इकाई 3: वाक्य और शब्द शुद्धि — सारांश
इस इकाई में भाषा की शुद्धता से जुड़े सभी विषयों का अध्ययन किया जाएगा। शुद्ध भाषा ही प्रभावी संप्रेषण की नींव है।
- वाक्य: परिभाषा, दो अंग (उद्देश्य और विधेय), रचना के आधार पर 3 भेद (सरल, संयुक्त, मिश्र), अर्थ के आधार पर 8 भेद
- वाक्य शुद्धि: लिंग, वचन, कारक, क्रिया, पदक्रम, पुनरुक्ति और अव्यय संबंधी अशुद्धियों की पहचान व सुधार
- शब्द शुद्धि: वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध-शुद्ध शब्द
- शब्द भंडार: पर्यायवाची (समानार्थक), समश्रुत भिन्नार्थक, विलोम शब्द
- मुहावरे और लोकोक्तियाँ: अर्थ सहित वाक्य प्रयोग
परीक्षा में इस इकाई से एक अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं। मुहावरे-लोकोक्तियों के अर्थ व वाक्य प्रयोग तथा अशुद्ध वाक्यों का शोधन नियमित रूप से पूछा जाता है।
1. वाक्य: परिभाषा और अंग
वाक्य की परिभाषा: शब्दों का वह सार्थक समूह जिससे पूर्ण भाव या विचार व्यक्त हो, वाक्य कहलाता है। जैसे — राम विद्यालय जाता है।
वाक्य के दो अंग होते हैं:
1. उद्देश्य: वाक्य में जिसके विषय में कुछ कहा जाए, वह उद्देश्य कहलाता है। यह प्रायः कर्ता होता है। जैसे — राम विद्यालय जाता है।
2. विधेय: उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाए, वह विधेय कहलाता है। जैसे — राम विद्यालय जाता है।
| क्र. | वाक्य | उद्देश्य | विधेय |
|---|---|---|---|
| 1 | सीता गीत गाती है। | सीता | गीत गाती है |
| 2 | मोहन कल जयपुर जाएगा। | मोहन | कल जयपुर जाएगा |
| 3 | बच्चे मैदान में खेल रहे हैं। | बच्चे | मैदान में खेल रहे हैं |
| 4 | यह पुस्तक बहुत उपयोगी है। | यह पुस्तक | बहुत उपयोगी है |
2. वाक्य के भेद
वाक्य के भेद दो आधारों पर किए जाते हैं — (क) रचना के आधार पर, (ख) अर्थ के आधार पर।
2.1 रचना के आधार पर वाक्य के भेद
| क्र. | भेद | परिभाषा | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| 1 | सरल वाक्य | जिस वाक्य में एक ही क्रिया (एक ही विधेय) हो | एक कर्ता, एक क्रिया | राम पढ़ता है। |
| 2 | संयुक्त वाक्य | जिसमें दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्ययों से जुड़े हों | और, तथा, या, अथवा, लेकिन, किंतु से जुड़ाव | राम पढ़ता है और श्याम खेलता है। |
| 3 | मिश्र वाक्य | जिसमें एक प्रधान उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों | जो, कि, यदि, जब, क्योंकि, यद्यपि से जुड़ाव | जो परिश्रम करता है, वह सफल होता है। |
परीक्षा सुझाव: संयुक्त और मिश्र वाक्य में अंतर अवश्य समझें — संयुक्त वाक्य के उपवाक्य स्वतंत्र होते हैं (और/लेकिन से जुड़े), जबकि मिश्र वाक्य में आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य पर निर्भर होता है (जो/कि/यदि से जुड़ा)।
2.2 अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 भेद
| क्र. | भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | विधानवाचक | जिसमें किसी बात का विधान (स्वीकार) किया जाए | वह विद्यालय जाता है। |
