Noteclass 9 10

अयोगवाह

Lesson 9 of 71

अंग 1 · वर्ण विचार

पाठ 1.9

विषय शुरू · अयोगवाह

गिनती याद है: स्वर 11, व्यंजन 33, फिर दो और। उन दो के चिह्न चल चुके — अनुस्वार ं, विसर्ग ः। अब वर्ग का नाम खुलता है: अयोगवाह। हिंदी में ये दो ही हैं — अं और अः।

1. अयोगवाह क्या हैं

जो वर्ण न पूरे स्वर हैं, न पूरे व्यंजन, पर स्वर के साथ चलते हैं, उन्हें अयोगवाह कहते हैं।

नाम सीधा है: ये किसी स्वर-पंक्ति या व्यंजन-वर्ग के पूरे सदस्य नहीं, पर स्वर के साथ शब्द में चलते हैं। विस्मयादिबोधक “वाह!” से इनका कोई नाता नहीं।

अं — अ के साथ अनुस्वार। अंक, अंश, अंतर।

अः — अ के साथ विसर्ग। अतः, प्रातः का अंत उसी परिवार का है।

ध्यान दें: चिह्न कैसे लगते हैं, हैं / हँस / हंस, पंचमाक्षर जैसा उच्चारण — अनुस्वार वाले विषय में। यह विषय वर्ग, गिनती और अं/अः का फर्क है। विसर्ग संधि आगे। घोष-पंचमाक्षर घोष वाले विषय में।

2. वर्णमाला में जगह

चार्ट पर अं अः अक्सर स्वरों के तुरंत बाद छपते हैं — अ आ … औ अं अः। जगह छपाई की सुविधा है, वर्गीकरण की नहीं। ये 11वें-12वें स्वर नहीं।

अंअः
प्रकार संख्या उदाहरण
स्वर 11 अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ
व्यंजन 33 क से ह
अयोगवाह 2 अं, अः
कुल वर्ण 46 11 + 33 + 2

क्ष त्र ज्ञ इस 46 में नहीं — संयुक्त। चंद्रबिंदु इस 2 में नहीं। नुक्ता वाले क़ ख़ मूल गिनती से बाहर।

कुछ पुस्तकें अं अः जोड़कर 13 स्वर लिख देती हैं। वही गलती पहले पकड़ चुके। शुद्ध काट यही है: स्वर 11 रहें, ये दो अलग पंक्ति।

3. दो ही — चाँद तीसरा नहीं

अयोगवाह की सूची में सिर्फ़ अं और अः हैं। तीन चिह्नों में से चंद्रबिंदु ँ अयोगवाह नहीं।

चिह्न अयोगवाह? क्यों
ं अनुस्वार हाँ — अं उसका वर्ण रूप वर्णमाला में अं गिना जाता है
ः विसर्ग हाँ — अः उसका वर्ण रूप वर्णमाला में अः गिना जाता है
ँ चंद्रबिंदु नहीं स्वर को अनुनासिक बनाता है; अलग वर्ण की गिनती नहीं

माँ, हँस, आँगन — अनुनासिक स्वर। वर्ग स्वर का ही रहता है, आ नाक से निकल गया। नया अयोगवाह नहीं बना। हैं / मैं में बिंदु अनुनासिक की जगह है, जब चाँद नहीं समाता। उसे अं वाला अयोगवाह मत समझो।

4. वर्ण और चिह्न

यही इस विषय की कुंजी है। अं वर्णमाला का नाम है। ं उसका लिखा चिह्न है, जो किसी स्वर या अक्षर पर बैठ सकता है। विसर्ग पर वही बात: अः वर्ण, ः चिह्न।

वर्ण (गिनती में) चिह्न जोड़
अं ं अ + अनुस्वार
अः ः अ + विसर्ग

चार्ट पर अ इसलिए लिखा है कि स्वरों की पहली इकाई अ है। मतलब यह नहीं कि अनुस्वार-विसर्ग सिर्फ़ अ पर लगते हैं।

