इस विषय में क्या आता है
परीक्षा पूछती है — पेड़ से पत्ता गिरा कौन कारक, कलम से लिखा वही «से» या अलग, गरीब को कंबल दिया में को कर्म है या संप्रदान, छात्र को बुलाया फिर कौन, राम का घर, हे भगवान, राम जाता है में ने नहीं तो कर्ता कैसे। एक ही चिह्न दो घरों में बैठता है — नाम चिह्न से नहीं, अर्थ और प्रश्न से पड़ता है।
यहाँ पढ़ना है
आठ कारक। परसर्ग और विभक्ति के तीन नाम। हर कारक का प्रश्न। से = करण या अपादान। को = कर्म या संप्रदान। शून्य विभक्ति। द्विकर्मक वाक्य। का/के/की। संबोधन। सर्वनाम के रूप (मैंने, मुझे)।
यहाँ नहीं घुसाना
राजपुत्र / वनवास के विग्रह-उपनाम — वे समास हैं, वाक्य के कारक नहीं। ने+खाई का लिंग-मेल — काल। कर्तृ–कर्म–भाव वाच्य = वाक्य-परिवर्तन। सकर्मक की पूरी सूची, विशेषण, सर्वनाम-भेद — क्रिया / विशेषण / सर्वनाम।
एक पंक्ति: कारक = संज्ञा/सर्वनाम का रिश्ता (प्रायः क्रिया से)। परसर्ग = ने, को, से, का, में, पर, हे। नाम रिश्ते का है, चिह्न का नहीं।
कारक क्या है
वाक्य में क्रिया अकेली नहीं चलती। कोई काम करता है, कोई चीज़ काम में आती है, कोई जगह आधार बनती है। संज्ञा या सर्वनाम का यह काम ही कारक है।
तीन शब्द परीक्षा में घूमते हैं — इन्हें एक बार गाँठ बाँध लो:
| नाम | क्या है | उदाहरण |
|---|---|---|
| कारक | रिश्ते का नाम — कर्ता, कर्म, करण… | राम = कर्ता कारक |
| परसर्ग | हिंदी का चिह्न, शब्द के बाद | ने, को, से, के लिए, का, में, पर, हे |
| विभक्ति | संस्कृत गिनती: प्रथमा से सप्तमी + संबोधन | ने वाली = प्रथमा, को वाली = द्वितीया |
अंग्रेज़ी में in/on/from शब्द से पहले आते हैं। हिंदी में चिह्न शब्द के बाद आता है — इसलिए परसर्ग। कमरे में, नहीं *में कमरे* (बोलचाल का उलटा काव्य छोड़ दो)।
सीता ने रसोई में चाकू से सब्जी काटी।सीता ने = कर्ता (किसने काटा)। रसोई में = अधिकरण (कहाँ)। चाकू से = करण (किस साधन से)। सब्जी = कर्म (क्या काटी, चिह्न शून्य)। काटी = क्रिया — क्रिया कारक नहीं होती।
कुछ पुस्तकें कर्ता और कर्म को मुख्य, बाकी को गौण कहती हैं। संबोधन को कई आचार्य कारक ही नहीं मानते — कक्षा-10 की कुंजी में आठों गिने जाते हैं, परीक्षा आठ पूछती है।
आठ कारक — एक नज़र
| कारक | प्रश्न | परसर्ग | विभक्ति | छोटा उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| कर्ता | किसने / कौन | ने · शून्य · (कर्मवाच्य) से/के द्वारा | प्रथमा | राम ने खाया। राम जाता है। |
| कर्म | किसे / क्या / किसको | को · शून्य | द्वितीया | रोटी खाई। बच्चे को बुलाया। |
| करण | किससे / किसके द्वारा (साधन) | से · द्वारा | तृतीया | कलम से लिखा। आँखों से देखा। |
| संप्रदान | किसे / किसके लिए (पाने वाला) | को · के लिए · के वास्ते | चतुर्थी | गरीब को दान। माँ के लिए फल। |
| अपादान | किससे (अलग / डर / तुलना / जन्म) | से | पंचमी | पेड़ से पत्ता गिरा। साँप से डर। |
| संबंध | किसका / के / की | का, के, की · रा, रे, री · ना, ने, नी | षष्ठी | राम का घर। मेरी किताब। |
| अधिकरण | कहाँ / किसमें / किसपर / कब | में · पर · तक | सप्तमी | कमरे में। छत पर। रात में। |
| संबोधन | किसे पुकारा | हे, अरे, रे, ओ · कभी शून्य + ! | संबोधन | हे राम! अरे भाई! |
रटने की कुंजी: ने कर्ता। को कर्म या संप्रदान। से करण या अपादान। का संबंध। में/पर अधिकरण। हे संबोधन। जाल सिर्फ़ से और को पर है।
कर्ता कारक
कर्ता = काम करने वाला। प्रश्न: किसने? कौन?