| 2 | निषेधवाचक | जिसमें किसी बात का निषेध किया जाए | वह विद्यालय नहीं जाता है। |
| 3 | प्रश्नवाचक | जिसमें प्रश्न पूछा जाए | तुम कहाँ जा रहे हो? |
| 4 | विस्मयवाचक | जिसमें आश्चर्य, हर्ष, शोक आदि भाव व्यक्त हों | अरे! यह क्या हो गया। |
| 5 | आज्ञावाचक | जिसमें आदेश, अनुमति या प्रार्थना का भाव हो | तुम यहाँ बैठो। कृपया बैठ जाइए। |
| 6 | इच्छावाचक | जिसमें इच्छा, आशीर्वाद या शुभकामना व्यक्त हो | ईश्वर तुम्हें सुखी रखे। |
| 7 | संदेहवाचक | जिसमें संदेह या संभावना व्यक्त हो | शायद आज वर्षा हो। |
| 8 | संकेतवाचक | जिसमें एक क्रिया दूसरी क्रिया पर निर्भर हो (शर्त का भाव) | यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती। |
3. वाक्य शुद्धि
वाक्य शुद्धि का अर्थ है — व्याकरण के नियमों के अनुसार अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करना। अशुद्धियाँ मुख्यतः लिंग, वचन, कारक, क्रिया, पदक्रम, पुनरुक्ति और अव्यय के अनुचित प्रयोग से होती हैं।
वाक्य शुद्धि के प्रमुख नियम:
1. विशेषण और क्रिया का लिंग-वचन कर्ता या कर्म के अनुसार होता है। 2. भूतकाल की सकर्मक क्रिया में कर्ता के साथ 'ने' का प्रयोग होता है। 3. एक ही अर्थ के दो शब्दों का प्रयोग (पुनरुक्ति) अशुद्ध है। 4. अव्यय युग्मों का सही जोड़ा प्रयोग करें — यद्यपि-तथापि, यदि-तो, जहाँ-वहाँ, जैसा-वैसा।
| क्र. | अशुद्ध वाक्य | शुद्ध वाक्य | अशुद्धि का कारण |
|---|---|---|---|
| 1 | वह अच्छी लड़का है। | वह अच्छा लड़का है। | लिंग — 'लड़का' पुल्लिंग है, विशेषण भी पुल्लिंग होगा |
| 2 | मेरी भाई कल आएगा। | मेरा भाई कल आएगा। | लिंग — 'भाई' पुल्लिंग है |
| 3 | सीता अच्छा गाती है। | सीता अच्छी गाती है। | लिंग — कर्ता स्त्रीलिंग है |
| 4 | पाँच आदमी आया। | पाँच आदमी आए। | वचन — बहुवचन कर्ता के साथ बहुवचन क्रिया |
| 5 | दो किताबें खरीदी। | दो किताबें खरीदीं। | वचन — बहुवचन में क्रिया पर चंद्रबिंदु |
| 6 | सभी छात्रों ने अपना-अपना नाम लिखा। | सभी छात्रों ने अपने-अपने नाम लिखे। | वचन — बहुवचन के साथ सर्वनाम व क्रिया बहुवचन में |
| 7 | वह बाजार को गया। | वह बाजार गया। | कारक — 'जाना' क्रिया के साथ 'को' नहीं लगता |
| 8 | राम ने श्याम से किताब लिया। | राम ने श्याम से किताब ली। | लिंग — 'किताब' स्त्रीलिंग है |
| 9 | मुझको भूख लगी है। | मुझे भूख लगी है। | कारक — सर्वनाम का शुद्ध रूप 'मुझे' है |
| 10 | मैं खाना खा लिया। | मैंने खाना खा लिया। | क्रिया — भूतकाल की सकर्मक क्रिया में 'ने' लगता है |
| 11 | वह स्कूल जाता हूँ। | वह स्कूल जाता है। | क्रिया — क्रिया कर्ता (वह) के अनुसार होगी |
| 12 | बारिश हो रहा है। | बारिश हो रही है। | लिंग — 'बारिश' स्त्रीलिंग है |
| 13 | कृपया करके बैठ जाइए। | कृपया बैठ जाइए। | पुनरुक्ति — 'कृपया' और 'करके' एक साथ नहीं |
| 14 | वह वापस लौट आया। | वह लौट आया। | पुनरुक्ति — 'वापस' और 'लौटना' एक ही अर्थ के हैं |
| 15 | यद्यपि वह गरीब है, लेकिन ईमानदार है। | यद्यपि वह गरीब है, तथापि ईमानदार है। | अव्यय — 'यद्यपि' के साथ 'तथापि' आता है |
