अंग 4 · वाक्य विचार
पाठ 4.22
विषय शुरू · शब्द शक्ति — अभिधा, लक्षणा, व्यंजना
अर्थ वाले विषय में विधि-निषेध — वाक्य का भाव। उद्देश्य वाले विषय में लक्ष्य नहीं, किसके बारे में। वाक्य विश्लेषण वाले विषय में मुख्य-आश्रित टुकड़े। समास वाले विषय में नीलकमल एक फूल। आज काम: शब्द का सीधा अर्थ, लक्ष्य अर्थ, और ऊपर की झलक। कार्ड के 4: गाय घास खाती है, गंगा पर घर है, वह सिंह है, सूरज डूब गया। नया विकार नहीं। 3 शक्ति। अलंकार इस कोर्स में नहीं। आज शब्द क्या काम करता है।
1. जोड़ क्या है
परिभाषा सीधी रखो: अभिधा = सीधा अर्थ; लक्षणा = सीधा न बैठे तो लक्ष्य अर्थ; व्यंजना = कही बात से ऊपर की झलक। वाक्य का भाव पहले। आज शब्द की शक्ति।
गाय घास खाती है। — सीधा; अभिधा। अर्थ वाले विषय की दीवार आज कार्ड।
गंगा पर घर है। — घर पानी की धारा पर नहीं; किनारा लक्ष्य; लक्षणा।
प्रश्न: सीधा बैठता, सीधा अटकता लक्ष्य माँगता, या ऊपर झलक? फिर कार्ड चुनो। होशियार जेब।
जाँच: सीधा? गाय घास। किनारा लक्ष्य? गंगा पर घर। पशु न बैठे व्यक्ति पर सिंह? लक्षणा। सूरज डूबा और संध्या झलक? व्यंजना। विधि वाक्य? अर्थ पहले।
2. 4 कार्ड एक नज़र में
एक गाय घास खाती है रटकर सूरज डूब गया गायब मत करो। 3 शक्ति, चार झलक, एक कुर्सी।
| कार्ड | शक्ति | काम |
|---|---|---|
| गाय घास खाती है | अभिधा | सीधा अर्थ |
| गंगा पर घर है | लक्षणा | सीधा अटका; किनारा लक्ष्य |
| वह सिंह है | लक्षणा | व्यक्ति पर; साहस लक्ष्य |
| सूरज डूब गया | व्यंजना | सीधा भी; ऊपर संध्या/अंत |
जाओ, तुम होशियार हो। — तारीफ उलट, व्यंग्य = उलट तारीफ — जेब, छोटे नहीं। व्यंजना परिवार। पाँचवाँ कार्ड नहीं।
जाँच: सीधा? अभिधा। लक्ष्य सीधा अटके? लक्षणा। ऊपर झलक? व्यंजना। उलट तारीफ? जेब।
3. भाव से नाता — वाक्य अर्थ बनाम शब्द शक्ति
अर्थ वाले विषय में वह पढ़ता है विधि — वाक्य क्या कहना चाहता है। आज शब्द कैसे अर्थ देता है। दो काट, एक पंक्ति चल सकती।
गाय घास खाती है। — विधि भाव पहले; अभिधा शक्ति आज।
गंगा पर घर है। — विधि फिर; लक्षणा आज, सीधा नहीं बैठा।
उद्देश्य वाले विषय में लक्ष्य शब्द हित/किसके बारे में नहीं। आज लक्ष्य = लक्षणा का अर्थ। दो शब्द, दो कुर्सियाँ। विश्लेषण टुकड़े पहले; आज अर्थ-काम।
जाँच: सादा बात? अर्थ पहले। सीधा शब्द? आज। उद्देश्य टुकड़ा? पहले, यह घर नहीं।
4. गाय घास खाती है — अभिधा
कार्ड का पहला। शब्द अपने मुख्य अर्थ पर। गाय जानवर, घास खाती — अटक नहीं।
गाय घास खाती है। — अभिधा।
यह नीला कमल है। — परिवार; कार्ड गाय घास खाती है। नीलकमल समास पहले एक फूल; आज सीधा अर्थ।
पद परिचय वाले विषय में गाय संज्ञा लेखा; आज शक्ति अभिधा। विकार पहले; अर्थ-काम आज।
जाँच: सीधा बैठे? अभिधा आज। नीलकमल घर? समास पहले। गाय विकार? पद परिचय पहले।
5. गंगा पर घर है — लक्षणा
कार्ड का दूसरा। सीधा: घर धारा के ऊपर। वह नहीं चलता। लक्ष्य: किनारे पर घर। मुख्य अटके तो लक्षणा।
गंगा पर घर है। — लक्षणा; किनारा।
प्यास से मर रहा हूँ। — पानी चाहिए, मृत्यु नहीं; परिवार, कार्ड गंगा पर घर। सूची मत बढ़ा।
