Noteclerical

अलंकार

Lesson 2 of 113

इस विषय में क्या आता है

परीक्षा पूछती है — मुख कमल के समान कौन-सा अलंकार, चरण-कमल उपमा है या रूपक, मनहुँ दिखे तो क्या, तीन बेर…तीन बेर यमक है या श्लेष, पानी वाली रहीम की पंक्ति में श्लेष कहाँ, व्यंजन बार-बार पड़े तो अनुप्रास। पूछ गहना कौन-सा है, रस का नाम नहीं, छंद की मात्रा नहीं।

यहाँ पढ़ना है

शब्दालंकार: अनुप्रास, यमक, श्लेष। अर्थालंकार: उपमा (चार अंग), रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, मानवीकरण, विरोधाभास, संदेह, भ्रांतिमान, दृष्टांत। यमक बनाम श्लेष। उपमा बनाम रूपक बनाम उत्प्रेक्षा। पंक्ति पढ़ने के पाँच कदम।

यहाँ नहीं घुसाना

शृंगार-वीर-करुण, दोहा-चौपाई मात्रा — रस / छंद। कर्तृ-कर्म-भाव — वाच्य। आँख का तारा — मुहावरे। अंधों में काना राजा — लोकोक्तियाँ। हरि के कई अर्थ शब्दकोश में — अनेकार्थक (श्लेष तभी जब पंक्ति एक साथ दो अर्थ माँगे)। कमल = पंकज — पर्याय।

एक पंक्ति: अलंकार भाषा को सुंदर करता है। रस पाठक के हृदय का भाव है। छंद पंक्ति का नाप है। तीनों एक नहीं।

दो घर — शब्द और अर्थ

घरसुंदरता कहाँ सेपक्के नाम
शब्दालंकारशब्द के उच्चारण, दोहराव, दो अर्थअनुप्रास, यमक, श्लेष
अर्थालंकारअर्थ की तुलना, बढ़ा-चढ़ा, संभावनाउपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति…

एक पंक्ति में दो भी बैठ सकते हैं: «चारु चंद्र की चंचल किरणें खेल रही हैं» — च की आवृत्ति अनुप्रास, किरणों का खेलना मानवीकरण। प्रश्न «प्रमुख / स्पष्ट» माँगे तो वही चुनो जो विकल्प में पक्का हो; दोनों पूछे तो दोनों लिखो।

अनुप्रास — व्यंजन की आवृत्ति

एक ही व्यंजन बार-बार आए, स्वर चाहे बदल जाएँ — अनुप्रास। कान को संगीत-सा लगे। अर्थ की तुलना यहाँ नहीं ढूँढ़नी।

भेद (कक्षा-10 जितना)क्या होता हैउदाहरण
वृत्यनुप्रासएक व्यंजन अनेक बारचारु चंद्र की चंचल किरणें — च
छेकानुप्रासकई व्यंजनों का क्रम, प्रायः पास-पास एक-एक बारतरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए — त, र, न का क्रम (केवल त बार-बार = वृत्य, ऊपर वाली च-पंक्ति)
लाटानुप्रासशब्द/वाक्यांश दोहरा, तात्पर्य दूसरापूत कपूत तो क्यों धन संचय, पूत सपूत तो क्यों धन संचय

लिपिक प्रायः केवल «अनुप्रास» लिखवाता है। भेद तब जब विकल्प में वृत्य/छेक/लाट हों। त, च, क, म की गूँज कान से पकड़ो — उपमेय-उपमान मत गिनना।

उदाहरण। «काली कछुए की कौड़ी» — क की आवृत्ति = अनुप्रास। काला यहाँ विशेषण है, रूपक नहीं जब तक «कछुआ ही काला बादल» जैसा अभेद न हो।

यमक — शब्द दो बार, अर्थ हर बार नया

एक सार्थक शब्द (या शब्द-समूह) दो या अधिक बार आए और हर बार अर्थ अलग हो — यमक। आवृत्ति दिखनी चाहिए। एक बार का शब्द यमक नहीं।

पंक्तिशब्ददो अर्थ
तीन बेर खाती थीं वे, तीन बेर खाती हैंबेरबार (दफा) · बेर का फल
कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकायकनकसोना · धतूरा
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेरफेर / फिरामाला घुमाना · मन का फेर (विकार)

श्रुतिसम (नीर–नीड़) दो अलग वर्तनी — अनेकार्थक/श्रुतिसम। यमक में वर्तनी एक, दोहराव है।

