अंग 1 · वर्ण विचार
पाठ 1.8
विषय शुरू · बुनियादी वर्तनी
इ और ई अलग स्वर हैं। श ष स अलग जगह हैं। अब लिखना: कौन-सा चिह्न शब्द में बैठे। यही वर्तनी है। पहली दीवार तीन हैं — इ/ई, उ/ऊ, श/ष/स। इन्हीं के साथ ण/न और ऋ भी यहीं साफ़ करने हैं, वरना विषय अधूरा रह जाता है।
1. वर्तनी क्या है
शब्द को तय चिह्नों से लिखना वर्तनी है। बोल सही हो और लिखा गलत — वर्तनी टूटी। लिखा सही और बोल ढीला — उच्चारण टूटा।
हिंदी में एक ध्वनि कई बोलियों में मिल सकती है, पर शुद्ध लिखा एक होता है। कान से स जैसा लगे, शब्द संस्कृत से आया हो तो श या ष भी हो सकता है। इसलिए वर्तनी कान अकेले से नहीं बैठती। नियम और शब्द दोनों चाहिए।
दिन और दीन — बोल में लंबाई का फर्क, लिखने में ि और ी का फर्क। अर्थ अलग।
भाषा — कान में भासा जैसा लग सकता है, लिखा ष है।
ध्यान दें: हैं / हँस / हंस अनुस्वार वाले विषय में पूरे हैं। अं अः की गिनती अयोगवाह वाले विषय में। नुक्ता क़ ख़ नुक्ता वाले विषय में। यहाँ पहली लिखने की गलतियाँ।
2. मात्रा वही स्वर है
वर्तनी की गलती अक्सर मात्रा की गलती है। ि = इ, ी = ई, ु = उ, ू = ऊ। चिह्न छोटा है, स्वर वही है जो मात्रा वाले विषय में सीखा।
| स्वर | मात्रा | शब्द | उलटी गलती |
|---|---|---|---|
| इ | ि · व्यंजन के पहले | पिता, दिन, कवि | पीता, दीन, कावी |
| ई | ी · व्यंजन के बाद खड़ी | नदी, दीन, खीर | नदि, दिन, खिर |
| उ | ु · नीचे | कुल, सुख, गुरु | कूल, सूख, गुरू |
| ऊ | ू · नीचे खड़ी-सी | फूल, दूध, धूप | फुल, दुध, धुप |
ि और ी की जगह याद रखें: इ की मात्रा बाएँ, ई की दाएँ। उ और ऊ दोनों नीचे हैं — फर्क आकृति का है, जगह का नहीं। जल्दी में ु को ू बना देना आम है।
3. इ और ई
ह्रस्व-दीर्घ का अर्थ-भेद पहले आ चुका: दिन/दीन, बिन/बीन। वर्तनी में नियम यह है — जो स्वर शब्द में है, वही लिखो। लंबा लगने से ई मत लगा दो।
इ बैठता है
| जगह | शब्द | याद |
|---|---|---|
| शुरू | इतना, इधर, इसलिए, इतिहास, इत्यादि, इच्छा, इकट्ठा, इनाम, इमली | ईश्वर इसमें नहीं — वह ई |
| आगे जुड़ा टुकड़ा (उपसर्ग — नाम आगे) | नि-, वि-, अधि-, प्रति-, अभि-, अति- | नियम, विद्यालय, अधिकार — इ ह्रस्व |
| अंत | कवि, मुनि, हरि, गिरि, पति, गति, मति, रवि | ये ई नहीं; नदी वाली ई अलग परिवार |
ई बैठता है
| जगह | शब्द | याद |
|---|---|---|
| शुरू | ईख, ईश्वर, ईसा, ईमान | इतिहास ई से नहीं |
| अंत / बीच | नदी, देवी, पृथ्वी, खीर, जीव, बीज, नीति, रीति | बहुत स्त्रीलिंग और गुण-शब्दों में ई |
इतिहास — इ ह्रस्व। ईतिहास गलत।
ईश्वर — ई दीर्घ। इश्वर गलत।
