Noteclerical

अशुद्धि-शोधन और वाक्य शुद्धि

Lesson 12 of 113

इस विषय में क्या आता है

परीक्षा पूछती है — आर्शीवाद शुद्ध है क्या, उसने कहा की में कि या की, यह मेरा पुस्तक है कहाँ टूटा, गाय दूध देती हैं वचन कहाँ, वापस लौटना दो बार एक बात तो नहीं, चार विकल्प में शुद्ध वाक्य कौन-सा। पूछ सुधार है, अर्थ नहीं, वाच्य-पलट नहीं।

यहाँ पढ़ना है

वर्तनी (मात्रा, श–ष–स, ण–न, क्ष–त्र–ज्ञ, ऋ, चिह्न, आशीर्वाद)। कि/की, है/हैं, मैं/में। लिंग-वचन-पुरुष से क्रिया-विशेषण का मेल। ने+कर्म। गलत शब्द और पुनरुक्ति। थोड़े विराम चिह्न। वाक्य में एक अशुद्धि ढूँढ़ने का क्रम।

यहाँ नहीं घुसाना

कर्तृवाच्य → कर्मवाच्य, सरल → मिश्र, कथन → अप्रत्यक्ष — वाक्य-परिवर्तन। वर्णमाला का उच्चारण-घर — वर्ण (मुख-चित्र यहाँ नहीं)। आठ कारक के नाम — कारक; यहाँ केवल टूटा चिह्न। आँख का तारा — मुहावरे। अंधों में काना राजा — लोकोक्तियाँ। अग्नि–आग — तत्सम।

एक पंक्ति: शुद्धि = वही वाक्य, सही रूप। परिवर्तन = वही बात, दूसरा ढाँचा। प्रश्न «शुद्ध कीजिए» हो तो ढाँचा मत पलटो।

अशुद्धि के पाँच घर

एक प्रश्न में एक ही घर टूटा होता है — पहले घर पहचानो, फिर काटो।

घरक्या टूटता हैउदाहरण अशुद्ध → शुद्ध
वर्तनीअक्षर, मात्रा, बिंदुआर्शीवाद → आशीर्वाद · चिन्ह → चिह्न
मेललिंग, वचन, पुरुष, विशेषणमेरा पुस्तक → मेरी पुस्तक · लड़के जाता है → लड़के जाते हैं
कारक / नेचिह्न या कर्म-क्रिया मेलराम पुस्तक पढ़ा → राम ने पुस्तक पढ़ी · उसने मुझे से कहा → उसने मुझसे कहा
शब्दगलत शब्द, दो बार एक अर्थअत्याधिक → अत्यधिक · वापस लौटा → लौट आया
विरामप्रश्न पर पूर्ण विराम इत्यादिक्या तुम जा रहे हो। → क्या तुम जा रहे हो?
उदाहरण से पकड़ो। «सीता ने आम खाई।» वर्तनी ठीक है। ने भी है। टूटा मेल है: आम पुल्लिंग → खाया। घर = ने-रचना का कर्म-मेल, लिंग-तालिका रटने का नया अध्याय नहीं — कुंजी काल और लिंग पर पहले आ चुकी; यहाँ लगाओ।

छह कदम — विकल्प पर चलो

  1. वर्तनी घूमो। आर्शी/आशीर्, चिन्ह/चिह्न, ब्रम्हा/ब्रह्मा, श्रृंगार/शृंगार। एक अक्षर गड़बड़ हो तो यही उत्तर।
  2. कि या की? मैं या में? है या हैं? तीन जोड़ी रोज़ कटवाती हैं। नीचे अलग खंड है।
  3. कर्ता–क्रिया–विशेषण मेल। एक है या कई, पुल्लिंग या स्त्रीलिंग, मैं/तुम/वह। आदर: गुरुजी आते हैं।
  4. ने है तो कर्म देखो। पूर्ण भूत सकर्मक। क्रिया कर्म के लिंग-वचन से। अकर्मक पर ने मत चिपकाओ: वह गया।
  5. एक बात दो बार तो नहीं? पुनः फिर, मुफ़्त मुफ्त, सबसे उत्तम। गलत जोड़ी: परीक्षा लेना/देना, स्त्री/इस्त्री, गृह/ग्रह।
  6. वाच्य मत पलटो। «पत्र लिखा गया» बनाना तभी जब प्रश्न परिवर्तन का हो — वाक्य-परिवर्तन। शुद्धि में «राम पत्र लिखता हैं» का «हैं» ही काटो।

