इस विषय में क्या आता है
परीक्षा एक अंश देती है जो पाठ्यपुस्तक का पाठ नहीं होता। फिर पूछती है — सबसे उपयुक्त शीर्षक कौन-सा, केंद्रीय भाव क्या, रेखांकित का यहाँ वाला अर्थ क्या, «निम्न में से क्या नहीं कहा गया», «उसने / वे» किसके लिए आया, लेखक क्या संकेत कर रहा है। पूछ इसी अंश का बोध। व्याकरण का पूरा अध्याय यहाँ दोहराना नहीं; शब्द-भेद तभी जब प्रश्न उसी पंक्ति से माँगे।
यहाँ पढ़ना है
अपठित का मतलब। गद्य बनाम पद्य। दो बार पढ़ना। शीर्षक: व्यापक-संकीर्ण-बाहर। मुख्य भाव बनाम आंशिक सच। रेखांकित संदर्भ। «नहीं कहा गया» का जाल। अनुमान की सीमा। सर्वनाम किस पर लौटा। तथ्य बनाम विचार। दो पूरे गद्यांश हल करके देखना। पद्यांश में अर्थ बनाम रस-छंद-अलंकार।
यहाँ नहीं घुसाना
स्थायी भाव, दोहा 13+11 — रस / छंद। चरण-कमल, मनहुँ — अलंकार। आँख का तारा — मुहावरे। कमल = पंकज सूची — पर्याय (यहाँ अर्थ गद्यांश से)। कि/की शुद्धि — अशुद्धि। निबंध/पत्र स्वयं रचना। अंग्रेज़ी अपठित और शब्द-भेद — अंग्रेज़ी व्याकरण अलग विषय।
एक पंक्ति: उत्तर अंश के अंदर है। बाहर का सच भी गलत, अगर लेखक ने वह बात लिखी नहीं।
गद्य और पद्य — दो कागज़
| कागज़ | पत्र क्या माँगता है | यहाँ का काम |
|---|---|---|
| अपठित गद्यांश | शीर्षक, भाव, रेखांकित, नहीं-कहा, सर्वनाम | यही पृष्ठ |
| अपठित पद्यांश | पंक्ति का सरल अर्थ, संकेत | अर्थ यहीं; गहना/रस/मात्रा अपने पृष्ठ |
| पठित पाठ | पुस्तक का पाठ याद | यह विषय नहीं — अपठित = पहले न पढ़ा |
एक ही पत्र में दोनों आ सकते हैं। गद्य पर शीर्षक-भाव; पद्य पर «कवि कहना चाहता है»। पद्य में मनहुँ दिखे और प्रश्न «अलंकार» लिखे तो अलंकार खोलो, गद्यांश की कुंजी मत। प्रश्न «इस पंक्ति का आशय» लिखे तो यहीं रहो।
पाँच कदम — जल्दी में भी यही
- प्रश्न की माँग पढ़ो। शीर्षक है, रेखांकित है, «नहीं कहा» है, या सर्वनाम है। माँग बदले तो घर बदलता है।
- पहली पढ़ाई धीमी: कौन, कहाँ, क्या हो रहा, अंत में लेखक किस ओर मुड़ा। अधूरा छोड़कर विकल्प मत देखना।
- दूसरी पढ़ाई सवाल लेकर: रेखांकित वाक्य पर उंगली रखो। सर्वनाम से एक वाक्य पहले लौटो।
- चार विकल्प को अंश से टक्कर दो। तीन काटोगे: अंश के बाहर, बहुत चौड़ा, बहुत पतला, उल्टा।
- बचे दो में से वह चुनो जो पूरा अंश समेटे, सिर्फ़ पहली पंक्ति नहीं, सिर्फ़ अंतिम उपदेश नहीं।
क्रम: कुछ साथी पहले विकल्प पढ़ते हैं, फिर अंश — जल्दी में रेखांकित छूट जाता है। पक्का तरीका: अंश पूरा → प्रश्न → फिर अंश के उस टुकड़े पर लौटो।
शीर्षक — न हाथी, न चींटी
शीर्षक अंश का नाम है, निबंध का विषय नहीं जो तुम लिखना चाहते। तीन काट:
