनों सर्वनाम।

3. एक पुरुष — 3 ढंग

उत्तम मैं/हम, मध्यम तू/तुम/आप, अन्य वह/वे — कुर्सी सर्वनाम वाले विषय में, भेद-नाम सर्वनाम के भेद वाले विषय में, मेल पुरुष वाले विषय में। आज सिर्फ़ मध्यम की भीतरी सीढ़ी।

पुरुष काम आज?
उत्तम बोलने वाला नहीं — मैं/हम
मध्यम सुनने वाला हाँ — 3 रूप
अन्य बाकी दुनिया नहीं — वह/वे; आदर पर वे, आगे की दीवार में

यह/वह सामने खड़े पर भी अन्य रह सकते हैं, सर्वनाम वाले विषय में। तुम को अन्य मत लिखो। आप जब सामने पुकार (संबोधन) हो तो मध्यम; आप जब स्वयं हो तो निज — आगे आदर और निज वाली दीवार।

जाँच: सामने से बात? मध्यम। 3 शब्द आज। मैं नहीं। वह नहीं।

4. आप — आदर

कार्ड का पहला। एक आदर वाले व्यक्ति को भी आप; कई आदर वालों को भी आप। रूप नहीं बदलता। गुरु, अजनबी, गाँधी जैसे नाम का संबोधन — आप आइए। चंद्रबिंदु गाँधी में।

आप बैठिए।

आप दोनों आइए। — एक से अधिक, रूप आप वही।

आपका घर कहाँ है? — आपका संबंध रूप।

लिखा आप एक जैसा। क्रिया अक्सर बहुवचन जैसी: आप आते हैं, आप आइए, आप जाएँगे। यह आदर का व्याकरण है — वचन की गिनती नहीं, सम्मान का मेल। पूरा ताल पुरुष वाले विषय में; आज नियम: आप के साथ तू वाली क्रिया मत लगाओ। आप आता है ग़लत। आप आते हैं ठीक।

आप लोग, आप सब — अनेक को साफ़ करने का साथी। आप फिर भी आप; लोग/सब गिनती बताएँ, नया सर्वनाम नहीं।

आप को संज्ञा मत लिखो। बड़े व्यक्ति का नाम राम, गुरु, गाँधी है; आप संकेत है, सर्वनाम वाले विषय में।

जाँच: आदर का संकेत आप। क्रिया हैं/इए/एँ। आता है तू का मेल, आप पर नहीं।

5. तुम — साधारण निकटता

कार्ड का दूसरा। मित्र, बराबर उम्र, परिचित, कई बार परिवार। एक को भी तुम, कई को भी तुम।

तुम कल आना। — एक मित्र।

तुम सब बैठो। — अनेक।

तुम्हारा नाम क्या है?

क्रिया: तुम आते हो, तुम आओ, तुम जाओगे। आप वाले हैं से अलग, तू वाले है से अलग। तुम आता है ग़लत। तुम आते हो ठीक।

पाठ्य पुस्तक अक्सर तुम पर चलती है — साधारण संबोधन, न बहुत ऊँचा न नंगा। बोलचाल की बीच की सीढ़ी यही। कुछ बोलियों में तुम आदर भी छू ले; मानक 3 सीढ़ी में तुम बीच है, आप सिर, तू पाँव।

तुम लोग — अनेक साफ़। तुम रूप वही।

जाँच: हो / आओ? तुम सोचो। हैं / आइए? आप। है / आ? तू।

6. तू — एक, नंगा संकेत

कार्ड का तीसरा। हमेशा एक सुनने वाला। अनेक पर तू नहीं। तुम दोनों आ; तू दोनों आ ग़लत।

तू इधर आ। — निकट, छोटा, या आज्ञा कड़ी।

तू कहाँ था?

हे प्रभु! तू रक्षा कर। — भक्ति, अपमान नहीं; संबोधन हे विस्मयादिबोधक वाले विषय में, तू आज।

तू शांत रह! — डाँट का रंग भी बैठ सकता है।

क्रिया: तू आता है, तू आ, तू जाएगा। एकवचन जैसा मेल। तू आते हो ग़लत — वह तुम का मेल।

3 रंग एक शब्द पर: बहुत अपना, काव्य/प्रार्थना, अपमान। वाक्य और स्वर पूछो, तू को हमेशा गाली मत लिखो, हमेशा प्यार भी मत। व्याकरण: एक मध्यम, नंगा रूप (नंगा = बिना आदर का सादा रूप), क्रिया है/आ।