वर्तनी — नियम, मुख-चित्र नहीं

उच्चारण का नक्शा वर्ण पर है। यहाँ परीक्षा के टूटे अक्षर। मात्रा गिनने का खेल छंद-पृष्ठ पर; यहाँ केवल शब्द का सही ढाँचा।

1. मात्रा और जोड़ी

जालयादशुद्ध
इ / ईह्रस्व-दीर्घ अर्थ बदल दें तो अनेकार्थक-घर; वर्तनी में शब्द रटोपिता, दीपक, परीक्षा (ई), किताब (ि)
उ / ऊऊपर की मात्रा गोल पूरी = ऊगुरु, दूध, सूर्य
ऋरि नहीं; मात्रा ृ व्यंजन परऋषि, कृष्ण, हृदय, तृण — अशुद्ध: रिशि, कृष्न, रिदय
ए / ऐ, ओ / औऐ = अ+इ की झलक; औ = अ+उऐसा, और, गौ, नौ

2. श, ष, स

तालव्य श (शाला, विशेष), मूर्धन्य ष (षड्यंत्र, भाषा में ष प्रायः तत्सम: कृषि, पुरुष, दोष), दंत्य स (सरस्वती, संसार)। नियम रटो शब्द से, अनुमान से कम। पक्का: परीक्षा में क्ष, संसार में स, कृषि में ष, विशेष में श।

3. ण और न

मूर्धन्य ण प्रायः ऋ/टवर्ग के पास तत्सम में: करण, गणेश, गुण, विष्णु (ष् के बाद न→ण की संधि याद हो तो संधि — यहाँ केवल तैयार रूप)। अशुद्ध: गुन, करन जब शब्द तत्सम «गुण/करण» हो। हिंदी तद्भव में न रह सकता है: कान, पानी — इन्हें ण मत बनाओ।

4. क्ष, त्र, ज्ञ, श्र

क्ष = क्+ष — परीक्षा, क्षमा, क्षेत्र, अक्षर। त्र = त्+र — पत्र, मित्र, त्रिभुज। ज्ञ = ज्+ञ — ज्ञान, ज्ञानी, अज्ञात। श्र = श्+र — श्रम, श्री, आश्रम। अशुद्ध: छमा, परिक्षा, ग्यान, सरम।

5. अनुस्वार और चंद्रबिंदु

अनुनासिक स्वर पर चंद्रबिंदु: गाँव, हूँ, आँसू, मैं, नहीं, पहुँच। व्यंजन के वर्ग का पंचमाक्षर अनुस्वार से भी लिखा जाता है: संसार, अंत। परीक्षा में गांव बिना चंद्र अक्सर काटा जाता है — गाँव लिखो। हूं नहीं, हूँ।

6. ह और विसर्ग

चिह्न में ह + ् + न जैसा रूप — बहुत कुंजी चिन्ह काटती हैं। दुःख, अतः, अर्थात्, प्रातः में विसर्ग। दुख बोलचाल; तत्सम प्रश्न हो तो दुःख।

शृंगार जाल: शुद्ध शृंगार (श+ृ)। अशुद्ध श्रृंगार — श्र के ऊपर फिर ृ, दो बार र। ठप्पा शृंगार का पक्का।

