इस विषय में क्या आता है
परीक्षा पूछती है — पानी पुल्लिंग क्यों, लड़का का बहुवचन लड़के न कि लड़काएँ, लता का लताएँ, प्राण हमेशा बहुवचन, आप के साथ क्रिया बहुवचन, मैं जाती हूँ कौन पुरुष–लिंग, हाथी की स्त्री हथिनी। तीन सवाल एक साथ: यह शब्द किस लिंग का है, एक है या अनेक, बोलने वाला कौन पुरुष है। इन्हीं से «अच्छा / अच्छी / अच्छे» और «जाता है / जाती है / जाते हैं» बैठते हैं।
यहाँ पढ़ना है
हिंदी में दो लिंग (नपुंसक नहीं)। प्राणी–अप्राणी। अंत्य-वर्ण नियम और अपवाद (पानी, दही, मोती)। लिंग बदलने के तीन ढंग। विशेषण–सर्वनाम मेल। वचन: आ→ए vs आ→एँ। नित्य एकवचन / नित्य बहुवचन। आदरार्थ बहुवचन। तीन पुरुष। क्रिया-मेल की कुंजी।
यहाँ नहीं घुसाना
अक, ता, पन किस घर के प्रत्यय हैं — उपसर्ग–प्रत्यय। वर्तमान–भूत–भविष्य की पूरी तालिका, वाक्य-भेद, कर्ता-कर्म — अगले पृष्ठ (काल / वाक्य, कारक)। यहाँ क्रिया सिर्फ़ मेल के लिए।
एक पंक्ति: लिंग = जाति (पुल्लिंग / स्त्रीलिंग)। वचन = संख्या (एक / अनेक)। पुरुष = बोलने–सुनने–किसी और का स्थान (उत्तम / मध्यम / अन्य)। तीनों मिलकर रूप तय करते हैं।
तीन ठप्पे एक साथ
लड़की जाती है में तीन सूचनाएँ हैं। एक चूकोगे तो वाक्य टूटेगा।
| ठप्पा | इस वाक्य में | गलत मेल |
|---|---|---|
| लिंग | लड़की = स्त्रीलिंग → क्रिया जाती | लड़की जाता है |
| वचन | एक लड़की → है, नहीं हैं | लड़की जाती हैं (एक के लिए, बिना आदर के) |
| पुरुष | लड़की = अन्य पुरुष (बोलने वाला नहीं) | लड़की जाती हूँ |
मैं जाती हूँ — उत्तम + स्त्रीलिंग + एकवचन। आप जाते हैं — मध्यम + आदर के कारण बहुवचन क्रिया, चाहे एक व्यक्ति हो।
लिंग — हिंदी में दो ही
संस्कृत में तीन लिंग थे (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग)। हिंदी में नपुंसक नहीं। जो संस्कृत में नपुंसक थे, हिंदी में प्रायः पुल्लिंग हो गए: फल, वन, ज्ञान, सत्य, पानी, दही, फूल, पत्र, नगर।
| लिंग | क्या है | उदाहरण |
|---|---|---|
| पुल्लिंग | पुरुष जाति / पुरुष जैसा ठप्पा | लड़का, हाथी, पहाड़, पानी, प्रेम, कमरा |
| स्त्रीलिंग | स्त्री जाति / स्त्री जैसा ठप्पा | लड़की, गाय, नदी, रोटी, भाषा, माला |
