Noteclass 9 10

उच्चारण

Lesson 7 of 71

अंग 1 · वर्ण विचार

पाठ 1.7

विषय शुरू · उच्चारण

वर्ग याद हैं — कवर्ग गला, टवर्ग मुड़ी जीभ, तवर्ग दांत। अब वही बात खोलकर नियम बनती है: हर वर्ण कहाँ से निकलता है, और हवा कितनी निकलती है। यहीं से दंत्य-मूर्धन्य (दांत / मुड़ी जीभ) और अल्पप्राण-महाप्राण (हवा कम / फूंक) बैठते हैं।

1. उच्चारण क्या है

वर्ण जब मुँह से सही जगह और सही हवा से बोला जाए, वह उसका उच्चारण है। लिपि लिखा रूप है। उच्चारण बोल है। दोनों मिलें तो शब्द साफ़ रहता है।

क और ख दोनों कवर्ग हैं, जगह एक। फर्क हवा का है। त और ट दोनों स्पर्श हैं, फर्क जगह का है। इस विषय में ये दो सवाल पूरे करने हैं।

ताल और टाल — लिखने में एक रेखा का फर्क, बोल में जीभ की जगह का फर्क।

कल और खल — जगह एक, फूंक अलग।

ध्यान दें: यह विषय ध्वनि का है। इ/ई, श/ष/स कब लिखें — वर्तनी वाले विषय में। गला काँपता है या नहीं — घोष-अघोष वाले विषय में। नुक्ता क़ ख़ ग़ — नुक्ता वाले विषय में।

2. दो सवाल — स्थान और प्राण

हर व्यंजन पर यही दो प्रश्न पूछिए:

प्रश्न नाम जवाब का रूप
हवा कहाँ रुकती या रगड़ती है? उच्चारण स्थान गला, तालु (मुँह की छत), मूर्धा (जीभ मुड़ी), दांत, ओठ
हवा कितनी जोर से निकलती है? प्राण (हवा) अल्पप्राण (कम) या महाप्राण (फूंक)

तीसरा प्रश्न — गला काँपता है क्या — भी जरूरी है। उसका पूरा नाम घोष और अघोष है। वर्ग के तीसरे-चौथे वर्ण में काँपना साफ़ है; विस्तार घोष वाले विषय में। यहाँ सिर्फ़ इतना रखिए कि क-ख में गला शांत, ग-घ में गला काँपता।

3. 5 मुख्य स्थान

मुँह के 5 हिस्से वर्ण बाँटते हैं। वर्ग का नाम याद हो तो स्थान अपने आप चिपकता है।

स्थान नाम कहाँ मुख्य वर्ण
कंठ कंठ्य गला क ख ग घ ङ, ह; स्वर अ आ
तालु तालव्य ऊपर का कठोर तालु च छ ज झ ञ, य, श; स्वर इ ई
मूर्धा मूर्धन्य तालु के पीछे मुड़ा भाग; जीभ उलटी ट ठ ड ढ ण, र, ष; स्वर ऋ
दांत दंत्य ऊपरी दांत / उनके मूल त थ द ध न, ल, स
ओठ ओष्ठ्य दोनों होंठ प फ ब भ म; स्वर उ ऊ

तीन मिश्र जगह — दो जगह एक साथ

कुछ वर्ण दो जगह एक साथ छूते हैं। इन्हें अलग वर्ग मत बनाओ; जगह याद रखो। नाम लंबे हैं, मतलब सीधा है।

नाम जगह वर्ण
दंतोष्ठ्य दांत + नीचे का ओठ व
कंठतालव्य कंठ + तालु ए, ऐ
कंठोष्ठ्य कंठ + ओठ ओ, औ

विसर्ग कंठ से आता है, ह जैसी फूंक। अनुस्वार नाक जोड़ता है। अयोगवाह की गिनती अयोगवाह वाले विषय में।

