आदर्श प्रश्नपत्र 1 - हिन्दी (AEC), पूर्णांक 50, समय 3 घंटे
यह प्रश्नपत्र महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के हिन्दी (एईसी) के आधिकारिक परीक्षा पैटर्न पर पूर्णतः आधारित है: इकाई 1 से प्रश्न 1 से 10, इकाई 2 से प्रश्न 11 से 20, इकाई 3 से प्रश्न 21 से 30 (प्रत्येक 1 अंक, शब्द सीमा 50 शब्द); प्रश्न 31 (इकाई 4) 10 अंक, शब्द सीमा 100 शब्द, अथवा विकल्प सहित; प्रश्न 32 (इकाई 5) 10 अंक, शब्द सीमा 200 शब्द, अथवा विकल्प सहित। नोट: सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न के नीचे उत्तर-कुंजी दी गई है।
इकाई 1 (प्रश्न 1 से 10) — प्रत्येक प्रश्न 1 अंक
प्रश्न 1. भाषा किसे कहते हैं? भाषा की एक परिभाषा लिखिए।
उत्तर: भाषा वह साधन है जिसके द्वारा मनुष्य अपने भावों और विचारों को दूसरों तक पहुँचाता है। डॉ. भोलानाथ तिवारी के अनुसार, "भाषा उच्चारण अवयवों से उच्चरित ध्वनि प्रतीकों की वह व्यवस्था है, जिसके द्वारा समाज के लोग परस्पर विचार-विनिमय करते हैं।" भाषा सामाजिक, अर्जित और परिवर्तनशील होती है। भाषा के बिना मानव समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।
प्रश्न 2. हिन्दी भाषा की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: हिन्दी की पहली विशेषता है कि यह देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, जो वैज्ञानिक लिपि मानी जाती है, क्योंकि इसमें जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा जाता है। दूसरी विशेषता है इसका समृद्ध शब्द भंडार — इसमें तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी शब्दों का सुंदर समन्वय है, जिससे यह भावों को सटीक रूप से व्यक्त करने में पूर्णतः सक्षम है।
प्रश्न 3. क्रिया किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जिस शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे — "राम पढ़ता है" में "पढ़ता है" क्रिया है, क्योंकि इससे पढ़ने के कार्य का बोध होता है। क्रिया वाक्य का सबसे महत्वपूर्ण अंग है; इसके बिना वाक्य पूर्ण नहीं होता। कर्म के आधार पर क्रिया दो प्रकार की होती है — सकर्मक क्रिया और अकर्मक क्रिया।
प्रश्न 4. विभक्ति किसे कहते हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के बाद लगने वाले वे प्रत्यय जो वाक्य में उनका संबंध अन्य शब्दों से बताते हैं, विभक्ति कहलाते हैं। जैसे — "राम ने रावण को मारा" में "ने" कर्ता कारक की और "को" कर्म कारक की विभक्ति है। हिन्दी में 8 कारक होते हैं और प्रत्येक कारक की अपनी निश्चित विभक्ति होती है।
प्रश्न 5. सर्वनाम की परिभाषा लिखिए और दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: संज्ञा के स्थान पर प्रयोग होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं। जैसे — "मोहन अच्छा लड़का है। वह रोज पढ़ता है।" यहाँ "वह" सर्वनाम है, जो "मोहन" संज्ञा के स्थान पर आया है। सर्वनाम के प्रयोग से भाषा में पुनरुक्ति नहीं होती और वाक्य सुंदर बनता है। सर्वनाम 6 प्रकार के होते हैं — पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, संबंधवाचक, प्रश्नवाचक और निजवाचक।
