अंग 2 · शब्द विचार
पाठ 2.15
विषय शुरू · उपसर्ग
विस्मयादिबोधक वाले विषय में 8वाँ विकार भरा — अरे, वाह, हे, आह। आज वह खंड जो शब्द के पहले जुड़कर अर्थ मोड़ दे। कार्ड के 4: अ, सु, अधि, निर्। यह विकार नहीं, बनावट की तह है। प्रत्यय पीछे लगता है — प्रत्यय वाले विषय में। कृदंत-तद्धित आगे। शब्द कहाँ से आया — तत्सम वाले विषय में। संधि वाक्य विचार में। आज सिर्फ़ पहले का खंड।
1. कुर्सी — पहले जुड़ने वाला खंड
परिभाषा सीधी रखो: जो खंड किसी शब्द के आरंभ में लगकर उसके अर्थ को बदल दे या नया रंग दे, वह उपसर्ग है। अकेला वाक्य में नहीं बैठता। और पुल नहीं। वाह झटका नहीं। धर्म शब्द है; अ लगते ही अधर्म हो गया।
अ + धर्म = अधर्म
सु + पुत्र = सुपुत्र
अधि + कार = अधिकार
निर् + दोष = निर्दोष
प्रश्न: कौन सा टुकड़ा शब्द के सिर पर चढ़कर अर्थ घुमा रहा है? उतारो — पुराना शब्द बच सकता है; नया रंग जाता रहे। अधर्म से अ हटाओ, धर्म रह गया।
जाँच: पहले है? अर्थ मुड़ा? मूल शब्द पहचाना जा सकता है? उपसर्ग सोचो। पीछे का खंड? प्रत्यय आगे। पूरा दूसरा शब्द चिपक गया? समास वाक्य विचार में।
2. 4 कार्ड एक नज़र में
4 काम अलग हैं। एक अ रटकर बाकी तीन गायब मत करो।
| उपसर्ग | रंग | उदाहरण |
|---|---|---|
| अ | निषेध, नहीं | अधर्म, असत्य, अशुद्ध |
| सु | अच्छा, अच्छी तरह | सुपुत्र, सुगंध, सुपाठ |
| अधि | ऊपर, अधिक, मालिक होना | अधिकार, अध्यक्ष, अधिक |
| निर् | बिना, बाहर | निर्दोष, निर्जल, निर्भय |
एक उपसर्ग एक वाक्य में अलग-अलग मूल से अलग शब्द बनाता है। अ + ज्ञान = अज्ञान; अ + सत्य = असत्य। सूची से पक्का रंग बाँधो, वाक्य छोड़ो — वही गाँठ संज्ञा के भेद वाली।
जाँच: नहीं? अ। अच्छा? सु। ऊपर/अधिक? अधि। बिना? निर्।
3. 8 विकार के बाद
संज्ञा से विस्मयादिबोधक तक 8 कुर्सियाँ भरीं। उपसर्ग उनमें 9वीं कुर्सी नहीं। यह शब्द का अंग है, वाक्य का पद नहीं। अधर्म वाक्य में संज्ञा बनकर बैठता है; अ अकेला कर्ता नहीं बनता।
| तह | काम | विषय |
|---|---|---|
| 8 विकार | वाक्य में पद का काम | संज्ञा से विस्मयादिबोधक |
| उपसर्ग | शब्द के पहले खंड | आज |
| प्रत्यय | शब्द के बाद खंड | प्रत्यय आगे |
| धातु | क्रिया का मूल | धातु आगे |
निपात ही-भी आगे — बल देते हैं, शब्द के सिर पर नहीं चढ़ते। आज खंड है, झटका नहीं, पुल नहीं।
जाँच: वाक्य में अकेला चलता है? विकार सोचो। सिर पर चिपका और उतारने से मूल बचा? उपसर्ग।
4. यौगिक से नाता
रूढ़-यौगिक वाले विषय में: खंड अर्थ वाले हों और जोड़ अर्थ हो — यौगिक। सुपुत्र यौगिक है क्योंकि सु + पुत्र दोनों काम करते हैं। आज पता चलता है वह खंड उपसर्ग कहलाता है। बनावट यौगिक, पहले का टुकड़ा उपसर्ग — दो प्रश्न, एक शब्द।
