Noteclass 9 10

संबंधबोधक

Lesson 23 of 71

अंग 2 · शब्द विचार

पाठ 2.12

विषय शुरू · संबंधबोधक

क्रिया विशेषण वाले विषय में क्रिया से चिपका शब्द खुला — कैसे, कब, कहाँ, कितना। आज वह जोड़ जो संज्ञा या सर्वनाम के बाद बैठकर वाक्य के दूसरे शब्द से रिश्ता बाँधे। कार्ड के 3: के सामने, के बाद, के बिना। यह क्रिया विशेषण नहीं। ने, को, से, में, पर कारक रूप विचार में। और, लेकिन जोड़ समुच्चयबोधक आगे। अव्यय का घर विकारी-अव्यय वाले विषयों में। आज रिश्ता और 3 जोड़, 8 कारक की दीवार नहीं।

1. कुर्सी — रिश्ता बाँधना

परिभाषा सीधी रखो: जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम का किसी दूसरे शब्द से संबंध बताए, वह संबंधबोधक है। अव्यय = रूप न बदलने वाला शब्द। काम का ढंग नहीं पूछता। नाम की जगह नहीं भरता। दो वाक्य नहीं जोड़ता। संज्ञा के कंधे पर बैठकर बताता है — किसके सामने, किसके बाद, किसके बिना।

घर के सामने पेड़ है। — घर और पेड़ का स्थान-रिश्ता।

खाना के बाद सोना। — खाना और सोना का समय-रिश्ता।

पानी के बिना मत निकलो। — पानी का अभाव।

प्रश्न: किसके सामने? किसके बाद? किसके बिना? उत्तर में संज्ञा/सर्वनाम + संबंधबोधक आते हैं। पेड़ कहाँ? घर के सामने — घर के सामने जगह बताता है, पर कुर्सी क्रिया की नहीं, घर के रिश्ते की है।

जाँच: शब्द हटाओ। किसका रिश्ता? टूटे — संबंधबोधक सोचो। कैसे/कब/कहाँ काम? टूटे — क्रिया विशेषण। नाम छूटे — संज्ञा।

2. 3 कार्ड एक नज़र में

स्कूल इन्हीं तीन से पहचान करवाती है। बाकी जोड़ इसी कुर्सी पर बैठते हैं — सूची रटना नहीं, काम पूछना।

जोड़ रिश्ता उदाहरण
के सामने स्थान — आगे / मुँह की तरफ़ स्कूल के सामने बाज़ार है।
के बाद समय — पीछे आने वाला पाठ के बाद खेलना।
के बिना अभाव — साथ न होना टोपी के बिना ठंड लगती है।

तीनों में के दिखता है। स्कूल अक्सर पूरा जोड़ एक संबंधबोधक मानती है — के अलग कारक, सामने अलग शब्द, ऐसे तोड़कर दो भेद मत लिखो। का/के/की अकेले संबंध कारक रूप विचार में। आज जोड़।

जाँच: के + शब्द संज्ञा के बाद? संबंधबोधक सोचो। के अकेला राम का घर? कारक, रूप विचार में।

3. बनावट — संज्ञा के बाद, अक्सर के

हिंदी में यह जोड़ संज्ञा के बाद बैठता है, पहले नहीं। घर के सामने — सही। के सामने घर — यही अर्थ हो सकता है, पर ढाँचा संज्ञा + संबंधबोधक याद रखो। पूरा वाक्य क्रम वाक्य विचार में।

ढाँचा उदाहरण
संज्ञा + के + शब्द पेड़ के नीचे, नदी के किनारे
संज्ञा + की + शब्द राम की तरह, घर की ओर
सर्वनाम का झुका रूप + जोड़ मेरे सामने, उसके बिना, तुम्हारे बाद

की तरह, की ओर, की तरफ — यहाँ की लगता है, के नहीं। जोड़ रटो: तरह/ओर के साथ की। बाकी अधिकतर के।

