Noteclass 9 10

हलंत और संयुक्त अक्षर

Lesson 6 of 71

अंग 1 · वर्ण विचार

पाठ 1.6

विषय शुरू · हलंत और संयुक्त अक्षर

क में अ छिपा है। जब वह अ हटाना हो, या दो व्यंजन बिना स्वर के चिपकाने हों, तब हल चिह्न आता है। उसी से संयुक्त अक्षर बनते हैं — क्ष, त्र, ज्ञ, श्र और दर्जनों और रूप।

1. हलंत क्या है

व्यंजन के नीचे तिरछी रेखा हल चिह्न या हलंत है: ्। इसका एक काम है — व्यंजन में बैठा अ निकाल देना।

लिखा ध्वनि अ है?
क क् + अ हाँ — मात्रा नहीं, अ छिपा
क् केवल क् नहीं — हलंत ने अ हटाया
का क् + आ अ नहीं, आ मात्रा से

हलंत मात्रा नहीं। मात्रा स्वर जोड़ती है। हलंत स्वर हटाता है। अनुस्वार नाक वाली ध्वनि जोड़ता है। तीनों अलग काम हैं।

वाक्, जगत्, आकस्मिक — अंत या बीच में हलंत साफ़ दिखता है।

विद्यालय में द् हल है, य से जुड़कर द्य बना, फिर आ मात्रा से द्या।

2. शब्द के अंत में हलंत

कुछ संस्कृत से आए शब्दों के अंत में व्यंजन बिना अ के रहता है। तब हलंत लिखा जाता है।

शब्द अंत
वाक् क् — बोली / वाणी
जगत् त् — संसार
महान्, सत् न् / त् — अंत में अ नहीं

रोज़ की हिंदी जगत, वाक जैसे अ के साथ भी चलती है। शुद्ध रूप में हलंत रहता है। दोनों पहचानो।

ध्यान दें: कमल के ल पर हलंत नहीं। ल = ल् + अ। जगत् के त पर हलंत है। अंत देखकर तय करें, हर शब्द के अंत में ् मत लगाएँ।

3. संयुक्त व्यंजन / संयुक्त अक्षर

दो या अधिक व्यंजन जब बीच में स्वर बिना जुड़ें, तो संयुक्त व्यंजन बनता है। लिखा एक अक्षर जैसा दिखता है। पहला व्यंजन हलंत वाला होता है, दूसरा उससे चिपकता है।

सूत्र सीधा है:

पहला व्यंजन + ् + दूसरा व्यंजन (+ मात्रा, अगर हो)

क् + ष = क्ष। त् + र = त्र। द् + य + आ = द्या।

संयुक्त अक्षर मूल 33 व्यंजनों में नहीं गिने जाते। ये जोड़ हैं। वर्णमाला के चार्ट पर क्ष त्र ज्ञ अक्सर नीचे छपते हैं — सुविधा के लिए, न कि 34वाँ व्यंजन बनने के लिए।

4. क्ष, त्र, ज्ञ, श्र — चार प्रसिद्ध जोड़

ये चार सबसे अधिक चलते हैं। इन्हें अलग वर्ण मत समझिए; तोड़कर याद रखिए।

अक्षर जोड़ शब्द
क्ष क् + ष कक्षा, रक्षा, क्षमा, अक्षर, पक्षी
त्र त् + र त्रिकोण, मित्र, पत्र, त्रिशूल
ज्ञ ज् + ञ ज्ञान, यज्ञ, विज्ञान, अज्ञानी
श्र श् + र श्रम, श्री, आश्रम, श्रवण

ज्ञ का उच्चारण

लिखा ज् + ञ है। बोलने में हिंदी में अक्सर ग्य जैसा लगता है — ज्ञान ≈ ग्यान। लिखते समय ज्ञ ही सही है, ग्यान वर्तनी नहीं। यह लिखने और बोलने का फर्क है, जोड़ बदलता नहीं।