- ने — सकर्मक क्रिया, काम पूरा (प्रायः भूत):
राम ने रोटी खाई। - शून्य — वर्तमान/भविष्य, या अकर्मक भूत:
राम जाता है।राम सोया।चिह्न नहीं, कारक फिर भी कर्ता। - से / के द्वारा — कर्मवाच्य में कर्ता:
राम के द्वारा पत्र लिखा गया।
खाई स्त्री इसलिए नहीं कि राम स्त्री है। जाना, आना, होना पर ने सामान्यतः नहीं: राम गया, नहीं *राम ने गया। अकर्मक पर ने नहीं: बच्चा रोया।
कर्मवाच्य की पूरी तीन वाच्य — अपने पृष्ठ पर। यहाँ एक गाँठ: के द्वारा अगर करने वाला बताए तो कर्ता; अगर साधन बताए तो करण। राम के द्वारा पत्र लिखा गया = कर्ता। कलम से पत्र लिखा गया = करण।
कर्म कारक
कर्म = जिस पर क्रिया का सीधा फल पड़े। प्रश्न: किसे? क्या? किसको?
- को — प्रायः प्राणी या खास चीज़:
अध्यापक ने छात्र को बुलाया।उस किताब को लाओ। - शून्य — सामान्य निर्जीव:
राम ने रोटी खाई।मैंने पत्र लिखा।रोटी/पत्र पर को नहीं, कर्म हैं।
बुलाओ, देखो, पढ़ो, खाओ — ये क्रियाएँ एक चीज़ माँगती हैं। वह चीज़ कर्म है। को देखकर संप्रदान मत लिख बैठना; पहले पूछो — दिया किसको, या बुलाया किसे।
द्विकर्मक — दो चीज़ें
देना, भेजना, सौंपना, सिखाना, लिखना (किसी को पत्र) — वाक्य में दो संज्ञाएँ क्रिया से चिपकती हैं।
| वाक्य | चीज़ (क्या) | व्यक्ति (किसे पाने वाला) |
|---|---|---|
| मैंने मोहन को किताब दी। | किताब = कर्म | मोहन को = संप्रदान |
| गुरु ने शिष्य को पाठ पढ़ाया। | पाठ = कर्म | शिष्य को = संप्रदान |
| उसने मुझे पत्र लिखा। | पत्र = कर्म | मुझे = संप्रदान |
कुछ कुंजियाँ दोनों को कर्म कह देती हैं — प्रधान कर्म (चीज़) और गौण कर्म (व्यक्ति)। कक्षा-10 में विकल्प «संप्रदान» हो तो व्यक्ति वाले को को संप्रदान दो; «गौण कर्म» हो तो वही व्यक्ति। एक साथ दोनों विकल्प हों तो पुस्तक की भाषा देखो — यहाँ व्यक्ति = संप्रदान, चीज़ = कर्म।
करण कारक
करण = साधन, औज़ार, जिससे काम किया गया। प्रश्न: किससे? किसके द्वारा? — अर्थ होना चाहिए औज़ार / उपाय, अलग होना नहीं।
- कलम से पत्र लिखा। कैंची से कपड़ा काटा।
- आँखों से देखा। कानों से सुना। पैरों से चला। (अंग = साधन)
- मेहनत से सफल हुआ। बुद्धि से काम लिया।
- बाण से मारा। गाड़ी से गया (सवारी साधन)।
चिह्न: से, के द्वारा (साधन)। मित्र के साथ गया कुछ पुस्तकें सह-करण लिखती हैं — विकल्प में करण हो तो चल सकता है; «अधिकरण» मत लिखना।
संप्रदान कारक
संप्रदान = जिसे कुछ दिया / भेजा / समर्पित जाए, या जिसके लिए काम हो। प्रश्न: किसे? किसके लिए?
