अंग 2 · शब्द विचार
पाठ 2.13
विषय शुरू · समुच्चयबोधक
संबंधबोधक वाले विषय में संज्ञा के बाद का रिश्ता खुला — के सामने, के बाद, के बिना। आज वह शब्द जो दो शब्द, दो पद या दो बातें जोड़ दे। कार्ड के 4: और, लेकिन, क्योंकि, इसलिए। संबंधबोधक रिश्ता बाँधे, नया जोड़ न खोले। क्यों प्रश्न क्रिया विशेषण वाले विषय में। विस्मयादिबोधक आगे। सरल-संयुक्त-मिश्र वाक्य विचार में। निपात वाला तो आगे। आज जोड़ की कुर्सी।
1. कुर्सी — जोड़ना
परिभाषा सीधी रखो: जो अव्यय दो या अधिक शब्दों, पदों या वाक्यों को जोड़कर उनके बीच संबंध बताए, वह समुच्चयबोधक है। अव्यय = रूप न बदलने वाला शब्द। समुच्चय = इकट्ठा करना। यह नाम नहीं है, गुण नहीं, काम नहीं। पुल है।
राम और श्याम आए। — दो नाम।
वह पढ़ता है और सोता है। — दो काम। शब्द और वाक्य वाले विषय का वाक्य यहीं पूरा नाम पाता है।
आया लेकिन थक गया। — दो बातें, बीच में विरोध।
नहीं आया क्योंकि बीमार था। — कारण जोड़।
बीमार था, इसलिए सो गया। — परिणाम (नतीजा) जोड़।
प्रश्न: कौन सा शब्द दो टुकड़े जोड़ रहा है? हटाओ — जोड़ टूटे, दो टुकड़े अलग पड़ें — समुच्चयबोधक।
जाँच: शब्द हटाओ। दो नाम या दो बातें बिखर जाएँ? समुच्चयबोधक। संज्ञा का रिश्ता टूटे (किसके सामने)? संबंधबोधक। काम का ढंग टूटे? क्रिया विशेषण।
2. 4 कार्ड एक नज़र में
4 काम अलग हैं। एक और रटकर बाकी तीन गायब मत करो।
| शब्द | काम | उदाहरण |
|---|---|---|
| और | जोड़, साथ | रोटी और दाल। राम आया और बैठा। |
| लेकिन | विरोध | आया लेकिन काम न किया। |
| क्योंकि | कारण | रुका क्योंकि वर्षा हुई। |
| इसलिए | परिणाम (नतीजा) | वर्षा हुई, इसलिए रुका। |
क्योंकि और इसलिए एक ही घटना के दो सिरे हैं। एक कारण से घुसता है, एक नतीजे से। दोनों को एक शब्द मत लिखो।
जाँच: साथ? और। उल्ट? लेकिन। वजह? क्योंकि। नतीजा? इसलिए।
3. दो शब्द, या दो बातें
एक ही और दो स्तर पर बैठता है। स्तर पूछो, नाम मत बदलो।
| क्या जुड़ा | उदाहरण |
|---|---|
| दो संज्ञा | गाय और भैंस चरती हैं। |
| दो विशेषण | लाल और नीला झंडा। |
| दो क्रिया / दो बातें | वह पढ़ता है और लिखता है। |
राम और श्याम आए। — एक क्रिया, दो कर्ता; और शब्द जोड़ रहा है। राम आया और श्याम गया। — दो क्रियाएँ, दो बातें। दूसरा वाक्य संयुक्त की तरफ़ जाता है — नाम वाक्य भेद वाले विषय में। आज: दोनों जगह और समुच्चयबोधक है।
लेकिन और क्योंकि अक्सर बात जोड़ते हैं, दो नाम नहीं। राम लेकिन श्याम — अधूरा। राम आया लेकिन श्याम नहीं आया — पूरा।
जाँच: और दो नाम भी जोड़ सकता है। लेकिन / क्योंकि अक्सर दो बातें माँगते हैं। वाक्य पूछो।
4. दो घर — बराबर जोड़, टिका जोड़
