Noteclerical

काल, वाक्य और वाक्य-भेद

Lesson 47 of 113

इस विषय में क्या आता है

परीक्षा पूछती है — जा रहा है कौन-सा काल, गया था और गया है में फर्क, राम ने रोटी खाई में क्रिया किससे मिलती है, «यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती» कौन-सा भूत, वाक्य सरल है या मिश्र, प्रश्नवाचक कैसे पहचानें। तीन परतें हैं: समय (काल), पूरी बात (वाक्य), किस तरह की बात (भेद)।

यहाँ पढ़ना है

तीन काल और उनके भेद। रहा / चुका / है / था / गा / तो की कुंजी। ने+सकर्मक। उद्देश्य–विधेय। अर्थ के आठ भेद। रचना: सरल, संयुक्त, मिश्र। प्रधान और आश्रित उपवाक्य।

यहाँ नहीं घुसाना

लड़के–लताएँ, मैं–तुम–आप — लिंग–वचन–पुरुष। कर्ता–कर्म–करण पूरे नाम = कारक। कर्तृ–कर्म–भाव वाच्य = वाक्य-परिवर्तन। क्रिया–विशेषण–सर्वनाम — अपना पृष्ठ।

एक पंक्ति: काल = क्रिया का समय। वाक्य = उद्देश्य + विधेय से बनी पूरी बात। भेद दो कुंजियों से: क्या कहना है (अर्थ) और कितने उपवाक्य (रचना)।

काल क्या है

क्रिया जिस समय को छूती है वह काल है। हिंदी में तीन मुख्य काल। हर मुख्य के अंदर भेद हैं — सामान्य (आदत/तथ्य), अपूर्ण (चल रहा), पूर्ण (चुक गया), संदिग्ध (अनुमान), हेतुहेतुमद् (शर्त)।

कालसमयसहायक की गंध
वर्तमानअभी / आदत / अभी चुकनाहै, हैं, रहा है, चुका है, ता होगा
भूतबीत चुकागया, था, रहा था, गया है, गया होगा, जाता तो
भविष्यआने वालागा/गी/गे, रहा होगा, चुका होगा, यदि…तो जाएगा

रूप कर्ता के लिंग–वचन–पुरुष से बदलते हैं — वह कुंजी पिछले पृष्ठ की है। यहाँ नाम और पहचान-शब्द रटो।

वर्तमान काल — चार भेद

भेदकामपहचानउदाहरण
सामान्य वर्तमानआदत, नियम, सत्यता/ती/ते + है/हूँ/हो/हैंसूर्य पूर्व से उगता है। मैं पढ़ता हूँ। वे जाते हैं।
अपूर्ण वर्तमानकाम अभी चल रहारहा/रही/रहे + है…राम पढ़ रहा है। लड़कियाँ गा रही हैं। मैं लिख रहा हूँ।
पूर्ण वर्तमानअभी पूरा, फल अभीचुका/चुकी/चुके · लिया/लीवह खा चुका है। मैं पढ़ चुकी हूँ। उसने काम कर लिया है।
संदिग्ध वर्तमानअनुमान — शायद अभी करता होगाता/ती/ते + होगा/होगी/होंगेवह इस समय पढ़ता होगा। वे बाजार जाते होंगे।
है अकेला काल नहीं बताता। जाता है सामान्य वर्तमान, जा रहा है अपूर्ण, जा चुका है पूर्ण, गया है आसन्न भूत (नीचे)। सहायक है तीन घरों में बैठता है — उसके पहले का रूप देखो: ता / रहा / चुका / भूत-कृदंत (गया)।