पक्की वर्तनी — अशुद्ध देखो, शुद्ध चुनो

अशुद्धशुद्धक्यों
आर्शीवादआशीर्वादआशीः + वाद; र् वाद से पहले
अगामीआगामीआ+गम्; दीर्घ आ
अत्याधिकअत्यधिकअति+अधिक; य् की संधि, आ नहीं
उज्जवलउज्ज्वलज् + व; व की मात्रा नहीं, व्+अल
चिन्हचिह्नह्+न
ब्रम्हाब्रह्माह्+म; म्+ह नहीं
पुरुस्कारपुरस्कारपुरस्+कार
ग्यानज्ञानज्ञ
परिक्षापरीक्षाक्ष
क्षमा को छमाक्षमाक्ष ≠ छ
सन्यासीसंन्यासीसम्+न्यास; न् द्वित्व
अनाधिकारअनधिकारअन्+अधिकार
श्रृंगारशृंगारश+ृ, श्र+ृ नहीं
महत्व (जब तत्सम पूछें)महत्त्वत् द्वित्व; बहुत पत्र महत्त्व चाहते हैं
इस्त्री (नारी अर्थ में)स्त्रीइस्त्री = कपड़े सेंकने का यंत्र; नारी स्त्री
ग्रह (घर अर्थ में)गृहग्रह = ग्रह-नक्षत्र; गृह = घर
रिशिऋषिऋ
ह्रदय / रिदयहृदयहृ+दय
सम्मान को सन्मानसम्मानसम्+मान; न् नहीं
इतिहास को इतीहासइतिहासइति+हास
क्योकिक्योंकिचंद्रबिंदु + कि
बहोतबहुतह्रस्व उ, ओ नहीं
गांवगाँवचंद्रबिंदु
हूंहूँचंद्रबिंदु
आंसूआँसूचंद्रबिंदु

तत्सम-तद्भव का जन्म स्रोत-पृष्ठ पर है। यहाँ केवल यह: परीक्षा «शुद्ध वर्तनी» लिखे तो तत्सम रूप चुनो — दुःख, कर्तव्य, महत्त्व।

तीन जोड़ी जो सबसे ज्यादा कटती हैं

कि और की

कीकि
कामसंबंध / स्त्रीलिंग क्रियाजोड़ने वाला अव्यय (कथन के बाद)
जाँचकिसकी? खाई/गई जैसी क्रिया?कहा/सोचा/चाहा के बाद पूरी बात?
शुद्धराम की किताब। उसने रोटी खाई। लड़की गई।उसने कहा कि कल छुट्टी है। मैं चाहता हूँ कि तुम आओ।
अशुद्धउसने कहा की कल छुट्टी है।राम कि किताब (संबंध पर कि)

कसौटी: «कहा/बोला/लिखा/चाहता» के बाद पूरक वाक्य हो तो कि। संबंध या स्त्रीलिंग रूप हो तो की।

है और हैं

शुद्धक्यों
गाय दूध देती है।एक वचन, स्त्रीलिंग
गाएँ दूध देती हैं।बहुवचन
यह फल मीठा है।एक
ये फल मीठे हैं।बहु
गुरुजी आ रहे हैं।आदर — एक व्यक्ति पर भी हैं
मैं जाता हूँ। हम जाते हैं।पुरुष+वचन

अशुद्ध पक्का जाल: वर्षा हो रही हैं → है। हिमालय ऊँचा पर्वत हैं → है (एक पर्वत-शृंखला को एक वचन मानती कुंजी)। गंगा पवित्र नदी हैं → है।

मैं और में

मैं = कर्ता सर्वनाम (चंद्रबिंदु)। में = अधिकरण चिह्न (बिना चंद्र)। अशुद्ध: मे स्कूल जाता हूँ / मैं कमरे मैं हूँ। शुद्ध: मैं स्कूल जाता हूँ। मैं कमरे में हूँ।

उदाहरण

अशुद्ध: अध्यापक ने कहा की कल परीक्षा हैं। दो काट?

हल

  1. कि

    कहा के बाद पूरक वाक्य → कि, की नहीं।

  2. है

    परीक्षा एक वचन → है, हैं नहीं।

उत्तरअध्यापक ने कहा कि कल परीक्षा है।

लिंग, वचन, पुरुष — मेल लगाओ, सूची मत रटो

संज्ञा का लिंग और सर्वनाम-तालिका लिंग–वचन पर है। विशेषण-भेद क्रिया-विशेषण पर। यहाँ केवल टूटा मेल।

