हिन्दी भाषा, व्याकरण एवं संप्रेषण
इकाई 4: पत्र लेखन और प्रारूप
HINDI 4.5AECT21 • BA Semester 2 (AEC)
इकाई 4 · पत्र लेखन और प्रारूप — शासकीय, अर्धशासकीय, आवेदन, शिकायती, व्यावसायिक; निविदा, विज्ञप्ति, अधिसूचना, परिपत्र
यह इकाई लिखित संप्रेषण का कार्यालय-रूप है। इकाई 3 ने वाक्य शुद्ध किया। अब वही शुद्ध वाक्य एक साँचे में बैठता है, ताकि दूसरा व्यक्ति या दूसरा कार्यालय काम समझे और उत्तर का आधार पाए। आधिकारिक शीर्षक दो झुंड देता है। पहला झुंड पत्र — शासकीय, अर्धशासकीय, आवेदन, शिकायती, व्यावसायिक। दूसरा झुंड प्रारूप — निविदा, विज्ञप्ति, अधिसूचना, परिपत्र। पत्र का केंद्र प्रायः एक प्राप्तकर्ता होता है। प्रारूप का केंद्र कई पाठक, बोलीदाता, जन या अधीनस्थ कार्यालय हो सकते हैं। चारों प्रारूपों को पत्र कहना भ्रम है। बाहरी व्यावहारिक रचना और तिवारी–कुलश्रेष्ठ की पत्र-निर्देशिका इन्हीं ढाँचों पर टिकती हैं। अंग खाली नाम नहीं रहते; प्रत्येक पाठ में भरा रूप भी चलेगा, ताकि परीक्षा में केवल शीर्षक न लिखो, पत्र लिख सको।
मौखिक बात एक बार सुनकर मिट सकती है। पत्र और प्रारूप रिकॉर्ड बनते हैं। कार्यालय इन्हीं से काम चलाता है। सफलता यह नहीं कि भाषा अलंकृत हो। सफलता यह है कि पढ़ने वाला जाने — किसने लिखा, किसे लिखा, किस विषय पर, क्या तथ्य है, क्या चाहिए, उत्तर किसको जाए। विषय की एक पंक्ति, पदनाम, दिनांक और शुद्ध वाक्य — ये चार बिना अलंकार के पत्र को खड़ा करते हैं। “मैं बहुत दुखी हूँ” शासकीय पत्र का वाक्य नहीं। “कृपया आवश्यक कार्यवाही करें” शासकीय पत्र का वाक्य है। स्वर पद और प्रयोजन से बदलता है, मन की लहर से नहीं।
1 पत्र — अर्थ, प्रयोजन और भाषा
पत्र लिखित संदेश है जो प्रेषक से प्राप्तकर्ता तक निश्चित विषय लेकर जाता है। प्रयोजन तीन बड़े हैं। सूचना देना — बैठक की तिथि, परिणाम, आपूर्ति। निवेदन करना — छुट्टी, पद, प्रमाण, सुधार। आदेश या निर्देश पहुँचाना — ऊपर से नीचे को। व्यक्तिगत पत्र आत्मीयता रखता है — परिवार, मित्र। यह पत्र उस ढाँचे को कम पढ़ाता है; पाठ्यक्रम कार्यालय और व्यवहार के पत्र माँगता है। कार्यालयी पत्र पद, संख्या और विषय रखता है। लेखक व्यक्ति कम, पद अधिक है। प्राचार्य लिखता है, केवल राम नहीं। प्राप्तकर्ता भी पद हो सकता है — जिला कलक्टर, प्रबंधक, प्राचार्य। दिशा तय किए बिना अंग नहीं बैठते। नागरिक से शासन की ओर आवेदन और शिकायत चलते हैं। कार्यालय से कार्यालय शासकीय चलता है। अधिकारी से नाम लेकर अर्धशासकीय चलता है। फर्म से फर्म व्यावसायिक चलता है।
कार्यालयी भाषा के पाँच गुण स्थिर हैं। स्पष्टता — एक वाक्य एक काम। संक्षेप — अतिरिक्त जीवन-कथा नहीं। शिष्टता — कृपया, सविनय; गाली और कठोर आक्षेप नहीं। क्रम — पहले संदर्भ, फिर तथ्य, फिर निवेदन या निर्देश। शुद्ध वर्तनी — इकाई 3 यहीं आकर जीवित होती है। शासकीय कलेवर प्रायः निर्वैयक्तिक है। अधोहस्ताक्षरी, निर्देशानुसार, सूचित किया जाता है — ये पद व्यक्ति को पीछे रखते हैं, कार्य को आगे। अर्धशासकीय में मैं और आप चलते हैं, विषय कार्यालय का रहता है। आवेदन में “सविनय निवेदन है कि” स्थिर मुखड़ा है। व्यावसायिक में वस्तु, मात्रा, दर, धन्यवाद। मिश्र भाषा — आधा अंग्रेज़ी आधा हिन्दी बिना ज़रूरत — कार्यालय तोड़ता है। मानक हिन्दी के वाक्य पूरे होते हैं। अंग्रेज़ी पद तभी रहें जब वे राजकाज में रूढ़ हों और हिन्दी पर्याय अस्थिर हो; बिना ज़रूरत के नहीं।
