इस विषय में क्या आता है
परीक्षा पूछती है — जा रहा है कौन-सा काल, गया था और गया है में फर्क, राम ने रोटी खाई में क्रिया किससे मिलती है, «यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती» कौन-सा भूत, वाक्य सरल है या मिश्र, प्रश्नवाचक कैसे पहचानें। तीन परतें हैं: समय (काल), पूरी बात (वाक्य), किस तरह की बात (भेद)।
यहाँ पढ़ना है
तीन काल और उनके भेद। रहा / चुका / है / था / गा / तो की कुंजी। ने+सकर्मक। उद्देश्य–विधेय। अर्थ के आठ भेद। रचना: सरल, संयुक्त, मिश्र। प्रधान और आश्रित उपवाक्य।
यहाँ नहीं घुसाना
लड़के–लताएँ, मैं–तुम–आप — लिंग–वचन–पुरुष। कर्ता–कर्म–करण पूरे नाम = कारक। कर्तृ–कर्म–भाव वाच्य = वाक्य-परिवर्तन। क्रिया–विशेषण–सर्वनाम — अपना पृष्ठ।
एक पंक्ति: काल = क्रिया का समय। वाक्य = उद्देश्य + विधेय से बनी पूरी बात। भेद दो कुंजियों से: क्या कहना है (अर्थ) और कितने उपवाक्य (रचना)।
काल क्या है
क्रिया जिस समय को छूती है वह काल है। हिंदी में तीन मुख्य काल। हर मुख्य के अंदर भेद हैं — सामान्य (आदत/तथ्य), अपूर्ण (चल रहा), पूर्ण (चुक गया), संदिग्ध (अनुमान), हेतुहेतुमद् (शर्त)।
| काल | समय | सहायक की गंध |
|---|---|---|
| वर्तमान | अभी / आदत / अभी चुकना | है, हैं, रहा है, चुका है, ता होगा |
| भूत | बीत चुका | गया, था, रहा था, गया है, गया होगा, जाता तो |
| भविष्य | आने वाला | गा/गी/गे, रहा होगा, चुका होगा, यदि…तो जाएगा |
रूप कर्ता के लिंग–वचन–पुरुष से बदलते हैं — वह कुंजी पिछले पृष्ठ की है। यहाँ नाम और पहचान-शब्द रटो।
वर्तमान काल — चार भेद
| भेद | काम | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| सामान्य वर्तमान | आदत, नियम, सत्य | ता/ती/ते + है/हूँ/हो/हैं | सूर्य पूर्व से उगता है। मैं पढ़ता हूँ। वे जाते हैं। |
| अपूर्ण वर्तमान | काम अभी चल रहा | रहा/रही/रहे + है… | राम पढ़ रहा है। लड़कियाँ गा रही हैं। मैं लिख रहा हूँ। |
| पूर्ण वर्तमान | अभी पूरा, फल अभी | चुका/चुकी/चुके · लिया/ली | वह खा चुका है। मैं पढ़ चुकी हूँ। उसने काम कर लिया है। |
| संदिग्ध वर्तमान | अनुमान — शायद अभी करता होगा | ता/ती/ते + होगा/होगी/होंगे | वह इस समय पढ़ता होगा। वे बाजार जाते होंगे। |
जाता है सामान्य वर्तमान, जा रहा है अपूर्ण, जा चुका है पूर्ण, गया है आसन्न भूत (नीचे)। सहायक है तीन घरों में बैठता है — उसके पहले का रूप देखो: ता / रहा / चुका / भूत-कृदंत (गया)। भूतकाल — छह भेद
| भेद | काम | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| सामान्य भूत | बीती घटना, बिना «है/था» | गया, आई, खाया, लिखे | राम घर गया। सीता आई। उन्होंने पत्र लिखा। |
| आसन्न भूत | अभी-अभी पूरा, असर पास | भूत-रूप + है/हैं | वह गया है। मेहमान आए हैं। मैंने खाया है। |
| पूर्ण भूत | पहले पूरा, उस समय की बात | था/थी/थे/थीं + भूत-रूप | वह गया था। बारिश हुई थी। वे सोए थे। |
| अपूर्ण भूत | उस समय चल रहा था | रहा/रही/रहे + था… | राम पढ़ रहा था। हम खेल रहे थे। |
| संदिग्ध भूत | अनुमान — शायद हुआ | गया होगा, किया होगा | वह कल गया होगा। उन्होंने खाया होगा। |
| हेतुहेतुमद् भूत | शर्त जो पूरी न हुई | यदि/जो…तो + ता / होता | यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती। वह आता तो मैं मिलता। |
वह गया है / वह गया था / वह जा चुका है — तीन नाम?