कवि — अंत इ। कावी या कवी दोनों गलत।
नदी — अंत ई। नदि गलत।
पिता — इ। पीता अलग शब्द (क्रिया पीना से)।
जाँच: शब्द का इ/ई निकालो। उपसर्ग नि वि अधि है? इ। नदी देवी पृथ्वी जैसा अंत? ई। अर्थ का जोड़ा दिन/दीन जैसा है? दोनों रूप अलग-अलग याद करो, एक को दूसरे से मत बनाओ।
4. उ और ऊ
वही साँचा। कान में गोल ओठ हैं, लिखने में ु या ू तय करना है।
| उ | ऊ |
|---|---|
| उदय, उत्पन्न, उपयोग, उन्नति, उपकार, उल्लू, उस, उतना | ऊन, ऊधम, दूध, धूप, फूल, भूख, रूप, सूर्य, झूठ |
| उपसर्ग: सु-, उप-, अनु-, उत्- | ऊँचा, ऊँट — नाक वाला चिह्न अनुस्वार वाले विषय में |
| गुरु, पुत्र, सुख, कुल, सुन | गुरू लिखना गलत; गुरु उ से |
कुल परिवार है, कूल किनारा। सुख आनंद है, सूख सूखने से जुड़ा। सुन कान से है, सून सुनसान। मात्रा बदलते ही शब्द बदलता है।
उपयोग — उ। ऊपयोग गलत।
उत्पन्न — उ। ऊत्पन्न गलत।
दूध — ऊ। दुध गलत।
गुरु — उ अंत में। गुरू में ऊ मत लगाओ।
दुःख में उ है, विसर्ग अलग चिह्न है। दुख लिखना विसर्ग छोड़ना है, ऊ लगाना नहीं।
5. अ/आ, ए/ऐ, ओ/औ — पहली गलतियाँ
इ-ई और उ-ऊ जितनी रोज़, ये तीन जोड़े भी लिखना तोड़ते हैं। स्वर पहले खुल चुके; यहाँ लिखना।
| जोड़ा | एक | दूसरा |
|---|---|---|
| अ / आ | कल — अगला दिन / यंत्र | काल — समय |
| ए / ऐ | हे — पुकार | है — क्रिया |
| ए / ऐ | मेला, देव | कैसे, बैठ, ऐनक |
| ओ / औ | ओर — दिशा | और — जोड़ |
| ओ / औ | कोयल, मोर | कौन, नौ, औरत |
है क्रिया में ऐ की मात्रा ै। हे पुकार में ए। और जोड़ने वाला औ। ओर तरफ ओ। ये चार शब्द रोज़ उलझते हैं।
ध्यान दें: ए ऐ ओ औ हमेशा दीर्घ हैं। वर्तनी में इन्हें ह्रस्व बनाने का चिह्न नहीं। गलती मात्रा चुनने की है, लंबाई घटाने की नहीं।
6. श, ष, स — तीन ऊष्म, तीन लिखे रूप
श तालु (मुँह की छत), ष मुड़ी जीभ, स दांत। बोल में श और स कई जगह मिल जाते हैं। लिखने में तीनों अलग रहें। कान अकेला फैसला न करे।
| वर्ण | स्थान याद | पहला सहारा |
|---|---|---|
| स | दांत | रोज़ के आम शब्द — सब, सरस, आसमान |
| श | तालु (मुँह की छत) | शिव, शाला, विशेष, देश |
| ष | मुड़ी जीभ | ऋ/रेफ के पास, टवर्ग से पहले, क्ष के अंदर |
संदेह हो और शब्द रोज़ का लगे — पहले स सोचो। नीचे दिए नियम बैठें तो श या ष।
7. ष कब
ष मनमाना नहीं लगता। ये जगहें स्थिर हैं।
| नियम | शब्द |
|---|---|
| ऋ के बाद | कृषि, कृषक, दृष्टि, सृष्टि, वृष्टि, तृष्णा |
| रेफ के बाद बहुत से शब्द | वर्ष, वर्षा, हर्ष, शीर्ष, आशीष |
| टवर्ग से पहले (ष्ठ / ष्ट / ष्ण) | कष्ट, नष्ट, स्पष्ट, राष्ट्र, पृष्ठ, श्रेष्ठ, कृष्ण |