अंक — यहाँ अं वर्ण साफ़: अ + ं, फिर क।

कंठ — बिंदु क पर है। क में अ छिपा + अनुस्वार। चिह्न वही, चार्ट वाला अं शब्द के आरंभ में अलग दिखे यह जरूरी नहीं।

5. स्वर की सवारी — नए वर्ण नहीं

ं और ः 11 स्वरों पर लग सकते हैं। हर जोड़ नया अयोगवाह नहीं बनता। अयोगवाह दो ही रहते हैं; चिह्न घूमता है।

स्वर + ं उदाहरण स्वर + ः उदाहरण
अं अंक, अंश अः अतः का अंत, कः
इं हिंदी, सिंह इः / निः निःशब्द, निःसंदेह
उं चुंबन, गुंजन उः / दुः दुःख, दुःसाहस
आं आंकड़ा आ + ः चार्ट पर नया वर्ण नहीं; प्रातः में आ मात्रा, ः त पर

इं को बारहवाँ स्वर मत गिनो। इ स्वर है, ं चिह्न है। दुः में उ स्वर है, ः चिह्न है। गिनती 11 + 2 पर टिकी रहती है, 22 नहीं हो जाती।

जाँच: शब्द में बिंदु या दो बिंदु दिखें तो पूछो — यह नया वर्ण है या किसी स्वर/अक्षर पर चढ़ा चिह्न? गिनती में सिर्फ़ अं और अः जुड़ते हैं, कं और दुः अलग-अलग अयोगवाह नहीं।

6. व्यंजन पर वही चिह्न

कं, खं, कः लिखे जा सकते हैं। इससे क अयोगवाह नहीं बन जाता। क व्यंजन है; उस पर अनुस्वार या विसर्ग चढ़ा है। अंदर छिपा अ ही स्वर है।

लिखा तोड़ वर्ग
क क् + अ व्यंजन अक्षर
कं क् + अ + ं व्यंजन + अनुस्वार चिह्न
कः क् + अ + ः व्यंजन + विसर्ग चिह्न
का क् + आ व्यंजन + मात्रा — अयोगवाह नहीं
क् केवल क् हलंत — अयोगवाह नहीं

मात्रा स्वर बदलती है। हलंत स्वर हटाता है। अनुस्वार-विसर्ग स्वर के साथ कुछ जोड़ते हैं। तीनों काम अलग हैं।

7. अं शब्द में कैसे दिखे

शब्द के आरंभ में अं अक्सर साफ़ पढ़ा जाता है। बीच में वही काम बिंदु व्यंजन पर करता है।

शब्द अयोगवाह कहाँ याद
अंक, अंग, अंश, अंतर, अंत आरंभ अं अ + ं, फिर व्यंजन
गंगा, संसार, कंप, लंबा बिंदु अक्षर पर चिह्न वही अनुस्वार; उच्चारण पंचमाक्षर जैसा
हिंदी, संबंध इ / अ पर बिंदु इं या सम् जैसा; नया वर्ण नहीं

अंग और अग अलग हैं। अंग में अं है। अग में केवल अ। बिंदु न हो तो अयोगवाह नहीं बैठा।

8. अः शब्द में कैसे दिखे

विसर्ग हिंदी बोलचाल में कम है, संस्कृत से आए और पूजा-पदों में साफ़। चिह्न दो बिंदु, अक्षर के बाद — सिर की लकीर के ऊपर वाला एक बिंदु नहीं।

शब्द विसर्ग अयोगवाह रूप
अतः, स्वतः, अंततः अंत में ः अ + ः परिवार
प्रातः तः पर ः आ मात्रा अलग, विसर्ग अलग
दुःख, निःशब्द बीच में ः दुः = उ + विसर्ग; निः = इ + विसर्ग
नमः, हरिः, छः अंत संस्कृत पद / संख्या रूप

