Noteclass 9 10

विस्मयादिबोधक

Lesson 25 of 71

अंग 2 · शब्द विचार

पाठ 2.14

विषय शुरू · विस्मयादिबोधक

समुच्चयबोधक वाले विषय में पुल खुला — और, लेकिन, क्योंकि, इसलिए। आज वह शब्द जो अचानक भाव निकाल दे — खुशी, दुख, आश्चर्य, पुकार। कार्ड के 4: अरे, वाह, हे, आह। यह 8वाँ विकार (आठवीं कुर्सी) है। जोड़ नहीं, रिश्ता नहीं, काम नहीं। निपात ही-भी आगे। विस्मय चिह्न (!) विराम वाले विषय में — भाव दिखाने वाला चिह्न। संबोधन कारक रूप विचार में। उपसर्ग आगे। आज भाव की कुर्सी।

1. कुर्सी — अचानक भाव

परिभाषा सीधी रखो: जो अव्यय अचानक मन का भाव निकाले, वह विस्मयादिबोधक है। अव्यय = रूप न बदलने वाला शब्द। नाम विस्मय + आदि — आश्चर्य और उसके साथ खुशी, दुख, दर्द, घिन, पुकार। वाक्य का कर्ता-कर्म नहीं भरता। दो बातें नहीं जोड़ता। बस फूट पड़ता है।

वाह! कितना सुंदर फूल है।

आह! चोट लग गई।

अरे! तुम आ गए?

हे राम! रक्षा करो।

प्रश्न: कौन सा शब्द बिना पूछे भाव फेंक रहा है? हटाओ — बात रह सकती है, झटका जाता रहे। वाह हटे तो फूल अभी भी सुंदर है; खुशी की फूंक गायब।

जाँच: शब्द हटाओ। नाम छूटा? संज्ञा। जोड़ टूटा? समुच्चयबोधक। ढंग टूटा? क्रिया विशेषण। सिर्फ़ झटका / पुकार गायब? विस्मयादिबोधक।

2. 4 कार्ड एक नज़र में

4 भाव, 4 दरवाज़े। एक अरे रटकर बाकी तीन गायब मत करो।

शब्द भाव उदाहरण
अरे आश्चर्य / पुकार अरे! यह क्या हुआ?
वाह खुशी / तारीफ़ वाह! क्या बात है।
हे संबोधन / पुकार हे भगवान! हे मित्र!
आह दुख / दर्द आह! अब क्या होगा।

एक शब्द दो भाव भी छू सकता है। अरे आश्चर्य भी, पुकार भी। वाक्य पूछो, सूची से पक्का मत बाँधो — संज्ञा के भेद वाली गाँठ।

जाँच: झटका कैसा? ताली वाह, चोट आह, हैरानी अरे, नाम लेकर पुकार हे।

3. 8वाँ विकार — नक्शा

शब्द विचार की 8 कुर्सियाँ स्कूल 8 विकार कहती है। आज आखिरी भरती है। नाम रटने की तालिका नहीं; सीढ़ी जो संज्ञा से चली।

विकार काम विषय
संज्ञा नाम संज्ञा
सर्वनाम नाम की जगह सर्वनाम
विशेषण नाम कैसा विशेषण
क्रिया काम, घटना, स्थिति क्रिया
क्रिया विशेषण काम कैसे-कब-कहाँ क्रिया विशेषण
संबंधबोधक संज्ञा का रिश्ता संबंधबोधक
समुच्चयबोधक पुल समुच्चयबोधक
विस्मयादिबोधक अचानक भाव आज

निपात, उपसर्ग, प्रत्यय, धातु इस 8 में अलग तहें हैं — उपसर्ग के बाद। कौन रूप बदलता है — विकारी वाले विषय में। आज: 8वीं कुर्सी भाव की है, पुल की नहीं।

जाँच: 8 में काम पूछो। वाह जोड़ नहीं। और भाव नहीं। हे नाम नहीं।

4. वाह — खुशी

कार्ड का दूसरा शब्द। ताली, तारीफ, खुशी का झटका। अयोगवाह वाला वाह इससे कोई नाता नहीं — अयोगवाह वाले विषय में।

वाह! चित्र सुंदर है।

वाह वाह! क्या स्वर है। — दोहराना ज़ोर, नया भेद नहीं।

गाँधी कितने सरल थे, वाह! — चंद्रबिंदु गाँधी में।

शाबाश, धन्य, आहा — खुशी की पंक्ति, कार्ड का पड़ोसी। वाह को विशेषण मत लिखो। सुंदर विशेषण है, फूल विशेष्य; वाह झटका है, फूल से नहीं चिपकता।