अशुद्धशुद्धटूटा घर
यह मेरा पुस्तक है।यह मेरी पुस्तक है।पुस्तक स्त्रीलिंग → मेरी
काला गाय चर रही है।काली गाय चर रही है।विशेषण का लिंग
लड़के जाता है।लड़के जाते हैं। / लड़का जाता है।वचन: कर्ता बहु तो क्रिया बहु
दो लड़के आया।दो लड़के आए।आया एकवचन
राम और श्याम खेल रहा है।राम और श्याम खेल रहे हैं।दो कर्ता = बहुवचन
हम स्कूल जाता हूँ।हम स्कूल जाते हैं।पुरुष+वचन (हम ≠ मैं)
तुम घर जाता है।तुम घर जाते हो।तुम के साथ हो/जाओगे, है नहीं
बालक पढ़ रही है।बालक पढ़ रहा है।लिंग
स्त्री ने रोटी खाया।स्त्री ने रोटी खाई।ने+कर्म रोटी स्त्रीलिंग (नीचे ने-खंड)
सभी विद्यार्थी उपस्थित था।सभी विद्यार्थी उपस्थित थे।बहुवचन
प्रत्येक छात्रों को पुरस्कार मिला।प्रत्येक छात्र को पुरस्कार मिला।प्रत्येक + एकवचन
कोई भी आदमी नहीं आए।कोई भी आदमी नहीं आया।कोई = एक
आदर। माताजी आ रही हैं। प्रधानमंत्री बोल रहे हैं। एक व्यक्ति, क्रिया बहुवचन। अशुद्ध नहीं। «गाय» पर आदर वाली हैं मत लगाओ।

ने और कारक-चिह्न — शुद्धि में जितना चाहिए

आठ नाम कारक पर हैं। ने-रचना का नियम काल पर। वाच्य पलटना अगले पृष्ठ पर। यहाँ वाक्य सुधार।

अशुद्धशुद्धक्यों
राम पुस्तक पढ़ा। (पूर्ण भूत, सकर्मक)राम ने पुस्तक पढ़ी।ने चाहिए; पुस्तक स्त्रीलिंग → पढ़ी
सीता ने आम खाई।सीता ने आम खाया।आम पुल्लिंग
वह घर गया ने। / राम ने गया।राम गया। / वह घर गया।जाना अकर्मक — ने नहीं
उसने मुझे से कहा।उसने मुझसे कहा।को+से एक साथ नहीं; कहना के साथ से
मैं स्कूल को जाता हूँ।मैं स्कूल जाता हूँ। / स्कूल में पढ़ता हूँ।गमन पर को प्रायः नहीं (कुछ बोलचाल छोड़ो, कुंजी को काटती है)
पेड़ में पक्षी बैठा है। (सतह)पेड़ पर पक्षी बैठा है।सतह = पर; अंदर = में (पेड़ में कील)
मैं आपका दर्शन करने आया।मैं आपके दर्शन करने आया हूँ।«आपका दर्शन» एकवचन-सा; आदर «आपके दर्शन» + सहायक «हूँ»

ने की तीन ताले: (1) भूतकाल (2) सकर्मक (3) क्रिया कर्म से। तीनों हों तो ने+मेल। एक भी न हो तो ने मत चिपकाओ। कर्मवाच्य «लिखा गया» बनाना शुद्धि नहीं — परिवर्तन है।

शब्द-प्रयोग — सही शब्द, सही जगह

अशुद्ध जालशुद्धफर्क
विद्यार्थी ने परीक्षा ली।विद्यार्थी ने परीक्षा दी। अध्यापक ने परीक्षा ली।देना = छात्र; लेना = परीक्षक
इस्त्री पढ़ रही है। (नारी)स्त्री पढ़ रही है।इस्त्री कपड़े सेंकने का यंत्र
ग्रह में रहना।गृह में रहना। / ग्रह पर जीवन?गृह घर; ग्रह नक्षत्र
मैं उसे दिख गया।वह मुझे दिख गया। / मैंने उसे देखा।दिखना अकर्मक — जो दिखाई दे वही कर्ता। देखना सकर्मक।
के वास्ते (बहुत पत्र)के लिएस्कूल-कुंजी «वास्ते» काटती है
द्वारा जब साधन न होसे / ने — वाक्य देखोके द्वारा कर्मवाच्य-गंध; शुद्धि में ज़रूरत हो तभी

पुनरुक्ति — एक बात दो बार

दो शब्द एक अर्थ = अशुद्धि। एक काटो।

अशुद्धशुद्ध (एक रूप काफी)
वापस लौट आयालौट आया / वापस आया
पुनः फिर से कहापुनः कहा / फिर कहा
सबसे उत्तम / अधिक श्रेष्ठउत्तम / श्रेष्ठ / सर्वोत्तम
लगभग करीब सौलगभग सौ / करीब सौ
इत्यादि आदिइत्यादि / आदि
कृपया करके बैठिएकृपया बैठिए (कृपया और करके एक साथ नहीं)
कोई नहीं नहीं आयाकोई नहीं आया
अत्यधिक बहुत गरमअत्यधिक गरम / बहुत गरम