भूतकाल — छह भेद

भेदकामपहचानउदाहरण
सामान्य भूतबीती घटना, बिना «है/था»गया, आई, खाया, लिखेराम घर गया। सीता आई। उन्होंने पत्र लिखा।
आसन्न भूतअभी-अभी पूरा, असर पासभूत-रूप + है/हैंवह गया है। मेहमान आए हैं। मैंने खाया है।
पूर्ण भूतपहले पूरा, उस समय की बातथा/थी/थे/थीं + भूत-रूपवह गया था। बारिश हुई थी। वे सोए थे।
अपूर्ण भूतउस समय चल रहा थारहा/रही/रहे + था…राम पढ़ रहा था। हम खेल रहे थे।
संदिग्ध भूतअनुमान — शायद हुआगया होगा, किया होगावह कल गया होगा। उन्होंने खाया होगा।
हेतुहेतुमद् भूतशर्त जो पूरी न हुईयदि/जो…तो + ता / होतायदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती। वह आता तो मैं मिलता।
गया है ≠ गया था ≠ जा चुका है। गया है = आसन्न भूत (अभी गया, अभी तक संदर्भ)। गया था = पूर्ण भूत (उस दिन गया)। जा चुका है = पूर्ण वर्तमान (काम खत्म, चुका शब्द)। कुछ पुस्तकें «गया है» को पूर्ण वर्तमान लिख देती हैं — विकल्प में चुका हो तो पूर्ण वर्तमान उसे दो; गया है vs गया था हो तो आसन्न vs पूर्ण भूत।
उदाहरण

वह गया है / वह गया था / वह जा चुका है — तीन नाम?

हल

  1. गया है

    भूत-रूप + है → आसन्न भूत।

  2. गया था

    था → पूर्ण भूत।

  3. जा चुका है

    चुका → पूर्ण वर्तमान।

उत्तरआसन्न भूत, पूर्ण भूत, पूर्ण वर्तमान

भविष्यकाल

भेदकामपहचानउदाहरण
सामान्य भविष्यआगे होगागा/गी/गे,ऊँगा/एगामैं जाऊँगा। वह आएगी। वे पढ़ेंगे।
संभाव्य / संदिग्ध भविष्यशायद होगाशायद + गा · ता होगा (आगे की आशंका)शायद कल वर्षा होगी। वह आ जाता होगा (संदर्भ भविष्य हो तो)।
हेतुहेतुमद् भविष्यशर्त आगे कीयदि…तो + गायदि वह आएगा तो मैं मिलूँगा। मेहनत करोगे तो सफल होगे।

कुछ पुस्तकें और दो नाम जोड़ती हैं — परीक्षा में दिखें तो:

  • अपूर्ण भविष्य — उस समय चल रहा होगा: वह पढ़ रहा होगा (कल दस बजे)। रहा + होगा।
  • पूर्ण भविष्य — तब तक चुक जाएगा: कल तक वह जा चुका होगा। चुका + होगा।
ता होगा दो काल छू सकता है। «इस समय पढ़ता होगा» = संदिग्ध वर्तमान (अभी का अनुमान)। «कल जाता होगा» = संभाव्य भविष्य। समय-शब्द (इस समय / कल) से फैसला करो।

काल पहचान — एक पेड़

  1. रहा/रही/रहे है? + है → अपूर्ण वर्तमान। + था → अपूर्ण भूत। + होगा → अपूर्ण भविष्य।
  2. चुका/लिया है? + है → पूर्ण वर्तमान। + था → (कम) पूर्णता भूत में। + होगा → पूर्ण भविष्य।
  3. था/थी/थे बिना रहा? → पूर्ण भूत।
  4. भूत-रूप (गया, खाया) + है → आसन्न भूत। बिना है/था → सामान्य भूत। + होगा → संदिग्ध भूत।
  5. ता/ती/ते + है → सामान्य वर्तमान। + होगा → संदिग्ध वर्तमान (या भविष्य, समय देखो)।
  6. गा/गी/गे → सामान्य भविष्य।
  7. यदि/तो/होता भूत रूप → हेतुहेतुमद् भूत। यदि…तो + गा → हेतुहेतुमद् भविष्य।

