Noteclass 9 10

स्वर — ह्रस्व और दीर्घ

Lesson 2 of 71

अंग 1 · वर्ण विचार

पाठ 1.2

विषय शुरू · स्वर — ह्रस्व और दीर्घ

वर्ण तीन तरह के हैं — स्वर, व्यंजन, अयोगवाह। इस विषय में पहला भेद खुलता है: स्वर। स्वर बिना किसी दूसरे वर्ण की मदद के बोले जा सकते हैं। व्यंजन को स्वर चाहिए। इसलिए वर्णमाला स्वर से शुरू होती है।

1. परिभाषा

जिस ध्वनि के उच्चारण में मुँह में हवा बिना रुकावट निकलती है, और जो अकेले पूरी तरह बोली जा सके, उसे स्वर कहते हैं।

अ बोलिए। इ बोलिए। उ बोलिए। गले या जीभ पर कोई व्यंजन नहीं अटका। क् अकेले अटक जाता है — उसके बाद अ चाहिए, तभी क बनता है। यही फर्क है।

स्वर अकेले: आ, ई, ओ।

स्वर शब्द में: आम में आ, नदी में ई, कुल में उ।

व्यंजन अकेले अधूरा: क्, म्, त् — बिना स्वर के शब्द नहीं बनता।

2. हिंदी के 11 स्वर

मानक हिंदी में स्वर 11 हैं। इन्हें क्रम से याद रखिए:

अआइईउऊऋएऐओऔ

पढ़ने का क्रम यही है जो वर्णमाला में लिखा जाता है। अं और अः इस पंक्ति में नहीं आते — वे अयोगवाह हैं।

स्वर शब्द स्वर शब्द
अ अनार, कमल आ आम, माता
इ इमली, दिन ई ईख, नदी
उ उल्लू, कुल ऊ ऊन, धूप
ऋ ऋषि, कृपा ए एक, मेला
ऐ ऐनक, कैसे ओ ओस, कोयल
औ औरत, कौन — —

शब्द के बीच का स्वर अक्सर मात्रा बनकर बैठता है। अ के लिए मात्रा नहीं लगती — क में अ पहले से है।

3. ह्रस्व और दीर्घ — छोटा और लंबा

स्वर दो मुख्य भागों में बँटते हैं — बोलने में कितना समय लगता है।

  • ह्रस्व — छोटा बोल। एक मात्रा का समय। जैसे अ, इ, उ।
  • दीर्घ — लंबा बोल। लगभग दो मात्रा का समय। जैसे आ, ई, ऊ।
भेद स्वर उदाहरण
ह्रस्व अ इ उ ऋ अनार, पिता, पुत्र, ऋतु
दीर्घ आ ई ऊ ए ऐ ओ औ आकाश, दीन, फूल, देव, बैल, मोर, गौ

ए ऐ ओ औ हमेशा दीर्घ गिने जाते हैं। ऋ ह्रस्व है — कई विद्यार्थी इसे दीर्घ मान बैठते हैं, वह गलत है।

जोड़े — मात्रा बदलते ही अर्थ बदलता है

ह्रस्व और दीर्घ सिर्फ़ लंबाई का खेल नहीं। हिंदी में ये जोड़े रोज़ गलती कराते हैं:

ह्रस्व अर्थ की दिशा दीर्घ अर्थ की दिशा
दिन दिन दीन गरीब, दया का पात्र
कुल परिवार / योग कूल किनारा
सुख आनंद सूख सूखना
बिन बिना बीन बाजा
सुन सुनना सून सुनसान

ध्यान दें: हर ह्रस्व का जोड़ हर शब्द में नहीं बैठता। नियम यह है — इ और ई, उ और ऊ अलग स्वर हैं। लिखते समय ि / ी और ु / ू मिलाएँ नहीं।

4. मूल स्वर और संयुक्त स्वर

दूसरी काट यह है — स्वर अपने आप हैं, या दो स्वरों के मेल से बने माने जाते हैं।

मूल स्वर

अ आ इ ई उ ऊ ऋ — ये मूल हैं। इनके टुकड़े और नहीं किए जाते।

संयुक्त स्वर

ए ऐ ओ औ संयुक्त कहलाते हैं। स्कूल की सरल गिनती यह है:

संयुक्त स्वर मेल शब्द
ए अ + इ देव, मेला, एक
ऐ अ + ए है, ऐनक, बैठ
ओ अ + उ मोर, कोयल, ओस
औ अ + ओ कौन, नौ, और

संधि में यही मेल आगे काम आएगा। अभी इतना काफी है: ए ऐ ओ औ मूल स्वरों से अलग याद रखें।

मेला — ए संयुक्त दीर्घ। मात्रा े।

कैसे — ऐ संयुक्त दीर्घ। मात्रा ै।

कोयल — ओ। मात्रा ो।

कौन — औ। मात्रा ौ।

5. ऋ — अलग स्वर

ऋ हिंदी वर्णमाला का स्वर है, व्यंजन र नहीं। उच्चारण में जीभ मुड़ती है, पर गिनती ह्रस्व स्वर में है।