4. स्वर कहाँ से

स्वर में हवा नहीं अटकती, फिर भी जीभ और ओठ की जगह तय होती है। ह्रस्व-दीर्घ समय था; यहाँ जगह है।

स्वर स्थान याद
अ आ कंठ्य मुँह खुला, जीभ नीचे
इ ई तालव्य जीभ तालु के पास
उ ऊ ओष्ठ्य ओठ गोल
ऋ मूर्धन्य जीभ मुड़ती है; हिंदी में अक्सर रि जैसा लगता है, वर्ण ऋ ही है
ए ऐ कंठतालव्य अ/आ और इ के बीच का रास्ता
ओ औ कंठोष्ठ्य अ/आ और उ के बीच; ओठ गोल

माता — दोनों आ कंठ्य दीर्घ।

नदी — ई तालव्य दीर्घ।

फूल — ऊ ओष्ठ्य दीर्घ।

कृपा — ऋ मूर्धन्य ह्रस्व, मात्रा ृ।

5. व्यंजन — वर्ग से स्थान

व्यंजन-वर्ग का चार्ट अब स्थान के नाम से पूरा होता है। स्पर्श 5 वर्ग, फिर अंतःस्थ, फिर ऊष्म।

समूह वर्ण स्थान
कवर्ग क ख ग घ ङ कंठ्य
चवर्ग च छ ज झ ञ तालव्य
टवर्ग ट ठ ड ढ ण मूर्धन्य
तवर्ग त थ द ध न दंत्य
पवर्ग प फ ब भ म ओष्ठ्य
अंतःस्थ य र ल व तालव्य, मूर्धन्य, दंत्य, दंतोष्ठ्य
ऊष्म श ष स ह तालव्य, मूर्धन्य, दंत्य, कंठ्य

य तालव्य है, र मूर्धन्य, ल दंत्य, व दंतोष्ठ्य। श तालव्य, ष मूर्धन्य, स दंत्य, ह कंठ्य। स्पर्श जितना कड़ा नहीं, जगह फिर भी यही पाँच हैं।

6. दंत्य और मूर्धन्य

हिंदी बोलने में सबसे अधिक उलझन यहीं है। दांत छूकर बोले दंत्य। जीभ उलटी करके मूर्धा छूकर बोले मूर्धन्य।

दंत्य (तवर्ग) मूर्धन्य (टवर्ग)
पहला त — ताल, तन, बात ट — टाल, टन, बाट
दूसरा थ — थाली, थाम, साथ ठ — ठंड, ठाम, पाठ
तीसरा द — दल, दाल, नदी ड — डल, डाल, अड्डा
चौथा ध — धन, धूप, वध ढ — ढोल, ढक्कन, चढ़
पाँचवाँ न — नदी, नाम, सोना ण — गण, गुण, प्राण

जीभ की जाँच: त थ द ध न में जीभ सीधी, ऊपरी दांत के मूल को छूती है। ट ठ ड ढ ण में जीभ मुड़कर ऊपर पीछे लगती है। आईने के बिना भी जीभ का अहसास अलग है।

टमाटर — पहला ट मूर्धन्य, बाद का त दंत्य। एक शब्द, दो जगह।

कठिन — ठ मुड़ी जीभ + फूंक, न दांत + नाक से।

कारण, मणि, पूर्ण — ण मुड़ी जीभ; इन्हें न से मत बदलो बोल में। संस्कृत से आए शब्दों में ण रहता है।

ध्यान दें: बोलचाल में ण अक्सर न जैसा लग सकता है। व्याकरण और शुद्ध पाठ में स्थान का फर्क रखा जाता है। त/ट, द/ड का फर्क बोल में भी साफ़ रखना चाहिए — वरना ताल और टाल एक हो जाते हैं।

ऊष्म पर वही फर्क

स दंत्य है, ष मूर्धन्य। श तालव्य — तीसरी जगह। तीनों ऊष्म हैं, स्थान तीन।

वर्ण स्थान शब्द जीभ
श तालव्य शेर, शाला, अवश्य तालु, फैली
ष मूर्धन्य भाषा, दोष, कृषि उलटी, पीछे
स दंत्य सरस, सब, आसमान दांत के पास