ह व्यंजन है, ऊष्म (रगड़ वाली)। विसर्ग ह जैसी फूंक देता है, पर ह की जगह नहीं लेता। दुःख में विसर्ग और ख दोनों हैं — ख फूंक वाला व्यंजन, ः अयोगवाह चिह्न। दुख बोलचाल, शुद्ध लिखा दुःख।

अतः और इसलिए दिखने में पास लगें। अतः में विसर्ग है। इसलिए में नहीं। अंत में त है, अतः में त + विसर्ग। तीन शब्द मिलाएँ नहीं।

ध्यान दें: विसर्ग के आगे स्वर या व्यंजन आए तो रूप बदल सकता है — मनः + हर = मनोहर। यह विसर्ग संधि है, पूरा विषय वाक्य विचार में। यहाँ इतना: संधि से पहले पद में विसर्ग अयोगवाह चिह्न है।

9. जो अयोगवाह नहीं

  • चंद्रबिंदु ँ — अनुनासिक स्वर। माँ अयोगवाह नहीं।
  • मात्रा — स्वर का रूप। का में आ है, अं नहीं।
  • हलंत ् — अ हटाना। क् अयोगवाह नहीं।
  • ङ ञ ण न म — व्यंजन, प्रत्येक वर्ग का पाँचवाँ। पूरा नाम घोष वाले विषय में। अं इनकी जगह का चिह्न हो सकता है, स्वयं पंचमाक्षर नहीं।
  • ह — व्यंजन। अः ह नहीं।
  • क्ष त्र ज्ञ — संयुक्त व्यंजन। वर्णमाला के नीचे छपें तो भी अयोगवाह नहीं, स्वर नहीं।
  • ड़ ढ़, क़ ख़ — बिंदु का दूसरा काम; उच्चारण और नुक्ता वाले विषय। अनुस्वार का बिंदु ये नहीं।

10. क्यों न स्वर, न व्यंजन

स्वर अकेला पूरा बोला जाता है — अ, इ, उ। अं बोलने में अ तो है, पर उसके साथ नाक वाली ध्वनि जुड़ी है; शुद्ध स्वर की परिभाषा यहीं रुकती है। व्यंजन मुँह में रुककर स्वर माँगता है — क् से क। अनुस्वार-विसर्ग खुद कोई स्पर्श-वर्ग नहीं बनाते। कवर्ग में पाँचवाँ ङ है, छठा अं नहीं।

इसलिए तीसरी पंक्ति चाहिए। नाम अयोगवाह। गिनती दो। चिह्न ं और ः। यही पूरा ढाँचा है।

प्रश्न स्वर व्यंजन अयोगवाह
अकेला पूरा? हाँ नहीं, स्वर चाहिए स्वर की पीठ पर चलता है
वर्ग? ह्रस्व-दीर्घ आदि कवर्ग … ह कोई पाँच का वर्ग नहीं
चिह्न अक्षर या मात्रा अक्षर, हल ं या ः

11. शब्द तोड़कर पूरा

अंक

अं + क। अं = अ + अनुस्वार — अयोगवाह। क व्यंजन। आरंभ में अं चार्ट वाला रूप साफ़ है।

अंश

अं + श। श ऊष्म व्यंजन, अं अयोगवाह। अंस मत लिखो — श वर्तनी वाले विषय में, अं वर्ग यह विषय।

गंगा

ग + ं + गा। बिंदु अनुस्वार चिह्न, उच्चारण ङ जैसा। गंगा के ग को अयोगवाह मत कहो। अं यहाँ आरंभ में लिखा नहीं, चिह्न बीच में है।

अतः

अ + त + ः। अंत का ः विसर्ग, अः परिवार। त व्यंजन। अतः को अतह या अंत मत लिखो।

दुःख

द् + उ + ः + ख। उ स्वर, विसर्ग अयोगवाह चिह्न, ख व्यंजन महाप्राण। तीन काम एक शब्द में।