ने-रचना — भूत में सकर्मक

लिंग वाले पृष्ठ ने वादा किया था: मैंने रोटी खाई में क्रिया कर्ता से नहीं, कर्म से मिलती है। यह यहीं पूरा होता है। वाच्य का नाम (कर्मवाच्य) अगले परिवर्तन-पृष्ठ पर; यहाँ केवल रूप।

सूत्र: सकर्मक क्रिया + काम पूरा (प्रायः भूत/पूर्ण) → कर्ता के बाद ने। क्रिया का लिंग–वचन = कर्म का। कर्ता का लिंग क्रिया पर नहीं चढ़ता।

वाक्यकर्ताकर्मक्रिया किससे
राम ने रोटी खाईराम (पुल्लिंग)रोटी (स्त्रीलिंग एक)खाई — कर्म स्त्री
सीता ने आम खायासीता (स्त्री)आम (पुल्लिंग एक)खाया — कर्म पुल्लिंग
उन्होंने किताबें पढ़ींवेकिताबें (स्त्री बहु)पढ़ीं — कर्म बहु स्त्री
मैंने पत्र लिखामैंपत्र (पुल्लिंग)लिखा
  • अकर्मक (कर्म नहीं) — ने नहीं: राम सोया। बच्चा रोया। वह गया।
  • वर्तमान आदत में ने नहीं: राम रोटी खाता है (कर्ता से मेल — खाता)।
  • कुछ क्रियाएँ ने लेती ही नहीं या वैकल्पिक: जाना, आना, होना — राम गया, नहीं *राम ने गया।
खाई ≠ कर्ता स्त्री। राम ने रोटी खाई — राम पुरुष है। «आई» रोटी की वजह से है। प्रश्न «क्रिया का मेल किससे» हो तो कर्म बताओ, कर्ता मत।

वाक्य — उद्देश्य और विधेय

वाक्य = सार्थक शब्द-समूह जिससे बात पूरी निकले। एक क्रिया प्रायः होती है। «सुंदर फूल» वाक्य नहीं (क्रिया नहीं, बात अधूरी)। «फूल खिले हैं» वाक्य है।

अंगप्रश्नउदाहरण: पक्षी आकाश में उड़ते हैं
उद्देश्यकिसके बारे में कहा?पक्षी
विधेयउसके बारे में क्या कहा?आकाश में उड़ते हैं

उद्देश्य में कर्ता + उसके विशेषण। विधेय में क्रिया + कर्म + पूरक + क्रिया-विशेषण। कारक के नाम विधेय के अंदर छिपे रहते हैं — सूची कारक पर है।

न्यूनतम वाक्य: जाओ। (आज्ञा, कर्ता «तुम» छिपा)। वर्षा हुई।

वाक्य-भेद — अर्थ के आधार पर

बात का काम क्या है — बताना, मना करना, पूछना, आज्ञा, आश्चर्य, इच्छा, शर्त, संदेह। आठ नाम रटो; कुछ पुस्तकें पाँच रखती हैं (विधान, निषेध, प्रश्न, आज्ञा, विस्मय) — बाकी तीन उन्हीं की शाखाएँ।

भेदकामपहचानउदाहरण
विधानवाचकहाँ में कथनसीधी खबर, नहीं/क्या नहींराम विद्यालय जाता है।
निषेधवाचकनकारनहीं, न, मतराम नहीं जाता। इधर मत आना।
प्रश्नवाचकपूछनाक्या, कौन, कहाँ, ?क्या तुम आओगे? वह कहाँ है?
आज्ञावाचकआदेश / प्रार्थनाआओ, जाइए, कीजिए, चाहिएद्वार बंद करो। कृपया बैठिए।
विस्मयवाचकआश्चर्य / दुखकितना, क्या, ! वाह, आहकितना सुंदर दृश्य है! हाय राम!
इच्छावाचककामनाकाश, ईश्वर करे, चाहिए किईश्वर तुम्हारा भला करे। काश वर्षा हो।
संकेतवाचकशर्त / संकेतयदि, तो, जो…तोयदि परिश्रम करोगे तो सफल होगे।
संदेहवाचकअनिश्चयशायद, संभव है, होगा?शायद वह आ जाए। संभव है वर्षा हो।
प्रश्न और विस्मय दोनों «क्या/कितना»। अंत में प्रश्नचिह्न + जवाब चाहा = प्रश्नवाचक। विस्मयादिबोधक + भावना = विस्मयवाचक। क्या बात है! विस्मय। क्या बात है? प्रश्न।