स्कूल जोड़ को दो घरों में रखती है। समानाधिकरण = बराबर जोड़। व्यधिकरण = टिका जोड़। नाम रटो कम, काम देखो अधिक। पूरा वाक्य-भेद वाक्य विचार में; आज पुल किस तरह का है।
| घर | काम | कार्ड से |
|---|---|---|
| समानाधिकरण (बराबर जोड़) | दो बाजू अपने पैर पर जैसे; एक को काटो तो दूसरी बात खड़ी रह सकती है | और, लेकिन, इसलिए |
| व्यधिकरण (टिका जोड़) | एक बाजू दूसरी पर टिकी; काटो तो कारण/शर्त अधूरी | क्योंकि |
राम आया और श्याम गया। — दोनों बातें अपने पैर पर। वह नहीं आया क्योंकि बीमार था। — क्योंकि वाला टुकड़ा कारण है, अकेला क्योंकि बीमार था बात अधूरी। यदि / कि / यद्यपि भी व्यधिकरण परिवार — आगे।
आज पहचान: कार्ड के 4 पहचानो। घर का नाम वाक्य टूटने से निकालो, सूची से नहीं।
जाँच: जोड़ हटाकर दोनों टुकड़े पूरे वाक्य जैसे? समानाधिकरण सोचो। एक टुकड़ा क्योंकि/यदि पर लटका? व्यधिकरण।
5. और — साथ जोड़ना
सबसे सीधा समुच्चयबोधक। काम: साथ, जोड़, गिनती का आखिरी सीढ़ी।
रोटी और साग।
राम, श्याम और मोहन आए। — सूची के अंत में और।
गाँधी सत्य और अहिंसा दोनों पकड़े। — चंद्रबिंदु गाँधी में।
न केवल पढ़ा बल्कि लिखा भी। — ज़ोर वाला जोड़; लेकिन नहीं, और के परिवार का विस्तार।
तथा, एवं — लिखने की भाषा में और। आज कुर्सी वही: साथ। व कभी बोलचाल में और की जगह। तीनों को अलग भेद मत गढ़ो।
और क्या? — यहाँ और प्रश्न/आश्चर्य छू सकता है, शुद्ध जोड़ नहीं। वाक्य पूछो। आज मूल: दो टुकड़े इकट्ठे।
जाँच: दो चीज़ें साथ? और। विरोध? लेकिन सोचो, और मत ठोको।
6. या — चुनाव
कार्ड पर नहीं, परिवार में है। दो में से एक, या दोनों की संभावना। बिना इसके और अधूरा रह जाता है।
चाय या दूध?
राम आएगा अथवा श्याम। — अथवा लिखने की भाषा वाला या।
न राम आया, न श्याम। — न…न भी चुनाव/निषेध का जोड़।
या समानाधिकरण। राम या श्याम आएगा — दो नाम। पढ़ोगे या सोओगे — दो काम। सूची रटकर या हमेशा संज्ञा मत लिखो।
कि क्या? कभी या की जगह बोलचाल: नहीं जानता कि आऊँ या बैठूँ। कि का पूरा काम आगे।
7. लेकिन — विरोध
कार्ड का दूसरा शब्द। पहली बात के खिलाफ दूसरी। साथ नहीं, टक्कर।
सूरज निकला लेकिन ठंड रही।
मेहनत की, पर फल न मिला। — पर यहाँ लेकिन।
आया किन्तु बोला नहीं। मगर रुका। — किन्तु / मगर एक ही कुर्सी; किन्तु लिखने की भाषा, मगर बोलचाल।
पर दो कुर्सियाँ छूता है। किताब मेज़ पर है। — पर जगह, कारक अधिकरण, रूप विचार में। आया पर बैठा नहीं। — पर विरोध, समुच्चयबोधक। एक पर, वाक्य पूछो।
लेकिन दो संज्ञा के बीच अकेला कम बैठता है। लाल लेकिन नीला झंडा — अधूरा सा। झंडा लाल है लेकिन रंग फीका है — बात। और स्थान पर लेकिन मत चिपकाओ।
जाँच: उल्टी बात जुड़ी? लेकिन / पर / किन्तु। पर जगह? कारक रूप विचार में। साथ? और।
8. क्योंकि — कारण