निःशब्द

निः + शब्द। निः = न् + इ + विसर्ग। इ स्वर पर ः। नया अयोगवाह इः गिनती में नहीं जुड़ता।

माँ

म् + आ नाक से, चंद्रबिंदु। अयोगवाह नहीं। अं मत गिनो, अः मत गिनो।

नमः — न + म + ः। अंत विसर्ग।

प्रातः — प्र + आ + त + ः। मात्रा और विसर्ग साथ, दोनों अयोगवाह नहीं; विसर्ग अयोगवाह चिह्न, आ स्वर।

हिंदी — हि + ं + दी। इं रूप, स्वर इ + चिह्न।

12. आम गलतियाँ

  • अं अः को स्वर गिनकर 13 बना देना।
  • चंद्रबिंदु को तीसरा अयोगवाह मानना। माँ इस वर्ग में नहीं।
  • कं, खं, दुः, निः को चार नए अयोगवाह गिनना। चिह्न घूमता है, वर्ण दो ही हैं।
  • ङ को अं समझना। ङ व्यंजन पंचमाक्षर है; अं चिह्न/वर्ण अयोगवाह।
  • ह और अः एक कर देना। ह व्यंजन, अः अयोगवाह।
  • अनुस्वार के बिंदु को ड़ या नुक्ता का बिंदु समझना। तीन अलग काम, तीन अलग विषय।
  • हलंत को अयोगवाह कहना। ् अ हटाता है, ं नाक वाली ध्वनि जोड़ता है, ः फूंक जोड़ता है।
  • चार्ट पर स्वरों के बाद छपे देखकर इन्हें स्वर की पंक्ति का हिस्सा मान लेना। छपाई सुविधा है।
  • विसर्ग संधि को यहीं पूरा कर लेना। मनोहर आगे के विषय का है; चिह्न यहाँ का है।

जाँच: (1) वर्णमाला में नाम? अं या अः — दो। (2) शब्द में चिह्न? ं या ः किसी स्वर/अक्षर पर। (3) चाँद है? अयोगवाह नहीं। (4) गिनती? 11 + 33 + 2 = 46।

13. इस विषय का सार

  • अयोगवाह न स्वर, न व्यंजन; स्वर के साथ चलते हैं। हिंदी में दो: अं, अः।
  • अं = अ + अनुस्वार। अः = अ + विसर्ग। चिह्न ं और ः कहीं भी स्वर पर लग सकते हैं।
  • गिनती 11 + 33 + 2 = 46। 13 स्वर गलत। कं दुः नए वर्ण नहीं।
  • चंद्रबिंदु, मात्रा, हलंत, पंचमाक्षर, ह — अयोगवाह नहीं।
  • चिह्न का प्रयोग अनुस्वार वाले विषय से; संधि आगे; पंचमाक्षर का पूरा नाम घोष वाले विषय में।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. अयोगवाह क्या हैं? हिंदी में कितने हैं? नाम बताओ।

उत्तर

न पूरे स्वर, न पूरे व्यंजन; स्वर के साथ चलते हैं। दो — अं और अः।

2. सही या ग़लत: अं और अः जोड़कर स्वर 13 हो जाते हैं।

उत्तर

ग़लत। स्वर 11 रहें। अं अः अलग पंक्ति। कुल 11 + 33 + 2 = 46।

3. माँ अयोगवाह है? चंद्रबिंदु तीसरा अयोगवाह है?

उत्तर

नहीं। माँ अनुनासिक स्वर है। चंद्रबिंदु अयोगवाह नहीं।

4. कं नया अयोगवाह है या चिह्न घूमा है?

उत्तर

चिह्न घूमा है। क व्यंजन है, उस पर अनुस्वार चढ़ा। अयोगवाह दो ही रहते हैं — अं, अः।

5. दुःख में ः क्या है? ह और अः एक हैं?

उत्तर

विसर्ग — अयोगवाह चिह्न। ह व्यंजन है, अः नहीं।

विषय समाप्त · अयोगवाह