को— गरीब को कंबल दिया। गुरु को दंडवत की। भिक्षुक को रोटी दो।के लिए / के वास्ते / के हित— माता के लिए फल लाया। देश के लिए मरा।
कसौटी: क्रिया के साथ «देना-भेजना-सौंपना-समर्पण-लाभ» की गंध हो, और वह व्यक्ति पाने वाला हो — संप्रदान। सिर्फ़ पुकारना/देखना हो तो कर्म।
को दो घर। परीक्षा «के लिए» लिखे तो सोचना बंद — संप्रदान। अपादान कारक
अपादान = जिससे अलग हुआ, या जो डर/घृणा/तुलना/जन्म का स्रोत है। चिह्न वही से, अर्थ करण से उलटा। प्रश्न: किससे अलग?
| उप-अर्थ | उदाहरण |
|---|---|
| अलग होना, गिरना, निकलना | पेड़ से पत्ता गिरा। छत से ईंट गिरी। घोड़ा गाड़ी से छूटा। |
| उत्पत्ति / निकास | गंगा हिमालय से निकलती है। दूध गाय से मिलता है। |
| भय, रक्षा, घृणा | बच्चा साँप से डरता है। चोर पुलिस से भागा। झूठ से घृणा करो। |
| तुलना | मोहन राम से लंबा है। यह आम उस आम से मीठा है। |
| दूर / रहित भाव | वह घर से दूर है। अभिमान से बचो। |
के बिना अभाव — कई कुंजी अपादान के पास रखती हैं: राम के बिना कार्य न हुआ। विकल्प में अपादान हो तो वही।
संबंध कारक
संबंध = एक संज्ञा/सर्वनाम का दूसरी संज्ञा से नाता — मालिक, हिस्सा, रिश्ता। प्रश्न: किसका / किसके / किसकी?
यह क्रिया से सीधा नहीं चिपकता, दो नामों को जोड़ता है। कुछ वैयाकरण इसे कारक नहीं कहते। कक्षा-10 की सूची में आठ में गिनते हैं।
का, के, की— राम का घर, राम के घोड़े, राम की किताब, लड़कों की टोपीरा, रे, री— मेरा, तेरा, हमारा; मेरे, तेरे; मेरी, तेरीना, ने, नी— अपना, अपने, अपनी
चिह्न बाद वाली संज्ञा के लिंग–वचन से बैठता है, मालिक से नहीं: सीता का भाई (भाई पुल्लिंग), सीता की साड़ी, राम की माँ, लड़की के खिलौने। पूरा मेल-नियम लिंग–वचन पर है; यहाँ पहचान: का/के/की दिखे तो संबंध कारक।
राजपुत्र = राजा का पुत्र — यह संबंध तत्पुरुष है, एक शब्द। वाक्य राजा का पुत्र आया में «राजा का» संबंध कारक है। प्रश्न «कारक बताओ» हो तो कारक; «समास बताओ» हो तो समास। अधिकरण कारक
अधिकरण = आधार — जगह या समय, जिसमें/जिस पर काम टिका। प्रश्न: कहाँ? किसमें? किस पर? कब?
| चिह्न | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| में | अंदर, बीच, समय के अंदर | कमरे में बैठा। गिलास में पानी। रात में तारे। मन में सोच। |
| पर | सतह, ऊपर, विषय | छत पर खेल। मेज पर किताब। इस बात पर ध्यान। |
| तक | सीमा | स्टेशन तक गया। रात तक पढ़ा। |
में vs पर: चीज़ अंदर हो तो में (कमरा, गिलास, वर्ष)। चीज़ ऊपर/सतह हो तो पर (छत, मेज, सिर)। किताब मेज पर है सही; *मेज में* तभी जब दराज के अंदर हो।
समय भी अधिकरण: सोमवार को, छुट्टियों में, रात को। यहाँ को कर्म नहीं — दिन/समय का आधार है। विकल्प में अधिकरण हो तो वही; «संप्रदान» मत।
यहाँ, वहाँ, शीघ्र, धीरे कारक नहीं — ये क्रिया-विशेषण हैं। घर में संज्ञा+परसर्ग = अधिकरण। भीतर अकेला = क्रिया-विशेषण। संबोधन कारक
संबोधन = पुकार, हाँक। क्रिया से परसर्ग-रिश्ता नहीं; किसी को आवाज़ दी गई है।
- चिह्न: हे, अरे, रे, ओ, ऐ —
हे प्रभु! रक्षा करो।अरे राम! इधर आ। - कभी चिह्न शून्य, केवल पुकार + विस्मयादिबोधक:
मित्र! सुनो।माता जी!
