इकाई 5 प्रश्न-उत्तर — संक्षेपण, पल्लवन एवं निबंध: 8 परीक्षा-उपयोगी आदर्श उत्तर (10 अंक स्तर, प्रत्येक 200 से 250 शब्द)। इसमें 2 संक्षेपण आदर्श (मूल पाठ सहित), 3 पल्लवन (सूक्ति का विस्तार) तथा 3 निबंध (पर्यावरण, शिक्षा, डिजिटल इंडिया) सम्मिलित हैं — ठीक उसी रूप में जैसे प्रश्नपत्र के प्रश्न 32 में पूछे जाते हैं। प्रत्येक उत्तर उत्तर-पुस्तिका में लिखने योग्य पूर्ण रूप में है।
प्रश्न 1. निम्नलिखित गद्यांश का संक्षेपण कीजिए तथा उचित शीर्षक दीजिए: "मनुष्य के जीवन में परिश्रम का स्थान सर्वोपरि है। जो व्यक्ति परिश्रम करता है, वही जीवन में सफलता प्राप्त करता है। प्रकृति भी हमें परिश्रम की शिक्षा देती है। चींटी छोटे आकार की होते हुए भी निरंतर परिश्रम करके अपने लिए भोजन एकत्र करती है। मधुमक्खी फूल-फूल से रस एकत्र करके मधु बनाती है। किसान खेतों में दिन-रात परिश्रम करके अन्न उपजाता है, जिससे समस्त समाज का पालन-पोषण होता है। विद्यार्थी जो परिश्रमपूर्वक अध्ययन करता है, वही परीक्षा में उत्तम अंक प्राप्त करता है। आलसी व्यक्ति भाग्य को कोसता रहता है, परंतु परिश्रमी व्यक्ति अपने भाग्य का निर्माता स्वयं बनता है। इतिहास साक्षी है कि महापुरुषों ने कठोर परिश्रम के बल पर ही महान कार्य किए। अतः प्रत्येक व्यक्ति को परिश्रम को अपना जीवन-मंत्र बनाना चाहिए, क्योंकि परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।" (10 अंक)
उत्तर:
शीर्षक: परिश्रम का महत्व
संक्षिप्त रूप: परिश्रम जीवन की सफलता का मूल मंत्र है। प्रकृति के प्राणी, किसान और विद्यार्थी परिश्रम से ही सफल होते हैं। चींटी और मधुमक्खी निरंतर श्रम का उदाहरण हैं। आलसी व्यक्ति भाग्य को कोसता है, जबकि परिश्रमी स्वयं अपने भाग्य का निर्माता बनता है। महापुरुषों ने कठोर परिश्रम से ही महान कार्य किए। अतः परिश्रम को जीवन-मंत्र बनाना चाहिए, क्योंकि यही सफलता की कुंजी है।
टिप्पणी: संक्षेपण में मूल गद्यांश के एक-तिहाई शब्द रखे गए हैं। उदाहरणों (चींटी, मधुमक्खी, किसान) को संक्षेप में समेटा गया है, पुनरुक्त भाव हटाए गए हैं और मूल संदेश — परिश्रम ही सफलता की कुंजी है — पूर्णतः सुरक्षित रखा गया है। भाषा सरल तथा वाक्य छोटे रखे गए हैं। संक्षेपण के नियमों के अनुसार मूल भाव की रक्षा, अनावश्यक विस्तार का त्याग, कठिन शब्दों का सरलीकरण और शीर्षक का सारगर्भित होना आवश्यक है, जिनका यहाँ पूर्ण पालन किया गया है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित गद्यांश का संक्षेपण कीजिए तथा उचित शीर्षक दीजिए: "पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र हैं। ये कभी धोखा नहीं देतीं और सदैव ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं। अच्छी पुस्तकें हमारे चरित्र का निर्माण करती हैं और हमें सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। महापुरुषों के जीवन-चरित्र पढ़कर हमें उनके आदर्शों का ज्ञान होता है। पुस्तकें अकेलेपन की साथी हैं; जब कोई साथ नहीं होता, तब पुस्तकें हमारा मनोरंजन करती हैं और हमारा ज्ञान बढ़ाती हैं। विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें सबसे बड़ा धन हैं। जो विद्यार्थी नियमित रूप से पुस्तकों का अध्ययन करता है, वह परीक्षा में सफल होता है और जीवन में आगे बढ़ता है। पुस्तकालय ज्ञान का भंडार है, जहाँ हजारों पुस्तकें पाठकों की प्रतीक्षा करती हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति को अच्छी पुस्तकें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए, क्योंकि पुस्तकें ही मनुष्य के सच्चे गुरु हैं।" (10 अंक)