मुहावरे का गलत तोड़ना («कमर कस गए» ने-मेल टूटा) मुहावरे पर वाक्य-प्रयोग में आ चुका। लोकोक्ति ज्यों-की-त्यों — लोकोक्तियाँ। यहाँ केवल इतना: पदबंध तोड़कर व्याकरण मत बिगाड़ो, और वर्तनी उक्ति की मात्रा मत तोड़ो।

विराम चिह्न — जितना लिपिक काटता है

कामचिह्नअशुद्ध → शुद्ध
पूरी बात खत्मपूर्ण विराम ।राम घर गया? (अगर प्रश्न नहीं) → राम घर गया।
प्रश्न?क्या तुम जा रहे हो। → क्या तुम जा रहे हो?
हर्ष/आश्चर्य!क्या सुंदर फूल। (भाव विस्मय हो तो !)
थोड़ा रुकना, सूचीअल्पविराम ,राम श्याम और मोहन आए। → राम, श्याम और मोहन आए।

निबंध के सारे चिह्न यहाँ नहीं। अपठित गद्य अपने पृष्ठ पर। इतना पक्का: «क्या/कौन/कहाँ/कब/क्यों» से शुरू या प्रश्न-भाव हो तो पूर्ण विराम मत लगाओ।

जाल — यहीं कटते हैं

1. वाच्य बदल देना

«राम पत्र लिखता है» शुद्ध है। इसे «पत्र राम द्वारा लिखा जाता है» बनाना परिवर्तन है, शुद्धि नहीं। अशुद्ध रूप होता: «राम पत्र लिखता हैं» → केवल हैं काटो।

2. कि/की, है/हैं, मैं/में एक साथ

एक वाक्य में दो भी टूट सकते हैं: कहा की… हैं। दोनों सुधारो। विकल्प में एक ही बचा हो तो वही चुनो।

3. स्त्री / इस्त्री, गृह / ग्रह

वर्तनी नहीं, शब्द। नारी = स्त्री। घर = गृह। कपड़े सेंकने का यंत्र = इस्त्री। नक्षत्र = ग्रह।

4. प्रत्येक + बहुवचन

प्रत्येक, हर एक, कोई = एकवचन क्रिया/संज्ञा। सभी, दोनों, ये = बहुवचन।

5. आदर और जानवर एक नियम

गुरुजी हैं। गाय है। पर्वत है। जनता पर कुंजी अक्सर एकवचन: जनता जाग रही है।

उदाहरण

यह मेरा पुस्तक हैं — शुद्ध?

हल

  1. लिंग

    पुस्तक स्त्रीलिंग → मेरी।

  2. वचन

    एक पुस्तक → है, हैं नहीं।

उत्तरयह मेरी पुस्तक है।

परीक्षा में पाँच कदम

  1. प्रश्न क्या लिखता है? शुद्ध वर्तनी / शुद्ध वाक्य / रेखांकित सुधार / अशुद्ध छाँटो।
  2. वर्तनी घूमो — आशीर्वाद, चिह्न, ब्रह्मा, शृंगार, ज्ञान, परीक्षा, गाँव।
  3. तीन जोड़ी — कि/की, है/हैं, मैं/में।
  4. मेल और ने — कर्ता कितने, कर्म कौन-सा लिंग, जाना पर ने तो नहीं।
  5. पुनरुक्ति और गलत शब्द। वाच्य मत पलटो।
भूल-सूची। आर्शीवाद को शुद्ध मानना। कहा की। गाय देती हैं। मेरा पुस्तक। प्रत्येक छात्रों। स्त्री को इस्त्री। चिन्ह। श्रृंगार। वापस लौटना छोड़ना। शुद्धि में कर्मवाच्य बना देना। ऋषि को रिशि। मैं/में उल्टा।

प्रश्न 1–10

प्र. 1

अशुद्धि-शोधन में क्या करना है?