प्रश्न 6. विशेषण किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर: संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं। जैसे — "काला घोड़ा दौड़ता है" में "काला" विशेषण है, क्योंकि यह "घोड़ा" संज्ञा की विशेषता बता रहा है। विशेषण 4 प्रकार के होते हैं — गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक और सार्वनामिक। विशेषण के प्रयोग से भाषा में स्पष्टता और सौंदर्य आता है।
प्रश्न 7. अव्यय की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन और कारक के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते हैं। जैसे — "राम धीरे-धीरे चलता है" में "धीरे-धीरे" अव्यय है। अव्यय 4 प्रकार के होते हैं — क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक। इन्हें अविकारी शब्द भी कहा जाता है, क्योंकि इनमें विकार नहीं होता।
प्रश्न 8. हिन्दी वर्णमाला में कितने स्वर और व्यंजन हैं? स्वर-व्यंजन में अंतर लिखिए।
उत्तर: हिन्दी वर्णमाला में कुल 11 स्वर हैं — अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ। व्यंजनों की संख्या 33 है — स्पर्श व्यंजन 25, अंतस्थ व्यंजन 4 और ऊष्म व्यंजन 4। स्वर वे ध्वनियाँ हैं जिनके उच्चारण में वायु बिना रुकावट बाहर निकलती है, जबकि व्यंजनों के उच्चारण में वायु को मुख के किसी भाग से रुकावट का सामना करना पड़ता है।
प्रश्न 9. शब्द भंडार से क्या तात्पर्य है? हिन्दी के शब्द भंडार के स्रोत लिखिए।
उत्तर: किसी भाषा में प्रयुक्त होने वाले समस्त शब्दों के समूह को उस भाषा का शब्द भंडार कहते हैं। हिन्दी का शब्द भंडार 4 स्रोतों से बना है — तत्सम (संस्कृत से सीधे आए शब्द, जैसे — अग्नि), तद्भव (संस्कृत से बिगड़कर आए शब्द, जैसे — आग), देशज (स्थानीय बोलियों के शब्द, जैसे — लोटा) और विदेशी (अरबी, फारसी, अंग्रेजी आदि से आए शब्द, जैसे — किताब)।
प्रश्न 10. भाषा के विविध रूप कौन-कौन से हैं? संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: भाषा के मुख्यतः 3 रूप माने गए हैं — मौखिक भाषा, लिखित भाषा और सांकेतिक भाषा। मौखिक भाषा बोलकर व्यक्त की जाती है, लिखित भाषा लिपि के माध्यम से लिखी जाती है और सांकेतिक भाषा इशारों द्वारा व्यक्त होती है। प्रयोग के आधार पर भाषा के अन्य रूप भी हैं — मातृभाषा, राष्ट्रभाषा, राजभाषा और अंतरराष्ट्रीय भाषा। हिन्दी भारत की राजभाषा है।
इकाई 2 (प्रश्न 11 से 20) — प्रत्येक प्रश्न 1 अंक
प्रश्न 11. संधि किसे कहते हैं? "सूर्योदय" का संधि-विच्छेद कीजिए।
उत्तर: दो वर्णों के मेल से होने वाले परिवर्तन को संधि कहते हैं। "सूर्योदय" का संधि-विच्छेद है — सूर्य + उदय। यहाँ "अ" और "उ" के मेल से "ओ" बना है, अतः इसमें गुण संधि है। संधि 3 प्रकार की होती है — स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। संधि से भाषा में संक्षिप्तता और मधुरता आती है।
प्रश्न 12. "विद्यालय" में कौन-सी संधि है? संधि-विच्छेद कीजिए।
उत्तर: "विद्यालय" का संधि-विच्छेद है — विद्या + आलय। यहाँ "आ" और "आ" के मेल से "आ" बना है, अतः इसमें दीर्घ संधि है। दीर्घ संधि स्वर संधि का एक भेद है, जिसमें एक ही स्वर के ह्रस्व या दीर्घ रूप परस्पर मिलकर दीर्घ स्वर बनाते हैं। "विद्यालय" का अर्थ है विद्या का आलय अर्थात् ज्ञान का घर।