बोल में श और स का फर्क कई बोलियों में मिट जाता है। वर्णमाला में तीन अलग हैं। कब कौन लिखें — वर्तनी वाले विषय में। यहाँ कान से जगह पहचानिए।

क्ष में ष है, इसलिए जोड़ मूर्धन्य ऊष्म वाला है — पक्षी में ष, क्स नहीं।

7. अल्पप्राण और महाप्राण

जिस वर्ण में हवा कम निकलती है, वह अल्पप्राण। जिसमें हवा अधिक निकलती है — फूंक जैसी — वह महाप्राण। प्राण यहाँ साँस / हवा है।

हाथ की जाँच: हथेली मुँह के सामने रखो। क बोलो — हवा कम। ख बोलो — हवा हाथ पर लगती है। यही क और ख का फर्क है, जगह नहीं।

भेद हवा वर्ग में जगह
अल्पप्राण कम, बंद के करीब पहला, तीसरा, पाँचवाँ
महाप्राण अधिक, फूंक दूसरा, चौथा

पाँचवाँ वर्ण नाक से बोलता है — हवा नाक से जाती है, फूंक महाप्राण जैसी नहीं। उसे अल्पप्राण (हवा कम) + नाक समझो। पूरा पंचमाक्षर घोष वाले विषय में।

8. हर वर्ग पर अल्प और महा

वर्ग का क्रम अब नाम के साथ:

वर्ग अल्पप्राण महाप्राण नाक से (अल्प)
कवर्ग · कंठ्य क, ग ख, घ ङ
चवर्ग · तालव्य च, ज छ, झ ञ
टवर्ग · मूर्धन्य ट, ड ठ, ढ ण
तवर्ग · दंत्य त, द थ, ध न
पवर्ग · ओष्ठ्य प, ब फ, भ म

एक वर्ग में पहला और तीसरा दोनों अल्पप्राण हैं। फर्क गले का है: पहला शांत, तीसरा काँपता। दूसरा और चौथा दोनों महाप्राण: दूसरा शांत फूंक, चौथा काँपती फूंक। काँपने का पूरा नाम घोष-अघोष है।

फल — फ ओष्ठ्य महाप्राण। पल — प ओष्ठ्य अल्पप्राण। अर्थ अलग, जगह एक।

घर — घ कंठ्य महाप्राण। गर — ग कंठ्य अल्पप्राण।

छात्र — छ तालव्य महाप्राण। चल — च तालव्य अल्पप्राण।

धन — ध दंत्य महाप्राण। दल — द दंत्य अल्पप्राण।

पाठ — ठ मूर्धन्य महाप्राण। टोपी — ट मूर्धन्य अल्पप्राण।

जाँच: वर्ण निकालो। पहले वर्ग बताओ। फिर पूछो — फूंक है? हाँ तो महाप्राण, दूसरा या चौथा। नहीं तो अल्पप्राण। फिर पूछो — जीभ दांत पर है या मुड़ी है? दंत्य या मूर्धन्य।

अंतःस्थ और ऊष्म पर प्राण

य र ल व अल्पप्राण माने जाते हैं — फूंक स्पर्श के दूसरे-चौथे जैसी नहीं।

श ष स ह ऊष्म हैं, हवा रगड़ से निकलती है। इन्हें महाप्राण की श्रेणी में रखा जाता है। ह में गला भी काँपता है — घोष वाले विषय में।

विसर्ग की फूंक ह जैसी है, पर विसर्ग व्यंजन नहीं। ख की फूंक व्यंजन महाप्राण है। दुःख में दोनों पास हैं।

