Noteclerical

लोकोक्तियाँ

Lesson 52 of 113

इस विषय में क्या आता है

परीक्षा पूछती है — अंधों में काना राजा का भाव क्या, अब पछताए होत क्या के बाद क्या आता है, यह पद लोकोक्ति है या मुहावरा, इस घटना पर कौन-सी कहावत बैठेगी, ऊँची दुकान फीके पकवान दिखावे के निकट है क्या। पूछ पूरे वाक्य का लोक-सत्य है। आँख–नाक के पदबंध मुहावरे पर रह गए।

यहाँ पढ़ना है

लोकोक्ति क्या है। कहावत से कितना फर्क। दोहे/सुभाषित कब ठप्पा ले लेते हैं। अधूरी कहावत पूरी करना। कर्म, एकता, दिखावा, स्वभाव, न्याय, समय के परिवार। निकट अर्थ वाली दो कहावतें। उल्टी जोड़ी (दूर के ढोल / घर की मुर्गी)। स्थिति देखकर सही उक्ति। पाँच जाल।

यहाँ नहीं घुसाना

कमर कसना, आँख का तारा, नाक में दम — मुहावरे (क्रिया मोड़कर वाक्य में बैठते हैं)। वर्तनी/वाक्य शुद्धि — अशुद्धि-शोधन। ने-रचना — काल। उपमा-रूपक — अलंकार। कमल = पंकज — पर्याय। हरि के कई अर्थ — अनेकार्थक। अग्नि–आग — तत्सम। रस-छंद मात्राएँ अपने पृष्ठ पर।

एक पंक्ति: लोकोक्ति वाक्य के बाहर ज्यों-की-त्यों रखी जाती है — «जैसा कहा जाता है…»। मुहावरा वाक्य के अंदर घुलता है।

लोक + उक्ति — लोगों की कही पूरी बात

लोकोक्ति = लोक + उक्ति। पीढ़ियों ने अनुभव को एक पूरे वाक्य में बाँध दिया। यह किसी एक आदमी का चित्र नहीं, समाज का नियम या चेतावनी है। शब्दशः पशु-पक्षी चित्र मत बनाना; भाव पकड़ना।

लोकोक्तिशब्दशः (गलत घर)लोक-भाव (सही)
अंधों में काना राजानेत्रहीनों का चुनावअयोग्यों के बीच थोड़ा-सा योग्य भी बड़ा लगना
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ताचना और तंदूरएक व्यक्ति से बड़ा काम नहीं होता; एकता चाहिए
धोबी का कुत्ता न घर का न घाट काधोबी के कुत्ते की जीवनीदो जगह का होकर कहीं का न रहना
ऊँची दुकान फीके पकवानदुकान की रसोई का स्वाददिखावा बड़ा, असलियत खोखली
खोदा पहाड़ निकली चुहियापहाड़ की खुदाईबहुत परिश्रम, नतीजा नगण्य
उदाहरण से पकड़ो। गाँव की समिति में कोई पढ़ा-लिखा नहीं, एक आदमी पाँचवीं पास है और सब उसी के आगे सिर झुकाते हैं — «अंधों में काना राजा»। यह मुहावरा «आँख का तारा» नहीं: तारा प्रिय व्यक्ति है, राजा यहाँ श्रेष्ठता का व्यंग्य है।

प्रयोग का ढाँचा प्रायः यह रहता है: पहले घटना, फिर उक्ति। «देर हो गई, अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।» उक्ति के शब्दों को भूत-भविष्य में मत तोड़ो — «चिड़ियों ने खेत चुग लिया था इसलिए पछताया» व्याख्या है, लोकोक्ति का रूप नहीं।

यह मुहावरा-पृष्ठ नहीं है

फर्क की तीन कसौटी मुहावरे पर रेखा बन चुकी। यहाँ उल्टी दिशा से याद रखो — कहावत को पदबंध मत बना देना।

जाँचलोकोक्ति रहेगीमुहावरा हो जाएगा — मत तोड़ो
पूरा वाक्य?अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता।«चना फोड़ना» बनाकर वाक्य में घुसाना
सीख / सत्य?जैसी करनी वैसी भरनी।हाथ मलना — पछतावे का चित्र, नियम नहीं
«उसने ___ किया»?नहीं बैठतीउसने कमर कसी / नाक में दम कर दिया — हाँ

यहाँ का घर

अंधों में काना राजा। नाच न जाने आँगन टेढ़ा। जैसी करनी वैसी भरनी। न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी।