2 पत्र के अंग
कार्यालयी पत्र के अंग एक क्रम में बैठते हैं। पहला — पत्र-संख्या या संदर्भ, ताकि फ़ाइल खोले। दूसरा — स्थान और दिनांक। तीसरा — प्रेषक का पद, यदि पत्रशीर्ष पहले से न छपा हो। चौथा — प्राप्तकर्ता: सेवा में, पद, कार्यालय, नगर। पाँचवाँ — विषय, एक पंक्ति, फ़ाइल का नाम जैसा। छठा — संबोधन: महोदय या महोदया। सातवाँ — कलेवर: संदर्भ की पंक्ति, तथ्य, निवेदन या निर्देश। आठवाँ — समापन वाक्य: कृपया आवश्यक कार्यवाही करें / धन्यवाद। नौवाँ — भवदीय। दसवाँ — हस्ताक्षर, नाम, पदनाम, कार्यालय। ग्यारहवाँ — संलग्नक, यदि कोई कागज़ साथ हो। बारहवाँ — प्रतिलिपि, यदि दूसरे पद को सूचना देनी हो। व्यक्तिगत आवेदन में संख्या की जगह निवास-पता ऊपर आता है। व्यावसायिक पत्र में “आपके पत्र दिनांक…” संदर्भ लगता है।
विषय के बिना फ़ाइल नहीं खुलती। पदनाम के बिना उत्तर किसको जाए, यह अस्पष्ट रह जाता है। दिनांक के बिना विलंब नहीं नापा जाता। संलग्नक लिखे बिना साथ का प्रमाण खो जाता है। अंग इसलिए सजाने की वस्तु नहीं, काम की जंजीर हैं। एक अंग छूटे तो संप्रेषण का कोई छोर लटकता है। परीक्षा में खाली ढाँचा कम अंक लाता है; भरे अंग पूरे अंक की ओर ले जाते हैं।
| अंग | काम |
|---|---|
| संख्या / दिनांक | फ़ाइल और काल बाँधना |
| सेवा में | प्राप्तकर्ता का पद और कार्यालय |
| विषय | एक पंक्ति का सार — फ़ाइल का नाम |
| संबोधन · समापन | महोदय · भवदीय (शासकीय) |
| कलेवर | संदर्भ, तथ्य, निवेदन या निर्देश |
| संलग्नक / प्रतिलिपि | साथ का कागज़ / दूसरी सूचना |
3 शासकीय पत्र
शासकीय पत्र वह कार्यालयी पत्र है जो एक सरकारी पद से दूसरे पद को, या कार्यालय से नागरिक को, आधिकारिक काम पर जाता है। लेखक व्यक्ति नहीं, पद है। भाषा निर्वैयक्तिक है। भावुकता नहीं। संख्या और विषय अनिवार्य हैं। संबोधन महोदय है। समापन भवदीय है। नीचे पदनाम आता है, केवल नाम अधूरा है। प्रतिलिपि सूचनार्थ लग सकती है। विषय की पंक्ति फ़ाइल खोलती है — पुस्तकों की आपूर्ति / अवकाश की स्वीकृति / वार्षिक विवरण। कलेवर तीन खंडों में बँटता है। पहला संदर्भ — आपके पत्र संख्या… के संबंध में। दूसरा तथ्य — क्या चाहिए, क्यों, कितना। तीसरा निवेदन या निर्देश — कृपया अनुमति प्रदान करें / कृपया पालन सुनिश्चित करें। आदेश नीचे से ऊपर नहीं जाता। निवेदन ऊपर को जाता है। निर्देश नीचे को जाता है। दिशा पद-क्रम से तय होती है।