संबोधित शब्द वाक्य का कर्ता तभी है जब वही काम भी करे और पुकार अलग न हो। हे राम! तुम दया करो — राम संबोधन; तुम कर्ता। हे भगवान को कर्ता मत लिखना सिर्फ़ इसलिए कि भगवान बड़े हैं।
जाल 1 — «से» दो घर
सबसे ज़्यादा कटते हैं यहीं। एक ही अक्षर, दो कारक। प्रश्न बदलो, नाम बदल जाएगा।
| वाक्य | से का अर्थ | कारक |
|---|---|---|
| राम ने कलम से पत्र लिखा। | साधन, औज़ार | करण |
| मैंने आँखों से देखा। | अंग = साधन | करण |
| पेड़ से पत्ता गिरा। | अलग होना | अपादान |
| गंगा हिमालय से निकलती है। | जन्म/निकास | अपादान |
| बच्चा साँप से डरता है। | भय का स्रोत | अपादान |
| मोहन राम से लंबा है। | तुलना | अपादान |
| पत्र राम के द्वारा लिखा गया। | करने वाला (वाच्य) | कर्ता |
तीन सवाल: औज़ार है? → करण। अलग/डर/तुलना/जन्म? → अपादान। करने वाला कर्मवाच्य में? → कर्ता। «से» देखकर हमेशा करण मत लिखो।
«चाकू से काटा» और «पेड़ से गिरा» — एक से, दो नाम?
हल
- चाकू
औज़ार, बिना चाकू काट नहीं सकते → करण।
- पेड़
पत्ता पेड़ से अलग हुआ, पेड़ औज़ार नहीं → अपादान।
जाल 2 — «को» दो घर (+ कभी समय)
| वाक्य | प्रश्न | कारक |
|---|---|---|
| अध्यापक ने छात्र को बुलाया। | किसे बुलाया? | कर्म — एक ही लक्ष्य |
| मैंने गरीब को कंबल दिया। | किसे दिया? क्या दिया? | गरीब = संप्रदान, कंबल = कर्म |
| माँ ने बेटे के लिए मिठाई लाई। | किसके लिए? | संप्रदान (के लिए) |
| सोमवार को छुट्टी है। | कब? | अधिकरण (समय) |
को की कुंजी: एक ही संज्ञा पर क्रिया टूटे (बुलाया, देखा, पीटा) → कर्म। दो चीज़ें हों — व्यक्ति + वस्तु, और वस्तु दी/भेजी जाए → व्यक्ति संप्रदान। के लिए → संप्रदान। दिन/तारीख + को → अधिकरण।
«छात्र को बुलाया» vs «गरीब को दिया» — दोनों को?
हल
- बुलाया
क्या दिया? कुछ नहीं। किसे हाँका? छात्र। एक कर्म।
- दिया
क्या दिया? कंबल = कर्म। किसे लाभ? गरीब = संप्रदान।
शून्य परसर्ग — चिह्न गिरा, कारक बचा
हिंदी अक्सर चिह्न खा जाती है। नाम तब भी पूछा जाता है।
| वाक्य | छिपा कारक | क्यों शून्य |
|---|---|---|
| राम जाता है। | राम = कर्ता | ने वर्तमान में नहीं |
| राम सोया। | राम = कर्ता | अकर्मक, ने नहीं |
| राम ने रोटी खाई। | रोटी = कर्म | निर्जीव सामान्य कर्म, को नहीं |
| मित्र! इधर आओ। | मित्र = संबोधन | हे गिरा, पुकार बाकी |
परसर्ग के पहले वचन ओं: लड़कों ने, कमरों में, रास्तों पर — रूप वचन वाला है; कारक परसर्ग से पढ़ो (ने = कर्ता, में = अधिकरण)।
सर्वनाम के कारक-रूप
सर्वनाम परसर्ग से चिपककर रूप बदल देते हैं। परीक्षा «मुझे कौन कारक» भी पूछ लेती है।
| कारक | मैं | तू | वह | हम / वे |
|---|---|---|---|---|
| कर्ता (ने) | मैंने | तूने | उसने | हमने / उन्होंने |
| कर्म / संप्रदान (को) | मुझे, मुझको | तुझे, तुझको | उसे, उसको | हमें / उन्हें |