पिछला घर

आँखें दिखाना, नौ-दो-ग्यारह होना, अपना उल्लू सीधा करना, दाल न गलना — अर्थ रूढ़ है पर आकार अधूरा। सूची मुहावरे पर है, यहाँ नकल नहीं।

कुंजी-झगड़ा। कुछ प्रश्न-पत्र «धोबी का कुत्ता…» को मुहावरे में डाल देते हैं। आकार पूरा वाक्य है — इस पृष्ठ का ठप्पा लोकोक्ति। परीक्षा की कुंजी उल्टी हो तो कुंजी पर निशान, समझ इस कसौटी की रखो। «नक्कारखाने में तूती की आवाज़» पदबंध है — मुहावरा-पृष्ठ।

कहावत, सुभाषित, दोहा — ठप्पा कहाँ

कक्षा-10 में कहावत और लोकोक्ति प्रायः एक ही थैला हैं: लोक की पूरी उक्ति। झगड़ा मत खड़ा करना।

सुभाषित / दोहा / साखी कवि की पंक्ति है — कबीर, रहीम, तुलसी। रस-छंद और अलंकार उनके अपने पृष्ठों पर। यहाँ केवल इतना: प्रश्न «निम्न लोकोक्ति है» लिखे और विकल्प में «काल करे सो आज कर» हो, तो बहुत पत्र इसे लोकोक्ति मान लेते हैं — क्योंकि पूरा नीति-वाक्य है। मात्रा गिनना यहाँ नहीं।

पंक्तिपरीक्षा में अक्सरयहाँ मत खोलना
काल करे सो आज कर, आज करे सो अबलोकोक्ति / कहावत का भाव: काम टालो मतदोहा का छंद-भेद, मात्रा
पर उपदेश कुशल बहुतेरेदूसरों को सीख देना आसान, खुद करना कठिनरहीम का पूरा दोहा याद करना अनिवार्य नहीं; भाव पक्का
मन के हारे हार है मन के जीते जीतआत्मविश्वास का सत्यरस का स्थायी भाव

अशुद्ध वर्तनी («अन्धो मे काना राजा» मात्रा टूटी) — अशुद्धि-शोधन। यहाँ उक्ति का भाव पूछा जाता है।

अधूरी उक्ति — दूसरा टुकड़ा रटो

लिपिक और कक्षा-10 दोनों में पहला टुकड़ा देकर पूछते हैं: आगे क्या? पूरा वाक्य ही लोकोक्ति है; आधा छोड़ोगे तो मुहावरे जैसा अधूरा पद लग सकता है।

पहला टुकड़ापूरा रूप
अब पछताए होत क्याअब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत
धोबी का कुत्ताधोबी का कुत्ता न घर का न घाट का
अकेला चनाअकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता
नाच न जानेनाच न जाने आँगन टेढ़ा
ऊँची दुकानऊँची दुकान फीके पकवान
खोदा पहाड़खोदा पहाड़ निकली चुहिया
दूध का जलादूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है
डूबते कोडूबते को तिनके का सहारा
न रहेगा बाँसन रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी
हाथ कंगन कोहाथ कंगन को आरसी क्या
जाके पाँव न फटी बिवाईजाके पाँव न फटी बिवाई, सो का जाने पीर पराई
हाथी के दाँतहाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और
का वर्षा जबका वर्षा जब कृषि सुखाने
भैंस के आगेभैंस के आगे बीन बजाना
एक तो चोरीएक तो चोरी दूसरी सीनाजोरी

रटने का ढंग: पहला टुकड़ा सुनते ही जीभ पर दूसरा आना चाहिए। अर्थ पीछे से चिपकाओ, पहले पूरा वाक्य स्थिर करो।

कर्म, फल, प्रयास

लोकोक्तिभावकब मुख पर आए
जैसी करनी वैसी भरनीकर्म का फल वैसा ही मिलता हैबुरा किया, बुरा पाया / अच्छा किया, अच्छा पाया
बोए पेड़ बबूल के तो आम कहाँ से होयजैसा बोओगे वैसा काटोगेबुरा बीज, मीठा फल की उम्मीद व्यर्थ
कर भला हो भलाभलाई का फल भलाईनेकी का उत्साह
नेकी कर दरिया में डालभलाई चुपचाप, प्रशंसा की चाह बिनाउपकार का ढिंढोरा न पीटो
खोदा पहाड़ निकली चुहियामेहनत बड़ी, लाभ छोटाशोर-शराबे के बाद मामूली नतीजा
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ताएक से बड़ा काम नहींमदद माँगने / टीम की ज़रूरत
एक पंथ दो काजएक काम से दो लाभएक यात्रा, दो काम निपटे
जहाँ चाह वहाँ राहइच्छा दृढ़ हो तो रास्ता निकलता हैहिम्मत दिखाने पर
मन के हारे हार है मन के जीते जीतहार-जीत पहले मन मेंहिम्मत टूटी / हिम्मत बँधी

