Noteclass 9 10

क्रिया विशेषण

Lesson 22 of 71

अंग 2 · शब्द विचार

पाठ 2.11

विषय शुरू · क्रिया विशेषण

सकर्मक वाले विषय में मुख्य क्रिया बाँटी — सकर्मक, अकर्मक; सहायक पट्टी। आज वह शब्द जो क्रिया से चिपककर काम का ढंग, समय, जगह या नाप बताए। कार्ड के 4 प्रश्न: कैसे, कब, कहाँ, कितना। यह नया क्रिया-भेद नहीं, क्रिया की विशेषता है। विशेषण संज्ञा से चिपकता है — विशेषण वाले विषय में। के सामने वाला जोड़ — संबंधबोधक आगे। ही-भी — निपात वाले विषय में। अव्यय का पूरा घर विकारी-अव्यय वाले विषयों में। वाक्य का पूरा क्रम वाक्य विचार में। आज कुर्सी और 4 प्रश्न।

1. कुर्सी — क्रिया की विशेषता

परिभाषा सीधी रखो: जो शब्द क्रिया की विशेषता बताए, वह क्रिया विशेषण है। काम कैसा हुआ, कब हुआ, कहाँ हुआ, कितना हुआ — उत्तर इसी परिवार का है।

वह धीरे चलता है। — चलना कैसे?

वह कल आएगा। — आना कब?

बच्चे बाहर खेलते हैं। — खेलना कहाँ?

वह बहुत दौड़ता है। — दौड़ना कितना?

धीरे, कल, बाहर, बहुत — इनमें कोई संज्ञा का नाम नहीं, कोई कर्म नहीं, कोई है/रहा पट्टी नहीं। वे क्रिया के पास बैठकर काम को बाँधते हैं।

जाँच: शब्द हटाओ। नाम छूटा? संज्ञा। जगह? सर्वनाम। कैसा नाम? विशेषण। काम टूटा? क्रिया। काम का ढंग/समय/जगह/नाप टूटा? क्रिया विशेषण।

2. विशेषण से फर्क

दोनों विशेषण शब्द सुनते हैं, कुर्सी अलग है। विशेषण कैसा / कितने / कितना नाम पूछता है। क्रिया विशेषण कैसे / कब / कहाँ / कितना काम पूछता है।

विशेषण — संज्ञा से क्रिया विशेषण — क्रिया से
धीमी चाल। — चाल संज्ञा, धीमी गुण वह धीरे चलता है। — चलना क्रिया, धीरे ढंग
अच्छा लड़का। वह अच्छा गाता है। — गाना कैसे
ऊँचा पहाड़। पक्षी ऊँचा उड़ा। — उड़ना कैसे / कहाँ-सा
बहुत पानी। — पानी संज्ञा, बहुत परिमाण वह बहुत दौड़ता है। — दौड़ना कितना

कैसा लड़का? सुंदर। कैसे चलता है? धीरे। कैसा विशेषण का प्रश्न, कैसे क्रिया विशेषण का। एक मात्रा का फर्क, दो कुर्सियाँ। विशेषण वाले विषय में झलक थी; आज पूरा नियम यहीं है।

वह अच्छा है। — अच्छा विशेषण, वह विशेष्य, है होना। वह अच्छा गाता है। — गाता क्रिया; अच्छा ढंग। एक अच्छा, दो वाक्य, दो कुर्सियाँ।

जाँच: शब्द किससे चिपका? नाम/सर्वनाम → विशेषण। क्रिया → क्रिया विशेषण। कैसा बनाम कैसे। धीमी बनाम धीरे।

3. 4 प्रश्न, 4 नाम

स्कूल 4 मूल भेद इन्हीं प्रश्नों पर बाँधती है। रीति = ढंग। काल = समय। स्थान = जगह। परिमाण = कितना / नाप। नाम रटो नहीं — प्रश्न पूछो, नाम पीछे आएगा।

प्रश्न भेद उदाहरण
कैसे? रीतिवाचक (ढंग) धीरे, जल्दी, अचानक, ऐसे
कब? कालवाचक (समय) आज, कल, अभी, हमेशा, कभी
कहाँ? स्थानवाचक (जगह) यहाँ, वहाँ, बाहर, ऊपर, नीचे
कितना? परिमाणवाचक बहुत, थोड़ा, अधिक, कम, बिलकुल

4 और लेबल स्कूल देती है — निश्चय, अनिश्चय, प्रश्न, संबंध। वे मूल से कटे नए परिवार नहीं; काम का दूसरा नाम हैं। आगे खोलेंगे। आज पहले 4 प्रश्न साफ़।

4. रीतिवाचक — कैसे

काम का ढंग। प्रश्न: कैसे हुआ? किस तरह?