श्लेष — शब्द एक बार, अर्थ एक साथ कई

कवि शब्द एक ही जगह रखता है और जान-बूझकर दो-तीन अर्थ एक साथ चलते हैं। दोहराना ज़रूरी नहीं।

रहीम: «पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।» पानी = मोती की चमक / मनुष्य की इज्जत (आब) / चूने का जल। एक शब्द, तीन घर एक साथ — श्लेष।

यमकश्लेषअनेकार्थक
शब्द कितनी बारदो या अधिकप्रायः एकशब्दकोश का गुण, पंक्ति की ज़रूरत नहीं
अर्थ कब खुलेंहर बार अलग टुकड़े मेंएक साथ, पंक्ति का खेलहरि = विष्णु, सिंह, सूर्य — सूची अनेकार्थक
परीक्षादोहरा शब्द दिखेएक शब्द, दो अर्थ पूछेप्रश्न «अनेकार्थक छाँटो» हो तो वहाँ

कसौटी: दो बार लिखा + दो अर्थ = यमक। एक बार लिखा + पंक्ति दो अर्थ माँगे = श्लेष। शब्द के कई अर्थ बिना काव्य-खेल = अनेकार्थक, अलंकार नहीं।

उपमा — तुलना, चार अंग

एक चीज़ की दूसरी से तुलना, दोनों अलग रहें, बीच में वाचक शब्द हो — उपमा। चार अंग गिनो। चारों हों तो पूर्णोपमा; कोई छूटे तो लुप्तोपमा।

अंगसवाल«पीपर पात सरिस मन डोला» में
उपमेयकिसकी तुलना?मन
उपमानकिससे तुलना?पीपर पात (पीपल का पत्ता)
वाचकतुलना का शब्द?सरिस (समान)
साधर्म्य / साधारण धर्मकौन-सा गुण दोनों में?डोलना (चंचलता)

वाचक रटो: सा, से, सी, सम, समान, सदृश, तुल्य, जैसा, ज्यों, जिमि, इव, यथा, भाँति, नाई, सरिस। «मुख कमल के समान है» — उपमा। वाच्य-पृष्ठ ने यही पंक्ति अलंकार को सौंपी थी।

«हरि पद कोमल कमल से» — उपमेय पद, उपमान कमल, वाचक से, धर्म कोमल। पूर्णोपमा।

सा बिना रूपक हो जाता। «मुख कमल है» या «चरण-कमल» में वाचक नहीं — अभेद = रूपक। उपमा तभी जब तुलना का पुल (सा/समान) दिखे या स्पष्ट «जैसे» छिपा हो और दोनों अलग माने जाएँ। संदेह हो तो वाचक ढूँढ़ो।

रूपक — उपमेय ही उपमान, पुल नहीं

कवि कहता है: यह वही है, जैसे नहीं। उपमान का आरोप उपमेय पर, भेद मिटा। वाचक सा/समान प्रायः नहीं। बहुत बार समास: चरण-कमल, मुख-चंद्र, ज्ञान-दीप। समास का नाम समास पर; प्रश्न «अलंकार» हो तो रूपक।

पंक्ति / पदअभेद
पायो जी मैंने राम-रतन धन पायोराम ही रतन-धन
चरण-कमल बंदौ हरिराईचरण ही कमल
मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहोंचंद्र ही खिलौना

नीलकमल कर्मधारय समास पर था — रंग+फूल। अलंकार तभी जब तुलना/अभेद का खेल हो, सिर्फ़ नामकरण नहीं।

उत्प्रेक्षा — संभावना, मनु-जानो-जनु-मनहुँ

उपमेय में उपमान की कल्पना / संभावना। कवि कहता है: मानो यही हो। पहचान-शब्द: मनु, जानो, जनु, मनहुँ, मानो, निश्चय, इव (कभी)।

उदाहरण: «सोहत ओढ़े पीत पट स्याम सलौने गात। मनहुँ नीलमणि सैल पर आतप परयौ प्रभात।» — श्याम गात पर पीत पट = मानो नीलमणि पर्वत पर सुबह का धूप। मनहुँ = उत्प्रेक्षा।

उपमारूपकउत्प्रेक्षा
संबंधतुलना, दो अलगअभेद, एक मान लियासंभावना, «मानो»
शब्दसा, समान, सेप्रायः नहींमनु, जानो, जनु, मनहुँ
दृढ़ताजैसे हैहै हीहो सकता है / लगता है