कार्ड का तीसरा। पीछे वजह बताता है। व्यधिकरण: क्योंकि वाला टुकड़ा कारण है, मुख्य बात दूसरी तरफ़।
वह रुका क्योंकि वर्षा हो रही थी।
गाँधी चले क्योंकि सत्य पकड़ना था। — चंद्रबिंदु।
चूँकि थक गया था, सो गया। — चूँकि क्योंकि का साथी; अक्सर वाक्य के आगे।
क्यों रो रहे हो? — क्यों प्रश्न, क्रिया विशेषण। क्योंकि भूख लगी है। — क्योंकि जोड़, समुच्चयबोधक। क्यों पूछता है, क्योंकि जवाब का पुल है। एक मात्रा नहीं; कि जुड़ा है।
के कारण संबंधबोधक: वर्षा के कारण रुका। क्योंकि वर्षा हुई, रुका। — एक रिश्ता संज्ञा से, एक जोड़ बात से। दोनों कारण छूते हैं, कुर्सी अलग।
जाँच: क्यों? प्रश्न, क्रिया विशेषण। क्योंकि? जोड़ आज। के कारण? संबंधबोधक। 3 कारण-से-लगते शब्द, 3 कुर्सियाँ।
9. इसलिए — परिणाम
कार्ड का चौथा। परिणाम = नतीजा। क्योंकि कारण से घुसता है; इसलिए नतीजे से निकालता है। एक घटना, दो दरवाज़े।
| कारण से | नतीजे से |
|---|---|
| रुका क्योंकि वर्षा हुई। | वर्षा हुई, इसलिए रुका। |
| सोया क्योंकि थक गया। | थक गया, इसलिए सोया। |
अतः, अतएव — इसलिए के पास। फलतः भी नतीजा। कुर्सी एक।
इसलिए कि — कभी क्योंकि की जगह लंबा रूप: इसलिए नहीं आया कि काम था। आज कार्ड का इसलिए काफी; कि आगे।
क्रिया विशेषण और संबंधबोधक वाले विषयों में: इसलिए को संबंधबोधक मत लिखो। के कारण रिश्ता, इसलिए जोड़।
जाँच: नतीजा आगे? इसलिए। वजह पीछे? क्योंकि। दोनों एक वाक्य में भी आ सकते हैं: क्योंकि वर्षा हुई इसलिए रुके — दो पुल, एक घटना।
10. यदि, तो, यद्यपि — संकेत
शर्त और मान लेना भी जोड़ हैं। कार्ड के 4 नहीं; परिवार खाली मत छोड़ो, वाक्य भेद वाला विषय मत चुराओ।
यदि वर्षा हुई तो फसल अच्छी होगी। — शब्द और वाक्य वाले विषय की झलक; यदि शर्त, तो नतीजा।
यद्यपि थक गया, तथापि चला। — मानकर भी उल्ट।
ये व्यधिकरण — टिका जोड़। पूरा मिश्र वाक्य — मुख्य और टिका टुकड़ा — वाक्य भेद और वाक्य विश्लेषण वाले विषयों में। आज: यदि/यद्यपि समुच्चयबोधक हैं, क्रिया नहीं, संबंधबोधक नहीं।
तो यहाँ जोड़ का दूसरा सिरा है। बल वाला तो निपात है — निपात वाले विषय में। दो कुर्सियाँ अगले खंड में।
11. कि — कही हुई बात का पुल
उसने कहा कि राम आएगा। — कि दो टुकड़े जोड़ता है: कहना, और कही बात। व्यधिकरण। आज इतना; उपवाक्य तोड़ना वाक्य भेद और वाक्य विश्लेषण वाले विषयों में।
जानता हूँ कि तुम थके हो।
चाहता हूँ कि सब आएँ।
कि क्या? प्रश्न में कि अलग काम कर सकता है। वाक्य पूछो। आज मूल: कहा / जाना / चाहना के बाद कि पुल। उसे विशेषण मत लिखो, संज्ञा मत लिखो।
12. संबंधबोधक से फर्क
संबंधबोधक वाले विषय की दीवार आज दोनों तरफ़ से पक्की।
| संबंधबोधक | समुच्चयबोधक |
|---|---|