बच्चा धीरे पढ़ता है।

गाड़ी अचानक रुकी।

वह जल्दी चला गया।

राम ऐसे मत बोलो।

लिखो ध्यान से। — ध्यान से पूरा ढंग; से कारक की झलक, पूरा नियम रूप विचार में।

वह अच्छी तरह काम करता है। — अच्छी तरह रीति; तरह संज्ञा अकेली नहीं, समूह ढंग बता रहा है।

धीरे-धीरे, आहिस्ता, शीघ्र, तुरंत, यों, वैसा (बोलने में) — इसी पंक्ति। दोहराना (धीरे-धीरे) नया भेद नहीं, रीति ही।

ऐसा लड़का — ऐसा संज्ञा पर, सार्वनामिक विशेषण, विशेषण के भेद वाले विषय में। ऐसा मत बोलो — बोलना कैसे, क्रिया विशेषण। एक ऐसा, दो कुर्सियाँ।

जाँच: कैसे? उत्तर ढंग हो और क्रिया से चिपका हो — रीतिवाचक। संज्ञा से चिपका सुंदर/धीमी — विशेषण रहो।

5. कालवाचक — कब

काम का समय। प्रश्न: कब? कब से? कब तक? कितनी बार? — बार-बार, तीन बार भी समय / कितनी बार की तरफ़; संख्यावाचक विशेषण तीन लड़के से अलग।

वाक्य काम
वह आज आएगा। आज — कब
कल वर्षा हुई। कल — कब
अभी बैठो। अभी — कब
गाँधी हमेशा सत्य बोलते थे। हमेशा — कब / कितनी बार जैसा
वह कभी नहीं आता। कभी — अनिश्चित समय; नहीं निषेध, आगे
दो बार पढ़ो। दो बार — कितनी बार; दो लड़के नहीं

कल आया। — कल कब, क्रिया विशेषण। कल का अखबार। — कल संज्ञा जैसी जगह, का संबंध। सुबह उठा। — सुबह कब। सुबह हो गई। — सुबह कर्ता, संज्ञा। एक शब्द, वाक्य पूछो।

परसों, नित्य, प्रतिदिन, तब, पहले, बाद में — काल की पंक्ति। के बाद वाला जोड़ संबंधबोधक आगे; अकेला बाद/पहले आज समय।

जाँच: कब? समय या बार। कल का / सुबह आई — नाम की कुर्सी सोचो, कब की नहीं ठोको।

6. स्थानवाचक — कहाँ

काम की जगह या दिशा। प्रश्न: कहाँ? किधर? कहाँ से?

किताब यहाँ रखी है। — यहाँ जगह।

राम वहाँ सो रहा है। — वहाँ जगह।

बच्चे बाहर खेलते हैं।

पक्षी ऊपर उड़ा।

अंदर आओ। आगे बढ़ो। पीछे हटो।

सर्वनाम वाले विषयों में: यह / वह सर्वनाम। यहाँ / वहाँ स्थान का क्रिया विशेषण। यह घर — वस्तु। यहाँ घर है — जगह। वहाँ सो रहा है — कर्ता गायब; वहाँ व्यक्ति नहीं।

सकर्मक वाले विषय में: वह दिल्ली गया। दिल्ली कहाँ, कर्म नहीं। स्कूल / घर / दिल्ली जगह का उत्तर हो तो स्थान सोचो; किसे/क्या वाला कर्म अलग है। दिल्ली संज्ञा रहती है; गया के साथ जगह बता रही है — कारक अधिकरण की झलक रूप विचार में। आज: कहाँ पूछो, कर्म मत ठोको।

सामने बैठो। — सामने जगह/दिशा, क्रिया विशेषण। घर के सामने। — के सामने संबंधबोधक, अगले विषय में। ऊपर बैठो। — ऊपर स्थान। छत के ऊपर। — के ऊपर संबंधबोधक आगे। अकेला शब्द बनाम के + शब्द — आज सीमा इतनी।

जाँच: कहाँ / किधर? स्थानवाचक। यह/वह नाम की जगह? सर्वनाम। के सामने / के ऊपर? संबंधबोधक सोचो।

7. परिमाणवाचक — कितना

काम कितना, कितनी दूर, कितना पूरा। प्रश्न: कितना? कितनी देर? बिलकुल?