| काट | क्या गलत है | उदाहरण |
|---|---|---|
| अति व्यापक | पूरा देश, पूरी मानवता, «जीवन एक संघर्ष» | कुएँ की चर्चा पर «भारत का जल-संकट» |
| अति संकीर्ण | एक दृश्य को पूरा मान लिया | कुएँ पर «नीम की छाया» — नीम आया, मालिक कुआँ है |
| बाहर का | लेखक ने कही ही नहीं | कुएँ पर «मोटर बंद करो कानून से» |
अच्छा शीर्षक: मुख्य वस्तु + लेखक का मोड़। कुएँ वाले अंश में पानी भी है, मिलना भी है, मोटर भी किनारे बैठती है — शीर्षक तीनों को छुए, एक को निगल न जाए।
पहली पंक्ति का टुकड़ा शीर्षक तभी जब बाकी अंश उसी पर घूमता रहे। अंतिम नैतिक वाक्य शीर्षक तभी जब शुरू से वही बात पक रही हो। बीच का मसाला अकेला नाम नहीं बनता।
केंद्रीय भाव — मालिक वाक्य
केंद्रीय / मुख्य भाव वह बात है जिस पर लेखक बार-बार लौटता है, या अंत में पक्का करके रखता है। एक सच वाक्य आंशिक हो सकता है — सही है, पर मालिक नहीं।
- विकल्प पूरा सच लगे और अंश के एक कोने से उठा हो → आंशिक, काटो अगर «मुख्य» पूछा हो।
- विकल्प लेखक की बात का उल्टा हो → झूठ।
- विकल्प तुम्हारी राय हो, लेखक चुप हो → बाहर।
| तथ्य | विचार / संकेत | |
|---|---|---|
| पहचान | दिखा, गिना, हुआ | लेखक क्या समझाना चाहता है |
| उदाहरण | कुआँ गर्मी में नीचे चला गया | नयी चीज पुरानी जगह को मिटा सकती है |
| प्रश्न | «क्या हुआ?» | «लेखक का आशय / संदेश» |
प्रश्न «क्या हुआ» पर संदेश मत देना। प्रश्न «आशय» पर केवल घटना मत दोहराना। माँग पढ़ो।
रेखांकित — शब्दकोश पहला अर्थ मत
रेखांकित शब्द या वाक्यांश का अर्थ इसी पंक्ति के पड़ोस से निकलो। अनेकार्थक शब्द यहाँ वाला घर चुनो — सूची अनेकार्थक पर है; अपठित में संदर्भ राजा है।
| शब्द | शब्दकोश का पहला घर | गद्यांश वाला घर (उदाहरण) |
|---|---|---|
| बैठक | कमरे का नाम | लोगों के इकट्ठा होने का काम / जगह |
| ठहराव | गाड़ी का रुकना | शांति, स्थिर माहौल |
| पत्र | अखबार का पन्ना | लिफाफे में चिट्ठी |
| मेड़ | — | खेत की मिट्टी की बाड़, पानी रोकने को |
मुहावरा रेखांकित हो तो रूढ़ अर्थ — मुहावरे। पर गद्यांश ने मुहावरा तोड़कर नया चित्र बनाया हो तो चित्र ही उत्तर है, थैला मत घुसेड़ना।
सरलार्थ लिखने को कहे तो कठिन शब्द हटाकर वही बात छोटी कक्षा की भाषा में। नई सूचना मत जोड़ो।
«क्या नहीं कहा गया» — तीन सच, एक घुसपैठ
यह प्रश्न उल्टा काम करता है। तीन विकल्प अंश में मिलेंगे। एक या तो उल्टा है, या अंश चुप है, या तुम्हारे सामान्य ज्ञान का सच है जो लेखक ने लिखा नहीं।
कसौटी: प्रत्येक विकल्प पर अंश में उंगली रखो। तीन पर उंगली बैठे, चौथे पर न बैठे — वही उत्तर। बाहर की सच्ची खबर भी यहाँ गलत है।