हल
- गया है
भूत-रूप + है → आसन्न भूत।
- गया था
था → पूर्ण भूत।
- जा चुका है
चुका → पूर्ण वर्तमान।
भविष्यकाल
| भेद | काम | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| सामान्य भविष्य | आगे होगा | गा/गी/गे,ऊँगा/एगा | मैं जाऊँगा। वह आएगी। वे पढ़ेंगे। |
| संभाव्य / संदिग्ध भविष्य | शायद होगा | शायद + गा · ता होगा (आगे की आशंका) | शायद कल वर्षा होगी। वह आ जाता होगा (संदर्भ भविष्य हो तो)। |
| हेतुहेतुमद् भविष्य | शर्त आगे की | यदि…तो + गा | यदि वह आएगा तो मैं मिलूँगा। मेहनत करोगे तो सफल होगे। |
कुछ पुस्तकें और दो नाम जोड़ती हैं — परीक्षा में दिखें तो:
- अपूर्ण भविष्य — उस समय चल रहा होगा: वह पढ़ रहा होगा (कल दस बजे)। रहा + होगा।
- पूर्ण भविष्य — तब तक चुक जाएगा: कल तक वह जा चुका होगा। चुका + होगा।
काल पहचान — एक पेड़
रहा/रही/रहेहै? + है → अपूर्ण वर्तमान। + था → अपूर्ण भूत। + होगा → अपूर्ण भविष्य।चुका/लियाहै? + है → पूर्ण वर्तमान। + था → (कम) पूर्णता भूत में। + होगा → पूर्ण भविष्य।था/थी/थेबिना रहा? → पूर्ण भूत।- भूत-रूप (
गया, खाया) +है→ आसन्न भूत। बिना है/था → सामान्य भूत। + होगा → संदिग्ध भूत। ता/ती/ते+ है → सामान्य वर्तमान। + होगा → संदिग्ध वर्तमान (या भविष्य, समय देखो)।गा/गी/गे→ सामान्य भविष्य।यदि/तो/होताभूत रूप → हेतुहेतुमद् भूत। यदि…तो + गा → हेतुहेतुमद् भविष्य।
ने-रचना — भूत में सकर्मक
लिंग वाले पृष्ठ ने वादा किया था: मैंने रोटी खाई में क्रिया कर्ता से नहीं, कर्म से मिलती है। यह यहीं पूरा होता है। वाच्य का नाम (कर्मवाच्य) अगले परिवर्तन-पृष्ठ पर; यहाँ केवल रूप।
सूत्र: सकर्मक क्रिया + काम पूरा (प्रायः भूत/पूर्ण) → कर्ता के बाद ने। क्रिया का लिंग–वचन = कर्म का। कर्ता का लिंग क्रिया पर नहीं चढ़ता।
| वाक्य | कर्ता | कर्म | क्रिया किससे |
|---|---|---|---|
| राम ने रोटी खाई | राम (पुल्लिंग) | रोटी (स्त्रीलिंग एक) | खाई — कर्म स्त्री |
| सीता ने आम खाया | सीता (स्त्री) | आम (पुल्लिंग एक) | खाया — कर्म पुल्लिंग |
| उन्होंने किताबें पढ़ीं | वे | किताबें (स्त्री बहु) | पढ़ीं — कर्म बहु स्त्री |
| मैंने पत्र लिखा | मैं | पत्र (पुल्लिंग) | लिखा |
- अकर्मक (कर्म नहीं) — ने नहीं: राम सोया। बच्चा रोया। वह गया।
- वर्तमान आदत में ने नहीं: राम रोटी खाता है (कर्ता से मेल — खाता)।
- कुछ क्रियाएँ ने लेती ही नहीं या वैकल्पिक: जाना, आना, होना — राम गया, नहीं *राम ने गया।
वाक्य — उद्देश्य और विधेय
वाक्य = सार्थक शब्द-समूह जिससे बात पूरी निकले। एक क्रिया प्रायः होती है। «सुंदर फूल» वाक्य नहीं (क्रिया नहीं, बात अधूरी)। «फूल खिले हैं» वाक्य है।
| अंग | प्रश्न | उदाहरण: पक्षी आकाश में उड़ते हैं |
|---|---|---|
| उद्देश्य | किसके बारे में कहा? | पक्षी |
| विधेय | उसके बारे में क्या कहा? | आकाश में उड़ते हैं |