समास विग्रह गंगा + घर नहीं। जोड़ ध्वनि/अर्थ पद पहले; आज शक्ति। उपमा चंद्रमुख कर्मधारय वाले विषय की जेब — अलंकार नाम यहाँ मत खोलो।
जाँच: किनारा लक्ष्य? लक्षणा आज। गंगा + घर विच्छेद? नहीं। अभिधा घर धारा पर? नहीं बैठी।
6. वह सिंह है — लक्षणा
कार्ड का तीसरा। व्यक्ति पर कहा। पशु अभिधा नहीं बैठती। लक्ष्य: साहसी। गुण पर लक्षणा।
वह सिंह है। — व्यक्ति; लक्षणा; साहस।
जंगल में सिंह है। — पशु; अभिधा परिवार, कार्ड गाय घास। यह कार्ड नहीं।
कुर्सी पूछो: जानवर सच, या गुण लक्ष्य? जंगल में अभिधा; व्यक्ति पर लक्षणा। दो वाक्य, दो शक्ति। नया विकार नहीं।
जाँच: व्यक्ति सिंह? लक्षणा आज। जंगल सिंह? अभिधा। साहस को अलंकार कहना? नहीं, आज शक्ति।
7. सूरज डूब गया — व्यंजना
कार्ड का चौथा। सीधा भी सच — सूरज डूबा, अभिधा चल सकती। ऊपर झलक: संध्या, दिन ढला, कभी अवसर गया। व्यंजना = कही बात से ऊपर की झलक।
सूरज डूब गया। — व्यंजना; संध्या/अंत की झलक।
दीपक रात भर जला। — परिवार; जागना/पढ़ना झलक; कार्ड सूरज डूब गया।
विस्मय वाह! अर्थ वाले विषय में झटका वाक्य। व्यंजना शब्द की ऊपर परत, विस्मय घर नहीं। विश्लेषण मुख्य-आश्रित पहले; आज अर्थ की परत।
जाँच: ऊपर झलक? व्यंजना आज। सूरज सच अभिधा भी? चल सकती, परत अलग। वाह विस्मय? अर्थ पहले।
8. जेब — जाओ, तुम होशियार हो — व्यंग्य = उलट तारीफ
तारीफ उलट। सीधा होशियारी अभिधा लगे; स्थिति में व्यंग्य — उलट तारीफ, मूर्ख ठहराया। व्यंजना परिवार। कार्ड नहीं — नाम जेब।
जाओ, तुम होशियार हो। — व्यंग्य झलक; जेब।
आज्ञा बैठो अर्थ वाले विषय में हुक्म; आज जाओ पुल, शक्ति व्यंजना। पाँचवाँ कार्ड नहीं। मुहावरा इस कोर्स का पाठ नहीं — लक्षणा छू सकती, घर मत खोलो।
जाँच: उलट तारीफ? जेब व्यंग्य। सूरज डूब गया? कार्ड चौथा। आज्ञा भाव? अर्थ पहले।
9. जो आज का घर नहीं
| रूप | कुर्सी |
|---|---|
| विधि निषेध प्रश्न विस्मय | अर्थ — पहले; वाक्य भाव |
| किसके बारे में | उद्देश्य — पहले |
| मुख्य आश्रित | विश्लेषण — पहले |
| नीलकमल एक फूल | समास — पहले; अभिधा परिवार |
| चंद्रमुख जैसा | उपमा जेब — पहले; अलंकार नहीं |
| गाय संज्ञा लेखा | पद परिचय — पहले |
3 शक्ति आज। सौ काव्य रटना नहीं। अलंकार, रस, छंद इस कोर्स में नहीं।
जाँच: सीधा/लक्ष्य/झलक? आज। अलंकार? नहीं। विस्मय वाक्य? पहले।
10. दीवारें — अलंकार, साहित्य
| बात | आज नहीं |
|---|---|
| उपमा, रूपक — इस कोर्स में नहीं | अलंकार — इस कोर्स में नहीं |
| रस छंद काव्य | साहित्य — इस कोर्स में नहीं |
आठ विकार शब्द पर पहले से। आज शब्द की तीन शक्ति। व्याकरण पाठ यहीं थमता।
जाँच: चार कार्ड आज। अलंकार? नहीं। और व्याकरण पाठ? नहीं।
11. वाक्य में 4 कार्ड + जेब
अरे! गाय घास खाती है; गंगा पर घर है; वह सिंह है; सूरज डूब गया।
- अरे — विस्मयादिबोधक, अटल
- गाय घास खाती है — अभिधा
- गंगा पर घर है — लक्षणा; किनारा
- वह सिंह है — लक्षणा; साहस
- सूरज डूब गया — व्यंजना
चार कार्ड बैठे। जाओ, तुम होशियार हो इस कतार में नहीं — जेब, व्यंग्य।
12. शब्द तोड़कर पूरा
अभिधा
गाय घास खाती है। जंगल में सिंह परिवार। नीला कमल परिवार।
लक्षणा
