Noteclerical

अनेकार्थक और श्रुतिसम भिन्नार्थक

Lesson 6 of 113

इस विषय में क्या आता है

परीक्षा पूछती है — हरि के अर्थ में कमल है क्या, यह बोझ गुरु है में गुरु शिक्षक है क्या, नीड़ जल है या घोंसला, दिन–दीन पर्याय हैं क्या, कल खराब हो गई में कल कौन, अभ्र और अंबर एक शब्द हैं क्या। दो परतें हैं: एक शब्द कई मतलब, और दो शब्द सुनने में पास।

यहाँ पढ़ना है

अनेकार्थक बनाम श्रुतिसम बनाम पर्याय। हरि, गुरु, कर, कनक, अंबर, कल। बड़ी अनेकार्थक सूची। युग्म: नीर–नीड़, कुल–कूल, कृपण–कृपाण। वाक्य से अर्थ। वर्तनी की कुंजी (र/ड़, इ/ई)।

यहाँ नहीं घुसाना

सुख–आनंद एक अर्थ — पर्याय। सुख–दुःख उल्टा — विलोम। अग्नि–आग का तत्सम ठप्पा — तत्सम–तद्भव। प्रहार–आहार–संहार — उपसर्ग की प्रयोगशाला, युग्म नहीं। काल के ता/रहा/चुका — काल।

एक पंक्ति: अनेकार्थक = एक वर्तनी, कई अर्थ। श्रुतिसम = दो वर्तनियाँ, आवाज़ पास, अर्थ अलग। पर्याय = कई शब्द, एक अर्थ।

तीन घर — एक नज़र में

नामरूपअर्थउदाहरण
पर्यायवाचीकई शब्दएक / निकटअग्नि, आग, पावक
अनेकार्थकएक शब्दकईहरि = विष्णु / सिंह / सूर्य
श्रुतिसम भिन्नार्थकदो शब्द (वर्तनी अलग)अलग-अलगनीर = जल · नीड़ = घोंसला

इसी को पुस्तकें अनेकार्थी, युग्म शब्द, समोच्चारित भिन्नार्थक भी कहती हैं। नाम बदले, कसौटी वही: एक रूप या दो रूप?

अनेकार्थक क्या है

जो शब्द लिखने-पढ़ने में एक हो, पर वाक्य बदलते ही मतलब बदल जाए, वह अनेकार्थक है। शब्दकोष में उसके नीचे कई अर्थ लिखे होते हैं। अर्थ वाक्य बताता है, रटी हुई पहली पंक्ति नहीं।

पर्याय में कई नाम एक चीज़ के होते हैं। अनेकार्थक में एक नाम कई चीज़ों का हो जाता है। सोम चंद्र भी, अमृत भी — पर्याय-पृष्ठ ने वादा किया था; अर्थ समूह से चुनो: शशि के साथ चंद्र, सुधा के साथ अमृत।

तीन पक्के — हरि, गुरु, कर

हरि

अर्थवाक्य
विष्णुभक्त हरि का सुमिरन करता है।
सिंहहरि वन में दहाड़ता है।
सूर्यहरि उदय हो रहा है।
बंदर / घोड़ा / इंद्रपुराण–काव्य में ये अर्थ भी मिलते हैं।

कमल हरि का अर्थ नहीं। कमल के पर्याय पंकज–नीरज हैं — पर्याय। सिंह का पर्याय मृगराज है; जब शब्द हरि हो तो अनेकार्थक वाला सिंह।

गुरु

अर्थवाक्यमत मिलाओ
शिक्षक / आचार्यगुरु ने मंत्र दिया।पर्याय: अध्यापक — शिक्षक-अर्थ में
भारीयह बोझ गुरु है।विलोम: लघु — विलोम
बृहस्पति (ग्रह / देव)गुरुवार गुरु के नाम।शिष्य सापेक्ष है, विलोम नहीं
बड़े / पूज्यमाता-पिता गुरु हैं।—

कर

  • हाथ — कर जोड़कर प्रणाम किया। (पर्याय: हस्त, पाणि)
  • कर / टैक्स — आयकर जमा करो।
  • किरण — रवि के कर गर्म हैं।
  • हाथी की सूंड — गज ने कर उठाया।