| क्ष = क् + ष | पक्षी, अक्षर, क्षमा, कक्षा |
भाषा, दोष, विषय, आकांक्षा — इनमें भी ष है। इन्हें शब्द की तरह याद रखो; स से मत बदलो।
वर्षा — रेफ + ष। वर्सा गलत।
कष्ट — ष + ट। कस्त गलत।
पक्षी — क्ष में ष। पक्सी गलत।
कृषि — ऋ + ष। क्रिषि या कृसी गलत।
ध्यान दें: स्पर्श में श है, ष नहीं। र के बाद हर बार ष नहीं लग जाता। नियम हर र का नहीं। राम, सरस, स्वर्ग में स/श अलग नियम से हैं।
8. श कब, स कब
श
तालु वाले: शिव, शोक, शाला, शब्द, शत्रु, विशेष, अवश्य, आश्चर्य, प्रवेश, देश, आदेश, आशीर्वाद (श से), शेष (श और ष दोनों)।
विशेष, प्रवेश, देश — अंत या बीच में श। इन्हें सिसेष / देस मत लिखो।
स
रोज़ के: सब, सरस, सास, सात, आसमान। कुछ और: सत्य, स्वर, स्वर्ग, स्त्री।
| श | ष | स |
|---|---|---|
| शेर, शाला, विशेष, अवश्य, देश | भाषा, दोष, कृषि, वर्षा, कष्ट, विषय | सब, सरस, सत्य, स्वर, आसमान |
| शेष का पहला वर्ण | शेष का दूसरा वर्ण | शेष इसमें नहीं |
शेष एक शब्द में श और ष साथ हैं। दोनों स मत बनाओ। क्ष में स नहीं — पक्षी क्सी नहीं।
9. ण और न — लिखना
जगह याद रहे: न दांत, ण मुड़ी जीभ। बोलचाल में ण अक्सर न जैसा लग सकता है। संस्कृत से आए शब्दों में ण रहता है। यह लिखने की दीवार है, उच्चारण दोहराना नहीं।
| ण बैठता है | न बैठता है |
|---|---|
| ष के बाद: कृष्ण, विष्णु, उष्ण | रोज़ के: सोना, पानी, नानी, आना, मन |
| ऋ / र के बाद बहुत से शब्द: पूर्ण, वर्णन, कारण, गुण, मरण, शरण, किरण | नदी, नाम, नेत्र का न; इनको ण मत बनाओ |
| टवर्ग के पास: गण, वाणी, कण्ठ | अनुस्वार वाले गंगा, अंत; यहाँ न/ण का अक्षर |
कारण — ण। कारन लिखना गलत।
गुण — ण। गुन बोल चल सकता है, लिखा गुण।
पानी — न। पाणी गलत।
कृष्ण — ष् + ण। कृश्न गलत।
ड़ ढ़ बोल में मुड़ी जीभ हैं; लिखने में ड/ढ से बिंदु वाला रूप शब्द के हिसाब से — सड़क, पढ़ना। विदेशी नुक्ता नुक्ता वाले विषय में।
10. ऋ, क्ष, ज्ञ — लिखने में न तोड़ो
ये तीन स्वर और संयुक्त जोड़ पहले खुल चुके। वर्तनी की पहली गलती इन्हें तोड़कर लिखना है।
| सही | गलत लिखा | क्यों |
|---|---|---|
| कृपा, ऋषि, ऋण, हृदय | क्रिपा, रिशि, रिण, हरदय | ऋ स्वर है, रि नहीं |
| कक्षा, पक्षी, अक्षर | ककसा, पक्सी, अकसर | क्ष = क् + ष, क्स नहीं |
| ज्ञान, यज्ञ | ग्यान, यग्य | बोला ग्य, लिखा ज्ञ |
पृथ्वी में ऋ की मात्रा ृ है, पृथिवी भी एक रूप है। रिथवी नहीं।
11. शब्द तोड़कर पूरा
इतिहास
इ ह्रस्व शुरू में। ति। हा। स। ईतिहास मत लिखो — ईश्वर वाला ई यहाँ नहीं।
नदी
न दांत, नाक से। द दांत। ई दीर्घ अंत। नदि गलत। न और ण की लड़ाई यहाँ नहीं — न सही है।