वह बहुत दौड़ता है। — दौड़ना कितना।

थोड़ा रुकिए। — रुकना कितना।

अधिक बोलो मत। कम खाओ।

बिलकुल मत जाओ। बहुत जल्दी आओ।

बहुत की 3 कुर्सियाँ विशेषण वाले विषय से चली आती हैं। आज पक्का बाँट:

वाक्य कुर्सी
बहुत पानी है। परिमाण विशेषण; पानी विशेष्य
बहुत लोग आए। अनिश्चित संख्या; लोग विशेष्य
बहुत सुंदर फूल। बहुत बल, सुंदर गुण — विशेषण के ऊपर; निपात की झलक आगे
वह बहुत दौड़ता है। क्रिया विशेषण; दौड़ना कितना

कितना पानी पिया? — कितना संज्ञा पर, परिमाण विशेषण। कितना दौड़ता है? — क्रिया पर, क्रिया विशेषण। एक कितना, दो कुर्सियाँ। थोड़ा दूध / थोड़ा रुकिए — वही गाँठ।

सबसे धीरे चलो। और धीरे बोलो। — ढंग पर सबसे/और, तुलना की पट्टी; गुण की 3 अवस्थाएँ विशेषण के भेद वाले विषय में। आज नया भेद मत गढ़ो। सबसे बेहतर गलती वहीं वाली यहाँ भी: सबसे अधिक धीरे चल सकता है, सबसे बेहतर धीरे नहीं ठोकना।

जाँच: कितना किस पर? संज्ञा → विशेषण। क्रिया → क्रिया विशेषण। विशेषण के ऊपर बहुत → बल, निपात सोचो।

8. निश्चय और अनिश्चय

ये चौथा-पाँचवाँ काम का प्रकार नहीं। रीति/काल के पास बैठकर पक्कापन या शक बताते हैं।

भेद काम उदाहरण
निश्चयवाचक पक्का वह अवश्य आएगा। जरूर पढ़ो। सचमुच हुआ।
अनिश्चयवाचक शक / कभी-कभार शायद आए। कदाचित वर्षा हो। कभी आता है। कहीं चला गया।

कभी काल भी छूता है, कहीं स्थान भी। लेबल दो नाम से एक शब्द पर चढ़ सकते हैं — झगड़ा मत करो। प्रश्न पूछो: कब? कहाँ? पक्का या शक? वाक्य जो काम दे, वही लिखो।

जरूर क्रिया नहीं। अवश्य संज्ञा नहीं। वे क्रिया के साथ पक्कापन बाँधते हैं।

9. प्रश्नवाचक — कैसे, कब, कहाँ, कितना, क्यों

कार्ड के 4 शब्द स्वयं प्रश्न बन सकते हैं। क्यों कारण पूछता है — 5वाँ प्रश्न, काम का नहीं, वजह का।

तुम कैसे आए?

वह कब जाएगा?

किताब कहाँ है?

तुम कितना चलोगे?

तुम क्यों रो रहे हो?

कौन आया? क्या लाए? — नाम की जगह पूछना, प्रश्नवाचक सर्वनाम, सर्वनाम के भेद वाले विषय में। कहाँ गया? — जगह पूछना, क्रिया विशेषण। कौन व्यक्ति, कहाँ स्थान। क्या वस्तु, कैसे ढंग।

क्या तुम चलोगे? — हाँ/नहीं वाला क्या वाक्य के आगे; नाम की जगह नहीं। उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम जबरदस्ती न ठोको — सर्वनाम के भेद वाले विषय में। आज: कैसे/कब/कहाँ/कितना/क्यों क्रिया विशेषण के प्रश्न।

इसलिए, अतः जोड़ भी लगते हैं — समुच्चयबोधक के पास। आज क्यों को प्रश्न रखो; इसलिए का पूरा जोड़ वहाँ।