पक्के अनेकार्थक — अर्थ + छोटा वाक्य

शब्दअर्थ (२–४)
अंबरआकाश · वस्त्र — पक्षी अंबर में उड़ा / साफ़ा सूती अंबर का
कनकसोना · धतूरा — कनक की थाली / कनक का फूल जहरीला
कलबीता या आने वाला दिन · यंत्र — कल आऊँगा / कल खराब हो गई
कामकार्य · कामदेव · इच्छा — काम पूरा करो / काम के बाण
कालसमय · मृत्यु / यम — समय का काल · काल आ पहुँचा (मृत्यु)। ता/रहा रूप काल-पृष्ठ पर
अर्थमतलब · धन — शब्द का अर्थ · अर्थ की कामना
पत्रपत्ता · चिट्ठी · अखबार का पन्ना — आम का पत्र / पत्र लिखा
हारपराजय · माला — युद्ध में हार / फूलों का हार
वरदूल्हा · श्रेष्ठ · वरदान — वर-वधु · वर फल · वर माँगो
घनबादल · ठोस (गणित) · लोहार का हथौड़ा — घन गरजा / लोहे का घन
तालतालाब · संगीत की लय · ताड़ — ताल में कमल / तबले की ताल
पक्षतरफ़ · पंख · शुक्ल/कृष्ण पक्ष — मेरे पक्ष में / पक्ष फड़फड़ाए
नागसाँप · हाथी — नाग फन काढ़े / नाग की सवारी (ऐरावत-घर अलग; काव्य में हाथी)
जलजकमल · मोती / सीप — जल में जन्मा। समूह पर्याय-पृष्ठ पर कमल वाला
फलखाने का फल · परिणाम — आम का फल / परिश्रम का फल
मतिबुद्धि · राय — कुमति · मेरी मति यह है
मधुशहद · मदिरा · वसंत — मधुमक्खी / मधुमास
रसकाव्य-रस · तरल / स्वाद · प्रेम — शृंगार रस / गन्ने का रस
जलपानी · चमकना (क्रिया) — कुएँ का जल / सोना जल उठा
विधिब्रह्मा · नियम / कानून · तरीका — विधि का विधान / विधि-विधान
नगपर्वत · रत्न — नगपति हिमालय / नग जड़ा मुकुट
तीरबाण · किनारा — तीर चलाया / गंगा-तीर
मूलजड़ · पूँजी · आरंभ — पेड़ का मूल / मूलधन
बलशक्ति · सेना — शारीरिक बल / चतुरंगिणी बल
आमफल · साधारण — आम मीठा / आम आदमी
उत्तरजवाब · दिशा · बाद में — प्रश्न का उत्तर / उत्तर दिशा / इसके उत्तर
अक्षरवर्ण · अविनाशी — स्वर व्यंजन अक्षर / ब्रह्म अक्षर है
बालकेश · बच्चा · कच्चा — बाल पक गए / बालक / बाल-बुद्धि
सोनास्वर्ण · निद्रा लेना — सोना महँगा / बच्चा सोना चाहता है
रागसंगीत राग · आसक्ति / प्रेम — भैरवी राग / राग-द्वेष। विराग विलोम आसक्ति का
शक्तिबल · देवी · विद्युत — शारीरिक शक्ति / शक्ति की पूजा
मानसम्मान · माप · अभिमान — मान-सम्मान / मीटर मान / मान करना
लक्ष्यनिशाना · उद्देश्य — बाण का लक्ष्य / जीवन का लक्ष्य
गोगाय · पृथ्वी · वाणी — गोशाला / गो (भूमि, काव्य)
अर्कसूर्य · मदार · काढ़ा / सार — अर्क तपता / अर्क निकालना
अजबकरा · ब्रह्मा — अज चर रहा / अज (अजन्मा ब्रह्मा)
पयदूध · जल — पयपान / पयोधि में पय = जल वाला समुद्र
सारनिचोड़ · सारांश · शक्ति — दूध का सार / पाठ का सार
लोकसंसार · लोग — त्रिलोक / लोक कहते हैं
अंगशरीर-भाग · हिस्सा — हाथ अंग है / राज्य का अंग
कर्मकार्य · भाग्य-फल · कारक-पद — अच्छा कर्म / कर्म का फल / कर्म कारक कारक पर
संधिव्याकरण जोड़ · समझौता — स्वर संधि संधि · देशों की संधि
हरप्रत्येक · शिव — हर व्यक्ति / हर-हर महादेव
सरतालाब · सिर · श्रेष्ठ — कमल का सर / सर नवाया
कल दो घर समय के भी। «कल गया» बीता दिन, «कल जाएगा» आने वाला। यंत्र वाला घर अलग: «घड़ी की कल»। तीन अर्थ, एक वर्तनी — अनेकार्थक। भूत/भविष्य की तालिका यहाँ मत खोलना।