प्रश्न 13. समास की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने संक्षिप्त रूप को समास कहते हैं। जैसे — "राजा का पुत्र" का समस्त पद "राजपुत्र" है। समास में पहला पद पूर्वपद और दूसरा पद उत्तरपद कहलाता है। समास 6 प्रकार के होते हैं — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि। समास से भाषा में संक्षिप्तता आती है।
प्रश्न 14. द्विगु समास के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर: जिस समास में पूर्वपद संख्यावाचक होता है, उसे द्विगु समास कहते हैं। दो उदाहरण: 1. "त्रिभुवन" — तीन हैं भुवन जिसमें, अर्थात् तीन लोकों का समूह। 2. "चौराहा" — चार हैं राहें जहाँ, अर्थात् चार रास्तों का मिलन स्थान। द्विगु समास में समस्त पद प्रायः समूह का बोध कराता है और उत्तरपद प्रधान होता है।
प्रश्न 15. "राजपुत्र" का समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम बताइए।
उत्तर: "राजपुत्र" का समास-विग्रह है — राजा का पुत्र। इसमें उत्तरपद "पुत्र" प्रधान है और दोनों पदों के बीच "का" संबंध कारक की विभक्ति लुप्त है, अतः यह तत्पुरुष समास है। तत्पुरुष समास में उत्तरपद प्रधान होता है और पूर्वपद व उत्तरपद के बीच कारक की विभक्ति का लोप होता है।
प्रश्न 16. उपसर्ग किसे कहते हैं? "अ" उपसर्ग से दो शब्द बनाइए।
उत्तर: जो शब्दांश शब्द के आरंभ में लगकर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं। "अ" उपसर्ग से बने दो शब्द: 1. "अधर्म" (अ + धर्म) — धर्म का अभाव। 2. "अन्याय" (अ + न्याय) — न्याय का अभाव। "अ" उपसर्ग निषेध का भाव प्रकट करता है। हिन्दी में "अ", "सु", "कु", "प्र" आदि प्रमुख उपसर्ग हैं।
प्रश्न 17. प्रत्यय की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: जो शब्दांश शब्द के अंत में लगकर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। जैसे — "सुंदर" में "ता" प्रत्यय लगाने से "सुंदरता" शब्द बनता है। प्रत्यय दो प्रकार के होते हैं — कृत् प्रत्यय (क्रिया से संज्ञा बनाने वाले, जैसे — पढ़ + आई = पढ़ाई) और तद्धित प्रत्यय (संज्ञा से संज्ञा बनाने वाले, जैसे — लोहा + आर = लोहार)।
प्रश्न 18. "ता" प्रत्यय से दो शब्द बनाइए।
उत्तर: "ता" प्रत्यय भाववाचक संज्ञाएँ बनाता है। दो उदाहरण: 1. "सुंदरता" (सुंदर + ता) — सुंदर होने का भाव। 2. "मित्रता" (मित्र + ता) — मित्र होने का भाव। "ता" तद्धित प्रत्यय है, क्योंकि यह संज्ञा व विशेषण शब्दों के अंत में लगकर भाववाचक संज्ञा बनाता है। इससे बने शब्द प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं।
प्रश्न 19. "परमात्मा" का संधि-विच्छेद कीजिए और संधि का नाम लिखिए।
उत्तर: "परमात्मा" का संधि-विच्छेद है — परम + आत्मा। यहाँ "अ" और "आ" के मेल से "आ" बना है, अतः इसमें दीर्घ संधि है। "परमात्मा" का अर्थ है परम (सर्वश्रेष्ठ) आत्मा अर्थात् ईश्वर। दीर्घ संधि में अ/आ के साथ अ/आ मिलने पर "आ" बनता है। यह स्वर संधि का भेद है।
प्रश्न 20. बहुव्रीहि समास का एक उदाहरण समास-विग्रह सहित लिखिए।