भरा रूप देखो, खाली ढाँचा नहीं। संख्या: प. 14/पुस्तक/2026। दिनांक: 10 सितंबर 2026। सेवा में, जिला शिक्षा अधिकारी, बीकानेर। विषय: संदर्भ ग्रंथों की आपूर्ति। महोदय, आपके कार्यालय के पत्र संख्या 88/शिक्षा/2026 दिनांक 28 अगस्त 2026 के अनुसरण में निवेदन है कि राजकीय महाविद्यालय, बीकानेर के पुस्तकालय के लिए पंद्रह हिन्दी संदर्भ ग्रंथों की आवश्यकता है। अनुमानित व्यय निर्धारित मद से वहन योग्य है। कृपया आपूर्ति की स्वीकृति प्रदान करने का कष्ट करें। भवदीय, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, बीकानेर। यही ढाँचा आदेश में स्वर बदलता है। सेवा में, समस्त प्राचार्य। विषय: वार्षिक विवरण की तिथि। महोदय, निर्देशानुसार सूचित किया जाता है कि सत्र का वार्षिक विवरण 30 सितंबर तक जिला कार्यालय पहुँच जाए। विलंब स्वीकार नहीं होगा। भवदीय, जिला शिक्षा अधिकारी। निवेदन कृपया है। आदेश निर्देशानुसार है। दोनों शासकीय हैं; स्वर पद-क्रम से बदलता है।
4 अर्धशासकीय पत्र; शासकीय से अंतर
अर्धशासकीय पत्र उस शासकीय काम का पत्र है जो एक अधिकारी दूसरे अधिकारी को नाम लेकर लिखता है। हिन्दी नाम अर्धशासकीय ही लिखो। संख्या के साथ प्रायः अर्धशासकीय लिखा जाता है। संबोधन प्रिय श्री… या सम्मानित श्री… है, महोदय मात्र नहीं। कलेवर में मैं और आप चलते हैं। उद्देश्य व्यक्तिगत ध्यान खींचना है — लंबित फ़ाइल, शीघ्र निर्णय, असुविधा का निराकरण। विषय फिर भी कार्यालय का रहता है। परिवार की कुशल पूछना इसका मुख्य काम नहीं। समापन आपका या भवदीय, आपका हो सकता है। हस्ताक्षर के नीचे पदनाम रहता है। कभी हाथ की दो पंक्ति जोड़ दी जाती है, ताकि पत्र यंत्रवत न लगे। शासकीय पत्र की निर्वैयक्तिकता यहाँ टूटती है, काम नहीं टूटता। प्राप्तकर्ता पद के साथ नाम से पहचाना जाता है — श्री अशोक शर्मा, जिला कलक्टर, बीकानेर। बिना नाम के यह पत्र शासकीय ढाँचे में लौट जाता है।
भरा रूप: अर्धशासकीय संख्या 7/2026, दिनांक 10 सितंबर 2026। प्रिय श्री गुप्ता जी, बीकानेर महाविद्यालय की भवन-स्वीकृति तीन महीने से लंबित है। विद्यार्थी छाया में कक्षा पढ़ रहे हैं। मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि फ़ाइल देखकर शीघ्र आदेश हो सके। आपका, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, बीकानेर। अंतर पाँच बिंदुओं पर बाँधो। लेखक — शासकीय में पद, अर्धशासकीय में नाम सहित अधिकारी। प्राप्तकर्ता — पद बनाम नाम। संबोधन — महोदय बनाम प्रिय श्री। भाषा — निर्वैयक्तिक अधोहस्ताक्षरी बनाम मैं-आप। समापन — भवदीय बनाम आपका। शासकीय फ़ाइल का नियमित पत्र है। अर्धशासकीय उसी फ़ाइल को गति देने का पत्र है। काम एक हो सकता है, स्वर दो हैं। दोनों को पर्याय कहना भ्रम है।
| बिंदु | शासकीय | अर्धशासकीय |
|---|---|---|
| संबोधन | महोदय | प्रिय श्री… |
| भाषा | निर्वैयक्तिक · पद | मैं / आप · नाम |
| समापन | भवदीय | आपका / भवदीय |
| ध्यान | पद-क्रम और फ़ाइल | व्यक्तिगत शीघ्रता |
| संख्या | कार्यालय संख्या | प्रायः अर्धशासकीय संख्या |
5 आवेदन पत्र
