Noteclass 9 10

मात्राएँ

Lesson 4 of 71

अंग 1 · वर्ण विचार

पाठ 1.4

विषय शुरू · मात्राएँ

स्वर अकेले भी लिखे जाते हैं, व्यंजन अलग। अब दोनों का मेल: जब स्वर व्यंजन से जुड़ता है तो उसका लिखा रूप मात्रा कहलाता है। देवनागरी की सबसे रोज़ की कुंजी यही है।

1. परिभाषा

स्वर का वह चिह्न जो व्यंजन से सट कर बैठता है, मात्रा है। मात्रा स्वर का दूसरा रूप है — ध्वनि वही, लिखावट छोटी।

आ अक्षर अलग लिखा जा सकता है — आम। वही आ जब क से जुड़े तो ा बनकर का हो जाता है। इ अक्षर — इमली। वही इ मात्रा ि बनकर कि हो जाता है।

पूरा स्वर: आ, इ, उ, ए।

मात्रा रूप: का, कि, कु, के।

दोनों में स्वर एक है। फर्क सिर्फ़ यह है कि मात्रा व्यंजन से चिपककर बैठती है।

2. अ की मात्रा नहीं

11 स्वरों में अ अकेला ऐसा है जिसकी मात्रा नहीं लगती। व्यंजन लिखते ही अ अपने आप माना जाता है।

लिखा ध्वनि शब्द
क क् + अ कमल, कल
म म् + अ मन, ममता
क् केवल क्, अ हटा हल चिह्न — आगे

ध्यान दें: क और का दो अक्षर हैं। क में अ है, का में आ। मात्रा न दिखे तो अ समझो, कोई मात्रा खाली नहीं छूटी।

3. 10 मात्राएँ — क के साथ

बाकी 10 स्वरों की मात्राएँ ये हैं। याद क से बाँधिए, फिर किसी भी व्यंजन पर वही चिह्न लग जाएगा।

स्वर मात्रा क + मात्रा शब्द
अ—ककमल
आाकाकाला, काया
इिकिकिताब, किनारा
ईीकीकीमत, कीट
उुकुकुल, कुआँ
ऊूकूकूद, धूप
ऋृकृकृपा, कृष्ण
एेकेकेला, मेला
ऐैकैकैसे, है
ओोकोकोयल, मोर
औौकौकौन, नौ

म पर वही चिह्न: मा मि मी मु मू मृ मे मै मो मौ। नियम व्यंजन बदलने से नहीं बदलता।

4. मात्रा कहाँ लगती है

गलती अक्सर जगह से होती है। चार दिशाएँ याद रखो।

जगह मात्रा उदाहरण
व्यंजन के पहले (बाएँ) ि कि, मि, सि, वि
व्यंजन के बाद (दाएँ) ा ी ो ौ का, की, को, कौ
व्यंजन के ऊपर े ै के, कै, मेला, है
व्यंजन के नीचे ु ू ृ कु, कू, कृ, गुरु

ो और ौ दरअसल ऊपर की े / ै और दाईं खड़ी लकीर का मेल हैं। लिखते समय दोनों हिस्से व्यंजन से चिपकते हैं: को = क् + ओ।

किताब — ि क से पहले है, पढ़ते हैं क् + इ।

नदी — ी द के बाद है, पढ़ते हैं द् + ई।

गुरु — ु ग के नीचे है, फिर र + उ नीचे।

5. इ और ई — सबसे पतली दीवार

ि छोटी इ है, ह्रस्व। ी बड़ी ई है, दीर्घ। आकृति उलटी न याद करें:

  • ि — बाएँ मुड़ी, व्यंजन से पहले। दिन, पिता, किताब, विद्या।
  • ी — दाएँ खड़ी लकीर पर घुंडी। दीन, नदी, कीमत, धीर।
ि (इ) ी (ई)
दिन, बिन, गिर, मिट दीन, बीन, गीत, मीत
पिता, हिम्मत नदी, हाथी, खेती

उ ु और ऊ ू नीचे लगते हैं। ु छोटी, ू लंबी — कू में घुंडी या घुमाव दीर्घ दिखाता है। कुल / कूल का फर्क यही है।