एकता, अवसर, संकट, देर

लोकोक्तिभावकब मुख पर आए
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ताएकता में शक्ति — एक कमअकेले बोझ
अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेतसमय निकलने पर पछतावा व्यर्थमौका जा चुका
का वर्षा जब कृषि सुखानेमदद तब आए जब काम बिगड़ चुकाबहुत देर से सहायता
डूबते को तिनके का सहारासंकट में छोटी मदद भी बड़ीथोड़ी राहत भी स्वीकार
भागते भूत की लंगोटी सहीबुरी हालत में जो मिले वही गनीमतकम पर राजी होना
जब तक साँस तब तक आसआशा अंत तकनिराश मत हो
इधर कुआँ उधर खाईदोनों ओर संकटकोई रास्ता सुरक्षित नहीं
न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरीजड़ कट जाए तो झगड़ा/कारण खत्ममूल कारण मिटाने पर
मरता क्या न करतासंकट में कुछ भी कर बैठनामजबूरी के कदम

पछतावे का चित्र मुहावरा «हाथ मलना» भी है — वाक्य के अंदर। पूरी सीख «अब पछताए…» है — यह पृष्ठ। प्रश्न «मुहावरा» लिखे तो हाथ मलना; «लोकोक्ति / कहावत» लिखे तो चिड़िया वाली उक्ति।

दिखावा, अज्ञान, खोखला शोर

लोकोक्तिभावकब मुख पर आए
ऊँची दुकान फीके पकवानबाहरी तड़क, अंदर खोखलाबड़ा बोर्ड, खराब माल
नाम बड़े और दर्शन छोटेप्रसिद्धि अधिक, असल कमसुनकर बड़ा, देखकर निराश
थोथा चना बाजे घनाखोखला आदमी ज्यादा बोलता हैज्ञान कम, शोर ज्यादा
अधजल गगरी छलकत जाएअधूरा ज्ञान सबसे अधिक इतराता हैथोड़ा पढ़कर उपदेशक बना
तन पर नहीं लत्ता, पान खाए अलबत्तागरीबी पर भी दिखावाफैशन, जेब खाली
बंदर क्या जाने अदरक का स्वादअज्ञानी गुण नहीं पहचानताकला/विद्या पर अनजान की राय
भैंस के आगे बीन बजानामूर्ख को समझाना व्यर्थसमझाते-समझाते थक जाना
काला अक्षर भैंस बराबरनिरक्षर के लिए लिखा कुछ काम नहींपढ़ न सके तो कागज व्यर्थ
नीम हकीम खतरा-ए-जानअधकचरा ज्ञान जानलेवाथोड़ा-सा इलाज/सलाह घातक
यह मुँह और मसूर की दालयोग्यता से बड़ा दावाहैसियत छोटी, माँग बड़ी
निकट घर, एक नहीं। थोथा चना = शोर। अधजल गगरी = छलकना/इतराना। नीम हकीम = जान का खतरा। तीनों «अधूरा ज्ञान/खोखलापन» के परिवार, उत्तर अलग।

स्वभाव, दोष मढ़ना, दो जगह का न रहना

लोकोक्तिभावकब मुख पर आए
नाच न जाने आँगन टेढ़ाअपनी अयोग्यता का दोष दूसरों परहारकर मैदान को कोसना
उल्टा चोर कोतवाल को डाँटेदोषी निर्दोष पर आरोपगलती अपनी, शोर तुम्हारी
एक तो चोरी दूसरी सीनाजोरीअपराध पर धृष्टतागलती + अकड़
धोबी का कुत्ता न घर का न घाट कादो जगह बँधकर कहीं का न रहनान नौकरी निभाई न घर
रस्सी जल गई पर ऐंठन न गईहानि हो चुकी, स्वभाव/घमंड बाकीसीख नहीं सकता पुराना टेढ़ा
जैसा देश वैसा भेषपरिस्थिति के अनुसार चलनानए स्थान की रीत अपनाना
चोर-चोर मौसेरे भाईदुर्जन आपस में मिल जाते हैंदो दोषियों की सांठगांठ
मियाँ की जूती मियाँ के सिरअपनी युक्ति से स्वयं को चोटजाल अपने पैर में
जिस डाली पर बैठे उसी को कातेअपने सहारे को हानिरोज़ी देने वाले से बैर
जल में रहकर मगर से बैरजिस पर निर्भर उसी से दुश्मनी मूर्खतामालिक/आश्रय से टकराना