आवेदन पत्र वह निवेदन है जो नागरिक, विद्यार्थी या कर्मचारी किसी अधिकारी को सुविधा, पद, प्रमाण या अनुमति के लिए लिखता है। दिशा नीचे से ऊपर है। अंग ये हैं — निवास-पता और दिनांक ऊपर। सेवा में, पदनाम और कार्यालय। विषय: … पद हेतु आवेदन / आय प्रमाण-पत्र हेतु / पुस्तकालय कार्ड हेतु। महोदय। आमुख — सविनय निवेदन है कि। परिचय — नाम, योग्यता, अनुभव, यदि पद हो तो। निवेदन की वस्तु एक साफ वाक्य में। आभार। आवेदक / भवदीय। हस्ताक्षर, नाम, पता। संलग्नक — प्रमाण-पत्रों की सूची। विषय के बिना आवेदन फ़ाइल नहीं खोजता। योग्यता छिपाना आवेदन को कमजोर करता है। झूठी योग्यता आवेदन को अवैध करती है।
भरा रूप। सेवा में, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, बीकानेर। विषय: पुस्तकालय लिपिक पद हेतु आवेदन। महोदय, सविनय निवेदन है कि मैं रमेश कुमार, एम.ए. हिन्दी, उक्त रिक्त पद के लिए आवेदन करता हूँ। आयु चौबीस वर्ष है। हिन्दी टंकण का प्रमाण साथ है। महाविद्यालय की सूचना दिनांक 1 सितंबर 2026 के अनुसार यह पद खुला है। कृपया साक्षात्कार हेतु बुलाए जाने का कष्ट करें। आवेदक, रमेश कुमार, मकान संख्या 18, गंगानगर रोड, बीकानेर। संलग्नक: अंकतालिका, जाति प्रमाण यदि लागू हो, टंकण प्रमाण। विद्यार्थी-आवेदन सबसे अधिक छुट्टी का पूछा जाता है। तथ्य छोटे और पूरे हों — कक्षा, अनुक्रमांक, तिथि से तिथि तक, एक सच्चा कारण। लंबी करुणा-कथा आवेदन को नाटक बनाती है, पत्र नहीं। भरा रूप: निवास — मकान संख्या 18, गंगानगर रोड, बीकानेर। दिनांक 10 सितंबर 2026। सेवा में, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, बीकानेर। विषय: तीन दिवस के अवकाश हेतु आवेदन। महोदय, सविनय निवेदन है कि मैं सीता शर्मा, बी.ए. द्वितीय सेमेस्टर, अनुक्रमांक 24105, 15 से 17 सितंबर 2026 तक परिवार के विवाह-कार्य में घर जानी हूँ। इन तीन दिनों की छुट्टी स्वीकृत करने का कष्ट करें। अनुपस्थिति में सहपाठी से नोट ले लूँगी। आवेदिका, सीता शर्मा, कक्षा और अनुक्रमांक। कारण एक वाक्य है, तिथियाँ साफ हैं, वचन है कि पढ़ाई नहीं छूटेगी। यही पूरा आवेदन है।
6 शिकायती पत्र
शिकायती पत्र किसी हानि, उपेक्षा या नियम-भंग की लिखित सूचना है, जिसके अंत में निराकरण का निवेदन होता है। केवल क्रोध शिकायत नहीं। गाली कार्यालय नहीं पढ़ता, फ़ाइल बंद करता है। स्थिर अंग चार हैं। घटना का स्थान और दिनांक। तथ्य क्रम से — क्या हुआ, कब, किससे कहा, क्या उत्तर मिला। प्रभाव — पानी नहीं आया, सड़क टूटी, बिल गलत, पुस्तक नहीं मिली। प्रार्थना — जाँच हो, कार्रवाई हो, समयबद्ध उत्तर मिले। प्रतिलिपि उच्च अधिकारी को सूचनार्थ लग सकती है, पर पहले सक्षम स्थानीय पद को लिखो। ऊपर कूदना तभी जब नीचे उत्तर न मिले; परीक्षा का नमूना प्रायः सीधे सक्षम अधिकारी को जाता है।
नमूना। सेवा में, अधिशासी अधिकारी, नगर परिषद, बीकानेर। विषय: वार्ड 12 में नल-कनेक्शन बंद रहने बाबत। महोदय, निवेदन है कि गंगानगर रोड स्थित मकान संख्या 18 में 5 सितंबर से पेयजल नहीं आ रहा। 7 सितंबर को लाइनमैन को मौखिक सूचना दी गई, कार्य नहीं हुआ। परिवार पीने का जल बाहर से ला रहा है। कृपया तीन दिनों में कनेक्शन चालू कराने का आदेश दें और की गई कार्रवाई से अवगत कराएँ। प्रार्थी, नाम और पूरा पता। तथ्य के बिना शिकायत भाषण रह जाती है। निवेदन के बिना वह केवल वर्णन रह जाती है। तिथि के बिना जाँच शुरू नहीं होती। तीनों साथ हों तो शिकायत काम का कागज़ बनती है।