गंगा पर घर है किनारा। वह सिंह है व्यक्ति साहस। प्यास से मर रहा हूँ परिवार।
व्यंजना
सूरज डूब गया संध्या झलक। दीपक रात भर परिवार।
जेब
जाओ, तुम होशियार हो। व्यंग्य।
दीवार
अलंकार, रस, छंद, मुहावरा पाठ। विधि भाव पहले।
गाय घास खाती है, गंगा पर घर है, वह सिंह है, सूरज डूब गया — चार कार्ड; सीधा, किनारा, साहस, झलक।
13. आम गलतियाँ
- गाय घास खाती है लक्षणा। सीधा बैठे तो अभिधा।
- गंगा पर घर अभिधा घर धारा पर। सीधा अटका; किनारा लक्षणा।
- गंगा पर घर = गंगा + घर विच्छेद। संधि-समास पहले; आज शक्ति।
- जंगल का सिंह और व्यक्ति सिंह एक कुर्सी। पशु अभिधा; व्यक्ति लक्षणा।
- सूरज डूब गया सिर्फ़ अभिधा। सीधा चल सकता; व्यंजना ऊपर परत।
- व्यंजना = विस्मय वाह। झटका अर्थ पहले; आज शब्द की झलक।
- लक्ष्य = उद्देश्य। किसके बारे में पहले; आज लक्षणा का अर्थ।
- जाओ तुम होशियार हो पाँचवाँ कार्ड। जेब व्यंग्य।
- उपमा लक्षणा एक। चंद्रमुख जेब पहले; अलंकार यहाँ नहीं।
- विधि और अभिधा एक। वाक्य भाव पहले; शब्द शक्ति आज।
- मुहावरा आज का पाठ। कोर्स व्याकरण; घर मत खोलो।
- नया विकार गिनना। आज 3 शक्ति, शब्द का काम।
जाँच: (1) सीधा / लक्ष्य अटके / ऊपर झलक। (2) कार्ड: गाय घास खाती है, गंगा पर घर है, वह सिंह है, सूरज डूब गया। (3) होशियार जेब। (4) अलंकार नहीं। (5) वाक्य भाव पहले।
14. इस विषय का सार
- अभिधा सीधा अर्थ। लक्षणा सीधा न बैठे तो लक्ष्य अर्थ। व्यंजना कही बात से ऊपर की झलक। नया विकार नहीं।
- कार्ड: गाय घास खाती है अभिधा, गंगा पर घर है लक्षणा किनारा, वह सिंह है लक्षणा साहस, सूरज डूब गया व्यंजना।
- जंगल सिंह अभिधा। व्यक्ति सिंह लक्षणा। सूरज सीधा भी चल सकता।
- होशियार जेब व्यंग्य। विधि भाव पहले। विश्लेषण टुकड़े पहले।
- अलंकार इस कोर्स में नहीं। व्याकरण पाठ यहीं पूरे।
व्याकरण के ये पाठ यहीं पूरे हैं। सूची पर चार अंग खुले हैं।
अभ्यास
नीचे लिखकर या मन में उत्तर दो। फिर उत्तर खोलकर मिलाओ।
1. शब्द शक्ति क्या है? कार्ड के 4 लिखो। नया विकार है?
उत्तर
शब्द सीधा, लक्ष्य या ऊपर की झलक कैसे देता है। अभिधा सीधा अर्थ; लक्षणा सीधा न बैठे तो लक्ष्य; व्यंजना ऊपर की झलक। गाय घास खाती है अभिधा, गंगा पर घर है लक्षणा, वह सिंह है लक्षणा, सूरज डूब गया व्यंजना। नहीं — 3 शक्ति, विकार शब्द पर पहले से।
2. गंगा पर घर है अभिधा है? जंगल में सिंह है और वह सिंह है एक शक्ति हैं?
उत्तर
नहीं — घर धारा पर नहीं बैठता; किनारा लक्षणा। नहीं — जंगल पशु अभिधा; व्यक्ति साहस लक्षणा।
3. सूरज डूब गया सिर्फ़ अभिधा है? व्यंजना विस्मय वाक्य है?
उत्तर
नहीं — सीधा चल सकता; व्यंजना ऊपर संध्या/अंत। नहीं — वाह झटका अर्थ वाले विषय में; आज शब्द की परत।
4. जाओ तुम होशियार हो पाँचवाँ कार्ड है? लक्ष्य आज उद्देश्य है?
उत्तर
नहीं — जेब; व्यंग्य, व्यंजना परिवार। नहीं — उद्देश्य वाले विषय में किसके बारे में; आज लक्षणा का अर्थ।
5. उपमा आज का घर है? मुख्य-आश्रित आज तोड़ना है?
उत्तर
नहीं — अलंकार इस कोर्स में नहीं; चंद्रमुख कर्मधारय वाले विषय की जेब पहले। नहीं — वाक्य विश्लेषण वाले विषय में।
विषय समाप्त · शब्द शक्ति — अभिधा, लक्षणा, व्यंजना