| 16 | जहाँ चाह, वहाँ रहा। | जहाँ चाह, वहाँ राह। | अव्यय — शुद्ध युग्म 'जहाँ-वहाँ' के साथ 'राह' शब्द है |
| 17 | मैंने कल एक पुस्तक खरीदी नई। | मैंने कल एक नई पुस्तक खरीदी। | पदक्रम — विशेषण संज्ञा से पहले आता है |
| 18 | आप तुम्हारे घर जाओ। | आप अपने घर जाइए। | सर्वनाम — 'आप' के साथ 'अपने' और 'जाइए' का प्रयोग |
परीक्षा सुझाव: अशुद्ध वाक्य को पढ़ते ही पहले लिंग-वचन की जाँच करें — अधिकांश अशुद्धियाँ इन्हीं से होती हैं। 'ने' वाले वाक्यों में क्रिया कर्म के लिंग-वचन के अनुसार होती है, जैसे — राम ने रोटी खाई।
4. शब्द शुद्धि
शब्द शुद्धि का अर्थ है शब्दों की वर्तनी (हिज्जे) का शुद्ध होना। परीक्षा में अशुद्ध शब्द देकर शुद्ध रूप लिखने को कहा जाता है।
| क्र. | अशुद्ध शब्द | शुद्ध शब्द | क्र. | अशुद्ध शब्द | शुद्ध शब्द |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | अनुशाषन | अनुशासन | 16 | परिस्थिती | परिस्थिति |
| 2 | अभीनेता | अभिनेता | 17 | पुज्य | पूज्य |
| 3 | आर्शीवाद | आशीर्वाद | 18 | प्रसंशा | प्रशंसा |
| 4 | उज्वल | उज्ज्वल | 19 | ब्रम्ह | ब्रह्म |
| 5 | किरपा | कृपा | 20 | महत्व | महत्त्व |
| 6 | कवियित्री | कवयित्री | 21 | मध्यान्ह | मध्याह्न |
| 7 | गृहणी | गृहिणी | 22 | मुर्ख | मूर्ख |
| 8 | चिन्ह | चिह्न | 23 | वधु | वधू |
| 9 | ज्योत्सना | ज्योत्स्ना | 24 | विध्यालय | विद्यालय |
| 10 | तत्व | तत्त्व | 25 | श्रीमति | श्रीमती |
| 11 | द्रश्य | दृश्य | 26 | श्रृंगार | शृंगार |
| 12 | दुसरा | दूसरा | 27 | संमेलन | सम्मेलन |
| 13 | दिक्षा | दीक्षा | 28 | सम्वाद | संवाद |
| 14 | निर्दयी | निर्दय | 29 | सप्ताहिक | साप्ताहिक |
| 15 | परिक्षा | परीक्षा | 30 | हिरदय | हृदय |
परीक्षा सुझाव: 'श' और 'ष' का अंतर ध्यान रखें — प्रशंसा, अनुशासन, शृंगार में 'श' आता है। 'त्त्व', 'ज्ज्व', 'ह्न' जैसे संयुक्ताक्षरों वाले शब्द (महत्त्व, उज्ज्वल, मध्याह्न) बार-बार पूछे जाते हैं।
5. पर्यायवाची (समानार्थक) शब्द
समान अर्थ वाले शब्द पर्यायवाची या समानार्थक शब्द कहलाते हैं। जैसे — जल के पर्यायवाची हैं: पानी, नीर, वारि, तोय, सलिल।
| क्र. | शब्द | पर्यायवाची |
|---|---|---|
| 1 | अग्नि | आग, पावक, अनल, ज्वाला, वह्नि |
| 2 | आकाश | गगन, नभ, अंबर, व्योम, अंतरिक्ष |
| 3 | कमल | पंकज, जलज, सरोज, अरविंद, नलिन |
| 4 | गंगा | भागीरथी, जाह्नवी, मंदाकिनी, सुरसरि |
| 5 | घर | गृह, भवन, आवास, निकेतन, सदन |
| 6 | चंद्रमा | चाँद, शशांक, राकेश, मयंक, हिमांशु |
| 7 | जल | पानी, नीर, वारि, तोय, सलिल |
| 8 | पृथ्वी | धरती, भूमि, धरा, वसुधा, अवनि |
| 9 | पुष्प | फूल, कुसुम, सुमन, प्रसून |
| 10 | सूर्य | रवि, भानु, आदित्य, दिनकर, भास्कर |
| 11 | हाथी | गज, हस्ती, करी, दंती, मातंग |
| 12 | घोड़ा | अश्व, तुरंग, हय, वाजि |
| 13 | राजा | नरेश, नृप, भूपति, महीप, सम्राट |
| 14 | स्त्री | नारी, महिला, वनिता, अबला, कांता |
| 15 | माता | माँ, जननी, अम्मा, मातृ |