सुपुत्र — यौगिक; सु उपसर्ग, पुत्र मूल।
राजपुत्र — यौगिक; राजा + पुत्र, समास। उपसर्ग नहीं।
पुत्र — रूढ़; कोई खंड पहले नहीं।
विद्यालय = विद्या + आलय — समास, रूढ़-यौगिक वाले विषय में भी यही काट। वि को वहाँ उपसर्ग मत ठोको। विजय = वि + जय — वहाँ वि उपसर्ग है। शब्द पूछो, एक सूची सब पर मत फैलाओ।
पंकज योगरूढ़ है — खंड हैं, अर्थ खास नाम पर रूढ़। उपसर्ग की कुर्सी अलग। आज सिर का खंड; योगरूढ़ वहीं रह चुका।
जाँच: पहले छोटा खंड, मूल बचा? उपसर्ग। दो पूरे शब्द? समास सोचो, वाक्य विचार में। एक टुकड़ा, न टूटे? रूढ़, रूढ़-यौगिक वाले विषय में।
5. अ और अन — निषेध
कार्ड का पहला। धर्म का उलटा अधर्म। सत्य का उलटा असत्य। यह वाक्य वाला नहीं नहीं है — नहीं काम के साथ क्रिया विशेषण वाले विषय में। अ शब्द के सिर पर चढ़ता है।
| रूप | कब | उदाहरण |
|---|---|---|
| अ | व्यंजन से पहले | अधर्म, असत्य, अशुद्ध, अज्ञान |
| अन | स्वर से पहले | अनादर, अनंत, अनादि, अन्याय |
अहिंसा = अ + हिंसा। गाँधी का मार्ग — चंद्रबिंदु गाँधी में। असहयोग = अ + सहयोग। अन्याय स्कूल अन + न्याय लिखती है; कान पर स्वर-व्यंजन की रेखा कभी धुंधली पड़ती है — शब्द याद रखना, नियम तोड़ना नहीं।
अ वर्णमाला का स्वर है — स्वर वाले विषय में। अधर्म वाला अ वही ध्वनि, दूसरा काम: खंड, वर्ण-चार्ट नहीं। आ! विस्मयादिबोधक वाले विषय में। 3 आ/अ, 3 कुर्सियाँ।
न वाले समास में भी अ/अन दिखते हैं — अधर्म वहाँ समास का नाम पा सकता है, समास आगे। आज: सिर का खंड उपसर्ग है। पूरा समास आगे।
जाँच: नहीं काम के साथ? क्रिया विशेषण वाले विषय में। नहीं शब्द के सिर पर? अ/अन आज। अ चार्ट पर? स्वर वाले विषय में।
6. सु — अच्छा
कार्ड का दूसरा। अच्छा पुत्र सुपुत्र। अच्छी गंध सुगंध। कु उलटा रंग — कुपुत्र, कुसंग। कु हिंदी के अपने उपसर्गों में भी बैठता है, हिंदी सिर वाले खंड में।
सुपाठ — अच्छा पाठ।
सुराज — अच्छा राज।
सुंदर को मत तोड़ो। सुंदर रूढ़ है — रूढ़-यौगिक वाले विषय में। सु + दर यहाँ उपसर्ग की कुर्सी नहीं। सुख भी अकेला शब्द; सु + ख मत काटो। सु तब उपसर्ग जब उतारने से अर्थ वाला मूल बचे — पुत्र, गंध, पाठ, राज।
सु ह्रस्व उ — ह्रस्व = छोटी मात्रा। वर्तनी वाले विषय में। सूपुत्र गलत। सु उपसर्ग, सूख क्रिया का परिवार अलग।
जाँच: सु उतारो, पुत्र जैसा मूल बचा? उपसर्ग। सुंदर / सुख एक टुकड़ा लगें? रूढ़ सोचो, रूढ़-यौगिक वाले विषय में।
7. अधि — ऊपर और अधिक
कार्ड का तीसरा। मालिक होना, ज्यादा होना, ऊपर बैठना। इ ह्रस्व — छोटी मात्रा; अधिकार, अधि ई नहीं, वर्तनी वाले विषय में।
अधिकार — अधि + कार।
अध्यक्ष — अधि + अक्ष; जोड़ पर स्वर संधि आगे।
अधिक — ज्यादा का रंग यहीं।