कुछ किताबें इन जोड़ों को परसर्ग भी कहती हैं। नाम कारक वाले विषयों के पास बैठता है। आज स्कूल वाला नाम: संबंधबोधक।

4. स्थान — के सामने और परिवार

कार्ड का पहला जोड़ जगह बाँधता है। पास-पड़ोस के और जोड़ उसी कुर्सी पर हैं।

मकान के सामने बगीचा है।

घर के पीछे गली है।

छत के ऊपर चिड़िया बैठी है।

पेड़ के नीचे छाया है।

स्कूल के पास दूकान है।

कमरे के बाहर खड़े रहो। घर के अंदर आओ।

गाँव की ओर चलो। नदी की तरफ मत जाओ।

सामने, ऊपर, नीचे, पास, बाहर अकेले भी चलते हैं — तब अक्सर क्रिया विशेषण। संज्ञा के बाद के/की जुड़ जाए तो रिश्ता, संबंधबोधक।

क्रिया विशेषण संबंधबोधक
सामने बैठो। घर के सामने बैठो।
ऊपर जाओ। पहाड़ के ऊपर जाओ।
पास आओ। राम के पास आओ।
बाहर निकलो। शहर के बाहर निकलो।

क्रिया विशेषण वाले विषय की गाँठ आज पक्की: अकेला शब्द बनाम के + शब्द। दोनों अविकारी परिवार के पास; कुर्सी अलग।

जाँच: किसके सामने / किसके पास? संबंधबोधक। कहाँ, बिना किसके? क्रिया विशेषण सोचो।

5. काल — के बाद, के पहले

कार्ड का दूसरा जोड़ समय बाँधता है। पहले, दौरान, साथ-साथ समय के रिश्ते भी यहीं।

भोजन के बाद हाथ धोओ।

सूरज निकलने के पहले पक्षी बोलते हैं।

पाठ के दौरान चुप रहो।

गाँधी के बाद भी सत्य की बात चली। — चंद्रबिंदु गाँधी में।

बाद में आना। पहले उठो। — बाद / पहले क्रिया विशेषण। खाने के बाद आना। — के बाद संबंधबोधक; खाना संज्ञा (काम का नाम)। एक बाद, दो कुर्सियाँ।

जब राम आया, तब हम चले। — जब/तब क्रिया विशेषण का संबंध। खाने के बाद चले। — संज्ञा + के बाद। मिश्र वाक्य वाक्य विचार में; आज जोड़ की कुर्सी।

जाँच: किसके बाद / किसके पहले? संबंधबोधक। कब, बिना संज्ञा के कंधे? कालवाचक क्रिया विशेषण।

6. अभाव — के बिना, और बिना का घूमना

कार्ड का तीसरा जोड़: साथ न होना। हिंदी में बिना दो जगह बैठ सकता है। दोनों संबंधबोधक की कुर्सी पर हैं, नया भेद नहीं।

ढाँचा उदाहरण
संज्ञा + के बिना पानी के बिना यात्रा कठिन है।
बिना + संज्ञा + के बिना पानी के मत निकलो।

बिना टोपी के / टोपी के बिना — एक ही अभाव। के गायब करके बिना टोपी मत निकलो बोलचाल में चलता है; लिखावट में के रखना साफ़ है।

के सिवा, के अलावा — अभाव या छोड़ने का रिश्ता, उसी परिवार। राम के सिवा सब आए। के बिना = साथ न होना; के सिवा = छोड़कर। फर्क अर्थ का है, कुर्सी एक।

मेहनत के बिना फल नहीं।

बिना मेहनत के फल नहीं।

तुम्हारे बिना घर सूना है।

जाँच: किसके बिना? अभाव, संबंधबोधक। नहीं जाता — निषेध, क्रिया विशेषण / निपात की सीमा। बिना को क्रिया मत लिखो।