| 16 | पिता | जनक, तात, बाप |
| 17 | पुत्र | बेटा, सुत, तनय, आत्मज |
| 18 | पुत्री | बेटी, सुता, तनया, आत्मजा |
| 19 | मित्र | दोस्त, सखा, सहचर, मीत |
| 20 | शत्रु | दुश्मन, अरि, रिपु, वैरी |
| 21 | नेत्र | आँख, नयन, चक्षु, लोचन |
| 22 | वृक्ष | पेड़, तरु, द्रुम, विटप |
| 23 | पक्षी | चिड़िया, खग, विहग, पंछी |
| 24 | सर्प | साँप, नाग, भुजंग, अहि |
| 25 | सिंह | शेर, केसरी, मृगराज, वनराज |
| 26 | समुद्र | सागर, जलधि, उदधि, रत्नाकर |
| 27 | पहाड़ | पर्वत, गिरि, शैल, अचल |
| 28 | हवा | वायु, पवन, समीर, अनिल, मारुत |
| 29 | अमृत | सुधा, पीयूष, सोम, अमिय |
| 30 | सोना | स्वर्ण, कनक, हेम, कंचन |
| 31 | रात | रात्रि, निशा, रजनी, यामिनी |
| 32 | तालाब | सरोवर, तड़ाग, जलाशय, पुष्कर |
6. समश्रुत भिन्नार्थक शब्द
जो शब्द सुनने में एक जैसे लगते हैं, परंतु उनके अर्थ भिन्न होते हैं, वे समश्रुत भिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं। परीक्षा में इनके अर्थ लिखकर वाक्य प्रयोग करने को कहा जाता है।
| क्र. | शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|---|
| 1 | अन्न — अन्य | अन्न = अनाज; अन्य = दूसरा | अन्न का एक दाना भी व्यर्थ न करें। अन्य लोग भी यही कहते हैं। |
| 2 | आदि — आदी | आदि = आरंभ; आदी = अभ्यस्त | आदि में ईश्वर का स्मरण करें। वह सुबह उठने का आदी है। |
| 3 | अपेक्षा — उपेक्षा | अपेक्षा = आशा; उपेक्षा = अनादर | मुझे तुमसे यही अपेक्षा थी। बड़ों की उपेक्षा न करें। |
| 4 | अवलंब — अविलंब | अवलंब = सहारा; अविलंब = शीघ्र | डूबते को तिनके का अवलंब मिला। कार्य अविलंब पूर्ण करें। |
| 5 | अभय — उभय | अभय = निर्भय; उभय = दोनों | सैनिक अभय होकर लड़ा। उभय पक्षों में समझौता हुआ। |
| 6 | अर्घ — अर्घ्य | अर्घ = मूल्य; अर्घ्य = पूजन का जल | इस वस्तु का अर्घ क्या है? सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएँ। |
| 7 | आहूत — आहुति | आहूत = बुलाया गया; आहुति = हवन सामग्री | सभी अतिथि आहूत हैं। हवन में आहुति डालें। |
| 8 | इति — ईति | इति = समाप्ति; ईति = आपदा | इति श्री रामकथा। ईति से गाँव उजड़ गया। |
| 9 | कुल — कूल | कुल = वंश; कूल = किनारा | वह उच्च कुल का है। नदी के कूल पर वृक्ष हैं। |
| 10 | कृपण — कृपाण | कृपण = कंजूस; कृपाण = तलवार | कृपण व्यक्ति दान नहीं करता। योद्धा ने कृपाण उठाई। |
| 11 | ग्रह — गृह | ग्रह = नक्षत्र; गृह = घर | नवग्रह की पूजा होती है। उसका गृह बहुत सुंदर है। |
| 12 | चिर — चीर | चिर = दीर्घकालीन; चीर = वस्त्र | चिर काल से यही परंपरा है। उसने नया चीर पहना। |
| 13 | जलज — जलद | जलज = कमल; जलद = बादल | तालाब में जलज खिले हैं। आकाश में जलद छाए हैं। |
| 14 | तरंग — तुरंग | तरंग = लहर; तुरंग = घोड़ा | समुद्र में तरंगें उठ रही हैं। तुरंग दौड़ रहा है। |
| 15 | द्रव — द्रव्य | द्रव = तरल पदार्थ; द्रव्य = धन | जल एक द्रव है। द्रव्य का सदुपयोग करें। |
| 16 | द्विप — द्वीप | द्विप = हाथी; द्वीप = टापू | द्विप जंगल का विशाल प्राणी है। वह द्वीप पर रहता है। |