व्यक्ति व्याकरण में पुल्लिंग ठप्पा रखता है, चाहे औरत हो: वह व्यक्ति आया चलता है। अर्थ स्त्री हो तो वाक्य «वह महिला आई» लिखना साफ़ है। आत्मा हिंदी गद्य में प्रायः पुल्लिंग: महान आत्मा, आत्मा अमर माना जाता है — «है» अकेला लिंग नहीं दिखाता, विशेषण/प्रयोग दिखाता है।
पहचान — अंत्य वर्ण + अर्थ, फिर अपवाद
नियम काम चलाऊ हैं। परीक्षा अपवाद पर मारती है। पहले नियम, तुरंत अपवाद।
ईकारांत
अधिकतर स्त्रीलिंग: नदी, रोटी, टोपी, नारी, खीर, थाली, चूड़ी, डोरी, कहानी, रानी, टोकरी, अंगूठी, धोती, नादानी।
पानी ठंडा है — «है» पुल्लिंग। दही खट्टा है। मोती गिरा। नदी–रोटी इसी अंत की स्त्री धारा है — मिलाओ मत। आकारांत
दोनों लिंग। अंत «आ» देखकर मत लिख बैठना।
| पुल्लिंग आकारांत | स्त्रीलिंग आकारांत |
|---|---|
| लड़का, घोड़ा, कुत्ता, बकरा, कमरा, रास्ता, जूता, पंखा, बस्ता, चूहा | लता, माला, शाला, कथा, कविता, आशा, दया, भाषा, समस्या, महिला, निशा, बालिका, सभा, कन्या |
फर्क वचन पर फूटता है: पुल्लिंग आ → ए (लड़के, कमरे)। स्त्रीलिंग आ → एँ (लताएँ, कथाएँ)। नीचे वचन में दोहराएँगे।
इकारांत / उकारांत / ऊकारांत
- इ: मुनि, रवि, कवि, गिरि — प्रायः पुल्लिंग। रीति, राशि, जाति, बुद्धि, शक्ति — स्त्रीलिंग।
- उ: शिशु, साधु, गुरु, मधु, डाकू — पुल्लिंग। वस्तु, धातु, वायु, आयु — स्त्रीलिंग।
- ऊ: आलू, आँसू पुल्लिंग। बहू स्त्रीलिंग। लू (गर्म हवा) पुल्लिंग।
अर्थ के डिब्बे (अप्राणी)
| डिब्बा | प्रायः लिंग | उदाहरण / सावधानी |
|---|---|---|
| पर्वत, देश, वार, ग्रह, दिन | पुल्लिंग | हिमालय, भारत, सोमवार, मंगल, आज का दिन |
| नदी, भाषा, लिपि, तिथि | स्त्रीलिंग | गंगा, हिंदी, देवनागरी, पूर्णिमा |
| धातु–द्रव्य | मिलकर रटो | सोना, लोहा, ताँबा, तेल, दूध, घी = पुल्लिंग · चाँदी, राख = स्त्रीलिंग |
| अनाज | प्रायः पुल्लिंग | गेहूँ, चावल, चना · मक्का पुल्लिंग |
| पेड़ | प्रायः पुल्लिंग | आम, पीपल, बड़ · लता, बेल, सब्जी-लता स्त्री |
| भाव (पन, त्व) | प्रायः पुल्लिंग | बचपन, बंधुत्व, प्रेम, क्रोध · सुंदरता, मिठाई, दया = स्त्री (ता/आई/आ) |
| समूह | मिलकर | दल, वर्ग, समूह = पुल्लिंग · सेना, भीड़, सभा, जनता = स्त्री |
नदी और पानी दोनों ईकारांत। लिंग एक?