| करण / अपादान (से) | मुझसे | तुझसे | उससे | हमसे / उनसे |
| संप्रदान (के लिए) | मेरे लिए | तेरे लिए | उसके लिए | हमारे / उनके लिए |
| संबंध | मेरा, मेरे, मेरी | तेरा… | उसका… | हमारा / उनका |
| अधिकरण | मुझमें, मुझ पर | तुझमें | उसमें, उस पर | हम में / उन पर |
आप आदर: आपने, आपको, आपसे, आपके लिए, आपका, आपमें। यह/जो/कोई इसी साँचे पर: इसने, जिसे, किसी से।
मुझे/उसे अकेले कारक नहीं बताते — वाक्य देखो। मुझे बुलाओ = कर्म। मुझे किताब दो = संप्रदान। वही रूप, दो घर — फिर को वाली कुंजी।
परीक्षा में पहचान — चार कदम
- पद काटो — संज्ञा/सर्वनाम + उसके परसर्ग तक एक टुकड़ा।
- चिह्न पढ़ो — ने कर्ता। का/के/की संबंध। में/पर/तक अधिकरण। हे/अरे संबोधन। से और को पर रुकना।
- प्रश्न लगाओ — किसने, किसे, किससे (साधन या अलग), किसके लिए, कहाँ, किसका।
- शून्य हो तो क्रिया से पूछो — कौन करता है = कर्ता। क्या/किसे सहता है = कर्म।
«हे माँ! सीता ने रसोई में चाकू से सब्जी काटी।» छह टुकड़े?
हल
- हे माँ
पुकार → संबोधन।
- सीता ने
किसने काटा → कर्ता।
- रसोई में
कहाँ → अधिकरण।
- चाकू से
साधन → करण। (पेड़ से होता तो अपादान।)
- सब्जी
क्या काटी, को नहीं → कर्म, शून्य।
- काटी
क्रिया — कारक नहीं।
प्रश्न 1–10
«पेड़ से पत्ता गिरा।» «पेड़ से» कौन कारक?
- करण — से हमेशा साधन
- अपादान — अलग होना
- संप्रदान
- अधिकरण
हल
- से का अर्थ
पत्ता पेड़ से अलग हुआ। पेड़ औज़ार नहीं। अपादान। करण होता «पेड़ से लकड़ी काटी» (साधन) — वह वाक्य यहाँ नहीं।
«राम ने कलम से पत्र लिखा।» कलम से?
- कर्ता
- कर्म
- करण
- अपादान
हल
- साधन
किससे लिखा? कलम औज़ार। राम ने = कर्ता। पत्र = कर्म। कलम से = करण।
«मैंने गरीब को कंबल दिया।» गरीब को?
- कर्म — को दिख रहा है
- संप्रदान — पाने वाला
- कर्ता
- अधिकरण
हल
- दो चीज़ें
क्या दिया? कंबल = कर्म। किसे लाभ? गरीब = संप्रदान। को अकेला कर्म नहीं बनाता।
«अध्यापक ने छात्र को बुलाया।» छात्र को?
- संप्रदान — को = देने वाला
- कर्म — किसे बुलाया, एक लक्ष्य
- करण
- संबंध
हल
- दिया कुछ नहीं
बुलाया किसे? छात्र। संप्रदान तब जब वस्तु भी हो (किताब दी)। यहाँ कर्म।
«यह सीता का घर है।» «का» वाला संबंध?
- कर्ता कारक
- संबंध कारक
- अधिकरण
- संबोधन
हल
- किसका घर
का/के/की = संबंध। सीता कर्ता नहीं — «है» की क्रिया घर पर, सीता मालिक।
«बच्चे छत पर खेलते हैं।» छत पर?
- करण
- अपादान
- अधिकरण
- संप्रदान
हल
- कहाँ
पर = सतह का आधार। अधिकरण। छत से कूदते तो अपादान।
«हे भगवान! रक्षा करो।» भगवान?
- कर्ता — ने गिरा है
- संबोधन
- कर्म
- संबंध
हल
- हे + पुकार
संबोधन। कर्ता छिपा «तुम» आज्ञा में। भगवान को हे ने पुकारा है, ने नहीं लगाया।
«राम जाता है।» राम का कारक और चिह्न?