अधिकारी में ई अंत का — नदी-देवी वाला परिवार नहीं; यहाँ प्रत्यय छू सकता है, प्रत्यय आगे। आज सिर का अधि। पीछे का आई/ई मत खोलो।
अधमरा, अधपका — यह अधि नहीं, हिंदी अध है, हिंदी सिर वाले खंड में। अधिकार और अधपका एक उपसर्ग मत लिखो।
जाँच: अधि इ से। अधमरा अध से। अधिकार सिर अधि, पीछे का खंड प्रत्यय आगे।
8. निर्, नि, निस् — बिना और बाहर
कार्ड का चौथा। जल के बिना निर्जल। दोष के बिना निर्दोष। भय के बिना निर्भय।
| रूप | उदाहरण | याद |
|---|---|---|
| निर् | निर्दोष, निर्जल, निर्धन | कार्ड यही |
| नि | निडर, निकम्मा, निवास | इ ह्रस्व, वर्तनी |
| निस् / निः | निश्चय, निःशब्द | विसर्ग संधि आगे |
के बिना संबंधबोधक वाले विषय में है — जल के बिना। निर्जल एक शब्द, सिर पर निर्। रिश्ता वाक्य में अलग पद; उपसर्ग शब्द के अंदर। बिना … के और निर् एक काम के दो तहें — कुर्सी मत मिलाओ।
नीरोग कुछ लेख नी + रोग लिखते हैं; नी दीर्घ यहाँ उपसर्ग की सामान्य सूची नहीं। नि इ से याद रखो; नीरोग शब्द अलग याद। नीति अंत ई — उपसर्ग नहीं, वर्तनी वाले विषय में।
जाँच: शब्द के अंदर बिना? निर्/नि। वाक्य में के बिना? संबंधबोधक वाले विषय में। नि इ, नीति ई अंत।
9. और संस्कृत उपसर्ग — काम की झलक
कार्ड के 4 हैं। स्कूल और सिर भी गिनती है। सूची रटकर विषय मत बंद करो; हर पंक्ति में एक रंग, एक शब्द। जोड़ तोड़ना संधि और समास आगे।
| उपसर्ग | रंग | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्र | आगे, खूब | प्रहार, प्रकाश, प्रसिद्ध |
| वि | विशेष, अलग | विजय, विज्ञान, विदेश |
| सम् | साथ, पूरा | संयोग, संतोष, संभव |
| अनु | पीछे, साथ | अनुज, अनुवाद, अनुसार |
| अति | बहुत, पार | अतिथि, अत्याचार, अत्यंत |
| उप | पास, छोटा | उपकार, उपयोग, उपनगर |
| आ | तक, ओर | आगमन, आहार |
| उत् / उद् | ऊपर, निकास | उत्तम, उत्पन्न, उद्धार |
सम् लिखने में अक्सर सं — अनुस्वार वाले विषय में; व्यंजन संधि आगे। अति + आचार = अत्याचार — स्वर संधि आगे; बनावट यौगिक, रूढ़-यौगिक वाले विषय में। अत्याचार को अ + त्याचार मत काटो। उपयोग = उप + योग; ऊपयोग गलत, वर्तनी वाले विषय में।
आ आगमन वाला उपसर्ग है। आ चार्ट पर स्वर, स्वर वाले विषय में। आ! झटका, विस्मयादिबोधक वाले विषय में। आकाश अकेला रूढ़ सोचो — आ + काश मत काटो। 3 आ: वर्ण, भाव, खंड।
जाँच: रंग एक, शब्द एक। विद्यालय समास। विजय में वि उपसर्ग। आ 3 कुर्सियाँ मत मिलाओ।
10. हिंदी के अपने उपसर्ग
संस्कृत सिर के साथ हिंदी अपने छोटे सिर भी लगाती है। कार्ड के 4 संस्कृत परिवार के हैं; ये घर के हैं। स्रोत का पूरा बँटवारा तत्सम वाले विषय में। आज: पहले जुड़ते हैं, अर्थ मोड़ते हैं।
| उपसर्ग | उदाहरण |
|---|---|
| अध | अधपका, अधमरा, अधकचरा |
| उन | उनतीस, उनचास, उनसठ |