क्या बात है! — क्या यहाँ प्रश्न सर्वनाम नहीं, विस्मय का ढंग। क्या लड़का आया? — प्रश्न, सर्वनाम के भेद वाले विषय में। वाक्य पूछो।

जाँच: वाह खुशी। अयोगवाह अं-अः अलग। सुंदर गुण, वाह झटका।

5. आह — दुख और दर्द

कार्ड का चौथा। दर्द, दुख, हाय की लाइन।

आह! पैर में चोट लगी।

हाय! सब समाप्त।

उफ़! कितनी गरमी है।

आह! गाँधी अब नहीं रहे। — दुख; चंद्रबिंदु।

हा, हाय, ओह, उफ़ — दुख/दर्द के साथी। आह को क्रिया मत लिखो। आह भरना — भरना क्रिया, आह वहाँ संज्ञा जैसी जगह भी छू सकती है: उसने गहरी आह भरी। आज कार्ड: अकेला आह! झटका, विस्मयादिबोधक। आह भरी — वाक्य पूछो; संज्ञा की कुर्सी खुल सकती है।

जाँच: अकेला आह! भाव। आह भरी — नाम जैसी जगह सोचो, झटका मत ठोको बिना वाक्य के।

6. अरे — आश्चर्य और पुकार

कार्ड का पहला। हैरानी सबसे साफ़। कभी नाम के साथ पुकार भी।

अरे! यह तो राम है। — आश्चर्य।

अरे राम! इधर आओ। — पुकार, निकट।

बाप रे! कितना बड़ा पेड़। — आश्चर्य का जोड़; रे पुकार का टुकड़ा।

ओ, ऐ, अजी — आश्चर्य/पुकार के पास। अरे को समुच्चयबोधक मत लिखो — पुल वाले विषय की गलती। अरे राम आया और श्याम गया में और पुल है, अरे झटका।

अरे नहीं! — अरे भाव, नहीं निषेध, क्रिया विशेषण वाले विषय में। दो कुर्सियाँ।

जाँच: हैरानी या हल्की पुकार? अरे। दो बातें जोड़? और। नाम की जगह? सर्वनाम नहीं, अरे संकेत नहीं भरता।

7. हे — संबोधन

कार्ड का तीसरा। नाम लेकर पुकारना, प्रार्थना, आदर। वाक्य अक्सर नाम के साथ खुलता है।

हे ईश्वर! दया करो।

हे मित्र! सुनो।

हे भारत! तेरे लिए।

हे राम। — हे विस्मयादिबोधक, राम संज्ञा। कारक संबोधन की पूरी विभक्ति रूप विचार में। आज: हे भाव-पुकार की कुर्सी; राम नाम रहता है। दोनों को एक मत लिखो।

अरे राम निकट, हे राम आदर/प्रार्थना। एक पुकार, दो रंग। ओ मित्र बोलचाल। कुर्सी एक: संबोधन वाला विस्मयादिबोधक।

जाँच: हे + नाम? हे आज, नाम संज्ञा, संबोधन कारक रूप विचार में। हे को क्रिया मत लिखो।

8. और भाव — घिन, भय, हाँ-कहना

4 कार्ड मूल हैं। स्कूल और झटके भी इसी कुर्सी पर रखती है। सूची रटना नहीं।

भाव उदाहरण
घिन छिः! धिक्! यह क्या गंदगी है।
भय / चेतावनी बचाओ! सावधान!
हाँ-कहना हाँ। जी। ठीक।

बचाओ क्रिया भी लग सकता है — आज्ञा, क्रिया वाले विषय में। सावधान विशेषण भी। झटके में अकेले फूटें तो विस्मयादिबोधक सोचो; वाक्य में काम करें तो अपनी पुरानी कुर्सी। जाओ क्रिया है, विस्मयादिबोधक मात्र नहीं।

हाँ मान लेने का झटका, स्कूल इसे अक्सर यहीं रखती है। नहीं निषेध, क्रिया विशेषण वाले विषय में। हाँ, मैं जाऊँगा। — हाँ भाव; जाऊँगा क्रिया। ही/भी बल निपात आगे, हाँ नहीं।