  1. कर्तृवाच्य को कर्मवाच्य बनाना — वह परिवर्तन है
  2. टूटे अक्षर, मेल या शब्द को उसी वाक्य में सही रूप देना
  3. लोकोक्ति का भाव लिखना
  4. संधि-विच्छेद करना

हल

  1. शुद्धि ≠ परिवर्तन

    वाच्य अगले पृष्ठ पर। भाव लोकोक्ति पर। संधि संधि पर।

उत्तरB
प्र. 2

शुद्ध वर्तनी?

  1. आर्शीवाद
  2. आशीर्वाद
  3. आशिरवाद
  4. आशीरवाद — र् की जगह गलत

हल

  1. आशीः + वाद

    विसर्ग र्-रूप में वाद से पहले: आशीर्वाद। आर्शी उल्टी मात्रा।

उत्तरB
प्र. 3

शुद्ध वाक्य?

  1. उसने कहा की कल छुट्टी है।
  2. उसने कहा कि कल छुट्टी है।
  3. उसने कहा की कल छुट्टी हैं।
  4. उसने कहा कि कल छुट्टी हैं।

हल

  1. कि

    कहा के बाद पूरक → कि।

  2. है

    छुट्टी एक वचन। D में कि सही, हैं गलत।

उत्तरB
प्र. 4

«सीता ने आम खाई» शुद्ध रूप?

  1. सीता आम खाई — ने गायब, मेल भी टूटा
  2. सीता ने आम खाया
  3. सीता ने आम खाई — ज्यों का त्यों, आम स्त्रीलिंग नहीं
  4. आम सीता द्वारा खाया गया — वाच्य-परिवर्तन, शुद्धि नहीं

हल

  1. ने रखो

    सकर्मक पूर्ण भूत।

  2. आम पुल्लिंग

    खाया। खाई रोटी पर चलती। D अगले पृष्ठ का खेल।

उत्तरB
प्र. 5

«यह मेरा पुस्तक हैं»?

  1. यह मेरा पुस्तक है — लिंग अभी टूटा
  2. यह मेरी पुस्तक है
  3. यह मेरे पुस्तक हैं
  4. पुस्तक मेरे द्वारा रखी गई — परिवर्तन

हल

  1. दो काट

    पुस्तक स्त्रीलिंग → मेरी। एक वचन → है।

उत्तरB
प्र. 6

शुद्ध शब्द?

  1. अत्याधिक
  2. अत्यधिक
  3. अतीधिक
  4. अत्यदीक

हल

  1. अति + अधिक

    य् जुड़कर अत्यधिक। आ की मात्रा जाल है।

उत्तरB
प्र. 7

«प्रत्येक छात्रों को पुरस्कार मिला»?

  1. प्रत्येक छात्रों को पुरुस्कार मिला — वर्तनी भी टूटी
  2. प्रत्येक छात्र को पुरस्कार मिला
  3. सभी छात्र को पुरस्कार मिला — सभी के साथ को+एकवचन टूटा
  4. प्रत्येक छात्र को पुरुस्कार मिला

हल

  1. प्रत्येक = एक

    छात्र, छात्रों नहीं।

  2. पुरस्कार

    पुरुस्कार अशुद्ध। D वचन ठीक, वर्तनी टूटी।

उत्तरB
प्र. 8

नारी के अर्थ में शुद्ध?

  1. इस्त्री
  2. स्त्री
  3. स्त्री और इस्त्री एक ही
  4. इस्त्री पढ़ती हैं — दो घर टूटे

हल

  1. दो शब्द

    स्त्री = नारी। इस्त्री = कपड़े सेंकने का उपकरण। गृह/ग्रह जैसा जोड़ा।

उत्तरB
प्र. 9

«वह वापस लौट आया» शुद्ध?