«लकीर का फकीर» रूढ़ि का गुलाम — प्रायः मुहावरा, पूरा नीति-वाक्य नहीं। इस तालिका में कुंजी मत बनाना।

न्याय, सत्य, धन, शक्ति

लोकोक्तिभावकब मुख पर आए
साँच को आँच नहींसत्य को डर नहींईमानदारी पर दबाव
हाथ कंगन को आरसी क्याप्रत्यक्ष को प्रमाण की ज़रूरत नहींआँखों देखा हाल
जिसकी लाठी उसकी भैंसबलवान का राज, न्याय नहींताकतवर जीता
सौ सुनार की एक लोहार कीएक मज़बूत कई कमज़ोरों पर भारीएक करारा वार / एक समर्थ व्यक्ति
अंधों में काना राजाअयोग्यों में थोड़ा योग्य भी सिरमौरकम पढ़े समाज का «विद्वान»
एक अनार सौ बीमारचीज़ कम, चाहने वाले ज्यादाएक पद, भीड़ आवेदकों की
आँख के अंधे गाँठ के पूरेविवेकहीन कंजूस / धन हो समझ न होपैसा है, सोच नहीं
कंगाली में आटा गीलाविपत्ति पर विपत्तिगरीबी में और नुकसान
बिल्ली के भाग से छींका टूटनाअचानक, बिना प्रयास के लाभसंयोग की रोटी
होनहार बिरवान के होत चीकने पातयोग्य का बचपन से संकेतबच्चे में आगे की चमक
हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के औरकथन और करनी अलग; द्विगुण चेहराबाहरी नैतिकता, अंदर और

समय, आदत, अति, छोटा-बड़ा

लोकोक्तिभावकब मुख पर आए
अंत भला तो सब भलापरिणाम अच्छा तो बीच का कष्ट भूल जातेनतीजा ठीक निकला
चार दिन की चाँदनी फिर अँधेरी रातसुख थोड़े दिन काअस्थायी चमक
नया नौ दिन पुराना सौ दिननया आकर्षण जल्दी उतर जाता हैशौक ठंडा पड़ना
सस्ता रोए बार-बार, महँगा रोए एक बारसस्ती चीज़ बार-बार खराब; अच्छा एक बार मोलगुण बनाम दाम
दूर के ढोल सुहावनेदूर की चीज़/व्यक्ति अधिक सुंदर लगते हैंपरदेस की तारीफ, घर की अनदेखी
घर की मुर्गी दाल बराबरअपने घर की वस्तु का मूल्य कम आँकनाघरवाले की प्रतिभा न देखना
चिराग तले अँधेराअपने पास / अपने घर की कमी नज़र न आएदूसरों को सुधार, खुद अंधेरा
पर उपदेश कुशल बहुतेरेसीख दूसरों को देना आसानउपदेशक, अमल शून्य
जाके पाँव न फटी बिवाई, सो का जाने पीर पराईदुख वही समझे जिसे हुआ होदूसरे के दर्द पर हल्की राय
बिना रोए माँ भी दूध नहीं देतीमाँगे / प्रयास किए बिना नहीं मिलताचुप बैठे रहना
अंधा बाँटे रेवड़ी, आपस में तौ तौअयोग्य के बाँटने में पक्षपात / हुड़दंगन्याय बिना बँटवारा

निकट जोड़ी और उल्टी जोड़ी

परीक्षा «समान भाव» या «विपरीत लोक-दृष्टि» पूछती है। पर्याय-पृष्ठ का कमल-समूह यहाँ मत घुसेड़ना — यहाँ दो पूरी उक्तियाँ हैं।

भाव लगभग एक

एकदूसरीफर्क इतना
जैसी करनी वैसी भरनीबोए पेड़ बबूल के तो आम कहाँ से होयपहली फल सामान्य; दूसरी «बुरा बीज तो आम असंभव»
अब पछताए होत क्या…का वर्षा जब कृषि सुखानेदोनों देर; पहली पछतावा, दूसरी बेमौके मदद
ऊँची दुकान फीके पकवाननाम बड़े और दर्शन छोटेदुकान = माल; नाम = प्रसिद्धि
थोथा चना बाजे घनाअधजल गगरी छलकत जाएशोर बनाम छलकना/इतराना
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ताएकता में बल — नारा हो तो लोकोक्ति कम, भाव निकटउक्ति रटो चना वाली; नारा मत लिखना जब पूरा वाक्य माँगा हो