जाँच: अकेला छिः / हाँ / बचाओ झटका? आज सोचो। जाता / नहीं / ही? पुरानी कुर्सी।

9. आ! — वर्ण या शब्द

शब्द और वाक्य वाले विषय में: चार्ट पर आ स्वर है। पुकार आ! वही ध्वनि विस्मय का काम कर सकती है। आज काट पक्की।

लिखा कुर्सी
आ — वर्णमाला स्वर, स्वर वाले विषय में
आ! विस्मयादिबोधक, दर्द या हैरानी
आओ क्रिया, आज्ञा

अक्षर का टुकड़ा और भाव का शब्द लंबाई से नहीं बँटते — अर्थ से। आ चार्ट पर वर्ण; आ! बात। शब्द और वाक्य वाली काट पक्की।

10. वाक्य से अलग

विस्मयादिबोधक अकेला भी पूरा झटका बन सकता है। वाह! आह! अरे! — संदर्भ हो तो बात पूरी। साथ वाक्य आए तो झटका वाक्य के बाहर या सिरे पर बैठता है, पुल बीच में नहीं।

वाह! फूल खिल गया। — झटका, फिर वाक्य।

फूल खिल गया, वाह! — झटका अंत में।

राम, अरे, इधर देखो। — बीच में पुकार; और नहीं, पुल नहीं।

समुच्चयबोधक दो टुकड़ों के बिना अधूरा। विस्मयादिबोधक टुकड़े माँगता नहीं। यही फर्क।

जाँच: अकेला चल जाए? विस्मयादिबोधक सोचो। दो तरफ़ बातें माँगे? समुच्चयबोधक।

11. 3 दीवारें

कुर्सी काम उदाहरण
क्रिया विशेषण काम कैसे वह धीरे बोला।
समुच्चयबोधक पुल बोला और हँसा।
विस्मयादिबोधक झटका वाह! बोला।

संबंधबोधक: हे के बिना मत निकलो — ग़लत पढ़ना। के बिना संबंधबोधक; हे आज। हे ईश्वर के सामने — हे झटका, के सामने रिश्ता।

निपात: मैं तो जाऊँगा। — तो बल, निपात आगे। तो वाह नहीं। ही/भी/तक यहीं मत खोलो।

जाँच: कैसे? क्रिया विशेषण। और/लेकिन? समुच्चयबोधक। के सामने? संबंधबोधक। वाह/अरे/हे/आह? आज। ही-भी? निपात आगे।

12. चिह्न — झलक

इन शब्दों के साथ अक्सर विस्मय चिह्न (!) लगता है — वाह! आह! पूरा विराम विराम चिह्न वाले विषय में। आज: चिह्न भाव को कागज पर दिखाता है; शब्द कुर्सी अभी भी विस्मयादिबोधक है। बिना चिह्न के भी अरे तुम आ गए विस्मय रह सकता है। चिह्न शब्द नहीं, शब्द चिह्न नहीं।

अरे! तुम आ गए? — भाव-चिह्न और प्रश्न दोनों। प्रश्नवाचक सर्वनाम कौन नहीं बैठा। तुम सर्वनाम, आ गए क्रिया, अरे झटका।

13. रूप नहीं बदलता

विस्मयादिबोधक अविकारी है — रूप नहीं बदलता। लड़का वाह, लड़की वाह, बच्चे वाह — वाह एक। हे मित्र, हे माता — हे एक। पूरा विकारी-अविकारी और अव्यय आगे। 8 में यह अविकारी पंक्ति के अंत में बैठता है।

वाह को वाही / वाहे मत बनाओ। आह को आहें संज्ञा बनकर गिनती में आ सकती है — उसकी आहें निकलीं — तब संज्ञा, संज्ञा वाले विषयों में। अकेला आह! आज की कुर्सी।

14. वाक्य में सब कुर्सियाँ

अरे! छोटा राम धीरे पढ़ता है और सोता है, वाह! पर आह! थक गया।

  • अरे, वाह, आह — विस्मयादिबोधक, 3 झटके
  • छोटा — विशेषण
  • राम — संज्ञा
  • धीरे — क्रिया विशेषण
  • पढ़ता / सोता / थक गया — क्रिया
  • और — समुच्चयबोधक
  • पर — यहाँ विरोध, समुच्चयबोधक

हे गाँधी! सत्य के बिना नहीं चला जा सकता।

  • हे — संबोधन झटका
  • गाँधी — संज्ञा; चंद्रबिंदु
  • के बिना — संबंधबोधक
  • नहीं — निषेध
  • चला जा सकता — क्रिया + सहायक

15. शब्द तोड़कर पूरा

अरे / ओ / ऐ

आश्चर्य या पुकार। समुच्चय नहीं।

वाह / शाबाश / आहा

खुशी। अयोगवाह नहीं। विशेषण नहीं।

हे

संबोधन। राम संज्ञा। कारक रूप विचार में।

आह / हाय / उफ़

दुख, दर्द। आह भरी — संज्ञा सोचो।

आ!