जाँच: एक सुनने वाला, नंगा रूप? तू। अनेक? तुम/आप। भक्ति में तू अपमान नहीं।

7. क्रिया का संकेत — झलक

सामाजिक चुन क्रिया पर दिखता है। पूरी तालिका — उत्तम-अन्य, सब काल — पुरुष वाले विषय में और रूप विचार में। आज 3 पंक्ति, ताकि सीढ़ी टूटे नहीं।

सर्वनाम वर्तमान झलक आज्ञा
तू तू आता है आ। जा। कर।
तुम तुम आते हो आओ। जाओ। करो।
आप आप आते हैं आइए। जाइए। कीजिए।

जाओ क्रिया है, विस्मयादिबोधक नहीं — क्रिया और विस्मयादिबोधक वाले विषयों में। आज्ञा में कर्ता अक्सर छिपा: आइए = आप आइए। छिपा कर्ता सामाजिक रूप नहीं मिटाता; क्रिया बता देगी सीढ़ी। आ? तू। आओ? तुम। आइए? आप।

तुम आना — आना धातु/कृदंत की झलक आगे; संबोधन तुम आज। मत आओ निषेध क्रिया विशेषण वाले विषय में + आज्ञा। न आइए आदर वाली आज्ञा पर निषेध।

लिंग क्रिया पर: तुम आते हो / तुम आती हो — तुम वही, लिंग रूप विचार में। आप आते हैं / आप आती हैं — आप वही। सर्वनाम सामाजिक रूप लिंग से नहीं चुनता।

जाँच: है/आ? तू। हो/आओ? तुम। हैं/इए? आप। लिंग क्रिया पर, सीढ़ी सर्वनाम पर।

8. वचन — गिनती और आदर

3 उलझनें। एक सूची में मत घोलो।

शब्द गिनती क्रिया
तू हमेशा एक एकवचन जैसी — है, आ, जाएगा
तुम एक या अनेक हो, आओ — गिनती एक हो तब भी
आप एक आदर वाला या अनेक हैं, आइए — गिनती एक हो तब भी आदर-मेल

तुम एक मित्र = तुम आते हो। तुम तीन मित्र = तुम आते हो। क्रिया एक सीढ़ी। आप एक गुरु = आप आते हैं। गिनती एक, मेल बहुवचन जैसा — आदर है, वचन की गिनती नहीं। वचन रूप विचार में लड़का/लड़के बदलेगा; आज सीढ़ी।

तू का बहुवचन तुम हो जाता है, तू लोग मानक नहीं। आप लोग चलता है।

जाँच: तू अनेक? नहीं। तुम एक? हाँ, हो। आप एक? हाँ, हैं — आदर।

9. तेरा, तुम्हारा, आपका

सीढ़ी संबंध रूप पर भी चलती है। कारक रूप विचार में; तिर्यक (झुका रूप: तेरे, तुम्हारे) संबंधबोधक वाले विषय में। आज रंग।

मूल संबंध / झुका रूप उदाहरण
तू तेरा, तुझे, तुझसे तेरा नाम? तुझे बुलाया।
तुम तुम्हारा, तुम्हें, तुमसे तुम्हारा घर। तुम्हें जाना है।
आप आपका, आपको, आपसे आपका घर। आपको चाय?

मैं के सामने नहीं — मेरे सामने, संबंधबोधक वाले विषय में। तू के बिना नहीं — तेरे बिना। तुम → तुम्हारे बिना। आप → आपके बिना। संबंधबोधक के, सीढ़ी सर्वनाम की।

तेरी / तुम्हारी / आपकी — साथ की संज्ञा का लिंग, रूप विचार में। सीढ़ी वही: तेरी तू, तुम्हारी तुम, आपकी आप।

जाँच: तेरा? तू। तुम्हारा? तुम। आपका? आप। के बिना झुका रूप, संबंधबोधक वाले विषय में।

10. आप आदर, आप निज

एक लिखा रूप, दो कुर्सियाँ — सर्वनाम के भेद वाले विषय में पूरा भेद। आज सीढ़ी के पास दीवार पक्की।

वाक्य आप कौन
आप बैठिए। मध्यम, आदर — आज की सीढ़ी
आप कहाँ रहते हैं? मध्यम, आदर
राम आप ही आ गए। निजवाचक — स्वयं, सर्वनाम के भेद वाले विषय में
गाँधी आप ही चल दिए। निज; चंद्रबिंदु; संबोधन नहीं