- कर्ता, ने छिपा हुआ मानो लिख दो
- कर्ता, शून्य विभक्ति
- कर्म, को
- अधिकरण
हल
- कौन जाता है
राम कर्ता। वर्तमान — ने नहीं लगता। चिह्न शून्य, कारक बचा। ने लिखना भूल है।
«मोहन राम से लंबा है।» राम से?
- करण — से
- अपादान — तुलना
- संप्रदान
- कर्म
हल
- औज़ार नहीं
राम से नापकर लंबाई बताई — तुलना। अपादान। करण तभी जब राम साधन हो।
«गंगा हिमालय से निकलती है।» हिमालय से?
- करण
- अधिकरण — पहाड़ पर
- अपादान — उत्पत्ति
- संबंध
हल
- जहाँ से निकली
स्रोत से अलग होना = अपादान। हिमालय में निकलती तो अधिकरण होता। से + जन्म/निकास = अपादान।
अभ्यास
ये दस अलग कोण हैं — ऊपर वाले दस की नकल नहीं।
«माँ ने बेटे के लिए मिठाई लाई।» बेटे के लिए?
- कर्म
- संप्रदान
- अपादान
- करण
हल
- के लिए
हमेशा संप्रदान। मिठाई कर्म (शून्य)। माँ ने कर्ता।
«चोर पुलिस से डरता है।» पुलिस से?
- करण
- अपादान
- संप्रदान
- अधिकरण
हल
- भय का स्रोत
डरना + से = अपादान। पुलिस औज़ार नहीं जिससे डर «किया» जाए।
«मैंने आँखों से देखा।» आँखों से?
- अपादान — अंग से अलग
- करण — साधन
- अधिकरण
- कर्म
हल
- किससे देखा
आँख औज़ार। करण। गिरना/निकलना नहीं है।
«किताब मेज पर है।» मेज पर?
- में होना चाहिए, वाक्य गलत
- अधिकरण
- करण
- संबंध
हल
- सतह
पर = ऊपर का आधार। अधिकरण। में तब जब दराज के अंदर हो।
«उसने मुझे पत्र लिखा।» मुझे?
- कर्म — मुझे = मुझको
- संप्रदान — पत्र कर्म, मुझे पाने वाला
- कर्ता
- करण
हल
- द्विकर्मक
क्या लिखा? पत्र = कर्म। किसे? मुझे = संप्रदान। मुझे बुलाया होता तो कर्म।
वाक्य «राजा का पुत्र आया।» में «राजा का»?
- संबंध तत्पुरुष समास
- संबंध कारक
- कर्ता कारक
- कर्म कारक
हल
- दो शब्द, का बचा
राजपुत्र होता तो समास। यहाँ «राजा का» खुला परसर्ग = संबंध कारक। पुत्र आया = कर्ता पुत्र।
«राम के द्वारा पत्र लिखा गया।» राम के द्वारा?
- करण — हमेशा द्वारा = साधन
- कर्ता — कर्मवाच्य में करने वाला
- अपादान
- संप्रदान
हल
- कौन लिखने वाला
राम व्यक्ति है, कलम नहीं। कर्मवाच्य में कर्ता का चिह्न से/के द्वारा। कलम से लिखा गया = करण।
«रात में तारे चमकते हैं।» रात में?
- अधिकरण — समय का आधार
- करण
- अपादान
- संबंध
हल
- कब
में समय पर भी अधिकरण। करण साधन माँगता।
परसर्ग «से» सबसे पहले किन दो कारकों में बैठता है?
- करण और अपादान
- कर्ता और कर्म
- संबंध और संबोधन
- अधिकरण और संप्रदान
हल
- चिह्न-जाल
से = साधन (करण) या अलग/डर/तुलना (अपादान)। कर्ता का मुख्य चिह्न ने। कर्म/संप्रदान को। संबंध का। अधिकरण में/पर।
«तुम मुझे आम दो।» मुझे और आम?
- मुझे कर्म, आम संप्रदान
- मुझे संप्रदान, आम कर्म
- दोनों कर्म, संप्रदान इस वाक्य में नहीं
- दोनों करण
हल
- दो
क्या दो? आम = कर्म। किसे दो? मुझे = संप्रदान। उलटा मत करना।