लोक की दो उल्टी आँखें

उक्तिनज़र
दूर के ढोल सुहावनेदूर अच्छा लगता है
घर की मुर्गी दाल बराबरअपना तुच्छ लगता है — वही सिक्के का दूसरा पलड़ा
डूबते को तिनके का सहाराथोड़ी मदद भी अनमोल
ओस चाटने से प्यास नहीं बुझतीनाकाफी उपाय से काम नहीं — तिनका हमेशा काफी नहीं

प्रश्न «विलोम लोकोक्ति» दुर्लभ है; अधिक «सही भाव चुनो»। घर की मुर्गी को दूर के ढोल का विलोम मत लिख देना जब विकल्प में अर्थ पूछा हो — दोनों अलग उक्तियाँ हैं, विलोम-पृष्ठ का जोड़ा नहीं। विलोम शब्द विलोम पर।

स्थिति देखो, उक्ति चुनो

यह इस पृष्ठ का अपना खेल है। मुहावरा-पृष्ठ अंग-परिवार रटाता है; यहाँ घटना रटाते हैं।

घटनाबैठेगीनहीं बैठेगी
परीक्षा निकल गई, अब रोता हैअब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेतकमर कसना — वह तैयारी का मुहावरा, देर के बाद नहीं
गायक बुरा, मंच को दोषनाच न जाने आँगन टेढ़ाआँखें दिखाना — धमकी
बड़ा होटल, खाना फीकाऊँची दुकान फीके पकवानचार चाँद लगाना — शोभा बढ़ना, उल्टा
दो दफ़्तरों में नाम, दोनों बिगड़ेधोबी का कुत्ता न घर का न घाट कानौ-दो-ग्यारह होना — भागना
चोर पकड़ा गया, पुलिस पर शोरउल्टा चोर कोतवाल को डाँटेकान भरना — चुगली का मुहावरा
मजदूर अकेला गोदाम नहीं खाली कर सकाअकेला चना भाड़ नहीं फोड़ताऊँट के मुँह में जीरा — वह मुहावरा, मात्रा कम
आँखों के सामने गड़बड़हाथ कंगन को आरसी क्याआँख का तारा — प्रिय व्यक्ति
उदाहरण

विद्यार्थी पढ़ा नहीं, प्रश्नपत्र को «बहुत कठिन» कहकर कोसता है। लोकोक्ति?

हल

  1. दोष कहाँ

    कमजोरी अपनी, आरोप बाहर — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

  2. पड़ोस

    उल्टा चोर कोतवाल = अपराधी आरोप मढ़े। यहाँ अपराध नहीं, अयोग्यता है। चिड़िया चुग गई = मौका गया, कोसना नहीं।

उत्तरनाच न जाने आँगन टेढ़ा

जाल — यहीं कटते हैं

1. मुहावरे को लोकोक्ति लिख देना

आँख का तारा, कमर कसना, हाथ मलना, अपना उल्लू सीधा करना — अधूरे पद, क्रिया बदलती है। लोकोक्ति नहीं। उल्टा: अंधों में काना राजा को «उसने काना राजा किया» मत बनाना।

2. आधा वाक्य

«धोबी का कुत्ता» अधूरा। पूरा: न घर का न घाट का। «अब पछताए होत क्या» अधूरा बिना खेत वाली पंक्ति के — बहुत पत्र दूसरा टुकड़ा माँगते हैं।

3. शब्दशः चित्र

चना-भाड़ रसोई नहीं। चुहिया-पहाड़ भूगोल नहीं। बाँस-बाँसुरी संगीत-प्रश्न नहीं — कारण मिटना है।

4. निकट उक्ति का गलत घर

थोथा चना ≠ अधजल गगरी (शोर ≠ छलक)। ऊँची दुकान ≠ नाम बड़े दर्शन छोटे (माल ≠ प्रसिद्धि) — निकट हैं, एक नहीं। जैसी करनी ≠ अब पछताए (फल ≠ देर)।

5. अलंकार या पर्याय समझना

«मुख कमल के समान» उपमा। «कमल = पंकज» पर्याय। लोकोक्ति तभी जब लोक का पूरा नीति-वाक्य हो।

उदाहरण

धोबी का कुत्ता… — मुहावरा, लोकोक्ति, या पशु-विज्ञान?