क्ष क्स नहीं

क्ष = क् + ष (ऊष्म, जीभ मुड़ी)। क्स = क् + स (दांत)। पक्षी में ष है, क्सी नहीं।

5. और संयुक्त रूप जो रोज़ आते हैं

चार प्रसिद्ध जोड़ के अलावा ये भी तोड़ना आना चाहिए। रटने की लंबी सूची नहीं — जोड़ देखो।

रूप जोड़ शब्द
द्य / द्या द् + य विद्यालय, विद्या
द्व द् + व द्वार, द्वीप
त्त / त्य त् + त / त् + य उत्तम, सत्य
च्छ च् + छ अच्छा, इच्छा
द्ध द् + ध बुद्ध, शुद्ध
ष्ट / ष्ण ष् + ट / ष् + ण कष्ट, कृष्ण
क्त क् + त भक्त

अनुस्वार वाले संबंध, अंत, लंबा बिंदु से लिखे जा सकते हैं; पूरा रूप सम्बन्ध, अन्त, लम्बा हलंत दिखाता है। दोनों अनुस्वार वाले विषय से जुड़े हैं।

6. र के तीन लिखे रूप

र संयुक्त में तीन तरह बैठता है। यह विषय का कठिन टुकड़ा है — अधूरा न छोड़ो।

रूप कब उदाहरण
रेफ — छोटी रेखा व्यंजन के ऊपर र् पहले, दूसरा व्यंजन बाद में कर्म = क् + अ + र् + म; अर्थ, सूर्य, वर्षा
नीचे कटा र र दूसरा सदस्य प्र = प् + र — प्रेम, प्राप्त; क्र, ग्र, त्र
त्र — त् + र का विशेष रूप त और र का जोड़ मित्र, पत्र, त्रिकोण

कर्म — र ऊपर रेफ, म नीचे पूरा। क्रम: क + र् + म।

क्रम — क् + र (र नीचे/कटा) + म। पहला व्यंजन क् हल, र दूसरा।

दोनों शब्द अलग हैं। रेफ और नीचे कटा र उलटा मत लगाओ।

श्र = श् + र (र दूसरा, श के साथ)। वर्षा = व + र् + षा — रेफ श पर नहीं, ष से पहले र्।

7. मात्रा संयुक्त अक्षर पर

मात्रा पूरे संयुक्त रूप पर लगती है, पहले टुकड़े पर अलग नहीं — जब तक अक्षर एक इकाई हो।

  • द्या = द् + य् + आ — आ पूरे द्य पर।
  • क्रिया = क् + र् + इ + य् + आ — ि अक्सर क से पहले दिखती है: क्रि + या।
  • क्षमा = क्ष + म् + आ — क्ष पर अ छिपा, मा पर आ।
  • त्रिकोण = त्रि + कोण — त्र पर इ की मात्रा।

ि संयुक्त के पहले लग सकती है: प्रिय, त्रि, श्रित। पढ़ते समय मात्रा उस पूरे व्यंजन-समूह के स्वर की है।

विद्यालय = वि + द्या + ल + य।

अक्षर = अ + क्ष + र। क्ष = क् + ष, अ छिपा।

राष्ट्र = रा + ष्ट्र — ष् + ट् + र।

8. आधा रूप और पूरा हलंत

छपाई में पहला व्यंजन अक्सर आधा दिखता है, नीचे ् की रेखा न दिखे: त् + य = त्य। हाथ से लिखते समय हल रेखा खींचना भी चलता है। दोनों का मतलब एक है — बीच में अ नहीं।

यदि दो व्यंजन अलग-अलग अक्षर हों तो बीच में अ होता है: पत + र = पतर, वह पत्र नहीं। पत्र में त् हल है, र जुड़ा है।

9. तीन व्यंजन तक

कभी तीन व्यंजन चिपकते हैं: ष्ट्र (ष्+ट्+र), त्त्र, क्त्य। सूत्र वही — हर पहले सदस्य हल, अंतिम पर मात्रा या अ।

