हिन्दी भाषा, व्याकरण एवं संप्रेषण
गेस पेपर 3
HINDI 4.5AECT21 • BA Semester 2 • 18 प्रश्न
| समय: 3 घंटे | पूर्णांक: 50 |
| खंड क: लघु उत्तर — 10 × 2 = 20 (सभी अनिवार्य) | |
| खंड ख: दीर्घ उत्तर — 3 में से कोई 2 × 5 = 10 | |
| खंड ग: कौशल — 5 में से कोई 4 × 5 = 20 | |
पित्राज्ञा = पितृ + आज्ञा (यण संधि — ऋ + आ = र्)। अन्वय = अनु + अय (यण संधि — उ + अ = व्)। अतिशय = अति + शय (यण संधि — इ + अ = य्)। मात्रादेश = मातृ + आदेश (यण संधि — ऋ + आ = र्)।
उपसर्ग प्र से — प्रचार (प्र + चार), प्रयास (प्र + यास)। उपसर्ग सम् से — संयोग (सम् + योग), सम्मान (सम् + मान)। प्रत्यय -ता से — मानवता (मानव + ता), सज्जनता (सज्जन + ता)। प्रत्यय -पन से — लड़कपन (लड़क + पन), बचपन (बच्चा + पन)।
कुल = वंश, परिवार; कूल = नदी का किनारा। पानी = जल; पाणि = हाथ। कृपण = कंजूस व्यक्ति; कृपाण = तलवार। पुरुष = नर, मनुष्य; परुष = कठोर, रूखा।
नवीन – प्राचीन, अमृत – विष, उदार – अनुदार, संयोग – वियोग।
पंचामृत = पाँच अमृतों का समाहार (द्विगु)। त्रिलोक = तीन लोकों का समाहार (द्विगु)। नवरत्न = नौ रत्नों का समाहार (द्विगु)। सप्तपुरी = सात पुरियों का समाहार (द्विगु)।
यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार (अव्ययीभाव — पूर्व पद प्रधान)। गंगा-तट = गंगा का तट (तत्पुरुष — उत्तर पद प्रधान)। महादेव = महान है जो देव (कर्मधारय — विशेषण + विशेष्य)। दशानन = दस आनन हैं जिसके, अर्थात् रावण (बहुव्रीहि — अन्य पद प्रधान)।
(1) नौ दो ग्यारह होना — भाग जाना। पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया। (2) अँगूठा दिखाना — साफ़ इनकार करना। माँगने पर उसने अँगूठा दिखा दिया। (3) पानी फेरना — बिगाड़ देना। उसने मेरी सारी योजना पर पानी फेर दिया। (4) लकीर का फ़क़ीर होना — पुरानी रीति पर चलना। वह लकीर का फ़क़ीर है, नया तरीका अपनाता ही नहीं।
(1) मैंने रोटी खाई। दोष — लिंग; रोटी स्त्रीलिंग है, इसलिए क्रिया भी स्त्रीलिंग होगी। (2) सीता ने गाना गाया। दोष — लिंग; गाना पुल्लिंग है, इसलिए गाया होगा। (3) वे लोग अच्छे हैं। दोष — वचन; कर्ता बहुवचन है तो क्रिया भी बहुवचन होगी।
जल — पानी, नीर, वारि, सलिल। सूर्य — रवि, आदित्य, दिनकर, भानु। चन्द्रमा — चाँद, शशि, निशाकर, राकेश। कमल — पंकज, जलज, सरोज, राजीव।
कल — (1) बीता हुआ दिन, (2) आने वाला दिन। हार — (1) पराजय, (2) फूलों की माला। अर्थ — (1) धन, संपत्ति, (2) मतलब, अभिप्राय।
शब्द-निर्माण में उपसर्ग और प्रत्यय दो प्रमुख साधन हैं। उपसर्ग वह शब्दांश है जो सार्थक शब्द के आगे जुड़कर नया अर्थ देता है। प्रमुख उपसर्ग हैं — प्र (प्रचार, प्रगति), सम् (संयोग, संस्कार), वि (विशेष, विवाद), सु (सुगम, सज्जन), अति (अत्याचार, अतिरिक्त)। उपसर्ग प्रायः अर्थ बदलता है, शब्द का वर्ग प्रायः वही रहता है। प्रत्यय शब्द के पीछे जुड़ता है और प्रायः नया शब्द-वर्ग बनाता है। प्रत्यय दो प्रकार के हैं — कृत् प्रत्यय धातु से बनते हैं, जैसे पढ़ + आई = पढ़ाई, लिख + आवट = लिखावट; तद्धित प्रत्यय संज्ञा आदि से बनते हैं, जैसे मानव + ता = मानवता, लड़का + पन = लड़कपन। इस प्रकार उपसर्ग अर्थ-विस्तार करता है और प्रत्यय नए शब्द गढ़ता है — दोनों मिलकर हिन्दी का शब्द-भंडार समृद्ध करते हैं।
व्यंजन संधि में व्यंजन के बाद स्वर या व्यंजन आने पर पूर्व व्यंजन बदलता है। नियम हैं — त् + च/छ = च्च/च्छ, जैसे उच्चारण (उत् + चारण); त् + ज = ज्ज, जैसे सज्जन (सत् + जन); त् + ल = ल्ल, जैसे उल्लास (उत् + लास); त् + न = न्न, जैसे जगन्नाथ (जगत् + नाथ)। विसर्ग संधि में विसर्ग (:) के बाद स्वर या व्यंजन आता है। नियम हैं — ः + च/छ = श्, जैसे निश्चल (निः + चल); ः + त/थ = स्, जैसे निस्तेज (निः + तेज); ः + क/ख/ट/ठ/प/फ = ष्, जैसे दुष्कर (दुः + कर); अः + घोष व्यंजन = ओ, जैसे मनोरथ (मनः + रथ), तपोवन (तपः + वन)। इस प्रकार व्यंजन संधि में स्पर्श व्यंजन मिलते हैं और विसर्ग संधि में विसर्ग का रूप बदलता है।