आज्ञावाचक काल-तालिका में अलग काल नहीं — अर्थ का भेद है। «जाओ» वर्तमान/भविष्य का आदेश है, सामान्य वर्तमान «जाता है» नहीं।

वाक्य-भेद — रचना के आधार पर

कितने उपवाक्य (क्रिया वाले टुकड़े) हैं, और वे कैसे जुड़े हैं।

भेदरचनाजोड़उदाहरण
सरलएक उद्देश्य, एक विधेय — एक ही क्रिया—पक्षी उड़ते हैं। राम प्रतिदिन विद्यालय जाता है।
संयुक्तदो या अधिक समान सरल वाक्यऔर, तथा, या, अथवा, पर, किंतु, लेकिन, न…नराम गया और श्याम आया। मेहनत करो या पछताओ।
मिश्रएक प्रधान + एक या अधिक आश्रित उपवाक्यजो, कि, क्योंकि, यदि, ताकि, यद्यपि, जब, जहाँजो परिश्रम करता है वह सफल होता है। मैं जानता हूँ कि वह आएगा।

उपवाक्य — मिश्र के अंदर

  • प्रधान उपवाक्य — अकेला भी अर्थ दे: वह सफल होता है।
  • संज्ञा आश्रित — कि/जो बात: मैं जानता हूँ कि सूर्य गोल है। (कर्म जैसी संज्ञा)
  • विशेषण आश्रित — जो / जिसकी: जो लड़का प्रथम आया वह मेरा मित्र है। (लड़का कौन-सा)
  • क्रिया-विशेषण आश्रित — जब, जहाँ, क्योंकि, यदि: जब वर्षा हुई फसल हरी हो गई। (कब)
संयुक्त vs मिश्र: और/पर = दोनों बाजू स्वतंत्र = संयुक्त। जो/कि/क्योंकि = एक बाजू दूसरी पर टिकी = मिश्र। राम आया और श्याम गया संयुक्त। राम आया क्योंकि श्याम गया मिश्र।

गिनती: वाक्य में क्रियाएँ गिनो। एक क्रिया = सरल (आज्ञा «जाओ» भी सरल)। दो क्रियाएँ + और/या/पर = संयुक्त। दो क्रियाएँ + जो/कि/यदि = मिश्र।

उदाहरण

«यदि तुम चलोगे तो मैं भी चलूँगा।» अर्थ-भेद और रचना-भेद?

हल

  1. अर्थ

    यदि…तो = शर्त → संकेतवाचक। काल हेतुहेतुमद् भविष्य भी है — प्रश्न «वाक्य-भेद» माँगे तो संकेतवाचक / मिश्र दोनों संभव; रचना पूछे तो मिश्र।

  2. रचना

    दो क्रियाएँ (चलोगे, चलूँगा), एक आश्रित (यदि वाला) → मिश्र। और नहीं है इसलिए संयुक्त नहीं।

उत्तरसंकेतवाचक, मिश्र वाक्य

प्रश्न 1–10

प्र. 1

«राम पढ़ रहा है।» काल?

  1. सामान्य वर्तमान
  2. अपूर्ण वर्तमान
  3. पूर्ण वर्तमान
  4. अपूर्ण भूत

हल

  1. रहा + है

    काम चल रहा = अपूर्ण वर्तमान। ता+है सामान्य। चुका पूर्ण। रहा+था अपूर्ण भूत।

उत्तरB
प्र. 2

«वह गया है» और «वह गया था»?