संदेह अलंकार: «यह चंद्र है या मुख?» — दो में से एक, निश्चय नहीं। उत्प्रेक्षा में कवि संभावना जताकर सौंदर्य बढ़ाता है, प्रश्नवाचक दुविधा कम। भ्रांतिमान: गलत को सही समझ लेना — सर्प को माला जान लेना।

अतिशयोक्ति — बढ़ा-चढ़ाकर

लोक-सीमा से बाहर बढ़ा देना। असंभव-सा चित्र, पर काव्य में चलता है।

«हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग। लंका सारी जल गई, गए निशाचर भाग।» — पूँछ में आग लगने से पहले लंका जल गई: समय उलट, अतिशयोक्ति।

मुहावरा «आकाश-पाताल एक करना» रूढ़ पदबंध है — मुहावरे। वही भाव पंक्ति में नया चित्र बने तो अतिशयोक्ति। परीक्षा पदबंध पूछे तो मुहावरा; काव्य-पंक्ति पूछे तो अलंकार।

और अर्थालंकार — कक्षा-10 जितने पक्के

नामक्या हैछोटा चित्र
मानवीकरणनिर्जीव / प्रकृति पर मनुष्य के काममेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के। किरणें खेल रही हैं।
विरोधाभासदो विरोधी बातें एक साथ, अर्थ बैठेसुख में दुख, जागते सोना — कबीर-से पद; विषामृत जब काव्य में एक ही काल में
संदेहउपमेय-उपमान में निश्चय नहींयह मुख है या चंद्र?
भ्रांतिमानभूल से एक को दूसरा मान लेनामोती को जल-बिंदु समझना
दृष्टांतदो स्वतंत्र वाक्य, एक बात दूसरे से सिद्धकथन + बिम्ब अलग पंक्ति, वाचक «जैसे» बिना भी
अन्योक्तिप्रस्तुत पर अप्रस्तुत से व्यंग्य/सीखखीर गाछ पर नारि फल — लक्ष्य दूसरा व्यक्ति

विलोम शब्द-जोड़ी विलोम पर है। विरोधाभास अलंकार तभी जब पंक्ति में विरोध से नया अर्थ निकले, सिर्फ़ जय-पराजय सूची नहीं।

पंक्ति कैसे पढ़ो — पाँच कदम

  1. व्यंजन गूँज? हाँ → अनुप्रास (शब्दालंकार)। यहीं रुक सकते हो अगर विकल्प वही हो।
  2. एक शब्द दो बार, अर्थ दो? यमक। एक बार, दो अर्थ एक साथ? श्लेष।
  3. सा / समान / से / सरिस? उपमा — चार अंग गिनो।
  4. वाचक नहीं, अभेद (चरण-कमल)? रूपक। मनहुँ / जानो / जनु? उत्प्रेक्षा।
  5. सीमा टूटी? अतिशयोक्ति। बादल बोलते / बन-ठन? मानवीकरण। कुछ न मिले तो मुहावरा/रस/छंद के पृष्ठ पर मत कूदना बिना प्रश्न के।

जाल — यहीं कटते हैं

1. यमक को श्लेष

दो बार लिखा = यमक। रहीम का एक «पानी» = श्लेष। कनक कनक दो बार = यमक, अनेकार्थक-सूची नहीं।

2. उपमा को रूपक

समान/सा दिखे तो उपमा। चरण-कमल बिना सा = रूपक। «मुख कमल के समान» वाच्य नहीं, उपमा।

3. उत्प्रेक्षा को उपमा

मनहुँ/जानो संभावना है, सा पक्की तुलना है।

4. मुहावरा / लोकोक्ति

आँख का तारा रूढ़ अर्थ — मुहावरे। नाच न जाने आँगन टेढ़ा — लोकोक्ति। अलंकार पंक्ति का ताज़ा गहना है, थैले का पदबंध नहीं।

5. रस और छंद

शृंगार पढ़कर रोमांच = रस। दोहा 13+11 = छंद। दोनों रस / छंद पर। यहाँ गहना।

उदाहरण

«कनक कनक ते सौ गुनी» — यमक, श्लेष, या अनेकार्थक?