उत्तर:
शीर्षक: पुस्तकों का महत्व
संक्षिप्त रूप: पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र हैं जो ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं। अच्छी पुस्तकें चरित्र का निर्माण करती हैं और सन्मार्ग की प्रेरणा देती हैं। ये अकेलेपन की साथी हैं और विद्यार्थियों का सबसे बड़ा धन हैं। नियमित अध्ययन से परीक्षा में सफलता मिलती है। पुस्तकालय ज्ञान का भंडार है। अतः अच्छी पुस्तकें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए, क्योंकि पुस्तकें ही मनुष्य के सच्चे गुरु हैं।
टिप्पणी: इस संक्षेपण में मूल गद्यांश के मुख्य बिंदु — पुस्तकों की मित्रता, चरित्र निर्माण, अकेलेपन में साथ, विद्यार्थियों हेतु उपयोगिता और पुस्तकालय — सभी को क्रमबद्ध रूप से रखा गया है। अनावश्यक विस्तार हटाकर केवल सार-भाव प्रस्तुत किया गया है, जिससे संक्षिप्त रूप मूल पाठ का एक-तिहाई रह गया है। उत्तम संक्षेपण की पहचान है कि उसे पढ़कर मूल पाठ का पूर्ण भाव समझ में आ जाए, और यहाँ यही प्रयास किया गया है।
प्रश्न 3. निम्नलिखित सूक्ति का पल्लवन कीजिए: "परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।" (10 अंक)
उत्तर: "परिश्रम ही सफलता की कुंजी है" — इस सूक्ति का गहरा अर्थ है कि जीवन में सफलता प्राप्त करने का एकमात्र सच्चा और निश्चित मार्ग परिश्रम है। जो व्यक्ति कठोर परिश्रम करता है, वह अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करता है, जबकि आलसी व्यक्ति भाग्य के भरोसे बैठकर सुनहरे अवसर गँवा देता है। प्रकृति स्वयं हमें परिश्रम की शिक्षा देती है — चींटी अपने छोटे आकार के बावजूद निरंतर श्रम करके भोजन जुटाती है, और किसान खेतों में दिन-रात पसीना बहाकर अन्न उपजाता है, जिससे समस्त समाज का पालन-पोषण होता है। विद्यार्थी जीवन में भी यही सत्य लागू होता है — जो छात्र नियमित अध्ययन और अभ्यास करता है, वही परीक्षा में उत्तम अंक प्राप्त करता है। इतिहास साक्षी है कि महात्मा गाँधी, अब्राहम लिंकन जैसे महापुरुषों ने परिश्रम के बल पर ही महानता अर्जित की। परिश्रम से आत्मविश्वास बढ़ता है, चरित्र निर्मल होता है और समाज में सम्मान मिलता है। आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, जो उसे पतन की ओर ले जाता है। अतः सफलता की इच्छा रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को परिश्रम को अपने जीवन का मंत्र बनाना चाहिए, क्योंकि परिश्रम के बिना कोई भी लक्ष्य सिद्ध नहीं होता और परिश्रमी व्यक्ति का भाग्य सदैव उसका साथ देता है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित सूक्ति का पल्लवन कीजिए: "मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।" (10 अंक)
उत्तर: "मन के हारे हार है, मन के जीते जीत" — इस सूक्ति का भाव है कि मनुष्य की हार और जीत बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके मन की दशा पर निर्भर करती है। जिसका मन दुर्बल, निराश और भयभीत होता है, वह संघर्ष आरंभ होने से पहले ही हार मान लेता है, जबकि जिसका मन दृढ़, साहसी और आशावान होता है, वह कठिन से कठिन बाधाओं को भी पार कर लेता है। युद्ध के मैदान में वही योद्धा विजयी होता है जिसका मनोबल ऊँचा होता है; शस्त्र तो दोनों पक्षों के पास होते हैं, अंतर केवल मन की शक्ति का होता है। विद्यार्थी जीवन में भी यही सिद्धांत सत्य है — जो छात्र परीक्षा के भय से घबराता है, वह असफल होता है, परंतु जो आत्मविश्वास के साथ तैयारी करता है, वह अवश्य सफल होता है। महात्मा गाँधी ने मन की इसी शक्ति से विशाल ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी और स्वतंत्रता का महान लक्ष्य प्राप्त किया। रोगी भी मन की दृढ़ता से शीघ्र स्वस्थ होता है, जबकि निराश रोगी की दशा बिगड़ती जाती है। अतः जीवन में सफलता पाने के लिए मन को सदा सकारात्मक, साहसी और आशावान रखना चाहिए, क्योंकि मन की हार ही सच्ची हार है और मन की जीत ही सच्ची जीत है।