| राम के बाद श्याम आया। | राम आया और श्याम आया। |
| बारिश के कारण भीगे। | बारिश हुई इसलिए भीगे। / क्योंकि बारिश हुई, भीगे। |
| मेहनत के बिना फल नहीं। | मेहनत करो नहीं तो फल नहीं। |
संबंधबोधक संज्ञा के कंधे पर के/की माँगता है। समुच्चयबोधक दो बातों या दो शब्दों के बीच पुल है, के नहीं माँगता। घर के और — ग़लत जोड़; घर और बगीचा — सही।
जाँच: किसके बाद / किसके कारण? संबंधबोधक। दो बातें और / लेकिन / क्योंकि / इसलिए? आज।
13. तो — जोड़ या बल
यदि…तो वाला तो समुच्चयबोधक के पास बैठता है। अकेला तो अक्सर निपात है — वाक्य का बल, निपात वाले विषय में।
| वाक्य | कुर्सी |
|---|---|
| यदि वह आए तो बताना। | तो जोड़ का सिरा, शर्त का जोड़ा |
| मैं तो जाऊँगा। | तो बल; ही-भी-तो परिवार, निपात आगे |
| नहीं तो मत आना। | नहीं तो जोड़; चेतावनी का पुल |
आज: यदि के साथ तो दिखे तो जोड़ सोचो। अकेला तो वाक्य के बीच बल निपात सोचो। पूरा निपात-घर वहाँ। ही, भी, तक यहीं मत खोलो।
जाँच: यदि…तो? जोड़। मैं तो? बल, निपात। और/लेकिन से तो मत मिलाओ बिना वाक्य के।
14. रूप नहीं बदलता; जगह
समुच्चयबोधक अविकारी है — रूप नहीं बदलता। राम और श्याम, लड़की और लड़का — और वैसा का वैसा। लेकिन, क्योंकि, इसलिए लिंग-वचन नहीं माँगते। पूरा अव्यय विकारी-अव्यय वाले विषयों में।
जगह: दो टुकड़ों के बीच। राम आया और श्याम गया। क्योंकि कभी कारण-टुकड़े के आगे: क्योंकि थक गया, सोया। इसलिए अक्सर दूसरी बात के आगे: थक गया, इसलिए सोया। पूरा क्रम और विराम वाक्य विचार में। आज: पुल बीच में या टिका टुकड़े के सिरे पर।
छोटा विराम चिह्न लिखना या न लिखना विराम चिह्न वाले विषय में। अर्थ का पुल आज।
15. वाक्य में सब कुर्सियाँ
छोटा राम धीरे पढ़ता है और सोता है, लेकिन जल्दी थक जाता है क्योंकि रात कम सोया; इसलिए सुबह भारी रहता है।
- छोटा — विशेषण
- राम — संज्ञा
- धीरे — क्रिया विशेषण
- पढ़ता / सोता / थक जाता / सोया / रहता — क्रिया
- है / जाता है — सहायक
- और — साथ जोड़
- लेकिन — विरोध
- क्योंकि — कारण
- इसलिए — परिणाम (नतीजा)
4 कार्ड एक लंबी बात में। रटना नहीं; हर पुल का काम अलग।
गाँधी सत्य के बिना नहीं चले और अहिंसा पकड़ी, लेकिन मार्ग कठिन था क्योंकि विरोध था; इसलिए धीरज रखा।
- के बिना — संबंधबोधक
- और / लेकिन / क्योंकि / इसलिए — आज के 4
- गाँधी — संज्ञा; चंद्रबिंदु
16. शब्द तोड़कर पूरा
और / तथा / एवं
साथ। दो नाम या दो बातें।
या / अथवा
चुनाव। कार्ड का पड़ोसी।
लेकिन / पर / किन्तु / मगर
विरोध। पर जगह भी — रूप विचार में।
क्योंकि / चूँकि
कारण का पुल। क्यों प्रश्न, क्रिया विशेषण।
इसलिए / अतः
परिणाम (नतीजा)। के कारण संबंधबोधक।
यदि / तो / यद्यपि / तथापि