7. और रिश्ते — लिए, बारे, तरह, द्वारा, साथ

3 कार्ड मूल हैं। स्कूल और जोड़ भी इसी कुर्सी पर रखती है। काम पूछो, सूची न रटो।

जोड़ रिश्ता उदाहरण
के लिए किसके काम बच्चों के लिए दूध लाओ।
के बारे में / के विषय में विषय देश के बारे में बात करो।
की तरह / के समान समानता राम की तरह बोलो। शेर के समान बल।
के द्वारा / के जरिए रास्ता पत्र के द्वारा समाचार आया।
के साथ साथ माँ के साथ बाजार गए।
के विरुद्ध / के विपरीत विरोध नियम के विरुद्ध मत चलो।
के अनुसार / के अनुरूप आधार नियम के अनुसार बैठो।

साथ आओ। — साथ क्रिया विशेषण। माँ के साथ आओ। — संबंधबोधक। वही अकेला/के वाली गाँठ।

जैसा करोगे, वैसा भरोगे। — जैसा क्रिया विशेषण। राम की तरह करोगे। — की तरह संबंधबोधक। एक समानता, दो कुर्सियाँ।

जाँच: किसके लिए / किसकी तरह / किसके साथ? संबंधबोधक। कैसे / जैसा बिना संज्ञा के कंधे? क्रिया विशेषण।

8. के लिए और को — झलक, दीवार रूप विचार में

बच्चों के लिए किताब लाओ। — के लिए संबंधबोधक, किसके काम। बच्चों को किताब दो। — को कारक की झलक, रूप विचार में। दोनों फायदा छूते हैं, कुर्सी अलग।

राम के लिए चाय बनाओ। — राम का हित, के लिए।

राम को चाय दो। — को; कारक रूप विचार में।

पत्र के द्वारा भेजो। — रास्ता, संबंधबोधक।

कलम से लिखो। — से करण; कारक रूप विचार में।

ने, को, से, में, पर, का — छोटी विभक्ति, कारक और विभक्ति वाले विषयों में। के सामने जैसा लंबा जोड़ आज की कुर्सी। दोनों को एक नाम मत लिखो। पूरा ने-नियम, 8 भेद, वहाँ।

राम का घर। — का संबंध कारक, विशेषण जैसा काम, रूप विचार में। घर के सामने। — के सामने संबंधबोधक। का ≠ के सामने।

जाँच: छोटा चिह्न ने/को/से/में/पर/का? कारक सोचो, रूप विचार में। के सामने / के बिना / के लिए? संबंधबोधक।

9. समुच्चयबोधक से फर्क

और, लेकिन, क्योंकि दो वाक्य या दो पद जोड़ते हैं — समुच्चयबोधक आगे। संबंधबोधक संज्ञा का रिश्ता बाँधता है, नया वाक्य नहीं खोलता।

संबंधबोधक समुच्चयबोधक
राम के बाद श्याम आया। राम आया और श्याम आया।
बारिश के कारण भीग गए। बारिश हुई इसलिए भीग गए।
मेहनत के बिना फल नहीं। मेहनत करो नहीं तो फल नहीं।

के कारण रिश्ता। इसलिए जोड़ — समुच्चयबोधक वाले विषय में। आज इसलिए को संबंधबोधक मत लिखो। क्योंकि भी वहाँ।

के कारण, की वजह से — कारण का रिश्ता, संबंधबोधक परिवार। बारिश के कारण छुट्टी। कर्ता बारिश नहीं ठोकना जल्दीबाज़ी; रिश्ता कारण का है।

10. सर्वनाम के साथ — मेरे, उसके, तुम्हारे

मैं के सामने नहीं चलता। रूप झुक जाता है — मैं नहीं, मेरे: मेरे सामने। तुम → तुम्हारे बिना। वह → उसके बाद। आप → आपके लिए। यह मेल सर्वनाम का है, संबंधबोधक नहीं बदलता।

कर्ता रूप संबंधबोधक के साथ
मैं मेरे सामने, मेरे बिना, मेरे बाद
तुम तुम्हारे साथ, तुम्हारे लिए
वह / यह उसके पास, इसके बारे में
हम / आप हमारे बीच, आपके अनुसार