जाँच: कौन/क्या/किसे — सर्वनाम सोचो। कैसे/कब/कहाँ/कितना/क्यों — क्रिया विशेषण। क्या + पूरा वाक्य — प्रश्न का ढंग, नाम की जगह नहीं।

10. संबंधवाचक — जब, जहाँ, जैसा, जितना

एक काम को दूसरे काम से बाँधें। मिश्र वाक्य का पूरा ढाँचा वाक्य विचार में; आज शब्द की कुर्सी।

जब राम आए, तब हम चले। — जब / तब काल।

जहाँ राम रहता है, वहाँ श्याम भी रहता है। — जहाँ / वहाँ स्थान।

जैसा करोगे, वैसा भरोगे। — जैसा / वैसा रीति।

जितना खाओ, उतना पचो। — जितना / उतना परिमाण।

जो लड़का आया — जो सर्वनाम, संबंधवाचक, सर्वनाम के भेद वाले विषय में। जहाँ रहता है — जहाँ क्रिया विशेषण, स्थान का संबंध। जो नाम की जगह, जहाँ जगह। जैसा लड़का — जैसा विशेषण हो सकता है (विशेषण के भेद वाले विषय में)। जैसा करोगे — क्रिया पर रीति।

आज उपवाक्य नहीं तोड़ना — वह वाक्य भेद और वाक्य विश्लेषण वाले विषयों में। इतना: जब/जहाँ/जैसा/जितना क्रिया या पूरे काम को बाँधें तो इस परिवार में रखो।

11. नहीं, मत, न — निषेध

वह नहीं जाता। जाता क्रिया रहती है। नहीं काम को काटता है, क्रिया की जगह नहीं लेता। स्कूल इसे अक्सर निषेधवाचक क्रिया विशेषण कहती है।

वह नहीं आता। — नहीं निषेध।

मत जाओ। — आज्ञा में निषेध।

न आना, न जाना। — न भी काटता है।

ही, भी, तो, तक वाक्य का बल हैं — निपात आगे। नहीं बल नहीं, काटना है। बहुत सुंदर वाला बहुत कभी बल निपात की तरफ़ सरकता है। आज: नहीं/मत/न क्रिया के साथ निषेध; ही-भी यहीं मत खोलो।

क्रिया वाले विषय में: नहीं विशेषण नहीं, संज्ञा नहीं, क्रिया नहीं। आज कुर्सी मिली — निषेध, क्रिया विशेषण की सूची में। पूरा निपात-घर आगे।

जाँच: काम कटा? नहीं/मत/न। केवल बल, काम वैसा ही? ही/भी — निपात। क्रिया गायब होकर नहीं अकेला काम? नहीं, जाता रहना चाहिए।

12. कर्म नहीं, संबंधबोधक नहीं

सकर्मक वाले विषय में: धीरे कर्म नहीं। लाल कर्म नहीं। आज दोहरी दीवार।

वाक्य बाँट
वह धीरे रोटी खाता है। रोटी कर्म, धीरे रीति, खाता सकर्मक
वह स्कूल जाता है। स्कूल कहाँ; जाना अकर्मक दिशा — सकर्मक वाले विषय में
घर के बिना मत निकलो। के बिना संबंधबोधक, अगले विषय में
के बाद आना। के बाद संबंधबोधक आगे; बाद में कालवाचक हो सकता है
और, लेकिन समुच्चयबोधक — जोड़, ढंग नहीं

संबंधबोधक संज्ञा के बाद के … से रिश्ता बाँधे। क्रिया विशेषण क्रिया से चिपके, के की ज़रूरत अकेले यहाँ/धीरे को नहीं। दोनों अविकारी परिवार के पास बैठते हैं — पूरा नाम विकारी-अव्यय वाले विषयों में। आज कुर्सी अलग रखो।

जाँच: किसे/क्या? कर्म। कैसे/कब/कहाँ/कितना? क्रिया विशेषण। के सामने / के बिना / के बाद? संबंधबोधक सोचो।

13. रूप नहीं बदलता — झलक

विशेषण लिंग-वचन से सरक सकता है — धीमी चाल, धीमे कदम; लाल गेंद, लाल गेंदें। क्रिया विशेषण अक्सर अविकारी है — रूप नहीं बदलता: धीरे लड़का चलता है, धीरे लड़की चलती है, धीरे बच्चे चलते हैं — धीरे वैसा का वैसा।