शर्त-मान; मिश्र वाक्य विचार में। तो बल निपात भी।
कि
कही बात का पुल।
के बाद / के कारण / के बिना
संबंधबोधक। आज की सूची का मूल नहीं।
गाँधी बोले और लोग सुनते रहे, लेकिन कुछ हँसे क्योंकि बात कठिन थी; इसलिए उन्होंने फिर कहा। — 4 पुल। चंद्रबिंदु गाँधी में।
17. आम गलतियाँ
- और को क्रिया लिखना। जोड़ है, काम नहीं।
- क्यों और क्योंकि एक करना। क्यों प्रश्न, क्योंकि पुल।
- इसलिए को संबंधबोधक लिखना। के कारण संबंधबोधक; इसलिए आज।
- के बाद को लेकिन की जगह ठोकना। के बाद रिश्ता, लेकिन विरोध।
- राम लेकिन श्याम जैसे दो नाम पर लेकिन चढ़ा देना।
- पर को हमेशा कारक लिखना। आया पर रुका — जोड़।
- तो को हमेशा निपात लिखना। यदि…तो जोड़।
- संयुक्त-मिश्र यहीं पूरा कर लेना। वाक्य भेद वाले विषय में।
- क्योंकि वाले टुकड़े को अकेला पूरा वाक्य मानकर घर गड्डमड्ड करना।
- अरे / वाह को समुच्चयबोधक लिखना। विस्मयादिबोधक आगे।
जाँच: (1) दो टुकड़े जुड़ रहे? समुच्चयबोधक। (2) साथ और, उल्ट लेकिन, वजह क्योंकि, नतीजा इसलिए। (3) किसके + के? संबंधबोधक। (4) क्यों? क्रिया विशेषण। (5) यदि…तो जोड़; मैं तो बल।
18. इस विषय का सार
- समुच्चयबोधक दो शब्द या दो बातें जोड़ता है — पुल, नाम नहीं।
- और साथ। लेकिन विरोध। क्योंकि कारण। इसलिए परिणाम (नतीजा)।
- समानाधिकरण — और, लेकिन, इसलिए। व्यधिकरण — क्योंकि; यदि, कि आगे।
- क्यों प्रश्न, क्योंकि पुल। के कारण संबंधबोधक, इसलिए जोड़।
- पर जगह या विरोध — वाक्य पूछो। तो जोड़ या निपात। अविकारी।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. समुच्चयबोधक क्या है? कार्ड के 4 शब्द लिखो। और क्रिया है?
उत्तर
जो अव्यय दो या अधिक शब्दों, पदों या वाक्यों को जोड़कर संबंध बताए — पुल। और, लेकिन, क्योंकि, इसलिए। नहीं — और जोड़ है, काम नहीं।
2. क्यों और क्योंकि एक हैं? इसलिए संबंधबोधक है?
उत्तर
नहीं — क्यों प्रश्न (क्रिया विशेषण), क्योंकि कारण का पुल। नहीं — इसलिए परिणाम (नतीजा) का जोड़; के कारण संबंधबोधक है।
3. पर हमेशा कारक है? “राम लेकिन श्याम” पूरा है?
उत्तर
नहीं — किताब मेज़ पर है में पर जगह (कारक); आया पर बैठा नहीं में पर विरोध (जोड़)। नहीं — लेकिन अक्सर दो बातें माँगता है; राम आया लेकिन श्याम नहीं आया।
4. “यदि वह आए तो बताना” और “मैं तो जाऊँगा” — तो एक कुर्सी? संयुक्त-मिश्र यहीं पूरा?
उत्तर
नहीं — पहला तो जोड़ (शर्त का जोड़ा); दूसरा तो बल, निपात आगे। नहीं — मिश्र वाक्य भेद वाले विषय में; आज पुल की कुर्सी।
5. के कारण और क्योंकि एक हैं? अरे / वाह समुच्चयबोधक हैं?
उत्तर
नहीं — के कारण संबंधबोधक (संज्ञा का रिश्ता); क्योंकि बात का पुल। नहीं — अरे / वाह विस्मयादिबोधक आगे।
विषय समाप्त · समुच्चयबोधक