मेरा घर — मेरा सार्वनामिक/संबंध, सर्वनाम और विशेषण वाले विषयों में। मेरे सामने — मेरे + संबंधबोधक। मेरा विशेषण जैसे घर से चिपकता है; मेरे यहाँ सामने से चिपकता है। अपना घर / अपने सामने — निज, सर्वनाम के भेद वाले विषय में; अपने संबंधबोधक के पहले झुका रूप।

गाँधी के सामने भीड़ थी। — संज्ञा + के। उनके सामने भीड़ थी। — सर्वनाम + के। चंद्रबिंदु गाँधी में।

जाँच: मैं के सामने ग़लत। मेरे सामने सही। संबंधबोधक वही; सर्वनाम का रूप बदला।

11. रूप नहीं बदलता — झलक

संबंधबोधक अविकारी है — रूप नहीं बदलता। लड़के के सामने, लड़की के सामने, बच्चों के सामने — के सामने वैसा का वैसा। घर के बिना, नदियों के बिना — बिना नहीं बनता बिनी।

बदलता है संज्ञा/सर्वनाम का रूप (लड़के, मेरे), जोड़ नहीं। पूरा विकारी-अविकारी और अव्यय आगे। आज इतना कि के सामने को के समनी न बनाओ।

की तरह में की स्त्रीलिंग नहीं माँगती कि तरह स्त्रीलिंग है — जोड़ स्थिर है। राम की तरह, सीता की तरह — की तरह एक।

12. वाक्य में जगह — झलक

संबंधबोधक अपनी संज्ञा के तुरंत बाद रहता है। घर के सामने पेड़ है। बीच में विशेषण आ सकता है: बड़े घर के सामने। पूरा क्रम वाक्य विचार में।

लाल घर के सामने कुआँ है। — लाल विशेषण, घर संज्ञा, के सामने संबंधबोधक।

वह धीरे घर के पीछे गया। — धीरे क्रिया विशेषण; के पीछे संबंधबोधक।

के बारे में लंबा है — देश के बारे में बात। तोड़कर के बारे और में दो भेद मत लिखो; स्कूल एक जोड़ मानती है। में अकेला अधिकरण रूप विचार में।

13. वाक्य में सब कुर्सियाँ

छोटा राम पाठ के बाद घर के सामने धीरे बैठा; टोपी के बिना ठंड लगी।

  • छोटा — विशेषण
  • राम — संज्ञा, कर्ता
  • पाठ — संज्ञा
  • के बाद — संबंधबोधक, काल
  • घर — संज्ञा
  • के सामने — संबंधबोधक, स्थान
  • धीरे — क्रिया विशेषण
  • बैठा — क्रिया
  • टोपी — संज्ञा
  • के बिना — संबंधबोधक, अभाव
  • ठंड — संज्ञा
  • लगी — क्रिया

गाँधी सत्य के बिना नहीं चलते थे।

  • गाँधी — संज्ञा; चंद्रबिंदु
  • सत्य — संज्ञा
  • के बिना — अभाव
  • नहीं — निषेध
  • चलते थे — क्रिया + सहायक

तुम्हारे बिना मैं नहीं जाऊँगा। — तुम्हारे झुका रूप; के बिना; मैं कर्ता; नहीं निषेध; जाऊँगा क्रिया।

14. शब्द तोड़कर पूरा

के सामने / के पीछे / के ऊपर / के पास

स्थान का संबंधबोधक। सामने बैठो — क्रिया विशेषण।

के बाद / के पहले / के दौरान

काल का संबंधबोधक। बाद में — क्रिया विशेषण।

के बिना / बिना … के

अभाव। दोनों ढाँचे एक कुर्सी।

के लिए

किसके काम। को कारक रूप विचार में।

की तरह / के समान

समानता। जैसा क्रिया विशेषण।

के साथ

साथ। साथ आओ — क्रिया विशेषण।

के बारे में / के द्वारा / के कारण

विषय, रास्ता, कारण — संबंधबोधक। इसलिए समुच्चयबोधक आगे।

मेरे / उसके / तुम्हारे

सर्वनाम का झुका रूप, संबंधबोधक से पहले। मेरा घर अलग कुर्सी।

ने / को / से / में / पर / का

कारक, रूप विचार में। आज की सूची का मूल नहीं।

और / लेकिन / इसलिए

समुच्चयबोधक, अगले विषय में।

गाँधी जी के सामने लोग बैठे थे। — गाँधी संज्ञा, के सामने संबंधबोधक, लोग संज्ञा, बैठे थे क्रिया। चंद्रबिंदु गाँधी में।