«केवल / हमेशा / कभी नहीं / सभी» वाले विकल्प अक्सर टूटते हैं, जब अंश ने हद न बाँधी हो।
अनुमान — एक कदम, छलांग नहीं
अनुमान = अंश ने सीधा न लिखा, पर संकेत से निकाला जा सकता है। किसान मेड़ बाँधता है → वह पानी रोकना चाहता है (निकट)। किसान प्रधानमंत्री से मिलने जाएगा (छलांग) — अंश खामोश।
- संकेत: चुप होना, हँसकर फिर शांत होना, मुस्कान, मना करना।
- छलांग: नाम, तारीख, कानून, पूरे देश का दावा, जो पंक्ति में नहीं।
विकल्प «शायद लेखक यह सोचता है» तब लो जब अंश का अंत उसी ओर मुड़े। मनगढ़ंत मनोविज्ञान मत।
शब्द, सर्वनाम, भाषा
पर्याय / विलोम गद्यांश में
प्रश्न «रेखांकित का पर्याय» लिखे तो यहाँ के अर्थ का पर्याय। कमल का पर्याय पंकज — पर्याय-पृष्ठ की सूची; अगर गद्यांश में कमल आया ही नहीं तो वह विकल्प भूत है। विलोम विलोम पर जोड़ी है; संदर्भ टकराए तो संदर्भ जीते।
सर्वनाम किस पर लौटा
वह, वे, उसने, इसने, यही, उन्हें — एक वाक्य या दो वाक्य पहले की संज्ञा। बीच में नयी संज्ञा आ गई हो तो पास वाली लो, दूर वाली मत। लिंग-वचन मिलाओ: वे बहुवचन; उसने एकवचन।
भाषा-शैली (कभी पूछें)
वर्णनात्मक = दृश्य दिखा रहा। विचारात्मक = समझा रहा। व्यंग्य = हँसकर चुभो रहा। आत्मकथा = मैं। पत्र का अंश = संबोधन। शैली अंश से, पाठ के नाम से नहीं — अपठित का लेखक अक्सर गुमनाम है।
पद्यांश — अर्थ यहाँ, गहना वहाँ
दो पंक्तियाँ पहली बार मिलें तो पहले सरल भाषा में कहो: कवि ने क्या दिखाया। फिर प्रश्न देखो।
पेड़ धूप में खड़ा रहा चुपचाप,
छाया बाँटता राह चलते को।
अभ्यास की मूल पंक्ति — पुस्तक का पठित पाठ नहीं।
| प्रश्न | घर |
|---|---|
| कवि का आशय / सरलार्थ | यहीं — देने वाला स्वयं धूप सहे |
| अलंकार (मानवीकरण?) | अलंकार — पेड़ «बाँटता» मानव-काम |
| रस / मात्रा | रस / छंद |
पत्र ने «आशय» पूछा हो तो मानवीकरण का नाम मत लिखना। नाम पूछा हो तो आशय का निबंध मत लिखना।
उदाहरण — पूरा गद्यांश, फिर प्रश्न
नीचे का अंश परीक्षा-जैसा छोटा गद्यांश है। पहले स्वयं पढ़ो, फिर हल खोलो।
गाँव के बीच जो पुराना कुआँ था, वह केवल पानी का स्रोत नहीं था। सुबह औरतें घड़े रखकर बातें करतीं, बच्चे किनारे पाठ दोहराते, बूढ़े नीम की छाया में पंचायत जमाते। गर्मी में जल नीचे चला गया तो लोग नयी मोटर की माँग करने लगे। एक वृद्ध बोला, «मोटर पानी खींच लेगी, पर बैठक कहाँ होगी?» गाँव वाले हँसे, फिर चुप हुए। बाद में उन्होंने कुएँ की सफाई की, पेड़ बचाये, और मोटर को किनारे एक छोटे टैंक से जोड़ दिया — ताकि पानी भी रहे, छाया भी।
सबसे उपयुक्त शीर्षक?