उद्देश्य में कर्ता + उसके विशेषण। विधेय में क्रिया + कर्म + पूरक + क्रिया-विशेषण। कारक के नाम विधेय के अंदर छिपे रहते हैं — सूची कारक पर है।
न्यूनतम वाक्य: जाओ। (आज्ञा, कर्ता «तुम» छिपा)। वर्षा हुई।
वाक्य-भेद — अर्थ के आधार पर
बात का काम क्या है — बताना, मना करना, पूछना, आज्ञा, आश्चर्य, इच्छा, शर्त, संदेह। आठ नाम रटो; कुछ पुस्तकें पाँच रखती हैं (विधान, निषेध, प्रश्न, आज्ञा, विस्मय) — बाकी तीन उन्हीं की शाखाएँ।
| भेद | काम | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| विधानवाचक | हाँ में कथन | सीधी खबर, नहीं/क्या नहीं | राम विद्यालय जाता है। |
| निषेधवाचक | नकार | नहीं, न, मत | राम नहीं जाता। इधर मत आना। |
| प्रश्नवाचक | पूछना | क्या, कौन, कहाँ, ? | क्या तुम आओगे? वह कहाँ है? |
| आज्ञावाचक | आदेश / प्रार्थना | आओ, जाइए, कीजिए, चाहिए | द्वार बंद करो। कृपया बैठिए। |
| विस्मयवाचक | आश्चर्य / दुख | कितना, क्या, ! वाह, आह | कितना सुंदर दृश्य है! हाय राम! |
| इच्छावाचक | कामना | काश, ईश्वर करे, चाहिए कि | ईश्वर तुम्हारा भला करे। काश वर्षा हो। |
| संकेतवाचक | शर्त / संकेत | यदि, तो, जो…तो | यदि परिश्रम करोगे तो सफल होगे। |
| संदेहवाचक | अनिश्चय | शायद, संभव है, होगा? | शायद वह आ जाए। संभव है वर्षा हो। |
क्या बात है! विस्मय। क्या बात है? प्रश्न। आज्ञावाचक काल-तालिका में अलग काल नहीं — अर्थ का भेद है। «जाओ» वर्तमान/भविष्य का आदेश है, सामान्य वर्तमान «जाता है» नहीं।
वाक्य-भेद — रचना के आधार पर
कितने उपवाक्य (क्रिया वाले टुकड़े) हैं, और वे कैसे जुड़े हैं।
| भेद | रचना | जोड़ | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| सरल | एक उद्देश्य, एक विधेय — एक ही क्रिया | — | पक्षी उड़ते हैं। राम प्रतिदिन विद्यालय जाता है। |
| संयुक्त | दो या अधिक समान सरल वाक्य | और, तथा, या, अथवा, पर, किंतु, लेकिन, न…न | राम गया और श्याम आया। मेहनत करो या पछताओ। |
| मिश्र | एक प्रधान + एक या अधिक आश्रित उपवाक्य | जो, कि, क्योंकि, यदि, ताकि, यद्यपि, जब, जहाँ | जो परिश्रम करता है वह सफल होता है। मैं जानता हूँ कि वह आएगा। |
उपवाक्य — मिश्र के अंदर
- प्रधान उपवाक्य — अकेला भी अर्थ दे: वह सफल होता है।
- संज्ञा आश्रित — कि/जो बात: मैं जानता हूँ कि सूर्य गोल है। (कर्म जैसी संज्ञा)
- विशेषण आश्रित — जो / जिसकी: जो लड़का प्रथम आया वह मेरा मित्र है। (लड़का कौन-सा)
- क्रिया-विशेषण आश्रित — जब, जहाँ, क्योंकि, यदि: जब वर्षा हुई फसल हरी हो गई। (कब)
राम आया और श्याम गया संयुक्त। राम आया क्योंकि श्याम गया मिश्र। गिनती: वाक्य में क्रियाएँ गिनो। एक क्रिया = सरल (आज्ञा «जाओ» भी सरल)। दो क्रियाएँ + और/या/पर = संयुक्त। दो क्रियाएँ + जो/कि/यदि = मिश्र।
«यदि तुम चलोगे तो मैं भी चलूँगा।» अर्थ-भेद और रचना-भेद?