| 17 | नारी — नाड़ी | नारी = स्त्री; नाड़ी = नब्ज़ | नारी शक्ति का सम्मान करें। वैद्य ने नाड़ी देखी। |
| 18 | नियत — नियति | नियत = निश्चित; नियति = भाग्य | कार्य नियत समय पर करें। नियति से कोई नहीं जीतता। |
| 19 | परिमाण — परिणाम | परिमाण = मात्रा; परिणाम = फल | दूध का परिमाण एक लीटर है। परिश्रम का परिणाम मीठा होता है। |
| 20 | प्रणाम — प्रमाण | प्रणाम = नमस्कार; प्रमाण = सबूत | गुरु को प्रणाम करें। बिना प्रमाण आरोप न लगाएँ। |
| 21 | बलि — बली | बलि = बलिदान; बली = बलवान | वीरों ने देश पर बलि दी। भीम अत्यंत बली था। |
| 22 | भवन — भुवन | भवन = मकान; भुवन = संसार | यह भवन बहुत ऊँचा है। ईश्वर तीनों भुवन का स्वामी है। |
| 23 | लक्ष — लक्ष्य | लक्ष = लाख; लक्ष्य = उद्देश्य | मेले में लक्ष लोग आए। जीवन का लक्ष्य ऊँचा रखें। |
| 24 | वरण — वर्ण | वरण = स्वीकार/चुनाव; वर्ण = रंग/अक्षर | सीता ने राम का वरण किया। वर्णमाला में अनेक वर्ण हैं। |
7. विलोम शब्द
परस्पर विपरीत अर्थ देने वाले शब्द विलोम शब्द कहलाते हैं। जैसे — सुख-दुःख, जय-पराजय।
| क्र. | शब्द | विलोम | क्र. | शब्द | विलोम |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | अच्छा | बुरा | 23 | प्रेम | घृणा |
| 2 | आगे | पीछे | 24 | बड़ा | छोटा |
| 3 | आदि | अंत | 25 | मित्र | शत्रु |
| 4 | आकाश | पाताल | 26 | मोटा | पतला |
| 5 | आदर | निरादर | 27 | युवा | वृद्ध |
| 6 | आय | व्यय | 28 | रात | दिन |
| 7 | उत्थान | पतन | 29 | लाभ | हानि |
| 8 | उन्नति | अवनति | 30 | लंबा | नाटा |
| 9 | कठिन | सरल | 31 | विजय | पराजय |
| 10 | क्रय | विक्रय | 32 | सुख | दुःख |
| 11 | खरा | खोटा | 33 | सुंदर | कुरूप |
| 12 | गर्मी | सर्दी | 34 | स्वर्ग | नरक |
| 13 | गुण | दोष | 35 | स्वतंत्र | परतंत्र |
| 14 | जीवन | मृत्यु | 36 | सज्जन | दुर्जन |
| 15 | जय | पराजय | 37 | सफल | असफल |
| 16 | ज्ञान | अज्ञान | 38 | सत्य | असत्य |
| 17 | धनी | निर्धन | 39 | सम्मान | अपमान |
| 18 | नया | पुराना | 40 | हार | जीत |
| 19 | न्याय | अन्याय | 41 | हिंसा | अहिंसा |
| 20 | प्रकाश | अंधकार | 42 | ऊपर | नीचे |
| 21 | अंदर | बाहर | 43 | शुरू | समाप्त |
| 22 | जन्म | मृत्यु | 44 | आलस्य | उद्यम |
परीक्षा सुझाव: विलोम लिखते समय उपसर्ग का ध्यान रखें — 'सु' का विलोम प्रायः 'कु' या 'दुर्' (सुंदर-कुरूप, सज्जन-दुर्जन), 'आदि' का 'अंत', 'उत्थान' का 'पतन' होता है। 'आय-व्यय' और 'क्रय-विक्रय' के जोड़े भ्रमित न करें।
8. मुहावरे
मुहावरा वह वाक्यांश है जो अपने शाब्दिक अर्थ से भिन्न विशेष अर्थ देता है। मुहावरे के अंत में प्रायः क्रिया होती है, जो लिंग-वचन के अनुसार बदल जाती है। परीक्षा में मुहावरे का अर्थ लिखकर वाक्य प्रयोग करने को कहा जाता है।
| क्र. | मुहावरा | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|---|
| 1 | अंगूठा दिखाना | साफ इनकार कर देना | माँगने पर उसने मुझे अंगूठा दिखा दिया। |
