इस विषय में क्या आता है
परीक्षा पूछती है — हरि के अर्थ में कमल है क्या, यह बोझ गुरु है में गुरु शिक्षक है क्या, नीड़ जल है या घोंसला, दिन–दीन पर्याय हैं क्या, कल खराब हो गई में कल कौन, अभ्र और अंबर एक शब्द हैं क्या। दो परतें हैं: एक शब्द कई मतलब, और दो शब्द सुनने में पास।
यहाँ पढ़ना है
अनेकार्थक बनाम श्रुतिसम बनाम पर्याय। हरि, गुरु, कर, कनक, अंबर, कल। बड़ी अनेकार्थक सूची। युग्म: नीर–नीड़, कुल–कूल, कृपण–कृपाण। वाक्य से अर्थ। वर्तनी की कुंजी (र/ड़, इ/ई)।
यहाँ नहीं घुसाना
सुख–आनंद एक अर्थ — पर्याय। सुख–दुःख उल्टा — विलोम। अग्नि–आग का तत्सम ठप्पा — तत्सम–तद्भव। प्रहार–आहार–संहार — उपसर्ग की प्रयोगशाला, युग्म नहीं। काल के ता/रहा/चुका — काल।
एक पंक्ति: अनेकार्थक = एक वर्तनी, कई अर्थ। श्रुतिसम = दो वर्तनियाँ, आवाज़ पास, अर्थ अलग। पर्याय = कई शब्द, एक अर्थ।
तीन घर — एक नज़र में
| नाम | रूप | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| पर्यायवाची | कई शब्द | एक / निकट | अग्नि, आग, पावक |
| अनेकार्थक | एक शब्द | कई | हरि = विष्णु / सिंह / सूर्य |
| श्रुतिसम भिन्नार्थक | दो शब्द (वर्तनी अलग) | अलग-अलग | नीर = जल · नीड़ = घोंसला |
इसी को पुस्तकें अनेकार्थी, युग्म शब्द, समोच्चारित भिन्नार्थक भी कहती हैं। नाम बदले, कसौटी वही: एक रूप या दो रूप?
अनेकार्थक क्या है
जो शब्द लिखने-पढ़ने में एक हो, पर वाक्य बदलते ही मतलब बदल जाए, वह अनेकार्थक है। शब्दकोष में उसके नीचे कई अर्थ लिखे होते हैं। अर्थ वाक्य बताता है, रटी हुई पहली पंक्ति नहीं।
पर्याय में कई नाम एक चीज़ के होते हैं। अनेकार्थक में एक नाम कई चीज़ों का हो जाता है। सोम चंद्र भी, अमृत भी — पर्याय-पृष्ठ ने वादा किया था; अर्थ समूह से चुनो: शशि के साथ चंद्र, सुधा के साथ अमृत।
तीन पक्के — हरि, गुरु, कर
हरि
| अर्थ | वाक्य |
|---|---|
| विष्णु | भक्त हरि का सुमिरन करता है। |
| सिंह | हरि वन में दहाड़ता है। |
| सूर्य | हरि उदय हो रहा है। |
| बंदर / घोड़ा / इंद्र | पुराण–काव्य में ये अर्थ भी मिलते हैं। |
कमल हरि का अर्थ नहीं। कमल के पर्याय पंकज–नीरज हैं — पर्याय। सिंह का पर्याय मृगराज है; जब शब्द हरि हो तो अनेकार्थक वाला सिंह।
गुरु
| अर्थ | वाक्य | मत मिलाओ |
|---|---|---|
| शिक्षक / आचार्य | गुरु ने मंत्र दिया। | पर्याय: अध्यापक — शिक्षक-अर्थ में |
| भारी | यह बोझ गुरु है। | विलोम: लघु — विलोम |
| बृहस्पति (ग्रह / देव) | गुरुवार गुरु के नाम। | शिष्य सापेक्ष है, विलोम नहीं |
| बड़े / पूज्य | माता-पिता गुरु हैं। | — |
कर
- हाथ — कर जोड़कर प्रणाम किया। (पर्याय: हस्त, पाणि)
- कर / टैक्स — आयकर जमा करो।
- किरण — रवि के कर गर्म हैं।
- हाथी की सूंड — गज ने कर उठाया।
पक्के अनेकार्थक — अर्थ + छोटा वाक्य
| शब्द | अर्थ (२–४) |
|---|---|
| अंबर | आकाश · वस्त्र — पक्षी अंबर में उड़ा / साफ़ा सूती अंबर का |
| कनक | सोना · धतूरा — कनक की थाली / कनक का फूल जहरीला |
