अंग 3 · रूप विचार
पाठ 3.12
विषय शुरू · धातु रूप
धातु वाले विषय में जड़ खुली — लिख्, जा, कर। पुरुष वाले विषय में हूँ-हो-है-हैं। सरल वाले विषय में तीन कुर्सियाँ; पूर्ण वाले विषय में तहें। द्विकर्मक वाले विषय में दो कर्म थमे। आज वह पंक्ति: धातु रूप = जड़ पुरुष-वचन-काल-लिंग से मुड़े। कार्ड के 4: लिखता हूँ, लिखते हो, लिखती है, लिखूँगा। नया विकार नहीं। बारह कोठरी रटना नहीं। वाक्य क्रम आगे। आज कपड़ा चुनो, जड़ मत बदलो।
1. पंक्ति क्या है
परिभाषा सीधी रखो: धातु रूप = जड़ पुरुष-वचन-काल-लिंग से मुड़े। वह क्रिया-कपड़ा है जो जड़ पर पुरुष, वचन, काल और लिंग चढ़ाकर बनता है। जड़ धातु वाले विषय में; आज घूमना।
मैं लिखता हूँ। तुम लिखते हो। वह लिखती है। — एक लिख्, तीन कपड़े।
लिखना, लिखकर — कृदंत वाले विषय में पूँछ; आज पंक्ति नहीं।
चार सवाल: कौन बोल रहा, एक या अनेक, कब, लड़का या लड़की? एक रूप। जड़ नई मत गढ़ो।
जाँच: जड़ पहले। पंक्ति आज। लिखा/ना/कर? कृदंत पहले। सौ खाने? नहीं।
2. 4 कार्ड एक नज़र में
एक लिखता हूँ रटकर लिखूँगा गायब मत करो। चार कपड़े, एक लिख्।
| कार्ड | काट | झलक |
|---|---|---|
| लिखता हूँ | उत्तम — बोलने वाला | मैं; वर्तमान |
| लिखते हो | मध्यम — सुनने वाला | तुम; वर्तमान |
| लिखती है | अन्य + लिंग — बाकी | वह स्त्री; वर्तमान |
| लिखूँगा | उत्तम भविष्य — बोलने वाला, आगे | मैं; आगे |
गया, किया, लिखो, हैं — जेब, छोटे नहीं। पूरी धातु-सेना रटना नहीं।
जाँच: मैं? हूँ। तुम? हो। वह स्त्री? ती/है। मैं आगे? ऊँगा।
3. जड़ से नाता — लिख् एक
धातु वाले विषय में लिख् हलंत जड़। लिखना सूची का नाम है — कृदंत वाले विषय में। आज लिख् पर ता/ते/ती + हूँ/हो/है।
| कर्ता | वर्तमान — छोटी तालिका |
|---|---|
| मैं | लिखता हूँ / लिखती हूँ |
| तुम | लिखते हो |
| वह | लिखता है / लिखती है |
| हम / वे / आप | लिखते हैं / लिखती हैं |
ये पंक्तियाँ चाबी हैं, पूरी सेना नहीं। नौ×तीन खाने मत भरो। आप मध्यम, हैं पट्टी — आप-तुम वाले विषय में सीढ़ी; पुरुष वाले विषय में मेल।
जाँच: लिख्? जड़ पहले। ता+हूँ? आज। लिखना? कृदंत पहले।
4. लिखता हूँ — उत्तम, बोलने वाला
कार्ड का पहला। बोलने वाला। मैं। हूँ पुरुष वाले विषय में उत्तम चिह्न। लिखता पुल्लिंग; लिखती हूँ स्त्री — लिंग वाले विषय में पट्टी, जड़ वही।
मैं पत्र लिखता हूँ। मैं चिट्ठी लिखती हूँ।
हम लिखते हैं। — उत्तम अनेक; हैं पट्टी।
हूँ अकेला होना भी — मैं हूँ, सरल वाले विषय में पट्टी। लिखता हूँ दो टुकड़े: मुख्य+सहायक, क्रिया भेद वाले विषय में। आज मेल: मैं → हूँ।
जाँच: मैं? हूँ। हम? हैं। लिखती हूँ? स्त्री उत्तम, जड़ लिख्।
5. लिखते हो — मध्यम, सुनने वाला
कार्ड का दूसरा। सुनने वाला। तुम → हो। तू → है/लिखता है; आप → हैं। तीन मध्यम, आप-तुम वाले विषय में; आज तुम कार्ड।
तुम क्या लिखते हो?