हल

  1. दो बार

    कनक…कनक आवृत्ति है।

  2. दो अर्थ

    सोना और धतूरा — अलग-अलग जगह।

  3. ठप्पा

    यमक। श्लेष एक बार होता। अनेकार्थक शब्द का गुण है, इस पंक्ति का अलंकार यमक है।

उत्तरयमक

परीक्षा में पाँच कदम

  1. प्रश्न क्या? अलंकार का नाम, अंग गिनो, शब्दालंकार/अर्थालंकार, या भेद (यमक/श्लेष)।
  2. कान: व्यंजन गूँज → अनुप्रास।
  3. आवृत्ति: दो बार अलग अर्थ → यमक; एक बार कई अर्थ → श्लेष。
  4. तुलना: वाचक → उपमा; अभेद → रूपक; मानो → उत्प्रेक्षा; हद पार → अतिशयोक्ति।
  5. बाकी घर मत मिलाओ — रस, छंद, मुहावरा, वाच्य, पर्याय।
भूल-सूची। चरण-कमल = उपमा। मनहुँ = उपमा। कनक कनक = श्लेष। पानी (रहीम) = यमक। आँख का तारा = रूपक। हरि अनेकार्थक = श्लेष हमेशा। लिखता है = अलंकार। दोहा = अलंकार। शृंगार रस = शब्दालंकार।

प्रश्न 1–10

प्र. 1

अलंकार किसे कहते हैं?

  1. हृदय का स्थायी भाव — वह रस है
  2. काव्य/भाषा को शब्द या अर्थ से सुंदर बनाने वाला गहना
  3. मात्रा का नाप — छंद
  4. रूढ़ वाक्यांश — मुहावरा

हल

  1. गहना

    रस और छंद अगले पृष्ठ। मुहावरा अपना घर।

उत्तरB
प्र. 2

«चारु चंद्र की चंचल किरणें» में प्रमुख शब्दालंकार?

  1. उपमा — अर्थालंकार, चंद्र तुलना नहीं बनी पक्की
  2. अनुप्रास — च की आवृत्ति
  3. यमक — चंद्र दो अर्थ नहीं
  4. श्लेष

हल

  1. कान

    चारु, चंद्र, चंचल — च। मानवीकरण «खेल रही» आगे की पंक्ति में हो तो अर्थालंकार दूसरा; इस टुकड़े का पक्का अनुप्रास।

उत्तरB
प्र. 3

«तीन बेर खाती थीं वे, तीन बेर खाती हैं»?

  1. श्लेष — शब्द एक बार होना चाहिए
  2. यमक
  3. अनुप्रास
  4. उपमा

हल

  1. बेर…बेर

    दफा और फल। दो बार, दो अर्थ = यमक।

उत्तरB
प्र. 4

«पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून» — अलंकार?

  1. यमक — पानी दो बार लिखा नहीं इस प्रसिद्ध रूप में एक ही पानी कई अर्थ
  2. श्लेष
  3. अनुप्रास
  4. अनेकार्थक शब्द मात्र, अलंकार नहीं — पंक्ति काव्य-खेल है

हल

  1. एक पानी, तीन घर

    मोती-चमक, मनुष्य-इज्जत, चूना-जल। श्लेष। अनेकार्थक गुण है, यहाँ अलंकार श्लेष ठहरता है।

उत्तरB
प्र. 5

«मुख कमल के समान है» — अंग और अलंकार?

  1. रूपक — वाचक «समान» है इसलिए रूपक नहीं
  2. उपमा; उपमेय मुख, उपमान कमल, वाचक समान, धर्म (कोमल/शोभा) लुप्त या गर्भित
  3. कर्मवाच्य
  4. मुहावरा

हल

  1. समान

    उपमा। धर्म वाक्य में न हो तो लुप्तोपमा। वाच्य परिवर्तन नहीं।

उत्तरB
प्र. 6

«चरण-कमल बंदौ हरिराई»?

  1. उपमा — सा नहीं है
  2. रूपक — चरण ही कमल, अभेद
  3. उत्प्रेक्षा — मनहुँ नहीं
  4. अनुप्रास

हल

  1. पुल नहीं

    समास में अभेद। रूपक।

उत्तरB
प्र. 7

पंक्ति में «मनहुँ» हो तो पक्का?

  1. उपमा
  2. उत्प्रेक्षा
  3. रूपक
  4. यमक

हल

  1. संभावना

    मनु, जानो, जनु, मनहुँ = उत्प्रेक्षा के झंडे।

उत्तरB
प्र. 8

हनुमान की पूँछ में आग लगने से पहले लंका जल गई — अलंकार?

  1. उपमा
  2. अतिशयोक्ति
  3. श्लेष
  4. आकाश-पाताल एक करना — मुहावरा, पंक्ति काव्य की अतिशयोक्ति है

हल

  1. हद पार

    समय उलट, असंभव-सा — अतिशयोक्ति। मुहावरा अलग थैला।

उत्तरB
प्र. 9

यमक और श्लेष में पक्का फर्क?