जाँच: सुनने वाले से बात? आदर वाला आप, आइए/हैं। कर्ता स्वयं, तीसरा? निज; क्रिया राम/गाँधी के मेल पर, आप ही बल। ही निपात आगे; आज इतना: ही अक्सर निज वाले आप के पास। आप बैठिए में ही नहीं भी आदर रह सकता है।

अपना, स्वयं, खुद निज के साथी — सर्वनाम के भेद वाले विषय में। अपनापन पन प्रत्यय, प्रत्यय वाले विषय में; अपना सर्वनाम अलग।

जाँच: आइए / हैं / आपको? आदर। आप ही + नाम कर्ता? निज। दोनों को एक मत लिखो।

11. 3 दीवारें — जी, हे, वे

शब्द कुर्सी उदाहरण
आप सर्वनाम, आदर आप आइए।
जी आदर का साथी / स्वीकृति राम जी। हाँ जी। — जी सर्वनाम नहीं
हे विस्मयादिबोधक हे मित्र! विस्मयादिबोधक वाले विषय में
वे अन्य पुरुष, आदर-गिनती गुरुजी आ रहे हैं। वे बैठे। — सुनने वाला नहीं

राम जी — जी नाम के साथ आदर, आप नहीं लगा। आप राम जी आइए — आप सर्वनाम, जी नाम का साथी; दो तहें। हाँ जी स्वीकृति विस्मयादिबोधक वाले विषय में; ही निपात आगे।

सामने न हों, तीसरे का आदर — अक्सर वे, गुरुजी, गाँधी जी। आप वहाँ मध्यम मत ठोको बिना संबोधन के। वे आ रहे हैं अन्य; आप आ रहे हैं सुनने वाला। पुरुष वाले विषय में अन्य का मेल पूरा होगा।

हे राम निकट पुकार, विस्मयादिबोधक वाले विषय में। आप राम नहीं; राम संज्ञा, आप संकेत।

जाँच: संकेत सुनने वाला? आप/तुम/तू। नाम के साथ जी? साथी, सर्वनाम नहीं। तीसरा आदर? वे। हे? झटका।

12. एक वाक्य — एक सीढ़ी

एक सुनने वाले पर तू और आप एक साथ मत चढ़ाओ। मेल टूटे तो व्याकरण टूटे।

तुम आइए। — ग़लत मिलावट: तुम + आप वाली आज्ञा।

आप आओ। — ग़लत: आप + तुम वाली आज्ञा।

तू आते हो। — ग़लत: तू + तुम का मेल।

आप आइए। तुम आओ। तू आ। — 3 शुद्ध सीढ़ियाँ।

बीच में सीढ़ी बदलना सामाजिक संकेत भी है — पहले आप, गुस्से में तू — रंग बदला, व्याकरण दो वाक्य दो मेल माँगता है। एक वाक्य में दो मेल मत घोलो।

हम आदर में बोलने वाले को भी छू सकता है, सर्वनाम वाले विषय में। वह उत्तम की शैली, आज की 3 सीढ़ी नहीं।

जाँच: सर्वनाम और क्रिया एक पंक्ति? तू-है-आ, तुम-हो-आओ, आप-हैं-इए।

13. वाक्य में सब कुर्सियाँ

अरे! आप आइए, पर तुम रुको; तू मत बोल, गाँधी आपके बिना नहीं।

  • अरे — विस्मयादिबोधक
  • आप आइए — मध्यम आदर; क्रिया आदर-मेल
  • पर — समुच्चयबोधक
  • तुम रुको — मध्यम साधारण
  • तू मत बोल — मध्यम नंगा; मत निषेध, क्रिया विशेषण वाले विषय में
  • गाँधी — संज्ञा; चंद्रबिंदु
  • आपके बिना — आप का झुका रूप + संबंधबोधक
  • नहीं — निषेध

3 सुनने वाले 3 सीढ़ी — एक वाक्य में तभी जब 3 अलग संबोधन हों। एक व्यक्ति पर यह मिलावट ग़लत। उदाहरण सिखाने को 3 कुर्सियाँ दिखाता है; जीवित संबोधन में एक चुनो।