| 2 | अँगारे उगलना | क्रोध में कठोर वचन बोलना | छोटी-सी बात पर वह अँगारे उगलने लगा। |
| 3 | अपना उल्लू सीधा करना | अपना स्वार्थ सिद्ध करना | वह हर काम में अपना उल्लू सीधा करता है। |
| 4 | आँखों का तारा | अत्यंत प्रिय | मोहन अपने माता-पिता की आँखों का तारा है। |
| 5 | आँखें दिखाना | डराना-धमकाना | मालिक नौकर को बेवजह आँखें दिखाता है। |
| 6 | आकाश-पाताल एक करना | अत्यधिक प्रयत्न करना | नौकरी पाने के लिए उसने आकाश-पाताल एक कर दिया। |
| 7 | आग बबूला होना | अत्यंत क्रोधित होना | चोरी की बात सुनकर पिताजी आग बबूला हो गए। |
| 8 | ईद का चाँद होना | बहुत समय बाद दिखाई देना | अरे मित्र, तुम तो ईद के चाँद हो गए हो। |
| 9 | उँगली उठाना | दोष लगाना, निंदा करना | उसके चरित्र पर कोई उँगली नहीं उठा सकता। |
| 10 | कमर कसना | पूरी तैयारी के साथ लग जाना | परीक्षा के लिए छात्रों ने कमर कस ली है। |
| 11 | कलेजा ठंडा होना | मन को संतोष मिलना | बेटे की सफलता से माँ का कलेजा ठंडा हो गया। |
| 12 | कान भरना | चुगली करना | वह मालिक के कान भरता रहता है। |
| 13 | खून-पसीना एक करना | कठोर परिश्रम करना | किसान खून-पसीना एक करके फसल उगाता है। |
| 14 | खाक छानना | व्यर्थ इधर-उधर भटकना | नौकरी की तलाश में वह महीनों खाक छानता रहा। |
| 15 | गड़े मुर्दे उखाड़ना | पुरानी बातें दोहराना | गड़े मुर्दे उखाड़ने से कोई लाभ नहीं। |
| 16 | गाल बजाना | डींग मारना | वह हर बात में गाल बजाता है। |
| 17 | घी के दीये जलाना | अत्यधिक प्रसन्न होना | पुत्र के जन्म पर घर में घी के दीये जलाए गए। |
| 18 | चार चाँद लगाना | शोभा बढ़ाना | तुम्हारी उपस्थिति ने समारोह में चार चाँद लगा दिए। |
| 19 | छक्के छुड़ा देना | बुरी तरह पराजित करना | भारतीय टीम ने विरोधियों के छक्के छुड़ा दिए। |
| 20 | जान हथेली पर रखना | प्राणों की बाजी लगाना | सैनिक जान हथेली पर रखकर देश की रक्षा करते हैं। |
| 21 | टस से मस न होना | तनिक भी विचलित न होना | लाख समझाने पर भी वह टस से मस न हुआ। |
| 22 | दाँतों तले उँगली दबाना | अत्यंत आश्चर्यचकित होना | ताजमहल देखकर विदेशी दाँतों तले उँगली दबा लेते हैं। |
| 23 | दाल न गलना | युक्ति सफल न होना | चालाक सेठ के सामने उसकी दाल न गली। |
| 24 | नाक कटना | अपमान होना | बेटे के कुकर्म से पिता की नाक कट गई। |
| 25 | नाक में दम करना | बहुत तंग करना | शरारती बच्चों ने शिक्षक की नाक में दम कर दिया। |
| 26 | निन्यानवे के फेर में पड़ना | धन के लोभ में फँसना | वह निन्यानवे के फेर में पड़कर ईमान खो बैठा। |
| 27 | नौ दो ग्यारह होना | भाग जाना | पुलिस को देखकर चोर नौ दो ग्यारह हो गया। |
| 28 | पानी-पानी होना | लज्जित होना | झूठ पकड़े जाने पर वह पानी-पानी हो गया। |
| 29 | पहाड़ टूट पड़ना | भारी विपत्ति आना | पिता की मृत्यु से उस पर पहाड़ टूट पड़ा। |
| 30 | पेट में चूहे कूदना | बहुत भूख लगना | सुबह से कुछ न खाने से पेट में चूहे कूद रहे हैं। |
| 31 | फूला न समाना | अत्यंत प्रसन्न होना | प्रथम आने पर सोहन फूला न समाया। |