हल

  1. आकार

    पूरा वाक्य बनता है: न घर का न घाट का।

  2. काम

    सीख/चित्र समाज का: दो स्थान, कोई अपना नहीं।

  3. ठप्पा

    लोकोक्ति। पशु-पद वाला मुहावरा «अपना उल्लू सीधा करना» पीछे पृष्ठ पर।

उत्तरलोकोक्ति

परीक्षा में पाँच कदम

  1. पूछा क्या? अर्थ, दूसरा टुकड़ा, लोकोक्ति बनाम मुहावरा, या स्थिति पर उक्ति।
  2. पूरा वाक्य + सीख? हाँ → यहीं। अधूरा + क्रिया मोड़ → मुहावरे।
  3. शब्दशः चित्र काटो। चना, कुत्ता, पहाड़, बाँस भाव के वाहन हैं।
  4. निकट जोड़ी का फर्क एक शब्द में। दुकान/नाम, चना/गगरी, करनी/पछतावा।
  5. स्थिति में दोष किसका? अपनी अयोग्यता = आँगन टेढ़ा। देर = चिड़िया। दिखावा = फीके पकवान।
भूल-सूची। कमर कसना = लोकोक्ति। अंधों में काना राजा = आँख का तारा। धोबी का कुत्ता अधूरा छोड़ना। नाच न जाने = उल्टा चोर (अयोग्यता ≠ अपराध)। ऊँची दुकान = चार चाँद। घर की मुर्गी को विलोम-शब्द लिखना। थोथा चना = अधजल गगरी एक ही उत्तर।

प्रश्न 1–10

प्र. 1

लोकोक्ति किसे कहते हैं?

  1. रूढ़ पदबंध जो वाक्य में क्रिया बदलकर बैठे — वह मुहावरा है
  2. लोक की पूरी उक्ति जो सीख या सामान्य सत्य कहे और ज्यों-की-त्यों उद्धृत हो
  3. एक शब्द का दूसरा नाम — पर्याय
  4. मुख कमल के समान — उपमा

हल

  1. आकार

    पूरा वाक्य। अधूरा पद मुहावरा।

  2. काम

    नीति/सत्य/चेतावनी। पर्याय और अलंकार अपने पृष्ठ।

उत्तरB
प्र. 2

«अंधों में काना राजा» का भाव?

  1. अत्यंत प्रिय व्यक्ति — आँख का तारा
  2. अयोग्यों के बीच थोड़ा-सा योग्य भी श्रेष्ठ माना जाना
  3. नेत्रहीनों का राजा बनना — शब्दशः
  4. धमकाना — आँखें दिखाना

हल

  1. व्यंग्य

    काना यहाँ नेत्र-रोग नहीं, «थोड़ी योग्यता» का चित्र है।

  2. मुहावरा काटो

    तारा और दिखाना पिछला पृष्ठ।

उत्तरB
प्र. 3

«अब पछताए होत क्या» का पूरा रूप?

  1. अब पछताए होत क्या, हाथ मलना चाहिए — हाथ मलना मुहावरा है, जोड़ नहीं
  2. अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत
  3. अब पछताए होत क्या, कमर कस लो — उल्टा समय
  4. का वर्षा जब कृषि सुखाने — निकट भाव, यह पूरा रूप नहीं

हल

  1. दूसरा टुकड़ा

    चिड़िया + खेत पक्का। वर्षा-कृषि अलग उक्ति है, पर्याय नहीं।

उत्तरB
प्र. 4

कौन-सी लोकोक्ति है, मुहावरा नहीं?

  1. कमर कसना
  2. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता
  3. नाक में दम करना
  4. नौ-दो-ग्यारह होना

हल

  1. घुलना

    A, C, D पर «उसने / वह हो गया» चलता है।

  2. उद्धरण

    B पूरा वाक्य है, सीख है। «उसने चना फोड़ा» तोड़ है।

उत्तरB
प्र. 5

«धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का»?

  1. भूख लगना — पेट में चूहे
  2. दो जगह का होकर किसी जगह का न रहना
  3. भाग जाना — नौ-दो-ग्यारह
  4. स्वार्थ सिद्ध — उल्लू सीधा

हल

  1. दो किनारे

    घर और घाट दोनों अधूरे — न इधर न उधर। पशु-मुहावरे अलग अर्थ के हैं।

उत्तरB
प्र. 6

अपनी हार का दोष मैदान पर मढ़ना?