तू लिख। तुम लिखो। आप लिखिए। — आज्ञा जेब, काल की चौथी कुर्सी नहीं; सरल वाले विषय में दीवार थी।
लिखते वचन/आदर भी — तुम एक पर भी ते+हो। वचन वाले विषय में गिनती; आज मध्यम कपड़ा।
जाँच: तुम? हो। आप? हैं, मध्यम। लिखो? आज्ञा जेब, काल नहीं।
6. लिखती है — अन्य और लिंग, बाकी
कार्ड का तीसरा। वह, राम, लड़की — बाकी। संज्ञा कर्ता पर क्रिया अन्य पंक्ति — पुरुष वाले विषय में। लिखता/लिखती लिंग; है/हैं वचन।
लड़का लिखता है। लड़की लिखती है। लड़के लिखते हैं।
गाँधी लिखते हैं। — आदर; चंद्रबिंदु; हैं।
ने भूत सकर्मक पर — उसने पत्र लिखा; मेल कर्म से, विभक्ति वाले विषय में। वर्तमान लिखती है बिना ने। ने काल नहीं।
जाँच: वह स्त्री? ती+है। आदर? ते+हैं। ने? चिह्न पहले, पंक्ति नहीं।
7. लिखूँगा — भविष्य पुरुष से
कार्ड का चौथा। सरल वाले विषय में जाएगा कुर्सी थी; जाऊँगा छोटी झलक थी। आज उत्तम भविष्य: मैं लिखूँगा / लिखूँगी। तुम लिखोगे। वह लिखेगा / लिखेगी।
मैं कल लिखूँगा। लड़की लिखेगी। हम लिखेंगे।
कुर्सी भविष्य पहले; आज पंक्ति पुरुष-लिंग से मुड़े। बारह कोठरी — जा रहा हूँ×पुरुष — पूर्ण वाले विषय में तह, आज मत भरो।
जाँच: लिखूँगा? मैं आगे। लिखेगा? वह आगे। जाएगा कुर्सी? पहले। रहा खाने? नहीं।
8. टेढ़े — गया, किया
जा, कर धातु वाले विषय में जड़; गया, किया कपड़ा टेढ़ा, नई जड़ नहीं। आज नाम भर, सेना नहीं।
मैं गया। तुम गए। वह गई। — जा भूत; मेल वचन-लिंग।
उसने काम किया। — कर भूत टेढ़ा; ने चिह्न।
था होना का भूत — राम था; गया जा का भूत। दो जड़, सरल वाले विषय में। लिखा लिख् पर सीधा-सा भूत; गया याद का रूप।
जाँच: गया नई धातु? नहीं। किया? कर। था? हो। लिखा? लिख्।
9. जो पंक्ति नहीं
| रूप | कुर्सी |
|---|---|
| लिखा, लिखना, लिखकर | कृदंत — पहले |
| खा लिया | संयुक्त — पहले |
| लिखवाना | प्रेरणार्थक — पहले |
| उसने मुझे किताब दी | द्विकर्मक — पहले |
| लिखा गया | वाच्य आगे |
| जा रहा है, गया है | तह — पूर्ण वाले विषय में |
लिखवाता हूँ — रूप पहले, पंक्ति वही चार सवाल; वाना मत खोलो। देता हूँ गिनती पहले। लकार = संस्कृत के काल-नाम; आज मत खोलो।
जाँच: ना/कर पूँछ? कृदंत। लिया? जोड़। गया वाच्य? आगे। ता+हूँ? आज।
10. दीवारें — वाच्य, क्रम, बारह खाने
| बात | आज नहीं |
|---|---|
| पत्र लिखा गया | वाच्य आगे |
| कर्ता-कर्म-क्रिया ढाँचा | वाक्य क्रम आगे |
| हर पद का नाम | पद परिचय आगे |
| 3 तह × 3 पुरुष × 2 वचन | रटना नहीं; चार सवाल |
आठ विकार पूरे पहले से। आज क्रिया के खेमे में पंक्ति। कुर्सियाँ सरल वाले विषय में दोहराओ मत।
जाँच: कपड़ा चुनो? आज। वाच्य? आगे। सौ पंक्ति? नहीं।
11. वाक्य में 4 कार्ड + जेब
अरे! मैं लिखता हूँ; तुम लिखते हो, लड़की लिखती है — कल लिखूँगा; गाँधी गए।
- अरे — विस्मयादिबोधक, अटल
- लिखता हूँ — उत्तम
- लिखते हो — मध्यम