- भारत का जल-संकट — अंश एक गाँव के कुएँ तक है
- कुआँ: पानी और मिलन-स्थल
- नीम की छाया — पेड़ आया, मालिक कुआँ है
- मोटर पर प्रतिबंध — लेखक ने मना नहीं किया, किनारे बैठाया
हल
- चौड़ा
A पूरे देश का दावा। अंश चुप।
- पतला / बाहर
C एक दृश्य। D लेखक की बात का बढ़ाना।
- समेट
पानी + बैठक + मोटर किनारे। B पूरा मोड़ पकड़ता है।
रेखांकित «बैठक» का यहाँ अर्थ?
- घर का वह कमरा जहाँ सोफ़ा हो — शब्दकोश का घर, इस पंक्ति का नहीं
- लोगों के इकट्ठा होकर बात करने की जगह / वह मिलना
- पंचायत भवन का सरकारी नाम
- मोटर का इंजन
हल
- पड़ोस
औरतें, बच्चे, बूढ़े कुएँ पर जमा होते थे। वृद्ध पूछता है: मोटर खींच ले तो वह जमाव कहाँ रहेगा।
- ठप्पा
मिलन का काम। कमरे का नक्शा नहीं।
अंश में क्या नहीं कहा गया?
- गर्मी में जल नीचे चला गया — लिखा है
- कुआँ सूखकर हमेशा के लिए बंद हो गया
- लोगों ने सफाई की और पेड़ बचाये — लिखा है
- मोटर टैंक से जोड़ी गई — लिखा है
हल
- उंगली
A, C, D पंक्ति में हैं। «हमेशा बंद» अंश ने कहा नहीं; अंत में पानी भी रहा।
लेखक का संकेत?
- पुरानी चीज़ हमेशा फेंक दो
- नयी सुविधा पुरानी जगह को मिटाए बिना भी आ सकती है
- पंचायत गैरकानूनी है
- बच्चे कुएँ पर पाठ न पढ़ें
हल
- अंत
मोटर आई, कुआँ-छाया बचे। विकास बनाम मिटाना नहीं, साथ बैठाना।
जाल — यहीं कटते हैं
1. बाहर का ज्ञान
तुम्हें पता हो राजस्थान में जल कम है। अंश ने वह वाक्य न लिखा हो तो शीर्षक «राजस्थान का सूखा» मत। अनुमान एक कदम, जीके की छलांग नहीं।
2. आंशिक सच को मुख्य
नीम आया इसलिए शीर्षक नीम — मालिक कुआँ था।
3. शब्दकोश बनाम संदर्भ
बैठक = कमरा, ठहराव = स्टेशन — पहले अर्थ से कटोगे।
4. «नहीं कहा» में सच चुनना
प्रश्न नकारात्मक है। जो लिखा है उसे उत्तर मत बना देना।
5. सर्वनाम दूर की संज्ञा
बीच में नयी संज्ञा आ गई तो पास वाली।
6. गहना / रस / मुहावरा
प्रश्न गहना माँगे — अलंकार। स्थायी भाव — रस। आँख का तारा — मुहावरा। आशय माँगे तो यहीं।
7. निबंध लिख बैठना
अपठित विकल्प चुनने का काम है, अपना लेख नहीं।
परीक्षा में पाँच कदम
- प्रश्न क्या? शीर्षक / भाव / रेखांकित / नहीं-कहा / सर्वनाम / आशय / पंक्ति-अर्थ।
- अंश पूरा पढ़ो — कौन, कहाँ, अंत का मोड़।
- उंगली: रेखांकित या सर्वनाम के पड़ोस पर।
- काटो: चौड़ा, पतला, बाहर, उल्टा।
- बाकी घर मत मिलाओ — रस, छंद, अलंकार, पर्याय-सूची, निबंध, अंग्रेज़ी।
प्रश्न 1–10
नीचे तीन छोटे गद्यांश हैं। प्रत्येक के नीचे उसके प्रश्न। अंश बदले तो उत्तर अंश के साथ बदलते हैं — याद की कुंजी नहीं, पढ़ने की।
गद्यांश क — पुस्तकालय
पुस्तकालय में सबसे कीमती चीज शोर नहीं, ठहराव है। जो बच्चा पहली बार कार्ड बनवाता है, वह समझता है कि किताबें उसकी हो गईं। लाइब्रेरियन मुस्काती है: «किताबें सबकी हैं; समय तुम्हारा है।» गर्मी में पंखे की आवाज़ भी लोगों को चुभती है, इसलिए खिड़कियाँ ऐसी रखी गईं कि हवा आए, शब्द न टूटें। एक युवक फोन पर बात करने लगा तो बूढ़ी पाठिका ने केवल किताब का पन्ना पलटा — आवाज़ खुद शर्म से बैठ गई। पुस्तकालय किसी को डाँटता नहीं, वह सिर्फ़ याद दिलाता है कि पढ़ना अकेले का काम है, पर कमरा सबका है।
गद्यांश क का सबसे उपयुक्त शीर्षक?