आप ही आ गए। — आप निज, सर्वनाम के भेद वाले विषय में; ही निपात आगे। आइए नहीं।

14. शब्द तोड़कर पूरा

आप

आदर, मध्यम। हैं / आइए। निज अलग — आप ही। संज्ञा नहीं।

तुम

साधारण। हो / आओ। एक या अनेक।

तू

एक। है / आ। निकट, काव्य, भक्ति, या डाँट।

आपका / तुम्हारा / तेरा

सीढ़ी संबंध पर। लिंग साथ की संज्ञा, रूप विचार में।

आप लोग / तुम लोग

अनेक साफ़। लोग संज्ञा साथी; सर्वनाम आप/तुम।

जी

आदर साथी। सर्वनाम नहीं। हाँ जी विस्मयादिबोधक वाले विषय में।

वे

अन्य आदर/वचन। मध्यम नहीं।

मैं / हम

उत्तम। आज नहीं।

गाँधी, आप बैठिए। तुम सुनो। — आप आदर, तुम साधारण; गाँधी संज्ञा, चंद्रबिंदु। एक व्यक्ति पर दोनों मत चढ़ाओ बिना नए संबोधन के।

15. आम गलतियाँ

  • आप को संज्ञा लिखना। नाम राम/गाँधी, आप संकेत।
  • आप आता है। आदर-मेल हैं/इए।
  • तुम आइए, आप आओ — सीढ़ी मिलावट।
  • तू आते हो। तू + है/आ।
  • तू अनेक पर। अनेक तुम/आप।
  • आप बैठिए और आप ही आए एक भेद। पहला आदर, दूसरा निज।
  • जी को सर्वनाम लिखना। राम जी साथी।
  • तीसरे के आदर पर आप ठोकना बिना संबोधन के। वे/गुरुजी।
  • तू को हमेशा गाली मानना। भक्ति और काव्य भी।
  • क्रिया की पूरी तालिका यहीं रट लेना। पुरुष वाले विषय में।
  • तुम्हारे बिना को सामाजिक रूप भूलकर केवल संबंधबोधक लिखना। तुम्हारे सीढ़ी, के बिना संबंधबोधक वाले विषय में।
  • हे को आप बना देना। हे झटका, विस्मयादिबोधक वाले विषय में।

जाँच: (1) सुनने वाला? मध्यम। (2) आदर आप, साधारण तुम, एक-नंगा तू। (3) मेल: है-आ, हो-आओ, हैं-इए। (4) आप निज अलग। (5) जी/वे/हे दीवार।

16. इस विषय का सार

  • आप, तुम, तू मध्यम पुरुष के सामाजिक रूप हैं — आदर, निकटता, एक-नंगा संकेत।
  • नया विकार नहीं। सर्वनाम — सर्वनाम और सर्वनाम के भेद वाले विषयों में।
  • आप + हैं/इए। तुम + हो/आओ। तू + है/आ। गिनती एक हो तो भी आदर-मेल बहुवचन जैसा।
  • तेरा/तुम्हारा/आपका सीढ़ी संबंध पर। आप निज अलग। जी सर्वनाम नहीं।
  • पूरा क्रिया-मेल पुरुष वाले विषय में। विकारी आगे।

आगे विकारी और अविकारी शब्द है।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. आप, तुम, तू क्या हैं? नया विकार है? कार्ड के 3 लिखो।

उत्तर

मध्यम पुरुष के सामाजिक रूप — आदर, निकटता, एक-नंगा संकेत। नहीं — नया विकार नहीं; सर्वनाम की सीढ़ी। आप, तुम, तू।

2. “आप आता है” ठीक है? “तुम आइए” ठीक है?

उत्तर

नहीं — आप + हैं/इए; आता है तू का मेल। नहीं — तुम + हो/आओ; आइए आप की आज्ञा। एक वाक्य, एक सीढ़ी।

3. तू अनेक सुनने वालों पर चलता है? तू हमेशा गाली है?

उत्तर

नहीं — तू हमेशा एक; अनेक तुम/आप। नहीं — निकट, काव्य, भक्ति भी; डाँट एक रंग मात्र।

4. “आप बैठिए” और “आप ही आ गए” एक भेद हैं? जी सर्वनाम है?

उत्तर

नहीं — पहला मध्यम आदर; दूसरा निज, सर्वनाम के भेद वाले विषय में। नहीं — जी आदर का साथी; राम जी, हाँ जी।

5. सामने न हों तो तीसरे के आदर पर आप ठोकें? क्रिया की पूरी तालिका आज?

उत्तर

नहीं — बिना संबोधन के वे/गुरुजी; आप सुनने वाला है। नहीं — 3 पंक्ति झलक; पूरा मेल पुरुष वाले विषय में।

विषय समाप्त · आप, तुम, तू