हल
- अर्थ
यदि…तो = शर्त → संकेतवाचक। काल हेतुहेतुमद् भविष्य भी है — प्रश्न «वाक्य-भेद» माँगे तो संकेतवाचक / मिश्र दोनों संभव; रचना पूछे तो मिश्र।
- रचना
दो क्रियाएँ (चलोगे, चलूँगा), एक आश्रित (यदि वाला) → मिश्र। और नहीं है इसलिए संयुक्त नहीं।
प्रश्न 1–10
«राम पढ़ रहा है।» काल?
- सामान्य वर्तमान
- अपूर्ण वर्तमान
- पूर्ण वर्तमान
- अपूर्ण भूत
हल
- रहा + है
काम चल रहा = अपूर्ण वर्तमान। ता+है सामान्य। चुका पूर्ण। रहा+था अपूर्ण भूत।
«वह गया है» और «वह गया था»?
- दोनों पूर्ण भूत
- गया है आसन्न भूत, गया था पूर्ण भूत
- दोनों पूर्ण वर्तमान
- गया है सामान्य भविष्य
हल
- है vs था
भूत-रूप+है = आसन्न। था = पूर्ण भूत। चुका होता तो पूर्ण वर्तमान।
«यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।» काल?
- सामान्य भूत
- हेतुहेतुमद् भूत
- हेतुहेतुमद् भविष्य
- संदिग्ध वर्तमान
हल
- शर्त जो पूरी न हुई
होती…होती = भूत की अधूरी शर्त। भविष्य होता «होगी तो…होगी / आएगा तो मिलूँगा»।
«राम ने रोटी खाई।» क्रिया का मेल?
- कर्ता राम (पुल्लिंग) से — खाना चाहिए था
- कर्म रोटी (स्त्रीलिंग) से — ने-रचना
- पुरुष उत्तम से
- अकर्मक क्रिया, ने गलत
हल
- सकर्मक + ने
खाना सकर्मक, रोटी कर्म, खाई स्त्री एकवचन। राम पर ने है, क्रिया राम से नहीं मिलती।
«पक्षी उड़ते हैं।» रचना?
- संयुक्त — दो बातें
- मिश्र — जो छिपा है
- सरल — एक क्रिया
- प्रश्नवाचक
हल
- एक विधेय
उड़ते हैं एक क्रिया। और/जो नहीं। प्रश्नवाचक अर्थ-भेद है, रचना नहीं।
«राम गया और श्याम आया।»?
- सरल
- संयुक्त
- मिश्र
- विस्मयवाचक
हल
- और
दो स्वतंत्र वाक्य बराबर जुड़े = संयुक्त। क्योंकि/जो होता तो मिश्र।
«जो परिश्रम करता है वह सफल होता है।»?
- संयुक्त, विधानवाचक
- मिश्र (विशेषण आश्रित), विधानवाचक
- सरल
- प्रश्नवाचक मिश्र
हल
- जो…वह
आश्रित विशेषण उपवाक्य (कौन सफल)। प्रधान: वह सफल होता है। कथन है, प्रश्न नहीं। और नहीं = संयुक्त नहीं।
«कितना सुंदर दृश्य है!»