पुकार, शब्द। आ स्वर वर्ण अलग।

हाँ / जी

हाँ-कहने का झटका। नहीं निषेध। ही निपात आगे।

छिः / धिक्

घिन।

जाओ / बचाओ

अक्सर क्रिया। अकेला झटका हो तो वाक्य पूछो।

और / लेकिन

समुच्चयबोधक।

वाह! गाँधी धीरे बोले, अरे! सब चुप हो गए। — वाह खुशी, अरे आश्चर्य, गाँधी संज्ञा, धीरे क्रिया विशेषण। चंद्रबिंदु गाँधी में।

16. आम गलतियाँ

  • वाह को अयोगवाह से जोड़ना। अयोगवाह अलग।
  • अरे / वाह को समुच्चयबोधक लिखना। पुल नहीं, झटका है।
  • हे को क्रिया या संज्ञा लिखना। हे पुकार, राम नाम।
  • जाओ को सिर्फ़ विस्मयादिबोधक लिखना। आज्ञा क्रिया।
  • आ चार्ट और आ! एक कुर्सी पर ठोकना।
  • हाँ को निपात वाले विषय में पूरा कर लेना। हाँ-कहना आज; ही-भी वहाँ।
  • नहीं को विस्मयादिबोधक लिखना। निषेध क्रिया विशेषण वाले विषय में।
  • विस्मय चिह्न को शब्द मानना। चिह्न विराम वाले विषय में, शब्द आज।
  • 8 विकार में निपात चढ़ा देना। निपात अलग तह, आगे।
  • आह भरी में आह को हमेशा झटका लिखना। वहाँ नाम छू सकता है।

जाँच: (1) अचानक भाव? विस्मयादिबोधक। (2) अरे आश्चर्य, वाह खुशी, हे पुकार, आह दुख। (3) और पुल, के रिश्ता, धीरे ढंग। (4) आ वर्ण बनाम आ! शब्द। (5) 8वाँ विकार आज, रूप विकारी वाले विषय में।

17. इस विषय का सार

  • विस्मयादिबोधक अचानक भाव है — 8वाँ विकार।
  • अरे आश्चर्य/पुकार। वाह खुशी। हे संबोधन। आह दुख/दर्द।
  • अकेला भी चल सकता है। जोड़ नहीं, रिश्ता नहीं, काम नहीं।
  • आ! शब्द, आ स्वर। वाह ≠ अयोगवाह। जाओ क्रिया।
  • हाँ मान लेना यहाँ; नहीं निषेध; ही-भी निपात आगे। अविकारी।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. विस्मयादिबोधक क्या है? कार्ड के 4 शब्द लिखो। यह 8वाँ विकार है?

उत्तर

जो अव्यय अचानक मन का भाव निकाले। अरे, वाह, हे, आह। हाँ — शब्द विचार की 8 कुर्सियों में आखिरी, भाव की।

2. वाह अयोगवाह है? अरे समुच्चयबोधक है?

उत्तर

नहीं — अयोगवाह अं-अः अलग; वाह खुशी का झटका। नहीं — अरे झटका है, पुल और है।

3. हे संज्ञा है? जाओ सिर्फ़ विस्मयादिबोधक है?

उत्तर

नहीं — हे पुकार, राम नाम (संज्ञा); संबोधन कारक रूप विचार में। नहीं — जाओ आज्ञा, क्रिया; अकेला झटका हो तो वाक्य पूछो।

4. आ चार्ट और आ! एक कुर्सी हैं? हाँ निपात यहीं पूरा खोलना है?

उत्तर

नहीं — आ स्वर (वर्ण); आ! विस्मयादिबोधक। नहीं — हाँ मान लेना आज; ही-भी निपात आगे।

5. विस्मय चिह्न शब्द है? “आह भरी” में आह हमेशा झटका है?

उत्तर

नहीं — चिह्न विराम वाले विषय में; शब्द विस्मयादिबोधक है। नहीं — आह भरी में आह संज्ञा जैसी जगह छू सकती है; अकेला आह! झटका।

विषय समाप्त · विस्मयादिबोधक