| कल | बीता या आने वाला दिन · यंत्र — कल आऊँगा / कल खराब हो गई |
| काम | कार्य · कामदेव · इच्छा — काम पूरा करो / काम के बाण |
| काल | समय · मृत्यु / यम — समय का काल · काल आ पहुँचा (मृत्यु)। ता/रहा रूप काल-पृष्ठ पर |
| अर्थ | मतलब · धन — शब्द का अर्थ · अर्थ की कामना |
| पत्र | पत्ता · चिट्ठी · अखबार का पन्ना — आम का पत्र / पत्र लिखा |
| हार | पराजय · माला — युद्ध में हार / फूलों का हार |
| वर | दूल्हा · श्रेष्ठ · वरदान — वर-वधु · वर फल · वर माँगो |
| घन | बादल · ठोस (गणित) · लोहार का हथौड़ा — घन गरजा / लोहे का घन |
| ताल | तालाब · संगीत की लय · ताड़ — ताल में कमल / तबले की ताल |
| पक्ष | तरफ़ · पंख · शुक्ल/कृष्ण पक्ष — मेरे पक्ष में / पक्ष फड़फड़ाए |
| नाग | साँप · हाथी — नाग फन काढ़े / नाग की सवारी (ऐरावत-घर अलग; काव्य में हाथी) |
| जलज | कमल · मोती / सीप — जल में जन्मा। समूह पर्याय-पृष्ठ पर कमल वाला |
| फल | खाने का फल · परिणाम — आम का फल / परिश्रम का फल |
| मति | बुद्धि · राय — कुमति · मेरी मति यह है |
| मधु | शहद · मदिरा · वसंत — मधुमक्खी / मधुमास |
| रस | काव्य-रस · तरल / स्वाद · प्रेम — शृंगार रस / गन्ने का रस |
| जल | पानी · चमकना (क्रिया) — कुएँ का जल / सोना जल उठा |
| विधि | ब्रह्मा · नियम / कानून · तरीका — विधि का विधान / विधि-विधान |
| नग | पर्वत · रत्न — नगपति हिमालय / नग जड़ा मुकुट |
| तीर | बाण · किनारा — तीर चलाया / गंगा-तीर |
| मूल | जड़ · पूँजी · आरंभ — पेड़ का मूल / मूलधन |
| बल | शक्ति · सेना — शारीरिक बल / चतुरंगिणी बल |
| आम | फल · साधारण — आम मीठा / आम आदमी |
| उत्तर | जवाब · दिशा · बाद में — प्रश्न का उत्तर / उत्तर दिशा / इसके उत्तर |
| अक्षर | वर्ण · अविनाशी — स्वर व्यंजन अक्षर / ब्रह्म अक्षर है |
| बाल | केश · बच्चा · कच्चा — बाल पक गए / बालक / बाल-बुद्धि |
| सोना | स्वर्ण · निद्रा लेना — सोना महँगा / बच्चा सोना चाहता है |
| राग | संगीत राग · आसक्ति / प्रेम — भैरवी राग / राग-द्वेष। विराग विलोम आसक्ति का |
| शक्ति | बल · देवी · विद्युत — शारीरिक शक्ति / शक्ति की पूजा |
| मान | सम्मान · माप · अभिमान — मान-सम्मान / मीटर मान / मान करना |
| लक्ष्य | निशाना · उद्देश्य — बाण का लक्ष्य / जीवन का लक्ष्य |
| गो | गाय · पृथ्वी · वाणी — गोशाला / गो (भूमि, काव्य) |
| अर्क | सूर्य · मदार · काढ़ा / सार — अर्क तपता / अर्क निकालना |
| अज | बकरा · ब्रह्मा — अज चर रहा / अज (अजन्मा ब्रह्मा) |
| पय | दूध · जल — पयपान / पयोधि में पय = जल वाला समुद्र |
| सार | निचोड़ · सारांश · शक्ति — दूध का सार / पाठ का सार |
| लोक | संसार · लोग — त्रिलोक / लोक कहते हैं |
| अंग | शरीर-भाग · हिस्सा — हाथ अंग है / राज्य का अंग |
| कर्म | कार्य · भाग्य-फल · कारक-पद — अच्छा कर्म / कर्म का फल / कर्म कारक कारक पर |
| संधि | व्याकरण जोड़ · समझौता — स्वर संधि संधि · देशों की संधि |
| हर | प्रत्येक · शिव — हर व्यक्ति / हर-हर महादेव |