- देश की शिक्षा-नीति — अंश एक कमरे तक है
- साझा कमरा, अकेला पढ़ना
- पंखे की मरम्मत — पंखा चुभा, मालिक वह नहीं
- बच्चों को कार्ड मत दो
हल
- अंत का मोड़
पढ़ना अकेला, कमरा सबका। B दोनों हाथ पकड़ता है। A चौड़ा, C पतला।
रेखांकित «ठहराव» का यहाँ अर्थ?
- बस स्टेशन पर गाड़ी का रुकना
- शांति / स्थिर माहौल जिसमें शब्द न टूटें
- पुस्तकालय की छुट्टी
- कार्ड बनने में देर
हल
- पड़ोस
शोर नहीं, शब्द न टूटें, पन्ना पलटना। ठहराव = शांति। स्टेशन दूसरा घर है।
गद्यांश क में क्या नहीं कहा गया?
- युवक फोन पर बात करने लगा — लिखा है
- लाइब्रेरियन ने युवक को बाहर निकाल दिया
- बूढ़ी पाठिका ने पन्ना पलटा — लिखा है
- खिड़कियाँ हवा के लिए रखी गईं — लिखा है
हल
- डाँट नहीं
अंश कहता है पुस्तकालय डाँटता नहीं। बाहर निकालना घुसपैठ है।
«किताबें सबकी हैं» — «सबकी» किसकी ओर संकेत?
- केवल उस बच्चे की
- पुस्तकालय के सभी पाठकों / सबकी साझी
- लाइब्रेरियन की निजी अलमारी
- पंखे की
हल
- मुस्कान वाली पंक्ति
बच्चा «मेरी» समझता है; उत्तर «सबकी»। कमरा सबका — वही सूत्र।
गद्यांश ख — मेड़
आषाढ़ की पहली फुहार पर बच्चे नंग-धड़ंग नाचे, किसान आकाश ताकता रहा। उसकी मेड़ अभी कच्ची थी। पड़ोसी बोला, «इतनी मिट्टी क्यों?» किसान ने कहा, «पानी रोकने को। नाचना बाद में।» रात को खेत में पानी ठहरा, मेड़ नहीं टूटी। सुबह बच्चे फिर नाचे — इस बार मेड़ पर खड़े होकर, ताकि कीचड़ में फसल न दबे।
गद्यांश ख का शीर्षक?
- भारत में मानसून — भूगोल बाहर का
- मेड़ पहले, उत्सव बाद
- बच्चों का खेल — आंशिक
- पड़ोसी मूर्ख है — अंश ने नहीं कहा
हल
- मोड़
पहले पानी रोको, नाच पीछे; सुबह नाच भी मेड़ बचाता है। B।
किसान मिट्टी क्यों लगा रहा था?
- घर की दीवार बनाने
- पानी रोकने / मेड़ बाँधने
- बच्चों का नाच बंद कराने
- पड़ोसी को हराने
हल
- मुँह की बात
«पानी रोकने को।» अनुमान की छलांग नहीं, पंक्ति है।
सुबह बच्चे मेड़ पर क्यों नाचे?