| कु | कुपुत्र, कुसंग, कुचाल |
| नि | निडर, निकम्मा |
| बिन | बिनबादल, बिनब्याहा |
उनतीस = तीस से एक कम — उन सिर पर। यह अ/अन निषेध नहीं। अधमरा अधि नहीं। बिनबादल बिना बादल — बिन सिर; के बिना संबंधबोधक वाले विषय में अलग पद।
जाँच: अध ≠ अधि। उन ≠ अन। बिन शब्द के अंदर; के बिना वाक्य में।
11. विदेशी सिर — झलक
कुछ सिर दूसरी भाषा से आए। तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी — तत्सम वाले विषय में। संकर आगे। आज पहचान: ये भी पहले जुड़ते हैं।
| उपसर्ग | उदाहरण |
|---|---|
| बे | बेकाम, बेघर, बेसुध |
| बद | बदनाम, बदहजमी |
| ना | नासमझ, नापसंद |
| ला | लाचार, लाजवाब |
बेकाम और निकम्मा एक रंग के पास — बिना काम। सिर अलग परिवार, कुर्सी एक: उपसर्ग। ना समझ में ना सिर; नहीं क्रिया विशेषण वाले विषय में वाक्य का निषेध। ना + समझ = नासमझ — एक शब्द।
जाँच: पहले जुड़ा? आज की कुर्सी। कहाँ से आया? तत्सम वाले विषय में। दो भाषाओं के टुकड़े पूरे शब्द में? संकर आगे।
12. प्रत्यय नहीं
उपसर्ग सिर। प्रत्यय पूँछ — पूँछ = शब्द के बाद जुड़ने वाला टुकड़ा। दोनों खंड हैं; दिशा उलटी।
| उपसर्ग | प्रत्यय | |
|---|---|---|
| जगह | पहले | बाद में |
| उदाहरण | सुपुत्र, अधर्म | सुंदरता, बचपन, राष्ट्रीय |
| विषय | आज | प्रत्यय आगे; कृदंत-तद्धित आगे |
सुंदरता = सुंदर + ता — ता प्रत्यय, सुंदर मूल। सु उपसर्ग वहाँ नहीं। अनपढ़ में अन सिर, पढ़ मूल; पीछे कुछ नहीं तो प्रत्यय मत घुसाओ। दोनों लगें तो दो तहें: बेईमानी — बे सिर, ईमान मूल, ई/आई पूँछ प्रत्यय आगे। आज सिर गिनो।
लिखकर, लिखा — धातु से, कृदंत आगे। बचपन संज्ञा से, तद्धित आगे। धातु आगे। आज कोई पूँछ नहीं खोलनी।
जाँच: सिर? आज। पूँछ? प्रत्यय आगे। धातु से बना? कृदंत आगे। संज्ञा से बना? तद्धित आगे।
13. जोड़ पर संधि और वर्तनी
सिर स्वर से टकराए तो लिखा बदल सकता है। नियम पूरा संधि वाक्य विचार में; आज निशान, ताकि अत्याचार को अ + त्याचार मत काटो।
| जोड़ | लिखा | आगे |
|---|---|---|
| अति + आचार | अत्याचार | स्वर संधि |
| अधि + अक्ष | अध्यक्ष | स्वर संधि |
| सम् + योग | संयोग | अनुस्वार; व्यंजन संधि |
| निस् + चय | निश्चय | विसर्ग / व्यंजन संधि |
| उप + योग | उपयोग | उ ह्रस्व, वर्तनी |
संधि विच्छेद आगे: अत्याचार = अति + आचार। आज कुर्सी उपसर्ग की; काट सही हो। हलंत-संयुक्त वाले विषय में जब दो व्यंजन मिलें — निश्चय का श्च।
नि, वि, अधि, अति — इ ह्रस्व (छोटी मात्रा)। सु, उप, अनु, उत् — उ ह्रस्व। वर्तनी वाले विषय की मात्रा यहीं काम आती है: उपसर्ग देखकर मात्रा मत बढ़ाओ।
जाँच: काट कर सिर और मूल दोनों अर्थ वाले? संधि का जोड़ हो सकता है। मात्रा उपसर्ग की ह्रस्व (छोटी)?