  1. उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे — वह अपराध + आरोप
  2. नाच न जाने आँगन टेढ़ा
  3. आँखें फेरना — उपेक्षा का मुहावरा
  4. जैसी करनी वैसी भरनी — फल, दोष-मढ़ना नहीं

हल

  1. अयोग्यता

    नाच नहीं आता, आँगन टेढ़ा ठहराया। चोर वाली उक्ति तब जब गुनहगार खुद दूसरों को डाँटे।

उत्तरB
प्र. 7

«ऊँची दुकान फीके पकवान»?

  1. शोभा बढ़ाना — चार चाँद लगाना
  2. दिखावा बड़ा, असलियत कमजोर
  3. दुर्लभ दर्शन — ईद का चाँद
  4. अच्छे पर अच्छा — सोने पर सुहागा

हल

  1. तड़क बनाम स्वाद

    बोर्ड ऊँचा, पकवान फीके। मुहावरे शोभा/दुर्लभता/लाभ के हैं, खोखले दिखावे के नहीं।

उत्तरB
प्र. 8

एक बार दूध से मुँह जला, अब छाछ भी फूँककर — लोकोक्ति?

  1. अब पछताए होत क्या… — पछतावा व्यर्थ, सावधानी नहीं
  2. दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है
  3. आग बबूला होना — क्रोध का मुहावरा
  4. पानी-पानी होना — लज्जा

हल

  1. सबक

    एक धोखा → आगे अति-सावधानी। चिड़िया वाली उक्ति मौका जा चुका; यह उक्ति भविष्य की खबरदारी है।

उत्तरB
प्र. 9

शहर गए, रिश्तेदार भी मिल लिए — एक काम दो लाभ। लोकोक्ति?

  1. खोदा पहाड़ निकली चुहिया — मेहनत बनाम नगण्य फल
  2. एक पंथ दो काज
  3. सोने पर सुहागा — मुहावरा, अच्छे पर अच्छा; आकार अधूरा
  4. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता

हल

  1. दो काज

    एक पंथ। सुहागा निकट भाव लग सकता है पर मुहावरा है। पहाड़-चुहिया उल्टा (मेहनत ज्यादा, फल कम)।

उत्तरB
प्र. 10

आँखों देखा अन्याय, सबको पता — प्रमाण की क्या ज़रूरत?

  1. साँच को आँच नहीं — सत्य निर्भय, यहाँ «प्रत्यक्ष» पूछा है
  2. हाथ कंगन को आरसी क्या
  3. आँख का तारा — प्रिय
  4. आँखें खुलना — होश का मुहावरा

हल

  1. प्रत्यक्ष

    कंगन हाथ में हो तो दर्पण क्यों। साँच-आँच अलग घर: डर नहीं, प्रमाण-प्रश्न नहीं।

उत्तरB

अभ्यास

ये दस अलग कोण हैं — ऊपर वाले दस की नकल नहीं। टुकड़ा, स्थिति, निकट जोड़ी, मुहावरा-सीमा।

अ. 1

परदेस की नौकरी सुनकर सब ललचाए, घर की अच्छी नौकरी फीकी लगी। उक्ति?

  1. घर की मुर्गी दाल बराबर — निकट, पर यहाँ «दूर सुहावना» प्रधान है
  2. दूर के ढोल सुहावने
  3. ईद का चाँद होना — मुहावरा, दुर्लभ दर्शन
  4. चिराग तले अँधेरा — पास की कमी, दूर की तारीफ नहीं

हल

  1. दूर सुंदर

    दूर के ढोल। मुर्गी तब जब घर की वस्तु को जान-बूझकर तुच्छ ठहराएँ बिना दूर की तुलना के। दोनों पलड़े हैं; इस स्थिति में दूर वाला ढोल।

उत्तरB
अ. 2

संगीत की महफ़िल में अनजान व्यक्ति राग को «शोर» कहे। उक्ति?

  1. भैंस के आगे बीन बजाना — निकट: मूर्ख पर व्यर्थ मेहनत; यहाँ «गुण न पहचानना» पूछा
  2. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद
  3. कान पर जूँ न रेंगना — मुहावरा, असर नहीं
  4. नाच न जाने आँगन टेढ़ा

हल

  1. अज्ञान

    अदरक = गुण। बंदर नहीं पहचानता। बीन-भैंस तब जब तुम समझाते-समझाते थक जाओ। जूँ मुहावरा है।

उत्तरB
अ. 3

साल भर योजना, नतीजा एक छोटी सूचना। उक्ति?