हल
- नदी
ईकारांत की मुख्य धारा — स्त्रीलिंग। बड़ी नदी, नदी बहती है।
- पानी
अपवाद सूची — पुल्लिंग। ठंडा पानी, पानी गिरा। अंत एक, ठप्पा अलग।
लिंग-परिवर्तन — तीन ढंग
प्रत्यय की नामावली उपसर्ग–प्रत्यय पर है। यहाँ काम यह है: पुल्लिंग शब्द से स्त्रीलिंग कैसे बनता है।
1. प्रत्यय लगाकर
| ढंग | पुल्लिंग → स्त्रीलिंग |
|---|---|
| अ / अक → इका | बालक → बालिका · नायक → नायिका · अध्यापक → अध्यापिका · सेवक → सेविका |
| ई | देव → देवी · पुत्र → पुत्री · दास → दासी |
| आ | सुत → सुता · वृद्ध → वृद्धा · बाल → बाला |
| इनी | हाथी → हथिनी · स्वामी → स्वामिनी · एकाकी → एकाकिनी · माली → मालिन (इन/इनी) |
| आनी | सेठ → सेठानी · जेठ → जेठानी · देवर → देवरानी · महाराज → महारानी |
| आइन / इन | पंडित → पंडिताइन · ठाकुर → ठकुराइन · मालिक → मालकिन |
| आ → ई / इया | लड़का → लड़की · घोड़ा → घोड़ी · बूढ़ा → बुढ़िया · चूहा → चुहिया · कुत्ता → कुत्तिया |
2. बिलकुल दूसरा शब्द
प्रत्यय नहीं लगते — जोड़ा रटो।
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|---|
| पिता / बाप | माता / माँ | भाई | बहन |
| पुत्र (बेटा) | पुत्री (बेटी) — यहाँ ई भी | नर | मादा / नारी |
| राजा | रानी | वीर | वीरांगना |
| कवि | कवयित्री | विद्वान | विदुषी |
| सम्राट | सम्राज्ञी | नर्तक | नर्तकी |
| बैल / वृषभ | गाय / गौ | मोर | मोरनी |
| पुरुष | स्त्री | वर | वधू |
3. एक रूप दोनों लिंग
कुछ शब्द लिंग नहीं बदलते, मेल क्रिया/विशेषण से आता है: प्रधान, मंत्री, साथी, देवता (व्याकरण पुल्लिंग ठप्पा), बच्चे के अर्थ में शिशु। प्रधान आईं / प्रधान आए — आदर + लिंग वाक्य से।
विशेषण और सर्वनाम का मेल
जो विशेषण आ पर खत्म (काला, छोटा, अच्छा, मेरा, नया) — लिंग–वचन के साथ बदलते हैं। तत्सम बहुत से अविकारी रहती हैं: सुंदर, योग्य, पवित्र, प्रसिद्ध, विस्तृत — लड़का भी, लड़की भी «सुंदर»।
| पुल्लिंग एक | पुल्लिंग बहु | स्त्रीलिंग एक | स्त्रीलिंग बहु | |
|---|---|---|---|---|
| अच्छा | अच्छा लड़का | अच्छे लड़के | अच्छी लड़की | अच्छी लड़कियाँ |
| मेरा | मेरा घर | मेरे घर | मेरी किताब | मेरी किताबें |
| नया | नया कमरा | नए कमरे | नई किताब | नई किताबें |
| सुंदर | सुंदर लड़का | सुंदर लड़के | सुंदर लड़की | सुंदर लड़कियाँ |
सर्वनाम: मैं, तू, तुम, आप, यह, वह — रूप से लिंग नहीं बताते। लिंग क्रिया और विशेषण पर आता है: मैं आया / मैं आई। संबंध: मेरा/मेरी, तेरा/तेरी, हमारा/हमारी, आपका/आपकी, उसका/उसकी, जिसका/जिसकी।
वचन — एक और अनेक
हिंदी में दो वचन: एकवचन, बहुवचन। द्विवचन संस्कृत का है, हिंदी में नहीं (आँखें, कान बहुवचन व्यवहार में)।
नियम 1 — पुल्लिंग आकारांत: आ → ए
लड़का → लड़के · घोड़ा → घोड़े · कमरा → कमरे · रास्ता → रास्ते · जूता → जूते · पंखा → पंखे।
कारक/परसर्ग के पहले ओं: लड़कों ने, कमरों में, रास्तों पर।
नियम 2 — स्त्रीलिंग आकारांत: आ → एँ
लता → लताएँ · कथा → कथाएँ · माला → मालाएँ · भाषा → भाषाएँ · समस्या → समस्याएँ · महिला → महिलाएँ।
ओं रूप: लताओं, कथाओं, महिलाओं।
नियम 3 — ईकारांत स्त्रीलिंग: ई → इयाँ
लड़की → लड़कियाँ · नदी → नदियाँ · रोटी → रोटियाँ · टोपी → टोपियाँ · नारी → नारियाँ। परसर्ग: लड़कियों, नदियों।
नियम 4 — इया → इयाँ
चिड़िया → चिड़ियाँ · कुतिया → कुतियाँ · डिबिया → डिबियाँ।
नियम 5 — अ / व्यंजन अंत
प्रायः ज्यों के त्यों या «ओं»: फूल → फूल / फूलों · घर → घर / घरों · बात → बातें (स्त्री, एँ) · रात → रातें · पुस्तक → पुस्तकें। बात/रात/पुस्तक स्त्रीलिंग → एँ।
नियम 6 — उकारांत पुल्लिंग
साधु → साधु / साधुओं · गुरु → गुरु / गुरुओं / गुरुजन · डाकू → डाकू / डाकुओं।
कमरा और कथा दोनों आ पर खत्म। बहुवचन?