प्रश्न 5. निम्नलिखित सूक्ति का पल्लवन कीजिए: "करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।" (10 अंक)
उत्तर: "करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान" — संत कवि रहीम की इस सूक्ति का अर्थ है कि निरंतर अभ्यास से मूर्ख व्यक्ति भी चतुर और निपुण बन जाता है, ठीक वैसे ही जैसे कुएँ की जगत पर रस्सी के बार-बार आने-जाने से पत्थर पर भी गहरा निशान पड़ जाता है। अभ्यास की शक्ति अपार और अद्भुत है — संसार में कोई भी कला, विद्या या कौशल अभ्यास के बिना सिद्ध नहीं होता। संगीतकार निरंतर रियाज से, खिलाड़ी कठिन अभ्यास से और विद्यार्थी बार-बार की पुनरावृत्ति से निपुणता प्राप्त करते हैं। प्रारंभ में जो कार्य अत्यंत कठिन लगता है, वही बार-बार करने से सरल हो जाता है। जो व्यक्ति एक-दो असफलताओं से घबराकर अभ्यास छोड़ देता है, वह कभी सफल नहीं होता, जबकि जो धैर्यपूर्वक अभ्यास करता रहता है, वह अवश्य सिद्धि प्राप्त करता है। एकलव्य ने गुरु की मूर्ति के समक्ष अभ्यास करके ही धनुर्विद्या में अद्वितीय निपुणता पाई थी। विद्यार्थियों के लिए अभ्यास का विशेष महत्व है — कठिन विषयों को बार-बार पढ़ने, लिखने और दोहराने से वे सरल हो जाते हैं। संगीत, चित्रकला, खेल — प्रत्येक क्षेत्र में अभ्यास ही सफलता का रहस्य है। अतः जीवन में किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु निरंतर अभ्यास परम आवश्यक है, क्योंकि अभ्यास ही असंभव को संभव बनाता है और साधारण व्यक्ति को असाधारण बना देता है।
प्रश्न 6. "पर्यावरण प्रदूषण" विषय पर निबंध लिखिए। (10 अंक)
उत्तर:
प्रस्तावना: पर्यावरण प्रदूषण आज विश्व की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। प्रकृति ने हमें स्वच्छ वायु, निर्मल जल और हरी-भरी धरती प्रदान की थी, परंतु मनुष्य की लापरवाही और स्वार्थ के कारण ये सभी दिन-प्रतिदिन प्रदूषित हो रहे हैं।
प्रदूषण के प्रकार: प्रदूषण मुख्यतः तीन प्रकार का है — वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। वाहनों और कारखानों के धुएँ से वायु प्रदूषित होती है। कारखानों का रासायनिक कचरा नदियों में मिलने से जल प्रदूषण बढ़ता है। वाहनों की तेज आवाज और ध्वनि विस्तारक यंत्रों से ध्वनि प्रदूषण होता है, जो मानसिक शांति भंग करता है।
दुष्प्रभाव: प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर गहरा बुरा प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण से साँस और फेफड़ों के रोग होते हैं, जल प्रदूषण से पेट के रोग फैलते हैं। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और समस्त जीव-जंतु भी इससे प्रभावित होते हैं।
रोकथाम के उपाय: प्रदूषण रोकने हेतु अधिक से अधिक वृक्ष लगाने चाहिए, वाहनों का अनावश्यक प्रयोग कम करना चाहिए, कारखानों के कचरे का उचित निपटान सुनिश्चित करना चाहिए तथा जन-जागरूकता फैलानी चाहिए।
उपसंहार: पर्यावरण की रक्षा हम सबका पवित्र कर्तव्य है। यदि हमने आज प्रदूषण नहीं रोका, तो भावी पीढ़ी को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। स्वच्छ पर्यावरण ही स्वस्थ जीवन का आधार है।