उत्तर: जिस समास में पूर्वपद और उत्तरपद दोनों से भिन्न कोई तीसरा अर्थ प्रधान होता है, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। उदाहरण: "पीतांबर" — पीत है अंबर जिसका, अर्थात् श्रीकृष्ण। यहाँ "पीत" (पूर्वपद) और "अंबर" (उत्तरपद) दोनों से भिन्न "श्रीकृष्ण" अर्थ प्रधान है, अतः यह बहुव्रीहि समास है। बहुव्रीहि का शाब्दिक अर्थ है — बहुत हैं व्रीहि (चावल) जिसके पास, अर्थात् धनवान।
इकाई 3 (प्रश्न 21 से 30) — प्रत्येक प्रश्न 1 अंक
प्रश्न 21. "आँख का तारा" मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर: "आँख का तारा" मुहावरे का अर्थ है — अत्यंत प्रिय। वाक्य प्रयोग: "मोहन अपने माता-पिता की आँख का तारा है, क्योंकि वह पढ़ाई में प्रथम आता है और बड़ों का आदर करता है।" मुहावरे भाषा को प्रभावशाली और रोचक बनाते हैं। इनका प्रयोग करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि मुहावरे का अर्थ वाक्य के भाव से मेल खाए।
प्रश्न 22. "नौ दो ग्यारह होना" मुहावरे का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर: "नौ दो ग्यारह होना" मुहावरे का अर्थ है — भाग जाना या चंपत हो जाना। वाक्य प्रयोग: "पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया।" यह मुहावरा तब प्रयुक्त होता है जब कोई व्यक्ति डर या किसी अन्य कारण से अचानक वहाँ से भाग जाता है। मुहावरों के सही प्रयोग से उत्तर प्रभावशाली बनता है।
प्रश्न 23. "अग्नि" के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर: "अग्नि" के दो पर्यायवाची शब्द हैं — 1. "पावक", 2. "अनल"। पर्यायवाची शब्दों को समानार्थक शब्द भी कहते हैं। इनके प्रयोग से भाषा में पुनरुक्ति नहीं होती और भाव अधिक प्रभावशाली ढंग से व्यक्त होते हैं। "अग्नि" के अन्य पर्यायवाची हैं — आग, ज्वाला, कृशानु। परीक्षा में पर्यायवाची शब्द शुद्ध वर्तनी में लिखने चाहिए।
प्रश्न 24. "उन्नति" का विलोम शब्द लिखिए।
उत्तर: "उन्नति" का विलोम शब्द "अवनति" है। "उन्नति" का अर्थ है आगे बढ़ना या विकास, जबकि "अवनति" का अर्थ है पतन या गिरावट। विलोम शब्दों को विपरीतार्थक शब्द भी कहते हैं। विलोम शब्द बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि दोनों शब्द एक ही शब्द-भेद के हों। अन्य विलोम युग्म हैं — उत्थान-पतन, उत्कर्ष-अपकर्ष।
प्रश्न 25. निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध कीजिए: "मैंने बाजार से किताब खरीदा।"
उत्तर: शुद्ध वाक्य है — "मैंने बाजार से किताब खरीदी।" यहाँ "किताब" स्त्रीलिंग शब्द है, अतः क्रिया "खरीदा" के स्थान पर स्त्रीलिंग रूप "खरीदी" का प्रयोग होगा। वाक्य शुद्धि में लिंग, वचन और कारक का सही प्रयोग आवश्यक है। कर्ता के साथ "ने" विभक्ति होने पर क्रिया कर्म के लिंग-वचन के अनुसार होती है।
प्रश्न 26. "जल" और "जाल" में अर्थ भेद स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: "जल" और "जाल" समश्रुत भिन्नार्थक शब्द हैं — सुनने में समान लगते हैं, परंतु अर्थ भिन्न हैं। "जल" का अर्थ है पानी, जैसे — "नदी का जल स्वच्छ है।" "जाल" का अर्थ है फँसाने का साधन या षड्यंत्र, जैसे — "शिकारी ने पक्षी पकड़ने के लिए जाल बिछाया।" ऐसे शब्दों का अर्थ भ्रमित न हो, इसलिए वाक्य में प्रयोग करके अंतर स्पष्ट करना चाहिए।