हल
- कमरा
पुल्लिंग आकारांत → कमरे (ओं: कमरों)।
- कथा
स्त्रीलिंग आकारांत → कथाएँ (ओं: कथाओं)। «कथे» गलत।
नित्य एकवचन, नित्य बहुवचन, आदर
रूप नहीं बदलते / द्रव्य–भाव
पानी, दूध, घी, दही, तेल, सोना, चाँदी, प्रेम, क्रोध, सत्य, ज्ञान — गिनती के बहुवचन कम। «दो पानी» नहीं; «दो गिलास पानी»। क्रिया एकवचन: पानी गिर रहा है।
नित्य बहुवचन — रूप बहु, अर्थ समूह
ये शब्द व्याकरण में बहुवचन ठप्पे के हैं। क्रिया भी बहुवचन:
प्राण— प्राण चले गए (एक आदमी के भी «प्राण» बहु)आँसू— आँसू बह रहे हैंलोग— लोग आएहोश— होश उड़ गएदर्शन(मंदिर/गुरु के) — दर्शन किएसमाचार— समाचार आएहस्ताक्षर— हस्ताक्षर किएकेश / बाल— बाल बढ़े
नित्य एकवचन समूह
जनता, भीड़, सेना (इकाई), वर्षा, फसल (एक इकाई) — «जनता चाहती है» (स्त्रीलिंग एकवचन)। भीड़ इकट्ठी हुई।
आदरार्थ बहुवचन
एक व्यक्ति, पर क्रिया/सर्वनाम बहुवचन — आदर।
आपहमेशा «हैं / जाते हैं / जाइए» — एक हो या अनेक। «आप जाता है» गलत।- गुरुजी आए। माताजी आईं। पिताजी बैठे हैं।
- तू एकवचन घरेलू/निम्न; तुम मध्यम (क्रिया
हो); आप उच्च आदर (हैं)।
आप की कुंजी: वचन-प्रश्न में «आप» = मध्यम पुरुष + क्रिया हमेशा बहुवचन। लिंग विशेषण/क्रिया से: आप स्वयं आईं (स्त्री) / आप स्वयं आए (पुरुष)।
पुरुष — बोलने वाला, सुनने वाला, तीसरा
| पुरुष | कौन | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| उत्तम | बोलने वाला | मैं | हम |
| मध्यम | सुनने वाला | तू · तुम · आप | तुम · आप (आप आदर में एक पर भी) |
| अन्य | जिसके बारे में बात | यह / वह | ये / वे |
- मैं = उत्तम + एकवचन। हम = उत्तम + बहुवचन (कभी एक व्यक्ति भी «हम» राज/लेखकीय)।
- तू = मध्यम एक, क्रिया «है/जाता है»। तुम = मध्यम, क्रिया «हो/जाते हो» — एक मित्र पर भी तुम+हो।
- वह लड़का = अन्य पुल्लिंग एक। वे लड़के = अन्य पुल्लिंग बहु। वह लड़की = अन्य स्त्रीलिंग एक।
मैं स्त्री भी उत्तम पुरुष है: मैं जाती हूँ। «उत्तम पुल्लिंग» मत लिखना — दो ठप्पे अलग बोलो: उत्तम पुरुष, स्त्रीलिंग, एकवचन। क्रिया का मेल — काल नहीं, कुंजी हाँ
वर्तमान सामान्य की एक झलक। भूत–भविष्य–वाच्य अगले विषय। यहाँ सिर्फ़: क्रिया कर्ता के लिंग, वचन, पुरुष से बदलती है।