- लिखती है — अन्य, लिंग
- लिखूँगा — भविष्य उत्तम
- गए — जा टेढ़ा जेब; चंद्रबिंदु गाँधी, आदर
चार कार्ड बैठे; जेब साथ। लिखो आज्ञा इस वाक्य में नहीं — नाम मत ठोको जहाँ रूप नहीं।
12. शब्द तोड़कर पूरा
लिखता हूँ
उत्तम वर्तमान — बोलने वाला। लिखती हूँ स्त्री।
लिखते हो
मध्यम — सुनने वाला। आप हैं। लिखो आज्ञा जेब।
लिखती है
अन्य + लिंग — बाकी। गाँधी लिखते हैं आदर।
लिखूँगा
उत्तम भविष्य। कुर्सी पहले; पंक्ति आज।
जेब
गया, किया टेढ़े। हैं हम/वे/आप।
दीवार
कृदंत, जोड़, वाना, वाच्य, बारह खाने।
लिखता हूँ, लिखते हो, लिखती है, लिखूँगा — चार कार्ड; जड़ लिख्।
13. आम गलतियाँ
- गया को नई धातु। जड़ जा, कपड़ा टेढ़ा।
- लिखना और लिखता हूँ एक। कृदंत बनाम पंक्ति।
- मैं लिखता है। मैं → हूँ।
- तुम लिखता हूँ। तुम → हो।
- लड़की लिखता है। लिंग ती।
- आज्ञा को चौथा काल। जाओ जेब; कुर्सी तीन पहले।
- ने को पंक्ति। चिह्न विभक्ति; लिखती है बिना ने।
- बारह कोठरी रटना। चार सवाल काफी।
- खा लिया को ता-पंक्ति। जोड़ पहले।
- लिखा गया आज खोलना। वाच्य आगे।
- नया विकार गिनना। क्रिया पहले से।
- जड़ हर पंक्ति पर बदलना। कपड़ा बदले, लिख् रहे।
जाँच: (1) जड़ एक, कपड़ा मुड़े। (2) कार्ड: लिखता हूँ, लिखते हो, लिखती है, लिखूँगा। (3) गया टेढ़ा जेब। (4) कृदंत/वाच्य दीवार। (5) बारह खाने नहीं।
14. इस विषय का सार
- धातु रूप = जड़ पुरुष-वचन-काल-लिंग से मुड़े। नया विकार नहीं।
- कार्ड: लिखता हूँ उत्तम (बोलने वाला), लिखते हो मध्यम (सुनने वाला), लिखती है अन्य+लिंग (बाकी), लिखूँगा भविष्य।
- चार सवाल: कौन, एक/अनेक, कब, लिंग। तालिका चाबी; सेना नहीं।
- गया-किया टेढ़े, जड़ जा-कर। कृदंत-जोड़-वाना पहले। वाच्य आगे।
- कुर्सियाँ और तहें पहले। आगे वाक्य क्रम।
आगे वाक्य क्रम है।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. धातु रूप क्या है? कार्ड के 4 लिखो। नया विकार है?
उत्तर
जड़ पर पुरुष-वचन-काल-लिंग का कपड़ा — धातु रूप। लिखता हूँ, लिखते हो, लिखती है, लिखूँगा। नहीं — क्रिया पहले से; आज पंक्ति।
2. “मैं लिखता है” ठीक है? “लड़की लिखता है” ठीक है?
उत्तर
नहीं — मैं → लिखता हूँ। नहीं — लड़की → लिखती है; लिंग वाले विषय में पट्टी, जड़ लिख्।
3. गया नई धातु है? लिखना और लिखता हूँ एक कुर्सी हैं?
उत्तर
नहीं — जड़ जा, कपड़ा टेढ़ा; धातु वाले विषय में जड़। नहीं — लिखना कृदंत वाले विषय में; लिखता हूँ आज की पंक्ति।
4. आज्ञा चौथा काल है? जा रहा हूँ की बारह कोठरी आज रटनी हैं?
उत्तर
नहीं — जाओ आज्ञा जेब; तीन कुर्सियाँ सरल वाले विषय में। नहीं — तहें पूर्ण वाले विषय में; आज चार सवाल, खाने नहीं।
5. “पत्र लिखा गया” आज खोलना है? कर्ता-कर्म-क्रिया ढाँचा आज है?
उत्तर
नहीं — वाच्य आगे। नहीं — वाक्य क्रम आगे; आज पंक्ति, जड़ लिख्।
विषय समाप्त · धातु रूप