14. तीन दीवारें
| कुर्सी | काम | उदाहरण |
|---|---|---|
| उपसर्ग | शब्द के पहले खंड | निर्जल, बेकाम |
| संबंधबोधक | संज्ञा के बाद रिश्ता | जल के बिना |
| क्रिया विशेषण निषेध | काम के साथ नहीं | जल नहीं पिया |
विस्मयादिबोधक अरे शब्द है, खंड नहीं। समुच्चयबोधक और जोड़ता है, सिर नहीं चढ़ता। पर विरोध समुच्चयबोधक वाले विषय में; परलोक में पर सिर जैसा लग सकता है — वाक्य पूछो, एक पर सब कुर्सियों पर मत बिठाओ।
अयोगवाह अं-अः वर्ण, अयोगवाह वाले विषय में। अनुस्वार सं- में चिह्न है, उपसर्ग सम् का लिखा रूप। वाह झटका विस्मयादिबोधक वाले विषय में। 3 अं/वाह मत मिलाओ।
जाँच: सिर? आज। के बिना? संबंधबोधक वाले विषय में। नहीं पिया? क्रिया विशेषण वाले विषय में। और? समुच्चयबोधक वाले विषय में। वाह? विस्मयादिबोधक वाले विषय में।
15. वाक्य में सब कुर्सियाँ
अरे! निर्दोष गाँधी अहिंसा से सुराज चाहते थे, लेकिन अन्याय नहीं सहा।
- अरे — विस्मयादिबोधक
- निर्दोष — निर् उपसर्ग + दोष; शब्द विशेषण
- गाँधी — संज्ञा; चंद्रबिंदु
- अहिंसा — अ उपसर्ग + हिंसा; संज्ञा
- से — संबंध / कारक रूप विचार में
- सुराज — सु उपसर्ग + राज
- चाहते थे — क्रिया + सहायक, क्रिया वाले विषयों में
- लेकिन — समुच्चयबोधक
- अन्याय — अन उपसर्ग + न्याय
- नहीं — निषेध, क्रिया विशेषण वाले विषय में
- सहा — क्रिया
अध्यक्ष के बिना अधिकार अधूरा है।
- अध्यक्ष — अधि उपसर्ग, स्वर संधि आगे
- के बिना — संबंधबोधक; निर् नहीं
- अधिकार — अधि उपसर्ग
- अधूरा — यहाँ अध जैसा रंग; हिंदी सिर, अधि नहीं
16. शब्द तोड़कर पूरा
अ / अन
निषेध। व्यंजन पर अ, स्वर पर अन। नहीं क्रिया विशेषण वाले विषय में। न वाला समास आगे।
सु / कु
अच्छा / बुरा। सुंदर मत तोड़ो।
अधि / अध
अधि अधिकार। अध अधपका।
निर् / नि / बिन / बे
बिना का रंग। के बिना संबंधबोधक वाले विषय में।
प्र / वि / सम् / अनु / अति / उप
संस्कृत सिर। विद्यालय समास। उपयोग उ से।
आ-
आगमन। आ स्वर वाले विषय में। आ! विस्मयादिबोधक वाले विषय में।
उन / बिन
हिंदी सिर। उनतीस, बिनबादल।
ता / पन / वाला
प्रत्यय आगे। आज नहीं।
सुपुत्र निर्दोष था, अधर्म अन्याय है। — सु, निर्, अ, अन चार सिर; पुत्र दोष धर्म न्याय मूल।
17. आम गलतियाँ
- सुंदर / सुख / आकाश को उपसर्ग से तोड़ना। रूढ़, रूढ़-यौगिक वाले विषय में।
- विद्यालय में वि उपसर्ग लिखना। विद्या + आलय, समास।