6. शब्द में कई मात्राएँ

एक शब्द में हर व्यंजन की अपनी मात्रा हो सकती है, या अ छिपा रह सकता है।

माता

मा = म् + आ। ता = त् + आ। दोनों आ मात्रा ा। अ कहीं नहीं छिपा।

किताब

कि = क् + इ (ि पहले)। ता = त् + आ। ब = ब् + अ (मात्रा नहीं)। तीन अक्षर, तीन स्वर: इ, आ, अ।

विद्यालय

वि = व् + इ। द्या = द् + य् + आ — संयुक्त व्यंजन पर एक आ। ल = ल् + अ। य = य् + अ।

कृष्ण

कृ = क् + ऋ (ृ नीचे)। ष्ण = ष् + ण — संयुक्त, अ छिपा या हल। ऋ की मात्रा ृ को रि न बनाएँ।

केला = क् + ए + ल् + आ → के + ला।

कौन = क् + औ + न् + अ → कौ + न।

सूरज = स् + ऊ + र् + अ + ज् + अ → सू + र + ज।

7. मात्रा और ह्रस्व-दीर्घ

मात्रा उसी स्वर की लंबाई रखती है जो स्वर उसमें बैठा है।

  • ह्रस्व मात्रा: ि ु ृ — इ उ ऋ।
  • दीर्घ मात्रा: ा ी ू े ै ो ौ — आ ई ऊ ए ऐ ओ औ।
  • अ ह्रस्व है, चिह्न नहीं।

इसलिए कि ह्रस्व है, की दीर्घ। कु ह्रस्व, कू दीर्घ। के कै को कौ सब दीर्घ — ए ऐ ओ औ दीर्घ स्वर हैं।

8. जो मात्रा नहीं

  • ं अनुस्वार और ँ चंद्रबिंदु मात्रा नहीं। ये नाक वाली ध्वनि के चिह्न हैं — पूरा नियम अगले विषय में।
  • ः विसर्ग मात्रा नहीं।
  • ् हल चिह्न मात्रा नहीं; यह अ हटाता है।

कं, कः, क् तीन अलग काम हैं: नाक वाला बिंदु, विसर्ग, हल। इन्हें का-कि-की वाली पंक्ति में मत बिठाओ।

जाँच: अक्षर देखो। बाएँ ि है? नीचे ु ू ृ है? ऊपर े ै है? दाएँ ा ी ो ौ है? कुछ नहीं तो अ।

9. आम गलतियाँ

  • ि को व्यंजन के बाद लगाना। ि हमेशा पहले आती है।
  • कि और की, कु और कू मिला देना।
  • अ की कोई मात्रा गढ़ लेना। अ चिह्न माँगता नहीं।
  • ऋ की ृ के स्थान पर रि लिखना — कृपा क्रिपा नहीं।
  • े और ै, ो और ौ की घुंडी भूलना — के / कै, को / कौ अलग हैं।
  • मात्रा को स्वर से अलग ध्वनि समझना। मात्रा उसी स्वर का रूप है।

10. इस विषय का सार

  • मात्रा = स्वर का चिह्न, जब वह व्यंजन से जुड़ता है।
  • अ की मात्रा नहीं। क = क् + अ।
  • ि पहले; ा ी ो ौ बाद में; े ै ऊपर; ु ू ृ नीचे।
  • ह्रस्व: ि ु ृ। दीर्घ: ा ी ू े ै ो ौ।
  • ं ँ ः ् मात्रा नहीं।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. खाली जगह भरो।
स्वर जब व्यंजन से जुड़ता है तो उसका चिह्न ________ कहलाता है। ________ की मात्रा नहीं लगती।

उत्तर

मात्रा। अ।

2. इ की मात्रा ि व्यंजन के कहाँ लगती है — पहले, बाद में, ऊपर या नीचे?

उत्तर

पहले (बाएँ)। कि = क् + इ।

3. कि और की में क्या अंतर है?

उत्तर

कि में इ ह्रस्व (ि पहले)। की में ई दीर्घ (ी बाद में)।

4. सही या ग़लत: ं, ँ, ः और ् भी मात्राएँ हैं।

उत्तर

ग़लत। अनुस्वार, चंद्रबिंदु, विसर्ग और हल चिह्न मात्रा नहीं हैं।

5. कृपा में ऋ की मात्रा कौन-सी है? क्या उसे क्रिपा लिख सकते हैं?

उत्तर

ृ नीचे लगती है — कृ। क्रिपा गलत है।

विषय समाप्त · मात्राएँ