प्रश्न 7. "शिक्षा का महत्व" विषय पर निबंध लिखिए। (10 अंक)
उत्तर:
प्रस्तावना: शिक्षा मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा आधार है। जिस प्रकार सूर्य के बिना अंधकार दूर नहीं होता, उसी प्रकार शिक्षा के बिना मनुष्य का जीवन अज्ञान के अंधकार में डूबा रहता है। शिक्षा ही मनुष्य को पशु से भिन्न करती है।
व्यक्तित्व का विकास: शिक्षा से मनुष्य के चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण होता है। शिक्षित व्यक्ति अच्छे-बुरे में अंतर कर सकता है, सही निर्णय ले सकता है और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकता है। शिक्षा आत्मविश्वास बढ़ाती है और रोजगार के अवसर प्रदान करती है।
समाज और राष्ट्र का निर्माण: शिक्षित समाज ही उन्नत राष्ट्र का निर्माण करता है। शिक्षा से अंधविश्वास और कुरीतियाँ दूर होती हैं। नारी शिक्षा का विशेष महत्व है, क्योंकि शिक्षित नारी पूरे परिवार और भावी पीढ़ी को शिक्षित करती है।
शिक्षा और रोजगार: शिक्षा रोजगार का द्वार खोलती है। शिक्षित युवा नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार भी अपना सकता है, जिससे बेरोजगारी कम होती है और देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है। कौशल विकास से जुड़ी शिक्षा आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
वर्तमान स्थिति: सरकार ने शिक्षा के प्रसार हेतु अनेक योजनाएँ चलाई हैं, फिर भी अनेक बच्चे विद्यालय से वंचित हैं। यह हम सबके लिए चिंता का विषय है और इस दिशा में और प्रयास आवश्यक हैं।
उपसंहार: शिक्षा के बिना कोई भी राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता। अतः प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि शिक्षा ही सच्ची समृद्धि और विकास की कुंजी है।
प्रश्न 8. "डिजिटल इंडिया" विषय पर निबंध लिखिए। (10 अंक)
उत्तर:
प्रस्तावना: डिजिटल इंडिया भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक तक डिजिटल सेवाएँ पहुँचाना है। आज मोबाइल और इंटरनेट गाँव-गाँव तक पहुँच गए हैं, जिससे जीवन के हर क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है।
प्रमुख सुविधाएँ: डिजिटल इंडिया के अंतर्गत अनेक सुविधाएँ उपलब्ध हैं — डिजिटल भुगतान से लेन-देन सरल हुआ है, ई-गवर्नेंस से सरकारी कार्य घर बैठे होते हैं, ऑनलाइन शिक्षा से गाँव के बच्चे भी उत्तम ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। किसान भी मोबाइल से मौसम और बाजार भाव की जानकारी पाते हैं।
लाभ: डिजिटल सेवाओं से समय और धन की बचत होती है, भ्रष्टाचार कम होता है और पारदर्शिता बढ़ती है। सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुँचता है।
चुनौतियाँ: फिर भी अनेक चुनौतियाँ हैं — ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की गति धीमी है, बुजुर्गों को डिजिटल साधनों का प्रयोग कठिन लगता है और ऑनलाइन ठगी का खतरा भी बढ़ा है। डिजिटल साक्षरता का प्रसार परम आवश्यक है।
आगे का मार्ग: विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देकर और गाँवों में डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित करके प्रत्येक नागरिक को डिजिटल साधनों से जोड़ा जा सकता है। सुरक्षित डिजिटल व्यवहार की जानकारी भी जन-जन तक पहुँचानी चाहिए।
उपसंहार: चुनौतियों के बावजूद डिजिटल इंडिया देश की प्रगति का सशक्त माध्यम है। डिजिटल साक्षरता बढ़ाकर हम सब इस अभियान को सफल बना सकते हैं और सशक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं।