  1. दोनों पूर्ण भूत
  2. गया है आसन्न भूत, गया था पूर्ण भूत
  3. दोनों पूर्ण वर्तमान
  4. गया है सामान्य भविष्य

हल

  1. है vs था

    भूत-रूप+है = आसन्न। था = पूर्ण भूत। चुका होता तो पूर्ण वर्तमान।

उत्तरB
प्र. 3

«यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।» काल?

  1. सामान्य भूत
  2. हेतुहेतुमद् भूत
  3. हेतुहेतुमद् भविष्य
  4. संदिग्ध वर्तमान

हल

  1. शर्त जो पूरी न हुई

    होती…होती = भूत की अधूरी शर्त। भविष्य होता «होगी तो…होगी / आएगा तो मिलूँगा»।

उत्तरB
प्र. 4

«राम ने रोटी खाई।» क्रिया का मेल?

  1. कर्ता राम (पुल्लिंग) से — खाना चाहिए था
  2. कर्म रोटी (स्त्रीलिंग) से — ने-रचना
  3. पुरुष उत्तम से
  4. अकर्मक क्रिया, ने गलत

हल

  1. सकर्मक + ने

    खाना सकर्मक, रोटी कर्म, खाई स्त्री एकवचन। राम पर ने है, क्रिया राम से नहीं मिलती।

उत्तरB
प्र. 5

«पक्षी उड़ते हैं।» रचना?

  1. संयुक्त — दो बातें
  2. मिश्र — जो छिपा है
  3. सरल — एक क्रिया
  4. प्रश्नवाचक

हल

  1. एक विधेय

    उड़ते हैं एक क्रिया। और/जो नहीं। प्रश्नवाचक अर्थ-भेद है, रचना नहीं।

उत्तरC
प्र. 6

«राम गया और श्याम आया।»?

  1. सरल
  2. संयुक्त
  3. मिश्र
  4. विस्मयवाचक

हल

  1. और

    दो स्वतंत्र वाक्य बराबर जुड़े = संयुक्त। क्योंकि/जो होता तो मिश्र।

उत्तरB
प्र. 7

«जो परिश्रम करता है वह सफल होता है।»?

  1. संयुक्त, विधानवाचक
  2. मिश्र (विशेषण आश्रित), विधानवाचक
  3. सरल
  4. प्रश्नवाचक मिश्र

हल

  1. जो…वह

    आश्रित विशेषण उपवाक्य (कौन सफल)। प्रधान: वह सफल होता है। कथन है, प्रश्न नहीं। और नहीं = संयुक्त नहीं।

उत्तरB
प्र. 8

«कितना सुंदर दृश्य है!»

  1. प्रश्नवाचक
  2. विस्मयवाचक
  3. आज्ञावाचक
  4. निषेधवाचक

हल

  1. !

    भावना, जवाब नहीं माँगा। प्रश्नचिह्न होता तो प्रश्नवाचक।

उत्तरB
प्र. 9

«वह खा चुका है।» काल?

  1. आसन्न भूत
  2. पूर्ण वर्तमान
  3. पूर्ण भूत
  4. सामान्य वर्तमान

हल

  1. चुका

    पूर्ण वर्तमान। गया है आसन्न। गया था पूर्ण भूत। खाता है सामान्य वर्तमान।

उत्तरB
प्र. 10

उद्देश्य–विधेय: «मेरा छोटा भाई प्रतिदिन विद्यालय जाता है।»

  1. उद्देश्य: जाता है · विधेय: मेरा छोटा भाई
  2. उद्देश्य: मेरा छोटा भाई · विधेय: प्रतिदिन विद्यालय जाता है
  3. उद्देश्य: विद्यालय · विधेय: भाई
  4. वाक्य अधूरा, अंग नहीं

हल

  1. किसके बारे में

    भाई (विशेषण मेरे-छोटा उद्देश्य में)। उसके बारे में: प्रतिदिन विद्यालय जाता है = विधेय।