  1. वह वापस लौट आया — ज्यों का त्यों
  2. वह लौट आया / वह वापस आया
  3. वह पुनः फिर लौट आया — और पुनरुक्ति
  4. उसके द्वारा लौटा गया — वाच्य

हल

  1. एक अर्थ दो शब्द

    वापस ≈ लौटना। एक काटो।

उत्तरB
प्र. 10

«राम पत्र लिखता हैं» का शुद्ध रूप? (शुद्धि, परिवर्तन नहीं)

  1. पत्र राम के द्वारा लिखा जाता है
  2. राम पत्र लिखता है
  3. राम पत्र लिखते हैं — आदर तभी जब राम पूज्य-सा आदर हो; साधारण एक वचन है
  4. पत्र लिखा गया राम

हल

  1. केवल हैं

    एक वचन → है। वाक्य वही रहा।

  2. A और D

    कर्मवाच्य — परिवर्तन। यहाँ नहीं।

उत्तरB

अभ्यास

ये दस अलग कोण हैं — ऊपर वाले दस की नकल नहीं।

अ. 1

शुद्ध वर्तनी?

  1. चिन्ह
  2. चिह्न
  3. चिनह
  4. चिन्ह्न

हल

  1. ह्+न

    चिह्न। बहुत पुस्तकों का पक्का रूप।

उत्तरB
अ. 2

«गाय दूध देती हैं»?

  1. गाय दूध देती हैं — आदर
  2. गाय दूध देती है
  3. गाय दूध देते है
  4. गायों दूध देती है

हल

  1. एक गाय

    आदर गुरु-माता पर, पशु पर नहीं। है।

उत्तरB
अ. 3

शुद्ध?

  1. में घर में रहता हूँ — पहला में कर्ता नहीं
  2. मैं घर में रहता हूँ
  3. मैं घर मैं रहता हूँ
  4. मे घर मे रहता हुं — तीन टूटे

हल

  1. चंद्र

    कर्ता मैं। अधिकरण में। हूँ में चंद्र।

उत्तरB
अ. 4

शुद्ध?

  1. ब्रम्हा
  2. ब्रह्मा
  3. ब्रम्ह्मा
  4. ब्रहमा

हल

  1. ह्+म

    ब्रह्मा। म्+ह उल्टा जाल।

उत्तरB
अ. 5

«हम लोग स्कूल जाता हूँ»?

  1. हम लोग स्कूल जाता है
  2. हम स्कूल जाते हैं
  3. मैं स्कूल जाते हैं
  4. हम स्कूल जाता हूँ

हल

  1. हम

    जाते हैं। «लोग» अक्सर फालतू। जाता हूँ मैं का रूप है।

उत्तरB
अ. 6

राम ने कहा कि वह ____ काम कर लेगा। (काम राम का ही)

  1. उसका — दूसरे का भी पढ़ा जा सकता
  2. अपना
  3. उनका — आदर बिना
  4. इसका

हल

  1. अपना

    कर्ता और स्वामी एक हों तो अपना। उसका तब जब किसी और की चीज़ हो। सर्वनाम-भेद क्रिया-पृष्ठ; यहाँ प्रयोग।

उत्तरB
अ. 7

शुद्ध वर्तनी?

  1. श्रृंगार
  2. शृंगार
  3. शृङ्गार
  4. सरंगार

हल

  1. श+ृ

    श्रृंगार में र दो बार। शृंगार शुद्ध। शृङ्गार पुरानी ङ-मात्रा, कक्षा-10 कुंजी शृंगार चाहती है।

उत्तरB
अ. 8

विराम: «क्या तुम बाजार जा रहे हो।»

  1. पूर्ण विराम सही है
  2. क्या तुम बाजार जा रहे हो?
  3. क्या तुम बाजार जा रहे हो!
  4. क्या, तुम बाजार जा रहे हो।

हल

  1. प्रश्न

    क्या से प्रश्न। पूर्ण विराम काटो। विस्मय यहाँ नहीं।

उत्तरB
अ. 9

घर के अर्थ में शुद्ध शब्द?

  1. ग्रह
  2. गृह
  3. गृह और ग्रह एक
  4. इस्त्री

हल

  1. हृ

    गृह = घर। ग्रह = नक्षत्र/ग्रहण वाला ग्रह।

उत्तरB
अ. 10

शुद्ध वाक्य?

  1. राम और श्याम खेल रहा है।
  2. राम और श्याम खेल रहे हैं।
  3. राम और श्याम द्वारा खेला जा रहा है। — ढाँचा बदला
  4. राम और श्याम खेल रहा हैं।

हल

  1. दो कर्ता

    बहुवचन: रहे हैं। C वाच्य-परिवर्तन — अगला विषय, शुद्धि नहीं।

उत्तरB

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