श्रुतिसम भिन्नार्थक क्या है

दो अलग शब्द, कान को लगभग एक जैसे, वर्तनी और अर्थ अलग। इसे युग्म भी कहते हैं। अनेकार्थक एक टिकट है; श्रुतिसम दो टिकट हैं।

अनेकार्थकश्रुतिसम
कितने शब्दएकदो
वर्तनीएकथोड़ी अलग (र/ड़, इ/ई, न/ण, ह्र/ह)
उदाहरणहरि, गुरु, कनकनीर–नीड़, दिन–दीन, कुल–कूल

कुंजी: शब्दकोश में एक प्रविष्टि = अनेकार्थक। दो प्रविष्टियाँ पास-पास = युग्म। वाक्य में वर्तनी देखो: नीर पानी, नीड़ घोंसला — ड़ ने घर बदल दिया।

युग्म जोड़े — रटो, वर्तनी पकड़ो

जोड़ाअर्थ
नीर – नीड़जल · घोंसला
दिन – दीनदिवस · गरीब / दयनीय
कुल – कूलवंश / परिवार · किनारा / तट
आदि – आदीआरंभ / इत्यादि · अभ्यस्त
अन्न – अन्यअनाज · दूसरा
ओर – औरदिशा / तरफ़ · तथा
अस्त्र – शास्त्रहथियार · ग्रंथ / विद्या
कृति – कृतीरचना · कुशल व्यक्ति
क्षति – क्षितिहानि · पृथ्वी
चिर – चीरबहुत काल · वस्त्र
तरु – तरुणीवृक्ष · युवा स्त्री (तरणि = सूर्य/नाव — तीसरा शब्द, नीचे जाल)
नव – नावनया · डोंगी
निर्मल – निर्मूलस्वच्छ · जड़ से उखाड़ा
पवन – पावनहवा · पवित्र
जल – जालपानी · फंदा / जाली
धन – धानदौलत · चावल का पौधा
वार – वारिदिन / प्रहार · जल
सार – शरनिचोड़ · बाण
सुर – स्वरदेवता · ध्वनि / अक्षर-स्वर
द्वीप – द्विपटापू · हाथी
बलि – बलीबलिदान · शक्तिशाली
मत – मत्तराय · नशे में / मस्त
आसन – आसन्नबैठक · निकट (आसन्न मृत्यु)
आहत – आहूतघायल · बुलाया गया
कृपण – कृपाणकंजूस · तलवार
अभ्र – अंबरबादल · आकाश (वस्त्र भी अंबर — अनेकार्थक वाला घर)
शरण – श्रवणबचाव / आश्रय · सुनना
हंस – ह्रासपक्षी · कमी / घटना
हास – हंसहँसी · पक्षी — तीनों पास: हास, हंस, ह्रास
वर्ष – वृषसाल · बैल / वृष राशि
सरल – सरससीधा / आसान · रसभरा
सकल – शकलसमस्त · टुकड़ा

अंबर युग्म में अभ्र के सामने आकाश है; कपड़े वाला अर्थ उसी शब्द का दूसरा घर है — यानी अंबर स्वयं अनेकार्थक भी है। प्रश्न «अभ्र का युग्म» हो तो अंबर = आकाश।

जाल — तीन गड़बड़ियाँ

1. पर्याय समझ बैठना

दिन–दीन पर्याय नहीं। पवन–पावन पर्याय नहीं (हवा ≠ पवित्र)। नीर जल का पर्याय है, नीड़ नहीं। अभ्र मेघ का पर्याय, अंबर आकाश का — पर्याय पर दोनों अलग समूह।

2. उपसर्ग-जोड़ी को युग्म मानना

आहार, प्रहार, संहार, विहार — एक धातु हार, उपसर्ग बदले। यह उपसर्ग की प्रयोगशाला है, श्रुतिसम युग्म नहीं। युग्म में जड़ें प्रायः अलग या एक मात्रा का फ़र्क होता है, पूरा उपसर्ग-सेट नहीं।

3. तरणि–तरु–तरुणी

तरु पेड़। तरुणी युवती। तरणि सूर्य या नाव (अनेकार्थक)। तीन पास-पास। प्रश्न देखो कितने शब्द माँगे।

उदाहरण

नीर, नीड़, हरि — कौन अनेकार्थक, कौन युग्म?