15. आम गलतियाँ

  • के सामने को क्रिया विशेषण लिखना। घर के कंधे पर है तो संबंधबोधक।
  • सामने बैठो को संबंधबोधक लिखना। अकेला सामने — क्रिया विशेषण।
  • मैं के सामने लिखना। मेरे सामने।
  • के बिना को क्रिया या निषेध समझना। नहीं निषेध है; के बिना अभाव का रिश्ता।
  • का घर और के सामने एक कुर्सी पर ठोकना। का कारक; के सामने संबंधबोधक।
  • को और के लिए गड्डमड्ड। को रूप विचार में; के लिए आज।
  • और / इसलिए को संबंधबोधक लिखना। समुच्चयबोधक आगे।
  • के बारे में तोड़कर में को अलग कारक गिनना। स्कूल एक जोड़ मानती है।
  • 8 कारक यहीं रट लेना। कारक वाले विषयों में।
  • की तरह में की को स्त्रीलिंग विशेषण मानना। जोड़ स्थिर है।
  • बिना पानी के को ग़लत कहकर केवल पानी के बिना मानना। दोनों चलते हैं।

जाँच: (1) संज्ञा/सर्वनाम के बाद के/की + शब्द? संबंधबोधक। (2) अकेला सामने/बाद/साथ? क्रिया विशेषण सोचो। (3) ने को से में पर का? रूप विचार में। (4) और लेकिन? समुच्चयबोधक आगे। (5) मैं के → मेरे।

16. इस विषय का सार

  • संबंधबोधक संज्ञा/सर्वनाम का रिश्ता बाँधे — के सामने, के बाद, के बिना।
  • अक्सर संज्ञा के बाद; अक्सर के, कभी की (की तरह, की ओर)।
  • अकेला सामने/बाद/पास क्रिया विशेषण; के जुड़ते ही संबंधबोधक।
  • बिना दो ढाँचे: के बिना, बिना … के। मेरे सामने — सर्वनाम झुका रूप।
  • ने-को-से कारक रूप विचार में। और-लेकिन समुच्चयबोधक आगे। जोड़ अविकारी।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. संबंधबोधक क्या है? कार्ड के 3 जोड़ लिखो। “सामने बैठो” संबंधबोधक है?

उत्तर

जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम का किसी दूसरे शब्द से संबंध बताए। के सामने, के बाद, के बिना। नहीं — अकेला सामने क्रिया विशेषण है; घर के सामने संबंधबोधक।

2. “मैं के सामने” सही है? “राम का घर” और “घर के सामने” एक कुर्सी हैं?

उत्तर

नहीं — मेरे सामने। नहीं — का संबंध कारक (रूप विचार में); के सामने संबंधबोधक।

3. के बिना और नहीं एक हैं? “बिना पानी के” ग़लत है?

उत्तर

नहीं — नहीं निषेध है; के बिना अभाव का रिश्ता। नहीं — बिना पानी के और पानी के बिना दोनों चलते हैं।

4. को और के लिए एक हैं? और / इसलिए संबंधबोधक हैं?

उत्तर

नहीं — के लिए संबंधबोधक (किसके काम); को कारक रूप विचार में। नहीं — और / इसलिए समुच्चयबोधक, अगले विषय में।

5. 8 कारक यहीं रटने हैं? “के बारे में” तोड़कर में अलग कारक है?

उत्तर

नहीं — 8 भेद कारक वाले विषयों में। नहीं — स्कूल के बारे में एक जोड़ मानती है।

विषय समाप्त · संबंधबोधक