प्रश्न 27. "अंधेर नगरी" लोकोक्ति का अर्थ लिखिए।
उत्तर: "अंधेर नगरी" लोकोक्ति का अर्थ है — जहाँ न्याय-अन्याय का कोई भेद न हो, अर्थात् अव्यवस्था और अन्याय का बोलबाला। यह लोकोक्ति तब प्रयुक्त होती है जब शासन या व्यवस्था में धांधली हो। पूरी लोकोक्ति है — "अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा।" लोकोक्तियाँ जीवन के अनुभवों का सार होती हैं।
प्रश्न 28. अशुद्ध शब्द को शुद्ध कीजिए: "विध्यालय"
उत्तर: शुद्ध शब्द है — "विद्यालय"। "विध्यालय" में "ध" के स्थान पर "द" होना चाहिए, क्योंकि यह "विद्या" + "आलय" से बना है। शब्द शुद्धि में वर्तनी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हिन्दी में प्रायः संयुक्ताक्षरों में त्रुटि होती है। शुद्ध वर्तनी के लिए शब्दों के मूल रूप और संधि-नियमों का ज्ञान आवश्यक है।
प्रश्न 29. "सूर्य" के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर: "सूर्य" के दो पर्यायवाची शब्द हैं — 1. "भानु", 2. "दिनकर"। "सूर्य" के अन्य पर्यायवाची हैं — रवि, आदित्य, भास्कर, दिवाकर। पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग निबंध और पत्र लेखन में भाषा को समृद्ध बनाता है। परीक्षा में पर्यायवाची लिखते समय वर्तनी शुद्ध होनी चाहिए, अन्यथा अंक कट सकते हैं।
प्रश्न 30. "आकाश" का विलोम शब्द लिखिए।
उत्तर: "आकाश" का विलोम शब्द "पाताल" है। "आकाश" का अर्थ है ऊपर का विस्तृत शून्य स्थान, जबकि "पाताल" का अर्थ है पृथ्वी के नीचे का लोक। यह विलोम युग्म ऊँच-नीच के भाव को व्यक्त करता है। अन्य विलोम युग्म हैं — स्वर्ग-नरक, ऊपर-नीचे। विलोम शब्दों से भाषा में विरोधी भावों की स्पष्ट अभिव्यक्ति होती है।
इकाई 4 (प्रश्न 31) — 10 अंक (अथवा सहित)
प्रश्न 31. (अ) नोखा क्षेत्र में पेयजल हेतु अतिरिक्त टैंकर उपलब्ध कराने के लिए अधिशासी अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से जिला कलेक्टर को शासकीय पत्र लिखिए। अथवा (ब) विद्यालय के पुस्तकालय हेतु पाठ्यपुस्तकें क्रय करने के लिए निविदा सूचना का प्रारूप तैयार कीजिए। (शब्द सीमा 100 शब्द)
उत्तर (अ):
पत्र संख्या: प. 9(4) जनस्वास्थ्य/2026
प्रेषक: श्री रमेश चंद्र, अधिशासी अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, बीकानेर
दिनांक: 10 अक्टूबर, 2026
सेवा में: श्रीमान जिला कलेक्टर महोदय, बीकानेर
विषय: नोखा क्षेत्र में पेयजल हेतु अतिरिक्त टैंकर उपलब्ध कराने बाबत।
महोदय,
उपर्युक्त विषयांतर्गत निवेदन है कि नोखा क्षेत्र के 8 गाँवों में पेयजल संकट गहरा गया है। वर्तमान में 4 टैंकरों से आपूर्ति की जा रही है, जो अपर्याप्त है और आने वाले ग्रीष्म ऋतु में माँग और बढ़ेगी। अतः आपसे अनुरोध है कि उक्त क्षेत्र हेतु 4 अतिरिक्त टैंकर स्वीकृत करने का कष्ट करें, ताकि ग्रामीणों को पेयजल की समुचित आपूर्ति हो सके।
भवदीय,
(हस्ताक्षर)
रमेश चंद्र
अधिशासी अभियंता
उत्तर (ब):
कार्यालय, प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बीकानेर
निविदा सूचना संख्या: 8/2026-27