  1. एक पंथ दो काज — लाभ दो, यहाँ लाभ नगण्य
  2. खोदा पहाड़ निकली चुहिया
  3. लोहे के चने चबाना — मुहावरा, कठिन काम
  4. जहाँ चाह वहाँ राह

हल

  1. मेहनत ≠ फल

    पहाड़ खोदा, चुहिया निकली। चने चबाना कठिनाई बताता है, नतीजे की तुच्छता नहीं।

उत्तरB
अ. 4

नौकरी गई, उसी हफ्ते छत चूने लगी। उक्ति?

  1. डूबते को तिनके का सहारा — मदद, यहाँ और विपत्ति
  2. कंगाली में आटा गीला
  3. हाथ धोना — मुहावरा, खो देना मात्र
  4. अंत भला तो सब भला

हल

  1. दोहरे दुर्दिन

    कंगाली में आटा गीला। तिनका राहत है, उल्टा भाव।

उत्तरB
अ. 5

«न रहेगा बाँस…» पूरा और भाव?

  1. न रहेगा बाँस न बजेगी ढोल — गलत टुकड़ा
  2. न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी — कारण मिटे तो झगड़ा/काम बंद
  3. आसमान सिर पर उठाना — हंगामा का मुहावरा
  4. एक तो चोरी दूसरी सीनाजोरी

हल

  1. बाँसुरी

    बाँस गया तो बाँसुरी कहाँ। जड़ काटो। ढोल मत घुसेड़ना।

उत्तरB
अ. 6

थोड़ा-सा पढ़ा वैद्य खतरनाक दवा दे। उक्ति?

  1. अधजल गगरी छलकत जाए — इतराना, जान का खतरा नहीं
  2. नीम हकीम खतरा-ए-जान
  3. पेट में चूहे दौड़ना — भूख
  4. का वर्षा जब कृषि सुखाने

हल

  1. अधकचरा इलाज

    नीम हकीम। गगरी दिखावे की है। दोनों अधूरे ज्ञान के परिवार, घर अलग: छलकना बनाम जान का खतरा।

उत्तरB
अ. 7

संकट में छोटे मित्र ने दस रुपये उधार दिए — बड़ी राहत। उक्ति?

  1. ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती — नाकाफी उपाय, यहाँ राहत मानी गई
  2. डूबते को तिनके का सहारा
  3. ऊँट के मुँह में जीरा — मुहावरा, बहुत कम; ठप्पा मुहावरे का
  4. भागते भूत की लंगोटी सही — निकट भाव, शास्त्रीय जोड़ा तिनका है

हल

  1. तिनका

    डूबते को तिनके का सहारा। लंगोटी गनीमत का दूसरा चित्र है; प्रश्न संकट+छोटी मदद का शास्त्रीय जोड़ा माँगता है। जीरा मुहावरा-पृष्ठ।

उत्तरB
अ. 8

थोथा चना बाजे घना — अधजल गगरी छलकत जाए। फर्क?

  1. दोनों एकदम एक अर्थ, कोई फर्क नहीं
  2. चना: खोखला शोर। गगरी: अधूरा ज्ञान इतराकर छलकता है
  3. दोनों मुहावरे हैं
  4. चना लोकोक्ति नहीं

हल

  1. निकट, एक नहीं

    बाजे = शोर। छलकत = इतराना/उफनना। दोनों लोकोक्ति। परीक्षा एक माँगे तो चित्र देखो।

उत्तरB
अ. 9

दोहरी पंक्ति पूरी करो: जाके पाँव न फटी बिवाई, ____।

  1. सो आँख का तारा कहलाए
  2. सो का जाने पीर पराई
  3. सो कमर कस ले
  4. न घर का न घाट का

हल

  1. दूसरे का दर्द

    बिवाई न फटी हो तो दूसरों की पीर क्या जाने। कुत्ता-घाट दूसरी उक्ति का टुकड़ा है, चिपकाना मना।

उत्तरB
अ. 10

बेमेल छाँटो: अंधों में काना राजा · जैसी करनी वैसी भरनी · आँख का तारा · नाच न जाने आँगन टेढ़ा

  1. अंधों में काना राजा
  2. आँख का तारा — मुहावरा, शेष लोकोक्तियाँ
  3. जैसी करनी वैसी भरनी
  4. नाच न जाने आँगन टेढ़ा

हल

  1. आकार

    तीन पूरे नीति-वाक्य। तारा अधूरा प्रिय-पद — मुहावरे।

  2. वर्तनी यहाँ नहीं

    मात्रा-शुद्धि अशुद्धि-शोधन पर; बेमेल का यह खेल यहीं का है।

उत्तरB

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