- किसान ने डाँटा था इसलिए
- कीचड़ में फसल न दबे
- पड़ोसी ने कहा था
- आकाश साफ़ था — अंश ने यह कारण नहीं दिया
हल
- ताकि
अंतिम वाक्य कारण लिखता है। वही लो।
गद्यांश ग — लिफाफा
डाकिए ने पीले लिफाफे को इतनी सावधानी से पकड़ा जैसे उसमें शीशा हो। गली के कुत्ते भौंके। अम्मा ने कहा, «बेटा शहर से है ना?» लिफाफे पर सिर्फ़ «सीमा — कुआँ वाली गली» लिखा था। तीन सीमाएँ निकलीं। डाकिए ने पूछा, «किसके भाई की लिखावट है?» सबसे छोटी सीमा मुस्कराई, क्योंकि लिफाफा मायके से नहीं, उसकी सहेली का था जो शहर में पढ़ती है। बाकी दो लौट गईं। डाकिया बोला, «अगली बार घर-नंबर लिखना, नाम गाँव में अकेले नहीं रहते।»
अधूरे पते से लेखक क्या दिखाता है?
- डाक व्यवस्था बंद होनी चाहिए
- एक नाम कई लोगों का हो सकता है; पता पूरा चाहिए
- कुत्ते खतरनाक हैं — दृश्य है, मालिक नहीं
- शहर से पत्र निषिद्ध हैं
हल
- अंतिम वाक्य
नाम अकेले नहीं रहते। तीन सीमाएँ। B मालिक बात।
सबसे छोटी सीमा मुस्कराई क्योंकि?
- पत्र उसके भाई का था — डाकिए का अनुमान गलत निकला
- पत्र उसकी सहेली का था
- वह डाकिए से नाराज़ थी
- कुत्ते चुप हो गए
हल
- क्योंकि
पंक्ति खुद कारण देती है। भाई वाली बात प्रश्न में थी, सच सहेली है।
गद्यांश ग में क्या नहीं कहा गया?
- तीन सीमाएँ निकलीं — लिखा है
- लिफाफे में नौकरी का प्रस्ताव था
- डाकिए ने घर-नंबर लिखने को कहा — लिखा है
- सहेली शहर में पढ़ती है — लिखा है
हल
- शीशा-सा पकड़ना
सावधानी का चित्र है, अंदर नौकरी नहीं लिखी। बाहर का अनुमान मत।
अभ्यास
ये दस अलग कोण हैं — ऊपर वाले दस की नकल नहीं। दो नये गद्यांश।
गद्यांश घ — स्टैंड
सुबह के स्टैंड पर चाय की केतली सबसे पहले जागती है। कंडक्टर टिकट की गड्डी गिनता है, चालक बगल का शीशा पोंछता है। एक बूढ़ा रोज़ उसी खंभे के नीचे बैठता है — यात्रा नहीं, लोगों को विदा कहने। उसके पोते शहर गए। बस जब छूटती है, वह हाथ तो उठाता है, पर किसी खिड़की की ओर नहीं। एक दिन कंडक्टर ने मुफ़्त में सीट दिखाई। बूढ़े ने मना कर दिया: «मैं उतरने वाला हूँ, चढ़ने वाला नहीं।» चायवाले ने धीरे से कहा, «कभी चढ़ भी लिया करो; शहर से लौटने वाली बस भी यहीं आती है।»
गद्यांश घ का शीर्षक?
- केतली की मरम्मत — पतला
- विदा का खंभा
- सड़क परिवहन निगम का बजट — बाहर
- पोते का परीक्षा-परिणाम — अंश चुप
हल
- मालिक
बूढ़ा यात्री नहीं, विदा कहता है। खंभा उसकी जगह है। B।
बूढ़ा बस में क्यों नहीं चढ़ा?
- टिकट महँगी थी — मुफ़्त सीट दिखाई गई
- वह विदा कहने आता है, यात्री नहीं
- चालक ने मना किया
- केतली उबल रही थी
हल
- मुख
«उतरने वाला हूँ, चढ़ने वाला नहीं।» शुरू में: यात्रा नहीं, विदा।
रेखांकित «उतरने वाला» का भाव?
- बस से नीचे कूदने वाला यात्री — चित्र उल्टा
- यहाँ ठहरने / विदा देने वाला; सफर शुरू करने वाला नहीं
- चाय पीकर जाने वाला
- कंडक्टर का सहायक
हल
- विरोध
चढ़ने वाला नहीं = सफर नहीं। उतरना यहाँ ठहरकर विदा देने वाला; सफ़र शुरू करने वाला नहीं। रूढ़ मुहावरा-थैला अलग। संदर्भ लो।
गद्यांश घ में क्या नहीं कहा गया?