हल

  1. हरि

    एक वर्तनी, कई अर्थ → अनेकार्थक।

  2. नीर–नीड़

    दो वर्तनियाँ, आवाज़ पास → श्रुतिसम युग्म। नीर अकेला जल का पर्याय भी है — प्रश्न युग्म हो तो जोड़ा दो।

उत्तरहरि अनेकार्थक; नीर–नीड़ युग्म

वाक्य से अर्थ — परीक्षा का असली काम

अनेकार्थक पर रटी सूची तभी चलती है जब वाक्य पढ़ो।

वाक्यशब्दयहाँ अर्थ
यह बोझ गुरु है।गुरुभारी — शिक्षक मत लिखना
गुरु ने आशीष दिया।गुरुशिक्षक
कल खराब हो गई।कलयंत्र
कल विद्यालय जाऊँगा।कलआने वाला दिन
कनक की हाँडी चढ़ाई।कनकसोना (जब तक «फूल/विष» न हो)
कनक के सेवन से मूर्च्छा।कनकधतूरा
उसने फूलों का हार पहना।हारमाला — पराजय नहीं
पक्षी नीड़ की ओर उड़ा।नीड़घोंसला — जल नहीं
नदी के कूल पर खड़ा।कूलकिनारा — वंश नहीं

चार कदम

  1. एक शब्द है या दो? एक → अनेकार्थक सोचो। दो पास आवाज़ → युग्म।
  2. वर्तनी का एक बिंदु — ड़, ई, ण, ्र, ष। वही अर्थ पलटता है।
  3. वाक्य का काम — बोझ / आशीष / यंत्र / माला।
  4. पर्याय–विलोम तो नहीं? पवन का पर्याय समीर है, पावन नहीं। गुरु-भारी का विलोम लघु है।
भूल-सूची। हरि = कमल। नीड़ = जल। दिन–दीन पर्याय। पवन–पावन पर्याय। अभ्र–अंबर एक शब्द। आहार–प्रहार युग्म। गुरु हमेशा शिक्षक। कल हमेशा समय। कनक हमेशा सोना।

प्रश्न 1–10

प्र. 1

अनेकार्थक शब्द किसे कहते हैं?

  1. कई शब्द, एक अर्थ
  2. एक शब्द, कई अर्थ
  3. दो शब्द, पास आवाज़, अलग अर्थ
  4. उल्टे अर्थ वाले

हल

  1. एक रूप

    A पर्याय। C श्रुतिसम। D विलोम।

उत्तरB
प्र. 2

«हरि» का अर्थ इनमें से कौन नहीं?

  1. विष्णु
  2. सिंह
  3. सूर्य
  4. कमल

हल

  1. कमल पंकज घर

    हरि के पक्के अर्थ: विष्णु, सिंह, सूर्य, काव्य में घोड़ा/बंदर/इंद्र। कमल नहीं।

उत्तरD
प्र. 3

«यह बोझ गुरु है।» यहाँ गुरु?

  1. शिक्षक
  2. भारी
  3. बृहस्पति ग्रह
  4. शिष्य का विलोम

हल

  1. बोझ

    भार वाला अर्थ। शिक्षक आशीष वाले वाक्य में। शिष्य सापेक्ष, विलोम लघु।

उत्तरB
प्र. 4

«नीड़» का अर्थ?

  1. जल — नीर जैसा
  2. घोंसला
  3. नदी का तट
  4. आकाश

हल

  1. ड़

    नीर = जल। नीड़ = घोंसला। तट = कूल।

उत्तरB
प्र. 5

«दिन» और «दीन»?

  1. पर्याय — दोनों समय
  2. श्रुतिसम भिन्नार्थक — दिवस और गरीब
  3. विलोम
  4. एक ही अनेकार्थक शब्द

हल

  1. इ vs ई

    दो वर्तनियाँ। दिवस ≠ दयनीय। पर्याय दिवस–वासर।

उत्तरB
प्र. 6

«घड़ी की कल टूट गई।» कल?

  1. बीता दिन
  2. आने वाला दिन
  3. यंत्र / पुर्जा
  4. मृत्यु — काल

हल

  1. घड़ी

    मशीन वाला घर। काल मृत्यु अलग शब्द (आकार दीर्घ)।

उत्तरC
प्र. 7

«अभ्र» और «अंबर»?

  1. पर्याय — दोनों आकाश
  2. श्रुतिसम — बादल और आकाश
  3. विलोम
  4. एक अनेकार्थक शब्द की दो वर्तनी

हल

  1. भ्र vs बर

    अभ्र = मेघ। अंबर = आकाश (और वस्त्र — अनेकार्थक)। पर्याय नहीं।

उत्तरB
प्र. 8

«अन्य» का युग्म-साथी और अर्थ?

  1. अन्न = दूसरा
  2. अन्न = अनाज; अन्य = दूसरा
  3. अनल = आग
  4. अंत = समाप्ति — पर्याय

हल

  1. अन्न–अन्य

    अनाज vs दूसरा। अनल आग अलग युग्म नहीं, अनेकार्थक भी नहीं इस जोड़ी में।

उत्तरB
प्र. 9

सही जोड़?