| सर | तालाब · सिर · श्रेष्ठ — कमल का सर / सर नवाया |
श्रुतिसम भिन्नार्थक क्या है
दो अलग शब्द, कान को लगभग एक जैसे, वर्तनी और अर्थ अलग। इसे युग्म भी कहते हैं। अनेकार्थक एक टिकट है; श्रुतिसम दो टिकट हैं।
| अनेकार्थक | श्रुतिसम | |
|---|---|---|
| कितने शब्द | एक | दो |
| वर्तनी | एक | थोड़ी अलग (र/ड़, इ/ई, न/ण, ह्र/ह) |
| उदाहरण | हरि, गुरु, कनक | नीर–नीड़, दिन–दीन, कुल–कूल |
कुंजी: शब्दकोश में एक प्रविष्टि = अनेकार्थक। दो प्रविष्टियाँ पास-पास = युग्म। वाक्य में वर्तनी देखो: नीर पानी, नीड़ घोंसला — ड़ ने घर बदल दिया।
युग्म जोड़े — रटो, वर्तनी पकड़ो
| जोड़ा | अर्थ |
|---|---|
| नीर – नीड़ | जल · घोंसला |
| दिन – दीन | दिवस · गरीब / दयनीय |
| कुल – कूल | वंश / परिवार · किनारा / तट |
| आदि – आदी | आरंभ / इत्यादि · अभ्यस्त |
| अन्न – अन्य | अनाज · दूसरा |
| ओर – और | दिशा / तरफ़ · तथा |
| अस्त्र – शास्त्र | हथियार · ग्रंथ / विद्या |
| कृति – कृती | रचना · कुशल व्यक्ति |
| क्षति – क्षिति | हानि · पृथ्वी |
| चिर – चीर | बहुत काल · वस्त्र |
| तरु – तरुणी | वृक्ष · युवा स्त्री (तरणि = सूर्य/नाव — तीसरा शब्द, नीचे जाल) |
| नव – नाव | नया · डोंगी |
| निर्मल – निर्मूल | स्वच्छ · जड़ से उखाड़ा |
| पवन – पावन | हवा · पवित्र |
| जल – जाल | पानी · फंदा / जाली |
| धन – धान | दौलत · चावल का पौधा |
| वार – वारि | दिन / प्रहार · जल |
| सार – शर | निचोड़ · बाण |
| सुर – स्वर | देवता · ध्वनि / अक्षर-स्वर |
| द्वीप – द्विप | टापू · हाथी |
| बलि – बली | बलिदान · शक्तिशाली |
| मत – मत्त | राय · नशे में / मस्त |
| आसन – आसन्न | बैठक · निकट (आसन्न मृत्यु) |
| आहत – आहूत | घायल · बुलाया गया |
| कृपण – कृपाण | कंजूस · तलवार |
| अभ्र – अंबर | बादल · आकाश (वस्त्र भी अंबर — अनेकार्थक वाला घर) |
| शरण – श्रवण | बचाव / आश्रय · सुनना |
| हंस – ह्रास | पक्षी · कमी / घटना |
| हास – हंस | हँसी · पक्षी — तीनों पास: हास, हंस, ह्रास |
| वर्ष – वृष | साल · बैल / वृष राशि |
| सरल – सरस | सीधा / आसान · रसभरा |
| सकल – शकल | समस्त · टुकड़ा |
अंबर युग्म में अभ्र के सामने आकाश है; कपड़े वाला अर्थ उसी शब्द का दूसरा घर है — यानी अंबर स्वयं अनेकार्थक भी है। प्रश्न «अभ्र का युग्म» हो तो अंबर = आकाश।
जाल — तीन गड़बड़ियाँ
1. पर्याय समझ बैठना
दिन–दीन पर्याय नहीं। पवन–पावन पर्याय नहीं (हवा ≠ पवित्र)। नीर जल का पर्याय है, नीड़ नहीं। अभ्र मेघ का पर्याय, अंबर आकाश का — पर्याय पर दोनों अलग समूह।
2. उपसर्ग-जोड़ी को युग्म मानना
आहार, प्रहार, संहार, विहार — एक धातु हार, उपसर्ग बदले। यह उपसर्ग की प्रयोगशाला है, श्रुतिसम युग्म नहीं। युग्म में जड़ें प्रायः अलग या एक मात्रा का फ़र्क होता है, पूरा उपसर्ग-सेट नहीं।
3. तरणि–तरु–तरुणी
तरु पेड़। तरुणी युवती। तरणि सूर्य या नाव (अनेकार्थक)। तीन पास-पास। प्रश्न देखो कितने शब्द माँगे।
नीर, नीड़, हरि — कौन अनेकार्थक, कौन युग्म?