  • मात्रा ृ है — कृ, हृ, पृ।
  • शब्द: ऋषि, ऋतु, ऋण, कृपा, कृष्ण, हृदय, पृथिवी।
  • रि से मत बदलिए। कृपा को क्रिपा लिखना वर्तनी की गलती है।

ॠ और लृ संस्कृत में हैं, आज की हिंदी में लगभग नहीं चलते। हिंदी में 11 स्वरों वाली सूची ही चलती है।

6. प्लुत — आज नहीं पढ़ना

कुछ किताबें तीसरा भेद भी लिखती हैं: प्लुत — बहुत लंबा खिंचाव, जैसे पुकारने में। रोज़ की हिंदी में यह अलग स्वर नहीं सिखाया जाता। कक्षा में ह्रस्व और दीर्घ याद रखना काफी है।

7. स्वर और मात्रा — लिपि से नाता

स्वर दो रूपों में दिखता है:

  • पूरा अक्षर: शब्द की शुरुआत में अक्सर — अनार, इमली, ऊपर, एक, औरत।
  • मात्रा: व्यंजन से जुड़कर — का, कि, की, कु, कू, कृ, के, कै, को, कौ।

अ की मात्रा नहीं। क लिखते ही अ बैठ जाता है। आ की मात्रा ा, इ की ि, ई की ी। पूरी मात्रा-सूची मात्रा वाले विषय में आएगी। यहाँ नियम यह है: मात्रा उसी स्वर का चिह्न है जो व्यंजन के साथ बोला जा रहा है।

नदी = न् + अ + द् + ई। पहला स्वर अ ह्रस्व, दूसरा ई दीर्घ।

आम = आ + म् + अ। आ दीर्घ मूल स्वर, अलग अक्षर।

किताब = क् + इ + त् + आ + ब् + अ। इ ह्रस्व मात्रा से, आ दीर्घ मात्रा से।

8. जो स्वर नहीं हैं

  • अं, अः — अयोगवाह। कई वर्णमाला चार्ट इन्हें स्वरों के बाद चिपका देते हैं। गिनती 11 में इन्हें मत जोड़ो।
  • य र ल व — अंतःस्थ व्यंजन हैं, स्वर नहीं। य कभी स्वर जैसा लगता है, पर वर्गीकरण व्यंजन का है।
  • हल चिह्न वाले क् त् म् स्वर नहीं, व्यंजन हैं।

जाँच: वर्ण अकेला पूरा बोला जा सकता है? हाँ → स्वर की ओर सोचो। क् की तरह अटकता है? व्यंजन।

9. आम गलतियाँ

  • स्वर 13 गिनना — अं अः जोड़ लेना।
  • ऋ को दीर्घ या रि मानना।
  • ए ऐ ओ औ को ह्रस्व लिखना। ये दीर्घ हैं।
  • दिन / दीन, कुल / कूल मिला देना।
  • इ की मात्रा ि को ई की ी समझना। ि व्यंजन के पहले लगती है, ी बाद में खड़ी पाई है।
  • आ को ह्रस्व अ की लंबी आवाज़ भर मानना — आ अलग स्वर है, अलग मात्रा है।

10. इस विषय का सार

  • स्वर स्वतंत्र बोले जाते हैं। हिंदी में 11 स्वर हैं।
  • ह्रस्व: अ इ उ ऋ। दीर्घ: आ ई ऊ ए ऐ ओ औ।
  • मूल: अ आ इ ई उ ऊ ऋ। संयुक्त: ए ऐ ओ औ।
  • ऋ स्वर है; मात्रा ृ; रि से न बदलें।
  • अं अः स्वर नहीं। प्लुत नाम भर जानें।
  • मात्रा उसी स्वर का चिह्न है जो व्यंजन से जुड़ा है।

अभ्यास

नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।

1. खाली जगह भरो।
जो ध्वनि अकेले पूरी बोली जा सके, वह ________ है। हिंदी में स्वर ________ हैं।

उत्तर

स्वर। 11।

2. सही या ग़लत: अं और अः भी स्वर हैं, इसलिए स्वर 13 होते हैं।

उत्तर

ग़लत। अं और अः अयोगवाह हैं। स्वर 11 ही रहते हैं।

3. ऋ ह्रस्व है या दीर्घ? स्वर है या व्यंजन र?

उत्तर

ऋ ह्रस्व स्वर है। र व्यंजन है। कृपा को क्रिपा न लिखें।

4. दिन और दीन में स्वर का क्या फर्क है? अर्थ की दिशा बताओ।

उत्तर

दिन में इ ह्रस्व — दिन, तारीख वाला। दीन में ई दीर्घ — गरीब / दया का पात्र।

5. ए ऐ ओ औ मूल हैं या संयुक्त? ह्रस्व हैं या दीर्घ?

उत्तर

संयुक्त हैं, और हमेशा दीर्घ हैं।

विषय समाप्त · स्वर — ह्रस्व और दीर्घ