- अत्याचार = अ + त्याचार काटना। अति + आचार।
- अ को स्वर-चार्ट और अधर्म एक कुर्सी पर ठोकना।
- आ! और आगमन वाला आ एक लिखना।
- निर्जल और जल के बिना एक पद लिखना।
- नहीं को उपसर्ग लिखना। नहीं क्रिया विशेषण वाले विषय में।
- अधि और अध एक। अधिकार ≠ अधमरा।
- उपसर्ग को 9वाँ विकार बनाना। तह अलग।
- प्रत्यय यहीं खोल लेना — ता, पन, वाला, प्रत्यय आगे।
- सूची रटकर हर शब्द पर चिपका देना। मूल पूछो।
- ऊपयोग, नीवास, अधीकार — मात्रा, वर्तनी वाले विषय में।
- वाह को सम्/सं से जोड़ना। अयोगवाह वाले विषय में अं-अः; वाह विस्मयादिबोधक वाले विषय में।
जाँच: (1) पहले का खंड, अर्थ मुड़ा? उपसर्ग। (2) अ निषेध, सु अच्छा, अधि अधिक, निर् बिना। (3) पूँछ प्रत्यय आगे। (4) संधि का जोड़ काटो, अंधा काट मत। (5) विकार नहीं, बनावट है।
18. इस विषय का सार
- उपसर्ग शब्द के पहले जुड़ने वाला खंड है — अ, सु, अधि, निर्।
- अकेला पद नहीं। 8 विकार से अलग तह। यौगिक का एक रास्ता, रूढ़-यौगिक वाले विषय में।
- अ/अन निषेध। सु अच्छा। अधि ऊपर। निर् बिना। हिंदी और विदेशी सिर भी पहले लगते हैं।
- प्रत्यय पीछे — प्रत्यय आगे। संधि वाक्य विचार में। स्रोत तत्सम वाले विषय में।
- सुंदर मत तोड़ो। विद्यालय समास। आ 3 कुर्सियाँ।
आगे प्रत्यय है।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. उपसर्ग क्या है? कार्ड के 4 लिखो। यह 8वाँ विकार है?
उत्तर
जो खंड शब्द के आरंभ में लगकर अर्थ बदल दे या नया रंग दे। अ, सु, अधि, निर्। नहीं — 8 विकार से अलग तह, बनावट है; 9वीं कुर्सी नहीं।
2. सुंदर में सु उपसर्ग है? विद्यालय में वि उपसर्ग है?
उत्तर
नहीं — सुंदर रूढ़; सु + दर मत काटो। नहीं — विद्यालय विद्या + आलय, समास; विजय में वि उपसर्ग है।
3. अत्याचार = अ + त्याचार? अधि और अध एक उपसर्ग हैं?
उत्तर
नहीं — अति + आचार, स्वर संधि आगे। नहीं — अधि अधिकार; अध अधमरा / अधपका, हिंदी सिर।
4. निर्जल और “जल के बिना” एक पद हैं? नहीं उपसर्ग है?
उत्तर
नहीं — निर्जल एक शब्द, सिर पर निर्; के बिना संबंधबोधक, अलग पद। नहीं — नहीं काम के साथ निषेध, क्रिया विशेषण वाले विषय में; अ/अन सिर पर निषेध।
5. ता, पन, वाला आज खोलने हैं? आ चार्ट, आ! और आगमन वाला आ एक कुर्सी हैं?
उत्तर
नहीं — वे प्रत्यय, प्रत्यय आगे; आज सिर। नहीं — आ स्वर (वर्ण); आ! विस्मयादिबोधक; आ- आगमन खंड।
विषय समाप्त · उपसर्ग