- पोते शहर गए — लिखा है
- पोता रोज़ पत्र लिखता है
- कंडक्टर ने मुफ़्त सीट दिखाई — लिखा है
- बूढ़ा खंभे के नीचे बैठता है — लिखा है
हल
- चुप्पी
पत्र की कोई पंक्ति नहीं। बाहर का सच भी न घुसेड़ो।
चायवाले के कहने का आशय?
- केतली मुफ़्त है
- लौटने की बस भी यहीं आती है — इंतज़ार के पार मिलन संभव है
- बूढ़े को गाँव छोड़ देना चाहिए
- यह वाक्य अलंकार रूपक है — प्रश्न आशय का है, गहना अलग
हल
- लौटने वाली बस
आशा का संकेत, डाँट नहीं। D घर बदल देता है।
गद्यांश ङ — नीम
स्कूल के पिछवाड़े नीम पर नाम खुदे थे। नयी अध्यापिका ने पेड़ नहीं कटवाया, तख्ती लगाई: «यहाँ नाम नहीं, छाया लिखो।» बच्चों ने पहले हँसी, फिर गर्मी में उसी छाया में बैठकर पाठ दोहराया। एक लड़के ने अपना पुराना नाम घिस दिया। अध्यापिका ने कुछ नहीं कहा। साल के अंत में पेड़ पर केवल एक पंक्ति थी: «हम आते हैं, पेड़ रहता है।»
गद्यांश ङ का शीर्षक?
- वन-विभाग का बजट — बाहर
- हम आते हैं, पेड़ रहता है
- नाम घिसने की सज़ा — अध्यापिका चुप रही
- नीम = पंकज — पर्याय-सूची यहाँ मालिक नहीं
हल
- अंतिम पंक्ति
अंश खुद शीर्षक दे देता है जब वह पूरे साल का निष्कर्ष हो। D पर्याय का घर।
अध्यापिका ने पेड़ क्यों नहीं कटवाया?
- कुल्हाड़ी नहीं थी — अंश चुप
- पेड़ छाया देता है; नाम मिट सकते हैं, पेड़ रहना चाहिए
- बच्चों से डरती थी
- यह शृंगार रस है — गद्य पर जबरन रस मत; रस काव्य का
हल
- तख्ती + गर्मी
छाया लिखो; बाद में उसी छाया में पाठ। कटाना मिटाना होता, अध्यापिका रखना चाहती है।
«छाया लिखो» का आशय?
- पेड़ पर स्याही से चित्र बनाओ
- नाम खोदने की जगह पेड़ को रहने दो — छाया ही उसकी पहचान है, घमंड की नक्काशी नहीं
- पाठ्यपुस्तक में निबंध लिखो
- मनहुँ छाया है — उत्प्रेक्षा तभी जब प्रश्न गहना माँगे
हल
- विरोध
नाम नहीं, छाया। खोदना बनाम रहना। C निबंध यहाँ नहीं। D अलंकार।
«हम आते हैं, पेड़ रहता है» में «हम»?
- अध्यापिका अकेली
- विद्यालय के बच्चे / आने-जाने वाले विद्यार्थी
- वन-विभाग
- नीम के पत्ते
हल
- पास
नाम घिसने वाले बच्चे, साल भर स्कूल आने वाले। अध्यापिका एकवचन «मैं» होती।
अपठित गद्यांश और निबंध में पक्का फर्क?
- दोनों में तुम स्वयं पूरा लेख लिखते हो
- अपठित दिए अंश से बोध-विकल्प; निबंध स्वयं रचना — यह पृष्ठ निबंध नहीं
- अपठित हमेशा दोहा 13+11 होता है
- अंग्रेज़ी का अपठित यहीं हल होगा — वह अगला विषय है, यह हिंदी का अंश है
हल
- माँग
यहाँ पढ़कर चुनना है। छंद पिछला पृष्ठ। अंग्रेज़ी तब, जब तुम बोलो।