यहाँ, कल, बहुत, नहीं — लिंग नहीं माँगते। अच्छा गाता है / अच्छी गाती है — यहाँ अच्छा/अच्छी विशेषण की आदत ले आती है; कुछ प्रयोग सरकते हैं। मूल नियम: धीरे, यहाँ, आज न बदलें। पूरा विकारी-अविकारी और अव्यय आगे। आज इतना कि धीरे को धीमी करके क्रिया पर मत चढ़ाओ।

वह धीरे बोलता है। वह धीरे बोलती है। — धीरे एक।

धीमी आवाज़। — धीमी विशेषण, आवाज़ संज्ञा।

14. वाक्य में जगह — झलक

हिंदी में क्रिया विशेषण अक्सर क्रिया के पास, अक्सर ठीक पहले बैठता है। पूरा कर्ता-कर्म-क्रिया क्रम वाक्य विचार में। आज 3 बैठक:

राम धीरे पढ़ता है। — रीति क्रिया से पहले।

कल राम आएगा। — काल वाक्य के आगे भी चलता है।

राम कल आएगा। — कल क्रिया के पास भी।

यहाँ बैठो। बाहर मत जाओ।

दो क्रिया विशेषण साथ: वह कल यहाँ धीरे बोला। — कल काल, यहाँ स्थान, धीरे रीति। क्रम लचीला; झगड़ा वाक्य क्रम पर छोड़ो। आज: तीनों क्रिया से चिपके, संज्ञा के विशेषण नहीं।

15. वाक्य में सब कुर्सियाँ

छोटा राम कल यहाँ धीरे बहुत पढ़ता है और नहीं सोता।

  • छोटा — विशेषण, राम विशेष्य
  • राम — संज्ञा, कर्ता
  • कल — कालवाचक क्रिया विशेषण
  • यहाँ — स्थानवाचक
  • धीरे — रीतिवाचक
  • बहुत — परिमाण; पढ़ना कितना
  • पढ़ता — मुख्य क्रिया; कर्म बिना भी रह सकती है
  • है — सहायक, सकर्मक वाले विषय में
  • और — समुच्चयबोधक
  • नहीं — निषेध
  • सोता — अकर्मक क्रिया

गाँधी हमेशा सत्य बोलते थे।

  • गाँधी — संज्ञा; चंद्रबिंदु
  • हमेशा — कालवाचक
  • सत्य — कर्म, संज्ञा
  • बोलते — मुख्य सकर्मक
  • थे — सहायक

तुम कब कहाँ जाओगे? — कब काल प्रश्न, कहाँ स्थान प्रश्न, जाओगे क्रिया। कौन नहीं पूछा गया।

16. शब्द तोड़कर पूरा

धीरे / धीमी

धीरे क्रिया विशेषण। धीमी विशेषण। धीरे-धीरे रीति ही।

अच्छा

अच्छा लड़का — विशेषण। अच्छा गाता है — रीति। अच्छा है — विशेषण + होना।

बहुत / थोड़ा / कितना

संज्ञा पर विशेषण; क्रिया पर क्रिया विशेषण; विशेषण पर बल निपात सोचो।

आज / कल / अभी / हमेशा

कालवाचक। कल का अखबार — कल नाम जैसी जगह।

यहाँ / वहाँ / बाहर / ऊपर

स्थान। यह / वह सर्वनाम। के ऊपर संबंधबोधक आगे।

कैसे / कब / कहाँ / कितना / क्यों

प्रश्नवाचक क्रिया विशेषण। कौन / क्या सर्वनाम।

जब / जहाँ / जैसा / जितना

संबंध। जो सर्वनाम। जैसा लड़का विशेषण हो सकता है।

जरूर / शायद / अवश्य

निश्चय / अनिश्चय। क्रिया नहीं।

नहीं / मत / न

निषेध। ही-भी निपात आगे।

के बिना / के सामने

संबंधबोधक, अगले विषय में। आज की सूची का मूल नहीं।

गाँधी धीरे बोलते थे। — गाँधी संज्ञा, धीरे रीति, बोलते क्रिया, थे सहायक। चंद्रबिंदु गाँधी में।

