अंग 1 · वर्ण विचार
पाठ 1.3
विषय शुरू · व्यंजन और वर्ग
स्वर स्वतंत्र बोले जाते हैं। अब दूसरा बड़ा समूह: व्यंजन। हिंदी वर्णमाला का अधिक भाग यहीं है। वर्ग याद रहे तो आगे उच्चारण, पंचमाक्षर और संधि आसानी से बैठते हैं।
1. परिभाषा
जिस ध्वनि के बोलने में हवा मुँह के किसी भाग से रुककर या रगड़ खाकर निकले, और जो स्वर की सहायता से पूरी बोली जाए, उसे व्यंजन कहते हैं।
क् बोलिए। आवाज़ अटकती है। अब अ जोड़ो — क बन गया। लिखने में क दिखता है, उसके अंदर अ छिपा है।
केवल व्यंजन ध्वनि: क्, च्, ट्, त्, प्।
व्यंजन + अ = अक्षर: क, च, ट, त, प।
व्यंजन + दूसरा स्वर: का, कि, की, कु — मात्रा से।
ध्यान दें: क वर्णमाला का व्यंजन अक्षर है, क् उसकी हल ध्वनि है। बच्चे दोनों को एक नाम से पुकारते हैं। व्याकरण में फर्क रखें।
2. 33 व्यंजन
मानक हिंदी में मूल व्यंजन 33 हैं। 5 वर्ग × 5 = 25 स्पर्श, फिर 4 अंतःस्थ, फिर 4 ऊष्म।
क्ष, त्र, ज्ञ इस 33 में नहीं। वे संयुक्त व्यंजन हैं। नुक्ता वाले क़ ख़ ग़ ज़ फ़ भी मूल 33 से अलग हैं।
3. स्पर्श व्यंजन — 5 वर्ग
मुँह के किसी अंग को छूकर बोले जाने वाले व्यंजन स्पर्श कहलाते हैं — मतलब छूकर बोलना। ये 5 वर्ग में सजे हैं। हर वर्ग में 5 वर्ण होते हैं। वर्ग का नाम उसके पहले वर्ण से पड़ता है।
| वर्ग | पाँच वर्ण | मुख्य जगह | शब्द |
|---|---|---|---|
| कवर्ग | क ख ग घ ङ | गला | कमल, खाना, गाय, घर, अंग |
| चवर्ग | च छ ज झ ञ | तालु (मुँह की छत) | चंदन, छाता, जल, झरना, ज्ञान |
| टवर्ग | ट ठ ड ढ ण | मूर्धा (जीभ मुड़कर ऊपर पीछे) | टोपी, ठंड, डमरू, ढोल, गण |
| तवर्ग | त थ द ध न | दांत | तारा, थाली, दल, धन, नदी |
| पवर्ग | प फ ब भ म | ओठ | पतंग, फल, बल, भाई, माता |
ङ और ञ शब्द के शुरू में हिंदी में लगभग नहीं आते। गंगा, अंग में ङ; ज्ञान, यज्ञ में ञ छिपा रहता है। न और म आम हैं।
4. हर वर्ग के पाँचों का क्रम
पाँचों वर्ण मनमाना नहीं बैठे। एक ही ढाँचा हर वर्ग में दोहराया जाता है। कवर्ग से समझिए, बाकी पर वही साँचा लगाइए।
| क्रम | कवर्ग | पहचान — सरल |
|---|---|---|
| पहला | क | हवा कम, गला नहीं काँपता |
| दूसरा | ख | हवा अधिक — फूंक जैसी |
| तीसरा | ग | गला काँपता है, हवा कम |
| चौथा | घ | गला काँपता है, हवा अधिक |
| पाँचवाँ | ङ | नाक से — पंचमाक्षर (वर्ग का पाँचवाँ) |
तवर्ग पर वही क्रम: त थ द ध न। पवर्ग: प फ ब भ म। नाम अल्पप्राण (हवा कम), महाप्राण (फूंक), घोष (गला काँपता), पंचमाक्षर अपने-अपने विषय में पूरे खुलेंगे। इस विषय में वर्ग पहचानना काफी है — कौन-सा वर्ण किस पाँच के समूह में है।
घर — घ कवर्ग का चौथा।
धन — ध तवर्ग का चौथा।
फल — फ पवर्ग का दूसरा। फ और ख दोनों में फूंक है, वर्ग अलग है।
5. अंतःस्थ व्यंजन
य र ल व अंतःस्थ कहलाते हैं। मतलब: स्पर्श जितने कड़े नहीं — बीच के जैसे। स्वर और व्यंजन के बीच लगते हैं, पर गिनती व्यंजन में है।
| वर्ण | शब्द | याद |
|---|---|---|
| य | यमुना, न्याय, विद्यालय | स्वर जैसा लग सकता है, व्यंजन है |
| र | राम, कर्म, पत्र | ऋ स्वर है, र व्यंजन है — दोनों मिलाएँ नहीं |
| ल | लता, कमल, फूल | दांत वाले स्पर्श त थ द ध न से अलग; अंतःस्थ है |
| व | वन, देव, द्वार | ओठ और दांत दोनों लगते हैं |
6. ऊष्म व्यंजन
श ष स ह ऊष्म हैं। मतलब: हवा रगड़ से निकलती है, गर्माहट जैसी आवाज़ आती है।
| वर्ण | स्थान की झलक | शब्द |
|---|---|---|
| श | तालु (मुँह की छत) | शेर, शाला, अवश्य |
| ष | मूर्धा (जीभ मुड़ी) | भाषा, दोष, षष्ठ |
| स | दांत | सरस, सब, आसमान |
| ह | गला | हरि, हाथ, आह |
श ष स तीनों अलग हैं। वर्तनी में यही तीन सबसे अधिक उलझते हैं — पूरा नियम वर्तनी वाले विषय में। अभी वर्ग याद रखें: तीनों ऊष्म हैं, स्थान अलग।
जाँच: शब्द का पहला व्यंजन निकालो। 5 वर्ग में है, यरलव में, या शषसह में?