मुहावरा और लोकोक्ति दोनों रूढ़ प्रयोग हैं, पर इनमें स्पष्ट अंतर है। मुहावरा वाक्यांश होता है, अपने आप में पूर्ण वाक्य नहीं — जैसे 'आँख दिखाना' (क्रोध से डाँटना), 'पानी फेरना' (बिगाड़ देना)। इसका प्रयोग वाक्य के भीतर होता है — 'शिक्षक ने आँख दिखाई।' लोकोक्ति पूर्ण स्वतंत्र वाक्य होती है, अपने आप में पूर्ण अर्थ देती है — जैसे 'अधजल गगरी छलकत जाय' (थोड़े ज्ञान से अहंकार), 'एक अनार सौ बीमार' (वस्तु थोड़ी, चाहने वाले बहुत)। दूसरा अंतर यह है कि मुहावरे में प्रायः क्रिया रहती है और लिंग-वचन के अनुसार रूप बदलता है, जबकि लोकोक्ति स्थिर रहती है। तीसरा, लोकोक्ति में प्रायः कोई नीति या जीवन-सत्य छिपा होता है, मुहावरे में केवल रूढ़ अर्थ। अतः मुहावरा वाक्य का अंग है, लोकोक्ति स्वतंत्र कथन।
मकान संख्या 15, गंगाशहर, बीकानेर। दिनांक: 14 सितंबर 2026। सेवा में, अधिशासी अभियंता, विद्युत विभाग, बीकानेर। विषय: मोहल्ले में अनियमित विद्युत आपूर्ति बाबत। महोदय, निवेदन है कि हमारे मोहल्ले गंगाशहर में पिछले एक माह से विद्युत आपूर्ति अत्यंत अनियमित है। दिन में आठ-दस बार बिजली जाती है और रात को भी घंटों अंधेरा रहता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है, परीक्षा निकट है। व्यापारियों का काम ठप है, फ्रिज का सामान खराब हो रहा है। कई बार शिकायत दर्ज कराई, पर कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। अतः आपसे अनुरोध है कि ट्रांसफार्मर की जाँच कराकर आपूर्ति नियमित कराने की कृपा करें। भवदीय, (हस्ताक्षर) रमेश अग्रवाल।
राजकीय महाविद्यालय, बीकानेर। परिपत्र। संख्या: प. 08/पुस्तकालय/2026। दिनांक: 14 सितंबर 2026। समस्त विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को सूचित किया जाता है कि परीक्षा-काल को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय पुस्तकालय का समय 15 सितंबर 2026 से परिवर्तित किया जाता है। नवीन समय प्रातः 8 बजे से सायं 8 बजे तक रहेगा। रविवार को पुस्तकालय प्रातः 10 बजे से सायं 4 बजे तक खुला रहेगा। पुस्तक निर्गमन का समय पूर्ववत रहेगा। सभी संबंधित इसका पालन करें। (हस्ताक्षर) प्राचार्य।
रूपरेखा: (1) प्रस्तावना — पर्यावरण का अर्थ और महत्व। (2) पर्यावरण प्रदूषण के कारण — वायु, जल, ध्वनि प्रदूषण। (3) दुष्प्रभाव — स्वास्थ्य, जलवायु, जीव-जंतु। (4) संरक्षण के उपाय — वृक्षारोपण, स्वच्छता, जन-जागरूकता। (5) उपसंहार। विस्तार: पर्यावरण वह परिवेश है जिसमें हम जीते हैं — वायु, जल, भूमि, वनस्पति। औद्योगीकरण और जनसंख्या वृद्धि से यह दूषित हो रहा है। कारखानों का धुआँ वायु बिगाड़ता है, रसायन नदियाँ विषैली करते हैं। परिणामस्वरूप रोग बढ़ रहे हैं, ऋतुएँ बदल रही हैं। समाधान है — अधिक वृक्ष लगाना, प्लास्टिक कम करना, जल बचाना और जन-जागरूकता फैलाना। पर्यावरण बचेगा तभी मानव बचेगा — यही निबंध का संदेश है।
शीर्षक: समय का सदुपयोग। संक्षेपण: समय सबसे बड़ा धन है; इसका आदर करने वाले का समय आदर करता है। विद्यार्थी के लिए समय का महत्व अधिक है — नियमित पढ़ने वाला सफल होता है, टालने वाला पछताता है। समय प्रतीक्षा नहीं करता और बीता समय लौटता नहीं। अतः आलस्य छोड़कर प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना चाहिए; परिश्रमी समय को सोने में बदल देता है।
राजकीय महाविद्यालय, बीकानेर। दिनांक: 14 सितंबर 2026। प्रिय श्रीमान् जिला कलेक्टर महोदय, सादर नमस्कार। आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि हमारे महाविद्यालय में 25 सितंबर 2026 को जिला स्तरीय विज्ञान मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें जिले के 40 विद्यालयों के विद्यार्थी भाग लेंगे। मेले का उद्घाटन प्रातः 10 बजे होगा। आपकी उपस्थिति से विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन होगा और आयोजन की शोभा बढ़ेगी। कृपया उद्घाटन हेतु पधारकर हमें अनुगृहीत करें। सादर, आपका स्नेहाकांक्षी, (हस्ताक्षर) प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, बीकानेर।