| कर्ता | ठप्पे | क्रिया (जाना) |
|---|---|---|
| मैं (लड़का) | उत्तम, पुल्लिंग, एक | जाता हूँ |
| मैं (लड़की) | उत्तम, स्त्रीलिंग, एक | जाती हूँ |
| हम | उत्तम, बहु | जाते हैं / जाती हैं (समूह स्त्री हो तो जाती हैं) |
| तू | मध्यम, एक | जाता है / जाती है |
| तुम | मध्यम | जाते हो / जाती हो |
| आप | मध्यम, आदर = बहु क्रिया | जाते हैं / जाती हैं |
| वह लड़का | अन्य, पुल्लिंग, एक | जाता है |
| वह लड़की | अन्य, स्त्रीलिंग, एक | जाती है |
| वे लड़के | अन्य, पुल्लिंग, बहु | जाते हैं |
| वे लड़कियाँ | अन्य, स्त्रीलिंग, बहु | जाती हैं |
ने+भूतकाल में कभी कर्ता अलग, कर्म से मेल (मैंने रोटी खाई) — वह कर्म-वाच्य / ने-रचना अगले पृष्ठों का है। यहाँ बिना «ने» के कर्ता-मेल रटो।
प्रश्न 1–10
पानी का लिंग?
- स्त्रीलिंग — ईकारांत नदी जैसा
- पुल्लिंग — ईकारांत अपवाद
- नपुंसकलिंग — संस्कृत जैसा हिंदी में भी
- लिंग नहीं, अव्यय
हल
- अपवाद
पानी, घी, दही, मोती, जी पुल्लिंग ईकारांत। हिंदी में नपुंसक लिंग नहीं। ठंडा पानी, पानी गिरा।
लड़का का बहुवचन?
- लड़काएँ
- लड़के
- लड़कियाँ
- लड़का (नित्य एकवचन)
हल
- पुल्लिंग आ
आ→ए = लड़के। एँ स्त्रीलिंग आ (लताएँ) पर। लड़कियाँ स्त्री लड़की से।
लता का बहुवचन?
- लते — आ→ए
- लताएँ — स्त्रीलिंग आ→एँ
- लतियाँ
- लता नित्य एक
हल
- स्त्रीलिंग आकारांत
कथाएँ, मालाएँ, लताएँ। ए वाला नियम लड़का/कमरा पर।
मैं जाती हूँ — पुरुष और लिंग?
- उत्तम पुरुष, स्त्रीलिंग, एकवचन
- मध्यम पुरुष, स्त्रीलिंग
- उत्तम पुल्लिंग — पुरुष शब्द से
- अन्य पुरुष
हल
- मैं = उत्तम
जाती = स्त्रीलिंग। हूँ = एकवचन। पुरुष ≠ पुल्लिंग। वह जाती है = अन्य।
एक व्यक्ति: «आप … स्कूल …।» सही क्रिया?
- आप जाता है
- आप जाते हो
- आप जाते हैं
- आप जाऊँ
हल
- आदर = बहु क्रिया
आप के साथ हैं/जाते हैं। हो तुम पर। है तू/वह पर। स्त्री आदर: आप जाती हैं।
हाथी का स्त्रीलिंग?
- हाथीई
- हथिनी
- हथानी
- गज स्त्री समास
हल
- इनी
हाथी→हथिनी। आनी सेठानी पर। समास गजानन अलग पृष्ठ।
कवि का स्त्रीलिंग?
- कवी — दीर्घ
- कविनी
- कवयित्री
- कविता — वही शब्द
हल
- भिन्न शब्द
कवयित्री। कविता रचना है, स्त्री-रूप नहीं। कवी संधि/दीर्घ जाल।
प्राण वचन?