- प्रश्नवाचक
- विस्मयवाचक
- आज्ञावाचक
- निषेधवाचक
हल
- !
भावना, जवाब नहीं माँगा। प्रश्नचिह्न होता तो प्रश्नवाचक।
«वह खा चुका है।» काल?
- आसन्न भूत
- पूर्ण वर्तमान
- पूर्ण भूत
- सामान्य वर्तमान
हल
- चुका
पूर्ण वर्तमान। गया है आसन्न। गया था पूर्ण भूत। खाता है सामान्य वर्तमान।
उद्देश्य–विधेय: «मेरा छोटा भाई प्रतिदिन विद्यालय जाता है।»
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- वाक्य अधूरा, अंग नहीं
हल
- किसके बारे में
भाई (विशेषण मेरे-छोटा उद्देश्य में)। उसके बारे में: प्रतिदिन विद्यालय जाता है = विधेय।
अभ्यास
«सूर्य पूर्व से उगता है।»
- अपूर्ण वर्तमान
- सामान्य वर्तमान
- पूर्ण वर्तमान
- सामान्य भविष्य
हल
- ता + है, आदत/नियम
रहा नहीं, चुका नहीं।
«राम पढ़ रहा था।»
- अपूर्ण वर्तमान
- अपूर्ण भूत
- पूर्ण भूत
- आसन्न भूत
हल
- रहा + था
उस समय चल रहा था। रहा+है वर्तमान अपूर्ण।
«मैं कल जाऊँगा।»
- सामान्य भविष्य
- हेतुहेतुमद् भविष्य
- संदिग्ध वर्तमान
- सामान्य भूत
हल
- ऊँगा
गा/गी/गे सामान्य भविष्य। यदि…तो नहीं।
सीता ने आम खाया — «खाया» क्यों?
- सीता पुल्लिंग है
- आम पुल्लिंग कर्म, ने-रचना
- आम स्त्रीलिंग
- अकर्मक
हल
- कर्म
सीता स्त्री, आम पुल्लिंग → खाया। रोटी होती तो खाई।
«क्या तुम आओगे?»
- विधानवाचक सरल
- प्रश्नवाचक
- विस्मयवाचक
- आज्ञावाचक
हल
- क्या + ?
जवाब माँगा। विस्मय में ! होता।
«द्वार बंद करो।»
- आज्ञावाचक, सरल
- विधानवाचक मिश्र
- इच्छावाचक
- संयुक्त
हल
- आदेश
एक क्रिया = सरल। करो आज्ञा।
«मैं जानता हूँ कि वह आएगा।» रचना?
- संयुक्त — कि = और
- मिश्र — «कि» संज्ञा आश्रित
- सरल
- केवल भविष्य काल, भेद नहीं
हल
- कि
आश्रित उपवाक्य प्रधान «जानता हूँ» का कर्म। संयुक्त के और/पर यहाँ नहीं।
«वह इस समय पढ़ता होगा।»
- सामान्य भविष्य
- संदिग्ध वर्तमान
- पूर्ण वर्तमान
- हेतुहेतुमद् भूत
हल
- इस समय + ता होगा
अभी का अनुमान = संदिग्ध वर्तमान। कल होता तो भविष्य सोचते।
«राम सोया।» ने क्यों नहीं?
- भूल है, राम ने सोया सही
- अकर्मक क्रिया — ने नहीं लगता
- पूर्ण वर्तमान है
- मिश्र वाक्य है
हल
- सोना अकर्मक
कर्म नहीं, ने नहीं। गया/आया/सोया। खाया सकर्मक — ने।
«यदि वह आएगा तो मैं मिलूँगा।»?
- हेतुहेतुमद् भविष्य + मिश्र + संकेतवाचक
- हेतुहेतुमद् भूत + संयुक्त
- सामान्य भविष्य + सरल
- केवल आज्ञावाचक
हल
- तीन परत
गा+यदि तो = हेतुहेतुमद् भविष्य। यदि = आश्रित → मिश्र। अर्थ शर्त = संकेतवाचक। होता…होता भूत होता।