7. शब्द तोड़कर वर्ग देखना
कमल
क — कवर्ग। म — पवर्ग का पाँचवाँ (नाक से)। ल — अंतःस्थ। तीन व्यंजन, तीन जगह।
नदी
न — तवर्ग का पाँचवाँ। द — तवर्ग का तीसरा। दोनों तवर्ग, स्वर अलग: अ और ई।
वर्षा
व — अंतःस्थ। र — अंतःस्थ, हल से ष से जुड़ा। षा — ऊष्म ष + आ की मात्रा।
गंगा
ग — कवर्ग। ङ — कवर्ग का पाँचवाँ। लिखा अक्सर बिंदु ं से: गंगा। पूरा नियम अनुस्वार वाले विषय में।
टमाटर — ट टवर्ग, म पवर्ग, त तवर्ग, र अंतःस्थ। दांत वाला त और मुड़ी जीभ वाला ट एक शब्द में साथ हैं।
रक्षा — र अंतःस्थ, क्ष संयुक्त (क् + ष), आ मात्रा। क्ष मूल 33 में नहीं।
8. जो व्यंजन-वर्णमाला में चिपके दिखते हैं
- क्ष त्र ज्ञ श्र — संयुक्त। क्+ष, त्+र, ज्+ञ, श्+र। इन्हें पाँचवें वर्ग की तरह मत गिनो।
- ड़ ढ़ — ड ढ के नीचे बिंदु। हिंदी की अपनी ध्वनियाँ, विदेशी नुक्ता से अलग।
- अं अः — व्यंजन नहीं, अयोगवाह।
9. आम गलतियाँ
- व्यंजन 35 या 36 गिनना — क्ष त्र ज्ञ जोड़ लेना।
- त और ट, द और ड, न और ण मिला देना। वर्ग अलग हैं: तवर्ग दांत, टवर्ग मुड़ी जीभ।
- य को स्वर मानना। य अंतःस्थ व्यंजन है।
- र और ऋ एक समझना। ऋ स्वर है, र व्यंजन।
- ङ ञ ण न म को भूलना। ये प्रत्येक वर्ग के पाँचवें हैं।
- क को सिर्फ़ कवर्ग याद रखना, ख ग घ ङ उसी वर्ग के हैं — यह क्रम छोड़ देना।
10. इस विषय का सार
- व्यंजन स्वर की सहायता से बोलते हैं। मूल 33 हैं।
- स्पर्श 5 वर्ग: कवर्ग, चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग, पवर्ग — हर में 5।
- अंतःस्थ: य र ल व। ऊष्म: श ष स ह।
- हर वर्ग का पाँचवाँ नाक से बोलता है: ङ ञ ण न म।
- क्ष त्र ज्ञ मूल व्यंजन नहीं। त/ट का फर्क वर्ग का फर्क है।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. खाली जगह भरो।
व्यंजन ________ की सहायता से बोले जाते हैं। हिंदी में मूल व्यंजन ________ हैं।
उत्तर
स्वर। 33।
2. क्ष, त्र, ज्ञ मूल 33 में आते हैं या नहीं?
उत्तर
नहीं। ये संयुक्त व्यंजन हैं।
3. घर का घ किस वर्ग का कौन-सा वर्ण है?
उत्तर
कवर्ग का चौथा।
4. य स्वर है या व्यंजन? र और ऋ में क्या फर्क है?
उत्तर
य अंतःस्थ व्यंजन है। ऋ स्वर है, र व्यंजन है।
5. त और ट किस-किस वर्ग में हैं?
उत्तर
त तवर्ग (दांत)। ट टवर्ग (जीभ मुड़कर ऊपर पीछे)।
विषय समाप्त · व्यंजन और वर्ग