| 32 | बाल की खाल निकालना | अत्यधिक सूक्ष्म दोष निकालना | वह हर काम में बाल की खाल निकालता है। |
| 33 | मुँह की खाना | पराजित या अपमानित होना | घमंडी पहलवान को मुँह की खानी पड़ी। |
| 34 | मुँह में पानी आना | लालच उत्पन्न होना | रसगुल्ले देखकर बच्चों के मुँह में पानी आ गया। |
| 35 | रंग लाना | प्रभाव दिखाना, सफल होना | उसकी मेहनत आखिर रंग लाई। |
| 36 | राई का पहाड़ बनाना | छोटी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना | वह राई का पहाड़ बनाने में माहिर है। |
| 37 | लोहा मानना | श्रेष्ठता स्वीकार करना | शत्रु भी महाराणा प्रताप का लोहा मानते थे। |
| 38 | श्रीगणेश करना | शुभ कार्य का आरंभ करना | नए भवन का श्रीगणेश आज होगा। |
| 39 | सिर आँखों पर बैठाना | बहुत आदर-सत्कार करना | अतिथि को उन्होंने सिर आँखों पर बैठाया। |
| 40 | हाथ मलना | पछताना | अवसर गँवाकर वह हाथ मलता रह गया। |
| 41 | हाथ-पैर मारना | प्रयत्न करना | डूबते ने बचने के लिए खूब हाथ-पैर मारे। |
| 42 | होश उड़ना | घबरा जाना | शेर देखकर उसके होश उड़ गए। |
| 43 | अंगारों पर पैर रखना | जानबूझकर खतरनाक काम करना | दुश्मन से अकेले लड़ना अंगारों पर पैर रखने जैसा है। |
| 44 | आसमान सिर पर उठाना | बहुत शोर-शराबा करना | बच्चों ने आसमान सिर पर उठा रखा है। |
9. लोकोक्तियाँ
लोकोक्ति लोक अनुभव पर आधारित वह पूर्ण वाक्य है जो किसी सत्य या नीति को प्रकट करता है। मुहावरा वाक्यांश होता है, जबकि लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है — यही दोनों में मुख्य अंतर है।
| क्र. | लोकोक्ति | अर्थ | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| 1 | अधजल गगरी छलकत जाए | अल्पज्ञानी ही अधिक दिखावा करता है | जिसके पास थोड़ा ज्ञान होता है, वह उसका प्रदर्शन अधिक करता है। |
| 2 | अंत भला तो सब भला | परिणाम अच्छा हो तो सब अच्छा | कठिनाइयों के बाद भी सफलता मिली — सच है, अंत भला तो सब भला। |
| 3 | अंधों में काना राजा | अज्ञानियों में थोड़ा जानने वाला श्रेष्ठ | मूर्खों के बीच अल्पज्ञ व्यक्ति भी बड़ा माना जाता है। |
| 4 | अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता | अकेला व्यक्ति बड़ा काम नहीं कर सकता | बड़े कार्य के लिए संगठन और सहयोग आवश्यक है। |
| 5 | ऊँट के मुँह में जीरा | आवश्यकता की तुलना में बहुत कम | इतने बड़े परिवार के लिए यह सहायता ऊँट के मुँह में जीरे के समान है। |
| 6 | एक अनार सौ बीमार | एक वस्तु के चाहने वाले अनेक | एक पद के लिए सैकड़ों आवेदक — यही एक अनार सौ बीमार है। |
| 7 | कंगाली में आटा गीला | मुसीबत में और मुसीबत आना | नौकरी छूटी, ऊपर से बीमारी — कंगाली में आटा गीला हो गया। |
| 8 | काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती | छल-कपट एक बार ही चलता है | एक बार धोखा देने वाला दोबारा विश्वास नहीं पाता। |
| 9 | कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली | असमान की तुलना व्यर्थ है | दो असमान स्तर के व्यक्तियों की तुलना करना निरर्थक है। |