  1. दोनों एक ही — आवृत्ति
  2. यमक: शब्द दो बार, अर्थ हर बार नया। श्लेष: शब्द एक बार, अर्थ एक साथ कई
  3. यमक अर्थालंकार है
  4. श्लेष केवल अनुप्रास है

हल

  1. गिनती

    दोहराव = यमक। एक पद कई अर्थ साथ = श्लेष। दोनों शब्दालंकार।

उत्तरB
प्र. 10

«मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के» प्रमुख अलंकार?

  1. उपमा — वाचक नहीं
  2. मानवीकरण — मेघ पर मनुष्य जैसा शृंगार
  3. रस शृंगार — भाव अगले पृष्ठ का, प्रश्न अलंकार का
  4. कर्मवाच्य

हल

  1. निर्जीव पर मानव-काम

    बन-ठन, संवरना। मानवीकरण। शृंगार रस पढ़ना अलग विषय है।

उत्तरB

अभ्यास

ये दस अलग कोण हैं — ऊपर वाले दस की नकल नहीं।

अ. 1

उपमा के चार अंग?

  1. कर्ता, कर्म, भाव, क्रिया
  2. उपमेय, उपमान, वाचक, साधर्म्य (साधारण धर्म)
  3. अनुप्रास, यमक, श्लेष, रूपक
  4. शृंगार, वीर, करुण, हास्य

हल

  1. तुलना के चार खंभे

    A वाच्य है। D रस है। C अलंकार-नाम हैं, अंग नहीं।

उत्तरB
अ. 2

«कनक कनक ते सौ गुनी»?

  1. श्लेष
  2. यमक
  3. रूपक
  4. अनेकार्थक प्रश्न — ठप्पा पंक्ति का यमक है

हल

  1. दो कनक

    सोना और धतूरा। यमक।

उत्तरB
अ. 3

«पीपर पात सरिस मन डोला» में वाचक?

  1. मन
  2. सरिस
  3. पात
  4. डोला — धर्म है, वाचक नहीं

हल

  1. सरिस = समान

    उपमेय मन, उपमान पात, धर्म डोलना।

उत्तरB
अ. 4

अनुप्रास किस घर का है?

  1. अर्थालंकार
  2. शब्दालंकार
  3. रस
  4. छंद

हल

  1. कान

    व्यंजन। अर्थ की तुलना नहीं।

उत्तरB
अ. 5

«यह मुख है या चंद्र?» — निकट अलंकार?

  1. उत्प्रेक्षा — मनहुँ नहीं, प्रश्न दुविधा है
  2. संदेह
  3. रूपक
  4. अतिशयोक्ति

हल

  1. निश्चय नहीं

    संदेह। उत्प्रेक्षा «मानो चंद्र है» कह देती।

उत्तरB
अ. 6

आँख का तारा?

  1. उपमा
  2. मुहावरा — रूढ़ अर्थ अत्यंत प्रिय; अलंकार की ताज़ा तुलना नहीं
  3. रूपक
  4. श्लेष

हल

  1. थैला

    मुहावरे। गहना तभी जब कवि नया चित्र गढ़े।

उत्तरB
अ. 7

पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो — अलंकार?

  1. उपमा
  2. रूपक — राम ही रतन-धन
  3. यमक
  4. वाच्य कर्म

हल

  1. अभेद

    सा नहीं। रूपक।

उत्तरB
अ. 8

लाटानुप्रास क्या है?

  1. एक व्यंजन बार-बार — वह वृत्यनुप्रास
  2. शब्द-समूह दोहरा, तात्पर्य दूसरा
  3. चार अंग की उपमा
  4. ने-रचना

हल

  1. पूत…पूत

    वाक्यांश एक, आशय कपूत/सपूत से बदलता — लाटानुप्रास।

उत्तरB
अ. 9

«राम पत्र लिखता है → पत्र लिखा जाता है» कौन-सा विषय?

  1. रूपक
  2. वाच्य-परिवर्तन — अलंकार नहीं
  3. अनुप्रास
  4. उत्प्रेक्षा

हल

  1. ढाँचा

    वाक्य-परिवर्तन। गहना नहीं।

उत्तरB
अ. 10

दोहा 13+11 मात्रा — यह?

  1. अनुप्रास
  2. छंद — रस / छंद; अलंकार नहीं
  3. यमक
  4. शृंगार रस

हल

  1. नाप

    छंद मात्रा गिनता है। रस भाव है। अलंकार गहना है। तीन अलग।

उत्तरB

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