दिनांक: 10 अक्टूबर, 2026
विद्यालय के पुस्तकालय हेतु पाठ्यपुस्तकें क्रय करने के लिए पंजीकृत पुस्तक विक्रेताओं से मुहरबंद निविदाएँ आमंत्रित की जाती हैं। पुस्तकों की सूची तथा निविदा प्रपत्र कार्यालय से 200 रुपये शुल्क देकर दिनांक 20 अक्टूबर, 2026 तक प्राप्त किए जा सकते हैं। भरी हुई निविदाएँ दिनांक 25 अक्टूबर, 2026 को दोपहर 1 बजे तक जमा कराई जा सकती हैं, जो उसी दिन 2 बजे खोली जाएँगी। निविदा के साथ 10,000 रुपये की धरोहर राशि जमा कराना अनिवार्य है। प्रधानाचार्य को बिना कारण बताए किसी भी निविदा को अस्वीकार करने का अधिकार होगा।
प्रधानाचार्य,
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बीकानेर
इकाई 5 (प्रश्न 32) — 10 अंक (अथवा सहित)
प्रश्न 32. (अ) "परिश्रम का महत्व" विषय पर निबंध लिखिए। अथवा (ब) निम्नलिखित सूक्ति का पल्लवन कीजिए: "संगति से गुण होत है, संगति से गुण जात।" (शब्द सीमा 200 शब्द)
उत्तर (अ):
प्रस्तावना: परिश्रम मानव जीवन की सफलता का मूल मंत्र है। जो व्यक्ति परिश्रम करता है, वही जीवन में उन्नति प्राप्त करता है। भाग्य के भरोसे बैठने वाला व्यक्ति कभी सफल नहीं होता, क्योंकि भाग्य भी परिश्रमी का ही साथ देता है।
प्रकृति से शिक्षा: प्रकृति हमें परिश्रम की शिक्षा देती है। चींटी अपने छोटे आकार के बावजूद निरंतर श्रम करके भोजन जुटाती है। किसान खेतों में दिन-रात पसीना बहाकर अन्न उपजाता है, जिससे समस्त समाज का पालन-पोषण होता है।
विद्यार्थी जीवन में महत्व: विद्यार्थी जो परिश्रमपूर्वक अध्ययन करता है, वही परीक्षा में उत्तम अंक प्राप्त करता है। कठिन विषय भी निरंतर अभ्यास से सरल हो जाते हैं।
महापुरुषों के उदाहरण: इतिहास साक्षी है कि महात्मा गाँधी, अब्राहम लिंकन जैसे महापुरुषों ने कठोर परिश्रम के बल पर ही महानता अर्जित की। परिश्रम से आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में सम्मान मिलता है।
उपसंहार: आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। अतः प्रत्येक व्यक्ति को परिश्रम को जीवन-मंत्र बनाना चाहिए, क्योंकि परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।
उत्तर (ब): "संगति से गुण होत है, संगति से गुण जात" — संत कवि रहीम की इस सूक्ति का अर्थ है कि मनुष्य जैसी संगति करता है, वैसा ही बन जाता है। अच्छी संगति से गुणों का विकास होता है और बुरी संगति से गुणों का नाश होता है, ठीक वैसे ही जैसे चंदन के वृक्ष के पास उगने वाले अन्य वृक्ष भी सुगंधित हो जाते हैं। विद्यार्थी यदि परिश्रमी और संस्कारी मित्रों की संगति करता है, तो वह भी अध्ययन में रुचि लेने लगता है; परंतु बुरी संगति में पड़कर वह कुमार्ग पर चल पड़ता है। इतिहास में अनेक उदाहरण हैं — बुरे मित्रों की संगति ने राजकुमारों तक का पतन किया, जबकि संतों की संगति ने डाकुओं का भी हृदय परिवर्तन कर दिया। माता-पिता और शिक्षकों का कर्तव्य है कि वे बच्चों को सुसंगति की ओर प्रेरित करें। अतः जीवन में उन्नति चाहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सदा अच्छी संगति अपनानी चाहिए, क्योंकि संगति ही मनुष्य के चरित्र का निर्माण करती है और उसके भविष्य की दिशा तय करती है।