9. स्थान + प्राण एक साथ

अब एक वर्ण की पूरी पहचान दो शब्दों में होनी चाहिए।

वर्ण स्थान प्राण शब्द
ख कंठ्य महाप्राण खाना, मुख
ज तालव्य अल्पप्राण जल, राज
ठ मूर्धन्य महाप्राण ठंड, कठिन
द दंत्य अल्पप्राण दल, नदी
फ ओष्ठ्य महाप्राण फल, सफर
ष मूर्धन्य ऊष्म · महाप्राण भाषा, दोष
ल दंत्य अंतःस्थ · अल्पप्राण लता, कमल

फ और ख दोनों महाप्राण हैं, हाथ पर हवा लगती है। स्थान अलग: फ ओठ, ख कंठ। बच्चे अक्सर दोनों को एक फूंक समझकर मिला देते हैं। वर्ग अलग रखिए।

10. ड़ और ढ़

ड और ढ के नीचे बिंदु: ड़, ढ़। ये विदेशी नुक्ता (क़ ख़) नहीं। हिंदी के अपने मूर्धन्य वर्ण हैं। जीभ मूर्धा से छूकर झटके से हटती है।

वर्ण प्राण शब्द
ड़ अल्पप्राण सड़क, लड़का, पेड़
ढ़ महाप्राण पढ़ना, चढ़ना, गढ़

शब्द के शुरू में अक्सर ड ढ रहते हैं: डमरू, ढोल। बीच या अंत में हिंदी में अक्सर ड़ ढ़: लड़का, पढ़ा। ड को बीच में ड़ जैसा बोलना आम है; लिखना शब्द के हिसाब से देखो।

क़ ख़ ग़ ज़ फ़ अलग ध्वनियाँ हैं — बिंदु का दूसरा काम, नुक्ता वाले विषय में। ड़ ढ़ को उनसे मत मिलाइए।

11. जो जोड़े अक्सर मिल जाते हैं

नीचे हर जोड़े में एक बात बदलती है। बाकी बात एक रखिए, तभी कान फर्क पकड़ता है।

जोड़ा क्या बदला उदाहरण
त / ट स्थान — दंत्य / मूर्धन्य ताल–टाल, बात–बाट
द / ड स्थान दाल–डाल; नदी का द, डमरू का ड
न / ण स्थान नदी–गण, सोना–गुण
स / ष / श स्थान तीन सब–दोष–शेर
क / ख प्राण — अल्प / महा कल–खल, काका–खाका
प / फ प्राण पल–फल, पूल–फूल
च / छ प्राण चल–छल, चाप–छाप
ग / घ प्राण (दोनों में गला काँपता) गर–घर

दाल और डाल दोनों सही शब्द हैं, अर्थ अलग। बोल में दंत्य-मूर्धन्य न हो तो अर्थ मिल जाता है। यही इस विषय की जरूरत है।

12. शब्द तोड़कर पूरा

टमाटर

ट — मूर्धन्य अल्पप्राण। म — ओष्ठ्य नासिक्य। आ — कंठ्य दीर्घ। त — दंत्य अल्पप्राण। र — मूर्धन्य अंतःस्थ। एक शब्द में मूर्धा और दांत दोनों।

भाषा

भ — ओष्ठ्य महाप्राण, गला काँपता। आ — कंठ्य। ष — मूर्धन्य ऊष्म। आ। ष को स बोलने से भाषा भासा हो जाती है।

कठिन

क — कंठ्य अल्पप्राण। ठ — मूर्धन्य महाप्राण। इ — तालव्य। न — दंत्य नासिक्य। ठ की फूंक और मूर्धा दोनों साफ़ हों।

छात्र

छ — तालव्य महाप्राण। आ। त्र — त् दंत्य हल + र मूर्धन्य। छ की फूंक हाथ पर, त दांत पर।

गुण

ग — कंठ्य अल्पप्राण, गला काँपता। उ — ओष्ठ्य। ण — मूर्धन्य नासिक्य। अंत न नहीं, ण।

फल

फ — ओष्ठ्य महाप्राण। ल — दंत्य अंतःस्थ अल्पप्राण। फ को प मत बनाओ — वरना पल बचता है।