  1. हरि श्रुतिसम युग्म है, नीर अनेकार्थक
  2. हरि अनेकार्थक है, नीर–नीड़ श्रुतिसम
  3. दोनों पर्याय-समूह
  4. दोनों विलोम

हल

  1. एक बनाम दो

    हरि एक शब्द। नीर और नीड़ दो शब्द।

उत्तरB
प्र. 10

«कनक» अनेकार्थक है। दूसरे अर्थ वाला घर?

  1. केवल सोना — दूसरा अर्थ नहीं
  2. धतूरा (जहरीला पौधा) भी
  3. चाँदी — रजत
  4. कमल

हल

  1. सोना और धतूरा

    वाक्य «विष / फूल / मूर्च्छा» हो तो धतूरा। रजत चाँदी अलग धातु।

उत्तरB

अभ्यास

ये दस अलग कोण हैं — ऊपर वाले दस की नकल नहीं।

अ. 1

«आयकर चुकाना पड़ा।» कर?

  1. हाथ
  2. टैक्स
  3. किरण
  4. सूंड

हल

  1. आय+कर

    शुल्क। हाथ «कर जोड़ो» में। किरण रवि के कर।

उत्तरB
अ. 2

«वह जुआ खेलने का आदी है।» आदी?

  1. आदि = इत्यादि
  2. अभ्यस्त
  3. आरंभ
  4. अनादि का विलोम मात्र

हल

  1. ई

    आदी = आदत वाला। आदि = शुरू / इत्यादि। युग्म आदि–आदी।

उत्तरB
अ. 3

«नदी के कूल पर बैठे।» कूल?

  1. वंश
  2. किनारा
  3. कुलदीपक — पर्याय
  4. जल

हल

  1. ऊ

    कूल = तट। कुल = परिवार। नीर जल है, कूल नहीं।

उत्तरB
अ. 4

«गंगा पावन है।» पावन का युग्म-साथी?

  1. पवन = पवित्र भी — पर्याय
  2. पवन = हवा; पावन = पवित्र
  3. पानी
  4. पावक = आग का पर्याय, यही उत्तर

हल

  1. पवन–पावन

    हवा ≠ पवित्र। पावक आग — पर्याय-पृष्ठ, युग्म नहीं।

उत्तरB
अ. 5

«साफ़ा सूती अंबर का था।» अंबर?

  1. आकाश
  2. वस्त्र
  3. बादल — अभ्र
  4. कमल

हल

  1. कपड़ा

    सूती + साफ़ा = वस्त्र वाला घर। पक्षी अंबर में = आकाश। अभ्र बादल अलग शब्द।

उत्तरB
अ. 6

«शास्त्र» का अर्थ युग्म में?

  1. हथियार — अस्त्र जैसा
  2. ग्रंथ / विद्या
  3. बाण — शर
  4. संधि

हल

  1. अस्त्र–शास्त्र

    श = ग्रंथ। अ = हथियार। शर बाण सार–शर जोड़ी में।

उत्तरB
अ. 7

«दुर्गुण निर्मूल करना चाहिए।» निर्मूल?

  1. निर्मल = स्वच्छ, वही
  2. जड़ से उखाड़ना
  3. मूलधन
  4. पवित्र

हल

  1. मूल = जड़

    निर्मूल = बिना जड़। निर्मल स्वच्छ — युग्म का दूसरा शब्द।

उत्तरB
अ. 8

«द्विप» का अर्थ?

  1. टापू — द्वीप
  2. हाथी
  3. दो बार
  4. द्वीप का पर्याय

हल

  1. प vs प+ई

    द्विप = हाथी (गज का तत्सम घर)। द्वीप = टापू। पर्याय नहीं।

उत्तरB
अ. 9

«गले में मोतियों का हार है।» हार?

  1. पराजय
  2. माला
  3. थकावट
  4. विजय का पर्याय

हल

  1. गला + मोती

    माला। पराजय युद्ध वाले वाक्य में। विजय पर्याय जय का — पर्याय।

उत्तरB
अ. 10

«कृपण» और «कृपाण»?

  1. पर्याय — दोनों कंजूस
  2. श्रुतिसम — कंजूस और तलवार
  3. विलोम
  4. उपसर्ग-जोड़ी जैसे प्रहार–आहार

हल

  1. ण vs पूर्ण पाण

    कृपण = कंजूस। कृपाण = खड्ग। आहार–प्रहार उपसर्ग-घर, युग्म नहीं।

उत्तरB

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