- नित्य एकवचन — प्राण जाता है
- नित्य बहुवचन — प्राण चले गए
- आकारांत पुल्लिंग प्राणे
- स्त्रीलिंग प्राणें
हल
- नित्य बहु
एक आदमी के प्राण भी बहुवचन ठप्पा। आँसू, लोग, होश साथ रटो।
सही मेल?
- अच्छा लड़कियाँ
- अच्छे लड़की
- अच्छी लड़कियाँ
- अच्छी लड़के
हल
- स्त्रीलिंग बहु
अच्छी + लड़कियाँ। अच्छे पुल्लिंग बहु (लड़के)। अच्छा पुल्लिंग एक।
«वह लड़की स्कूल जाती है।» तीन ठप्पे?
- उत्तम, पुल्लिंग, बहु
- मध्यम, स्त्रीलिंग, एक
- अन्य पुरुष, स्त्रीलिंग, एकवचन
- अन्य, स्त्रीलिंग, नित्य बहु — जाती हैं
हल
- वह = अन्य
लड़की स्त्रीलिंग एक → जाती है। हैं तभी बहु या आप-आदर। मैं नहीं है इसलिए उत्तम नहीं।
अभ्यास
दही का लिंग?
- पुल्लिंग — ईकारांत अपवाद, दही खट्टा है
- स्त्रीलिंग — दही खट्टी है
- नपुंसक
- अव्यय
हल
- पानी-घी-दही-मोती-जी
एक माला पुल्लिंग ईकारांत।
नदी बहुवचन?
- नदे
- नदियाँ
- नदीएँ
- नदी (द्रव्य, नहीं बदलता)
हल
- ई→इयाँ
लड़कियाँ, नदियाँ, रोटियाँ। द्रव्य पानी है, नदी नहीं।
हम पुरुष–वचन?
- उत्तम पुरुष, बहुवचन
- मध्यम बहु
- अन्य एक
- उत्तम एक — मैं का रूप
हल
- बोलने वाले अनेक
मैं एक, हम बहु। दोनों उत्तम।
एक मित्र से: «तुम कहाँ … हो?»
- जाता है
- जाते हो / जाती हो
- जाते हैं
- जाता हूँ
हल
- तुम → हो
हैं आप पर। है तू/वह। हूँ मैं।
बालक का स्त्रीलिंग?
- बालकी
- बालिका
- बालकनी
- बाल
हल
- इका
बालक→बालिका, नायक→नायिका।
सोना और चाँदी?
- दोनों स्त्रीलिंग
- दोनों पुल्लिंग
- सोना पुल्लिंग, चाँदी स्त्रीलिंग
- सोना स्त्रीलिंग, चाँदी पुल्लिंग
हल
- द्रव्य रटो
पीला सोना, सफेद चाँदी। लोहा पुल्लिंग, राख स्त्री।
लोग?
- नित्य बहुवचन — लोग आए
- एकवचन लोग आया
- स्त्रीलिंग लोग आई
- आकारांत लोगे
हल
- हमेशा बहु
प्राण, आँसू, लोग एक माला।
पिता का स्त्रीलिंग जोड़ा?
- पित्री
- पिताई
- माता
- पितृत्व
हल
- भिन्न शब्द
पिता–माता, भाई–बहन। पितृत्व भाव पुल्लिंग, स्त्री-रूप नहीं।
किताब के साथ?
- मेरा किताब
- मेरे किताब
- मेरी किताब
- मैं किताब
हल
- पुस्तक/किताब स्त्रीलिंग
मेरी किताब, मेरी किताबें। मेरे पुल्लिंग बहु (मेरे घर)।
जनता की सही क्रिया?
- जनता चाहते हैं — नित्य बहु
- जनता चाहती है — स्त्रीलिंग एकवचन समूह
- जनता चाहता है — पुल्लिंग
- जनता चाहो
हल
- समूह-स्त्री एक
जनता, भीड़, सेना इकाई। लोग अलग — वे बहुवचन। जनता चाहती है।