वर्षा — व दंतोष्ठ्य, र् मूर्धन्य हल (रेफ), ष मूर्धन्य ऊष्म, आ। ष दंत्य स नहीं।

गंगा — ग कंठ्य, ङ कंठ्य नासिक्य (या अनुस्वार उसी जगह), ग, आ। ङ तवर्ग का न नहीं।

13. आम गलतियाँ

  • त और ट एक बोलना — ताल / टाल मिट जाते हैं।
  • द और ड, न और ण मिला देना। स्थान का फर्क वर्ग का फर्क है।
  • श ष स को एक स बना देना। तीन जगह हैं; लिखना वर्तनी वाले विषय में, बोल यहाँ।
  • क और ख, प और फ की फूंक छोड़ना। महाप्राण बिना हवा के अल्पप्राण हो जाता है।
  • ख और फ एक फूंक समझना। ख कंठ्य, फ ओष्ठ्य।
  • ऋ को केवल रि लिखकर स्वर से हटा देना। उच्चारण रि जैसा लग सकता है, स्थान मूर्धन्य स्वर का है।
  • ड़ ढ़ को क़ ख़ वाला नुक्ता समझना। वे हिंदी मूर्धन्य हैं, विदेशी ध्वनि नहीं।
  • अल्पप्राण को हल्का वर्ण और महाप्राण को भारी अर्थ समझना। प्राण हवा है, शब्द का वजन नहीं।
  • घोष-अघोष को यहीं पूरा मान लेना। गला काँपना अलग अक्ष है — घोष वाले विषय में।

जाँच: वर्ण लो। (1) 5 में से जगह? (2) फूंक है? (3) जीभ मुड़ी है? तीन उत्तर आ जाएँ तो उच्चारण का ढाँचा बैठ गया। गला काँपता है — चौथा प्रश्न, नाम घोष-अघोष है।

14. इस विषय का सार

  • उच्चारण = सही स्थान + सही हवा।
  • 5 जगह: गला (कंठ), तालु (मुँह की छत), मूर्धा (जीभ मुड़ी), दांत, ओठ। व = दांत+ओठ; ए ऐ = गला+तालु; ओ औ = गला+ओठ।
  • टवर्ग मूर्धन्य, तवर्ग दंत्य। त/ट, द/ड, न/ण, स/ष यहीं अलग होते हैं।
  • अल्पप्राण — हवा कम: वर्ग का पहला, तीसरा, पाँचवाँ। महाप्राण — फूंक: दूसरा, चौथा।
  • ऊष्म श ष स ह महाप्राण श्रेणी; य र ल व अल्पप्राण।
  • ड़ ढ़ हिंदी मूर्धन्य हैं, विदेशी नुक्ता नहीं।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. उच्चारण के दो मुख्य सवाल क्या हैं?

उत्तर

हवा कहाँ रुकती है — स्थान। हवा कितनी निकलती है — अल्पप्राण या महाप्राण।

2. त और ट में क्या फर्क है? ताल और टाल बताओ।

उत्तर

त दंत्य, ट मूर्धन्य। ताल — दांत। टाल — जीभ मुड़ी।

3. क अल्पप्राण है या महाप्राण? ख?

उत्तर

क अल्पप्राण — हवा कम। ख महाप्राण — फूंक, हाथ पर हवा लगती है। जगह दोनों की कंठ।

4. ख और फ दोनों में फूंक है। स्थान अलग कैसे?

उत्तर

ख कंठ्य महाप्राण। फ ओष्ठ्य महाप्राण। फूंक एक जैसी लगे, वर्ग अलग है।

5. सही या ग़लत: ड़ और ढ़ विदेशी नुक्ता हैं, जैसे क़ ख़।

उत्तर

ग़लत। ड़ ढ़ हिंदी के अपने मूर्धन्य वर्ण हैं। क़ ख़ विदेशी ध्वनियाँ हैं।

विषय समाप्त · उच्चारण