7 व्यावसायिक पत्र
व्यावसायिक पत्र व्यापार, आपूर्ति, मूल्य, आदेश और भुगतान के काम का पत्र है। लेखक और पाठक प्रायः फर्म, दुकान या आपूर्ति-अधिकारी हैं। अंग शासकीय से मिलते हैं, स्वर लेन-देन का है। पत्रशीर्ष में फर्म का नाम, पता, दूरभाष। संदर्भ — आपका पत्र / हमारी सूची संख्या। विषय — मूल्य-सूची हेतु / आदेश की पुष्टि / विलंबित आपूर्ति / बकाया राशि। संबोधन महोदय। कलेवर में वस्तु का नाम, मात्रा, दर, तिथि, भाड़ा, भुगतान-विधि स्पष्ट रहते हैं। समापन धन्यवाद के साथ भवदीय, प्रबंधक। व्यावसायिक पत्र भाव नहीं, शर्त लिखता है। “बहुत कृपा होगी” से काम नहीं चलता यदि मात्रा न लिखी हो।
भेद काम से खुलते हैं। मंगनी-पत्र दर और नमूना पूछता है। आदेश-पत्र मात्रा बाँधता है। शिकायत-पत्र व्यापार में देर या दोष बताता है — यह नागरिक शिकायत से अलग, फर्म-से-फर्म है। वसूली-पत्र बकाया याद दिलाता है। उदाहरण — विषय: हिन्दी व्याकरण की पचास प्रतियाँ। महोदय, कृपया कामताप्रसाद गुरु के हिन्दी व्याकरण की पचास प्रतियाँ रेल पार्सल से भेजें। बिल हमारे पते पर हो। भुगतान आदेश मिलने के पंद्रह दिनों में किया जाएगा। धन्यवाद। व्यावसायिक भाषा में वस्तु का पूरा नाम, संस्करण यदि हो, और संख्या बिना अनुमान के लिखो। “कुछ पुस्तकें भेज दें” व्यावसायिक पत्र नहीं, अधूरी बात है।
8 निविदा और विज्ञप्ति
निविदा वह आमंत्रण है जिसमें कार्यालय किसी कार्य या आपूर्ति के लिए दरें माँगता है। यह एक व्यक्ति का पत्र नहीं। सभी इच्छुक योग्य बोलीदाताओं को जाता है। शीर्षक प्रायः निविदा सूचना होता है। स्थिर अंग — निविदा संख्या, कार्य का नाम, स्थान, अनुमानित लागत, धरोहर राशि, निविदा प्रपत्र कहाँ मिलेगा, प्रपत्र का मूल्य, जमा करने की अंतिम तिथि और समय, खोलने की तिथि, योग्य ठेकेदार की शर्त, संपर्क अधिकारी, शर्तें कहाँ देखी जाएँ। धरोहर और अंतिम तिथि इसके प्राण हैं। बिना धरोहर के बोली गंभीर नहीं मानी जाती। बिना अंतिम तिथि के आमंत्रण अधूरा है।
भरा रूप: निविदा सूचना संख्या 12/भवन/2026। कार्य — राजकीय महाविद्यालय, बीकानेर की सीमा-दीवार मरम्मत। अनुमानित लागत चार लाख रुपये। धरोहर राशि दस हजार रुपये, बैंक ड्राफ्ट से, प्राचार्य के पदनाम। प्रपत्र कार्यालय से प्रातः 10 से अपराह्न 3 तक मिलेगा, मूल्य पाँच सौ रुपये। जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026, दोपहर 3 बजे; खोलने की तिथि उसी दिन 4 बजे। योग्य पंजीकृत ठेकेदार ही भरें। अधूरी निविदा अस्वीकृत की जाएगी। संपर्क — प्राचार्य। शर्तें कार्यालय पट्ट पर देखी जा सकती हैं।
विज्ञप्ति जन या समाचार-माध्यम के लिए तथ्य-सूचना है। इसे प्रेस-विज्ञप्ति भी कहते हैं। अंग — शीर्षक, स्थान और दिनांक, कौन-क्या-कब-कहाँ, एक-दो आवश्यक तथ्य, प्रवक्ता का नाम और पद। आदेश की भाषा नहीं; सूचना की भाषा है। राजपत्र नहीं भरती। समाचार का कच्चा माल है। उदाहरण — बीकानेर, 12 सितंबर। जिला पुस्तक मेला 20 से 22 सितंबर तक डूंगर महाविद्यालय प्रांगण में लगेगा। प्रवेश निःशुल्क है। समय प्रातः 10 से रात्रि 8। प्रवक्ता: जनसंपर्क अधिकारी, जिला प्रशासन, बीकानेर। विज्ञप्ति में धरोहर नहीं होती। निविदा में मेले का रंग नहीं होता। दोनों प्रारूप हैं, पत्र नहीं।