हल
- हरि
एक वर्तनी, कई अर्थ → अनेकार्थक।
- नीर–नीड़
दो वर्तनियाँ, आवाज़ पास → श्रुतिसम युग्म। नीर अकेला जल का पर्याय भी है — प्रश्न युग्म हो तो जोड़ा दो।
वाक्य से अर्थ — परीक्षा का असली काम
अनेकार्थक पर रटी सूची तभी चलती है जब वाक्य पढ़ो।
| वाक्य | शब्द | यहाँ अर्थ |
|---|---|---|
| यह बोझ गुरु है। | गुरु | भारी — शिक्षक मत लिखना |
| गुरु ने आशीष दिया। | गुरु | शिक्षक |
| कल खराब हो गई। | कल | यंत्र |
| कल विद्यालय जाऊँगा। | कल | आने वाला दिन |
| कनक की हाँडी चढ़ाई। | कनक | सोना (जब तक «फूल/विष» न हो) |
| कनक के सेवन से मूर्च्छा। | कनक | धतूरा |
| उसने फूलों का हार पहना। | हार | माला — पराजय नहीं |
| पक्षी नीड़ की ओर उड़ा। | नीड़ | घोंसला — जल नहीं |
| नदी के कूल पर खड़ा। | कूल | किनारा — वंश नहीं |
चार कदम
- एक शब्द है या दो? एक → अनेकार्थक सोचो। दो पास आवाज़ → युग्म।
- वर्तनी का एक बिंदु — ड़, ई, ण, ्र, ष। वही अर्थ पलटता है।
- वाक्य का काम — बोझ / आशीष / यंत्र / माला।
- पर्याय–विलोम तो नहीं? पवन का पर्याय समीर है, पावन नहीं। गुरु-भारी का विलोम लघु है।
प्रश्न 1–10
अनेकार्थक शब्द किसे कहते हैं?
- कई शब्द, एक अर्थ
- एक शब्द, कई अर्थ
- दो शब्द, पास आवाज़, अलग अर्थ
- उल्टे अर्थ वाले
हल
- एक रूप
A पर्याय। C श्रुतिसम। D विलोम।
«हरि» का अर्थ इनमें से कौन नहीं?
- विष्णु
- सिंह
- सूर्य
- कमल
हल
- कमल पंकज घर
हरि के पक्के अर्थ: विष्णु, सिंह, सूर्य, काव्य में घोड़ा/बंदर/इंद्र। कमल नहीं।
«यह बोझ गुरु है।» यहाँ गुरु?
- शिक्षक
- भारी
- बृहस्पति ग्रह
- शिष्य का विलोम
हल
- बोझ
भार वाला अर्थ। शिक्षक आशीष वाले वाक्य में। शिष्य सापेक्ष, विलोम लघु।
«नीड़» का अर्थ?
- जल — नीर जैसा
- घोंसला
- नदी का तट
- आकाश
हल
- ड़
नीर = जल। नीड़ = घोंसला। तट = कूल।
«दिन» और «दीन»?
- पर्याय — दोनों समय
- श्रुतिसम भिन्नार्थक — दिवस और गरीब
- विलोम
- एक ही अनेकार्थक शब्द
हल
- इ vs ई
दो वर्तनियाँ। दिवस ≠ दयनीय। पर्याय दिवस–वासर।
«घड़ी की कल टूट गई।» कल?
- बीता दिन
- आने वाला दिन
- यंत्र / पुर्जा
- मृत्यु — काल
हल
- घड़ी
मशीन वाला घर। काल मृत्यु अलग शब्द (आकार दीर्घ)।
«अभ्र» और «अंबर»?