| 10 | खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग पकड़ता है | संगति का प्रभाव पड़ता है | बुरी संगति में रहकर अच्छा व्यक्ति भी बिगड़ जाता है। |
| 11 | घर का भेदी लंका ढाए | अंदर का शत्रु अधिक हानिकारक | भीतरघात करने वाला बाहर के शत्रु से अधिक खतरनाक होता है। |
| 12 | चिराग तले अँधेरा | गुणी के समीप ही दोष | बड़े अधिकारी का पुत्र ही अनपढ़ निकला — चिराग तले अँधेरा। |
| 13 | छछूँदर के सिर पर चमेली का तेल | अयोग्य को बहुमूल्य वस्तु मिलना | अनपढ़ को मिली पुस्तक छछूँदर के सिर पर चमेली के तेल जैसी है। |
| 14 | जैसा करोगे वैसा भरोगे | कर्म के अनुसार फल मिलता है | अच्छे कर्म का अच्छा और बुरे कर्म का बुरा फल अवश्य मिलता है। |
| 15 | जैसे को तैसा | जैसा व्यवहार, वैसा उत्तर | दुष्ट के साथ दुष्टता से ही निपटा जा सकता है। |
| 16 | जिसकी लाठी उसकी भैंस | बलवान का ही अधिकार चलता है | शक्तिशाली व्यक्ति ही अपना हक जमा पाता है। |
| 17 | डूबते को तिनके का सहारा | संकट में छोटी सहायता भी बड़ी | विपत्ति में मिली थोड़ी मदद भी बहुत मूल्यवान लगती है। |
| 18 | दूध का जला छाछ को भी फूँक-फूँक कर पीता है | धोखा खाया व्यक्ति सदा सतर्क रहता है | एक बार ठगा गया व्यक्ति हर बात में सावधानी बरतता है। |
| 19 | नाच न जाने आँगन टेढ़ा | अपनी अयोग्यता का दोष दूसरों पर डालना | असफल व्यक्ति अपनी कमी छिपाने के लिए दूसरों को दोष देता है। |
| 20 | नौ नकद न तेरह उधार | नकद लेन-देन ही अच्छा | उधार के झंझट से नकद का छोटा लाभ भी बेहतर है। |
| 21 | पर उपदेश कुशल बहुतेरे | दूसरों को उपदेश देना सरल है | उपदेश देना आसान, स्वयं उस पर चलना कठिन है। |
| 22 | मुँह में राम बगल में छुरी | ऊपर से मीठा, अंदर से कपटी | कपटी व्यक्ति मीठी बातों से ठगता है। |
| 23 | रस्सी जल गई पर बल न गया | स्वभाव कभी नहीं बदलता | कठिन परिस्थिति में भी दुष्ट अपना स्वभाव नहीं छोड़ता। |
| 24 | लातों के भूत बातों से नहीं मानते | दुष्ट दंड से ही मानता है | समझाने से न मानने वाले को कठोरता से ही सुधारा जा सकता है। |
| 25 | साँच को आँच नहीं | सत्य बोलने वाले को भय नहीं | सच्चे व्यक्ति को किसी का डर नहीं होता। |
| 26 | सौ सुनार की एक लुहार की | एक निर्णायक प्रहार श्रेष्ठ | अनेक छोटे प्रयासों से एक सशक्त प्रयास बेहतर होता है। |
| 27 | हाथ कंगन को आरसी क्या | प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं | जो बात सामने दिख रही है, उसके लिए सबूत माँगना व्यर्थ है। |
| 28 | होनहार बिरवान के होत चीकने पात | प्रतिभा के लक्षण बचपन में दिखते हैं | महान बनने वाले व्यक्ति की प्रतिभा बाल्यावस्था में ही झलकती है। |
परीक्षा सुझाव: मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर एक अंक का प्रश्न बन सकता है — मुहावरा वाक्यांश है (अर्थ अपने आप में अधूरा, वाक्य में प्रयोग से पूर्ण), लोकोक्ति पूर्ण वाक्य है (स्वयं में पूर्ण अर्थ)। मुहावरे के वाक्य प्रयोग में मुहावरे का भाव स्पष्ट झलकना चाहिए। वर्तनी में चंद्रबिंदु का ध्यान रखें — आँखों, गाँव, दाँतों।