17. आम गलतियाँ

  • कैसा और कैसे एक करना। कैसा विशेषण, कैसे क्रिया विशेषण।
  • धीमी चाल में धीमी को क्रिया विशेषण लिखना। चाल संज्ञा है।
  • धीरे चलता है में धीरे को विशेषण या कर्म लिखना।
  • यहाँ / वहाँ को सर्वनाम लिखना। यह / वह सर्वनाम हैं।
  • दिल्ली गया में दिल्ली को कर्म ठोकना। कहाँ पूछो — सकर्मक वाले विषय में।
  • बहुत पानी और बहुत दौड़ता को एक कुर्सी पर रख देना।
  • कौन को क्रिया विशेषण लिखना। कौन सर्वनाम है।
  • कहाँ को प्रश्नवाचक सर्वनाम लिखना।
  • के सामने को क्रिया विशेषण कह देना। संबंधबोधक आगे।
  • नहीं को क्रिया लिखना। जाता क्रिया रहती है।
  • ही-भी को यहीं निपात पूरा कर लेना। निपात वाले विषय में।
  • क्रिया विशेषण को क्रिया का चौथा भेद (सकर्मक के बाद) मानना। विशेषता है, भेद नहीं।
  • धीरे को धीमी / धीमे करके लिंग चढ़ा देना।

जाँच: (1) कैसे/कब/कहाँ/कितना? क्रिया विशेषण। (2) कैसा नाम? विशेषण। (3) यह/वह? सर्वनाम; यहाँ/वहाँ? स्थान। (4) किसे/क्या? कर्म। (5) के + शब्द? संबंधबोधक सोचो। (6) नहीं काटे, ही बल।

18. इस विषय का सार

  • क्रिया विशेषण क्रिया की विशेषता है — कैसे, कब, कहाँ, कितना।
  • रीति, काल, स्थान, परिमाण — 4 मूल। निश्चय, अनिश्चय, प्रश्न, संबंध — काम के और लेबल।
  • कैसा विशेषण, कैसे क्रिया विशेषण। धीमी चाल, धीरे चलना।
  • यहाँ स्थान, यह सर्वनाम। बहुत संज्ञा पर विशेषण, क्रिया पर क्रिया विशेषण।
  • नहीं निषेध। के सामने संबंधबोधक आगे। ही-भी निपात आगे। रूप अक्सर नहीं बदलता।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. क्रिया विशेषण क्या है? कैसा और कैसे एक हैं? “धीमी चाल” में धीमी क्रिया विशेषण है?

उत्तर

जो शब्द क्रिया की विशेषता बताए — कैसे, कब, कहाँ, कितना। नहीं — कैसा विशेषण का प्रश्न, कैसे क्रिया विशेषण का। नहीं — चाल संज्ञा है, धीमी विशेषण।

2. 4 मूल प्रश्न / भेद नाम सहित लिखो। यहाँ सर्वनाम है?

उत्तर

कैसे — रीतिवाचक; कब — कालवाचक; कहाँ — स्थानवाचक; कितना — परिमाणवाचक। नहीं — यहाँ स्थानवाचक क्रिया विशेषण; यह / वह सर्वनाम हैं।

3. “वह दिल्ली गया” में दिल्ली कर्म है? “बहुत पानी” और “बहुत दौड़ता है” एक कुर्सी हैं?

उत्तर

नहीं — दिल्ली कहाँ, स्थान; कर्म किसे/क्या। नहीं — बहुत पानी परिमाण विशेषण; बहुत दौड़ता क्रिया विशेषण।

4. कौन क्रिया विशेषण है? कहाँ प्रश्नवाचक सर्वनाम है?

उत्तर

नहीं — कौन सर्वनाम है। नहीं — कहाँ स्थान पूछता है, क्रिया विशेषण; सर्वनाम कौन/क्या हैं।

5. “के सामने” क्रिया विशेषण है? नहीं क्रिया है? ही-भी यहीं पूरा खोलना है?

उत्तर

नहीं — के सामने संबंधबोधक, अगले विषय में; सामने अकेला स्थान हो सकता है। नहीं — नहीं निषेध है, जाता क्रिया रहती है। नहीं — ही-भी निपात वाले विषय में।

विषय समाप्त · क्रिया विशेषण