उपयोग
उ ह्रस्व, आगे जुड़ा टुकड़ा जैसा। प। यो। ग। ऊपयोग गलत।
भाषा
भ ओठ, फूंक। आ। ष मुड़ी जीभ, रगड़। आ। भासा / भाशा दोनों गलत। ष का शब्द है।
वर्षा
व। र् रेफ। ष। आ। वर्सा में ष टूटा, वर्शा में स्थान गलत।
कृषि
क् + ऋ + ष + इ। क्रिषि में ऋ टूटा। कृसी में ष टूटा।
कक्षा
क + क्ष + आ। क्ष = क् + ष, एक जोड़। ककसा गलत।
पूर्ण
प। ऊ। र। ण। पुर्ण में ऊ टूटा। पूर्न में ण टूटा।
विशेष — श तालु वाला। विसेष गलत। अंत ष नहीं, श है।
शेष — श + ष। एक शब्द, दो ऊष्म।
और / ओर — औ जोड़, ओ दिशा।
है / हे — ऐ क्रिया, ए पुकार।
12. आम गलतियाँ
- इतिहास को ईतिहास, ईश्वर को इश्वर लिखना।
- कवि को कवी, गुरु को गुरू बनाना — अंत में दीर्घ चढ़ा देना।
- दिन/दीन, कुल/कूल, सुख/सूख एक कर देना।
- उपयोग, उत्पन्न में ऊ लगा देना।
- दूध, फूल, धूप को दुध, फुल, धुप लिखना।
- है और हे, और और ओर मिला देना।
- श ष स को एक स बना देना। भाषा, कृषि, वर्षा में ष रहता है।
- क्ष को क्स, ज्ञ को ग्य लिखना।
- कृपा को क्रिपा — ऋ तोड़ना।
- कारण, गुण, पूर्ण को न से लिखना; पानी को ण से लिखना।
- स्पर्श को स्पर्ष कर देना — यहाँ श है, ष का नियम हर र पर नहीं।
- कान से वर्तनी तय करना। बोल और लिखा अलग हो सकते हैं — ज्ञ, ष, ण।
जाँच: (1) मात्रा इ या ई, उ या ऊ? आगे जुड़ा टुकड़ा और अर्थ-जोड़ा देखो। (2) ऊष्म है? स आम चुनो, श तालु, ष ऋ/रेफ/टवर्ग/क्ष। (3) नाक वाला वर्ण ऋ-र-ष के बाद? ण सोचो। पानी-जैसा रोज़ का? न।
13. इस विषय का सार
- वर्तनी = तय चिह्न। कान अकेला काफी नहीं।
- ि = इ, ी = ई। इतिहास इ, ईश्वर ई। कवि इ, नदी ई।
- ु = उ, ू = ऊ। उपयोग उ, दूध ऊ। गुरु उ, गुरू गलत।
- है/हे, और/ओर, कल/काल मात्रा से अर्थ बदलते हैं।
- स आम; श तालु; ष ऋ-रेफ-टवर्ग-क्ष में।
- ण संस्कृत से आए शब्दों में (कृष्ण, पूर्ण, कारण); न रोज़ के में (पानी, सोना)।
- ऋ, क्ष, ज्ञ तोड़कर मत लिखो।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. वर्तनी क्या है? कान अकेला काफी क्यों नहीं?
उत्तर
शब्द को तय चिह्नों से लिखना वर्तनी है। बोल में स जैसा लगे तो भी श या ष हो सकता है।
2. इतिहास और ईश्वर में इ/ई कैसे बैठता है?
उत्तर
इतिहास — इ ह्रस्व। ईश्वर — ई दीर्घ। ईतिहास और इश्वर दोनों गलत।
3. गुरु सही है या गुरू? दूध में उ है या ऊ?
उत्तर
गुरु — उ। गुरू गलत। दूध — ऊ। दुध गलत।
4. भाषा में श है, ष है या स?
उत्तर
ष। भासा / भाशा गलत।
5. ज्ञान को ग्यान लिखना सही है? कारण को कारन?
उत्तर
नहीं। बोला ग्य, लिखा ज्ञ। कारण में ण रहता है, कारन गलत।
विषय समाप्त · बुनियादी वर्तनी