| प्रारूप | पाठक | पहचान |
|---|---|---|
| निविदा | बोलीदाता | धरोहर · अंतिम तिथि · योग्यता |
| विज्ञप्ति | जन / समाचार-माध्यम | कौन · क्या · कब · कहाँ |
9 अधिसूचना और परिपत्र
अधिसूचना वह औपचारिक घोषणा है जो सक्षम प्राधिकारी किसी नियम, नियुक्ति, तिथि या शक्ति को विधिवत लागू करती है। प्रकाशन प्रायः राजपत्र में होता है। अंग — अधिसूचना शीर्षक, संख्या, दिनांक, प्राधिकारी का नाम, अधिनियम या नियम की धारा यदि हो, आदेश का पाठ, प्रभावी तिथि, हस्ताक्षर और पद। भाषा बाध्यकारी है — इसके द्वारा सूचित किया जाता है कि… विज्ञप्ति बताती है। अधिसूचना बाँधती है। संख्या और प्राधिकारी इसके प्राण हैं। बिना सक्षम पद के अधिसूचना सूचना रह जाती है, विधि नहीं।
भरा रूप: अधिसूचना संख्या एफ. 3/शिक्षा/2026, दिनांक 1 सितंबर 2026। शिक्षा विभाग, राजस्थान। इसके द्वारा सूचित किया जाता है कि राजकीय महाविद्यालयों के पुस्तकालय प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक खुले रहेंगे। यह आदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी है। हस्ताक्षर, सचिव, शिक्षा विभाग। परिपत्र वह निर्देश है जो एक ही पाठ कई कार्यालयों या अधीनस्थों को भेजा जाता है। संबोधन समस्त… होता है — समस्त प्राचार्य / समस्त तहसीलदार। अंग — परिपत्र संख्या, दिनांक, विषय, निर्देश के बिंदु, पालन की तिथि, हस्ताक्षर। “सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु” स्थिर वाक्य है। भरा रूप: परिपत्र संख्या 21/स्था/2026, दिनांक 8 सितंबर 2026। समस्त प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, बीकानेर मंडल। विषय: पुस्तकालय उपस्थिति-पंजी। निर्देश — (1) प्रत्येक विद्यार्थी प्रवेश पर पंजी में हस्ताक्षर करे। (2) मासिक सार प्रत्येक माह की 5 तारीख तक जिला कार्यालय पहुँचे। पालन 15 सितंबर से अनिवार्य है। सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु। भवदीय, संयुक्त निदेशक, महाविद्यालय शिक्षा।
चारों प्रारूप एक मेज़ पर। निविदा बोली माँगती है। विज्ञप्ति जन को बताती है। अधिसूचना नियम बाँधती है। परिपत्र अंदरूनी निर्देश बाँटता है। पत्र एक प्राप्तकर्ता को पूरा संदेश देता है। प्रारूप कई सिरों या विधि के पाठ को साँचा देता है। इकाई 5 अब इन्हीं विचारों को काटेगी, फैलाएगी और निबंध में बाँधेगी — संक्षेपण, पल्लवन, निबंध। पत्र फ़ाइल का औजार है। निबंध विचार का औजार है। दोनों संप्रेषण हैं, एक साँचा नहीं।
| प्रारूप | बल | पहचान-वाक्य |
|---|---|---|
| अधिसूचना | विधिवत आदेश | इसके द्वारा सूचित किया जाता है |
| परिपत्र | आंतरिक निर्देश | समस्त… · कार्यवाही हेतु |
| विज्ञप्ति | जन-सूचना | स्थान, दिनांक, तथ्य |
| निविदा | बोली का आमंत्रण | धरोहर · अंतिम तिथि |