राष्ट्र, आश्चर्य (श्+च्+र), तत्त्व (त्+त्+व)।

इन्हें एक चित्र की तरह रटो नहीं; बाएँ से तोड़ो।

10. जो संयुक्त नहीं

  • का, कि, कु — व्यंजन + मात्रा। दूसरा वर्ण स्वर है, व्यंजन नहीं।
  • कं — अनुस्वार, हलंत नहीं।
  • क् + अ अलग लिखकर क बनाना संयुक्त नहीं, मूल अक्षर है।
  • य र ल व जब पूरे अक्षर हों (यमुना, राम) — संयुक्त तभी जब पहले वाला हल हो।

11. शब्द तोड़कर पूरा

कक्षा

क + क्ष + आ। क्ष = क् + ष। दूसरा क हल, ष से जुड़ा, आ मात्रा क्ष पर।

मित्र

मि + त्र। मि = म् + इ। त्र = त् + र, अ छिपा या शब्द के अंत का रूप।

ज्ञान

ज्ञा + न। ज्ञ = ज् + ञ, आ मात्रा, न = न् + अ। बोला ग्यान, लिखा ज्ञान।

अच्छा

अ + च्छ + आ। च् + छ, आ मात्रा। हलंत च पर।

कर्म

क + र् + म। रेफ म के ऊपर। क में अ, म में अ।

प्रथम

प्र + थ + म। प्र = प् + र (र दूसरा)।

12. आम गलतियाँ

  • क्ष त्र ज्ञ को मूल व्यंजन गिनकर 36 बना देना।
  • ज्ञ को ग्य लिखना।
  • क्ष को क्स लिखना।
  • कर्म और क्रम, अर्थ और रथ में रेफ उलटा लगाना।
  • पत्र को पतर लिखना — त हल नहीं रहा।
  • हलंत को मात्रा समझना। ् स्वर जोड़ता नहीं, हटाता है।
  • हर दो पास व्यंजन को संयुक्त मानना — नदी में न और द अलग अक्षर हैं, बीच में ई/अ है।

जाँच: दो व्यंजन चिपके दिखें तो पूछो — बीच में अ है? नहीं → हलंत / संयुक्त। ऊपर रेफ है? र् पहले है। नीचे कटा र है? र दूसरा है।

13. इस विषय का सार

  • हलंत ् व्यंजन का अ हटाता है।
  • संयुक्त = व्यंजन + ् + व्यंजन। मूल 33 में नहीं।
  • क्ष = क्+ष, त्र = त्+र, ज्ञ = ज्+ञ, श्र = श्+र।
  • ज्ञ लिखा ज्ञ, बोला अक्सर ग्य।
  • रेफ = र् पहले (ऊपर)। नीचे कटा र = र दूसरा।
  • मात्रा पूरे संयुक्त अक्षर पर लगती है।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. खाली जगह भरो।
हलंत ् व्यंजन का ________ हटाता है। मात्रा स्वर ________ है।

उत्तर

अ। जोड़ती।

2. क्ष किस जोड़ से बना है? क्या यह मूल 33 व्यंजनों में गिना जाता है?

उत्तर

क् + ष। नहीं — संयुक्त जोड़ है, मूल व्यंजन नहीं।

3. ज्ञान लिखा कैसे है, बोला कैसे लगता है?

उत्तर

लिखा ज्ञ (ज् + ञ)। बोला अक्सर ग्य जैसा। ग्यान लिखना गलत है।

4. कर्म और क्रम में र कहाँ बैठता है?

उत्तर

कर्म — रेफ ऊपर, र् पहले। क्रम — र दूसरा, कटा / नीचे।

5. पत्र को पतर क्यों नहीं लिखते?

उत्तर

पत्र में त् हल है, र जुड़ा है — संयुक्त। पतर में त और र अलग अक्षर हैं, बीच में अ है।

विषय समाप्त · हलंत और संयुक्त अक्षर