- पर्याय — दोनों आकाश
- श्रुतिसम — बादल और आकाश
- विलोम
- एक अनेकार्थक शब्द की दो वर्तनी
हल
- भ्र vs बर
अभ्र = मेघ। अंबर = आकाश (और वस्त्र — अनेकार्थक)। पर्याय नहीं।
«अन्य» का युग्म-साथी और अर्थ?
- अन्न = दूसरा
- अन्न = अनाज; अन्य = दूसरा
- अनल = आग
- अंत = समाप्ति — पर्याय
हल
- अन्न–अन्य
अनाज vs दूसरा। अनल आग अलग युग्म नहीं, अनेकार्थक भी नहीं इस जोड़ी में।
सही जोड़?
- हरि श्रुतिसम युग्म है, नीर अनेकार्थक
- हरि अनेकार्थक है, नीर–नीड़ श्रुतिसम
- दोनों पर्याय-समूह
- दोनों विलोम
हल
- एक बनाम दो
हरि एक शब्द। नीर और नीड़ दो शब्द।
«कनक» अनेकार्थक है। दूसरे अर्थ वाला घर?
- केवल सोना — दूसरा अर्थ नहीं
- धतूरा (जहरीला पौधा) भी
- चाँदी — रजत
- कमल
हल
- सोना और धतूरा
वाक्य «विष / फूल / मूर्च्छा» हो तो धतूरा। रजत चाँदी अलग धातु।
अभ्यास
ये दस अलग कोण हैं — ऊपर वाले दस की नकल नहीं।
«आयकर चुकाना पड़ा।» कर?
- हाथ
- टैक्स
- किरण
- सूंड
हल
- आय+कर
शुल्क। हाथ «कर जोड़ो» में। किरण रवि के कर।
«वह जुआ खेलने का आदी है।» आदी?
- आदि = इत्यादि
- अभ्यस्त
- आरंभ
- अनादि का विलोम मात्र
हल
- ई
आदी = आदत वाला। आदि = शुरू / इत्यादि। युग्म आदि–आदी।
«नदी के कूल पर बैठे।» कूल?
- वंश
- किनारा
- कुलदीपक — पर्याय
- जल
हल
- ऊ
कूल = तट। कुल = परिवार। नीर जल है, कूल नहीं।
«गंगा पावन है।» पावन का युग्म-साथी?
- पवन = पवित्र भी — पर्याय
- पवन = हवा; पावन = पवित्र
- पानी
- पावक = आग का पर्याय, यही उत्तर
हल
- पवन–पावन
हवा ≠ पवित्र। पावक आग — पर्याय-पृष्ठ, युग्म नहीं।
«साफ़ा सूती अंबर का था।» अंबर?
- आकाश
- वस्त्र
- बादल — अभ्र
- कमल
हल
- कपड़ा
सूती + साफ़ा = वस्त्र वाला घर। पक्षी अंबर में = आकाश। अभ्र बादल अलग शब्द।
«शास्त्र» का अर्थ युग्म में?
- हथियार — अस्त्र जैसा
- ग्रंथ / विद्या
- बाण — शर
- संधि
हल
- अस्त्र–शास्त्र
श = ग्रंथ। अ = हथियार। शर बाण सार–शर जोड़ी में।
«दुर्गुण निर्मूल करना चाहिए।» निर्मूल?
- निर्मल = स्वच्छ, वही
- जड़ से उखाड़ना
- मूलधन
- पवित्र
हल
- मूल = जड़
निर्मूल = बिना जड़। निर्मल स्वच्छ — युग्म का दूसरा शब्द।
«द्विप» का अर्थ?
- टापू — द्वीप
- हाथी
- दो बार
- द्वीप का पर्याय
हल
- प vs प+ई
द्विप = हाथी (गज का तत्सम घर)। द्वीप = टापू। पर्याय नहीं।
«गले में मोतियों का हार है।» हार?
- पराजय
- माला
- थकावट
- विजय का पर्याय
हल
- गला + मोती
माला। पराजय युद्ध वाले वाक्य में। विजय पर्याय जय का — पर्याय।
«कृपण» और «कृपाण»?
- पर्याय — दोनों कंजूस
- श्रुतिसम — कंजूस और तलवार
- विलोम
- उपसर्ग-जोड़ी जैसे प्रहार–आहार
हल
- ण vs पूर्ण पाण
कृपण = कंजूस। कृपाण = खड्ग। आहार–प्रहार उपसर्ग-घर, युग्म नहीं।