उत्तरB

अभ्यास

12345 678910

अ. 1

«सूर्य पूर्व से उगता है।»

  1. अपूर्ण वर्तमान
  2. सामान्य वर्तमान
  3. पूर्ण वर्तमान
  4. सामान्य भविष्य

हल

  1. ता + है, आदत/नियम

    रहा नहीं, चुका नहीं।

उत्तरB
अ. 2

«राम पढ़ रहा था।»

  1. अपूर्ण वर्तमान
  2. अपूर्ण भूत
  3. पूर्ण भूत
  4. आसन्न भूत

हल

  1. रहा + था

    उस समय चल रहा था। रहा+है वर्तमान अपूर्ण।

उत्तरB
अ. 3

«मैं कल जाऊँगा।»

  1. सामान्य भविष्य
  2. हेतुहेतुमद् भविष्य
  3. संदिग्ध वर्तमान
  4. सामान्य भूत

हल

  1. ऊँगा

    गा/गी/गे सामान्य भविष्य। यदि…तो नहीं।

उत्तरA
अ. 4

सीता ने आम खाया — «खाया» क्यों?

  1. सीता पुल्लिंग है
  2. आम पुल्लिंग कर्म, ने-रचना
  3. आम स्त्रीलिंग
  4. अकर्मक

हल

  1. कर्म

    सीता स्त्री, आम पुल्लिंग → खाया। रोटी होती तो खाई।

उत्तरB
अ. 5

«क्या तुम आओगे?»

  1. विधानवाचक सरल
  2. प्रश्नवाचक
  3. विस्मयवाचक
  4. आज्ञावाचक

हल

  1. क्या + ?

    जवाब माँगा। विस्मय में ! होता।

उत्तरB
अ. 6

«द्वार बंद करो।»

  1. आज्ञावाचक, सरल
  2. विधानवाचक मिश्र
  3. इच्छावाचक
  4. संयुक्त

हल

  1. आदेश

    एक क्रिया = सरल। करो आज्ञा।

उत्तरA
अ. 7

«मैं जानता हूँ कि वह आएगा।» रचना?

  1. संयुक्त — कि = और
  2. मिश्र — «कि» संज्ञा आश्रित
  3. सरल
  4. केवल भविष्य काल, भेद नहीं

हल

  1. कि

    आश्रित उपवाक्य प्रधान «जानता हूँ» का कर्म। संयुक्त के और/पर यहाँ नहीं।

उत्तरB
अ. 8

«वह इस समय पढ़ता होगा।»

  1. सामान्य भविष्य
  2. संदिग्ध वर्तमान
  3. पूर्ण वर्तमान
  4. हेतुहेतुमद् भूत

हल

  1. इस समय + ता होगा

    अभी का अनुमान = संदिग्ध वर्तमान। कल होता तो भविष्य सोचते।

उत्तरB
अ. 9

«राम सोया।» ने क्यों नहीं?

  1. भूल है, राम ने सोया सही
  2. अकर्मक क्रिया — ने नहीं लगता
  3. पूर्ण वर्तमान है
  4. मिश्र वाक्य है

हल

  1. सोना अकर्मक

    कर्म नहीं, ने नहीं। गया/आया/सोया। खाया सकर्मक — ने।

उत्तरB
अ. 10

«यदि वह आएगा तो मैं मिलूँगा।»?

  1. हेतुहेतुमद् भविष्य + मिश्र + संकेतवाचक
  2. हेतुहेतुमद् भूत + संयुक्त
  3. सामान्य भविष्य + सरल
  4. केवल आज्ञावाचक

हल

  1. तीन परत

    गा+यदि तो = हेतुहेतुमद् भविष्य। यदि = आश्रित → मिश्र। अर्थ शर्त = संकेतवाचक। होता…होता भूत होता।

उत्तरA

← सूची · ← लिंग / वचन / पुरुष

अगला विषय: कारक।